बॉसके सामने सॅम बैठा था. वह केसके बारेमे बॉसको ब्रीफ कर रहा था. बॉसने जॉनकी सब जिम्मेदारी उसे दी थी. बॉस हमेशाकी तरह रिलॉक्स बैठा सिगारके कश भर रहा था.
इतनेमें वहा पियून आ गया.
बॉसके सामने एक चिठ्ठी रखते हूए बोला,
" साहब, जॉनसाहब आये हूए है "
" जॉन....साहब ..."
'साहब' इस शब्दके उपर जरुरत से जादा जोर देनेसे बॉसके बोलनेका उपरोध स्पष्ट झलक रहा था.
बॉसने चिठ्ठी खोली.
चिठ्ठीमें लिखा था -
" सिरियल किलर केसकी बहुत महत्वपुर्ण जानकारी मेरे हाथ आई है ... इसलिये आपको तत्काल मिलना है.
बॉसने चिठ्ठीके उपरसे चेहरेपर बिना कोई भाव लाये एक नजर घुमाई.
सॅमके सामने चिठ्ठी सरकाते हूए बॉस बोला,
" जब दिए लगाने थे तब तो नही लगाये ... अब ये क्या तिर मारनेवाले है...?"
सॅमने चिठ्ठीपर एक नजर डाली.
अचानक कुर्सीपर सिधा बैठते हूए बॉसने पियून को फर्माया ,
" सेंड हिम इन"
पियून जल्दीसे बाहर गया और बादमे जॉन अंदर आया.
" हॅलो जॉन, हाऊ आर यू?" बॉस उसे सामने कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए बोला.
जॉन कुछ ना बोलते हूए सामने कुर्सीपर बैठ गया.
" हॅलो जॉन"
" हॅलो सॅम"
जॉन और सॅममें कमसे कम शब्दोका आदान प्रदान हूवा. दोनोंको अटपटासा लग रहा था.
" यस ... व्हाट कॅन वुई डू फॉर यू?"
बॉस एकदम किसी अनजानकी तरह उससे बात कर रहा था.
" सर, आय हॅव अॅन इंपॉर्टंंट इनफॉरमेशन रिगाडीर्ंंग नेक्स्ट पॉसिबल मर्डर"
" बट अॅज ऑल नो यू आर राईट नाऊ डिस्मीस्ड "
जॉन कुछ नही बोला.
" देन व्हाय शुड यू शेअर द इंन्फारमेशन विथ अस"
" सर देखीए , यह जो जानकारी है उसका आपके डिपार्टमेंटल पॉलिटीक्सके साथ कोई लेना देना नही है. यहा पब्लीकके जिने मरनेका सवाल है. मै अगर इस जानकारी के सहारे अकेला कुछ कर सकता था तो आपके पास कभी नही आता. "
जॉनके शब्दोमें उसका उसके बॉसपरका रोष स्पष्ट झलक रहा था.
बॉसने सामने रखे अॅश ट्रेमे सिगार मसल दी और मुस्कुराते हूवे बोला , " इसे कहते है रस्सी जल गई लेकीन बल नही गया . ऐनीवे क्या जानकारी है तुम्हारे पास ?"
" अगला कत्ल किसका होनेवाला है इसकी पॉसीब्लीटी है मेरे पास " जॉनने कहा.
सॅम चूप था, कभी वह जॉनकी तरफ देखता तो कभी बॉसकी तरफ.
बॉसने जोरसे ठहाका लगाया.
" पॉसीब्लीटी!"
" सर धीस इज नॉट सम काइन्ड ऑफ अ जोक"
बॉसने अपना हंसना रोका.
" देखो , इस शहरमें लगभग 75 हजार मकान है. उसमेंकेही किसी एक मकानमें अगला कत्ल होनेवाला है.. यह पॉसीब्लीटी बतानेके लिए एक मुरखभी काफी है.
" अगला खून जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होगा. "
बॉसने फिरसे ठहाका लगाया.
" इज धीस सम काईन्ड ऑफ वर्ड पझल"
इतनी देरसे चूप्पी साधे बैठा हूवा सॅम हिम्मत करके बोला.
"सर मुझे लगता है... वुई शुड लिसन थरोली व्हाट हि वांट टू से"
सॅम बिचमें बोला हूवा बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रह था. .
" ओ... हो... सॉरी ... मै तो पुरी तरह भूल गया की यह केस तूम हॅन्डल कर रहे हो..." बॉसने उसे ताना मारा.
" सर, मेरा मतलब ... आखीर आपही हमारे बॉस हो... मैनेतो सिर्फ सलाह दी थी ... आखीर क्या डीसीजन लेना है वह आपकाही अधिकार है... ..." सॅम शर्मींदा होकर बोला.
बॉसका 'इगो' सॅटिसफाय हूवा ऐसा लग रहा था. .
बॉस एकदम सिरीयस होगया. कॅबीनमें सन्नाटा छा गया. बॉसने नई सिगार सुलगाई और कुर्सीपर रेलते हूए बोला,
" ओ के देन कॉल द मिटींग"
क्रमश:..
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Showing posts with label subscribe free indian novel. Show all posts
Showing posts with label subscribe free indian novel. Show all posts
Friday, February 29, 2008
Ch-48: ओके देन कॉल द मिटींग (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:59 AM
1 comments
Labels: hind, hindi indi blog, hindi indian blog, indi blog, indi novel, india literature blog, indian blogs, indian literature blog, indian novel blog, subscribe free indian novel, subscribe indian blog
Subscribe to:
Posts (Atom)




