उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है.
उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
You can also Email this Hindi Novel to your friends!
Showing posts with label read hindi on internet. Show all posts
Showing posts with label read hindi on internet. Show all posts

Monday, July 14, 2008

Two back to back Hindi Novels at reader's disposal

Till Now two Hindi novels are completed on this blog posted in blog / episode manner. These novels are posted in blog / episode forms in 3 languages at the same time, i,e English, Hindi and Marathi.

The links to these novels in respective languages are as follows -

English Novels

Marathi Novels

Seeing the readers tremendous response I am planning to post further more novels in episode manner.

The statistics (Consolidated) of the readership is as follows.

Per day page views - 4000-5000 daily

Daily email subscribers - around 500

Email referals = approx 15 per day

Page views till today - 2.30 Lakhs (Since Last 5 months)

Monday, May 12, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-19 : आय प्रॉमीस

हॉटेलके एक कमरेमे नॅन्सी और जॉन बेडपर एकदुसरेके आमने सामने बैठे थे. जॉनने नॅन्सीके चेहरेपर आती बालोंके लटोंको एक तरफ हटाया.

'' मुझे तो डरही लगा था की शायद हम उनके चंगुलमें ना फंस जाए'' नॅन्सीने कहा.

वह अभीभी उस भयानक मनस्थीतीसे बाहर नही निकल पाई थी.

'' देखो .. मेरे होते हूए तुम्हे चिंता करनेकी क्या जरुरत ?... मै तुम्हे कुछभी नही होने दुंगा... आय प्रॉमीस'' वह उसे सांत्वना देनेकी कोशीश करते हूए बोला.

उसने मंद मंद मुस्कुराते हूए उसके तरफ देखा.

सचमुछ उसे उसके इस शब्दोंसे कितना अच्छा लगा था. ...

धीरेसे जॉन उसके पास खिसक गया. नॅन्सीने उसकी आंखोमें देखा. जॉनभी अब उसकी आंखोसे अपनी नजरे हटानेके लिए तैयार नही था. धीरे धीरे उनके सांसोकी गति बढने लगी. हलकेही जॉनने उसे अपनी बाहोंमें खिंच लिया. उसेभी मानो उसकी सुरक्षीत बाहोमें अच्छा लग रहा था.

जॉनने धीरेसे उसे बेडपर लिटाकर उसका चेहरा अपनी हाथोंमे लेकर वह उसकी तरफ एकटक देखने लगा. धीरे धीरे उसकी तरफ झुकता गया और उसके गर्म होंठ अब उसके कांपते होंठोपर टीक गए. दोनोभी बेकाबु होकर एकदुसरेको आवेगमें चुमने लगे. इतने आवेगमेंकी वे दोनो 'धपाक' से बेडके निचे फर्शपर गिर गए. नॅन्सी निचे और उसके उपर जॉन गिर गया. दर्दसे कराहते हूए नॅन्सीने उसे दूर धकेला,

'' मेरी क्या हड्डीयां तोडोगे? '' वह कराहते हूए बोली.

जॉन झटसे उठ गया और उसे उपर उठानेका प्रयास करने लगा.

'' आय ऍम सॉरी ... आय ऍम सो सॉरी '' वह बोला.

नॅन्सीने उसे एक चांटा मारनेका अविर्भाव किया. उसनेभी डरके मारे अपनी आंखे बंद कर अपना चेहरा दुसरी तरफ हटाया. नॅन्सी मनही मन मुस्कुराई. किसी छोटे बच्चेकी तरह मासूम भाव उसके चेहरेपर उभर आए थे. उसकी इसी मासूम अदापर तो वह फिदा हूई थी. उसने उसका चेहरा अपने हाथोंमे लिया और उसकी होंठोंको वह कसकर चुमने लगी. वह भी उसी तडप, उसी आवेगके साथ जवाबमें उसे चुमने लगा. अब तो उन्होने निचे फर्शपर बिछे गालीचेसे उठकर उपर जानेकेभी जहमत नही उठाई. असलमें वे एक क्षणभी गवाना नही चाहते थे. वे निचे गालीचेपरही लेटकर एकदुसरेंके उपर चुंबनकी बरसात करने लगे. चुमनेके साथही उनके हाथ एकदुसरेके कपडे निकालनेमें व्यस्त थे. जॉन अब उसके सारे कपडे निकालकर उसमें समा जानेको बेताब हूवा था. वह धीरे धीरे बडी बडी सांसोके साथ नॅन्सीके उपर झुकने लगा. इतनेमें... इतनेंमे उनके कमरेके दरवाजेपर किसीने नॉक किया. वे मानो जैसे थे वैसे बर्फ की तरह जम गए. गडबडाकर वे एक दुसरेकी तरफ देखने लगे.

