अँजेनी जॉनको सहारा देते हूए उसके क्वार्टरकी तरफ ले जाने लगी.
" अच्छा, तो ... उन्होने तुमपर हमला किया था... तूमने ऐसा अकेला घुमना अब खतरेसे खाली नही है.... तूमने हमेशा अपने साथ प्रोटेक्शन लेना चाहिए... "" अँजेनी उसका सब अबतक का कहा सुनकर एक निष्कर्षपर पहूच गई.
" नही ... हमला नही किया उन्होने.... अगर वे चाहते तो आज मुझे जानसेभी मार सकते थे... लेकिन उन्होने ऐसा नही किया.... '" वह चलते हूए उसका सहारा लेते हूए बोला.
"तुमपर गोलीयाऑं बरसाईना उन्होने? " अँजेनीने फिरसे पुछा.
" हां ... लेकिन सब मेरे इर्द गिर्द ... एकभी गोली मेरे नजदिकसेभी नही गई... वे उनकी गाडीसे उतरकरभी मुझपर गोलीयॉं बरसा सकते थे... " जॉनने अपना तर्क प्रस्तूत किया.
" अच्छा जाने दो... तुम्हे कोई सिरीयस चोट तो नही आई ना ... यह सबसे महत्वपुर्ण'' वह उसे दिलासा देते हूए बोली.
"उन्होने सिर्फ मुझे उकसानेका प्रयत्न किया .. ऐसा लग रहा है की वे इस सिरीयल किलींगका जादा से जादा प्रचार करना चाहते है'' जॉनने अपना अंदाजा बयान किया.
"लेकिन उससे क्या होगा?" अँजेनीने आश्चर्यसे पुछा.
"वही तो एक पहेली है जो मुझसे सुलझ नही रही है... " जॉन चाबीसे अपना फ्लॅट खोलनेका प्रयत्न करते हूए बोला.
अँजेनीने उसके हाथसे चाबी ली और वह खुद फ्लॅट का ताला खोलने लगी.
जॉन बेडपर अपना शर्ट निकालकर पडा हूवा था. उपरसे कुछ लग नही रहा था फिरभी उसके शरीरपर जगह जगह लगने के लाल निशान थे. अँजेनीने उसे जहा जहा लगा था वहा मलम लगाकर दिया और सेकनेके लिए सेकनेकी रबर की थैली गरम पाणीसे भरकर दी.
'' अच्छा अब मै चलती हू... तुम आराम करो... बहुत देर हो गई है'' अँजेनीने उसके कंधेपर थपथपाकर कहा.
जैसेही वह जानेके लिए मुडी जॉनने उसके कंधेपर रखा हूवा उसका हाथ पकड लिया. उसने मुडकर उसकी तरफ देखा. उसका चेहरा लाजके मारे लाल लाल हूवा था. जॉन उसकी ऑंखोमें आखे डालकर देखने लगा. उसकी ऑंखेभी उसके ऑंखोसे हटनेके लिए तैयार नही थी. दोनोंके दिलकी धडकने तेज होने लगी. जॉनने उसे नजदिक खिंच लिया. अब दोनोभी इतने नजदिक आये थे की उनको एकदुसरेंकी गरम सांसे और दिलकी बढी हूई धडकनें महसुस होने लगी थी. जॉनने धीरेसे उसके कांपते होठोंपर अपने गरम होंठ रख दिए और उसे कसकर अपनी बाहोंमे भर लिया. जॉनको याद आया की उसे कृत्रिम सासें देते वक्त उसने ऐसेही उसके होठोंपर अपने होंठ रखे थे. लेकिन उस वक्त और अब कितना फर्क था. क्रिया वही थी लेकिन भावनाओंने उसे कितना अलग अर्थ दिया था. आवेगमें वे एकदुसरेंके चेहरेपर, होठोंपर, गर्दनपर चुमने लगे. जॉन हलकेसे उसके बडी बडी सासोंकी वजहसे उपर निचे होते सिनेके उभोरोंको छुने लगा.
"अँजेनी... आय लव्ह यू सो मच" अनायास उसके मुंहसे निकल गया.
"आय टू" बोलते हूए वह किसी लता की तरह उसे कसकर लिपट गई.
