जॉनके दिमागमें विचारोकी कश्मकश चल रही थी. अब वह जो फैसला लेनेवाला था उसकी वजहसे होनेवाले सब परिणामोंके बारेमें वह सोच रहा था. नॅन्सीके साथ लायब्ररीमें किए चर्चासे दो-तीन बाते एकदम साफ हो गई थी -
एक तो नॅन्सी भलेही उपरसे ना लगे लेकिन अंदरसे वह बहुत खंबीर और जबान की पक्की है...
वह किसीभी हालमें मुझे नही छोडेगी...
या फिर वैसा सोचेगीभी नही .....
लेकिन अब उसे अपने आपकाही भरोसा नही लग रहा था.
मैभी उसकी तरह अंदरसे खंबीर और पक्का हू क्या ?...
बुरे वक्तमें मेरा उसके प्रती प्रेम वैसाही कायम रहेगा क्या ?...
या बुरे वक्तमें वह बदल सकता है ?..
वह अब खुदकोही आजमा रहा था. वक्तही वैसा आया था की उसे खुदकाही विश्वास नही लग रहा था.
परंतू नही ...
मुझे ऐसा ढिला ढाला रहकर नही चलेगा...
मुझेभी कुछ ठोस फैसला लेना होगा..
और एक बार निर्णय लिया तो फिर बादमें उसके कुछ भी परिणाम हो, मुझे उसपर कायम रहना होगा...
जॉनने आखीर मनही मन एक ठोस फैसला लिया.
अपने कमरेका दरवाजा अंदरसे बंद कर वह उसे जिसकी जरुरत पडेगी वह सारी चिजे अपने बॅगमें भरने लगा.
सबकुछ ठिक तो होगा ना ?...
मुझे मेरे घरवालोंको सब बताना चाहिए क्या ?...
सोचते सोचते उसने अपनी सारी चिजें बॅगमें भर दी.
कपडे वैगेरा बदलकर उसने कुछ बचातो नही इसकी तसल्ली की. आखरी बची हूई एक चिज डालकर उसने बॅककी चैन लगाई. चेनका एक विशीष्ट ऐसा आवाज हूवा. उसने वह बॅग उठाकर सामने टेबलपर रख दी और टेबलके सामने रखे कुर्सीपर थोडा सुस्तानेके लिए बैठ गया. वह एक-दो पलही बैठा होगा की इतनेमें उसका मोबाईल व्हायब्रेट हो गया. उसने जेबसे मोबाईल निकालकर उसका डीस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसे 'नॅन्सी' ऐसे डिजीटल शब्द दिखाई दिए. वह तुरंत कुर्सीसे उठ खडा हूवा. मोबाईल बंद किया, बॅग उठाई और धीरेसे कमरेसे बाहर निकल गया.
इधर उधर देखते हूए सावधानीसे जॉन मुख्य दरवाजेसे बाहर आ गया और उसने दरवाजा बाहरसे खिंचकर बंद कर लिया. फिर जॉगींग कियेजैसा वह कंधेपर बॅग लेकर कंपाऊंडके गेटके पास गया. बाहर रास्तेपर उसे एक टॅक्सी रुकी हूई दिखाई दी. कंपाऊंड के गेटसे बाहर निकलकर उसने गेटभी खिंचकर बंद कर लिया. टॅक्सीके पास पहूंचतेही उसे टॅक्सीमें पिछली सिटपर बैठकर उसकी राह देख रही नॅन्सी दिखाई दी. दोनोंकी नजरे मिली. दोनो एकदुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. झटसे जाकर वह बॅगके साथ नॅन्सीके बगलमें टॅक्सीमें घुस गया. टॅक्सीके दरवाजेका बडा आवाज ना हो इसका खयाल रखते हूए उसने सावधानीसे दरवाजा धीरेसे खिंच लिया. दोनो एकदुसरेकी बाहोंमे घुस गए. उनके चेहरेपर एक विजयी हास्य फैल गया था.
अब उनकी टॅक्सी घरसे बहुत दुर तेजीसे दौड रही थी. वे दोनो तेजीसे दौडती टॅक्सीके खिडकीसे आरहे तेज हवाके झोकेंका आनंद ले रहे थे. लेकिन उन्हे क्या पता था की एक काला साया पिछे एक दुसरी टॅक्सीमें बैठकर उनका पिछा कर रहा था.....
.... डिटेक्टीव्ह बेकर हकिकत बयान करते हूए रुक गया. डिटक्टीव सॅमने वह क्यों रुका यह जाननेके लिए उसके तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह बेकरने सामने रखा ग्लास उठाकर पाणीका एक घूंट लिया. तबतक ऑफिसबॉयने चाय पाणी लाया था. डिटेक्टीव्हने वह उसके सामने बैठे डिटेक्टीव सॅम और उसके साथ आये एक ऑफिसरको परोसनेके लिए ऑफिसबायको इशारा किया.
क्रमश:...
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण) The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book. You can also Email this Hindi Novel to your friends! |
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उपन्यास - ब्लैकहोल (क्रमशः) The Mystery, Horror, suspense online Hindi Novel based on my english screenplay 'Black Hole' registered with FWA. |
Tuesday, May 6, 2008
Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-15 : फैसला
Posted by
Sunil Doiphode
at
11:41 AM
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