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Books Online - Upanyas - Black Hole CH-4 प्रेमी युगल

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स्टेलाके घरके गेटके सामने डॅनियल अबभी अपनी बाईकपर बैठकर सुझानकी राह देख रहा था. डॅनियल कॉलेजमें जानेवाला एक इक्कीस बाईस सालका फॅशनेबल युवक था. वह अपनी गाडी लगातार रेज कर रहा था और गाडीके सायलेन्सरसे धुव्वा बाहर निकल रहा था. इतनेमें डॅनियलको जल्दी जल्दी बाहर आती हूई सुझान दिखाई दी. उसने उसकी तरफ देखतेही दोनों की नजरें मिल गई. दोनोंभी एकदुसरेकी तरफ देखकर मिठेसे मुसकाए.

सुझान नजदिक आतेही डॅनियलने हेलमेट सरमें पहनकर उसका बकल लगाया और बाया पैर ब्रकपर जोरसे दबाकर ऍक्सीलेटर जोरसे बढाया. जैसेही सुझान उसके पिछे बाईकपर बैठने लगी डॅनियलने गियर डाला और ब्रेक छोडते हूए पैर उपर उठाया.

'' रुक ... रुक... तूम पागल तो नही हो ... मुझे पहले ठिकसे बैठने तो दोगे..'' सुझान गुस्सेसे बडबडाने लगी.

डॅनियलने पिछे मुडकर देखा और एकदम बाईकका ब्रेक दबाया. सुझानकी उससे टक्कर होकर उसके सामनेके दातोंको उसकी हेलमेट लग गई.

'' उं...'' दर्दसे कराहते हूए उसने अपना हात लगाकर अपने सामनेके दांत टटोले.

'' ओह ... आय ऍम सॉरी'' डॅनियल क्षमा याचना करने लगा.

'' तुम्हे पता है ... तुम कितने लापरवाह हो... मुझे तो कभी कभी अचरज होता है की मै तुम्हारे प्यारमें कैसे पड गई ..'' सुझान चिढकर बोली.

'' आय ऍम सो सॉरी...'' वह रह रहकर उसकी माफी मांग रहा था.

अब कहां सुझान उसके पिछे बाईकपर ठिकसे बैठ गई, उसने अपने कंधेके उपरसे तिरछी नजरसे पिछे अपने घरकी तरफ देखा. डॅनियल अब उसके इशारेकी राह देखने लगा. वहभी उसकी गाडी आगे लेनेकी राह देखने लगी. आखिर उसने उसका कंधा थपथपाते हूए कहा, '' मि. डॅनियल कॅन्टोर''

डॅनियलने मासूमियतसे पिछे मुडकर देखा, '' क्या ?''

'' मुझे लगता है ... अब हमें निकलना चाहिए डियर..'' वह व्यंगात्मक ढंगसे बोली.

डॅनियलने गियर बदला और ब्रेक छोडते हूए गाडी रास्तेपर तेजीसे दौडाई.

जब गाडी तेजीसे लेकिन संथ गतिसे चलने लगी, डॅनियलने अपने आंखोके किनारेसे सुझानकी तरफ झांका. फिरसे दोनोंकी नजरे मिली और वे एकदुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगे. सुझान धीरेसे उसके एकदम पास खिसक गई और उसने उसे पिछेसे कसकर पकड लिया.


क्रमश:...

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Hindi Fiction Books - Black Hole CH:3 यादोंकी बारात

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रास्तेपर तेजीसे एक कार दौड रही थी. उस कारके ड्रायव्हींग सीटपर जाकोब बैठा हूवा था और उसके बगलवाली सिटपर स्टेला बैठी हूई थी. ट्रॅफीकमेंसे रास्ता निकालते हूए, तेडे मेडे रास्तेसे दाएं बाएं मुडते हूए कार दौड रही थी. कारके कांचसे सामने रास्तेपर देखते हूए स्टेलाने एक दृष्टीक्षेप जाकोबकी तरफ डाला. उसनेभी कार चलाते हूए उसकी तरफ देखा. उससे आंखे मिलतेही झटसे स्टेलाने अपनी नजरें दूसरी तरफ फेर ली और फिरसे सामने रास्तेपर देखने लगी. सामने देखते देखते उसे हालहीमें घटी कुछ घटनाएं याद आने लगी .....


.... गिब्सन अपनी पत्नी स्टेला और बहन सुझानके साथ आज सुबह डायनींग टेबलपर नाश्ता ले रहा था. आधी अधूरी खत्म हूई नाश्तेकी प्लेट्स उनके सामने डायनींग टेबलपर पडी हूई थी. गिब्सन लगभग तिस सालका, घुंगराले और थोडे लंबे बाल, और उसके स्थीर आखोंसे उसकी प्रगल्भता और बुध्दीमता दिख रही थी. उसके गंभीर और स्थिर व्यक्तीत्वसे उसने सालोसाल की मेहनत और पढाई साफ झलक रही थी. वह अपने हाथमे रखे फाईलके पन्ने पलटते हूए बिच बिचमें चमचसे नाश्तेका एक एक निवाला ले रहा था. स्टेला शायद उसकी खाते हूए पढनेकी आदतसे अच्छी तरहसे वाकीफ थी. क्योंकी वह उसे कुछ कहनेके बजाय अपना नाश्ता खानेमे व्यस्त और मस्त थी. दुसरी तरफ सुझानभी भलेही नाश्ता खा रही थी लेकिन वहभी अंदरसे अपनी सोच में डूबी हूई थी.

अपनी फाईलके पन्ने पलटते हूए और बिच बिचमें नाश्तेके निवाले लेते हूए गिब्सनने एक नजर उसकी बहनकी तरफ, सुझानकी तरफ डाली.

'' क्या कॉलेज कैसा है ?'' गिब्सनने अनपेक्षीत ढंगसे उसे पुछा.

सुझान अबभी अपने खयालोंमे डूबी हूई थी. इस अचानक पुछे गए सवालसे वह अपने खयालोंसे बाहर आ गई और गडबडाकर इधर उधर देखने लगी. वह अपने चेहरेपर आए झेंपभरे भाव छिपानेका प्रयत्न करने लगी. लेकिन वह भाव छिपानेके लिए क्या किया जाए उसे कुछ समझमें नही आ रहा था. उसने झटसे एक नाश्तेका बडासा निवाला लिया और वह जल्दी जल्दी चबाकर निगलनेका प्रयास करने लगी.

'' अं.. हां.. मतलब अच्छाही है... '' उसने निवाला गले अटके जैसा जवाब दिया.

उसकी भाभी स्टेला उसकी वह गडबडाई स्थिती देखकर अपनी हंसी रोक नही पाई.

गिब्सनने एक नजर स्टेलापर डाली और फिर सुझानकी तरफ एक कटाक्ष डालते हूए वह अपनी फाईलके पन्ने पलटनेमें फिरसे व्यस्त हो गया.

