उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
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Friday, May 30, 2008

Hindi Entertainment - Novels - अद-भूत / Aghast CH 32 और एक मोड / One more twist

People are just as happy as they make up their minds to be - ANONYMOUS


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सॅम और उसका पार्टनर जिस पुलीस अधिकारीने जॉन कार्टरके मौतकी केस हॅंडल की थी उस अधिकारी, डिटेक्टीव टेम्पलटन के सामने बैठे थे.

डिटेक्टीव टेम्पलटन जॉन कार्टरके बारेमें जानकारी देने लगा, '' मदिराके अतिसेवनकी वजहसे उसे ब्रॉंकायटीस होकर वह मर गया... ''

'' लेकिन आपको उसकी पहचान कैसे मिली ? '' सॅमने पुछा.

'' जिस कमरेंमे उसका मृतदेह मिला उस कमरेमें कुछ उसके कागजादभी मिले... उससे हमें उसकी पहचान हो गई... और उसका एक फोटो डिटेक्टीव्ह बेकरने जैसे सारे पुलिस थानोंपर भेजा था वैसा हमारे पास भी भेजा था....''

टेम्पलटनने अपने ड्रावरसे जॉनका फोटो निकालकर सॅमके सामने रखा.

'' इस फोटोकी वजहसे और डिटेक्टीव बेकरने भेजे जानकारीके वजहसे हमें उसका ऍड्रेस और घर वैगेरा मिलनेमें मदद हो गई. '' टेम्पलटनने कहा.

'' आपने उसके घरके लोगोंसे संपर्क किया था क्या ?'' सॅमने पुछा.

'' हां ... उनके घरके लोगोंकोभी यहां बुलाया था. ... उन्होनेभी बॉडी अपने कब्जेमें लेनेसे पहले जॉनकी पहचान कर ली थी और पोस्टमार्टममेभी उसकी पहचान जॉन कार्टर ऐसीही तय की गई है '' टेम्पलटनने कहा.

'' वह कब मरा होगा... मतलब शव मिलनेसे कितने दिन पहले'' सॅमने पुछा.

'' पोस्टमार्टमके अनुसार मार्च महिनेके शुरवातके दो तिन दिनमें उसकी मौत हूई होगी. '' वह अधिकारी बोला.

'' अर्ली मार्च... मतलब पहला खून होनेके बहुत पहले... '' सॅमने सोचकर कहा.

'' इसका मतलब हम जैसे समझ रहे थे वैसे वह कातिल नही है... '' सॅमने आगे कहा.

'' हां वैसा लग तो रहा है... '' टेम्पलटनने कहा.

काफी समय शांतीसे गुजर गया.

मतलब मुझे जो शक था वह सच होने जा रहा है...

सॅमको नॅन्सीका दोस्त जॉन कार्टरका अता पता मिलनेकी खबर उसके पार्टनरसे फोनपर मिलतेही वह बहुत खुश हो गया था.. ...

उसे लगा था चलो एक बारकी बला तो टली... जो केस सॉल्व हो गई... और कातिल थोडीही देरमें उनके कब्जेमें आनेवाला है....

लेकिन यहां आकर देखता हूं तो केसने और एक अलगही मोड लिया था...

जॉन कार्टरके मरनेका समय देखा जाए तो उसका इन खुनोंसे संबंध होनेकी कोई गुंजाईश नही थी...

'' जॉन कार्टर अगर कातिल नही है ... तो फिर कातिल कौन होगा?'' सॅमने जैसे खुदसेही सवाल किया.

कमरेके तिनो लोग सिर्फ एक दुसरेकी तरफ देखने लगे. क्योंकी उस सवालका जवाब उन तिनोंके पास नही था.

इतनेमें टेम्पलटनने उसके ड्रावरसे और एक तस्वीर निकालकर सॅमके सामने रख दी.

सॅमने वह तस्वीर उठाई और वह उस तस्वीरकी तरफ एकटक देखने लगा. उस तस्वीरमें जॉन कार्टर जमीनपर पडा हूवा दिख रहा था और उसके सामने फर्शपर खुनसे बडे अक्षरोंमे लिखा हूवा था,

'' नॅन्सी मुझे माफ करना ... मै तुम्हे बचा नही सका... लेकिन चिंता मत करो मै एक एक को चुनकर मारकर बदला लूंगा ... ''

सॅमको एक अंदाजा हो गया था की यह तस्वीर दिखाकर डिटेक्टीव्ह टेम्पलटन उसे क्या कहना चाहता हो.

'' मै सुन सुनकर थक गया हूं की इस कत्लमें किसी आदमीका हाथ न होकर किसी रुहानी ताकदका हाथ हो सकता है ... यह तस्वीर दिखाकर कही तुम्हेभीतो यही कहना नही है ?'' सॅमने टेम्पलटनको पुछा.

डिटेक्टीव टेम्पलटनने सॅम और उसके पार्टनरके चेहरेकी तरफ देखा.

'' नही मुझे ऐसा कुछ कहना नही है ... सिर्फ घट रही घटनाएं और जॉनने फर्शपर लिखा हूवा मेसेज दोनो कैसे एकदम मिलते जुलते है ... इसी ओर मुझे तुम्हारा ध्यान खिंचना है...'' डिटेक्टीव टेम्पलटनने शब्दोंको तोलमोलकर इस्तेमाल करते हूए कहा.


क्रमश:...

Friday, May 9, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)

अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.

''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.

'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.

'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.

'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.

जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.

'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.

एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.

'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.

'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.

दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.

क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.

'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.

चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.

नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?

अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.

वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.

'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.

उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.

जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....

उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....

'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.

स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.

जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.


क्रमश:...

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About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.