हमें दरवाजा बजनेका आभास तो नही हुवा? ...

तब फिरसे एकबार दरवाजेपर नॉक सुनाई दी - इसबार थोडी जोरसे.

सर्विस बॉय तो नही होगा ...

'' कौन है ?'' जॉनने पुछा.

'' पुलिस ...'' बाहरसे आवाज आया.

दोनो गालिचेसे उठकर कपडे पहनने लगे.

पुलिस यहांतक कैसे पहूंच गई ?...

जॉन और नॅन्सी सोचने लगे.

उन्होने अपने कपडे पहननेके बाद जॉन सहमें हूए स्थितीमें दरवाजेतक गया. उसने फिरसे एक बार नॅन्सीकी तरफ देखा. अब इस परिस्थितीका सामना कैसे किया जाए इसकी वे मनही मन तैयारी करने लगे थे. जॉन कीहोलसे बाहर झांककर देखने लगा. लेकिन बाहर अंधेरेके सिवा कुछ नजर नही आ रहा था.

या उस कीहोलमें कुछ प्रॉब्लेम होगा ...

सावधानीसे, धीरेसे उसने दरवाजा खोला और दरवाजा थोडा तिरछा करते हूए बाहर झांकनेका प्रयास कर रहा था तभी ... क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल, और स्टीव्हन दरवाजा जोरसे धकेलते हूए कमरेमें घुस गए.

क्या हो रहा है यह समझनेके पहलेही क्रिस्तोफरने दरवाजेको अंदरसे कुंडी लगा ली थी. किसी चित्तेकी फुर्तीसे रोनॉल्डने चाकू निकालकर नॅन्सीके गर्दनपर रख दिया और दुसरे हाथसे वह चिल्लाये नही इसलिये उसका मुंह दबाया.

क्रिस्तोफरनेभी मानो पुर्वनियोजनकी तहत उसका चाकू निकालकर जॉनके गर्दनपर रखा और उसका मुंह दबाकर उसे दबोच लिया. मानो अब पुरी स्थिती उनके कब्जेमें आई हो इस तरहसे वे एकदुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए.

'' स्टीव्ह इसका मुंह बांध'' क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आदेश दिया.

जैसेही नॅन्सीने चिल्लानेकी कोशीश की रोनॉल्डने उसका मुंह जोरसे दबाते हुए और मजबुतीसे उसे दबोच लिया.

'' पॉल इसकाभी बांध...''

स्टीव्हनने जॉनका मुंह, हाथ और पैर टेपसे बांध दिया. पॉलने नॅन्सीका मुंह और हाथ बांध दीए.

उन्होने जिस फुर्तीसे यह सब हरकतें की उससे ऐसा प्रतित हो रहा था की वे ऐसे कामोंमे बडे तरबेज हो.

अब क्रिस्तोफरके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुप रही थी.

'' ए ... इसके आंखोपर कुछ बांधरे ... बेचारेसे देखा नही जाएगा. '' क्रिस्तोफरने कहा.

स्टीव्हनने उनकेही सामानसे एक कपडा निकालकर जॉनकी आंखोपर बांध दिया. अब जॉनको सिर्फ अंधेरेके सिवा कुछ दिखाई नही दे रहा था. और सुनाई दे रहा था वह उन गिद्दोंकी वहशी और राक्षसी हंसी और नॅन्सीका दबा-दबाया हूवा चित्कार.


क्रमश:...

