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Ch-48: ओके देन कॉल द मिटींग (शून्य-उपन्यास)

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बॉसके सामने सॅम बैठा था. वह केसके बारेमे बॉसको ब्रीफ कर रहा था. बॉसने जॉनकी सब जिम्मेदारी उसे दी थी. बॉस हमेशाकी तरह रिलॉक्स बैठा सिगारके कश भर रहा था.

इतनेमें वहा पियून आ गया.

बॉसके सामने एक चिठ्ठी रखते हूए बोला,

" साहब, जॉनसाहब आये हूए है "

" जॉन....साहब ..."

'साहब' इस शब्दके उपर जरुरत से जादा जोर देनेसे बॉसके बोलनेका उपरोध स्पष्ट झलक रहा था.

बॉसने चिठ्ठी खोली.

चिठ्ठीमें लिखा था -

" सिरियल किलर केसकी बहुत महत्वपुर्ण जानकारी मेरे हाथ आई है ... इसलिये आपको तत्काल मिलना है.

बॉसने चिठ्ठीके उपरसे चेहरेपर बिना कोई भाव लाये एक नजर घुमाई.

सॅमके सामने चिठ्ठी सरकाते हूए बॉस बोला,

" जब दिए लगाने थे तब तो नही लगाये ... अब ये क्या तिर मारनेवाले है...?"

सॅमने चिठ्ठीपर एक नजर डाली.

अचानक कुर्सीपर सिधा बैठते हूए बॉसने पियून को फर्माया ,

" सेंड हिम इन"

पियून जल्दीसे बाहर गया और बादमे जॉन अंदर आया.

" हॅलो जॉन, हाऊ आर यू?" बॉस उसे सामने कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए बोला.

जॉन कुछ ना बोलते हूए सामने कुर्सीपर बैठ गया.

" हॅलो जॉन"

" हॅलो सॅम"

जॉन और सॅममें कमसे कम शब्दोका आदान प्रदान हूवा. दोनोंको अटपटासा लग रहा था.

" यस ... व्हाट कॅन वुई डू फॉर यू?"

बॉस एकदम किसी अनजानकी तरह उससे बात कर रहा था.

" सर, आय हॅव अॅन इंपॉर्टंंट इनफॉरमेशन रिगाडीर्ंंग नेक्स्ट पॉसिबल मर्डर"

" बट अॅज ऑल नो यू आर राईट नाऊ डिस्मीस्ड "

जॉन कुछ नही बोला.

" देन व्हाय शुड यू शेअर द इंन्फारमेशन विथ अस"

" सर देखीए , यह जो जानकारी है उसका आपके डिपार्टमेंटल पॉलिटीक्सके साथ कोई लेना देना नही है. यहा पब्लीकके जिने मरनेका सवाल है. मै अगर इस जानकारी के सहारे अकेला कुछ कर सकता था तो आपके पास कभी नही आता. "

जॉनके शब्दोमें उसका उसके बॉसपरका रोष स्पष्ट झलक रहा था.

बॉसने सामने रखे अॅश ट्रेमे सिगार मसल दी और मुस्कुराते हूवे बोला , " इसे कहते है रस्सी जल गई लेकीन बल नही गया . ऐनीवे क्या जानकारी है तुम्हारे पास ?"

" अगला कत्ल किसका होनेवाला है इसकी पॉसीब्लीटी है मेरे पास " जॉनने कहा.

सॅम चूप था, कभी वह जॉनकी तरफ देखता तो कभी बॉसकी तरफ.

बॉसने जोरसे ठहाका लगाया.

" पॉसीब्लीटी!"

" सर धीस इज नॉट सम काइन्ड ऑफ अ जोक"

बॉसने अपना हंसना रोका.

" देखो , इस शहरमें लगभग 75 हजार मकान है. उसमेंकेही किसी एक मकानमें अगला कत्ल होनेवाला है.. यह पॉसीब्लीटी बतानेके लिए एक मुरखभी काफी है.

" अगला खून जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होगा. "

बॉसने फिरसे ठहाका लगाया.

" इज धीस सम काईन्ड ऑफ वर्ड पझल"

इतनी देरसे चूप्पी साधे बैठा हूवा सॅम हिम्मत करके बोला.

"सर मुझे लगता है... वुई शुड लिसन थरोली व्हाट हि वांट टू से"

सॅम बिचमें बोला हूवा बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रह था. .

" ओ... हो... सॉरी ... मै तो पुरी तरह भूल गया की यह केस तूम हॅन्डल कर रहे हो..." बॉसने उसे ताना मारा.

" सर, मेरा मतलब ... आखीर आपही हमारे बॉस हो... मैनेतो सिर्फ सलाह दी थी ... आखीर क्या डीसीजन लेना है वह आपकाही अधिकार है... ..." सॅम शर्मींदा होकर बोला.

बॉसका 'इगो' सॅटिसफाय हूवा ऐसा लग रहा था. .

बॉस एकदम सिरीयस होगया. कॅबीनमें सन्नाटा छा गया. बॉसने नई सिगार सुलगाई और कुर्सीपर रेलते हूए बोला,

" ओ के देन कॉल द मिटींग"

क्रमश:..

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Ch-47: यस्स ! (शून्य-उपन्यास)

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अँजेनी कॉफी लेकर आयी. जॉन अभीभी काम्प्यूटरपर काम कर रहा था. उसने एक कॉफीका कप धीरेसे, उसे डीस्टर्ब ना हो इसका खयाल रखते हूए, उसके सामने रख दिया.

अपने कपसे एक घूंट लेते हूए वह बोली , " क्या कुछ मिला ? "

उसके बोलनेके दो उद्देश थे. एकतो उसके सामने रखे कॉफीके कपकी तरफ उसका ध्यान जाए और दुसरा सचमुछ उसे कुछ मिला की नही यह जानना.

जॉनने पहले अँजेनीकी तरफ और फिर कॉफीकी कपकी तरफ नजर डाली. और आजूबाजू कुछ ढूंढनेजैसा देखने लगा.

" क्या चाहिए ? " अँजेनीने पुछा.

" कोई कागज, नोटबूक या कुछ लिखनेके लिए है क्या ? "

अँजेनी हॉलमें गई. जॉनने उसके सामने रखे कॉफीका एक घूंट लिया और कॉफीका कप फिरसे वही वापस रखते हूए वह फिर अपने काममे व्यस्त हूवा. इतनेमें अँजेनी एक डायरी लेकर वहा आ गई. उसने वह डायरी खोलकर जॉनके सामने रख दी और पेन अपने हाथमें पकडकर वह हाथ उसके सामने ले गई. डायरी रखनेकी आहट होतेही उसने उधर देखा और अँजेनीके पाससे पेन लेकर वह डायरीपर कुछ लिखने लगा.

अँजेनीने अपने कॉफीका घूंट लेते हूए उसके कंधेपरसे झूककर वह क्या कर रहा है यस समझनेकी कोशीश की.

अचानक जॉनने अपने दायें हाथ की मुठ्ठी कसकर बनाते हूए विजयी स्वरमें चिल्लाया -

"यस्स्"

वह झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा. उसे शायद खुनके बारेमें या कातीलके बारेमे कुछ जानकारी मिली होगी.

" क्या ? कुछ मिला ?"

अँजेनीका चेहरा खिल गया था.

" इधर देखो, उस सिरीयल किलरने सबसे पहले सानीका खून किया"

सानीका जिक्र होतेही अँजेनीका खिला हूवा चेहरा मुरझासा गया.

" दुसरा जिसका कत्ल किया उसका नाम था - हुयाना"

अँजेनी उसे क्या कहना है यह समझनेके लिए कभी वह क्या बोल रहा है वह सुनती थी तो कभी उसने डायरीपर क्या लिखा है वह पढती थी.

"तिसरा कत्ल हूवा उस शख्स का नाम था उटीना और हालहीमें जो चौथा खुन हूवा उसका नाम था नियोल '

" तो फिर ? " प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीके खुले मुंह से निकल गया.

" और अब जो पाचवा खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होना चाहिए'

" यह तुम कैसे कह सकते हो ? "

फिर जॉनने सामने रखी डायरी और इंटरनेटकी कुछ जानकारी अँजेनीको दिखाकर वह उसके सामने कत्लका एक एक रहस्य खोलने लगा. जैसे जैसे एक एक रहस्य खुलता था वैसे वैसे उसकी आखोंमे आश्चर्य दिखने लगता.

क्रमश:..

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Ch-46: गुगल सर्च (शून्य-उपन्यास)

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एकदम हताश, निराश, बुझा हूवा चेहरा लेकर जॉन अॅँजेनीके सामने बैठा था.

" साला ब्लडी बॉस. ..उसने मुझे दगा दिया. " जॉन गुस्सेसे टेबलपर अपनी कसी हूही मुठ्ठी जोरसे मारते हूए बोला.

अॅँजेली उठकर जॉनके पास गई और उसे सहलाते हूए उसके बालोंमे अपना हाथ फेरने लगी.

'' ऐसा लगा की बंदूक सरेंडर करनेके पहले बंदूक की नाल उसके कनपटीमे रखू और सब की सब गोलीयां दाग दूं उसके मस्तकमें ' जॉन फिरसे गुस्सेसे बोला.

अॅँजेलीने उसके बालोंसे अपना हाथ निकाल लिया. और उसके सामने खडी होकर उसे समझानेके सुरमें बोली, '' देखो जॉन, बॉसपर चिढकर कुछ नही होनेवाला ... बॉसने जोभी किया अपनी चमडी बचानेके लिए. उसकी जगह कोईभी होता तो शायद वह वही करता. "

" नही ... पहलेसेही वह मेरे उपर खफा था... वह मौकेकी तलाशमेंही था और कभी ना कभी वह दगा देने वाला था. " जॉनने उसे तोडते हूए कहा.

" लेकिन बॉसने तुम्हे दगा दिया और उसके लिए तुम्हे क्या करना चाहिए यह बात अब उतनी महत्वपुर्ण नही रही. "

जॉनने उसकीतरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" तूम तुमपर लगे आरोप कैसे निकाल सकते हो यह अब सबसे महत्वपुर्ण है."

" मुझ पर लगे आरोप मै कैसे निकाल सकता हूं ?" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.

" तुमपर लगे आरोप निकालनेका अब एकही रास्ता है "

जॉनने फिरसे उसकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" ... और वह है खुनीको पकडना " उसने जॉनको मानो रास्ता दिखानेकी कोशीश करते हूए कहा.

" पर वह कैसे मुमकीन है ? मेरे सब अधिकार , शस्त्र उन्होने निकाल लीये है. अब अगर मैने प्रयास कीया भी तो भी वह पर टूटे परींदेने आसमानमें उंची उडान भरनेकी कोशीश करने जैसा होगा. "

" नही. ऐसा एकदम हताश होकर नही चलेगा. यह सच है की अब काम बडा जोखीम भरा हो गया है. लेकिन तुम्हारे पास उसके सिवा कुछ चारा भी तो नही है'

जॉन कुर्सीसे उठ गया और खिडकीके पास जाकर खडा हो गया. उसे बाहर रात के अंधेरेमें आसपासके लाईटस की रोशनीमें चमकता हूवा गोल तालाब का पाणी दिखाई दिया.

एकदम शांत ना हलचल ना कोई आवाज...

उस चंचल पाणीको मानो तालाबके किनारोंने बांधा हूवा लग रहा था... .

उसे लग रहा था की शायद उसकी अवस्थाभी कुछ उस पाणी जैसीही थी....

वह गोल तालाबका किनारा देखकर उसे फिरसे शुन्यका खयाल आया. वह स्तब्धतासे काफी समयतक उस तालाबकी तरफ एकटक देखता रहा.

फिर धुमकर वह धीरेसे अँजेनीके पास जाकर खडा हो गया. काफी समयकी चुप्पीके बाद उसेने अँजेनीको एक सवाल पुछा,

" झीरोकी खोज किसने की यह तुम्हे पता है क्या ?"

ईस अचानक सवालसे गडबडाकर अँजेनीने कहा " नही ... लेकिन क्यो?"

जॉन फिरसे खिडकीके पास गया. सोचमें डूबकर वह फिरसे खिडकीके बाहर देखने लगा. फिर बेचैन होकर वह कमरेमे चहलकदमी करने लगा.

अँजेनी उसके दिमागमें क्या चल रहा होगा यह समझनेका प्रयास करती हूई उसके तरफ देखने लगी. लेकिन अँजेनीको उसके खयालोंका कुछ अंदाजा नही हो रहा था.

अचानक रुककर कॉम्प्यूटरकी तरफ निर्देश करते हूए उसने कहा,

"अँजी, जरा वह कॉम्प्यूटरतो शुरु करो"

" कॉम्प्यूटर... किस लिए?" अँजेनीने पुछा.

वह कुछ नही बोला. फिरसे बेचैनीसे कमरेमे चहलकदमी करने लगा. अँजेनी कॉम्प्यूटरके पास गई और उसने कॉम्प्यूटर शुरु किया.

जॉन अपनी चहलकदमी रोककर उसकेपास जाकर कॉम्प्यूटरके सामने बैठ गया और कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगा. अँजेनी मॉनिटरकी तरफ देखते हूए कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगी.

कॉम्प्यूटर बूट होतेही एकदम शांत था जॉन अचानक हरकतमे आगया. जॉन तेजीसे कीबोर्डकी बटन्स और माऊसकी बटन्स दबाने लगा.

अँजेनीने उससे कुछ ना बोलते हूए शांत रहनाही बेहतर समझा. वह कॉम्प्यूटरके स्क्रीनपर वह क्या कर रहा है यह देखने लगी.

जॉनने पहले इंटरनेट कनेक्ट किया. फिर ब्राऊजरपर डबल क्लीक किया.

ब्राऊजर ओपन होतेही उसने उस ब्राऊजरके 'अॅडेस' के जगह टाईप किया.

"गुगल डॉट कॉम"

गुगल सर्च इंजीनकी साईट ओपन हो गई.