" आं..ऊं" जॉन जोरसे चिल्लाया.
"क्या हूवा ?" झटसे उससे हटकर उसने पुछा.
" कुछ नही... पिठपर जहा लगा है वहा थोडा दब गया " वह बोला.
" आय अॅम सॉरी" वह शरमाकर बोली.
उसने हंसते हुए उसे फिरसे अपने बाहोंमे भर लिया. वह भी हंसने लगी. और फिर दोनो कब अपने प्रेममिश्रीत प्रणयमें लीन हुए उन्हे पताही नही चला.
... to be contd..
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Wednesday, January 16, 2008
Ch-16: मधूर मिलन ... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
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9:55 AM
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Monday, January 14, 2008
Ch-14: पिछा ... (शून्य-उपन्यास)
जॉनकी गाडी तेजीसे दौडने लगी थी. थोडीही देरमें जिस गाडीके पिछेके कांच पर खुनसे शुन्य निकाली हूई तस्वीर लगी थी वह गाडी उसे दिखाई देने लगी. वह गाडी दिखतेही जॉनके शरीर मे और जोश आगया और उसके गाडीकी गती उसने और बढाई. थोडीही देरमें वह उस गाडीके नजदीक पहूंच गया. लेकिन यह क्या? उसकी गाडी नजदीक पहूचतेही सामनेके गाडीने अपनी रफ्तार और तेज कर ली और वह गाडी जॉनके गाडीसे और दूर जाने लगी. जॉननेभी अपने गाडीकी रफ्तार और बढाई. दोनो गाडीकी मानो रेस लगी थी. रस्तेपर दुसरी ऐसी कोई खास ट्रॅफिक नही थी. यही दो गाडीयॉं एक के पिछे एक ऐसे दौड रही थी. जानको फिरसे लगा की वह अब सामनेके गाडीके नजदीक पहूंच सकता है. जॉनने उसके गाडीकी गती और तेज कर दी. थोडीही देरमें जॉनकी गाडी सामनेकी गाडीके एकदम नजदीक जाकर पहूंची. जॉनने जेबसे रिव्हॉल्वर निकाला और वह सामनेके गाडीके दिशामें फायर करनेही वाला था की अचानक सामने के ग़ाडीके कर्रऽऽ कर्रऽऽ ऐसा आवाज करते हूए ब्रेक लगे. जॉनकी गाडी उस गाडीके एकदम पिछे अनियंत्रित और बेकाबू रफ्तारसे दौड रही थी. सामनेके गाडीके ब्रेक लगे बराबर जॉनको अपने गाडीके ब्रेक दबानेही पडे. उसके गाडीके टायर चिखने लगे और सामनेके गाडीके साथ होनेवाली टक्कर बचानेके चक्करमें उसकी गाडी रोडसे निचे उतरकर एक जगह रुक गई. बडा भयानक ऍक्सीडेंट होते होते बचा था. ! ऍक्सीडेंट बचा यह देखकर जॉनके जानमे जान आयी. लेकिन यह क्या. वह दुसरी गाडी फिरसे शुरु हूई और जोरसे जॉनके गाडीके तरफ दौडने लगी. जॉन घाबराकर गाडीसे बाहर निकलने की कोशीश करने लगा था लेकिन तबतक वह गाडी उसके गाडीको डॅश कर निकलभी गई थी. जॉन इस हादसे संभलता नहीकी उसने देखा की उस गाडीसे उसकी दिशामें रिव्हॉल्वरकी गोलीयां आने लगी है. थोडी देरमें वह गाडी तेज रफ्तारसे निकल गई और फिर नजरोंसे ओझल हूई. जॉन उसकी गाडी शुरु करनेका प्रयास करने लगा. लेकिन उसकी गाडी शुरु होनेका नाम नही ले रही थी. आखीरमें लंगडते हूए वह गाडीसे बाहर आया और सामनेकी गाडी उसकी पहूंचसे निकलती देखकर चिढकर गुस्सेसे उसने अपनी कसी हूई मुट्ठी अपने गाडीपर जोरसे दे मारी.
... to be contd....
Posted by
Sunil Doiphode
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