उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
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Thursday, June 26, 2008

Neurology CH 49 Horror Suspense Thriller Novel - Ad-Bhut

ऍंथोनी कॉम्प्यूटरपर बैठा था और एक काली बिल्ली जिसके गलेमें काला बेल्ट पहना था वह उसके इर्दगिर्द खेल रही थी. जिस टेबलपर कॉम्प्यूटर रखा था उस टेबलपर वायरके टूकडे, बिल्लीके गलेमे पहननेके बेल्टस, और कुछ इलेक्ट्रनिक्सके छोटे छोटे उपकरण इधर उधर फैले हूए थे. ऍंथोनीका जिस दिवारकी तरफ मुंह था उस दिवारपर न्यूरॉलॉजी और ब्रेनकी तरह तरहकी तस्वीरे लटकाई हूई थी.

ऍंथोनीने बिजलीकी चपलतासे कीबोर्डके और माऊसके कुछ बटन्स दबाए तो उसके कॉम्प्यूटर स्क्रिनपर एक सॉफ्टवेअर ओपन हो गया. उस सॉफ्टवेअरकेभी अलग अलग मेनु, अलग अलग बटन्स और टेक्स्ट बॉक्सेस स्क्रिनपर दिखने लगे. उस सॉफ्टवेअरके अलग अलग बटन्समेसे एक बटनपर ऍंथोनीने माऊससे क्लीक किया. उस बटनपर 'अटॅक' ऐसा लिखा हूवा था. अचानक उसके इर्दगिर्द एक टेडीबिअरके साथ खेल रहे उस बिल्लीने उग्र स्वरुप इख्तीयार लिया और वह उस टेडी बिअरपर टूट पडी. इतनी क्रुरतासे वह बिल्ली उस टेडी बिअरपर टूट पडी की कुछ क्षणमेंही उसने उस टेडी बिअरके अपने दातसे फाडकर और तोडकर छोटे छोटे टूकडे कर दिए. बिल्ली जब उस टेडी बिअरपर हमला कर रही थी तब ऍंथोनी बडे अभीमानसे उस बिल्लीकी तरफ देख रहा था. आखिर जब उस बिल्लीने उस टेडी बिअरको पुरी तरहसे फाड दिया और तोड दिया, एक विजयी मुस्कुराहट ऍंथोनीके चेहरेपर फैल गई.

इतनेमें अचानक ऍंथोनीको सामने दरवाजेके पास किसी चिजकी आहट हो गई. ऍंथोनी सबकुछ वही वैसाही छोडकर सामने दरवाजेके पास गया. दरवाजा खोला तो उसने दरवाजेमें सामने न्यूजपेपर पडा पाया. उसने उसे उठाया, न्यूज पेपरके पन्ने पलटते हूए वह घरमें वापस आया और पन्ने पलटते हूएही दरवाजा बंद कर लिया. अचानक न्यूज पेपरके एक खबरने उसका ध्यान आकर्षीत किया. वह खबर वह गंभीरतासे पढते हूए अपने कॉम्प्यूटरके पास आया. वह कुर्सीपर बैठ गया और वह खबर ध्यान लगाकर पढने लगा.

वह जो खबर पढ रहा था उसका हेडींग था ' नॅन्सीके भाईने 'उन' चारोंपर केस कर दी '.

और उस खबरके निचेही क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल और स्टिव्हनके फोटो थे. उसने वह पेपर सामने टेबलपर कॉम्प्यूटरके पास रख दिया और वह सोचमें डूब गया. नॅन्सीको उन चारोंने बलात्कार कर मारनेके बाद जब वह उनके पास पैसे मांगनेके लिए गया तबका संवाद उसे याद आने लगा ....


'' कही तुम लोगोंने उस लडकीका खुन तो नही किया ?'' ऍंथोनी किसी तरहसे हिम्मत जुटाकर बोला.

'' तुम नही ... हम ... हम सब लोगोंने '' क्रिस्तोफरने उसके वाक्यको सुधारा.

'' एक मिनट ... एक मिनट... तुम लोगोने अगर उस लडकीको मारा होगा... तो यहां कहा मेरा संबंध आता है '' ऍंथोनीने अपना बचाव करते हूए कहा.

'' देखो .. अगर पुलिसने हमें पकड लिया... तो वह हमें पुछेंगे... की लडकीका अता पता तुम्हे किसने दिया...?..'' रोनॉल्डने कहा.