गुगलमें उसने सर्च स्ट्रींग टाईप की.

"झीरो इन्व्हेन्शन"

जॉनके दिमागमें क्या चल रहा था यह सब अब अँजेनीके खयालमें आने लगा था.

" हां, मुझेभी लगता है... शून्यकी खोज किसने की ? इस सवालमेंही कातील कौन है ? और वह कत्ल क्यो कर रहा है ? इन सवालोंका जवाब छिपे होगे. " अँजेनी उत्साहसे बोली.

जॉनका तेजीसे की बोर्ड और माऊसकी बटन्स दबाना शुरुही था. की बोर्ड और माऊसकी बटन्स की आवाजसे उसका दिल मानो भर आने लगा था. हमेशा सानी जब ऐसाही कॉम्प्यूटरपर बैठकर काम करता था और ऐसाही की बोर्डका और माऊसका आवाज आता था तब उसे ऐसाही होता था.

वैसीही भावना अब उसे जॉनके बारेमेंभी लगने लगी थी...

चलो एक तो ठिक हूवा जॉन नये जोशके साथ फिरसे काम करने लगा है ...

उसे बहुत अच्छा और हलका हलका महसुस हो रहा था.

" तूम तुम्हारा चलने दो. मै एक गरम गरम मस्त कॉफी लाती हूं " ऐसा कहते हूए अँजेनी किचनमें चली गई.

क्रमश:...

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Ch-45: आय ऍम सॉरी (शून्य-उपन्यास)

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बॉस पत्रकाररोंकी भीडसे जो छूटा तो सिधा 'खाट..खाट' जुतोंका आवाज करते हूए अपने कॅबीनकी तरफ निकल पडा. जॉनभी पत्रकारोको टालते हूए भीडसे बाहर आ गया और बॉसके पिछे पिछे चल पडा.
बॉस ऐसा भी धोखा दे सकता है...
पिछले बारभी सब बॉसनेही रिपोर्टरोंके सामने बताया. उसमें जॉनका कुछ भी हाथ नही था... वैसे देखा जाए तो बॉसनेही लगभग जबरदस्ती उसे छुटीपर भेजा था...
जॉनको बॉसका बहुत गुस्सा आ रहा था.
हर बार डिक्टेटरशीप करनेकी और कुछ गलत हूवा तो किसीकोतो भी फसानेका...
जॉन बॉसका काम करने का तरीका अब समझने लगा था.
जॉनकोही क्या किसीकोभी यह हजम ना होनेवाली बात थी. जॉन तेजीसे बॉसके पिछे पिछे जाने लगा. उसे बॉससे सफाई लेनी थी.
बॉस उसके कॅबिनके पास आकर पहूंचा. जॉन बॉसके पिछेही था. बॉसको जॉनकी आहट आई होगी या फिर जॉन उसके पिछे पिछे आएगा इसका अंदाजा हूवा होगा. कॅबिनके अंदर जानेके पहले अचानक ब्रेक लगेजैसा बॉस एकदम रुका. उसके पिछे जॉनभी रुका. बॉस पिछे पलटकर धीरे धीरे जॉनके पास आने लगा. जॉनके एकदम सामने आकर वह रुका. अब वह जॉनके सामने खंबीरतासे खडा होकर उसकी आंखोमे आंखे डालकर देखने लगा. जॉन अभीभी गुस्सेमे था. वह भी गुस्सेसे बॉसके आंखोसे आंखे मिलाकर देखने लगा.
" ऐसे क्या गुस्सेसे देख रहे हो? मुझे क्या खावोगे?" बॉस जॉनपर चिल्लाया.
बॉस अपनी हमशाकी ट्रीक आजमा रहा था. लेकिन इस बार जॉन बिलकुल विचलीत नही हूवा.
फिर एकदमसे बकरी बनकर बॉसने जॉनके कंधेपर अपना सांत्वनाभरा हाथ रख कर कहा,
" आय अॅम सॉरी जॉन. वक्त ही कुछ ऐसा था की मै कुछ नही कर सका "
इस बार जॉन गडबडायाभी नही. वह अभीभी बॉसकी आंखोसे आंखे मिलाकर गुस्सेसे एकटक देख रहा था. बॉसको अहसास हूवा की उसकी ट्रीक काम नही आई थी.
" आय अॅम रिअली सॉरी " बासॅने जॉनका कंधा थपथपाकर अपना हाथ पिछे लिया.
बॉस एकदमसे मुडकर फिरसे 'खाट खाट' ऐसा जुतोंका आवाज करते हूए कॅबिनमें घुस गया. बॉसने एक तिरमें दो निशाने साधे थे. पुलिस डिपार्टमेंटको लोगोंकी नजरोंसे निचा होनेसे बचाया था और जॉनको बरबाद कर डिपार्टमेंटमें अपना खौफ और महत्व और मजबुतीसे बढाया था.
क्रमश:...

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Ch-44: एक तिर दो निशाने (शून्य-उपन्यास)

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जॉनका बॉस और जॉन जैसेही रिपोर्टरोंको आते हूए दिखाई दिए, उनकी भिड उनकी दिशामें उमड पडी. बिजली चमकने जैसे कॅमेरोंके फ्लॅश उनके चेहरेपर पडने लगे. वहां खडे पुलिसने एक बडा घेरा बनाकर रिपोर्टर लोगोंको काबूमे रखनेकी कोशीश की. तोभी पिछे सब गडबड चल रही थी.

" क्वायट प्लीज" बॉसका कडा स्वर गुंजा.

सब तरफ सन्नाटा छाया. कुछ रिपोर्टर आगे आनेके लिए अधीर होकर गडबड करने लगे थे. बॉसने आत्मविश्वासके साथ चारोतरफ एक नजर डाली.

" यस्स" बासने रिपोर्टरोंको सवाल पुछनेके लिए इशारा किया.

सामने खडे रिपोर्टरकी भीड गडबड करने लगी. बॉसको सिर्फ शोर सुनाई दे रहा था. कौन क्या पुछ रहा था कुछ समझ नही आ रहा था.

" आय वुईल इन्शोर दॅट दी लास्ट पर्सन इज ऑल्सो अॅन्सर्ड... वन बाय वन प्लीज" बॉसने खंबीरतासे कहा.

जॉनने आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देखा. उसे बॉस इतना बिनदास कैसे रह सकता है इसका आश्चर्य हो रहा था.

" तुम्हारा वह खुनीतो मर गया था... फिर क्या अब फिरसे जिवीत हो गया है.. ?" एक पत्रकारने व्यंग और आवेशसे से कहा.

" पुलिस डिपार्टमेंट लोगोंको इतना गुमराह करेगी इसकी अपेक्षा नही थी. " दुसरेने कहा.

" इतना होनेके बादभी बेशरमोंकी तरह लोगोंके सामने जानेकी तुम्हे हिम्मत कैसे होती है? " तिसरा चिढकर अपने आपेसे बाहर होता हुवा बोला.

" माईंंड यूवर लँगवेज" बॉस चिल्लाया.

बॉसने एकदम अपने तेवर बदले थे. जॉनभी एक पलके लिए चौंक गया. पुलिसका पलडा कमजोर होते हूए भी बॉस ऐसे कैसे बर्ताव कर सकता है इस बातका जॉनको आश्चर्य लग रहा था.

सब तरफ सन्नाटा छा गया.

' देखो... पिछलीबार हमारी गलती हूई इस बातसे मै इनकार नही करता... कातील एकसे जादा हो सकते है यह बात हमने सोचीही नही... '' बॉस फिरसे अपने तेवर नरम करते हूए एकदम हिन दिन होकर बोल रहा था.

बॉसकी यह स्टाईलही थी. पहले एकदम हमला करनेका और फिर दुसरेही पल एकदम बकरीकी तरह नरम रुख अपनानेका. इसकी वजहसे पहले तो सामनेका आदमीको अनपेक्षीत धक्का लगता है और बादमे वह गडबडा जाता है. वैसेही हूवा. पहले सब रिपोर्टरोंको गहरा धक्का लगा और वे एकदम शांत हो गए और दुसरेही पल गडबडा गए. इतनेकी उन्हे बॉसची दया आने लगी थी. लेकिन आखीर वे रिपोर्टर थे - चार घाटका पाणी पीने वाले. बॉसके डिपार्टमेंटके कोई उसके एहसानमंद पदाधिकारी नही थे. जल्दीही वे संभल गए और उन्होने बॉसपर फिरसे हल्ला बोल दिया.

" तुम लोग लोगोके रक्षक, लोगोका हित देखने वाले. तुम लोगोंपर लोगोंकी जिम्मेवारी होती है... तुम लोग ऐसे माफी मांगकर अपने हाथ नही झटक सकते. "

" और अभीभी इस केसका क्या प्रोग्रेस है? की जहांसे शुरु हुवा था फिरसे वही " कोई बोला.

" शून्य गोल होने जैसा " किसीने आगे जोड दिया.

लोगोमें थोडी व्यंगपुर्ण हंसकी लहर दौड गई.

" तुम माफी मांगकर ऐसे चूप नही बैठ सकते. तुम्हे कुछतो अॅक्शन लेनीही पडेगी"

बॉसको बोलनेके लिए कोई चान्स नही दे रहा था.

" और वहभी अब सबके सामने तुम्हे ऐलान करना पडेगा. "

" हां .. हां अभी सबके सामने... " बाकी बहुतोंने हांमे हां मिला दी.

अब बॉसके पसीने छूटने लगे थे. सामने रिपोर्टर उसे ऐसेही जाने देनेके मुडमें नही थे. बॉसकी ट्रीकभी कुछ चली नही थी. पर उतनेही जोरसे बूमरँगकी तरह उसपरही पलट गई थी.

" जस्ट अ मिनिट प्लीज" बॉसनं हाथ उपर कर लोगोंको शांत होनेके लिए कहा.

रिपोर्टर थोडे शांत हूए.

" मै मेरा अॅक्शन प्लान तुम लोगोंके सामने जाहिर करने वाला हूं "

बॉसका बोलना पुरा होनेके पहलेही कुछ लोग उसके बोलनेको बिचमेंही तोडकर चिल्लाए .

" अभी यहां... पहलेजैसी आनाकानी नही चलेगी. "

बॉसकी अब चक्रव्यूहमें फसे अभिमन्यूजैसी दशा हूई थी.

" हां ... हां अभी यही मै मेरा अॅक्शन प्लान जाहिर करने वाला हूं " बॉस नरम लहजेमें अपने चेहरेपरका पसिना पोंछते हूए बोला.

अब कहां रिपोर्टर एकदम शांत हूए - बॉसका अॅक्शन प्लान क्या है यह सुननेके लिए. सब रिपोर्टरोंने अपने मायक्रोफोन्स जितने हो सकते है उतने सामने घुसाए.

" नंबर एक. पुलिस लोगोंके रक्षक होते है... और लोगोंका उनपर पुरा विश्वास होता है... उनका हमपरका विश्वास टूटना नही चाहिए इसलिए पुलिसको गलती हूई ऐसा सिर्फ स्वीकार करके नही चलेगा. उसके लिए उन्हे बडीसे बडी सजा मिलनी चाहिए.. ताकी ऐसी गल्ती वे फिरसे नही दोहरानेकी हिम्मत नही करेंगे "

जॉनने गडबडाकर बॉसकी तरफ देखा. बॉस पुलिसकेही खिलाफ बोल रहा था.

अपनी सुननेमें तो गलती नही हो रही है...

या फिर बॉसकी बोलनेमें कोई गलती हो रही होगी...

" और इसलिए इसी वक्त मैने एक महत्वपुर्ण निर्णय लिया है..."

अपना निर्णय बयान करनेके पहले बॉसने जानबूझकर एक बडा पॉज लिया, ताकी उसके निर्णयसे उसे जो रिपोर्टरोंपर इफेक्ट करना था वह ठिक ढंगसे हो. सब तरफ सन्नाटा छा गया.

" और मेरा निर्णय यह है की जिनकी वजहसे गलती होगई उनको इमीडीएटली सजा दी जाए. इसलिए सबसे पहले मै एक समितीका गठन करता हू. वह समिती इस सब गडबडीयोंका और गलतियोंकी पुरी तफ्तीश करेगी. और जिनकी वजहसे यह गलती हो गई है उस ऑफीसरको इस समितीका रिपोर्ट आनेतक बडतर्फ करनेका मै ऐलान करता हूं. "

जॉनको खडे खडे मानो धरणीकंप हूवा हो ऐसा लगा. जॉन आश्चर्यसे उसके बॉसकी तरफ देखने लगा. लेकिन बॉसका खयाल उसकी तरफ कहां था.!

" और उस जगह तबतक आगेकी इन्व्हेस्टीगेशनके लिए मै इसी वक्त दुसरा काबील ऑफिसर नियूक्त कर रहा हूं "

जॉन उसके बॉसका यह रूप पहली बार देख रहा था. वह अभीभी आश्चर्यसे बॉसकी तरफही देख रहा था. अचानक जॉनके आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देख रहे चेहरेपर कॅमेरेके फ्लॅश चमकने लगे. अब रिपोर्टरोंने अपना रुख जॉनकी तरफ किया था. बॉसने इस मौके फायदा उठाया और रिपोर्टरोंका रुख जॉनपर होता देखकर वह वहांसे दबे पाव खिसक गया.

क्रमश:...

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Ch-43: फिरसे प्रेस कॉन्फरन्स (शून्य-उपन्यास)

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जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.

"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.

जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.

" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.

उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.

" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.

जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,

" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."

" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.

" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.

" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.

" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.

इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,

" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."

पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.

" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.

" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.

" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.

" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"

अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.

" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.

" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.

" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.

" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."

जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.

जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"

" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.

बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.

बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"

बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.

क्रमश:...

