उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
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Wednesday, June 11, 2008

Explosion CH-39 Free ebooks - Novels - Ad-Bhut

डिटेक्टीव्ह सॅम और उसके टीमकी गाडीयां तेजीसे रास्तेपर दौड रही थी. कातिलका ठिकाना तो उन्हे पता चल चूका था लेकिन अब जल्द से जल्द वहां जाकर वह रफ्फू चक्कर होनेसे पहले उसे पकडना जरुरी था. गाडीयोंकी गतिके साथ सॅमका दिमागभी दौड रहा था. वह मनही मन सारी संभावनाए टटोलकर देख रहा था. और हर स्थितीमें अपनी क्या स्ट्रॅटेजी रहेगी यह तय कर रहा था. उतनेमें उसके मोबाईलकी बेल बजी. उसके विचारोंकी श्रूंखला टूट गई.

उसने मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. और झटसे फोन अटेंड किया, '' हां बोलो''

'' सर यहां एक सिरियस प्रॉब्लेम हो गया है '' उधरसे इरिकका आवाज आया.

'सिरीयस प्रॉब्लेम हो गया' यह सुना और सॅम निराश होने लगा. उसके दिमागमें तरह तरहके विचार आने लगे.

'' क्या ? ... क्या हूवा ?'' सॅमने उत्तेजित होकर उत्कंठावश पुछा.

वह अपनी निराशाको अपने उपर हावी होने देना नही चाहता था.

'' सर उस बिल्लीका यहां किसी बॉंबकी तरह विस्फोट हुवा है '' इरिकने जानकारी दी.

'' क्या ?... विस्फोट हुवा?'' सॅमके मुंहसे आश्चर्यसे निकला.

उसपर एक एक आघात हो रहे थे.

'' लेकिन कैसे ?'' सॅमने आगे पुछा.

'' सर उस बिल्लीके गलेमें पहने पट्टेमें प्लास्टीक एक्प्लोजीव लगाया होगा... मुझे लगता है की सिग्नल ब्लॉक होतेही उसका विस्फोट हो जाए इस तरह उसे प्रोग्रॅम किया होगा, ताकी कातिलका शिकार किसीभी हालमें उसके शिकंजेसे ना छूटे. '' इरिकने अपनी राय बयान की.

'' क्रिस्तोफर कैसा है ?... उसे कुछ हूवा तो नही ?'' बॉंब विस्फोट और शिकारका जिक्र होतेही अगला विचार सॅमके दिमागमें क्रिस्तोफरकाही आया.

इतना करनेके बादभी हम उसे बचा सके या नही यह जाननेकी जल्दी सॅमको हूई थी.

'' नही सर वह उस विस्फोटमेंही मर गया '' उधरसे इरिकने कहा.

'' शिट ...'' सॅमके मुंहसे गुस्सेसे निकल गया, '' और अपने लोग ?... वे कैसे है ?'' सॅमने आगे पुछा.

वह गया तो गया... कमसे कम अपने लोगोंको कुछ होना नही चाहिए...

उसे अंदर ही अंदर लग रहा था. वैसेभी एक आम आदमीके हैसीयतसे उसे उसके बारेंमे कुछ हमदर्दी नही थी. एक पुलिस ऑफिसरके हैसीयतसे, एक कर्तव्य की तौर पर उसे बचानेकी उसने जी तोड कोशीश की थी.

'' दो लोग जख्मी हो गए है, हम लोग उन्हे हॉस्पीटलमें ले जा रहे है ...'' इरिकने जानकारी दी.

'' कोई सिरीयस तौर पर जख्मीतो नही '' सॅमने फिरसे तसल्ली करनेके लिए पुछा.

'' नही सर... जख्म वैसे मामुलीही है '' उधरसे आवाज आया.

'' सुनो, उधरकी पुरी जिम्मेदारी मै तुम्हारे उपर सौपता हूं ... हम लोग इधर जहांसे सिग्नल आ रहे थे उसके आसपासही है ... थोडीही देरमें हम वहां पहूंच जायेंगे ... उधरका तुम और रिचर्ड दोनो मिलकर अच्छी तरहसे संभाल लो''

'' यस सर...''

'' अपने लोगोंका खयाल रखना '' सॅमने कहा और उसने फोन कट किया.

'' चलो जल्दी ... हमें जल्दी करनी चाहिए ... उधर क्रिस्तोफरको तो हम बचा नही पाये ... कमसे कम इधर इस कातिलको पकडनेमें कामयाब होना चाहिए... '' सॅमने ड्रायव्हरको तेजीसे चलनेका इशारा करते हूए कहा.


क्रमश:...

