एक कोलनीमें एक छोटासा आकर्षक बंगला. बंगलेके बाहर एक कार आकर खडी हूई. कारसे उतरकर एक आदमी झटसे घरके कंपाऊंडमे घूस गया. कोई पच्चीसके आसपास उसकी उम्र होगी. उसने काला गॉगल पहन रखा था. अंदर जाते हूए आसपासके गार्डनपर अपनी नजरे दौडाते हूए वह दरवाजेके पास पहूंच गया. अपनी कारकी तरफ देखते हूए उसने दरवाजेकी बेल बजाई. दरवाजा खुलनेकी राह देखते हूए वह कोलनीके दुसरे घरोंकी तरफ देखने लगा. दरवाजा खुलने को बहुत समय लग रहा था इसलिए बंद दरवाजे के सामने वह चहलकदमी करने लगा. अंदरसे आहट सुनते ही वह दरवाजेके सामने अंदर जानेके लिए खडा होगया. दरवाजा खुला. सामने दरवाजेमें उसकाही हमउम्र एक आदमी खडा था. अंदरका आदमी दरवाजेसे हट गया और बाहरका आदमी बिना कुछ बोले अंदर चला गया. ना कुछ बातचीत ना भावोंका आदान प्रदान.
बाहरका आदमी अंदर जानेके बाद दरवाजा अंदरसे बंद हूवा. दोनोंकी रहन सहन, कद काठी, रंग इससे तो वे दोनो अमेरीकी मुलके नही लग रहे थे. दोनोही बिना कुछ बोले घर के तहखानेकी तरफ जाने लगे. घरके ढाचेसे ऐसा कतई प्रतित नही होता था की इस घरको कोई तहखाना होगा.
जो बाहरसे आया था उसने पुछा, '' बॉसका कोई मेसेज आया?''
'' नही अभीतक तो नही ... कब क्या करना है , बॉस सब महूरत देखकर करता है'' दुसरेने कहा.
पहला मन ही मन मुस्कुराया और बोला,'' कौन किस पागलपनमें उलझेगा कुछ बोल नही सकते ''
दूसरेने गंभिरतासे कहा '' कमांड2 तुझे अगर हमारे साथ काम करना है तो यह सब समझकर अपने आपमें ढालना जरुरी है... यहां सब बातें तोलमोलकर प्रिकॅलक्यूलेटेड ढंगसे की जाती है.""
कमांड2 कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ये ना समझते हूए सिर्फ कमांड1 की तरफ देखने लगा.
''कोईभी बात करनेसे पहले बॉसको उसके नतिजे की जानकारी पहलेसेही होती है.'' कमांड1ने कहा.
अब वे चलते चलते अंधेरे तहखानेमें आ पहूचें. वहां तहखानेमें बिचोबिच टेबलपर एक कॉम्प्यूटर रखा हूवा था. दोनो काम्प्यूटरके सामने जाकर खडे हूए. कमांड1ने कॉम्प्यूटरके सामने कुर्सीपर बैठते हूए कॉम्प्यूटर शुरू किया. कमांड2 उसकेही बगलमें एक स्टूलपर बैठ गया. कॉम्प्यूटरपर लिनक्स ऑपरेटींग सिस्टीम शुरू होने लगी.
'' तूझे पता है हम लिनक्स क्यों युज करते है?" कमांड1ने पुछा.
अपना अज्ञान जताते हूए कमांड2 ने सिर्फ अपना सर हिलाया.
'"कॉम्प्यूटरके लगभग सभी सॉफ्टवेअर जिसका सोर्स कोड युजर (उपभोक्ता) को नही दिया जाता कहां बनायें जातें है?'' कमांड1ने जवाब देने के बजाय दुसरा सवाल पुछा.
'' कंपनीमें...'' कमांड2ने भोले भावसे कहा.
'' मेरा मतलब कौनसे देशमें?''
'' अमेरिकामें'' कमांड2ने जवाब दिया.