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Ch-42: शुन्यकी खोज किसने की ? (शून्य-उपन्यास)

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लिफ्टसे बाहर आकर जॉन फ्लॅट क्रमांक 3 की तरफ जाने लगा. फ्लॅटके खुले दरवाजेके सामने देखनेवालोंकी भीड जमा हूई थी. कुछ रिपोर्टरभी वहां इधर उधर घुम रहे थे. वहा बाहर दरवाजेके पास खडे पुलीस सुस्ताए हूए लग रहे थे. जॉनको देखतेही वे सुस्ताए हूए पुलिस सतर्क होकर हरकतमे आए. वे कुछ कारण ना होते हूए वहा खडे लोगोंको और रिपोर्टरोंको डांटते हूए वहासे भगाने लगे. जॉनको देखतेही वे रिपोर्टर जॉनके सामने आकर उसका रास्ता रोककर खडे हूए. वहा खडे और जॉनके पिछे आए पुलिसने उन्हे लगभग पकडकर बाजू हटाया. जॉन सिधा अंदर चला गया.

अंदर हॉलमें इन्व्हेस्टीगेशनके लोग अपने काम मे व्यस्त थे. जॉन उन्हे डिस्टर्ब नही होगा इसकी सावधानी बरतते हूए बेडरुमकी तरफ चला गया. बेडरूममें सॅम था. जॉनको देखतेही वह जॉनके सामने आया.

" साला कुछभी पत्ता नही चल रहा है " सॅम जॉनको कुछतो बोलना है ऐसे बोला.

' अपनेही डिपार्टमें अगर छेद हो तो कैसे पता चलेगा' जॉनने चिढकर तिरछे अंदाजमें कहा.

जॉनका मूड देखकर सॅमने चूप रहनाही बेहतर समझा. .

बेडरूममे फर्शपर खुनसे लथपथ नियोल वॅग्नरका शव पडा हूवा था. नियोल लगभग पच्चीसके आसपास, एक आकर्षक व्यक्तीत्व का युवक था. वह फ्लॅटमें शायद अकेलाही रह रहा होगा. मतलब फ्लॅटमेंके उसके सामानसे और अबतक उसके बारेमें पुछनेके लिये उसका कोई नही आया था, इसपरसे कमसे कम ऐसाही लग रहा था. नियोलके पेटपरसे बहकर फर्शपर उसका खुन जम गया था. उस तरफसे पिठके निचेसे बहकर एक खुन की धार बाहर आई थी. नियोलके शरीरपर बंदुककी गोलीयोंकी निशानियां तो थी ही साथमे चाकुकी वार की हूई निशानीयां थी. नियोलका मुहं आधा खुला और सर एक तरफ ढूलका हूवा था. जान जानेके पहले वह बहूत तडपा होगा ऐसा लग रहा था. और उसके शरीरपर उसके ऑफिसके या फिर बाहर जानेके लिए पहने रेग्यूलर कपडे थे.

इस परसे लग रहा था की खुनी शायद उसके पिछे पिछेही घरमें घुस गया होगा...

मतलब यह भी एक संभावना!...

कमरेमेंका, नियोलके शरीरपरका, उसके जेबमें जो था वह सब सामान जैसेके वैसा सही सलामत था.

सब मतलब जो किमती था वह...

बाकी कुछ सामान खुनी ले गया था या नही कुछ पता नही चल रहा था. जॉनको अबतकके अनुभवसे पता था की कुछ कातील सभी किमती सामान नही ले जाते. कुछ सामान वे पुलिसको गुमराह करनेके लिए वही छोड जाते है. और उपरसे नियोल अकेला होनेसे कातील क्या ले गया और क्या छोड गया यह समझनेके लिए कोई रास्ता नही था.

नियोलपरसे हटकर जॉनका ध्यान सामने खुनसे भरे दिवारकी तरफ गया.

फिर वही ...

खुनसे निकाला हूवा बडासा शुन्य... शुन्यही था वह...

और उस शुन्यमे कातील छीपा हूवा था...

लेकिन शून्यका मतलब होता है कुछ भी नही...

फिर उसमें कातील कैसा छिपा होगा ?...

शून्यके बिचोबिच खुनसे लिखा था -

" शून्याकी खोज किसने की ?"

फिर इस सवालमे जरुर कातील छिपा होगा ...

जॉन सोचने लगा.

जॉनको अब यह सब गुथ्थी सुलझानेकी सख्त जरुरत महसुस होने लगी थी.

उसने बोलातो सही था की 'शामको प्रेस कॉन्फरंसमे सब बताऊंगा' करके.

लेकिन कमसे कम अभीतो उसकेपास बोलनेके लिए कुछ नही था. मतलब कमसे कम शामतक खुनीका पता लगना जरुरी था.

क्रमश:...

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Ch-41: मेडीयाके साथ पाला (शून्य-उपन्यास)

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जॉन नार्थ स्ट्रीटको नियोलके अपार्टमेंटमें जानेके लिए अपने गाडी से उतरा, तभी उसे चारो ओरसे प्रेसने घेर लिया.

" मि. जॉन.... आपनेतो कहा था की खुनी मर चूका है... और केस खतम हो चूकी है..."

एक पत्रकार भिडमें अपना कॅमेरा संभालते हूए अचानक जॉनके सामने उसका रस्ता रोकते हूए खडा होगया. भिडसे रास्ता निकालकर वहां पहूचनेतक उस पत्रकारके सारे कपडे और बाल खराब हो चूके थे.

जॉनके पिछे, आजू बाजू सब तरफसे पत्रकार उसे घेरकर खडे थे. वह एकदम सामने आनेसे उसे आगे जानेका रस्ताभी बंद हूवा था. अब उस पत्रकारको कुछतो जवाब देकर कमसे कम अभीके लिए शांत करना जरुरी था. क्या बोला जाए जॉनको कुछ सुझ नही रहा था.

" लेट मी र्फस्ट इनव्हेस्टीगेट द केस ..." ऐसा कहकर जॉनने उसे बाजू हटाया और वह आगे जाने लगा.

पिछेसे वह पत्रकार चिल्लाया -

" सर यू कान्ट जस्ट इग्नोर अस धिस वे"

" यू हॅव टू अॅन्सर अस" दुसरा एक चिल्लाया.

" यस ... यस" बाकी पत्रकारभी चिल्लाकर उन्हे साथ देने लगे.

उसके पिछे सब पत्रकार गुस्सेसे चिल्लाते हूए दंगा करने लगे थे. जॉन ब्रेक लगे जैसा रुका. उसने पलटकर देखा. उसे सब पत्रकार मानो खानेको तैयार थे. जॉनका चेहरा बुझसा गया. वह समझ रहा था की गलती पुलिसकी थी.

अब उन्हे कुछ तो समझा बुझाकर शांत करना जरुरी था.

कॅमेरेके फ्लॅश उसपर चमक रहे थे. कॅमेरेके फ्लॅशकी वजहसे वह विचलितसा हूवा. बाकीके पुलिस बडी मुश्कीलसे उन पत्रकारोंको घेरा बनाकर रोके हूए थे.

" इस इनव्हेस्टीगेशनके बाद शामको मै एक प्रेस कॉन्फरंस लेने वाला हूं ... उसमें मै सब विस्तारसे बोलूंगा" जॉन हिंम्मत कर बोला और पलटर तेजीसे चलते हूए अपार्टमेंटमें घुस गया.

पत्रकार कमसे कम उस वक्तके लिए शांत हूए थे. जॉनको खुदकाही आश्चर्य लग रहा था.

उसके मुंहसे वह सब कैसे निकल गया इसका उसेही पता नही था.

वह प्रेस कॉन्फरंसके बारेमे बोला तो था लेकिन प्रेस कॉन्फरंसमें वह क्या बोलने वाला था?...

चलो कमसे कम अबकी तो बला टली. शामका शामको देखेंगे...

ऐसा सोचकर वह लिफ्टमें घुस गया. लिफ्ट बंद हूई. उसने लिफ्टमे बटनोंके लाईनमेसे ढूंढकर 10 नंबरका बटन दबाया.



क्रमश:...

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Ch-40: डिटेक्टीव ऍलेक्स (शून्य-उपन्यास)

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जॉनने डिटेक्टीव अॅलेक्सके दरवाजेकी बेल बजाई. अंदरसे हलकासा आवाज आया-

'डिंग डाँग'

जॉन दरवाजा खुलनेकी राह देखते हूए खडा रहा. जॉनने बिचमें आसपास एक नजर घुमाई.

....अॅलेक्स घरमें अकेलाही रहता था. जॉन और अॅलेक्सकी दोस्ती काफी पुरानी थी. घरके सामने जो बागीचा था उसकी अॅलेक्स कुछ खास देखभाल नही करता होगा ऐसा प्रतीत हो रहा था. जब अॅलेक्सकी बिवी जिंदा थी तब उसने बडे शौकसे यह बागीचा बनाया था. लगभग पाच साल पहले अॅलेक्सके बिवीका एक दुर्घटनामें इंतकाल हूवा था. तबसे इस बागकी देखभाल कोई नही करता था. बिच बिचमें वहां का एक चौकीदार किसीको पैसे देकर वह बागीचा ठिक कर लेता था. लेकिन वह नियमित नही होता था. इसलिए वह बागीचा भयाण और रूक्ष दिखता था. बिलकुल अॅलेक्सजैसा. .

बेल बजाकर काफी समय हूवा था. फिरभी अभीतक अॅलेक्सने दरवाजा कैसे नही खोला. ?...

जॉनने फिरसे एकबार बेल बजाई. दरवाजा जोरजोरसे ठोका और फिर दरवाजा खुलनेकी राह देखने लगा.

...अॅलेक्सकी पत्नीकी मृत्यूके बाद उसके व्यक्तीत्वमे बहुत बदल हुवा था. तबसे अॅलेक्सका दोस्तोंके साथ हंसना मस्तीकरना लगभग बंद हो चूका था. उसेके नेचरमेंभी बदलाव आया था. वह अब अकेला रहना पसंद करने लगा था. उसको मां बाप, बेटा कुछ भी आगे पिछे ना होनेके कारण वह और ही बेपर्वा हूवा था. उसकी बिवीही उसका सबकुछ थी और वही ना रहनेसे वह औरही अकेला हो गया था. उसका कामभी ऐसा था की उसका अंधेरेसे जादासे जादा पाला पडता था. लेकिन अब अंधेरेसे उसकी गहरी दोस्ती हो गई थी.

उसकी जिंदगी तबसे निरस बन चूकी थी और उसने उसके बाद किसीभी स्रीको उसके जिंदगीमें आनेके लिए कोई गुंजाईश नही छोडी थी.

अभीभी अॅलेक्सके घरका दरवाजा खुला नही था...

लेकिन अब जॉनको चिंता होने लगी थी. उसेने फिरसे दरवाजा ठोका.

" अॅलेक्स" जॉनने अंदर जोरसे आवाज लगाई.

अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी.

जॉन अब अॅलेक्सके घरके बाजूसे पिछे जाने लगा. पिछे जाते जाते उसने एक खिडकीसे अंदर झाककर और नॉक कर देखा. लेकिन अंदर कोई हरकत नही थी. वह घरके पिछवाडे पहूंच गया. पिछेका दरवाजा खुला था. जॉनने फिरसे अॅलेक्सको उसके खुले दरवाजेसे आवाज दिया. तोभी कोई प्रतिक्रिया नही थी. आवाज सिर्फ घरमें गुंजा. अंदर अंधेरा छाया हूवा था. जॉन धीरे धीर अंदर जाने लगा. अब जॉनके दिमागमें अलग अलग भले बुरे खयाल आने लगे थे...

क्या हूवा होगा?...

कुछ अघटीत तो नही घटा?...

उसके सांसोंकी गती विचलित होने लगी थी. अपने आप उसका हाथ उसकी कमरमे लगाए बंदूककी तरफ गया. उसने बंदूक निकाली और बंदूक ताने वह सावधानीसे अंदर जाने लगा. घरमें सब चिजें इधर उधर फैली हूई थी.

वैसेभी अॅलेक्सको चिजें ठिकठाक रखनेकी आदत नही थी....

कभी गुस्सा कर कभी प्यारसे समझाकर उसकी पत्नी उसे चिजे ठिक ढंगसे रखनेकी आदत डालनेका प्रयास करती थी...

लेकिन जबसे अॅलेक्सकी पत्नी गई तबसे घर की जानही चली गई थी. ...

बेडरूममें जातेही जॉनका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. बेडरूममें अॅलेक्स बेडपर गिरा हूवा था. जल्दीसे जॉन उसके पास गया.

" अलेक्स..." उसने उसे हिलाकर देखा.

शरीरमें कोई हरकत नही थी. उसने उसकी नब्ज टटोलकर देखी. उसकी नब्ज कबकी बंद हो चूकी थी. जॉनने झटसे अपना मोबाईल निकालनेके लिए जेबमें हाथ डाला. लेकिन व्हायब्रेट होता हूवा मोबाईल उसके हाथमें आया. उसने मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. वह उसका साथी सॅमका था.

उसने मोबाईल का एक बटन दबाकर उसे अटेंड किया.

" हं सॅम"

"सर एक बुरी खबर है... सर खुनीने चौथा खूनभी किया है... " उधरसे सॅमने कहा.

" क्या ?" जॉनके मुंह से अनायास निकल गया.

" नियोल वॅग्नर .. नॉर्थ स्ट्रीट, 2024.... उसका भी उसी तरहसे खुन हो चूका है.." सॅमने जानकारी दी.

क्रमश:...

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Ch-39: छुट्टीमें व्यवधान (शून्य-उपन्यास)

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जॉन गाडी चला रहा था और उसके बगलमें अँजेनी बैठी हूई थी. दोनो सिधे सामने रस्तेपर देख रहे थे. एकदम शांत. काफी समयसे उन दोनोंके बिच रही अनैसर्गिक चुप्पी तोडते हूए जॉनने कहा ,

" मैने नही कहा था , यह खुनका किस्सा अभी तक खतम नही हूआ करके.."

अँजेनीने उसकी तरफ देखा.

" खुनी अभीभी खुला घुम रहा है" जॉनने आगे कहा.