Thursday, February 7, 2008

Ch-31: पॉलीटीक्स (शून्य-उपन्यास)

जॉन ड्रॉइंग रूममे बैठकर धीरे धीरे व्हिस्कीके घूंट ले रहा था. उसके चेहरेसे साफ झलक रहा था की वह डिस्टर्ब था. इतनेमें उसकी डोअर बेल बजी. वह व्हिस्कीका ग्लास टीपॉयपर रखकर खडा होगया. सामने जाकर उसने दरवाजा खोला. दरवाजेमें उसके सामने अँजेनी खडी थी.

" मै कितने देरसे तुम्हारा मोबाईल ट्राय कर रही हूं. तुम्हारा मोबाईल बंद है क्या?" अँजेनी दरवाजेसे अंदर आते हूए बोली.

" प्रेसवालोंके फोनपर फोन आ रहे है... इसलिए बंद करके रखा" जॉन दरवाजा बंद करते हूए बोला.

अँजेनीने ड्रॉइंग रूममें आनेके बाद टीपॉयपर रखा व्हिस्कीका ग्लास देखा और फिर जॉनके चेहरेके तरफ गौरसे देखने लगी.

" क्या हूवा ? अपसेट दिख रहे हो" अँजेनीने उसे पुछा.

" बैठो ... बताता हूं " उसने खुद एक कुर्सीपर बैठते हूए और अँजेनीको सामने रखे कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए कहा.

वह सामने रखी हूई कुर्सी उसके तरफ खिसकाकर उसके पास जाकर बैठ गई। उसने व्हिस्कीका ग्लास फिरसे उठाकर होठोंको लगाया ।

" ऐसे अंदर ही अंदर गुमसुम रहनेसे अच्छा है अपने प्रॉब्लेम्स अपने किसी करिबी व्यक्तीके साथ शेअर करना ' अँजेनी उसका हाथ अपने हाथमें लेते हूए बोली ।

उसने उसका दुसरा हाथ उसके हाथपर रख दिया ।

" क्या कुछ डिपार्टमेंटमें प्रॉब्लेम हूवा ?" अँजेनीने उसका हाथ थपथपाकर कहा ।

" बोलता हूं... सब कुछ बोलता हूं. " व्हिस्कीका ग्लास बगलमें रखते हूए वह बोला ।

जॉनने एक दीर्घ सांस ली और उसे बोलने लगा -


जॉन उसके बॉसके , यानीकी शहर पोलीस शाखा प्रमुखके सामने बैठा हूवा था ।

" सर, उस बिल्डींगके निचे मिले शवकी तफ्तीश कर यह कुछ जानकारी हासील की है।" जॉन अपने सामने रखे फाईलके पन्ने उलट पुलटकर देखते हूए बोला।

बॉसने सिर्फ " हां " कहा।

जॉनके बॉसने अपने मुंहमें रखे सिगारका एक बडा कश लिया ।

" उस शवके जेबमें बंदूक मिली ... अबतकके तिनो खुन उसी बंदूकसे हूए है ।."

बॉसने अपने मुंहमेंके सिगार की राख सामने टेबलपर रखे अॅश ट्रेमे झटकते हूए कहा ,

" मतलब हम जिस खुनीकी तलाश कर रहे थे वह अपने आपही, मरा हूवा क्यों ना हो, अपने शिकंजे मे आ पहूंचा । "

" सर, मुझे लगता है इतने जल्दी इस नतिजेतक पहूंचना जल्दबाजी होगी. " जॉनने कहा.

" देखो जॉन, अब पुलिसके गलेतक पाणी पहूंच चूका है... अब यह शब्दोंसे खेलनेका वक्त नही है। फिलहाल हालात सामान्य होनेके लिए हमें कुछतो ठोस कदम उठाना जरुरी है । और अपना निष्कर्ष गलत है ऐसा तुम्हे क्यो लगता है ? " बॉसने जॉनके आंखोमें लगातार देखते हूए कहा.

" वैसी बहुत बाते है ." जॉनने फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.

" उदाहरणके तौरपर ? " बॉसने सिगार बुझाते हूए पुछा.

" नंबर एक - असली खुनीने किसीको मारकर उसके जेबमें बंदूक डाली होगी .. ऐसा भी हो सकता है... . और यह सब वह अपने उपरका ध्यान दुसरी तरफ हटानेके लिए कर सकता है...

नंबर दो - जब हमने वह मरे हूए आदमीके घर पर रेड किया तब उसके कॉम्प्यूटरकी हार्डडिस्क गायब थी. उसके पिछे अलग अलग हेतू हो सकते है... जैसे वह अकेला ना होकर उसके साथ बहुत सारे साथी उसको सामील हो .. जैसे मैने पहले बताया वैसे खुनी दुसराही कोई होकर वह ये सब अपनेपरका ध्यान दुसरी तरफ हटानेके लिए कर सकता है... या फिर वह एक मामुली चोरीभी हो सकती है... "

जॉन बॉसकी प्रतिक्रिया देखनेके लिए रुका.