'' वह तुम्हे कॉलेजके बारेमें पुछ रहा है ... ना की ब्रेकफास्टके बारेमें '' स्टेला सुझानका मजाक उडाते हूए उसे छेडती हूई बोली.

'' हां मै ब्रेकफास्टके बारेमें... नही... मतलब कॉलेजके बारेंमेंही बोल रही हूं '' सुझान अपने आपको संभालते हूए बोली.

फिरसे स्टेला हंसी, इस बार जोरसे.

'' तुम्हारे चेहरेसे वह साफ झलक रहा है की तुम किसके बारेंमें बात कर रही हो '' स्टेला अभीभी उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी.

सुझानने अपने भाईकी तरफ देखा, वह अबभी अपनी फाईल पढनेमें व्यस्त था. वह अपने तरफ देख नही रहा है इसकी तसल्ली करते हूए सुझानने बडी बडी आंखे करते हूए गुस्सेका झूटमूटका अविर्भाव करते हूए स्टेलाकी तरफ देखा और मुंहपर उंगली रखकर 'चूप रहेनेका क्या लोगी' ऐसा अविर्भाव किया.

इतनेमें बाहरसे लगातार एक बाईकका हॉर्न सुनाई देने लगा. सुझानने झटसे खिडकीसे बाहर झांककर देखा. बाहर उसका दोस्त डॅनियल गेटके पास बाईकपर बैठकर खिडकीकी तरफ देखते हूए उसकी राह देख रहा था. दोनोंकी आंखे मिलतेही उसने हॉर्न बजाना बंद किया.

स्टेलाने सुझानकी तरफ मुस्कुराकार देखते हूए एक आंख छोटी करते हूए मजाकमें कहा, '' सुझान तुम्हे नही लगता की तुम्हे देर हो रही है ''

सुझान आधा अधूरा नाश्ता वैसाही डायनींग टेबलपर छोडकर अपने जगहसे उठ गई और अपने गाल पर आई लाली छिपानेका प्रयास करते हूए कॉलेजको जानेकी जल्दी करने लगी.

सुझानने अपनी बुक्स और बॅग उठाई और तेजीसे दरवाजेकी तरफ निकल पडी.

'' बाय स्टेला ... बाय ब्रदर'' वह जाते हूए बोली.

गिब्सनने अपनी फाईल पढते हूए आंखोके किनारेसे उसकी तरफ देखते हूए कहा, '' हां... बाय..''

'' बाय हनी ... टेक केअर '' स्टेला मुस्कुराते हूए उसे चिढाए जैसा करते हूए बोली.

सुझान जाते हूए एकदमसे दरवाजेमें रुक गई, और स्टेलाकी तरफ देखते हूए , मुस्कुराते हूए , उसने एक मुक्का मारनेका 'तुझे बादमें देख लूंगी ' ऐसा अविर्भाव किया और झटसे मुडते हूए तेजीसे चली गई.

स्टेला मुस्कुराते हूए आंखोसे ओझल होने तक सुझानको जाती हूई देखती रही.


क्रमश:...

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Online Books - Hindi Novels - Black Hole / CH:2 जाकोब

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सुबह का वक्त. सुरजके उगनेकी आहट हो चूकी थी. ऐसेमे एक सुंदर हरे हरे हरियालीसे घिरी हूई एक छोटीसी कॉलनी. और उस कॉलनीमें बसे हूए छोटे छोटे आकर्षक मकान. कॉलनीका वातावरण सुबहके उत्साह और मांगल्यसे भरा हुवा था. पंछियोंकी मधूर चहचहाट वातावरणमें मानो औरभी स्फुर्ती भर रही थी. कॉलनीके और कॉलनीके आसपासके हरे हरे पेढ सुबहके हवाके मंद मंद झोंकोके साथ हौले हौले डोल रहे थे.

जैसे जैसे उजाला हो रहा था कॉलनीमें अब कुछ पादचारी दिखने लगे. सुबहके हवाके मांगल्य और ठंडका आस्वाद लेते हूए वह कॉलनीमें घुम रहे थे. कुछ लोग जॉगींग करते हूएभी दिख रहे थे तो कुछ साईकिलेंभी रास्तेपर दौडते हूए दिख रही थी.

उस कॉलनीके छोटे छोटे मकानोंके समुहमें एकदम बिचमें बसा हूवा एक मकान. बाकी मकानोंकी तरह इस मकानके सामनेभी हरे हरे घांस का लॉन उगाया गया था और किनारे किनारेसे छोटे छोटे फुलोंके गमले थे. . वहा उगे हूए फुल मानो एकदुसरेसे स्पर्धा कर रहे थे ऐसा लग रहा था. अचानक एक साईकिल उस मकानके गेटके सामने आकर रुक गई. पेपरवाला लडका था. उसने पेपरका गोल रोल बनाया और निशाना साधते हूए मकानके मुख्य द्वारके सामने फेंक दिया. वह पेपरवाला लडका पेपर फेंककर अब वहासे निकलनेही वाला था इतनेमें गेटके सामने एक कार आकर रुक गई. कारसे एक उंचा, गोरा, जिसका कसा हूवा शरीर था ऐसा आकर्षक व्यक्तीत्व वाला युवक, जाकोब उतर गया. उसकी उम्र लगभग तिसके आसपास होगी. कारसे उतरनेके बाद गेटकी तरफ जाते हूए उसने प्यारसे पेपरवालेके सरके बालोंसे अपना हाथ फेरा. पेपरवालाभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया और अपनी साईकिल लेकर आगे बढा.

मकानके अंदर हॉलमे एक सुंदर लेकिन उतनीही खंबीर यूवती, स्टेला फोनका नंबर डायल कर रही थी. उसकी उम्र लगभग अठ्ठाईसके आसपास होगी. उसका चेहरा नंबर डायल करते हूऐ वैसे गंभीरही दिख रहा था लेकिन उसके चेहरेके इर्दगिर्द एक आभा दिख रही थी. उसके आंखोके आसपास बने घने काले सर्कलसे वह हालहीमें किसी गंभीर चिंतासे गुजर रही होगी ऐसा लग रहा था. उसके बगलमेंही, उसकी ननंद, एक इक्कीस बाईस सालकी कॉलेजमें जानेवाली जवान लडकी, सुझान खडी थी. सुझानभी सुंदर थी और उसमें कॉलेजमें जानेवाली लडकियोंवाला एक अल्लडपण दिख रहा था.

'' कौन? डॉ. फ्रॅकलीन बोल रहे है क्या?'' स्टेलाने फोन लगतेही फोनपर पुछा.

उधरकी प्रतिक्रियाके लिए रुकनेके बाद स्टेला आगे फोनपर बोली, '' मै मिसेस स्टेला फर्नाडीस, डॉ. गिब्सन फर्नाडीसकी पत्नी...''

इतनेमें डोअरबेल बजी. स्टेलाने सुझानको कौन है यह देखनेका इशारा किया और वह आगे फोनपर बोलने लगी, ' नही यह आप लोग जो संशोधन कर रहे थे उसके सिलसिलेमें मै आपसे बात कर रही हूं....''

