कमांड2ने जाना की यही सही वक्त है...
... की कमांड1से बहुत सारे राज पता किये जा सकते है...
वह एक एक घुटसे उसे साथ देता हूवा उसको नशा चढने का इंतजार करने लगा. थोडीही देरमें कमांड1 टून्न हो गया. यही मौका देखकर कमांड2ने अपने सवालोंका तांता लगा दिया...
"कमांड1, मुझे एक बता ..."
कमांड2ने पुछनेसे पहले जानबुझकर रुककर कमांड1के चढे हूए नशेका अंदाजा लिया.
कमांड2को रुका हूवा देखकर कमांड1 नशेमें बोला, " बोल क्या बतानेका है .... एक क्यू... दो पुछ... तिन पुछ... तुझे जितना चाहिए उतना पुछ... '"
उसका यह नशेमे धुत हूवा हाल देखकर कमांड2को हंसी आ रही थी लेकिन उसने बडे प्रयासके साथ अपनी हंसी दबाई.
"' नही मतलब... वह वक्त तुम्हारे तकदीरसे अच्छा था और अगर तुम 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे कोईभी बचा नही सकता था ' - ऐसा बॉसने क्यों कहा? मुझे तो कुछभी समझमें नही आ रहा है.." कमांड2ने कमांड1 को पुछा.
कमांड1को अब अच्छी खासी चढ गई थी. .
" वह तुम्हे नही समझेगा ... वह एक लंबी स्टोरी है " कमांड1ने कहा.
कमांड2 सोचने लगा.
अब इससे कैसे उगलवाया जाए...
उसने काम्प्यूटरपर बैठकर बॉसने पहले एक बार भेजा हूवा मेसेज खोला.
" और यह देख पहले एक बार बॉसने भेजे मेसेजमेंभी 11 तारख के रातको 3 से 4 का वक्त तुम्हारे लिए अच्छा है और 4 से 7 का वक्त बहुत ही खतरनाक है ऐसा लिखा था. उसका जोतिष्यपर जरा जादाही विश्वास दिखता है. " कमांड2 कमांड1को और उकसाने का प्रयत्न करने लगा.
" जोतिष्यपर विश्वास नही ... पूरी निष्ठा है. अबतक उसने कहे समयमें कभीभी दगा नही हूवा है " कमांड1ने कहा.
" वह केवल एक इत्तिफाक हो सकता है..." कमांड2 उसे और छेडनेके उद्देशसे बोला.
" इत्तिफाक नही. बॉसके पास ऐसी एक चिज है की जिसकी मदतसे वह कौनसी बात किस वक्त लाभदायक हो सकती है यह पहलेसे जान सकता है. "
कमांड1के मुंहसे अब बहुत सारी अंदर की बाते बाहर आनेको जैसे बेकरार थी.
" मुझे नही विश्वास होता' कमांड2 ने असहमती दर्शाकर अपना आखरी हथीयार इस्तेमाल किया.
" तुम्हाराही क्या किसीकाभी विश्वास नही होगा ''
" इसी एक बातसे तुम कह रहे हो की औरभी कुछ प्रमाण है?" कमांड2ने बिचमें टोककर पुछा.
" यह एकही बात नही ..... औरभी बहुत सारी बाते है... बॉसके पासका पैसा देखो ... बॉसके पास इतना पैसा कहांसे आगया? यह पुरी संस्था चलाना कोई मजाक नही... और यह सब वह अपने अकेले के बलबुतेपर चलाता है " कमांड2ने कहा.
" कैसे क्या?"
" उसके पासके तंत्रके सहाय्यता से कौनसे वक्त कौनसा शेअर फायदेमे रहेगा यह उसे पहलेसेही पता रहता है... और ऐसा कहते है की अबतक वह कभीभी नुकसानमें नही रहा " कमांड1 अब अच्छा खासा खुलकर बोल रहा था.
" तंत्र? ऐसा कौनसा तंत्र है उसके पास?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.
" बताता हूं" कमांड1 अपना व्हिस्कीका ग्लास फिरसे भरते हूए बोला.
" और बॉसने यह तंत्र कहासे हासिल किया ?" कमांड2 बेसब्रीसे सवालपर सवाल पुछे जा रहा था.
कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुनने के लिए बेताब हो गया था.
" बोलता हूं बाबा , सब बताता हूं " बोलते हूए कमांड1 खडा हो गया.
अपने दाएं हाथकी छोटी उंगली बताते हूए कमांड1ने कहा,
" एक मिनट रुको मै जरा इधरसे आता हूं''
कमांड1 झमता हूवा बेडरूमकी तरफ जाने लगा.
... to be contd...
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Friday, January 18, 2008
Ch-18: कमांड2की चाल ... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
8:58 AM
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