हथकडीयां पहना हूवा और पुलिससे घेरा हूवा ऍंथोनी वेअर हाऊससे बाहर निकला. उसके साथ सब हथीयारसे लेस पुलिस थी क्योंकी वह कोई सादासुदा कातिल ना होकर चार चार कत्ल किया हूवा सिरियल किलर था. पुलिसने ऍन्थोनीको उनके एक गाडीमें बिठाया. डिटेक्टीव्ह सॅम वेअरहाऊसके दरवाजेके पास पिछेही रुक गया. सॅमने अबतक न जाने कितनी कत्लकी केसेस हॅन्डल की थी लेकिन इस केससे वह विचलित हूवा दिख रहा था. कातिलको पकडनेका सबसे महत्वपुर्ण काम तो अब पुरा हो चूका था. इसलिए अब उनके साथ गाडीमें बैठकर जाना उसे उतना जरुरी नही लगा. वह कुछ वक्त अकेलेमें गुजारना चाहता था. और उसे पिछे रुककर एकबार इस वेअरहाऊसकी पुरी छानबिन करनी थी. उसने अपने साथीको इशारा किया,
'' तुम लोग इसे लेकर आगे निकल जावो ... मै थोडीही देरमें वहा पहूंचता हूं '' सॅमने कहा.
जिस गाडीमें ऍंन्थोनीको बिठाया था वह गाडी शुरु हो गई. उसके पिछे पुलिसकी बाकी गाडीयांभी शुरु हो गई, और ऍंन्थोनी जिस गाडीमें बैठा था उसके पिछे तेजीसे दौडने लगी. एक बडा धुलका बवंडर उठा. वे गाडीयां निकल गई फिरभी वह धुलका बवंडर अबभी हवामें फैला हूवा था. सॅम गंभीर मुद्रामें उस धुलके बादलको धीरे धीरे निचे बैठता हूवा देख रहा था.
जैसीही सब गाडीयां वहांसे निकल गई और और आसपासका वातावरण शांत हूवा सॅमने वेअरहाऊसके इर्द गिर्द एक चक्कर लगाया. चलते चलते उसने उपर आसमानकी तरफ देखा. आसमानमें लाली फैल गई थी और अब थोडीही देरमें सुरज उगनेवाला था. वह एक चक्कर लगाकर दरवाजेके पास आ गया और भारी चालसे वेअरहाऊसके अंदर चला गया.
अंदर वेअरहाऊसमें अबभी अंधेरा था. उसने कॉम्प्यूटरके चमक रहे मॉनिटरके रोशनीमें वेअरहाऊसकी अंदर एक चक्कर लगाया और फिर उस कॉम्प्यूटरके पास जाकर खडा हो गया. सॅमने देखाकी कॉम्प्यूटरपर एक सॉफ्टवेअर अबभी ओपन किया हूवा था. उसने सॉफ्टवेअरके अलग अलग ऑपशन्सपर माऊस क्लिक करके देखा. एक बटनपर क्लिक करतेही कॉम्प्यूटरके बगलमें रखे एक उपकरणका लाईट ब्लींक होने लगा. उसने वह उपकरण हाथमें लेकर उसे गौरसे देखा. वह एक सिग्नल रिसिव्हर था, जिसपर एक डिस्प्ले था. उस डिस्प्लेपर एक मेसेच चमकने लगा. लिखा था ' इन सिग्नल रेंज / इन्स्ट्रक्शन = लेफ्ट'. उसने वह उपकरण वापस अपनी जगह रख दिया. उसने और एक सॉफ्टवेअरका बटन दबाया, जिसपर 'राईट' ऐसा लिखा हूवा था.
फिरसे सिग्नल रिसीव्हर ब्लींक हुवा और उसपर मेसेज आया ' इन सिग्नल रेंज / इन्स्ट्रक्शन = राईट'. आगे उसने ' अटॅक' बटन दबाया. फिरसे सिग्नल रिसीव्हर ब्लींक हो गया और उसपर मेसेज आया था ' इन सिग्नल रेंज / इन्स्ट्रक्शन = अटॅक'. सॅमने वह उपकरण फिरसे हाथमें लिया और अब वह उसे गौरसे देखने लगा. इतनेमें उसे वेअरहाऊसके बाहर किसी चिजका आवाज आया. वह उपकरण वैसाही हाथमें लेकर वह बाहर चला गया.
वेअरहाऊसके बाहर आकर उसने आजुबाजु देखा.
यहां तो कोई नही ...
फिर किस चिजका आवाज है ...
होगा कुछ... जानेदो ...
जब वह फिरसे वेअरहाऊसमे वापस आनेके लिए मुडा तब उसका ध्यान अनायासही उसके हाथमें पकडे ब्लींक हो रहे उपकरण की तरफ गया. अचानक उसके चेहरेपर आश्चर्यके भाव उमटने लगे. उस सिग्नल रिसीव्हरपर ' आऊट ऑफ रेंज / इन्स्ट्रक्शन = निल' ऐसा मेसेज आया था. वह आश्चर्यसे उस उपकरणकी तरफ देखने लगा. उसका मुंह खुलाकी खुलाही रह गया. उसके दिमागमें अलग अलग सवालोंने भीड की थी.
अचानक आसपास किसीकी उपस्थीतीसे वह लगभग चौक गया. देखता है तो वह एक काली बिल्ली थी और वह उसके सामनेसे दौडते हूए वेअरहाऊसमें घुस गई थी. एक बार उसने अपने हाथमें पकडे उपकरण की तरफ देखा और फिर उस वेअर हाऊसके खुले दरवाजेकी तरफ देखा, जिससे अभी अभी एक काली बिल्ली अंदर गई थी.
धीर धीरे सावधानीसे उस बिल्लीका पिछा करते हूए वह अब अंदर वेअर हाऊसमें जाने लगा.
जाते जाते उसके दिमागमें एक विचार लगातार घुमने लगा की अगर वेअरहाऊसके बाहरतकभी सिग्नल जा नही सकता है तो फिर जो चार लोगोंके कत्ल हूए उनके घरतक सिग्नल कैसे पहूंचा ?'
क्रमश:...
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Tuesday, June 17, 2008
Hindi Novels - अद-भूत / Aghasth CH 43 सिग्नल रिसीव्हर / Signal Receiver
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:03 AM
Labels: books, ebooks, emagazines, hindi blogs, hindi kavita, hindi lyrics, hindi mati, hindi news, hindi people, hindi portals, hindi sites, hindi songs, hindi tv, mumbai
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