वह मेल और उसकी अटॅचमेंट्स पूरी तरह पढनेके बाद कमांड2 कॉम्प्यूटरसे उठ गया. उसके चेहरेपर एक संतोष झलक रहा था. वह सब जानकारी उसने उसके दिमागमें, दिलमें और इतनाही नही अपने पास रखे थंब ड्राईव्हमेभी संजोकर रखी थी. वह वहासे जानेके लिए मुडनेही वाला था इतनेमें काम्प्यूटरका बझर बजा. उसने देखा तो कमांड1को मेल आई थी. उसने जाकर कमांड1के खुले मेलबॉक्समें देखा तो मेल बॉसकीही थी. वह फिरसे कॉम्प्यूटरके सामने बैठ गया, मेल खोली. मेलके साथ एक अटॅचमेंट थी. उसने अटॅचमेंट खोली तो वह एक मॅडोनाकी सुंदर सेक्सी तस्वीर थी. बॉस मॅडोनाका जरा जादाही फॅन लगता है... .
उसने सोचा. अबतक कमांड2 कमांड1का देख देखकर तस्वीरमें छिपा हूवा मेसेज कैसा खोलनेका यह सिख गया था. उसने तस्वीरमें छिपा मेसेज खोला. उसमें आगेकी कार्यवाईके बारेंमे लिखा था. आगेका खून कब, किसका करनेका यह सब विस्तारसे लिखा था. आज 15 तारीख थी और आगेके खुनके लिए 17 तारीख मुकम्मल की थी. उस मेलमें 17 तारीख के रात 1 से 3 का वक्त एकदम अनुकल है ऐसा लिखा था. और 16 तारख का पूरा दिन और रात बहूत ही खतरनाक वक्त है ऐसा लिखा था. कमांड2 ने वह पूरा मेसेज एक जगह कॉपी करके रखा. क्योंकी वह मेसेज एकबार खोलनेके बाद खत्म हो जाता था. उसे बॉसने उस तरहसे प्रोग्रॅम किया था. कमांड2ने वह मेल बंद की. मेसेज अब खत्म हो चूका था. अचानक कमांड2 अपने कुर्सीसे उठकर खडा हो गया और दिमाग में कुछ तुफान उठे जैसा रुममें कॉम्प्यूटरके आसपास चहलकदमी करने लगा. उसके दिमागमें कुछ कश्मकश चल रही थी यह स्पष्ट रुपसे दिख रहा था. आखीर वह अपनी चहलकदमी रोककर कॉम्प्यूटरके सामने रखी कुर्सीपर जाकर बैठ गया. वह शायद कुछ निश्चयतक पहूंच गया था.
उसने बॉसका आया हूवा मेसेज बदलनेका निर्णय लिया था.... .
उसने वह मेसेज 'इडीट' करनेके लिए ओपन किया. फिर एकबार इधर उधर देखते हूए उसने अपना इरादा पक्का किया और फिर वह मेसेज 'इडीट' करने लगा. खुनके लिए जो उचीत वक्त दिया था वह 17 तारीख रात 1 से 3 ऐसा लिखा था उसने वह बदलकर 16 तारीख रात 1 से 3 ऐसा किया. उस मेसेजमें 16 तारख की पुरी रात और दिन अति खतरनाक है ऐसा जिक्र किया था. वह बदलकर उसने 17 तारीख ऐसा किया. मतलब खुनके लिए जो उचीत वक्त था वह खतरनाक है ऐसे और जो खतरनाक था वह उचीत है ऐसा उलट फेर उसने मेसेजमें किया था.
ऐसा उसने क्यो किया?
उसके दिमागमें क्या खिचडी पक रही थी यह बताना बहुत मुश्किल था.
शायद उसका उसके बॉसके भविष्यकथनपर भरोसा नही था. शायद उसे उसका बॉस जो भविष्य बताता है वह सच होता है की नही यह देखना था.
लेकिन अगर उसके बॉसने बताया हूवा सच हूवा तो ?..
ऐसी स्थीतीमें कमांड1 और उसके खुदके जानको खतरा था. फिर इसमेंसे कुछतो रस्ता निकालना पडेगा...
वह सोचने लगा.
आखीर उसने फैसला किया की इस बार वह कमांड1के साथ नही जाएगा. कुछ बहाना बनाकर वह कमांड1को अकेला जानेके लिए विवश करने वाला था.
... to be contd...
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Monday, January 21, 2008
Ch-20: बॉसका मेसेज. ... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:07 AM
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Labels: bharat mata, desh, desi, hidi matti, hindi desi, hindi granth, hindi granthavali, hindi kala, hindi manas, hindi pustak, hindi sahitya, hindika, hindustani, hindustani log, indian people, kala, matti
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