'' तुझे पता होगाही की जिस सॉफ्टवेअरका सोर्स कोड कस्टमरको दिया जाता है उसे 'ओपन सोर्स' सॉफ्टवेअर कहते है... मतलब उस सॉफ्टवेअरमें क्या होता है यह कस्टमर जान सकता है... ... और जिस सॉफ्टवेअरका कोड कस्टमरको नही दिया जाता उस सॉफ्टवेअरमें ऐसा बहुत कुछ हो सकता है... जो की होना नही चाहिए." कमांड1 कह रहा था.
'"मतलब?'" कमांड2 ने बिचमेंही टोका.
'"मतलब तुझे पताही होगा की मायक्रोसॉफ्ट कंपनीने एक बार ऐलान किया था की वे उनके प्रतिस्पर्धीयोंको काबूमें रखनेके लिए उनके सॉफ्टवेअर विंन्डोज ऑपरेटींग सीस्टीममें कुछ 'टॅग्ज' इस्तेमाल करने वाले है...'' कमांड1 कह रहा था.
'' हां ... तो ?'' कमांड2 कमांड1 आगे क्या कहता है यह सुनने लगा.
''और उन 'टॅग्ज' की वजहसे कंपनीको जो चाहिए वही प्रोग्रॅम ठीक ढंगसे काम करेंगे... और दुसरे यातो बहुत धीमी गतीसे चलेंगे, बराबर नही चलेंगे या चलेंगेही नही.'' कमांड1ने कहा.
'' लेकिन उसका अपने लिनक्स इस्तेमाल करनेसे क्या वास्ता?'' कमांड2ने पुछा.
'' वास्ता है... बल्की बहुत नजदीकी वास्ता है... सुनो ... अगर वे अपने प्रतिस्पर्धीयोंको काबुमें करनेके लिए ऐसे 'टॅग्ज' इस्तेमाल कर सकते है की जिसकी वजहसे उनके प्रतिस्पर्धीयोंका पुरा खातमा हो जाए ... तो ऐसाभी मुमकीन है की वे उनके सॉफ्टवेअर और हार्डवेअरमें ऐसे कुछ 'टॅग्ज' इस्तेमाल करेंगे की जिसकी वजह से पुरी दुनिया की महत्वपुर्ण जानकारी इंटरनेटके द्वारा उनके पास पहूंच जाए ... उसमें हमारे जैसे लोगोंकी गतिविधीयाँ भी आगई... खासकर 9-11 के बाद यह सब उनके लिए बहुत महत्वपुर्ण होगया है...'' कमांड1 ने कमांड2की तरफ देखते हूए उसकी प्रतिक्रिया लेते हूए कहा.
'' हां तुम सही कहते हो... ऐसा हो सकता है'' कमांड2 ने अपनी राय बताते हूए कहा.
'' इसलिए मैने क्या किया पता है? ... लिनक्स का सोर्स कोड लेकर उसे कंपाईल किया... और फिर उसे अपने कॉम्प्यूटरमें इन्स्टॉल किया... अपनेसे जो हो सकता है वह सभी तरह की एतीहात बरतना जरुरी है...'' कमांड1 बोल रहा था.
उसके बोलनेमे गर्व और खुदका बडप्पन झलक रहा था.
'' अरे यह अमेरिका क्या चीज है तुझे पताही नही ... सारी दुनियापर राज करनेका उनका सपना है... और उसके लिए वह किसीभी हदतक गिर सकते है...'' कमांड1 आगे बोल रहा था.
कमांड2ने कमांड1 की तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.
'' चांदपर सबसे पहले आदमी कब पहूँचा? ... तुमने स्कुलमें पढाही होगा ना?..'' कमांड1 ने सवाल किया.
'' अमेरिकाने भेजे यान द्वारा 1969 को नील आर्मस्ट्राँग सबसे पहले चांदपर पहूंचा.'' कमांड2 ने झटसे स्कुली बच्चे की तरह जवाब दिया.
