... जल्दी जल्दी जॉन लिफ्टसे बाहर निकल गया. अचानक वक्त पर आए फोनसे वह औरभी चिढसा गया था.
लेकिन क्या कर सकते थे ड्यूटीही वैसी थी...
किस पल कहा जाना पडेगा कुछ बोल नही सकते थे....
बेचारे अँजेनीको क्या लगा होगा ?..
वह सोचमें डूबा सिधा उटीन हॉपरके फ्लॅटमें घुस गया. वह आनेके पहलेही सॅम उसके टीमको लेकर वहां हाजीर हूवा था. वह सिधा फ्लॅटके बेडरूममें गया. उसके पिछे पिछे सॅमभी बेडरूममें गया. सामने बेडपर डरके मारे खुला हूवा मुंह और बडी बडी आंखे ऐसे स्थीतीमें खुनसे सना उटीनाका मृतदेह पडा हूवा था. और सामने दिवारपर उटीनाके खुनसे एक बडासा शुन्य निकाला हूवा था.
उस शुन्यके बिचोबिच लिखा था " अगर शून्य ना होता तो ? ".
जॉन वह संदेश बार बार पढने लगा. .
खुनीको क्या कहना है ?... उस संदेश मे क्या कुछ छिपा अर्थ था...?...
वह सोचने लगा.
" खुनका समाचार किसने दिया ?" जॉनने सॅमको पुछा.
" सर फोनपर कोई अज्ञात इसम था. उसने अपना नाम नही बताया. हमनें कॉलभी ट्रेस करके देखा वह इसी एरीयामें एक पब्लीक बूथका था. " सॅमने जानकारी दी.
सॅम अपने काममे हमेशा प्रॉम्प्ट था.
" खून होकर जादा वक्त नही बित गया होगा " जॉनने अपना तर्क लगाया.
" हां सर , हम आए तब खुन बहही रहा था... इसलिए हमने आसपास सब तरफ खुनीको तलाशा.' सॅम बोल रहा था.
" कुछ मिला ? " जॉनने आगे पुछा.
" इन दोनोंकोतो कुछ नही मिला " सॅम कमरेमें उपस्थीत अपने दो साथीयोंकी तरफ निर्देश करके बोला.
" और तिन लोग देखनेके लिए गए है... अभीतक वापस नही आए " सॅमने आगे बताया.
जॉनने वहा उपस्थित सबको ताकीद दी,
" देखो, यह एकके बाद एक तिसरा खुन है... अभीतक हाथमें कुछ नही मिल रहा है... अगर ऐसाही चलता रहा तो कैसे होगा... कुछ भी करो ... इस बार हमें खुनी मिलनाही चाहिए...."
तभी सांस फुली हूई अवस्थामें उनके दो साथी फ्लॅटमे दाखील हूए.
सब लोग उनकी तरफ उम्मीदसे देखने लगे.
" सर, बिल्डींगके पिछवाडे निचे जमीनपर एक डेड बॉडी पडी हूई है... " उनमेंसे एकने बडी बडी सासें लेते हूए कहा.
" सर, शायद कोई उपरसे निचे गिर गया है... मुझे लगता है... वही खुनी होगा... " दुसरेने कहा.
" सॅम, तूम यही रुककर इन्व्हेस्टीगेशन कंटीन्यू करो... मै इनके साथ निचे जाकर आता हूं " जॉन उनके साथ फ्लॅटसे बाहर जाते हूए बोला.
... to be contd..
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Wednesday, January 30, 2008
Ch-27: तफ्तीश (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:04 AM
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