उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है.
उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
You can also Email this Hindi Novel to your friends!
उपन्यास - ब्लैकहोल (क्रमशः)
The Mystery, Horror, suspense online Hindi Novel based on my english screenplay 'Black Hole' registered with FWA.

Friday, April 4, 2008

Ch-66B : झीरो मिस्ट्री (शून्य-उपन्यास) Hindi

रिपोर्टरोंके सवालोंका तांता शुरु हो गया.

" यह डॉ. कयूम कौन है? "

" विनय जोशी और उसका आपसमें क्या संबंध है?"

" वे किस ऑरगनायझेशनके तालूकात रखते थे?"

" दोनोभी एकसाथ कैसे मारे गये? कमसे कम एक तो जिवित रहना चाहिए था"

" पुलिस कुछ छिपानेका प्रयास तो नही कर रही है?"

" दोनोंको मारकर यह केस खत्म हूवा ऐसा कैसे मान ले?"

" यह आतंकवाद अब किस हद तक जायेगा?"

" हिंदू आतंकवाद! यह और एक नया आतंकवाद? "

" वन अॅट अ टाईम प्लीज " जॉनका आत्मविश्वाससे भरा स्वर गुंजा.

उसके आवाजसे सब लोग थोडे शांत होगए.

" आज मेरे पास इस केससे सबंधीत सारे सवालोंके जवाब तैयार है. इसलिए थोडा धीरज रखो और वैसेभी अब केस खतम होनेसे मै एकदम खाली हूं ... मुझेभी कोई जल्दी नही है.. " आज पहली बार जॉन पत्रकारोंके सामने खुलकर बोल रहा था.

पत्रकारोंमे थोडी हंसी की लहर दौड गई. मौहोल थोडा हंसी मजाकका बन गया.

एक रिपोर्टर सवाल पुछनेके लिए सामने आया.

" मुझे लगता है हिंदू आतंकवादसे अमरिकाका पहली बार सामना हो रहा होगा. इसे कितने गंभीरतासे लेना चाहिए.? "

जॉन बोलने लगा -

" यह 'झीरो मिस्ट्री' कोई मामूली घटना ना होकर अमरिकाके इतिहासमें पहली बार दुष्मनने सोच समझकर और चालाकीसे रची हूई एक चाल है. इस घटनाके तहतक जाकर हमें जो तथ्योंका पता चला है वह सारे तथ्य आपके सामने रखनेसे आपको यह बात पता चल जायेगी.

तथ्य क्रमांक 1 - इस 'झीरो मिस्ट्री' का हिंदू आतंकवाद या हिंदू धर्मसे कोई दुरकाभी वास्ता या संबध ना होकर जानबुझकर वैसा आभास तैयार किया गया है.

तथ्य क्रमांक 2 - 'झीरो मिस्ट्री' का जनक 'डॉ. कयूम खान' किसीभी हिंदू ऑर्गनायझेशनसे संबंधित ना होकर उसका सिधा सिधा संबंध 'लष्करे कायदा' इस आतंकवादी ऑर्गनायझेशनसे आता है. यह ऑर्गनायझेशन 'लष्करे तोयबा' या 'अल कायदा' इन आतंकवादी और प्रतिबंधीत ऑर्गनायझेशनका आयसोटोप हो सकती है और ये लोग उनके हस्तक हो सकते है. उनका काम करनेका तरीका और उनके ऑर्गनायझेशनका उगम देखते हूए यह बाते ध्यानमें आती है.

तथ्य क्रमांक 3 - 'झीरो मिस्ट्री' मसलेको हम प्रॉक्सी आतंकवाद कह सकते है. उनका उद्देश भारत और अमेरिकाके सुधरते संबंध, उनका अण्वस्त्र करार, उनकी एक दुसरे पर निर्भर आर्थिक परिस्थिती देखते हूए इन दो देशोमें दरार बनाकर दोनो देशोंको आर्थिक हानी पहूचाना था.."

जॉनने एक दीर्घ सांस लेकर फिर आगे बोलने लगा -

" इसलिए मै सारी दुनियाको तुम पत्रकारोंके जरीये फिरसे बताना चाहता हू की 'झीरो मिस्ट्री' यह हिंदू आतंकवाद ना होकर वैसा आभास तैयार किया गया था... आप लोग अमेरिकन हो या हिन्दोस्तानी हो ... इस आभास के झासें मे नही आना चाहिए... इसमे नुकसान दोनोंका है ... जितना अमेरिकाका उतनाही हिन्दोस्तानकाभी.'

" लेकिन इंटरनेटपर एक ऑडीओ रिलीज की गई थी उसका क्या? ... उससे तो अलग ही मतलब निकलता है...'' एक रिपोर्टरने बिचमेंही पुछा.