सुझान अपनी भाभीने इशारा करनेके बाद सामने दरवाजेके पास गई और उसने दरवाजा खोला. सामने दरवाजेमें जोभी खडा था उसे देखकर वह भौचक्कीसी रह गई. दरवाजेमें जाकोब खडा था.

'' तुम? ... उस दिन ..."'

'' मै ... गिब्सनका दोस्त हूं ... स्टेला है क्या अंदर? '' जाकोबने उसका संवाद बिचमेंही तोडते हूऐ पुछा.

सुझानने मुडकर अंदर स्टेलाकी तरफ देखा.

इतनेमें मौकेका फायदा लेते हूए जाकोब अंदर घुस गया. अंदर जाकर वह सिधा स्टेला जहा फोन कर रही थी वहां हॉलमें गया. सुझान दरवाजेमें खडी आश्चर्यसे उसे अंदर जाता देखती रह गई. उसे क्या बोले कुछ सुझ नही रहा था.

स्टेलाका अबभी फोनपर संवाद चल रहा था, '' मै फिरसे कभी फोन कर आपको तकलीफ दूंगी ...''

उधरका संवाद सुननेके लिए बिचमें रुककर उसने कहा, '' सॉरी ... ''

फिरसे वह उधरका संवाद सुननेके लिए रुकी और , '' थॅंक यू '' कहकर उसने फोन रख दिया.

उसके चेहरेसे उसने जिस चिजके लिए फोन किया था उसके बारेंमें वह समाधानी नही लग रही थी. इतनेमें उसका खयाल उसके एकदम पास खडे जाकोबकी तरफ गया. उसने प्रश्नार्थक मुद्रामें जाकोबकी तरफ और फिर सुझानकी तरफ देखा.

'' हाय.. मै जाकोब ... गिब्सनका दोस्त'' जाकोबने वह कुछ पुछनेके पहलेही अपनी पहचान बताई.

'' हाय '' स्टेलाने उसके 'हाय' को प्रतिउत्तर दिया.

इतनेमें स्टेलाका ध्यान उसके कलाईपर बंधे एक चमकते हूए पारदर्शक पत्थरकी तरफ गया. इतना बडा और इतना तेजस्वी चमकता हूवा पत्थर शायद उसने पहली बार देखा होगा. वह एकटक उस पत्थरकी तरफ देख रही थी.

'' हम कभी पहले मिले है ?'' जाकोबने पुछा.

'' मुझे नही लगता '' स्टेलाने जवाब दिया. .

'' कोई बात नही ... मुलाकात यह कभी ना कभी पहलीही होती है ... मुझे लगता है गिब्सनने हमारी पहचान पहले कभी नही करके दी... मतलब वैसा कभी मौकाही नही आया होगा ... '' जाकोबने कहा.

इतनी देरसे हम बात कर रहे है लेकिन मैने उसे बैठनेके लिएभी नही बोला..

एकदम स्टेलाके खयालमें आया.

'' बैठीएना... प्लीज'' वह सोफेकी तरफ निर्देश करते हूए बोली.

जाकोब सोफेपर बैठ गया और उसके सामनेवाले सोफेपर स्टेला बैठ गई ताकी वह उससे ठिकसे बात कर सके.

'' ऍक्चूअली... मुझे तुमसे एक महत्वपूर्ण बात करनी थी '' जाकोबने शुरवात की.

स्टेलाके चेहरेपर उत्सुकता दिखने लगी.

सुझान अबभी वही खडी इधर उधर कर रही थी. जाकोबने अपनी नजरका एक तिक्ष्ण कटाक्ष सुझानकी तरफ डाला. वह जो समझना था समझ गई और वहांसे अंदर चली गई.

फिर उसने काफी समयतक स्टेलाके आंखोमें आंखे डालकर देखते हूए कहा,

'' लेकिन उसके लिए तुम्हे मेरे साथ आना पडेगा '' वह अबभी उसके आंखोमें आखें डालकर देख रहा था.

'' किधर ?'' उसने आश्चर्यसे पुछा.

जाकोब अब उठ खडा हूवा था. उसने कोनेमें टेबलपर रखे स्टेला और गिब्सन, उसके पतीके फोटोकी तरफ गौरसे देखते हूए कहा, '' मुझपर भरोसा रखो .... तुम अभी इतनेमें जिस बातकी वजहसे इतनी परेशान हो .. यह उसीके सिलसिलेमें है ...''

वह अब बाहर दरवाजेकी तरफ जाने लगा.

स्टेला सोफेसे उठ गई और चूपचाप उसके पिछे पिछे जाने लगी.


क्रमश:...

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Hindi Book : Black Hole : CH-1: वह कुंवा

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शामका समय. एक बडी, पुरानी हवेली. सुरज अभी अभी पश्चीम दिशामें अस्त हो चूका था और आकाशमें अभीभी उसके अस्त होनेके निशान दिख रहे थे. हवेलीके सामने थोडा खाली मैदान था. और उस खाली मैदानके आगे घने पेढ थे. हवा काफी जोरोसे बह रही थी और हवाके झोकोंके साथ वह आसपासके पेढ डोल रहे थे. हवेलीको एकदम सटकर एक संकरा कुंवा था. उस कुंवेके आसपासभी घास काफी उंचाईतक बढ गई थी. इससे ऐसा लग रहा था की वह कुंवा काफी सालसे किसीने इस्तेमाल नही किया होगा. उस हवेलीसे कुछ दुर नजर दौडानेपर पर्बतकी गोदमें एक छोटीसी बस्ती बंसी हूई दिखाई दे रही थी. उस बस्तीके लोग आम तौरपर इस हवेलीकी तरफ नही आते थे.

उस बस्तीका एक निग्रो लडका फ्रॅंक, उम्र कुछ सात-आठ सालके आसपास, काला लेकिन दिखनेमें आकर्षक, अपने बछडेको लेकर घास खिलानेके लिए उस हवेलीके आसपासके खेतमें आया था. उस बछडेका भी उससे उतनाही लगाव दिख रहा था. फ्रॅंकने उसे छेडतेही वह सामने उछलते कुदते दौडता था और फ्रॅंक उसके पिछे पिछे उसे पकडनेके लिए दौडता था. ऐसे दौडते खेलते हूए वह बछडा उस हवेलीके परिसरमें घुस गया. फ्रॅंकभी उसके पिछे पिछे उस परिसरमें घुस गया. उस इलाकेमें घुसतेही फ्रॅंकके शरीरमें एक सिरहनसी दौड गई, क्योंकी इस हवेलीके परिसरमें कभी नही जानेकी उसे घरसे हिदायत थी. लेकिन उसका बछडा सामने उस इलाकेमें प्रवेश करनेसे उसे उसे वापस लानेके लिए जानाही पड रहा था.