" हां , और कुछ " बॉसने उसे और कुछ कहना है तो आगे कहने के लिए सुचीत करते हूए कहा.

" नंबर तीन - इस बार खुनकी जानकारी खुनीने ना देते हूए किसी औरही आदमीने दी थी ... क्योंकी जहांसे फोन आया था वहांसे खुनीको खुनके वक्त तक खुनके जगह पहूंचना लगभग नामुमकीन था. और अगर इस बारका अपवाद अगर छोडा तो इसके पहले हरबार खुनीने खुनके जगहसेही फोन किया था. कोई उनकेही टीमका आदमी बेईमानीपर उतर आया हो या किसीको इसकी भनक लगी हो जो की अपनी पहचान बताना नही चाहता हो"

जॉनने बचा हूवा सब लगभग एकही सांसमें बोल दिया और अब वह बॉसके प्रतिक्रिया की राह देखने लगा.

जॉनका बॉस उसके कुर्सीसे धीरेसे उठ गया. खिडकीके बाहर देखते हूए उसने नई सिगार सुलगाई. फिर सिगारके लंबे कश लेते हूए उसने जॉनके इर्द गिर्द एक चक्कर लगाई -

" होगया तुम्हारा ?" बॉसने उसके तरफ घुरकर देखते हूए कहा.

जॉनने सिर्फ अपना सर हिलाया.

" देखो जॉन, तुम्हे पताही है की इस घटना की वजहसे अपने पुलिसकी प्रतिमा कितनी मलीन हो चूकी है. और तुम जो कह रहे हो वह सारी संभावनाएं है. उसका अपने पास कोई ठोस सबुत नही है. "

जॉनका बॉस कमरेमें चहलकदमी करते हूए बोल रहा था.

" लेकिन सर.." जॉनने बिचमें बोलनेका प्रयास किया.

उसे रोकते हूए बॉसने कहा,

" मुझे लगता है इस केसपर काम करके और लगातार तणावके वजहसे तूम शारिरीक और मानसिक तरहसे थक चूके हो... और थकनेके बाद बहुत बार ऐसा होता है... आदमी गडबडा जाता है... और फिर वह तरह तरहके निष्कर्ष निकालने लगता है."

" नही सर, वैसा नही ." जॉनने अपना पक्ष रखने का प्रयास किया.

" देखो , मै क्या कहता हूं ध्यान देकर सुनो " बॉस अब कडे स्वरमें बोल रहा था,

" अब एक प्रेस कॉन्फरंस लेनी पडेगी. उसमें एक साथ केसकी सारी जानकारी देकर अपने पुलिस डिपार्टमेंटकी बची कुची लाज रखनी पडेगी. और फिर ..... और फिर तुम एक महिनेके लिए छुट्टीपर चले जावो... मै तुम्हारी छुट्टी अभी सँक्शन कराये देता हूं ... फिर तुम तुम्हारी दोस्त अँजेनीको लेकर किसी हिलस्टेशनको जावो... छुट्टीया मनाने के लिए... बाकी चिंता तुम मत करो... मै सब बंदोबस्त करता हूं. "

जॉनने एकदम चौंककर उसके बॉसकी तरफ देखा. अपने बॉसको अपने और अँजेनीके बारेमें कैसे पता चला? उसकी आंखोमे अभीभी आश्चर्य और अविश्वास तैर रहा था. .

" आय अॅम सॉरी... इट्स यूवर पर्सनल मॅटर... बट इटस् माय प्रोफेशनल वे ऑफ वर्कींग .... मुझे सबपर पैनी नजर रखनी पडती है"

जॉन कुछ बोले इसके पहलेही बॉसने कुर्सीके पिछे टंगा हूवा अपना ओव्हरकोट उठाया और वह दरवाजेकी तरफ जाने लगा.

दरवाजेमें रुककर जॉनकी तरफ पलटकर देखते हूए वह बोला, " कल सुबह दस बजे मैने प्रेस कॉन्फरंस बुलाई है. क्या बोलना है वह सब मै देखता हूं. यू जस्ट बी देअर."

जॉनके जवाब की राह ना देखते हूए बॉस खाट खाट जूतोंका आवाज करते हूए वहांसे निकल गया. जॉन संभ्रमसे कभी बॉसको जाते हूए देख रहा था तो कभी अपने हाथमेंके फाईल और कागजादोंकी तरफ देखते हूए वहां खडा रहा.

क्रमश:...

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Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.