Thursday, May 8, 2008

Hindi literarture Novel - अद्-भूत : Ch-17 : गेम

रेल्वे प्लॅटफॉर्मपर जैसे लोगोंका सैलाब उमड पडा था. भिडमें लोग अपना अपना सामान लेकर बडी मुश्कीलसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जा रहे थे. शायद अभी अभी कोई ट्रेन आई हो. वही प्लॅटफार्मपर एक कोनेमें स्टीव्हन, पॉल, रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर ऍन्डरसन पत्ते खेल रहे थे. उन चारोंमे क्रिस्तोफर, उसके हावभावसे और उसका जो तिनोंपर एक प्रभाव दिख रहा था उससे, उनका लिडर लग रहा था. क्रिस्तोफर लगभग पच्चीस के आसपास, कसे हूवे और मजबूत शरीर का मालिक, एक लंबाचौडा यूवक था.

" देखो अपनी गाडी आनेमें अभी बहूत वक्त है... कमसे कम और तीन गेम हो सकते है...'' क्रिस्तोफरने पत्ते बांटते हूए कहा.

" पॉल तुम इस कागजपर पॉइंट्स लिखो " रोनॉल्डने एक हाथसे पत्ते पकडते हूए और दुसरे हाथसे जेबसे एक कागजका टूकडा निकालकर पॉलके हाथमें देते हूए कहा.

" और, लालटेन जादा हुशारी नही चलेगी' पॉलने स्टीव्हनको ताकीद दी. वे स्टीव्हनको उसके चश्मेकी वजहसे लालटेनही कहते थे. क्रिस्तोफरका ध्यान पत्त्ते खेलते वक्त यूंही प्लॅटफॉर्मपर उमड पडी भिडकी तरफ गया.

भिडमें नॅन्सी और जॉन एकदुसरेका हाथ पकडकर किसी परदेसी अजनबीकी तरह चल रहे थे.

उसने नॅन्सीकी तरफ सिर्फ देखा और खुले मुंह देखताही रह गया.

" बाप, क्या माल है " उसके खुले मुंहसे अनायासही निकल गया. पॉल, रोनॉल्ड और स्टीव्हनभी अपना गेम छोडकर उधर देखने लगे. उनकाभी देखते हूए खुला मुह बंद होनेको तैयार नही था.

" कबूतरी कबूतरके साथ भाग आई है शायद" क्रिस्तोफरके अनुभवी नजरने भांप लिया.

' उस कबुतरके बजाय मै उसके साथ रहना चाहिए था' पॉल ने कहा.

क्रिस्तोफरने सबके पाससे पत्ते छिनकर लेते हूए कहा, ' देखो, अब यह गेम बंद करदो... हम अब एक दुसराही गेम खेलते है "

सबके चेहरे खुशीसे दमकने लगे. वे क्रिस्तोफरके बोलनेका छिपा अर्थ जानते थे. वैसे वे वह गेम कोई पहली बार नही खेल रहे थे. सब उत्साहसे भरे एकदम उठकर खडे होगए.

" अरे, देखो जरा खयाल रहे... साले कही घुस जाएंगे तो बादमें मिलेंगे नही " रोनॉल्डने उठते हूए कहा.

फिर वे उनके खयालमें ना आए इतना फासला रखते हूए उनके पिछे पिछे जाने लगे.

" ऐ , लालटेन तुम जरा आगे जावो... साले पहलेही तुझे चश्मेसे जरा कमही दिखता है ." क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आगे धकेलते हूए कहा. स्टीव्हन नॅन्सी और जॉनके खयालमें नही आये ऐसा सामने दौडते हूए गया.

दिनभर इधर उधर घुमनेमें वक्त कैसा निकल गया यह जॉन और नॅन्सीको पताही नही चला. कुछ देर बाद शामभी हो गई. जॉन और नॅन्सी एक दुसरेका हाथ पकडकर मस्त मजेमें फुटपाथपर चल रहे थे. सामने एक जगह रास्तेपर हार्ट शेपके हायड्रोजसे भरे लाल गुब्बारे बेचनेवाला फेरीवाला उन्हे दिखाई दिया. वे उसके पास गए. जॉनने गुब्बारोंका एक बडासा दस्ता खरीदकर नॅन्सीको दिया. पकडनेके लिए जो धागा था उसके हिसाबसे वह दस्ता बडा होनेसे धागा टूट गया और वह दस्ता उडकर आकाशकी ओर निकल पडा. जॉनने दौडकर जाकर, उंची उंची छलांगे लगाकर उसे पकडनेका प्रयासे किया लेकीन वह धागा उसके हाथ नही आया. वे लाल गुब्बारे मानो एकदुसरेको धक्के देते हूए उपर आकाशमें जा रहे थे. जॉनकी उस धागेको पकडनेकी जी तोड कोशीश देखकर नॅन्सी खिलखिलाकर हंस रही थी.

