उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है.
उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
You can also Email this Hindi Novel to your friends!
Showing posts with label sangraha. Show all posts
Showing posts with label sangraha. Show all posts

Monday, January 28, 2008

Ch-25: घात प्रतिघात (शून्य-उपन्यास)

तेजीसे सब कुछ निपटाकर कमांड1 फ्लॅटके दरवाजेसे दौडकर लिफ्टके पास गया. थोडीही देर पहले उसे सायरनका आवाज बिल्डीग के निचे आकर बंद हूवा ऐसा महसूस हूवा था. उसने लिफ्टके डिस्प्लेपर देखा. लिफ्ट उपर आ रही थी. वह घबरा गया.

कही पुलिस बिल्डींगमें तो नही आए ?..

और शायद वह उपर ही आ रहे थे ...

उसके चेहरेपर अब डर झलकने लगा था. क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने इस डरे हूए हालतेमेंभी तेजीसे फैसला लिया और वह सिढीयोंसे उपरकी तरफ दौडने लगा. थोडी देरमें उसके खयालमें आया की दौडते हूए उसके जुतोंका आवाज हो रहा है. उसने अपने जूते निकालकर वही छोड दिए और वह वैसेही उपर तेजीसे दौडने लगा. दौडते हूए निचे क्या हो रहा होगा इसकी तरफ भी उसका ध्यान था. आखीर वह बिल्डींगके टेरेसपर आकर पहूंच गया. टेरेसपर उसने इधर उधर देखा. उपर चमचमाते चांदनीसे भरा आकाश और आजूबाजू चमचमाते इलेक्ट्रीक लाईटसे भरा शहर. दौडनेके वजह से वह हांफ रहा था और उसे पसीना आया था. उपर ठंडी हवा चल रही थी. पसिनेसे सने उसके गरम शरीर को वह ठंडक पहूचा रही थी. उसे थोडी राहतसी महसुस हूई. लेकिन रुकनेके लिए वक्त कहां था? बिल्डींगके सामनेकी तरफ उसने झांककर देखा. बिल्डींगके सामने पुलिसकी गाडी खडी थी. गाडीके पास तीन हथीयारोंसे लेस पुलिस खडे थे. उसे एक समझमें नही आ रहा था की -

खुनके बारेमें पुलिस को पता कैसे चला ?...

ऐसाभी हो सकता है की वे दुसरेही किसी जुर्मके सिलसिलेमें वे वहां आये हों...

लेकिन वह अगर दूसरे किसी अपराधके सिलसिलेमें यहां आए होंगे और ऐसेमे अगर मै पकडा गया तो वह एक घोर इत्तेफाक ही कहना पडेगा...

लेकिन उसे पुरा भरोसा था की बॉसने दिए वक्तमें ऐसी अनहोनी नही होनी थी. अबतक ऐसा कभी नही हूवा था..

अब यहांसे कैसे खिसका जाए?...

वह सोचने लगा.

एक बात पक्की थी की बिल्डींगके सामनेसे खिसकना लगभग नामुमकीन था...

दुसरा कोई विकल्प ढूंढनेके लिए वह इधर उधर देखने लगा. बिल्डींगके दाए बायेंसेभी निकलना मुमकीन नही था. एक तो उतरनेको कुछ नही था और किसी तरह उतरो तो पुलिसके सामनेसेही जाना पड सकता था. फिर कमांड1 धीरे धीरे बिल्डींगके पिछले हिस्सेमें आकर वहांसे निकलनेके बारेंमे ताकझाक करने लगा. पिछे उतरनेको पाईप थे. वह देखकर उसके जानमें जान आ गई. लेकिन पिछे दुसरे एक बिल्डींगपर लगे सोडीयम लँपकी रोशनी पड रही थी. इसलिए उतरते वक्त किसीके नजरमें आना मुमकीन था. वह और कुछ विकल्प है क्या इसके बारेंमें सोचने लगा. उसके पास जादा वक्त नही था.

अगर गलतीसेभी पुलीस यहा टेरेसपर आ गई तो ?...

तो वह अपने आप ही उनके कब्जेमें आनेवाला था....

उसने बिल्डींगका पिछला हिस्सा निचे उतरनेके हिसाबसे और एकबार ठिक ढंगसे देखने का फैसाला किया. इसलिए वह पिछे के तरफ की पॅराफिट वॉलपर चढ गया. पाईप उपरसे निचे जमीनतक थे. शायद ड्रेनेज पाईप थे. पाईपपर जगह जगह किले लगाए हूए थे इसलिए उतरने के लिए पकडना आसान था. अचानक उसके खयालमें आया की उसके पिछे टेरेसपर कुछ हरकत हूई है. जबतक वह पलटकर देखता एक काला साया उसपर झपट पडा और उसने पुरा जोर लगाकर कमांड1को टेरेसके निचे धकेला. इस अचानक हूए हमलेसे कमांड1 गडबडा गया. उसे खुदको संभालनेकाभी वक्त नही मिला. वह बिल्डींगसे निचे गिरने लगा. गिरते वक्त उसका चेहरा उपर टेरेसकी तरफही था. वह काला साया टेरेससे झुककर उसे निचे गिरता हूवा देख रहा था. पिछेसे आ रहे सोडीयम लॅंप के रोशनीमें उसे उस काले साएका चेहरा दिखाई दिया. वह उस चेहरेकी तरफ आंखे फाडफाडकर देखने लगा. इधर निचे गिरकर मरनेका डर और सामने उस काले साए का चेहरा देखकर उसके डरमें और आश्चर्यमें जैसे औरही इजाफा हो रहा था.

वह चेहरा कमांड2का था ...

उसे विश्वासही नही हो रहा था....

उसने एकबार फिरसे तसल्ली कर ली.

हां वह चेहरा, उसका दोस्त जिसपर उसने पुरी तरहसे भरोसा किया था उस कमांड2काही था...

लेकिन उसने ऐसा क्यों किया ?...

वह उस सवालपर सोचकर कुछ नतिजेतक पहूंचनेके पहलेही वह निचे फर्शपर गिर गया. लगभग 15-16 माले उपरसे निचे गिरकर उसके सरके टूकडे टूकडे हूए थे और तत्काल उसकी जान चली गई थी. इधर उपर उसे निचे गिरते हूए देख रहे कमांड2के चेहरेपर एक गुढ मुस्कुराहट बिखेर गई.



क्रमश:...

Enter your email address to SUBSCRIBE the Hindi Novels:

आप HindiNovels.Net इस अंतर्जाल पर आनेवाले वे आगंतुक है

Next Hindi Novels - Comedy, Suspense, Thriller, Romance, Horror, Mystery

1. करने गया कुछ कट गयी साली मुछ (कॉमेडी)
2. मधूराणी (the story of femine power)
3. सायबर लव्ह (लव्ह, सस्पेन्स)
4. अद-भूत (हॉरर, सस्पेंन्स थ्रीलर)
5. मृगजल (लव्ह ड्रामा, सायकॉलॉजीकल थ्रीलर)
6. फेराफेरी (कॉमेडी)
7. लव्ह लाईन (लव्ह, कॉमेडी, सस्पेन्स)
8. ब्लॅकहोल (हॉरर, मिस्ट्री, सस्पेन्स)

About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.