वह उस बछडेके पिछे दौडते हूए जोरसे चिल्लाया, '' गॅव्हीन ... रुक''

उसके घरके सब लोग उस बछडेको प्यारसे 'गॅव्हीन' पुकारते थे.

लेकिन तबतक वह बछडा उस इलाकेमें घुसकर, सामने खाली मैदान लांघकर उस हवेलीसे सटकर जो कुंवा था उसकी तरफ दौडने लगा.

'' गॅव्हीन उधर मत जावो ... '' फ्रॅंक फिरसे चिल्लाया.

लेकिन वह बछडा उसका कुछभी सुननेके लिए तैयार नही था.

वह दौडते हूए जाकर उस कुंवेसे सटकर जो पत्थरोका ढेर था उसपर चढ गया.

अब फ्रॅंकको उस बछडेकी चिंता होने लगी थी. क्योंकी उसने बस्तीमे उस कुंवेके बारेमें तरह तरह की भयावह कहानीयां सुनी थी. उसने सुना था की उस कुंवेमें कोई भी प्राणी गिरनेके बाद अबतक कभी वापस नही आया था. और जो कोईभी उस प्राणीको निकालनेके लिए उस कुंवेमे उतरे थे वेभी कभी वापस नही आ पाए थे. इसलिएही शायद बस्तीके लोग उस कुंवेको 'ब्लॅक होल' कहते होंगे. फ्रॅंक अपने जगहही रुक गया. उसे लग रहा था की उसके पिछे दौडनेसे वह बछडा आगे आगे दौड रहा हो. और अगर वह ऐसाही आगे भागता रहा तो वह उस कूंवेमें जरुर गिर जाएगा. .

फ्रॅंक भलेही रुक गया फिरभी वह पत्थरोंके ढेरपर चढ चूका बछडा निचे उतरनेके लिए तैयार नही था. उलटा वह ढेरपर चलते हूए उस ब्लॅकहोलके इर्दगिर्द चलने लगा.

फ्रॅंकको क्या किया जाए कुछ समझमें नही आ रहा था. उसने वही रुके हूए आसपास अपनी नजरें दौडाई. उस हवेलीकी उंची उंची पुरानी दिवारें और आसपास फैले हूई घने पेढ. उसे डर लगने लगा था. अबतक उस हवेलीके बारेंमे और उस ब्लॅकहोलके बारेंमें उसने सिर्फ सुन रखा था. लेकिन आज पहली बार वह उस इलाकेमें आया था. लोगोंके कहे अनुसार सचमुछ वह सब भयावह था. बल्की लोगोंसे सुननेसेभी जादा भयावह लग रहा था. लेकिन वह अपने प्रिय बछडेको अकेला छोडकरभी नही जा सकता था. अब धीरे धीरे चलते हूए फ्रॅंक उस कुंवेके पास जाकर पहूंचा. फ्रॅंक उस कुंवेके एक छोरपर था तो वह बछडा दुसरे छोरपर अबभी उस पत्थरोंके ढेर पर चल रहा था. इतनेमे उसने देखा की उस पत्थारोके ढेर पर चलते हूए उस बछडेके पैरके निचेसे एक पत्थर फिसल गया और ढूलकते हूए कुंवेमें जा गिरा.

'' गॅव्हीन... '' फ्रॅंक फिरसे चिल्लाया.

इतना बडा पत्थर उस कुंवेमें गिरनेपरभी कुछभी आवाज नही हूवा था. फ्रॅंकने कुंवेके किनारे खडे होकर निचे झांककर देखा. निचे कुंवेमें कुछ दूरी तक कुंवेकी दिवार दिख रही थी. लेकिन उसके निचे ना दिवार, ना पाणी ना कुंवेका तल, सिर्फ काला काला, ना खतम होनेवाला खाली खाली अंधेरा. शायद यहभी एक कारण था की लोग उस कुंवेको 'ब्लॅकहोल' कहते होंगे. अचानक उसने देखा की फिरसे उस बछडेके पैरके निचेसे और एक पत्थर फिसल गया और ढूलकते हूए कुंवेमें जा गिरा. लेकिन यह क्या इस बार उस पत्थरके साथ वह बछडाभी कुंवेमें गिरने लगा.

'' गॅव्हीन...'' फ्रॅंकके मुंहसे निकल गया.

लेकिन तबतक वह पत्थर और वह बछडा दोनों कुंवेमे गिरकर उस भयावह काले काले अंधेरेमे गायब हो गए थे. ना गिरनेका आवाज ना उनके अस्तित्वका कोई निशान.

फ्रॅंक डरसा गया. उसे क्या करे कुछ सुझ नही रहा था.

वह कुंवेमें झुककर वह बछडा दिखाई देगा इस आशामें देख रहा था और जोर जोरसे चिल्लाकर रो रहा था , '' गॅव्हीन ... गॅव्हीन...''


काफी देर तक फ्रॅंक वहा कुंवेके किनारेसे अंदर झांककर देखते हूवे रोता रहा. रोते रोते आखिर उसके आंसु सुख गए. अब उसे मालूम हो चूका था की उसका प्रिय गॅव्हीन अब कभीभी वापस नही आएगा. अब अंधेराभी होने लगा था और उस हवेलीका परिसर उसे अब जादाही भयानक लगने लगा था. अब वह वहांसे कुंवेके किनारेसे उठ गया और भारी कदमोंसे अपने घरकी तरफ वापस जानेने लिए निकला.


फ्रॅंक हवेलीसे थोडीही दुरीपर पहूंचा होगा जब उसे पिछेसे किसी बात की आहट हो गई. एक डरभरी सिरहन उसके शरीरसे दौड गई. वह जल्दी जल्दी लंबे लंबे कदमसे, वहांसे जितना जल्दी हो सके उतना, बाहर निकलनेकी कोशीश करने लगा. इतनेमें उसे पिछेसे एक आवाज आ गया. वह एक पलके लिए रुक गया.

यह तो अपने पहचानका आवाज लग रहा है ...

बडी धैर्यके साथ उसने पिछे मुडकर देखा.

और क्या आश्चर्य उसके पिछेसे उसका बछडा 'गॅव्हीन' 'हंबा' 'हंबा' करता हूवा उसे आवाज लगाता हूवा दौडते हूए उसकीही तरफ आ रहा था.

उसका चेहरा खुशीसे खिल गया.

'' गॅव्हीन... '' खुशीसे उसके मुंहसे निकल गया.

लेकिन यह कैसे हूवा ?...

यह कैसे हूवा इससे उसे कोई लेना देना नही था. उस पलके लिए उसका प्रिय बछडा उसे वापस मिला था इससे जादा उसे और किसी बातकी चिंता नही थी. उसने अपने हाथ फैलाकर अपने बछडेको अपनी बाहोंमे भर लिया और प्यारसे वह उसे चुमने लगा.


क्रमश:...

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Black Hole - The next Hindi Mystery suspense Novel to be published.

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Black Hole

Genre:- Horror, Mystery, Suspense

Logline:- Following the mysterious disappearance of her husband, Stella Fernandez is led by a supposed friend of her missing husband's into a mysterious world of interconnecting portals which turn out to be black holes that transcend time and reality.