और उनके काफी पिछे क्रिस्तोफर , रोनॉल्ड, स्टीव्हन और पॉल किसीके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा कर रहे थे.

नॅन्सी और जॉन एक जगह आईसक्रीम खानेके लिए रुक गए. उन्होने एक कोन लिया और उसमेंही दोनो खाने लगे. आईसक्रीम खातेवक्त नॅन्सीका ध्यान जॉनके चेहरेकी तरफ गया और वह खिलखिलाकर हंस पडी.

'' क्या हूवा ?'' जॉनने पुछा.

'' आईनेमें तो देखो '' नॅन्सी वही पास एक गाडीको लगे आईनेकी तरफ इशारा कर बोली.

जॉनने आईनेमें देखा तो उसके नाक के सिरेको आईसस्क्रीम लगा था. अपना वह हुलिया देखकर उसेभी हंसी आ रही थी. उसने वह पोंछ लिया और एक प्रेमभरी नजरसे नॅन्सीकी तरफ देखा.

'' सचमुछ अपनी रुची कितनी मिलती जुलती है '' नॅन्सीने कहा.

'' फिर ... वह तो रहनेही वाली है... क्योंकी ...वुई आर द परफेक्ट मॅच"' जॉन गर्वसे बोल रहा था.

आईस्क्रीम खाते हूए अचानक नॅन्सीका खयाल दुर खडे क्रिस्तोफरकी तरफ गया. क्रिस्तोफरने झटसे अपनी नजर फेर ली. नॅन्सीको उसकी नजर अजीब लगी थी और उसकी गतिविघीयांभी.

'' जॉन मुझे लगता है अब हमें यहांसे निकलना चाहिए.'' नॅन्सीने कहा और वह वहांसे निकल पडी. जॉन उलझनमें सहमासा उसके पिछे पिछे जाने लगा.

वहांसे आगे काफी समयतक चलनेके बाद वे एक कपडेके दुकानमें घुस गए. अब काफी रात हो चुकी थी. नन्सीको शक था की कहीं वह पहले दिखा हुवा लडका उनका पिछा तो नही कर रहा है. इसलिए उसने दुकानमें जानेके बाद वहांसे एक संकरी दरारसे बाहर झांककर देखा. बाहर क्रिस्तोफर उसके और दो साथीके साथ चर्चा करते हूए इधर उधर देख रहा था. जॉन उन लोगोंको दिख सके ऐसे जगहपर खडा था.

'' जॉन पिछे मुडकर मत देखो... मुझे लगता है वह लडके अपना पिछा कर रहे है. '' नॅन्सी दबे स्वरमें बोली.

'' कौन ? .. किधर ? '' जॉनने गडबडाते हूए पुछा.

'' चलो जल्दी यहांसे हम निकल जाते है... वे हमतक पहूंचना नही चाहिए... '' नॅन्सीने उसे वहांसे बाहर निकाला.

वे दोनो लंबे लंबे कदम डालते हूए फुटपाथपर चलरहे लोगोंकी भिडसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जाने लगे.


क्रमश:...

Enter your email address to SUBSCRIBE the Hindi Novels:

आप HindiNovels.Net इस अंतर्जाल पर आनेवाले वे आगंतुक है

Next Hindi Novels - Comedy, Suspense, Thriller, Romance, Horror, Mystery

1. करने गया कुछ कट गयी साली मुछ (कॉमेडी)
2. मधूराणी (the story of femine power)
3. सायबर लव्ह (लव्ह, सस्पेन्स)
4. अद-भूत (हॉरर, सस्पेंन्स थ्रीलर)
5. मृगजल (लव्ह ड्रामा, सायकॉलॉजीकल थ्रीलर)
6. फेराफेरी (कॉमेडी)
7. लव्ह लाईन (लव्ह, कॉमेडी, सस्पेन्स)
8. ब्लॅकहोल (हॉरर, मिस्ट्री, सस्पेन्स)

About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.