''सभी स्कुली बच्चोंके दिमाग मे यही कुटकुटकर भरा हूवा है ... और अभीभी भरा जा रहा है... लेकिन सच क्या है इसके बारेमे लोगोंने कभी सोचा है?... जो व्हीडीओ अमेरिकाने टी व्ही पर सारी दुनिया को दिखाया उसमें अमेरिकाका झंडा मस्त लहराता हूवा दिख रहा था... चांदपर अगर हवाही नही है ... तो वह झंडा कैसा लहरेगा ... जो लोग चांद पर उतरे उनके साये... यान की बदली हूई जगह... ऐसे न जाने कितने सबुत है जो दर्शाते है की अमेरीकाका यान चांदपर गयाही नही था...'' कमांड1 आवेशमें आकर बोल रहा था.
'' क्या बात करता है तू ... फिर यह सब क्या झूट है? ...'' कमांड2 ने आश्चर्यसे पुछा.
'' झूठ ही नही ... सफेद झूठ... इतनाही नही उस वक्त सॅटेलाईटसे जमीन की ली हूई तस्वीरोंमे जो सेट उन लोगोंने बनाया था उसकी तस्वीर भी मिली है...''
'' ठिक है मान लेते है की यह सब झूठ ... लेकिन अमेरिका यह सब किसलिए करेगा?''
'' हां यह अच्छा सवाल है ... की उन्होने वह सब क्यों किया? ... इतना सारा झंझट करने की उन्हे क्या जरुरत थी? ... जिस वक्त अमेरिकाने उनका यान चांदपर उतरनेका दावा किया तब रशीया अमेरिकाका सबसे बडा प्रतिस्पर्धी था... हम रशीयासे दो कदम आगे है यह दिखानेके लिये उन्होने यह सब किया ... और उसमें वे कामयाबभी रहे...'' हर एक शब्दके साथ कमांड1का आवेश बढता दिखाई दे रहा था.
'' माय गॉड... मतलब इतना बडा धोखा और वह भी सारी दुनियाको...'' कमांड2के मुंहसे निकल गया.
'' अमेरिका अब अंग्रेज पहले जिस रास्तेसे जा रहे थे उस रस्ते से चल रहा है... दुसरे वर्ल्ड वार के पहले ब्रिटीश लोगोंने सारी दुनियापर राज किया... उस वक्त कहते थे की उनकी जमिनपर सुरज कभी डूबता नही था... अब अमेरिकाभी वही करनेका प्रयास कर रही है.... फर्क सिर्फ इतना है की ब्रिटीश लोगोंने आमनेसामने राज किया और ये अब छुपे रहकर राज करना चाहते है... मतलब 'प्रॉक्सी रूलींग'. अफगाणिस्थान, इराक, कुवेत, साऊथ कोरिया यहाँ पर वे क्या कर रहे है ... प्रॉक्सी रूलींग ... और क्या?''
'' हां तुम बिलकुल सही कहते हो...'' कमांड2ने सहमती दर्शाई.
'' और यही अमेरिकाका अधिपत्य, प्रभुत्व खतम करना अपना परम हेतू है ..'' कमांड1ने जोशमें कहा.
कमांड2के चेहरेसे ऐसा लग रहा था की वह उसकी बातोंसे बहुत प्रभावित हुवा है. और कमांड1के चेहरेपर कमांड2को ब्रेन वॉश करनेमें उसे जो सफलता मिली थी उसका आनंद झलक रहा था.
इतनेमें शुरु हुए कॉम्प्यूटरका बझर बजा. कमांड1को ईमेल आई थी. कमांड1ने मेलबॉक्स खोला. उसमें बॉसकी मेल थी.
'' एक बात मेरे समझमें नही आती की यह बॉस है कौन?'' कमांड2ने उत्सुकतापुर्वक पुछा.
'' यह किसीकोभी पता नही ... सिवाय खुद बॉसके... और इस बातसे हमें कोई सरोकार नही की बॉस कौन है?... क्योंकी हम सब लोगोंको एक सुत्रमें जिस बातने जोडा है वह कोई एक व्यक्ती ना होकर ... एक विचारधारा है... वह विचारधाराही सबसे महत्वपुर्ण है... आज बास है कल नही होगा... लेकिन उसकी विचारधारा हमेशा जिंदा रहना चाहिए...'' कमांड1 मेल खोलते वक्त बोल रहा था.