The novel would be based on my screenplay 'Black Hole' registered with FWA Mumbai.

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Two back to back Hindi Novels at reader's disposal

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Till Now two Hindi novels are completed on this blog posted in blog / episode manner. These novels are posted in blog / episode forms in 3 languages at the same time, i,e English, Hindi and Marathi.

The links to these novels in respective languages are as follows -

English Novels

Marathi Novels

Seeing the readers tremendous response I am planning to post further more novels in episode manner.

The statistics (Consolidated) of the readership is as follows.

Per day page views - 4000-5000 daily

Daily email subscribers - around 500

Email referals = approx 15 per day

Page views till today - 2.30 Lakhs (Since Last 5 months)

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Some Selected Comments about the Novel Ad-Bhut

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Comments link

Anonymous said...
Khupach Chan. Tumhi parvangi dili tar ek suggestion hota "Ti manjari khun kashi karaychi he jar sangitala asta tar ajun thriller vatla asta". Tari sudha khup chan. Ata pudchychi vat pahatoy.

Madhu (mad_hu)

June 18, 2008 12:34 PM


Anonymous said...
Very very interesting novel..
Eagarly waiting for Sunil's next novel.

June 18, 2008 2:23 PM


Anonymous said...
Hi Sunil,

Katha farach chaan hoti...eka cinema chi story pan hou shakel.

Mukhya mhanje mala aadhichya kathe-peksha (Shoonya) sheval jaast aawadala.

Lihine thambau naka.

Khup Khup Shubhecha

Pudhil kathechi waat pahato ahe.

June 18, 2008 9:34 PM


archana said...
khup sunder lihile aahe tumhi.

keep it up.

June 19, 2008 1:00 PM


Anonymous said...
Fantastic

June 20, 2008 5:40 PM


ajay limhan said...
far chhan aahe ashich suspence aajun ek suru kara
thanks..............

June 21, 2008 10:15 AM


SAMEER said...
katha ekdam chan aahe, mi aataparyant anek katha vaachlya pan he kadambari mala khup aawadali ashach katha punha liha

June 21, 2008 3:04 PM


sheetal shinde said...
mastach hoti

June 21, 2008 4:42 PM


Anonymous said...
Desperately waiting for your new suspence novel. Sunil, request you to get the new one as earliest.
regards,

June 23, 2008 11:30 AM


Sheetal Garude said...
Hi Sunil,

Eagerly waiting for your new novel. Pls publish your new suspence novel as earliest.
Best regards...

June 24, 2008 10:48 AM


Mahendra said...
Dear Sunilji,

Tumchya donhi kadambarya wachlya. Donhi phar phar avadlya. Divsachi survat tumchya kadambarichya chapter ne vhaychi. Pudhil kadambarichi vaat pahat aahe.

June 24, 2008 12:30 PM


Anonymous said...
far interesting novel hota.
Keep it up.
Wish you all the best for next novel.

June 26, 2008 2:18 PM


Anonymous said...
Dear Sunil,
Novel was too good. Shunya was also very interesting. Waiting for your next novel.

June 27, 2008 8:43 PM


Neesha said...
Atishi sundar katha. Atach katha pahili ani start to end vachali. Tahan bhuk visrun. Sunil tumhi atishay sunder katha lihili aatet. Pratyek patra agdi dolyasamor ubhe rahte. End atishai vegla, chhanch.
Mi ya pudhehi tumchya katha nakki vachin asach interest gheun. ALL THE BEST.

June 28, 2008 3:29 PM


Nilesh Gore said...
Shunya n Ad-bhut kathechi chapters upload zali ki lagech wachun mokla zalo... Aata next novelchi waat pahtoy. Please lovekar navin novel upload kara ho, Sunildada.. :)

July 1, 2008 4:42 PM


nayana said...
khoop mast aahe.keep it up....

July 9, 2008 3:52 PM

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अद्-भूत - Hindi horror, suspense, thriller Complete Novel

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Hindi Online Novel - Ad-Bhut CH 53 दो बडे बडे आंसू (समाप्त)

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अब थोडीही देरमें ऍंथोनीको डेथ चेंबरमें इलेक्ट्रीककी चेअरपर बिठाकर देहांतकी सजा दी जानी थी. डिटेक्टीव सॅम, सजा देनेवाला अधिकारी, एक डॉक्टर और एक-दो ऑफिसर्स डेथ चेंबरके सामने खडे थे.. इतनेमें दो पुलिस अधिकारी हथकडीयां पहने स्थितीमें ऍंथोनीको वहा ले आये. देहांतकी सजा देनेकी जिस अधिकारीपर जम्मेदारी थी, उसने अपने घडीकी तरफ देखा और पुलिस अधिकारीको इशारा किया. पुलिस ऑफिसर्स ऍंथोनीको इलेक्ट्रीक चेअरकी तरफ ले गए.

'' ऑपेरटर किधर है '' उसमेंसे एक अधिकारीने पुछा.

एक आदमी तुरंत सामने आया. और इलेक्ट्रीक चेअर ऑपरेट करनेके पॅनलके पास गया. पुलिसके जो लोग ऍंथोनीको इलेक्ट्रीक चेअरके पास ले गए थे उन्होने उसे अब उस चेअरपर इलेक्ट्रीक बिठाया. काले कपडेसे उसका चेहरा ढंका गया. फिर वे पुलिस इलेक्ट्रीक चेअर चेंबरसे बाहर आ गए और उन्होने चेंबर बंद कर दिया.

मुख्य अधिकारीने पॅनलके पास खडे ऑपरेटरकी तरफ देखा. ऑपरेटर पॅनलके पास एकदम तैयार खडा था. फिरसे वह अधिकारी अपनी घडीकी तरफ देखने लगा. शायद उसकी उलटी गीणती शुरु हो गई थी.

भलेही उन लोगोंको वह हमेशाका था फिरभी वातावरणमें थोडा तनाव स्पष्ट दिखने लगा. अचानक उस अधिकारीने ऑपरेटरको इशारा किया.

ऑपरेटरने एक पलकीभी देरी ना करते हूए इलेक्ट्रीक चेअर पॅनलपर एक लाल बटन दबाया.

थोडी देरमें ऑपरेटर 'काम तमाम होगया' इस अंदाजमें उस अधिकारीके तरफ देखने लगा.

'' डॉक्टर '' उस अधिकारीने डॉक्टरको पुकारा.

डॉक्टर झटसे इलेक्ट्रीक चेअर चेंबरके पास गया, चेंबर खोला और अंदर चला गया.

'' सर ही इज डेड'' अंदरसे डॉक्टरका आवाज आगया.