" फिर जो मरा था वह कौन था? " अँजेनीने पुछा.

' बहुत सारी संभावनाए है' जॉन अँजेनीकी तरफ देखते हूए कहा.

अँजेनीने उसकी तरफ सिर्फ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" एक तो उसका खुनसे कोई वास्ता नही होगा... या फिर वह खुनीका साथी होगा.. या कीसी इस खुनसे संबंधीत संघटनाका एक क्षुद्र मेंबर होगा" जॉन ने कहा.

" लेकिन अॅलेक्सको ऐसी क्या महत्वपुर्ण जानकारी तुम्हे बतानी थी.? " अँजेनीने प्रश्न उपस्थित किया.

जॉनने कुछ तो खयालमें आये जैसा कहा ,

" देखोतो ... मेरे मोबाईलका सिग्नल आया क्या? "

" तुम्हारा मोबाईल?" प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीने पुछा.

जॉनने आंखोसे इशारा कर अँजेनीके उस तरफ सिटपर रखा उसका ओवरकोट दिखाया. अँजेनीने ओवरकोट उठाकर अपने हाथमें लिया. ओवरकोटकी जेबसे मोबाईल निकालकर उसने उसका डिस्प्ले देखा. मोबाईलका सिग्नल अब पुरी तरहसे आ चूका था.

" सिग्नल तो आया है... रुको मै उसे ट्राय करती हू"

अँजेनी अॅलेक्सका फोन ट्राय करने लगी. उसने अपने नाजूक उंगलीयोंसे कुछ बटन दबाकर मोबाईल अपने कानको लगाया. जॉन उत्कंठासे बिचबिचमें एखाद नजर उसपर डाल रहा था.

उसने कानको लगाया मोबाईल निकालकर रिडायल किया.

" क्या हूवा ?" जॉनने उत्कंठासे पुछा.

" मोबाईल स्वीच ऑफ किया हूवा है ऐसा मेसेज आ रहा है " उसने फिरसे मोबाईल कानको लगाते हूए कहा.

थोडी देर बाद उसने फिरसे रिडायल किया लेकिन वही मेसेज बार बार आ रहा था.

" उसने मोबाईल शायद बंद किया है " मोबाईल जॉनके पास देते हूए वह बोली.

जॉननेभी एक-दो बार प्रयास करके देखा. लेकिन व्यर्थ.

" मुझे लगता है उसने मोबाईल जानबुझकरही बंद कर रखा होगा. " जॉन मोबाईल अपने जेबमें रखते हूए बोला.

" जानबुझकर लेकिन क्यों? " अँजेनीने उत्सुकतावश पुछा.

" मोबाईलका संभाषण टॅप होनेकी शायद उसे आशंका होगी. " जॉनने संभावना बताई.

" ऐसा लगता है की अब उसे मिले बैगेर सच क्या है कुछ पता नही चलेगा. " अँजेनीने कहा.

जॉन कुछ ना बोलते हूए फिरसे सिधा सामने रस्तेपर देखते हूए ड्रायव्हींग करने लगा. अँजेनीभी सामने देखते हूए फिरसे अपने सोचमें डूब गई.

क्रमश:...

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Ch-38: डीटेक्टीव्ह का फोन (शून्य-उपन्यास)

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ठंडसे एकदूसरेका बचाव करनेके लिए एक दूसरेको कसकर लिपटकर जॉन और अँजेनी टेरेसपरही सोए थे. सुबह पंछीयोंकी चहचहाटसे अँजेनी जाग गई. उसने अपनी आनंदभरी और गहरी निंद से हूए भारी आंखे खोलनेकी कोशीश की. उसे आंखे खोलनेका मन नही हो रहा था. उसे वैसेही जॉनकी बाहोंमे मानो पुरी जिंदगी रहनेका मन कर रहा हो. वैसेही लेटे हूए अवस्था मे उसने हलके अपनी आखे थोडीसी खोलकर देखा. पुरबकी ओर सुबहकी लाली छाई हूई थी. सुबह हो गई .. अब उठना ही चाहिए... उसने अपने कपडे पहनते हूए जॉनको धीरेसे हिलाया.

" जॉन ऊठो, देखो सुबह हो गई.."

"उं..." जॉनने सुस्तीमें अंगडाई ली और उसे फिरसे अपनी बाहोंमे खिंच लिया.

उसने खुदको छुडाते हूए अपने कपडे पहने और फिर उसे जगानेके लिए हिलाया. वह उठ गया. किलकीली आखोंसे इधर उधर देखा और फिर उसकी गोदमें सर रखकर सो गया. उसकी बालोंमे अपनी नाजूक उंगलीया फेरते हूए वह मुस्कुराने लगी. इतनेमें उन्हे अहसास हूवा की शायद निचे बेडरुममें रखा हूवा जॉनका मोबाईल बज रहा है.

" जॉन देखोतो, तुम्हारा मोबाईल बज रहा है.."

यहां आनेके बाद पहली बार जॉनका मोबाईल बजा था. वह एकदमसे उठ खडा हूवा. कपडे पहनते हूए जल्दी जल्दी निचे जाने लगा. वह भी उसके साथ हो ली.

हां जॉनकाही मोबाईल बज रहा था...

मोबाईल उठाकर जॉनने डिस्प्लेकी तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सका फोन था.

इतनी सुबह अॅलेक्सका फोन ?...

जरुर कोई महत्वपुर्ण बात होगी...

झटसे जॉनने बटन दबाकर मोबाईल कानको लगाया.

" हं बोलो अॅलेक्स " जॉनने कहा.

" जॉन एक बहुत महत्वपुर्ण खबर है... " उधरसे आवाज आया.

अचानक मोबाईलके सिग्नलमे कुछतो डिस्टर्बन्स आने लगा. कुछ सुनाई नही दे रहा था.

" हॅलो हॅलो " जॉन ट्राय करने लगा.

" हॅलो" उधरसे प्रतिसाद आया.

" हं, बोलो ... क्या खबर है ?" जॉनने पुछा.

" खुनीके ठिकानेका पता चल चूका है... तूम जल्दीसे जल्दी ... " उधरसे बात पुरी होनेसे पहलेही कुछ न समजनेवाले टूटे हूए बोल जैसे आवाज आने लगे. और फिरतो वह भी आना बंद हूवा.

" हॅलो हॅलो" जॉनने बोलनेका प्रयास किया.

उसने उसके मोबाईलके डिस्प्लेके तरफ देखा. उसके मोबाईलका सिग्नल गया था.

शायद शहरसे दूर होनेके कारण इस इलाकेमे सिग्नल बराबर नही आ रहा होगा... .

" क्या हूवा ? किसका फोन है ?" अँजेनीने पुछा.

वह फोन लेकर बाल्कनीमें गया. लेकिन सिग्नल आनेका नाम नही ले रहा था.

" अँजी जल्दी तैयार हो जावो.. हमें अब यहांसे जल्दसे जल्द निकलना होगा.." बोलते हूए जॉन बाल्कनीसे सिढीयोंकी तरफ लपका.

सिढीयोंसे दौडते हूए वह टेरेसपर गया. कुछ ना समझते हूए अँजेनीभी उसके पिछे पिछे टेरसपर गई. टेरेसपरभी उसके मोबाईलका सिग्नल नही आ रहा था.

"अॅलेक्सका फोन था ... खुनीके बारेमें कुछतो महत्वपुर्ण जानकारी मिली है उसको शायद ... लेकिन बिचमेंही सिग्नल चला गया... " मोबाईलका डिस्प्ले अँजेनीको दिखाते हूए जॉनने कहा.

क्रमश:...

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Ch-37: चांदनी रात (शून्य-उपन्यास)

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आधी रात बित चूकी थी. बाहर आकाशमें पूर्णीमा का चांद अपनी सफेद रोशनी सब तरफ फैला रहा था. बहते पाणी की मधूर आवाज और चांद का धूसर प्रकाश कॉटेजमें आ रहा था. दोनो बेडपर लेटे हूए थे और जॉनकी उंगलीयां अँजेनीके मुलायम जिस्मसे खेल रही थी. उसका हाथ जिस्मसे खेलते खेलते धीरे धीरे निचे सरकने लगा.

" अंगुठी लानेकी इतनी क्या जल्दी थी. ? " अँजेनीने एक मंद मुस्कान देते हूए उसके निचे खिसकते हूए हाथको अपने हाथमें पकडते हूए कहा.

" जानेवाले वक्तको तो मै रोक नही सकता लेकिन वह वक्त व्यर्थ ना जाए इसका खयाल मुझे रखनाही चाहिए." उसे बाहोंमे भरकर कसकर पकडते उसने कहा.

" अच्छा" उसने शरारतभरी हंसी बिखेरते हूए उसे दूर धकेला.

वह उसे फिरसे पकडनेके लिए लपका. वह उसके शिकंजेसे बचनेके लिए बेडसे निचे उतर गइ. जॉनभी अब उसे पकडनेके तडपने लगा. वह इधर दौडते हूए उसके पहूंचसे दूर दूर भाग रही थी. अब जॉनभी जिदपर अड गया. वहभी बेडसे निचे उतरते हूए उसके पिछे लपका. वह खिलखिलाती हूए सिढीयोंकी तरफ लपकी. वह भी उसका पिछा करने लगा.

सिढीयोंसे दौडते हूए आखीर अँजेनी टेरेसपर आकर पहूंची. जॉनभी उसके पिछे पिछे टेरेसपर पहूंचा. उपर टेरेसपर खुला आकाश, आसमानमें चमकती चांदनी और चांद की दूधसी सफेद रोशनी बहुत आकर्षक लग रही थी. और उपरसे चांदके रोशनीमें चमकता हूवा बहता पाणीभी दिख रहा था. वह उस चमकते बहते पाणीकी तरफ देखकर मानो खो सी गई.

" देखो देखो कितना सुंदर दिख रहा है वह चमकता पाणी " उसने कहा.

तबतक जॉनने पिछेसे आकर उसे अपनी बाहोंमे भर लिया था.

" लेकिन इस चांदकी रोशनीमें चमकते तुम्हारे चेहरेसे यकिनन सुंदर नही . " उसने कहा.

वह उसकी खुली लंबी, गोरी गोरी गर्दनके साथ अपने व्याकुल होठोंसे खेलने लगा.

उसका जिस्मभी अब तपने लगा था.

जॉनने उसे पलटाकर उसका चेहरा अपने चेहरेके सामने लाया और अपनी पकड और मजबुत करते हूए अपने गरम होंठ उसके होठोंपर रख दिए.

वहभी अब उसे आवेगके साथ प्रतिसाद देने लगी .

उसने उसके पिठको ढंके हूए उसके लंबे घने बालोको एक हाथसे बाजू हटाया और वह उसके टॉपकी पिठपर बंधी हूई लेस छोडने लगा.

अँजेनी उसके सिनेके बालोंसे खेलते हूए उसके शर्टके बटन निकालने लगी.

अब उन्हे एकदुसरेंके सांसमे भरी आर्द्रता और गर्मी महसूस हो रही थी.

" जॉन आय लव्ह यू व्हेरी मच" उसके मुंहसे अपनेआप निकल गया.

" आय टू" बोलते हूए उसने उसे टेरेसके खुले फ्लोवरपर अपने और उसके निकाले हूए कपडोका बिस्तर बनाकर धीरेसे फुलोजैसी नाजूकताके साथ उसपर लिटाया.

अब दोनोभी खुले टेरेसपर बिलकुल विवस्त्र होकर आवेगके साथ एकदूसरेसे लिपट गए थे.

चांदके सफेद रोशनीमें , बहते पाणीके मधूर संगीतमें, एकदुसरेकी उत्कट भावनावोंको प्रतिसाद देते हूए उस अंधेरी रातमें वे अपने मधूर मिलनमें प्यारसे धीरे धीर रंग भरने लगे.

क्रमश:..

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Ch-36: प्रपोज (शून्य-उपन्यास)

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अभीभी अँजेनी खानेके टेबलपर बैठी थी. टेबलपर जलाई मोमबत्तीयां आखीर बुझ गई थी. टेबलपर सिर्फ बचा था इधर उधर फैला हूवा मोम. उसके दिलका हालभी कुछ उस मोम जैसाही था. जल जलकर जमे जैसा. टेबलपर खाना वैसाका वैसा रखा हूवा था. राह देख देखकर थकनेके बाद वह कुर्सीसे उठ गई. उतनेमे घडीका गजर बजा. बारा बार. कोई मानो उसके दिलपर घांव कर रहा हो ऐसा उसे लग रहा था. रातके बारा बज चूके थे. .

वह बराबर आठ बजे यहांसे गया था... .

मतलब चार घंटे हो चूके थे. ...

वह शायद कॉटेजके आसपासही पहूंचा होगा...

वह खिडकीके पास जाकर बाहर झांककर देखने लगी. कॉटेजकी तरफ आनेवाला रास्ता एकदम सुनसान था. ना किसीकी आहट ना किसी वाहन के लाईट्स. वह काफी समयतक रास्ते पर आखे लगाए रास्ता ताकती रही. अचानक उसे दो दिए रास्तेसे सामने आते हूए दिखाई दिए. वे उसकी तरफही आ रहे थे. उसका चेहरा खुशीसे खील गया.

वही होगा ...

जरुर जॉन ही होगा ...

वह दूर रास्तेपर आगे सरकते गाडीके लाईटस की तरफ देखने लगी. जैसे जैसे गाडीके दिए नजदीक आने लगे उसका दिल खुशीसे नाचने लगा.

जॉनके बारेमै मैने संदेह नही करना चाहिए था ...

उसे अपराधी लगने लगा था. गाडी अब सामने चौराहे तक आ पहूची थी.

गाडी एक टर्न लेगी और फिर अपने कॉटेजके तरफ आयेगी. ...

लेकिन यह क्या ?...

गाडी चौराहेपर कॉटेजकी तरफ ना मुडते हूए सिधे सामने निकल गई....