फिरसे जॉन बोलने लगा.

" वह एक भारतीय लोगोंको अमेरिकन लोगोंके खिलाफ और अमेरिकन लोगोंको भारतीय लोगोंके खिलाफ भडकानेकी एक साजिश थी और दुर्भाग्यसे वे लोगे उसमें कामयाब भी हूए थे'

" लेकिन इस 'झीरो मिस्ट्री' से अमरिकाको क्यो नुकसान होगा?...मुझे नही लगता की इससे जानमालका जो थोडाबहुत नुकसान हूवा वह छोडकर अमेरीकाको दुसरा कोई नुकसान हो सकता है... "

" उन लोगोंने जैसे इस शहरमें 'झीरो मिस्ट्री' खुनी शृंखला पुरी कर सारी अराजकता मचा दी थी. .. वैसीही अमेरिकाके अन्य बडे शहरोमें 'झीरो मिस्ट्री' खुनी शृंखला चलानेका उनका मनसुबा था. .... सौभाग्यसे हमने उनको उसमें कामयाब नही होने दिया है ... इस सब घटनाक्रममें उपर उपर से ऐसा लगता है की अमेरीकाका उसमें कोई नुकसान नही ...लेकिन सोचसमझकर देखनेके बाद पता चलता है की ... आजके स्थितीमें भारत यह एकमेव ऐसा देश है की जिनके लोग यहां बडे पैमानेपर जॉबके लिए आए हूए है... उनमेंके कुछ लोगोंको अमेरिकन नाकरीकत्वभी मिल चूका है... इन लोगोंको अगर एक साथ भडकाकर उनको नुकसान पहूचाया या फिर उनको सिर्फ निष्क्रीयभी किया तो अमेरिकेमें बडे पैमानेपर काम बंद होगा और परिणामत: अमेरिकाके इकॉनॉमीपर उसका जरुर गलत असर पडेगा. .... उसी तरह आज अमेरिकाकी काफी कंपनीयां भारतमें निवेश कर चूकी है... वहा भारतमेंभी अगर उनके खिलाफ प्रतिकूल परिस्थिती निर्माण हो गई तो उसका सिधा असर उन कंपनीयोंको ... और परीणामत: अमेरिकाकी इकॉनॉमीपर होने वाला है. "

" और इस 'झीरो मिस्ट्री'से भारतका किस तरहका नुकसान होगा?" एक भारतीय मूलके पत्रकारने पुछा. "काफी लोगोंको पता होगा या उन्होने सुना होगा ... की 90 के दशकमें एक वक्त ऐसा आया था की भारतीय अर्थव्यवस्था पुरीतरह ढहनेके कगार पर थी... तब परकीय चलन पानेके लिए रिजर्व बॅकको आखरी उपायके तौर पर बडे पैमानेपर आरक्षित किया हूवा सोना बेचना पडा था. .... लेकिन उस वक्त भारतीय अर्थव्यवस्थाको जो गती मिली थी वह एनआरआय लोगोंके भारतमें किये निवेशकी वजहसे. ... और इस तरह परकीय चलनकी जो कमी थी वह पूरी हो गई थी... उस वक्त एक अच्छी बात भी हूई की ... धीरे धीरे उनकी सॉफ्टवेअर इंडस्ट्रीभी समृध्दीकी ओर बढने लगी थी ... आगे चलकर भारत अमेरिका और वहांके सॉफ्टवेअर कंपनीके लिए आऊट सोर्सीग करने लगा.. .. आजभी ऐसे हालात है की भारतीय अर्थव्यवस्था बडे पैमानेपर आऊट सोर्सीगपर निर्भर है... यह 'झीरो मिस्ट्री' मसला अगर और बिगड गया तो भारतका आऊटसोर्सीग और विदेशी कंपनीयोंका भारतमें निवेश रुक जाएगा... और परीणाम स्वरुप भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह गडबडा जाएगी... कोई माने या ना माने ....आज के स्थितीमें भारत और अमेरिकाका रिश्ता एकदूसरेका हाथ पकडकर आगे चलनेका है... इस रिश्तेमें अगर दरार आ जाये तो हानी दोनोंकोभी भूगतनी पडेगी ... "

जॉनने किसी अर्थतज्ञकी तरह भारतीय और अमेरिकन अर्थव्यवस्थाका तर्कसंगत विश्लेषण किया.

" लेकिन सिर्फ डॉ. कयूम या विनय जोशी सरीके लोगोंको मारकर या पकडकर क्या इस समस्याका समाधान होनेवाला है ?"

एक रिपोर्टरने सवाल पुछा.