वह अधिकारी एकदमसे मुड गया और वह जगह छोडकर वहांसे चला गया. वह ऑपरेटर वहीं बगलमें एक कमरेमें चला गया. वहा बाजुमेंही खडा एक स्टाफ मेंबर उस चेंबरमें, शायद चेंबर साफ करनेके लिए घुस गया. सबकुछ कैसे किसी मशिनकी तरह चल रहा था. उन सबको भलेही वह हमेशाका हो फिरभी जॉनके लिए वह हमेशा होनेवाली बाते नही थी. वह अबभी वही खडा एक एक चिज और एक एक हो रही बातें ध्यानसे निहार रहा था.

अब डॉक्टरभी वहांसे चला गया.

वहां सिर्फ सॅम अकेलाही बचा. वह अबभी वहां चूपचाप खडा था, उसके दिमागमें शायद कुछ अलगही चल रहा हो.

अचानक कोई जल्दी जल्दी उसके पिछेसे वहां आगया.

'' अच्छा.... हो गया है शायद '' पिछेस आवाज आया.

सॅमने मुडकर पिछे देखा और उसका मुहं आश्चर्यसे खुला का खुला ही रह गया. उसके सामने ऑपरेटर खडा था.

ये तो अभी अभी पॅनल ऑपरेट कर उस बगलके कमरेमे गया था...

फिर अभीके अभी ये इधर किधरसे आगया...

'' मुझे चिंता थी की मेरी अनुपस्थीमें पॅनल कौन ऑपरेट करेगा... '' वह ऑपरेटर बोला.

'' बाय द वे किसने ऑपरेट किया पॅनल?'' उस ऑपरेटरने सॅमको पुछा.

सॅमको एक के बाद एक आश्चर्यके धक्के लग रहे थे. .

सॅमने बगलके कमरेकी तरफ देखा.

'' किसने ऑपरेट किया मतलब ?... तुमनेही तो ऑपरेट किया '' सॅमने अविश्वासके साथ कहा.

'' क्या बात करते हो ?... मै तो अभी अभी यहां आ रहा हूं ..'' उस ऑपरेटरने कहा.

सॅमने फिरसे चौंककर उसकी तरफ देखा और फिर उस बगलके कमरेकी तरफ देखा जिसमें वह थोडी देर पहले गया था.

'' आवो मेरे साथ ...आवो '' सॅम उसे उस बगलके कमरेकी तरफ ले गया.

सॅमने उस कमरेका दरवाजा धकेला. दरवाजा अंदरसे बंद था. उसने दरवाजेपर नॉक किया. अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अब वह दरवाजा जोर जोरसे ठोकने लगा. फिरभी अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. सॅम अपनी पुरी ताकदके साथ उस दरवाजेको धकेलने लगा. वह संभ्रममे पडा ऑपरेटरभी अब उसे धकेलनेमें मदद करने लगा.

जोर जोरसे धकेलकर और धक्के देकर आखिर सॅमने और उस ऑपरेटरने वह दरवाजा तोडा.

दरवाजा टूटतेही सॅम और वह ऑपरेटर जल्दी जल्दी कमरेमें घुस गए. उन्होने कमरेमें चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. कमरेमे कोई नही था. उन्होने एक दुसरेकी तरफ देखा. उस ऑपरेटरके चेहरेपर संभ्रमके भाव थे तो सॅमके चेहरेपर अगम्य ऐसे डरके भाव दिख रहे थे.

अचानक उपरसे कुछ निचे गिर गया. दोनोंने चौंककर देखा. वह एक काली बिल्ली थी, जिसने उपरसे छलांग लगाई थी. वह बिल्ली अब सॅमके एकदम सामने खडी होगई और एकटक सॅमकी तरफ देखने लगी. वे आश्चर्यसे मुंह खोलकर उस बिल्लीकी तरफ देखने लगे. धीरे धीरे उस काली बिल्लीका रुपांतर नॅन्सीके सडे हूए मृतदेहमें होने लगा. उस ऑपरेटरके तो हाथपैर कांपने लगे थे. सॅमभी बर्फ जम जाए ऐसा एकदम स्थिर और स्तब्ध होकर उसके सामने जो घट रहा था वह देख रहा था. धीरे धीरे उस सडे हूए मृतदेह का रुपांतर एक सुंदर, जवान तरुणीमें हो गया. हां, वह नॅन्सीही थी. अब उसके चेहरेपर एक सुकून झलक रहा था. देखते देखते उसके आंखोसे दो बडे बडे आंसू निकलकर गालोंपर बहने लगे और धीरे धीरे वह वहांसे अदृष्य होकर गायब होगई.


समाप्त


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In the prison cell CH 52 Horror Suspense thriller - Ad-Bhut

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डिटेक्टीव सॅम कारागृहमें ऍंथोनीके सामने बैठा था. डिटेक्टिव सॅमको कैसे बात शुरु करे कुछ समझमें नही आ रहा था. आखिर उसने कहा, '' मुझे इतने दिनोंसे एक सवालका जवाब नही मिल रहा था की वह सब नॅन्सीने मुझेही क्यों बताया ?''

'' नॅन्सी? ... आप क्या बोल रहे हो ... वह तो मर गई''

'' हां यह थोडी अजिब और अद्भूत बात है ... लेकिन उसकी रुह अभीभी जिंदा है '' सॅमने कहा.

'' डिटेक्टीव सॅम ... आप यह क्या बोल रहे हो ... आप मेरा मजाक तो नही उडा रहे हो ?''

'' नही मै जो कुछ बोल रहा हूं, जो कुछ बता रहा हूं, वह सब मैने अनुभव किया हूवा है ... तुम्हारा इसपर यकिन ना करना लाजमी है ... मुझेभी शुरु शुरुमें यकिन नही हूवा था...'' सॅमने कहा.

सॅम इतनी गंभीरतासे बोल रहा है यह देखकर ऍंथोनीने वह क्या बोलता है यह पहले ठिकसे सुननेका फैसला किया.

'' तुम्हे जब कोर्टमें जजने सजा सुनाई तब मुझे पता चला की नॅन्सीने वह सब बतानेके लिए मुझे क्यों चुना?'' सॅमने कहा.

'' क्या बतानेके लिए ?'' ऍंथोनीने पुछा.

'' की तुमनेही उन चार लोगोंको नॅन्सीका और जॉनका पता दिया. ''

'' नही मैने नही दिया '' ऍंथोनीने अपना बचाव करनेकी कोशीश की.

'' झूट मत बोल '' सॅमने आवाज चढाकर कहा.

ऍंथोनीने अपनी गर्दन झुकाई.

अब छूपानेमें क्या मतलब है ?...

सजा तो मुझे हो चूकी है ...

'' लेकिन यह सब तुम्हे कैसे पता चला ?'' ऍंथोनीने पुछा.

'' मुझे नॅन्सीने बताया '' सॅमने कहा.

'' लेकिन वहतो मर गई '' ऍंथोनीने आश्चर्यसे कहा.

'' उसकी रुहने ... उसके भूतने मुझे बताया '' सॅमने कहा.

ऍंथोनी उसकी तरफ अविश्वाससे देख रहा था.