फिरसे निराशा उसके चेहरेपर दिखने लगी. अपने मनकी विषण्ण भावना दूर करनेके लिए वह कमरेमे चहलकदमी करने लगी. बिच बिचमें वह खिडकीसे बाहर झांकती थी. सामने रस्ता फिरसे पहले जैसा खाली खाली दिखने लगा था. चहलकदमी करते हूए उसने फिरसे दिवार पर टंगे घडीकी तरफ देखा. साडे बारा बज चूके थे. जॉनका अभीतक कोई अता पता नही था. उसे अब अकेलपन का डर लगने लगा था. उसने फिरसे एकबार खिडकीसे बाहर झांका. उसकी आशा फिरसे अंकुरीत होने लगी. फिरसे गाडीके दो दिए उसे रास्तेपर सरकते हूए दिखाई दिए.

अभी जरुर वही होगा ...

वह फिरसे खिडकीके पास खडी होकर लाईट्सकी तरफ लगातार देखने लगी.

यह गाडी जॉनकी हो सकती है .. और नही भी हो सकती...

लेकिन दिल ऐसा होता है की आदमी को आशा लगाए देता है... ...

अचानक चौराहेपर आनेके बाद गाडीके दिए गायब हो गए.

क्या हूवा ?..

गाडी वहा रुकी तो नही ?...

या फिर गाडी आ रही है ऐसा सिर्फ आभास..?...

वह खिडकीसे हटकर फिरसे कमरेमे चहलकदमी करने लगी. अचानक उसे निचे गाडी के हॉर्नका आवाज आया. वह खिडकीकी तरफ दौडी और उसने बाहर झांककर देखा. जॉन गाडीसे उतर रहा था. उसके जानमे जान आगई. वह दरवाजेके तरफ दौडते हूए चली गई. दरवाजा खोलकर जॉनकी तरफ वह लगभग दौडते हूएही लपकी. सामनेसे जॉनभी दौडते हूए आ रहा था. वह दौडतेही जॉनकी बाहोंमे समा गई.

" कितना वक्त लगाया ? ..." वह जॉनके सिनेपर हलके हलके मुक्के मारते हूए बोली.

" कितनी घबरा गई थी मै .....मुझे तो लगा की तुम मुझे यही छोड जावोगे..." उसकी आंखोमें देखते हूए वह बोली.

" नासमझ हो... ऐसा कभी हो सकता है क्या ?" वह उसके कंधेपर हाथ डालकर उसे कॉटेजमे लाते हूए बोला.

दोनोभी एकदुसरेके कमर मे हाथ डाले सिढीयां चढने लगे.

" अबतो बोलोगे ... कहां गए थे?" उसने पुछा.

" बताता हूं ... बताता हू... थोडा सब्रतो करोगी" वह बोला.

अब दोनो कॉटेजमे आगए. अँजेनीने अंदर आतेही सामनेका दरवाजा बंद किया. और वह क्या बोलता है इसका बेसब्रीसे इंतजार करते हूए उसके आगे पिछे करने लगी. वह सिधा अंदर डायनींग टेबलके पास गया. वह भी उसके पिछे पिछे वहा गई. उसने फिरसे खानेके टेबलपर मोमबतीयां जलाई. घरके सारे लाईट्स बंद किये. अँजेनी कुछ ना समझते हूए सिर्फ उसके पिछे पिछे जा रही थी. उसने उसके कंधे को पकडकर उसे उसके सामने कुर्सीपर बिठाया.

" बैठो, बैठो .. मै तुम्हे बताता हू की मै कहा गया था..." वह उसे बोला.

वहभी उसके सामने बैठ गया. थोडी देर दोनो शांत बैठे रहे. फिर जॉनने उसकी आंखोमें देखते हूए उसके मुलायम हाथ अपने हाथोंमे लिए. मोमबत्तीयोंके रोशनीमें उसका चेहरा और ही निखर आया था. जॉनका आने के बाद यह क्या चल रहा है यह ना समझते हूए वह असमंजससी उसके तरफ देख रही थी.

" अँजेनी तूम मुझसे शादी करोगी ?" उसने उसके आंखोमे आखे डालकर देखते हूए उसे प्रपोज किया.

अँजेनीको तो एकदम भर आए जैसा हुवा.

लेकिन खुदकी भावनाए संभालते हूए वह बोली, " इज धीस सम काईंंड ऑफ जोक?"

" नही नही ... मै सिरीयसली बोल रहा हूं " वह बोला.

" देखो जॉन पहलेही तूम इतनी देर नही थे तो मुझे अकेलापन महसूस हो रहा था... कम से कम ऐसे वक्त ऐसा फालतू मजाक मत करो." वह बोली.

" नही अँजी ... मै मजाक नही कर रहा हूं " वह उसे विश्वास दिलानेका प्रयास करने लगा.

जॉनने उसे पहली बार प्यारसे 'अँजी' कहा था. वह उसकी आखोंमे देखकर उसकी भावनाए टटोलनेकी कोशीश करने लगी.

" तुम्हे सच नही लग रहा है ना ..."

उसने अपने कोटके जेबसे एक छोटा लाल बॉक्स निकालते हूए कहा ,

" यह देखो मैने तुम्हारे लिए क्या लाया है ..."

" क्या है ?" उसने प्रश्नार्थक मुद्रामें पुछा.

उसने बॉक्स खोलकर उसके सामने पकडते हूए कहा,

" एंंगेजमेंट रिंग ... ऑफ कोर्स इफ यू अॅग्री.."

उसने फिरसे एकबार उसे पुछा , " विल यू मॅरी मी प्लीज"

अँजेनीके आंखोमें आंसू तैरने लगे.

" इसके लिए गये थे तूम सिटीमें ?" उसका गला भर आया था.

उसने उसकी आंखोमें देखते हूए 'हां' मे अपनी गर्दन हिलाई.

वह कुर्सीसे उठकर खडी हो गई. वह भी अपने कुर्सीसे खडा हूवा. वह आवेगके साथ उसके बाहोंमे समा गई. .

" यस आय विल" उसके भरे हूए गले से शब्द निकले.

जॉनके चेहरेपर खुशी और समाधान फैल गया. वह अतीव आनंदसे उसे उठाते हूए उसे चूमने लगा. उसने फिर धीरेसे उसे निचे उतारते हूए बॉक्स से अंगूठी निकालकर धीरेसे उसकी तिसरी उंगलीमें सरका दी.

क्रमश:...

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Ch-35: चार घंटे उधार (शून्य-उपन्यास)

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रात हो चूकी थी. दोनोने मिलके खाना पकाया. खानेके टेबलपर सारे जिन्नस सजाके रखे. जॉनने कमरेमे अंधेरा करके टेबलपर मोमबतीयां लगाकर जलाई. दोनो टेबलपर मोमबतीके धूंदले रोशनीमे आमनेसामने एकदूसरेको प्यारसे निहारते हूए बैठ गए. खानेके जिन्नस वैसेही पडे हूए थे. उन्हे खाने पिनका कहां होश था. उनकी भूख प्यास गुम हो चूकी थी. अचानक उसे अहसास हूवा की जॉनका चेहरा फिरसे चिंतायूक्त होकर सोचमें डूब गया है. .

" हॅलो" उसने चुटकी बजाकर उसे अपने खयालोंसे बाहर लाने की कोशीस की.

" क्या सोच रहे हो?" उसने पुछा.

" यहांसे अगर गाडीसे शहर जाना हो तो कितना वक्त लगेगा ?" उसने अपने खयालोंसे बाहर आते हूए पुछा.

" लगेंगे डेड दो घंटे ... क्यो? क्यो पुछा?" उसने उसे पुछा.

" प्लीज तूम मुझे चार घंटेका समय दोगी ?"

" किसलिए ?" उसने पुछा. .

" एक अर्जंंट काम निकल आया है. दो घंटे जानेके लिए और दो घंटे आनेके लिए. बस सिर्फ चार घंटे... चार घंटेमे जाकर आता हूं. " वह उसके तरफ देखकर बोला.

उसका चेहरा मलीन हो गया.

" प्लीज " वह उसे रिक्वेस्ट करते हूए बोला.

" जाना जरुरी है क्या ?" वह र्नव्हस होते हूए बोली.

" हां बहुत जरुरी है " उसने कहा.

" लेकिन ऐसा क्या काम निकल आया ?" उसने पुछा.

" वह मै तुम्हे अभी नही बता सकता. लेकिन उधरसे वापस आनेके बाद जरुर बताऊंगा." वह उसका मूड ठिक करनेके लिए कुर्सीसे उठते हूए, हंसते हूए बोला.

वह कुछ बोले इसके पहलेही वह तेजीसे बाहरभी गया था. 'ठक..ठक' सिढीयां उतरनेका आवाज आने लगा. वह उठकर खिडकीके पास गई. खिडकीसे वह उसे गाडीतक जाते हूए देखती रही. गाडीके पास जाकर उसने मुडकर खिडकीकी तरफ देखा.

" तूम चिंता मत करो . बराबर चार घंटेमे मै वापस आवूंगा " निचेसे वह जोरसे बोलते हूए गाडीमें बैठ गया.

'खाट' गाडीका दरवाजा उसने जोरसे खिंच लिया. उसका दिल जोरजोरसे धडकने लगा. उसने गाडी शुरु कर खिडकीसे उसे 'बाय' किया और वह निकल गया. उसके चेहरेपर फिरसे मलिनता दिखने लगी. चार घंटेके लिए क्यों ना हो वह उसे बेचैन कर चला गया था.

वह क्यो गया होगा ?...

वह वापस तो आयेंगा ना ?...

या सानीजैसा उसे बिचमेंही मंझधारमें छोड जायेगा ?...

उसका सोच श्रुंखला शुरु हूई.

क्रमश:....

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Ch-34B: फिशींग (शून्य-उपन्यास)

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थोडी देर दोनो शांत थे.

फिर जॉन ने कहा " अब मै एक पहेली पुछता हूं."

अँजेनीने आंखोहीसे 'हां' कहा.

" नंबर शून्य नंबर एट को क्या बोला होगा?" जॉन ने पुछा.

शून्य ... शून्यका जिक्र होतेही अँजेनीके चेहरेपर एक उदासी छा गयी. उसके चेहरेपरसे वह अल्लड हंसी गायब हो चूकी थी. जॉनके खयालमें आया की उसने शून्यका जिक्र नही करना चाहिए था.

" आय अॅम सॉरी..." वह उसकी पिठ थपथपाते हूए बोला.

वह कुछ ना बोलते हूए पाणीमें हूक हिलाने लगी.

" रियली आय अॅम सॉरी ... मेरे खयालमेंही नही आया" उसने फिरसे कहा.

" इट्स ऑलराईट ..." वह खुदकी भावनाए संवारते हूए बोली. " तूमही बोलो ... मै नही बता पा रही हूं."

" क्या ?" जॉनने पुछा.

" अरे शून्य नंबर एट को क्या बोला वह बतावो. " वह फिरसे उल्लड होने की चेष्टा करते हूए बोली.

जॉन कुछ नही बोला.

" बोलो ना " वह उसका चेहरा अपनी तरफ करते हूए बोली.

जॉन उसकी तरफ देखकर हंसते हूए बोला. " हार गई ...इतने जल्दी. "

" हां ... बोलो ना. " वह उत्सुकतापुर्वक बोली.

" शून्य नंबर एट को बोला ... नाईस बेल्ट" जॉन हंसते हूए बोला.

" अरे वा...नाईस "

वहभी उसके साथ हंसने लगी.

काफी समय दोनो चूप थे. दोनोभी अपने अपने हूक्स हिलाकर देखनेमें व्यस्त थे.

" तुम्हे मछली पकाने आती है ?" अँजेनीने जॉनके पास खिसकर कहा.

अपना भारी लगता हूवा हूक खिंचकर देखते हूए जॉनने कहा " नही"

" फिर हम मछलियां क्यो पकड रहे है ?" अँजेनीने पुछा.

" अरे ... क्यो मतलब खाने के लिए" जॉन उसकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए बोला.

" फिर इसका कोई फायदा नही " अँजेनीने कहा.

" मतलब ? "

" मतलब मुझेभी मछलीयां पकाना नही आता"

" क्या? " वह आश्चर्यसे बोला.

" हां, अगर तुम्हे वैसेही बिना पकाये हूए खानेकी हो तो कोई बात नही. " वह मजाकमें बोली.

" तुम्हेभी नही बनाने आती ? कोई बात नही हम पकाकर तो देख सकते है... ट्राय करनेमें क्या दिक्कत है..? " उसने सुझाया.

" और अगर नही पका पाये तो"

" तो जैसे बनती है वैसीही खा एंगे. कमसे कम बिना पकी खानेकीतो नौबत तो नही आयेंगी. " वह हंसते हूए बोला.

इतनेमें अँजेनीको अहसास हूवा की उसका हूक भारी लग रहा है. उसने हूक हिलाकर देखा. शायद उसके हूकमें मछली अटक गई थी. उसने अपना हूक लपेटना शुरु किया. एक भूरे शेडकी सफेद मछली छटपटाते हूए हूकके साथ उसके पास आने लगी. उसने धीरेसे उसे हूकसे निकालकर बगलमें पत्थरपर रखे टोकरीमें डाला और वह फिरसे हूक पाणीमे छोडने लगी. इतनेमें तितलीजैसा कुछतो उसके नाकको लगके पाणीमें गिरे जैसा उसे लगा. उसने नाकको हाथसे पोंछ लिया और फिर उसी हाथसे अपने चेहरेपर लहराती लटोंको संवारते हूए हूक पाणीमे छोडनेमें व्यस्त हूई.

जॉन अचानक उसकी तरफ देखकर जोर जोरसे हंसने लगा.

उसने जॉनके तरफ देखकर पुछा , " क्या हूवा ?"

" तुम्हारी मछली कहा है ? " उसने पुछा.

उसने पिछे रखे टोकरीमें देखा तो मछली वहां नही थी.

" कहा गई ? " वह इधर उधर देखने लगी.

" सचमुछ कहा गई ?" वह मुस्कुराते हूए बोली.

