डिटेक्टीव सॅम गोल्फ खेल रहा था. रोजमर्राके तनाव से मुक्तीके लिए यह एक अच्छा खासा उपाय उसने ढूंडा था. उसने एक जोरका शॉट मारनेके बाद बॉल आकाशसे होकर होल की तरफ लपक गया. बॉलने दो तिन बार गिरकर उछला और आखीर होलसे लगभग छे फिटकी दुरीपर लूढकते हूए रुका. सॅम बॉलके पास गया. जमीनके चढाई और ढलानका उसने अंदाजा लिया. बॉलके उपरसे टी घुमाकर उसे कितने जोरसे मारना पडेगा ईसका अनुमान लगाया. और बडी सावधानीसे, सही दिशामें, सही जोर लगाकर उसने हलकेही एक शॉट लगाया और बॉल लूढकते हूए बराबर होलमें जाकर समा गया. डिटेक्टीवके चेहरेपर एक जित की खुशी झलकने लगी. इतनेमें अचानक सॅमका मोबाईल बजा. डिटेक्टीव्हने डिस्प्ले देखा. लेकिन फोन नंबर तो पहचानका नही लग रहा था. उसने एक बटन दबाकर फोन अटेंड किया, ''यस''
'' डिटेक्टीव बेकर हियर'' उधरसे आवाज आया.
'' हा बोलो'' सॅम दुसरे गेमकी तैयारी करते हुए बोला.
'' मेरे जानकारीके हिसाबसे आप हालहीमें चल रहे सिरियल केसके इंचार्च हो ... बराबर?'' उधरसे बेकरने पुछा. .
'' जी हां '' सॅमने सिरीयल किलरका जिक्र होतेही अगला गेम खेलने का विचार त्याग दिया और वह आगे क्या बोलता है यह ध्यानसे सुनने लगा.
'' अगर आपको कोई ऐतराज ना हो ... मतलब अगर आज आप फ्री हो तो... क्या आप इधर मेरे पुलिस स्टेशनमें आ सकते हो?... मेरे पास इस केसके बारेमें कुछ महत्वपुर्ण जानकारी है... शायद आपके काम आयेगी..''
'' ठिक है ... कोई बात नही .. '' कहते हूए बगल से गुजर रहे लडकेको सामान उठानेका इशारा करते हूए सॅमने कहा.
सॅमने बेकरसे फोनपर मिलनेका वक्त वगैरे सब तय किया और वह सामान उठाकर ले जा रहे लडकेके साथ वापस हो लिया.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Thursday, April 24, 2008
Hindi novel - अद्-भूत : Ch-8 : गोल्फ
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Sunil Doiphode
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Saturday, February 23, 2008
Ch-43: फिरसे प्रेस कॉन्फरन्स (शून्य-उपन्यास)
जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.
"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.
जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.
" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.
उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.
" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.
जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,
" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."
" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.
" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.
" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.
" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.
इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,
" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."
पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.
" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.
" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.
" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.
" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"
अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.
" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.
" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.
" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.
" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."
जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.
जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"
" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.
बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.
बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"
बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.
क्रमश:...
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Sunil Doiphode
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