'' उसने मुझे इसलिए बताया की मेरे जरिये तुम्हे यह सब पता चले की जोभी सब कत्ल हो चूके है... वे असलमें उसने, नॅन्सीने किये थे... और वे खुन तुमने किये ऐसा सिर्फ आभास उसने तैयार किया था..... और उस कत्लके लिए तुम्हे जो सजा हो रही है ... वह नॅन्सीकीही इच्छा है और इस तरहसे उसने तुमपरभी अपना बदला लिया है ...''

'' ऐसा कैसे हो सकता है ... वे सब कत्ल मैने मेरे बिल्लीके सहारे... वह इलेक्टॉनिक्स, वायरलेस ट्रान्समिशन सब मैने बनाया था... '' ऍंथोनीने सॅमको विश्वास देनेकी कोशीश करते हूए कहा.

'' लेकिन जब मैने तुम्हारा वह इलेक्टॉनिक्स, वायरलेस ट्रॉन्समिशन जांचकर देखा तब वह वेअरहाऊसके दरवाजेके बाहरतकभी काम नही कर पा रहा था... तो फिर उन चारोंके घरोंतक वह सिग्नल्स पहूंचनेका सवालही नही आता '' सॅमने कहा.

'' इतनाही नही तो उसने ऐसी कुछ बाते मुझे बताई की वह तुम्हारे अलावा और किसीकोभी पता नही है...' सॅमने कहा.

'' जैसे ?'' ऍंन्थोनीने पुछा. .

'' जैसे ... नॅन्सी और जॉनने, जब वे चार लोग उनके पिछे पडे हूए थे और वे ड्रेनेज पाईपमें छूपे थे, तब उन्होने तुझे फोन किया वह ... बादमें तुमने उन्हे कोई टॅक्सी पकडकर हिल्टन हॉटेल जानेके लिए कहा वह... .. और तुमने उनका किया हूवा विश्वासघात... दो- दो हजार डॉलर्स हरएकके पास लेनेके बदले तुमने उन चारोंको दिया हूवा उनका पता... और तुम जब पैसे लेनेके लिए गये थे तब उन्होने तुम्हे इस केसमें अटकानेकी दी धमकी ... '' सॅम एक एक कर सब उगल रहा था.

अब ऍंथोनी मुंह और आंखे फाडकर आश्चर्यसे और डरसे सॅमकी तरफ देख रहा था. एक के बाद एक आश्चर्यके धक्के उसे मिल रहे थे. वह सोचने लगा.

यह जो सब जानकारी उसने दी थी वह उसके अलावा और किसीको मालूम होनेका कोई सवालही पैदा नही होता था. ..

फिर यह बाते सॅमको कैसे पता चली ?..

दुसरी एक महत्वपुर्ण बात यह थी की फोन कर उन चार लोगोंको नॅन्सी और जॉनका पता बतानेकी बात सॅमको कैसे पता चली ...

और अब उसके कहे अनुसार सिग्नल ट्रान्समिशन दरवाजेके बाहरतकभी नही पहूंच पा रहा था...

ऍंथोनी अब गहन सोचमें पड गया.

उसे सॅम जो कह रहा था उसमें सच्चाई नजर आ रही थी...

लेकिन यह कैसे मुमकीन है ? ...

ऍंथोनी भूतप्रेतमें कभी यकिन नही करता था.

उसे अहसास हो रहा था की जाने अनजानेमें उसका शरीर कांप रहा है.

'' आप जो कह रहे हो, यह अगर सच माना जाए .... तो नॅन्सीने डायरेक्ट उन चार लोगोंको और फिर बादमें मुझे, ऐसा क्यो नही मारा ... इतना नाटक करनेकी क्या जरुरत थी ...'' अबभी ऍंथोनीका दिल नही मान रहा था.

'' उसने ऐसा क्यो किया ? यह वही जाने... लेकिन यह सच है की उसनेही उन चार लोगोंको मारकर तुम्हे उनके कत्लके इल्जाममें फंसाया है... '' सॅमने कहा.

ऍंथोनी अब एकदम खामोश और गंभीर हो गया था. कत्लका एक एक प्रसंग उसके आंखोके सामनेसे जाने लगा. और हर प्रसंगमें अब उसे नॅन्सीकी अदृष्य उपस्थीतीका अहसास होने लगा था.

'' लेकिन मुझे एक बात नही समझमें आती... की तुमने कोर्टमें नॅन्सीका बदला लेनेके लिए उनको जानसे मारा ऐसा झुठ क्यों कहा?'' सॅमने आखिर उसकी दुखती रगपर हाथ रखा था.

ऍंथोनी गंभीर था, वह और गंभीर हो गया. अब उसकी आंखोमें आंसू आने लगे थे.

उसने सॅमका हाथ अपने हाथमें लिया और उसके संयमका बांध टूट गया. वह उसके हाथपर अपना सर रखकर फुटफुटकर रोने लगा.

'' उसका कत्ल हो ऐसी मेरी बिलकुल इच्छा नही थी. ... लेकिन उन हरामजादोंने उसे जानसे मार दिया... मैने नॅन्सीको प्रपोज किया और उसने इनकार किया था ... इसलिए उसका गरुर तोडनेकी मैने ठान ली थी... और उस दिन जॉनका फोन आया और वह चान्स मुझे मिल गया... उसका सिर्फ बलात्कार हो और उसका गरुर टूटे इतनीही मेरी इच्छा थी... लेकिन बादमें कुछ अलगही घटनाए घटती गई... उसका खुन हो गया.... उन चारोंने मुझेभी उसमें घसिटनेकी धमकी दी ... इसलिए मैने उन चारोंको खतम करनेकी ठान ली.... और फिर मैने उनका एक एक कर कत्ल किया... '' ऍंथोनी रोते हूए सब बयान कर रहा था.

सॅमको क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था.

थोडी देर बाद ऍंथोनी शांत हो गया.

तब सॅमने फिरसे पुछा, '' लेकिन तुमने कोर्टमें नॅन्सीका बदला लेनेके लिए उन चारोंको मारा ऐसा झूठ क्यो कहा. ?''

फिरसे रोती हुई सुरत बनाते हूए ऍंथोनीने कहा, '' बोलता हूं... लेकिन प्लीज वह तुम्हारे और मेरे बिचमेंही रखीए... और किसीको पता नही चलना चाहिए... ''

'' ठिक है मै किसीको नही बताऊंगा '' सॅमने आश्वासन दिया.

'' मैने नॅन्सीके साथ जो किया वह मेरे घरवालोंको और पुरी दुनियाको पता चला तो मेरी उनके सामने क्या इज्जत रहेगी... अब मुझे फांसी हो रही है ... वह मेरे प्रेमीकाके बदलेके तौर पर किये कत्लके लिए ऐसी भलेही उनको गलत फहमी हो लेकिन आज उनके दिलमें मेरे लिए इज्जत और आदर है... वह इज्जत कमसे कम मेरे मरने तक बरकरार रहे ... और वह आपही कर सकते है ... '' ऍंथोनीने अब सॅमके पैर पकड लिए थे.