''... तो हमने भलेही ना बतानेकी ठान ली फिरभी हमें बतानाही पडेगा... '' पॉलने अधूरा वाक्य पुरा किया.

'' ... की हमें हमारे जिगरी दोस्त ऍंथोनीने मदत की '' पॉल शराबके नशेमें बडबडाया.

'' देखो .. तुम लोग बिना वजह मुझे इसमें लपेट रहे हो.. '' ऍंथोनी अब अपना बचाव करने लगा था.

"' लेकिन दोस्तो ... एक बडी अजिब चिज होनेवाली है '' क्रिस्तोफरने मंद मंद मुस्कुराते हूए कहा.

'' कौनसी ?'' रोनॉल्डने पुछा.

'' की पुलिसने हमें अगर पकडा और बादमें हमें फांसी होगई ..'' क्रिस्तोफरने बिचमें रुककर अपने दोस्तोंकी तरफ देखा. वे एकदम सिरीयस हो गए थे.

'' अबे ... सालो... मेरा मतलब है अगर हमें फांसी होगई ...'' क्रिस्तोफरने स्टिव्हनकी पिठ हलकेसे थपथपाते हूए कहा.

पॉल शराबका ग्लास सरपर रखकर अजीब तरहसे नाचते हूए बोला, '' हां ... हां अगर हमें फांसी होगई तो...''

ऍंन्थोनीको छोडकर सारे लोग उसके साथ हंसने लगे.

फिरसे कमरेका वातावरण पहले जैसा होगया.

''हां तो अगर हमें फांसी होगई ... तो हमें उसके बारेंमे कुछ खांस बुरा नही लगेगा... क्योंकी आखिर हमने मिठाई खाई है ... लेकिन इस बेचारे ऍंथोनीको मिठाई हलकीसी चखनेकोभी नही मिली ... उसे मुफ्तमेंही फांसीपर लटकना होगा. '' क्रिस्तोफरने कहा.

कमरेंमे सब लोग, सिर्फ एक ऍंन्थोनीको छोड, जोर जोरसे हंसने लगे.


..... ऍंथोनी अपने दिमागमें चल रहे सोचके चक्रसे बाहर आगया.

अब अगर यह केस ऐसीही चलती रही तो कभीना कभी क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल और स्टिव्हन अपनेको इसमें घसीटने वाले है...

फिर हमभी इस केसमें फंस जायेंगे...

नही ऐसा कतई नही होना चाहिए... .

मुझे कुछ तो रास्ता निकालनाही पडेगा ...

सोचते हूए ऍंथोनी अपने इर्दगिर्द खेल रहे उस बिल्लीकी तरफ देख रहा था. अचानक एक विचार उसके दिमागमें कौंध गया और उसके चेहरेपर एक गुढ मुस्कुराहट दिखने लगी.

अगर मैने इन चारोंको रास्ते से हटाया तो कैसा रहेगा?...

ना रहेगा बास न बजेगी बांसुरी...


क्रमश:...

Tuesday, April 1, 2008

Ch-64 : डॉ. कयूम खान (शून्य-उपन्यास) Hindi

कमांड2की यानीकी विनयकी बॉसको ढुंढनेके लिए इस एरियामें यह हमेशाकी चक्कर थी. वह लगभग रोजही इस एरियामें आकर बॉसको ढुंढनेके लिए घुमता रहता था. उसे खुदको बॉस ना पहचाने इसकी वही पुरी एतीयात बरतता था. न जाने कितनी बार, कमसे कम सौके उपर, वह इस एरीयामें बॉसको ढुंढनेके लिए आया होगा. लेकिन उसने कोशीश जारी रखी थी. निरंतर प्रयास करते रहना यह एक उसका गुण ही था. आज दिनभर घुम घुमकर वह थका हूवा था. शाम हो चुकी थी. शहरका मौहोल अब काफी ठंडा पडा हूवा था. हालहीमें उसे बॉसका इंटरनेटपर एक मेसेज आया था. अब यह खुनी श्रुंखला दुसरे एक शहरमेंभी शुरु करनी थी. बॉस नही चाहता था की मौहोल ठंडा पडे. वैसे दुसरे शहरमें खुनी श्रुंखला शुरु करनेके लिए और वक्त था. लेकिन विनयको दुसरे खुनी श्रुंखलामें बिलकुल रुची नही थी. उसके पहलेही उसे उसने शुरु किए खेल का अंत करना था. लेकिन अभीतक एकभी धागा हातमें नही आ रहा था. वह सोचते सोचते एक बडी बिल्डींगका काम चल रहा था वहा खाली जगहमें जाकर खडा हो गया. उसे थकनेकी वजहसे कही बैठनेकी जरुरत महसुस हूई. बैठनेके लिए कुछ है क्या यह देखनेके लिए उसने आजु बाजु देखा. एक जगह रेत का एक बडासा ढेर पडा हूवा था. कोई हमें देखेगा या कोई हमें पहचानेगा इसकी पर्वा ना करते हूए वह उस ढेरपर बैठ गया.

