जॉनको एकदम सबकुछ शांत और स्थब्ध होनेका अहसास हूवा.
'' ए उसके आंखोपर बंधा कपडा छोड रे... '' क्रिस्तोफरका चिढा हूवा स्वर गुंजा.
जॉनको उसके आंखोपरसे कोई कपडा निकाल रहा है इसका अहसास हूवा. उसका आक्रोश आंसुओंके द्वारे बाहर निकलकर वह कपडा पुरी तरह गिला हूवा था.
जैसेही उन्होने उसके आखोसे वह कपडा निकाला, उसने सामनेका दृष्य देखा. उसके जबडे कसने लगे, आंखे लाल लाल हो गई, सारा शरीर गुस्सेसे कांपने लगा था. वह खुदको छुडाने के लिए छटपटाने लगा. उसके सामने उसकी नॅन्सी निर्वस्त्र पडी हूई थी. उसकी गर्दन एक तरफ लटक रही थी. उसकी आंखे खुली थी और सफेद हो गई थी. उसका शरीर निश्चल हो चूका था. उसके प्राण कबके जा चूके थे.
अचानक उसे अहसास हूवा की उसके सरपर किसी भारी वस्तूका प्रहार हूवा और वह धीरे धीरे होश खोने लगा.
जब जॉन होशमें आया, उसे अहसास हूवा की अब वह बंधा हूवा नही था. उसके हाथ पैर बंधनसे मुक्त थे. लेकिन जहां कुछ देर पहले नॅन्सीकी बॉडी पडी हूई थी वहां अब कुछभी नही था. वह तुरंत उठकर खडा होगया, उसने चारो ओर अपनी नजर घुमाई.
वह मुझे गिरा हूवा कोई भयानक सपनातो नही था...
हे भगवान वह सपनाही हो...
वह मनही मन प्रार्थना करने लगा.
लेकिन वह सपना कैसे होगा...
'' नॅन्सी '' उसने एक आवाज दिया.
उसे मालूम था की उसे कोई प्रतिसाद आनेवाला नही है.
लेकिन एक झूटी आस...
उसके सरमें पिछेकी तरफसे बहुत दर्द हो रहा था. इसलिए उसने सरको पिछे हाथ लगाकर देखा. उसका हाथ लाल लाल खुनसे सन गया.
उन लोगोंने प्रहार कर उसे बेसुध किया था उसका वह जख्म और निशानी थी. अब उसे पक्का विश्वास हुवा था की वह कोई सपना नही था.
वह तेजीसे रुमके बाहर दौड पडा. बाहर इधर उधर ढूंढते हूए वह गलियारेसे दौड रहा था. वह लिफ्टके पास गया और लिफ्टका बटन दबाया. लिफ्टमें घुसनेसे पहले फिरसे उसने एक बार चारोंतरफ अपनी ढूंढती नजर दौडाई.
कहा गए वे लोग?...
और नॅन्सीकी बॉडी किधर है? ...
की उन्होने लगा दिया उसे ठिकाने...
वह हॉटलके बाहर आकर अंधेरेमें पागलोंकी तरह इधर उधर दौड रहा था. सब तरफ अंधेरा था. आधी रात होकर गई थी. रास्तेपरभी आने जानेवाले बहुतही कम दिखाई दे रहे थे. एक कोनेपर खडा एक टॅक्सीवाला उसे दिखाई दीया.
उसे शायद पता हो...
वह उस टॅक्सीके पास गया, टॅक्सीवालेसे पुछा. उसने दाईतरफ इशारा कर कुछ तो कहा. जॉन टॅक्सीमें बैठ गया और उसने टॅक्सीवालेको टॅक्सी उधर लेनेको कहा.
निराश, हताश हूवा जॉन धीमे गतीसे चलता हूवा अपने रुमके पास वापस आगया. रुममें जाकर उसने अंदरसे दरवाजा बंद कर लिया.
उसने बेडकी तरफ देखा. बेडशीटपर झुर्रिया पडी हूई थी. वह बेडपर बैठ गया.
क्या किया जाये ?...
पुलिसके पास जावो तो वे मुझेही गिरफ्तार करेंगे...
और खुनका इल्जाम मुझपरही लगाएंगे...
और वैसे देखा जाए तो मैही तो हू उसके खुनके लिए जिम्मेदार...
सिर्फ खुनही नही तो उसपर हूए बलात्कारके लिए भी ...
उसने अपने पैर मोडकर घूटने पेटके पास लिए और घूटनोमें अपना मुंह छिपाया. और वह फुटफुटकर रोने लगा.
रोते हूए उसका ध्यान वही कपाटके निचे गिरें कागजके टूकडेने खिंच लिया. वह खडा होगया. अपने आंसू अपने आस्तीनसे पोंछ लिए.
कागजका टूकडा? ... यहां कैसे ?...
उसने वह कागजका टूकडा उठाया.
कागजपर चार अंग्रजी अक्षर लिखे हूए थे - सी, आर, जे, एस. और उन अक्षरोंके सामने कुछ नंबर्स लिखे हूए थे. शायद वे कोई पत्तोके गेमके पॉईंट्स होंगे...
उसने वह कागज उलट पुलटकर देखा. कागजके पिछे एक नंबर था. शायद मोबाईल नंबर होगा.
वह दृढतापुर्वक खडा हो गया -
'' ऍसहोल्स ... मै तुम्हे छोडूंगा नही '' वह गरज उठा.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण) The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है. |
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Tuesday, May 13, 2008
Hindi Novel book - अद्-भूत : Ch-20 : मै तुम्हे नही छोडूंगा
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:46 AM
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