मेलमें सिर्फ 'हाय' ऐसा लिखा हूवा था और मेलको कोई फाईल अटॅच की हूई थी. कमांड1 ने अटॅचमेंट ओपन की. वह मॅडोनाकी एक 'बोल्ड' तस्वीर थी.
'' यह क्या भेजा बॉसने?'' कमांड2 ने आश्चर्यसे पुछा.
'' तुम अभी बच्चे हो... धीरे धीरे सब समझ जावोगे... बस इतनाही जान लो की दिखाने के दात और खाने के दात हमेशा अलग रहते है... '' कमांड1 तस्वीर की तरफ देखकर मुस्कुराते हूए बोला.
कमांड1 ने बडी चपलतासे कॉम्प्यूटरके कीबोर्डके चार पाच बटन दबाए. सामने मॉनिटरपर एक सॉफ्टवेअर खुल गया. कमांड1ने मॅडोनाके उस तस्वीरको डबल क्लीक किया. एक निले रंग का प्रोग्रेस बार धीरे धीरे आगे बढने लगा. कमांड1 ने कमांड2की तरफ रहस्यतापुर्ण ढंग से देखा.
'' लेकिन यह क्या कर रहे हो ... स...'' कमांड2ने कहा.
कमांड1ने झटसे कमांड2के मुंहपर हाथ रखकर उसकी बोलती बंद की.
'' गलतीसेभी तुम्हारे मुंहमें मेरा नाम नही आना चाहिए... तुझे पता है... दिवार के भी कान होते है...''
''सॉरी'' कमांड2 अपने गलती का अहसास होते हूए बोला.
'' यहां गलतियोंको माफ नही किया जाता...'' कमांड1ने दृढतापुर्वक कहा.
तबतक प्रोग्रेस बार आगे बढते हूए पुरीतरह निला हो चूका था.
'' इसे स्टेग्नोग्राफी कहते है ... मतलब तस्वीरोंमे संदेश छुपाना... देखनेवालोंको सिर्फ तस्वीर दिखाई देगी ... लेकिन इस तस्वीरमेंभी बहोत सारी महत्वपुर्ण जानकारी छिपाई जा सकती है...'' कमांड1 उसे समझा रहा था.
'' लेकिन अगर यह तस्वीर यहां पहूचनेसे पहले किसी और के हाथ लगी तो?'' कमांड2 अपनी शंका उपस्थीत की.
'' यह सब जानकारी सिर्फ इस सॉफ्टवेअरके द्वारा ही बाहर निकाली जा सकती है... और उसे पासवर्ड लगता है.... यह सॉफ्टवेअर बॉसने खुद बनाया हूवा है.... इसलिये यह किसी दुसरे के पास रहने का तो सवाल ही पैदा नही होता'' कमांड1ने उसके सवाल का यथोचीत उत्तर दिया था.
'' कौनसी जानकारी छिपाई गई है इस तस्वीर में ... जरा देखु तो'' कमांड2 उत्सुकतावश देखने लगा.
इतनेमें मॉनिटरपर एक मेसेज दिखने लगा. '' अगले काम की तैयारी शुरु करो ... उसका वक्त बादमें बताया जाएगा.''
...contd..
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Showing posts with label zero. Show all posts
Showing posts with label zero. Show all posts
Friday, December 7, 2007
Ch-3 वर्ल्ड अंडर अंडरवर्ल्ड (शून्य-उपन्यास)
Monday, December 3, 2007
Ch-2 आसमान गिर पड़ा (शून्य-उपन्यास)
Next post 'Chapter - 3' will be posted on or before ८ Dec 2007
जब अँजेनीने अपनी कार अपार्टमेंटमें पार्किंगके लिए घुमाई उसे वहाँ वह शापींग करते वक्त रस्ते में दिखी पुलिस व्हॅन दिखाई दी. उसका दिल जोर जोर से धडकने लगा. क्या हूवा होगा? वह कार से उतरकर अपना शॉपींग किया हूवा सामान लेकर जल्दी जल्दी लिफ्ट की तरफ चल पडी. जब वह वहाँ पहूँची, लिफ्टका दरवाजा खुला और अंदरसे दो पुलिसके लोग बाहर आ गए. पुलीसको देखकर उसका दिल औरही बैठसा गया. उसने झटसे लिफ्टमें जाकर लिफ्टका बटन दबाया जिसपर 10 यह नंबर लिखा हूवा था.