जहा विनय बैठा हूवा था वहांसे लगभग 200 मीटरपर एक काली कार रस्तेके किनारे रुकी हूई थी. गाडीका काला शिशा चढाया हूवा था. इसलिए अंदरका कुछ दिखाई नही दे रहा था. लेकिन अंदरसे जॉन और सॅम दुर्बिणसे विनयकी सारी हरकते निहार रहे थे.

'आज लगभग 5 दिन होगए है हम इसके पिछे है. लेकिन साला इस एरियामें क्या ढूंढ रहा है कुछ पता नही चल रहा है. " सॅमने जॉनसे कहा.

" मुझे लगता है ईसीमें सारे कत्ल का रहस्य छिपा होगा. " जॉनने कहा.

" लेकिन हम कितने दिन ऐसे इसके पिछे पिछे घुमेंगे ? " सॅमने पुछा.

" जबतक उसे जो चाहिए वह मिलता नही तब तक " जॉनने कहा.

" वह अपना अगला शिकार तो नही ढूंढ रहा है? "

" वही तो हमें ढूंढना है... लेकिन मुझे ऐसा नही लगता " जॉनने अपनी राय बताई.

बैठे बैठे विनयका सामने एक बंगलेकी तरफ ध्यान गया. सामने दरवाजे के खंबेपर पत्थरमें मालिकका नाम खुदा हूवा था. और वहा पत्थरके चारों तरफसे रोशनी आनेके लिए बल्बका इंतजाम किया था. विनयने ऐसेही वह नाम पढा.

'डॉ. कयूम खान'

विनयने वह नाम फिरसे पढा.

'डॉ. कयूम खान'

नाम पहचानका लग रहा था. यह नाम कहीतो पढा या सुना लग रहा है. विनय अपने दिमागपर जोर देकर याद करनेकी कोशीश करने लगा. वैसे उसको सब मुस्लीम नाम सरीके लगते थे. शायद इसलिए वह उसे पहचानका लग रहा हो. वह सोचने लगा. अचानक वह जहा बैठा था उसके पिछे 'घरऽऽ घरऽऽ' ऐसा जोरसे आवाज आने लगा. विनय अप्रत्यक्षित तरहसे आये आवाजसे एकदमसे चौककर लगभग खडाही होगया. उसने पिछे पलटकर देखा. पिछे बिल्डींगका कंस्ट्रक्शन चल रहा था और रेडीमीक्स काँक्रीट मशीन अभी अभी शुरु हूई थी. वह खुदको संभालते हूए बाजू हटने लगा. अचानक उसके दिमागमे मानो रोशनीसी कौंध गई.

" माय गॉड" उसके मुंहसे निकल गया.

उसने एकबार फिरसे सामने खंबेपर लिखा नाम पढा. और फिर उस रेडीमीक्स काँक्रीट मशीनकी तरफ देखा. उसके दिमागमें अब सब पहेलिया सुलझ रही थी. .

'डॉ. कयूम खान' यह तो मैने पढे आर्यभट्टके उपर लिखे रिसर्च पेपरका कोऑथर है...

और यह रेडीमीक्स काँक्रीट मशीनकी घरघर उसे एकबार बॉसके फोनपर सुनाई दी थी. ....

"मतलब डॉ. कयूम खानही अपना बॉस है !"

उसके शरीरमे अब फुर्ती दौडने लगी. वह डॉ. कयूम खानके घरकी तरफ जानेके लिए लपका. फिर ब्रेक लगे जैसा एकदम रुका.

नही अब नही...

मुझे सही समय देखकर सब बराबर प्लॅनींग करते हूए अंदर प्रवेश करना पडेगा...

उसने कैसेतो खुदको रोका.

क्रमश:...

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Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.