उसे मजा आ रहा था.

" गयी वहां पाणीमें छलांग लगाकर... और साथमें तुम्हारे नाकपर चपटी मारकर" वह फिरसे जोरसे हंसते हूए बोला.

" अच्छा तो वह मछली थी... " उसके खयालमें आया तो वह अपने नाकको हाथ लगाते हूए बोली और वह भी उसके साथ जोरसे हंसने लगी.

क्रमश:...

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Ch-34A: फिशींग (शून्य-उपन्यास)

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बहते पाणीके धारके दोनो तरफ कॉटेजेसका समूह बसा हूवा था. उस कॉटेजेसके पिछे उंचे पर्बत अपनी गोदमें हरीयाली और पेढोंकी मखमल लिए शानसे खडे थे. उपर आसमानमें उन पर्बतोंके टीलोंसे खेलते इतराते सफेद बादल. और पुरा आसमंत उस बहते पाणीके मधूर ध्वनीसे मानो डोल रहा था. और ऐसेमें आजूबाजूके पेढोंपर छिपे पंछी अपना चहचहाट भरा संगीत बिखेर रहे थे.

नदीके पाणीमें पैर डूबोकर एक पत्थरपर जॉन और अँजेनी बैठे हूए थे. दोनोंके हाथमें एक-एक मछली पकडनेका पाणीमें छोडा हूवा हूक था. दोनो बडे खुश दिख रहे थे. अँजेनीका जॉनकी मजाक करने मूड हूवा. उसने उसे एक पहेली पुछी.

" एक बार नंबर बारा बार में गया और उसने बारटेंन्डरको व्हिस्की लाने को कहा. लेकिन बार टेन्डरने उसे

वहांसे भगा दिया... उसने उसे क्यो भगाया होगा?"

अँजेनीने एकबार मछली पकडनेका हूक हिलाकर देखा और फिर जॉनकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" अब यह नंबर्स कबसे बारमें जाने लगे ? " जॉनने उसे छेडते हूए कहा. .

" बोलोना ..." अँजेनी प्रेमभरी नजरोसे उसके तरफ देखते हूए बोली.

" मुझे लगता है यह हाथी और चिंटीके जोक्स जैसा कुछ होगा" जॉन हसते हूए बोला.

" तो फिर बोलोना ... बार टेन्डरने नंबर बाराको क्यो भगा दिया? " अँजेनी उसके पिछेही पड गई.

" नही बाबा ... मुझे तो कुछ समझमें नही आ रहा है... तूमही बोलो? " जॉनने अपनी हार मानते हूए कहा.

" इतने जल्दी घुटने टेक दिए ... ." अँजेनी उसे चिढाते हूए बोली.

" नही.... मै तो कुछ अंदाजा नही लगा पा रहा हूं ... हां मैने हार मानली ... बस ... अब तो बोलोगी?" जॉन जवाब सुननेके लिए बेताब हो गया था.

" व्हेरी सिंपल ... क्योंकी नंबर बारा अंडरएज था ... अठारा सालसे कम " अँजेनी हसते हूए बोली.

" अच्छा ऐसा ... अरे हां... सचमुछ .." जॉनभी हंसने लगा.

" अब और एक बताना .." अँजेनी पाणीमें छोडा हूवा हूक हिलाकर देखते हूए बोली.

" हां ...बोलो " जॉनने उसे अपनी दिलचस्पी दिखाते हूए कहां.

" नंबर एट नंबर थ्री को क्या कहेगा? " अँजेनीने पुछा.

" अब यह नंबरर्स एक दुसरेको बोलने भी लगे?" जॉनने फिरसे उसे छेडते हूए कहा.

" बोलने का क्या ... कुछ देरके बाद वे एक दुसरेसे प्यारभी करने लगेंगे... अपने जैसे" अँजेनी उसे वैसाही जवाब देते हूए बोली.

" पॉसीबल है .... शायद इसलिएही ... 99, 66, 63, 69 ये सारे कोडवर्ड बने होंगे " जॉनने अपनी एक आंख दबाते हूए कहां.

अँजेनीने लाजसे लाल लाल होते हूए अपनी गर्दन निचे झुकाई.

थोडी देरसे गर्दन उपर कर शरमाते हूए उसके तरफ देखते हूए उसने कहा -,

"अच्छे खासे बदमाश हो ..."

जॉन सिर्फ उसकी आंखोंमे देखते हूए मुस्कुरा दिया.

" बोलोना .. नंबर एट नंबर थ्री को क्या कहेगा ?" अँजेनी उसके सिनेपर झूट झूट मारते हूए बोली.

" नही बाबा ... यह भी मै हार गया ... तूमही बता दो " जॉन बोला.

" अरे ...नंबर एट नंबर थ्रीको बोलेगा ...वील यू शट अप यूवर माऊथ प्लीज"

" अरे वा अच्छा है... " जॉनने अपना मछली पकडनेका हूक हिलाकर देखते हूए कहा.

" अच्छा और एक ... नंबर एटने नंबर सिक्सको नंबर नाईनकी तरफ उंगली दिखाकर समझाया... क्या समझाया होगा ?" अँजेनीने पुछा.

" देखो तुम्हारे नंबर एक एक स्टेप आगेही जा रहे है... पहले बारमें गए... फिर बोलने लगे... और अब एक दुसरेको समझानेभी लगे... अब आगेकी स्टेप ..."

जॉन आगे कुछ बोले इसके पहलेही अँजेनीने मजाकमें उसे अपना मुक्का मारनेकी ऍक्टींग की.

" हां बोलता हूं... बोलता हूं बाबा ." जॉन उसे डरे जैसा दिखाते हूए बोला., " ... क्या समझाया होगा?... क्या समझाया होगा? .... हां वह बोला होगा यह क्या हमेशा तुम उलटे खडे रहते हो... देखो वह नंबर नाईन कितना होशीयार है ... कैसा हमेशा सिधा खडा रहता है... ." जॉनने मजाकमें कहा.

" अरे वा... यू आर राईट..." अँजेनी आश्चर्यसे बोली.

" क्या! बरोबर है ? " जॉन आश्चर्य और विस्मयसे बोला.

" यस ...यू आर अब्सल्यूटली राईट... पहले कभी सुना होगा तुमने..." अँजेनीको विश्वास नही हो रहा था.

" अरे नही ... सचमुछ मुझे मालूम नही था ... मैने ऐसेही अपना अंदाजा लगाया." जॉन बोला.

क्रमश:...

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Ch-33: एक धागा (शून्य-उपन्यास)

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कमांड2 फॅशन स्ट्रीटपर भीडसे रास्ता निकालते हूए सामने जा रहा था. उसे जानेकी बडी जल्दी थी, लेकिन चलते हूए बिचमें आते हूए लोगोंकी वजहसे वह तेज चल नही पा रहा था. वह लोगोको लगभग बाजू धकेलते हूए आगे जा रहा था. उसी भीडमें दुसरी जगह खडे डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सने कमांड2की संशयभरी गतिविधीयां पहचान ली. वह बडी सावधानीसे, जैसे चिता अपने शिकारको घेर लेता है, उस तरह उसका पिछा करने लगा. कमांड2 डिटेक्टीवकी गतिविधीयोंसे अनभिज्ञ भीडसे रास्ता निकालते हूए आगे आगे जा रहा था.

बडी मुश्कीलसे आखीर कमांड2 भीडसे बाहर आ गया. भीडसे बाहर आतेही रुककर उसने इधर उधर अपनी नजर दौडाई. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्स उसके खयालमें ना आए इसलिए बगलकेही एक दुकानमें घुस गया. कुछ चिंताकी बात नही इसकी तसल्ली होतेही कमांड2 बगलके एक अंधेरे गलीमें घुस गया. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सभी उसके पिछे उस अंधेरे गलीमें घुस गया.

एक बिल्डींगके दिवारके पिछे छूपकर डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सने रास्तेके उस तरफ कमांड2को एक मकानके अहातेमें बडी सावधानीसे जाते हूए देखा. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सने अपनी चारो ओर देखते हूए वह किसीके नजरमें तो नही आ रहा है इस बातकी तसल्ली की. फिर कमांड2 गया था उस मकानकी तरफ देखा. वह अबतक उस मकानके अंधरेमें गायब हो चूका था.

क्रमश:...

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Ch-32: व्हॅकेशन (शून्य-उपन्यास)

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जॉनकी कार जैसी तेज गतिसे दौड रही थी उसी गतीसे उसके खयालात भी दौड रहे थे. उसके पास दाए तरफ अँजेनी बैठी हूई थी. जॉन गाडी ड्राईव्ह कर रहा था. वह भलेही जॉनके पास बैठी थी, लेकिन उसे अकेलापन महसूस हो रहा था. क्योंकी भलेही जॉन कारमें उसके पास बैठा हूवा था लेकिन उसके खयाल उसे कही औरही ले गए थे. धीरे धीरे गाडीने शहरका हिस्सा पिछे छोड दिया. अब रास्तेके किनारे सिर्फ कुछही घर खिडकीसे दिख रहे थे. धीरे धीरे वह भी दिखना बंद होगए. कुछ देर बाद गाडी चारो तरफसे हरे हरे पेढ, हरे भरे खेत, हरे टीलोंसे भरे स्वर्गतुल्य प्रदेशसे गुजरने लगी. रास्तेके दोनो तरफ आखोंको ठंडक पहूचानेवाली हरीयाली फैली हूई थी. अँजेनीने जॉनके तरफ देखा. वह अभीभी अपने सोचमें डूबा हूवा था.

" तूम भलेही मेरे पास बैठे हो लेकिन तूम अभीभी उस खुनके केसमें उलझे हूए लगते हो. " अँजेनी उसके तरफ देखकर बोली.

अँजेनीके बोलनेसे वह खयालोंसे बाहर आगया.

" हां.... मतलब..ऩही... वैसा नही.., " वह गडबडाकर बोला.

" मै समझ सकती हू की तुम्हारे बॉसने तुम्हारे बारेमें जो किया वह कुछ ठिक नही किया. लेकिन कभी कभी ऐसी चिजोंपर अपना कोई बस नही चलता. देखोना मेरे बारेमें इस नियतीने कहां ठिक किया.. " सानी की याद आकर वह बोली.

उसे क्या बोले कुछ समझमें नही आ रहा था. गाडी चलाते वक्त उसने सिर्फ उसकी तरफ एक प्रेम भरा कटाक्ष डाला.

इतनेमें वातावरणमें पाणी के बहनेकी आवाज गुंजने लगी.

" यहा कहीं वॉटर फॉल बह रहा है शायद... " वह बात बदलनेके उद्देशसे बोला.

" वो देखो उधर ... कितना सुंदर! " दु:खके सायेसे बाहर आते हूए अँजेनी उत्साहपुर्वक बोली.

उसके चेहरेपर किसी मासूम बच्चे जैसे भाव झलक रहे थे.

स्वच्छ शुभ्र पाणी मधूर आवाज करते हूए बह रहा था.

" वाव, कितना सुंदर!" उसने दर्शाए दृष्यकी तरफ देखकर जॉनके मुंहसे निकल गया. .

" कितनी समानता है आदमीके जिवनमें और इस पाणीमें " वह फिरसे दुखकी सायेमें प्रवेश करते हूए बोली.

" कैसे क्या ?" जॉनने पुछा.

अनजानेमें जॉनके चेहरेपर अपराधी भाव आगए. अगर मै सोचमें डूबा नही होता तो उसे उसकी दर्दभरी यादें नही आती. अब उसके बिते दिनोंकी यादोंसे बाहर निकालनेके लिए वह उससे जादासे जादा बोलनेकी कोशीश करने लगा.

" देखो ना. यह पाणी एकबार उपरसे गिरा की उसकी जीवनयात्रा शुरु हो जाती है और फिर उस यात्रा का कोई अंत नही होता. वह पाणी आखीर समुंदरतक पहूंचनेतक उसे रुकनेकी कोई गुंजाईश नही होती. " अँजेनी भावूकतासे बोली.

" वह उधर देखो..., हिरन कैसे कुद कुदकर दौड रहे है. " जॉन अचानक एक तरफ निर्देश करते हूए बोला.

जॉनकी तरफसे खिडकीसे स्प्रींग बग्जका एक बडासा समुह गाडीकी आहटसे कुदकर दौडता हूवा दिखाई दिया.

" हाऊ स्वीट! कितना सुंदर!" अँजेनीके मुंहसे निकल गया.

उसकी आंखे खुशीसे चमक रही थी.

तबतक गाडी आगे निकल गई और वह समुह पिछे रह गया. अँजेनी पिछे मुड मुडकर गाडी के पिछेके ग्लाससे वह समुह जबतक दिख रहा था तबतक देख रही थी.

" अपना कॉटेजभी आगे कही इसी झरनेके किनारे होगा " जॉनने कहा.

" क्या वहां भी यह झरना है ! " वह खुशीसे बोली.

" हां वह तो ऐसाही कुछ बोल रहा था. " जॉनने कहा.

क्रमश:...

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Ch-31: पॉलीटीक्स (शून्य-उपन्यास)

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जॉन ड्रॉइंग रूममे बैठकर धीरे धीरे व्हिस्कीके घूंट ले रहा था. उसके चेहरेसे साफ झलक रहा था की वह डिस्टर्ब था. इतनेमें उसकी डोअर बेल बजी. वह व्हिस्कीका ग्लास टीपॉयपर रखकर खडा होगया. सामने जाकर उसने दरवाजा खोला. दरवाजेमें उसके सामने अँजेनी खडी थी.

" मै कितने देरसे तुम्हारा मोबाईल ट्राय कर रही हूं. तुम्हारा मोबाईल बंद है क्या?" अँजेनी दरवाजेसे अंदर आते हूए बोली.

" प्रेसवालोंके फोनपर फोन आ रहे है... इसलिए बंद करके रखा" जॉन दरवाजा बंद करते हूए बोला.