लिफ्टसे बाहर आतेही जब अँजेनीने अपने खुले फ्लॅटके सामने लोगोंकी भीड देखी उसकेतो हाथ पांव कापने लगे. उसके हाथसे शॉपींगका सारा सामान निचे गीर पडा. वैसेही वह उस भीडकी तरफ दौड पडी.
'' क्या हूवा?'' उसने अंदर जाते हूवे वहाँ जमा हूई भीडको पुंछा. सब लोग गंभीर मुद्रामें सिर्फ उसकी तरफ देखने लगे. किसीकी उसको कुछ बताने की हिम्मत नही बनी. वह फ्लॅटके अंदर चली गई. सब पुलीसवालोंका बेडरुमकी तरफ रुख देखकर वह बेडरुमकी तरफ चली गई.
जाते जाते फीरसे उसने एक पुलीसवालेको पुछा, '' क्या हूवा?''
वह उससे आँखे ना मिलाते हूवे गंभीरतासे सिर्फ बेडरुमकी तरफ देखने लगा.
वह जल्दीसे बेडरुमके अंदर चली गई. सामनेका दृष्य देखकर जैसे अब उसकी बचीकुची जान निकल गई थी. उसके सामने उसके पती का खुनसे लथपथ शव पडा हूवा था. उसे अब सारा कमरा घुमता हूवा नजर आने लगा और वह अपना होशोहवास खोकर निचे गीर पडी. गिरते वक्त उसके मुंहसे निकल गया-
'' सानी...''
उसकी वह हालत देखकर बगलमें खडा जॉन झटसे उसे सहारा देने के लिए सामने आया. उसने उसे हिलाकर उसे जगाने की कोशीश की. वह बेहोश हो गई थी. लेकिन जब जॉनने गौर किया की उसकी सांसभी शायद रुक चूकी थी, उसने बगलमें खडे अलेक्स को आदेश दिया '' कॉल द डॉक्टर इमीडीएटली ... आय थींक शी हॅज गॉट अ ट्रिमेंडस शॉक".
अलेक्स तत्परतासे बगलमें रखे फोनके पास जाकर फोन डायल करने लगा.
डॉक्टर के आने तक कुछ करना जरुरी था लेकिन जॉन को क्या करे कुछ सुझाई नही दे रहा था.
"सर शी नीड्स आर्टिफिशीअल ब्रीदिंग" किसीने सुझाव दिया.
फिर जॉन अपने मुंहसे उसके मुंहमे सांस भरने लगा और बिच बिचमे उसकी रुकी हूई धडकन शुरु होनेके लिए उसके सिनेपर जोर जोरसे दबाव देने लगा. दबाव देते हूए 101,102,103 गिनकर उसने फिरसे उसके मुंहमें हवा भरी और फिरसे 102,102,103 गिनकर उसके सिनेपर दबाव देने लगा. ऐसा दो-तीन बार करनेके बाद जॉनने अँजेनीकी सांस टटोली. लेकिन एक बार गई हूई उसकी सांस मानो लौटनेको तैयार नही थी. उसके सारे साथीदार उसके इर्द-गिर्द जमा हुए थे. उनको भी क्या करे कुछ समझ नही आ रहा था. डॉक्टरके आनेतक एक आखरी प्रयास सोचकर जॉनने फिरसे एकबार अँजेनीके मुंहमे हवा भरी और 101,102,103 गिनकर उसके सिनेपर दबाव देने लगा.
