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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-13 : प्रेम का बिज

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धीरे धीरे जॉन और नॅन्सी एकदूसरेके नजदीक खिंचते चले गए. उनके दिलमें कब प्रेमका बिज पनपना शुरु होगया उन्हे पता ही नही चला. झगडेसेभी प्रेमकी भावना पनप सकती है यह वे खुद अनुभव कर रहे थे. कॉलेजमे कोई पिरियड खाली होने पर वे मिलते. कॉलेज खत्म होनेपर मिलते. लायब्रीमें पढाईके बहानेसे मिलते थे. मिलनेका एक भी मौका वे छोडना नही चाहते थे. लेकिन सब छिप छिपकर चल रहा था. उन्हेने उनका प्रेम अभीतक किसीके खयालमें आने नही दिया था. लेकिन जो किसीके खयालमें नही आये उसे प्रेम कैसे कहे? या फिर एक वक्त ऐसा आता है की प्रेमी इतने बिन्दास हो जाते है की उनका प्रेम किसीके खयालमें आयेगा या किसीको पता चलेगा इस बातकी फिक्र करना वे छोड देते है. लोगोको अपना प्रेम पता चले ऐसी सुप्त भावनाभी शायद उनके मनमे आती हो.

काफी रात हो चूकी थी. अपनी बेटी अभीतक कैसे घर वापस नही आई यह चिंता नॅन्सीके पिता को खाये जा रही थी. वे बेचैन होकर हॉलमें चहलकदमी कर रहे थे. वैसी उन्होने नॅन्सीको पुरी छूट दे रखी थी. लेकिन ऐसी गैर जिम्मेदाराना वह कभी नही लगी थी. कभी देर होती तो वह घर फोन कर बताती थी. लेकिन आज उसने फोन करनेकीभी जहमत नही उठाई थी. इतने सालका उसके पिताका अनुभव कह रहा था की मामला कुछ गंभीर है.

नॅन्सी किसी गलत संगतमें तो नही फंस गई?...

या फिर ड्रग्ज वैगेरेकी लत तो नही लगी उसे ?...

अलग अलग प्रकारके अलग अलग विचार उनके दिमागमें घुम रहे थे. इतनेमें उन्हे बाहर कोई आहट हूई.

एक बाईक आकर घरके कंपाऊंडके गेटके सामने रुकी. बाईकके पिछेकी सिटसे नॅन्सी उतर गई. उसने सामने बैठे जॉनके गालका चूंबन लिया और वह गेटके तरफ निकल दी.

घरके अंदरसे, खिडकीसे नॅन्सीके पिता वह सब नजारा देख रहे थे. उनके चेहरेसे ऐसा लग रहा था की वे गुस्सेसे आगबबुला हो रहे थे. अपनी बेटीको कोई बॉय फ्रेंड है यह उनको गुस्सा आनेका कारण नही था. कारण कुछ अलग ही था.

हॉलमे सोफेपर नॅन्सीके पिता बैठे हूए थे और उनके सामने गर्दन झुकाकर नॅन्सी खडी थी.

'' इन ब्लडी एशीयन लोगोंके अलावा तुम्हे दूसरा कोई नही मिला क्या? '' उनका गुस्सेसे भरा गंभीर स्वर गुंजा.

नॅन्सीके मुंहसे शब्द नही निकल पा रहा था. वह अपने पितासे बात करनेके लिए हिंम्मत जुटानेका प्रयास कर रही थी. उतनेमे नॅन्सीका भाई जॉर्ज कोलीन्स, उम्र लगभग तिस के आसपास, गंभीर व्यक्तीमत्व, हमेशा किसी सोचमें खोया हूवा, ढीला ढीलासा रहनसहन, घरमेंसे वहा आ गया. वह नॅन्सीके बगलमें जाकर खडा हो गया. नॅन्सीकी गर्दन अभीभी झूकी हूई थी. उसका भाई बगलमें आकर खडा होनेसे उसमें थोडा ढांढस बंध गया. वह गर्दन निचेही रखकर अपनी हिम्मत जुटाकर एक एक शब्द तोलमोलकर बोली, '' वह एक अच्छा लडका है ... आप उसे एक बार मिल तो लो ''

'' चूप बैठो ... मुरख .. मुझे उससे मिलनेकी बिलकूल इच्छा नही. .. अगर तुम्हे इस घरमें रहना है तो तुम मुझे दुबारा उसके साथ दिखनी नही चाहिए... समझी '' उसके पिताने अपना अंतिम फैसला सुना दिया.

नॅन्सीके आंखोमें आंसू आगए और वहा से अपने आंसू छिपाते हूए वह घरके अंदर दौड पडी. जॉर्ज सहानुभूतीसे उसे अंदर जाते हूए देखता रहा.

घरमें किसीकीभी पिताजीसे बहस करनेकी हिम्मत नही थी.

जॉर्ज हिम्मत जुटाकर उसके पिताजीसे बोला, , '' पप्पा... आपको ऐसा नही लगता की आप थोडे जादाही कठोर हो रहे हो .... आपने कमसे कम नॅन्सी क्या बोलना चाहती है यह तो सुनना चाहिए... और एक बार वक्त निकालकर उस लडकेसे मिलनेमे क्या हर्ज है.?''

'' मै उसका बाप हूं... उसका भला बूरा मेरे सिवा और कौन जान सकता है?.. और तुम्हारी नसिहत तुम्हारे पास ही रखो... मुझे उसके तुम्हारे जैसे हूए हाल देखनेकी बिलकुल इच्छा नही है... तुमनेभी एक एशीयन लडकीसे शादी की थी... आखिर क्या हूवा?... तुम्हारी सब प्रॉपर्टी हडप कर उसने तुम्हे भगवान भरोसे छोड दिया..'' उसके पिताजी तेजीसे कदम बढाते हूए गुस्सेसे कमरेसे बाहर जाने लगे.

'' पप्पा आदमीका स्वभाव आदमी-आदमीमें फर्क लाता है... ना की उसका रंग, या उसका राष्ट्रीयत्व...'' जॉर्ज उसके पिताजीको बाहर जाते हूए उनकी पिठकी तरफ देखकर बोला.

उसके पिताजी जाते जाते अचानक दरवाजेमें रुक गए और उधर ही मुंह रखते हूए कठोर लहजेमें बोले, ''

'' और तुम्हे उसकी पैरवी करनेकी बिलकुल जरुरत नही... और ना ही उसे सपोर्ट करनेकी ''

जॉर्ज कुछ बोले इसके पहलेही उसके पिताजी वहांसे जा चूके थे.

इधर नॅन्सीके घरके बाहर अंधेरेमें खिडकीके पास छिपकर एक काला साया अंदर चल रहा यह सारा नजारा देख और सुन रहा था.


क्रमश:...

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