सॅमको उसकी ऐसी हिन दिन स्थिती देखकर उसपर तरसभी आ रहा था. उसे क्या किया जाए कुछ सुझ नही रहा था.

लेकिन नही ... कुछभी हूवा हो फिरभी ऍंथोनीने किया हुवा गुनाह माफीके लायक नही है. ....

उसके सरपर रखनेके लिए सामने किया हूवा हाथ उसने वैसाही पिछे खिंच लिया. ऍंथोनीने पकडे हूए उसके पैरभी उसने पिछे खिंच लिए. वह उठ गया और भारी कदमोंसे बाहर जानेके लिए दरवाजेके पास गया. चलते हूए एकदमसे दरवाजेके पास रुक गया और पिछे मुडकर उसने ऍंन्थोनीसे कहा, "" नॅन्सीको तुम्हे एक बात बतानेकी इच्छा है ''

'' कौनसी ?'' ऍंन्थोनीने अपनी आंखे पोछते हूए भारी आवाजमें पुछा.

'' की वह तुम्हे कभीभी माफ नही कर पायेगी ''

सॅम वहांसे तेजीसे, लंबे लंबे कदम भरते हूए निकल गया और ऍंन्थोनी डरके मारे फिके पडे, और मायूस चेहरेसे सॅमको जाता हूवा देखता रहा.


क्रमश:...

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Court Statement : CH 51 Hindi Novel - Ad-Bhut

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डिटेक्टिव्ह सॅम वेअरहाऊसमें अबभी जमिनपर पडा हूवा था. लेकिन अब वह उस ट्रान्स स्टेटसे बाहर आ गया था. उसने झटसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखा. अब कॉम्प्यूटर बंद था. उसने वेअरहाउसमें इधर उधर देखा. अब बाहर सवेरा हो गया था और अंदर वेअरहाऊसमें अच्छी खासी रोशनी आ रही थी. कुछ देर पहले जोर जोरसे बह रहे हवाके झोकेभी थम गए थे. वह अब उठकर खडा हो गया और सोचने लगा. इतनेमें उसका खयाल कुछ देर पहले निचे गिरे हूए फोटो फ्रेमकी तरफ गया. उसने वह फ्रेम उठाई और सिधी कर देखी. वह एक ग्रुप फोटो था. ऍंथोनी और उन चार नॅन्सीके कातिलोंका.

उसे अब एक एक बात एकदम स्पष्ट हो चूकी थी. वह जब निचे पडा हूवा था और उसे जो एक एक दृष्य दिखाई दिया था, शायद नॅन्सीके अदृष्य और अतृप्त रुहको वह उसे बताना था. लेकिन उसे वह बतानेकी जरुरत क्यो पडी थी? वह उसे ना बताए हूएभी नॅन्सी जो चाहिए वह अबतक हासिल करते आई थी और आगेभी हासिल कर सकती थी.

फिर उसने यह उसे क्यो बताया था ?...

जरुर कोई वजह होगी ?...

इसमें उसका जरुर कोई उद्देश होगा ...


ऍंथोनीके केसकी काफी दिनोंसे कोर्टमें कार्यवाही चल रही थी. हर बार सॅम कोर्टमें कामकाजके दौरान हाजिर रहता था और वहा बैठकर सब कार्यवाही सुनता था. इधर केसका कामकाज चलता था और उसके दिमागमें वह एकही सवाल घुमते रहता था की नॅन्सीने वह सब बतानेके लिए उसेही क्यो चुना होगा? और नॅन्सीका वह सब उसे बतानेका क्या मकसद रहा होगा ?

की वह सब कुछ उसने कोर्टमें बयान करना चाहिए ऐसा तो नॅन्सीको अपेक्षीत नही होगा ?...

लेकिन अगर वह सब उसने कोर्टमें बताया तो उसपर कौन विश्वास करनेवाला था ?...

उलटा एक जिम्मेदार डिटेक्टीव्हके मुंहसे ऐसी अंधश्रध्दायुक्त बातें सुनकर लोगोंने उसे न जाने क्या क्या कहा होता...

सिर्फ कहा सुनायाही नही तो उसका आगेका पुरा करीयर सवालोंके और शकके घेरेमें आया होता...

वह सोच रहा था. लेकिन आज उसे विचारोंके जंजालमें नही फसना था. आज उसे कोर्टकी कार्यवाही पुरी तरह ध्यान देकर सुननी थी. क्योंकी आज केसचा नतिजा निकलने वाला था.

आखिर इतनी दिनोंसे घसिटते हूए चल रहे केसके सब जाब जबाब हो चुके थे. सॅमकीभी जबानी हो चूकी थी. उसने जो साबीत किया जा सकता था वह सब बताया था.

आखिर वह वक्त आया था. वह पल आ चूका था जिसकी सारे लोग बडी बेचैनीसे राह देख रहे थे - केसके परिणामकी. सॅम अपने कुर्सीपर बैठकर जज क्या फैसला सुनाता है यह सुननेके लिए जजकी तरफ देखने लगा. वैसे उसके चेहरेपर किसीभी भावका अस्तित्व नही था. कोर्टरुममें उपस्थित बाकी सब लोग सांस रोककर जजका आखरी फैसला सुननेके लिए बेताब थे.

जज फैसला सुनाने लगा -

'' सारे सबुत, सारे जाबजवाब, और खुद मि. ऍंथोनी क्लार्कने दिया स्टेटमेंटकी ओर ध्यान देते हूए कोर्ट इस नतिजेपर पहूंचा है की मि. स्टिव्हन स्मिथ, मि. पॉल रोबर्टस, मि. रोनाल्ड पार्कर और मि. क्रिस्तोफर अंडरसन इन चारोभी कत्लमें मि. ऍंथोनी क्लार्क मुजरीम पाया गया है. उसने वह चारो खुन जानबुझकर और पुरी योजना और सतर्कताके साथ किए है. ''

फैसला सुनानेसे पहले जजने एक बडा पॉज लिया. कोर्टमें उपस्थित लोगोंपर अपनी नजर दौडाई और आगे अपना फैसला सुनाया -

'' ...इसलिए कोर्ट मुजरीम ऍंथोनी क्लार्कको देहांतकी सजा सुनाता है ''

जजने आखरी फैसला सुनाया था. इस फैसलेका जिन चार लोगोंके कत्ल हूए थे उनके रिश्तेदारोंने तालियां बजाकर स्वागत किया तो काफी लोगोंको यह फैसला पसंद नही आया. नॅन्सीका भाई जॉर्ज तो नाराजगी जाहिर करते हूए कोर्टरुमसे उठकर चला गया. लेकिन डिटेक्टीव सॅमके चेहरेपर कोई भाव नही उभरे थे. ना खुशीके ना गमके. लेकिन फैसला सुननेके बाद सॅमको काफी दिनोंसे सतारहे सवालका जवाब मिल गया था.


क्रमश:...

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