हॉस्पीटलमें अँजेनीको इंटेसीव केअर युनिट में रखा गया था. बाहर दरवाजे के पास जॉन और उसका एक साथीदार खडे थे. इतनेंमे आय.सी.यू का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आगए. जॉन वह क्या कहते है यह सुननेके लिए बेताब उनके सामने जाकर खडा होगया. डॉक्टरने अपने चेहरेसे हरा कपडा हटाते हूए कहा-
" शी इज आऊट ऑफ डेंजर .... नथींग टू वरी"
जॉनके जानमें जान आगई. इतनेमें जॉनके मोबाईलकी घंटी बजी. जॉनने मोबाईलके तरफ देखते हूए बटन दबाते हूए कहा-
" यस सॅम"
उधरसे आवाज आई '' सर , हमने उसे सब तरफ ढुंढा लेकिन वह हमें नही मिला.''
''नही मिला.?.. उसके जानेमें और हमारे ढुंढनेमें ऐसा कितना फासला था? ....वह वही कही आसपास होना चाहिए था. '' जॉनने कहा.
''सर... शायद उसने बादमें अपने कपडे बदले होगे.. क्योंकी हमने आसपासके सभी पुलीस स्टेशनमें उसका हूलिया और पहनावेके बारेंमे खबर कर दी थी...'' उधरसे आवाज आई.
''अच्छा, अब एक काम करो...उसका स्केच बनानेके काममें जुड जावो... हमें उसे किसीभी हालमें पकडनाही होगा...'' जॉनने अपना दृढ निश्चय जताते हूए आदेश दिया.
'' यस सर ...'' उधर से आवाज आई.
जॉनने मोबाईल बंद किया और डॉक्टरसे कहा,'' अच्छा अब हम निकलते है... टेक केअर ऑफ हर ... और कोई मुसीबत या परेशानी हो तो हमें फोन करना ना भूलीएगा...''
''ओ.के...'' डॉक्टरने कहां.
जानेसे पहले जॉनने अपने साथीदारसे कहा,'' उसके रिश्तेदारके बारेमे मालूम करो...और उन्हे इन्फॉर्म करो...''
" यस सर" जॉनके साथीदारने कहा.
....(to be continued) लिफ्टसे बाहर आतेही जब अँजेनीने अपने खुले फ्लॅटके सामने लोगोंकी भीड देखी उसकेतो हाथ पांव कापने लगे. उसके हाथसे शॉपींगका सारा सामान निचे गीर पडा. वैसेही वह उस भीडकी तरफ दौड पडी.
'' क्या हूवा?'' उसने अंदर जाते हूवे वहाँ जमा हूई भीडको पुंछा. सब लोग गंभीर मुद्रामें सिर्फ उसकी तरफ देखने लगे. किसीकी उसको कुछ बताने की हिम्मत नही बनी. वह फ्लॅटके अंदर चली गई. सब पुलीसवालोंका बेडरुमकी तरफ रुख देखकर वह बेडरुमकी तरफ चली गई.
जाते जाते फीरसे उसने एक पुलीसवालेको पुछा, '' क्या हूवा?''
वह उससे आँखे ना मिलाते हूवे गंभीरतासे सिर्फ बेडरुमकी तरफ देखने लगा.
वह जल्दीसे बेडरुमके अंदर चली गई. सामनेका दृष्य देखकर जैसे अब उसकी बचीकुची जान निकल गई थी. उसके सामने उसके पती का खुनसे लथपथ शव पडा हूवा था. उसे अब सारा कमरा घुमता हूवा नजर आने लगा और वह अपना होशोहवास खोकर निचे गीर पडी. गिरते वक्त उसके मुंहसे निकल गया-
'' सानी...''
उसकी वह हालत देखकर बगलमें खडा जॉन झटसे उसे सहारा देने के लिए सामने आया. उसने उसे हिलाकर उसे जगाने की कोशीश की. वह बेहोश हो गई थी. लेकिन जब जॉनने गौर किया की उसकी सांसभी शायद रुक चूकी थी, उसने बगलमें खडे अलेक्स को आदेश दिया '' कॉल द डॉक्टर इमीडीएटली ... आय थींक शी हॅज गॉट अ ट्रिमेंडस शॉक".