"नही ... दुर्भाग्यसे इसका जवाब 'नही' ऐसा है ...क्योकी भारत और अमेरिकामें दरार बनाना उस ऑर्गनायझेशनकी एक कोशीश थी... और डॉ. कयूम क्या या फिर विनय जोशी क्या ये तो उनके हाथके सिर्फ खिलौने थे.... भविष्यमें ऐसे औरभी प्रयास हो सकते है... फर्क सिर्फ इतनाही रहेगा की उस वक्त डॉ. कयूम या विनय जोशीकी जगह दुसरा कोई होगा.. ."

" फिर अब इस सबका हल क्या है ?" एक रिपोर्टरने अगला सवाल पुछा.

" इसका हल एकही है ... की अमेरिकन , भारतीय अमेरिकन और भारतीय लोगोंने अपनी सद्विवेक बुध्दी सही सलामत रखकर इस सबमें छिपी हूई चाल और तीव्रता समझ लेना जरुरी है.. और उन्हे तुरंत सारे दंगाफसाद रोकने चाहिए... अगर वैसा नही हुवा तो दुष्मन अपने इरादोंमें पुरी तरह कामयाब हुये जैसा होगा... अगर हमनें आपसमेंही दंगाफसाद किये तो वह अपनेही पैर पर कुलाडी मारने जैसा होगा... और फिर हमें अपने पतनसे कोई नही बचा पाएगा... अब वक्त आ गया है की लोगोंने होशीयार और सतर्क होना चाहिए... किसीकेभी भडकाने या बहलावेमें ना आकर खुदकी आखे खुली रखकर खुदके सद्विवेक बुध्दीसे खुदके निर्णय लेनेका अब वक्त आया है..."

अब रिपर्टरोंके सवाल उस एक घटनासे संबंधित ना रहकर आतंकवाद इस जागतिक मुद्देपर होने लगे थे. इसलिए जॉनने अब प्रेस कॉन्फरंन्स समेटकर वहांसे निकलना ही बेहतर समझा. क्योकी आतंकवादपर बोलना यह कोई प्रेस कॉन्फरन्स का हेतू नही था. और उस विषयपर भाष्य करना जॉनको उचीत नही लग रहा था. जिस केसपर जानकारी देनेके लिए यह प्रेस कॉन्फरंन्स बुलाई गई थी वह पुरी जानकारी जॉनने दी थी.

"इस तरह सब लोगोंपर सौंपकर पुलिस कैसे क्या अपने कर्तव्यसे मुंह मोड ले सकते है.?... उनकीभी लोगोंके प्रती कुछ जिम्मेदारीयां बनती है.." एक रिपोर्टरने व्यंग और कटूतासे कहा.

वहांसे निकलनेके लिये जॉन मुडनेही वाला था, रुककर बोला,

" मैने ऐसा कभीभी नही कहा... पुलिसको उनका कर्तव्य तो है ही... और वे उसको तत्परतासे निभाएंगे... लेकिन आतंकवाद यह सिर्फ एक घटना ना होकर वह एक फेनॉमेनॉ है ... उसमें आम लोगोंपर जादा जिम्मेदारीयां होती है... वह जिम्मेदारीयां वे निभाएंगे इतनीही हमारी उनसे अपेक्षा है..."

जॉन थोडी देर रुका और बोला,

"अब मुझे लगता है .... की इस घटनासे संबंधित सारी जानकारी मैने आपके सामने जैसी थी वैसी पुरी तरहसे रखी है... थँक यू"

जॉन पलटकर प्रेस कॉन्फरंन्ससे बाहर जानेके लिए निकला. जाते वक्तभी रिपोर्टरोंकी भीड उसे सवाल पुछनेके लिए बिचबिचमें आ रही थी. जो उसके साथ थे उन पुलिसने उसे उस भिडसे रास्ता बनाते हूए बाहर उसके गाडीतक पहुचनेमें उसकी मदत की.

क्रमश:...

0 comments:

Enter your email address to SUBSCRIBE the Hindi Novels:

आप HindiNovels.Net इस अंतर्जाल पर आनेवाले

वे आगंतुक है

Marathi Subscribers

English Subscribers

Hindi Subscribers

Next Hindi Novels - Comedy, Suspense, Thriller, Romance, Horror, Mystery

1. करने गया कुछ कट गयी साली मुछ (कॉमेडी)
2. मधूराणी (the story of femine power)
3. सायबर लव्ह (लव्ह, सस्पेन्स)
4. अद-भूत (हॉरर, सस्पेंन्स थ्रीलर)
5. मृगजल (लव्ह ड्रामा, सायकॉलॉजीकल थ्रीलर)
6. फेराफेरी (कॉमेडी)
7. लव्ह लाईन (लव्ह, कॉमेडी, सस्पेन्स)
8. ब्लॅकहोल (हॉरर, मिस्ट्री, सस्पेन्स)

About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.