अँजेनीने ड्रॉइंग रूममें आनेके बाद टीपॉयपर रखा व्हिस्कीका ग्लास देखा और फिर जॉनके चेहरेके तरफ गौरसे देखने लगी.

" क्या हूवा ? अपसेट दिख रहे हो" अँजेनीने उसे पुछा.

" बैठो ... बताता हूं " उसने खुद एक कुर्सीपर बैठते हूए और अँजेनीको सामने रखे कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए कहा.

वह सामने रखी हूई कुर्सी उसके तरफ खिसकाकर उसके पास जाकर बैठ गई। उसने व्हिस्कीका ग्लास फिरसे उठाकर होठोंको लगाया ।

" ऐसे अंदर ही अंदर गुमसुम रहनेसे अच्छा है अपने प्रॉब्लेम्स अपने किसी करिबी व्यक्तीके साथ शेअर करना ' अँजेनी उसका हाथ अपने हाथमें लेते हूए बोली ।

उसने उसका दुसरा हाथ उसके हाथपर रख दिया ।

" क्या कुछ डिपार्टमेंटमें प्रॉब्लेम हूवा ?" अँजेनीने उसका हाथ थपथपाकर कहा ।

" बोलता हूं... सब कुछ बोलता हूं. " व्हिस्कीका ग्लास बगलमें रखते हूए वह बोला ।

जॉनने एक दीर्घ सांस ली और उसे बोलने लगा -


जॉन उसके बॉसके , यानीकी शहर पोलीस शाखा प्रमुखके सामने बैठा हूवा था ।

" सर, उस बिल्डींगके निचे मिले शवकी तफ्तीश कर यह कुछ जानकारी हासील की है।" जॉन अपने सामने रखे फाईलके पन्ने उलट पुलटकर देखते हूए बोला।

बॉसने सिर्फ " हां " कहा।

जॉनके बॉसने अपने मुंहमें रखे सिगारका एक बडा कश लिया ।

" उस शवके जेबमें बंदूक मिली ... अबतकके तिनो खुन उसी बंदूकसे हूए है ।."

बॉसने अपने मुंहमेंके सिगार की राख सामने टेबलपर रखे अॅश ट्रेमे झटकते हूए कहा ,

" मतलब हम जिस खुनीकी तलाश कर रहे थे वह अपने आपही, मरा हूवा क्यों ना हो, अपने शिकंजे मे आ पहूंचा । "

" सर, मुझे लगता है इतने जल्दी इस नतिजेतक पहूंचना जल्दबाजी होगी. " जॉनने कहा.

" देखो जॉन, अब पुलिसके गलेतक पाणी पहूंच चूका है... अब यह शब्दोंसे खेलनेका वक्त नही है। फिलहाल हालात सामान्य होनेके लिए हमें कुछतो ठोस कदम उठाना जरुरी है । और अपना निष्कर्ष गलत है ऐसा तुम्हे क्यो लगता है ? " बॉसने जॉनके आंखोमें लगातार देखते हूए कहा.

" वैसी बहुत बाते है ." जॉनने फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.

" उदाहरणके तौरपर ? " बॉसने सिगार बुझाते हूए पुछा.

" नंबर एक - असली खुनीने किसीको मारकर उसके जेबमें बंदूक डाली होगी .. ऐसा भी हो सकता है... . और यह सब वह अपने उपरका ध्यान दुसरी तरफ हटानेके लिए कर सकता है...

नंबर दो - जब हमने वह मरे हूए आदमीके घर पर रेड किया तब उसके कॉम्प्यूटरकी हार्डडिस्क गायब थी. उसके पिछे अलग अलग हेतू हो सकते है... जैसे वह अकेला ना होकर उसके साथ बहुत सारे साथी उसको सामील हो .. जैसे मैने पहले बताया वैसे खुनी दुसराही कोई होकर वह ये सब अपनेपरका ध्यान दुसरी तरफ हटानेके लिए कर सकता है... या फिर वह एक मामुली चोरीभी हो सकती है... "

जॉन बॉसकी प्रतिक्रिया देखनेके लिए रुका.

" हां , और कुछ " बॉसने उसे और कुछ कहना है तो आगे कहने के लिए सुचीत करते हूए कहा.

" नंबर तीन - इस बार खुनकी जानकारी खुनीने ना देते हूए किसी औरही आदमीने दी थी ... क्योंकी जहांसे फोन आया था वहांसे खुनीको खुनके वक्त तक खुनके जगह पहूंचना लगभग नामुमकीन था. और अगर इस बारका अपवाद अगर छोडा तो इसके पहले हरबार खुनीने खुनके जगहसेही फोन किया था. कोई उनकेही टीमका आदमी बेईमानीपर उतर आया हो या किसीको इसकी भनक लगी हो जो की अपनी पहचान बताना नही चाहता हो"

जॉनने बचा हूवा सब लगभग एकही सांसमें बोल दिया और अब वह बॉसके प्रतिक्रिया की राह देखने लगा.

जॉनका बॉस उसके कुर्सीसे धीरेसे उठ गया. खिडकीके बाहर देखते हूए उसने नई सिगार सुलगाई. फिर सिगारके लंबे कश लेते हूए उसने जॉनके इर्द गिर्द एक चक्कर लगाई -

" होगया तुम्हारा ?" बॉसने उसके तरफ घुरकर देखते हूए कहा.

जॉनने सिर्फ अपना सर हिलाया.

" देखो जॉन, तुम्हे पताही है की इस घटना की वजहसे अपने पुलिसकी प्रतिमा कितनी मलीन हो चूकी है. और तुम जो कह रहे हो वह सारी संभावनाएं है. उसका अपने पास कोई ठोस सबुत नही है. "

जॉनका बॉस कमरेमें चहलकदमी करते हूए बोल रहा था.

" लेकिन सर.." जॉनने बिचमें बोलनेका प्रयास किया.

उसे रोकते हूए बॉसने कहा,

" मुझे लगता है इस केसपर काम करके और लगातार तणावके वजहसे तूम शारिरीक और मानसिक तरहसे थक चूके हो... और थकनेके बाद बहुत बार ऐसा होता है... आदमी गडबडा जाता है... और फिर वह तरह तरहके निष्कर्ष निकालने लगता है."

" नही सर, वैसा नही ." जॉनने अपना पक्ष रखने का प्रयास किया.

" देखो , मै क्या कहता हूं ध्यान देकर सुनो " बॉस अब कडे स्वरमें बोल रहा था,

" अब एक प्रेस कॉन्फरंस लेनी पडेगी. उसमें एक साथ केसकी सारी जानकारी देकर अपने पुलिस डिपार्टमेंटकी बची कुची लाज रखनी पडेगी. और फिर ..... और फिर तुम एक महिनेके लिए छुट्टीपर चले जावो... मै तुम्हारी छुट्टी अभी सँक्शन कराये देता हूं ... फिर तुम तुम्हारी दोस्त अँजेनीको लेकर किसी हिलस्टेशनको जावो... छुट्टीया मनाने के लिए... बाकी चिंता तुम मत करो... मै सब बंदोबस्त करता हूं. "

जॉनने एकदम चौंककर उसके बॉसकी तरफ देखा. अपने बॉसको अपने और अँजेनीके बारेमें कैसे पता चला? उसकी आंखोमे अभीभी आश्चर्य और अविश्वास तैर रहा था. .

" आय अॅम सॉरी... इट्स यूवर पर्सनल मॅटर... बट इटस् माय प्रोफेशनल वे ऑफ वर्कींग .... मुझे सबपर पैनी नजर रखनी पडती है"

जॉन कुछ बोले इसके पहलेही बॉसने कुर्सीके पिछे टंगा हूवा अपना ओव्हरकोट उठाया और वह दरवाजेकी तरफ जाने लगा.

दरवाजेमें रुककर जॉनकी तरफ पलटकर देखते हूए वह बोला, " कल सुबह दस बजे मैने प्रेस कॉन्फरंस बुलाई है. क्या बोलना है वह सब मै देखता हूं. यू जस्ट बी देअर."

जॉनके जवाब की राह ना देखते हूए बॉस खाट खाट जूतोंका आवाज करते हूए वहांसे निकल गया. जॉन संभ्रमसे कभी बॉसको जाते हूए देख रहा था तो कभी अपने हाथमेंके फाईल और कागजादोंकी तरफ देखते हूए वहां खडा रहा.

क्रमश:...

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Ch-30B: प्रेस कॉंन्फरंन्स (शून्य-उपन्यास)

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अब प्रेस कॉन्फरन्समें सिर्फ शहर पोलीस शाखाप्रमुखके आनेकी राह थी. इतनेमें टेबलके उस तरफ थोडी चहल पहल दिखाई दी. इधर टेबलके इस तरफ बैठे प्रेसके लोगोंमें खुसुरफुसुर शुरू हूई. प्रेसके लोगोंको शहर पोलीस शाखाप्रमुख आते हूए दिखाई दिए. अपने बॉसके पिछे पिछे जॉन अपने भारी कदमोंसे चल रहा था. आखीर टेबलके उस तरफ शहर पोलीस शाखाप्रमुख और जॉन ऐसे दो लोग खडे हूए. टेबलके इस तरफ प्रेसवालोंकी गडबड शुरु हूई. इतने दिनोंसे नासूर की तरह तकलिफ दे रहे सिरियल किलरके केसके बारेमें लोगोंको जानकारी देनेके लिए प्रेस कॉन्फरन्स बुलाई गई थी.

प्रेसवालोके सवालोंका तांता शुरु हो गया -

" खुनी कौन है?"

" उसे जिंदा क्यो पकडा नही गया?"

" उसे ढूंढनेके लिए इतना वक्त क्यों लगा ?"

शहर पोलीस प्रमुखने एक गहरी नजर सारे प्रेसवालोंपर डाली.

" वन बाय वन" शहर पोलीस प्रमुख अपने कडे स्वरमें बोले.

" यस यू" शहर पोलीस प्रमुखने एक गरीब दिख रहे प्रेसवालेके तरफ इशारा किया.

" सर, आप किस बातसे यह कह रहे है की बिल्डींगसे गिरकर मरा पाया गया आदमीही खुनी था ?" एक टीव्ही चॅनलवालेने सवाल किया.

" अबतक मिले तिनो डेड बॉडीसे मिली बंदूक की गोलीयां उसकेही बंदूकसे फायर कि हूई थी... यह हमारे टेक्नीकल टीमने साबीत किया है.. और खुनीके कोटकी जेबसे एक खंजर मिला... उस जेबके कपडेपर तिनो खुन किये गये लोगोंके खुनके दाग मिले..." शहर पोलीस प्रमुखने विस्तारसे सब बताया.

" पुलिस उस खुनीको जिंदा क्यो नही पकड पाये..?... अगर जिंदा पकड सकते तो और भी कुछ जानकारी मिली होती. जैसे खुन करनेकी वजह... इत्यादी... " दुसरे एक प्रेसवालेने झटसे अपना मुंह बिचमे घुसाकर सवाल पुछा.

" खुनकी जानकारी मिलतेही ताबडतोड हम घटनास्थल पहूच गए. ... जब हम वहां पहूंचे, खुन हो चूका था लेकिन खुनी बिल्डींगसे बाहर नही निकला था... फिर हमने बिल्डींगको चारो तरफसे घेर लिया... इसलिए खुनीके वहांसे भागनेके सारे रास्ते बंद होगये थे... और उसे सुसाईड करनेके सिवा कोई रास्ता नही बचा था... " शहर पुलिस प्रमुखने विस्तारसे बताया.

जॉनने अपने बॉसकी तरफ आश्चर्यसे देखा. बॉस झुट बोल रहा है इस बातका नही तो वह कितनी सफाईसे झुठ बोल सकता है इस बातका जॉनको आश्चर्य लग रहा था.

" क्या ? खुनीने सुसाईड किया ? लेकिन कुछ लोगोंके अनुसार वह उपरसे गिर गया होगा..." एकने प्रतिप्रश्न किया.

" टेरेसको साडेतीन फिट उंची दिवार होते हूए वह वहांसे गिर गया ऐसा कहना गलत होगा.." शहर पुलिस प्रमुखने अपना तर्क प्रस्तुत करते हूए जवाब दिया.

" खुनके बारेमें पुलिसको किसने जानकारी दी थी.?" एक न्यूजपेपर रिपोर्टरने पुछा.

" अब ये सारी बाते बताना जरा मुश्कील है. हमारे जासूस सबतरफ फैले रहते है... उसमेकेही एकने हमे यह जानकारी दी... कुछ लोग अपना नाम गुप्त रखना चाहते है... तो कुछ लोगोंकी उनका नाम जाहिर करनेमें कुछ दिक्कत नही रहती... कुछभी हो आखीर खुनी, मरा हूवा ही क्यो ना हो... पकडा गया यह सबसे महत्वपुर्ण ... इसलिए इसके बाद न जाने कितने खुन होने वाले थे वह टल गए है... और उसका पुरा श्रेय मै हमारे काबील पुलिस डिपार्टमेंटके बिना रुके किये परिश्रमको देता हूं. उनको उनके मजबुत नेटवर्ककी वजहसे जानकारी मिली... सिर्फ जानकारीही नही वे वहां वक्तपर पहूंच गए और खुनीको भागने के सारे रास्ते बंद हो गए... " शहर पोलीस प्रमुख अब वहांसे खिसकनेके प्रयासमें था.

वे वहांसे खिसकनेके लिए मुडनेहीवाले थे की और एक रिपोर्टरने सवाल किया -

" सर, उस खुनीका उद्देश क्या होगा?"

" सिरीयल किलर मतलब वह एक तरहका पागलही होता है ... नही क्या... उनको खून करनेके लिए कोई उद्देश वगैरे कुछ नही लगता... अब ऐसे दिमागसेही पागल लोगोंका क्या उद्देश होगा यह बोलना तो जरा मुश्कील है... " पोलीस शाखाप्रमुख मुस्कुराते हूए बोले... वह देखकर वहाके आसपासके बाकी लोगभी जिसने सवाल पुछा उसके तरफ देखकर व्यंगतापुर्वक हंसने लगे.