अलेक्स तत्परतासे बगलमें रखे फोनके पास जाकर फोन डायल करने लगा.
डॉक्टर के आने तक कुछ करना जरुरी था लेकिन जॉन को क्या करे कुछ सुझाई नही दे रहा था.
"सर शी नीड्स आर्टिफिशीअल ब्रीदिंग" किसीने सुझाव दिया.
फिर जॉन अपने मुंहसे उसके मुंहमे सांस भरने लगा और बिच बिचमे उसकी रुकी हूई धडकन शुरु होनेके लिए उसके सिनेपर जोर जोरसे दबाव देने लगा. दबाव देते हूए 101,102,103 गिनकर उसने फिरसे उसके मुंहमें हवा भरी और फिरसे 102,102,103 गिनकर उसके सिनेपर दबाव देने लगा. ऐसा दो-तीन बार करनेके बाद जॉनने अँजेनीकी सांस टटोली. लेकिन एक बार गई हूई उसकी सांस मानो लौटनेको तैयार नही थी. उसके सारे साथीदार उसके इर्द-गिर्द जमा हुए थे. उनको भी क्या करे कुछ समझ नही आ रहा था. डॉक्टरके आनेतक एक आखरी प्रयास सोचकर जॉनने फिरसे एकबार अँजेनीके मुंहमे हवा भरी और 101,102,103 गिनकर उसके सिनेपर दबाव देने लगा.
हॉस्पीटलमें अँजेनीको इंटेसीव केअर युनिट में रखा गया था. बाहर दरवाजे के पास जॉन और उसका एक साथीदार खडे थे. इतनेंमे आय.सी.यू का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आगए. जॉन वह क्या कहते है यह सुननेके लिए बेताब उनके सामने जाकर खडा होगया. डॉक्टरने अपने चेहरेसे हरा कपडा हटाते हूए कहा-
" शी इज आऊट ऑफ डेंजर .... नथींग टू वरी"
जॉनके जानमें जान आगई. इतनेमें जॉनके मोबाईलकी घंटी बजी. जॉनने मोबाईलके तरफ देखते हूए बटन दबाते हूए कहा-
" यस सॅम"
उधरसे आवाज आई '' सर , हमने उसे सब तरफ ढुंढा लेकिन वह हमें नही मिला.''
''नही मिला.?.. उसके जानेमें और हमारे ढुंढनेमें ऐसा कितना फासला था? ....वह वही कही आसपास होना चाहिए था. '' जॉनने कहा.
''सर... शायद उसने बादमें अपने कपडे बदले होगे.. क्योंकी हमने आसपासके सभी पुलीस स्टेशनमें उसका हूलिया और पहनावेके बारेंमे खबर कर दी थी...'' उधरसे आवाज आई.
''अच्छा, अब एक काम करो...उसका स्केच बनानेके काममें जुड जावो... हमें उसे किसीभी हालमें पकडनाही होगा...'' जॉनने अपना दृढ निश्चय जताते हूए आदेश दिया.
'' यस सर ...'' उधर से आवाज आई.
जॉनने मोबाईल बंद किया और डॉक्टरसे कहा,'' अच्छा अब हम निकलते है... टेक केअर ऑफ हर ... और कोई मुसीबत या परेशानी हो तो हमें फोन करना ना भूलीएगा...''
''ओ.के...'' डॉक्टरने कहां.
जानेसे पहले जॉनने अपने साथीदारसे कहा,'' उसके रिश्तेदारके बारेमे मालूम करो...और उन्हे इन्फॉर्म करो...''
" यस सर" जॉनके साथीदारने कहा.
Posted by
Sunil Doiphode
at
11:16 AM
2
comments
Labels: Aryabhatta, entertainment, free, india, maharastra, marathi, mumbai, novel, published, pune, Sanscrit, shunya, story, subscribe, suspense, thriller, Vedas, zero
Subscribe to:
Posts (Atom)