बेचारा सवाल पुछनेवाला मायूस होगया.

अब शहर पोलीस प्रमुख सिधा जवाब नही दे रहे थे.

" सर , खुनीके घरके काम्प्यूटरकी हार्डडिस्क किसीने गायब की ... क्या यह सच है...?" किसीने शहर पोलीस प्रमुखका ध्यान आकर्षित करनेका प्रयास करते हूए पुछा.

शहर पोलीस प्रमुख उसकी तरफ ध्यान ना देते हूए बोले,

" मुझे लगता है की मैने लगभग सारे सवालोंके जवाब दे दिए है... और इस केसकी सब जानकारी आप लोगोंको दी है... . थँक यू"

शहर पोलीस प्रमुख जो एक बार पलटकर वहांसे जानेको निकले की वे वहांसे बाहर निकलने तक रुकेही नही. उनके पिछे सर निचे झुकाकर जॉन चूपचाप चल रहा था.

क्रमश:...

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Ch-30A: प्रेस कॉंन्फरंन्स (शून्य-उपन्यास)

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खुले मैदानमे एक उंची जगह एक टेबल रखा हूवा था. टेबलपर अलग अलग टीव्ही चॅनल्सके टॅग लगाए हूए मायक्रोफोन रखे हूए थे. टेबलके सामने खुली जगहमें कुछ कुर्सीयां रखी हूई थी. वहां प्रेसवालोंने भीड की हूई थी. कुछ प्रेसवाले कुर्सीपर बैठकर प्रेसकॉन्फरन्समें शहर पुलीस शाखाप्रमुख आनेकी राह देख रहे थे. कुछ पत्रकार छोटे छोटे समूह बनाकर कुछ चर्चा कर रहे थे. चर्चा वही. फिलहाल शहरमें चल रहे खुनी श्रुंखलाकी.

" बहुत दिनोंसे वही वही खबरें एक रुटीनसा होगया था. इस खुनकी वजहसे वह रुटीन दूर होगया ऐसा लगता है. " एकने कहा.

" मतलब, तुम्हे कही ऐसा तो नही कहना है की यह खुन हो रहे है यह अच्छा हो रहा है.." दुसरेने व्यंगपूर्वक कहा.

" अरे वैसा नही " पहला गडबडाकर बोला.

" अरे मतलब वैसाही है. लेकीन खुले ढंगसे कहभी नही सकते..." दुसरा हसकर बोला.

फिर दोनो एकसाथ हसने लगे.

" साला, क्या करेंगे अपना कामही कुछ ऐसा है... दुसरे लोगोंके जानपर हमें खबरें बनानी पडती है... " और एक तिसरा बोला.

" हां वही तो... अगर खबरें ना हो तो अपना पेट कैसे भरेगा... ?"

" अरे जब मै नया नया इस क्षेत्रमें आया... तब रोज सुबह भगवानसे प्रार्थना करता था ... हे भगवान, कमसे कम आजतो एक खबर मिलने दे..."

" मतलब... संक्षेपमें... भगवान आज तो भी कोई अॅक्सीडेंट , खून'

' ... या कुछतो चटपटा घटीत होने दे. "

पहिलेने तिसरेकी ताली लेते हूए अपना वाक्य पूरा किया.

दुसरी तरफ टी व्ही चॅनल्सवाले अपने कॅमेरे लेकर तैयार थे. उनमेंभी चर्चा शुरू थी.

" अरे रोज कितना बुरा घटीत होता है इस दुनियामें..." एकने कहा.

" यह अच्छा है की हमें वह सब अपने इस खुली आंखोसे देखना नही पडता..." दुसरेने कहा.

" खुली आंखोसे नही तो कैसे देखते है हम?" दुसरेने आश्चर्य व्यक्त करते हूए कहा.

" अरे मतलब यह कॅमेरा रहता है ना अपने आखोके सामने.."

दोनो खिलखिलाकर हसने लगे.

क्रमश:...

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Ch-29: बॉसका फोन (शून्य-उपन्यास)

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कमांड2ने अपनी जगह बदली थी. वह अपने नए अड्डेमें तहखानेमें कॉम्प्यूटरके सामने बैठा हूवा था. उसका चेहरा अभीभी खुशीसे दमक रहा था.

कमांड1को मारनेके बाद अपना आगेका रास्ता आसान होगया...

वह सोच रहा था. वह देखनेमेतो कॉम्प्यूटरपर मेल चेक कर रहा था लेकिन उसके दिमागमे और ही कुछ चल रहा था. इतनेमे उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलपर नंबर देखा. लेकिन मोबाईलके डिस्प्लेपर कुछभी नंबर नही आया था.

किसका फोन होगा ?...

पुलिस तो नही होगी?...

उसने मोबाईलका एक बटन दबाकर मोबाईल कानको लगाया,

" हॅलो " टर्राए हूए स्वरमें वह बोला.

उधरसे कुछभी आवाज नही आ रहा था. सिर्फ 'घरघर' ऐसा किसी चिजका आवाज आ रहा था.

" हॅलो... कौन बोल रहा है ? " उसका आवाज अब सौम्य हूवा था.

" बॉस, मै बॉस बोल रहा हूं " उधरसे आवाज आया.

" बॉस? यस बॉस " कमांड2 खुदको नार्मल रखनेकी कोशीश करते हूए बोला.

" कमांड1का पता चला मुझे" बॉसने कहा.

" हां सर, बहूत बुरा हुवा " कमांड2 सिचूएशनको समझनेकी कोशीश करते हूए बोला.

" किसने मारा उसे " बॉसने पुछा.

" मारा ? मुझे तो लगा वह उपरसे निचे गिर गया होगा. " कमांड2ने मासूमियतसे कहा.

" लगा ? मतलब ? तूम नही थे उसके साथ? " बॉसने आश्चर्यसे पुछा.

" नही सर, मै नही था. आपने दिए वक्तसे एक दिन पहले और वह भी बुरे वक्तमें वह जा रहा था इसलिए मै नही गया उसके साथ. वह बोल रहा था की एक बार मुझे आजमाकर देखना है की बॉसका कहां कहातक बराबर आता है. " कमांड2 बोल रहा था.

" फिर देखा ? देखनेके लिए जिंदा भी रहना पडता है... मूरख! मुफ्तमे अपनी जान गवा बैठा. जहरका इम्तेहान लेने निकलाथा बेवकुफ. " बॉस गुस्सेसे बोल रहा था.

" फिर पुलिसको किसने बताया ? और इतने जल्दी पुलिस कैसे क्या आगई वहा? " बॉसने आगे पुछा.

" बॉस उसनेही बताया होगा. उसने पिछले बारभी पुलिसको बतानेकी जरा जल्दीही की थी. " कमांड2ने कहा.

थोडी देर उधरसे कुछभी आवाज नही आया. सिर्फ किसी चिजका घरघर आवाज आ रहा था.

" तूमने अपनी जगह बदली यह बहुत अच्छा किया. " बॉस ने कहा.

" हा सर, मुझे अंदाजा था की कमांड1की पहचान होनेके बाद पुलिस उसके घरपर रेड करेगी करके. "

" कमसे कम अब उससे सबक लो और आगे ऐसी बेवकुफी मत करो. अभी और अपना बहुत सारा काम बाकी है. " बॉस उसे हिदायत देते हूए बोला.

" हां सर " कमांड2ने अदबसे कहा.

उधरसे फोन कट हूवा.


क्रमश:...

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Ch-28: रेड (शून्य-उपन्यास)

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पोलिसकी गाडी कमांड1के घरके सामने आकर रुकी. गाडी रुकतेही गाडीसे पुलिसकी एक टीम निचे उतरी. उस टीमने उतरतेही दौडते हूए जाकर कमांड1के घरको चारो तरफसे घेर लिया. जॉन अपने वॉकी टॉकीसे सबसे संपर्क बनाए था और बिच बिचमें उन्हे निर्देश दे रहा था. सब लोगोंने अपनी अपनी पोजीशन ली है इसकी तसल्ली होतेही जॉन और सॅम धीरे धीरे कमांड1के घरके मुख्य व्दारके तरफ जाने लगे. दरवाजा खुलाही था.

मतलब जरुर कोई अंदर होगा ...

वे दोनो एकदुसरेको गार्ड करते हूए घरके अंदर घुस गए. उनकी पैनी नजर चारो तरफ घुम रही थी. हॉलमें कोई नही था. उसने वॉकी टॉकीसे आदेश देकर और दो साथीयोंको अंदर बुलाया. दो लोग अंदर आतेही घरमें इधर उधर बिखेरकर सारे कमरेकी तलाशी लेने लगे. कही कोई नही दिख रहा था. जॉन बेडरूमसे सटकर जो सिढीयां थी उसके पास गया. सिढीयोंसे उपर जानेका वह सोच ही रहा था की उसका खयाल सिढीयोंके निचे गया. वहां उसे सिढीयोंके निचेसे तहखानेमें जानेके लिये रास्ता दिखाई दिया.

" सॅम, जरा इधरतो आवो. देखो इधर एक रास्ता है." जॉनने सॅमको बुलाया.

" और तुम लोग घरमे हाथोंके और उंगलियोंके निशान ढूंढो. इसका संबंध किन कीन लोगोंसे था यह तो पता चलेगा." जॉनने सिढीयोंसे निचे जाते हूए फिंगरप्रिन्टस एक्सपर्टको आदेश दिया.

जॉनने सिढीयोंके निचे तहखानेका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोलकर अंदर झांककर देखा. अंदर घने अंधेरेके सिवा कुछभी दिखाई नही दे रहा था.

जॉनने चूपकेसे सॅमको 'टॉर्च' लानेके लिए इशारा किया.

सॅम सिढीयोंके निचेसे चूपकेसे बाहर निकला और फिर दौडकर जाकर उसने टार्च लाया. टॉर्च शुरु कर उसने जॉनके हाथमें थमाया. जॉन एक हाथमें टॉर्च और दुसरेमें बंदूक लेकर धीरे धीर तहखानेमें जाने लगा. उसके पिछे पिछे सॅम बंदूक लेकर उसको गार्ड करता हूवा अंदर जाने लगा. जॉन इधर उधर टार्चकी रोशनी तहखानेमें डालते हूए अंदर जाने लगा. अंदर कोई नही था. तहखानेमे कोई खास सामान नही था. छुपनेके लिएभी कोई जगह अंदर दिख नही रही थी. आखीर उनका ध्यान तहखानेमें बिचोबिच रखे कॉम्प्यूटरकी तरफ गया.

' इतनी छुपी जगहपर कॉम्प्यूटर? " जॉनने आश्चर्यसे कहा.

" कुछ गडबड दिखती है " सॅमने अपनी राय व्यक्त की.

दोनो कॉम्प्यूटरके पास जाकर उसे ध्यान देकर निहारने लगे.

" जरा वह स्वीचतो ऑन करो " जॉनने सॅमको कॉम्प्यूटरका पावर स्वीच ऑन करनेके लिए कहा.

सॅमने पावर स्वीच ऑन किया और जॉनने काम्प्यूटर ऑन किया. वे काम्प्यूटर शुरु होनेकी राह देखते हूए स्क्रीनकी तरफ देखने लगे. पहले काले मॉनिटरपर बाएं कोनेमे कुछ सफेद शब्द दिखने लगे और फिर कॉम्पूटरकी मेमरी टेस्टका रिझल्ट मॉनिटरपर आगया.

और अचानक कॉम्प्यूटरपर मेसेज आगया-

' नो बूट डिस्क फाऊंड'

" अब इसको क्या हूवा? " सॅमने आश्चर्यसे कहा.

तबतक जॉनके और दो साथी वहां आए थे.

" क्या हूवा? " हॅरीने पुछा, जो अभी अभी अंदर आया था.

" हॅरी, देखोतो यह काम्प्यूटर क्यों शुरु नही हो रहा है?" जॉनने हॅरीको कॉम्प्यूटरको देखनेके लिए कहा.

हॅरी कॉम्प्यूटर टेक्नीशियन था. उसने फिरसे कॉम्प्यूटरका बटन बंद शूरु करके देखा. फिरसे काले स्क्रिनके बाए कोनेमें कुछ सफेद शब्द दिखने लगे. फिर मेमरी टेस्ट हूई और आखीर वही मेसेज -

' नो बूट डिस्क फाऊंड'

हॅरीने कॉम्प्यूटरका स्वीच ऑफ किया और अपने जेबसे स्क्रू ड्रायव्हर निकालकर वह सी.पी.यू. खोलने लगा.

" क्या हूवा ? " सॅमने हॅरीको पुछा.

" सर, कॉम्प्यूटर खोलनेके सिवा कुछ पता चलेगा नही " हॅरीने कहां.

हॅरीने जब सी.पी.यू.का कॅबिनेट खोला, वह आश्चर्यसे अंदरके हार्डवेअरकी तरफ देखने लगा.

" क्या प्रॉब्लेम है ? " जॉनने हॅरीको पुछा.

" सर इसकीतो हार्डडिस्कही गायब है " हॅरी अपने चेहरेका पसीना पोंछते हूए बोला.

" क्या? हार्डडिस्क गायब है? " जॉन और सॅमके मुंहसे आश्चर्यसे एकदम निकला.

" कौन ले गया होगा?" सॅमने जैसे खुदसेही पुछा.

" इसका मतलब उस हार्ड डिस्कमें कुछ तो महत्वपुर्ण जानकारी होगी." जॉनने अपनी आंखे छोटी कर सॅमको अपना तर्क बयान किया.

जॉनने एकबार फिरसे तहखानेमें टॉर्चके रोशनीमे एक चक्कर मारकर देखा.

" अच्छा, उस फिंगरप्रींट टेक्नीशीयनको इधर बुलावो. शायद इस कॉम्प्यूटरके अंदर जिसनेभी हार्डडिस्क निकाली उसके उंगलीयोंके निशान होगे. " जॉनने सॅमको निर्देश दिया.

क्रमश:...

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About Hindi

Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.