जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.
"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.
जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.
" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.
उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.
" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.
जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,
" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."
" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.
" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.
" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.
" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.
इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,
" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."
पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.
" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.
" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.
" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.
" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"
अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.
" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.
" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.
" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.
" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."
जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.
जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"
" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.
बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.
बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"
बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.
क्रमश:...
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Saturday, February 23, 2008
Ch-43: फिरसे प्रेस कॉन्फरन्स (शून्य-उपन्यास)
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Sunil Doiphode
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Thursday, February 21, 2008
Ch-41: मेडीयाके साथ पाला (शून्य-उपन्यास)
जॉन नार्थ स्ट्रीटको नियोलके अपार्टमेंटमें जानेके लिए अपने गाडी से उतरा, तभी उसे चारो ओरसे प्रेसने घेर लिया.
" मि. जॉन.... आपनेतो कहा था की खुनी मर चूका है... और केस खतम हो चूकी है..."
एक पत्रकार भिडमें अपना कॅमेरा संभालते हूए अचानक जॉनके सामने उसका रस्ता रोकते हूए खडा होगया. भिडसे रास्ता निकालकर वहां पहूचनेतक उस पत्रकारके सारे कपडे और बाल खराब हो चूके थे.
जॉनके पिछे, आजू बाजू सब तरफसे पत्रकार उसे घेरकर खडे थे. वह एकदम सामने आनेसे उसे आगे जानेका रस्ताभी बंद हूवा था. अब उस पत्रकारको कुछतो जवाब देकर कमसे कम अभीके लिए शांत करना जरुरी था. क्या बोला जाए जॉनको कुछ सुझ नही रहा था.
" लेट मी र्फस्ट इनव्हेस्टीगेट द केस ..." ऐसा कहकर जॉनने उसे बाजू हटाया और वह आगे जाने लगा.
पिछेसे वह पत्रकार चिल्लाया -
" सर यू कान्ट जस्ट इग्नोर अस धिस वे"
" यू हॅव टू अॅन्सर अस" दुसरा एक चिल्लाया.
" यस ... यस" बाकी पत्रकारभी चिल्लाकर उन्हे साथ देने लगे.
उसके पिछे सब पत्रकार गुस्सेसे चिल्लाते हूए दंगा करने लगे थे. जॉन ब्रेक लगे जैसा रुका. उसने पलटकर देखा. उसे सब पत्रकार मानो खानेको तैयार थे. जॉनका चेहरा बुझसा गया. वह समझ रहा था की गलती पुलिसकी थी.
अब उन्हे कुछ तो समझा बुझाकर शांत करना जरुरी था.
कॅमेरेके फ्लॅश उसपर चमक रहे थे. कॅमेरेके फ्लॅशकी वजहसे वह विचलितसा हूवा. बाकीके पुलिस बडी मुश्कीलसे उन पत्रकारोंको घेरा बनाकर रोके हूए थे.
" इस इनव्हेस्टीगेशनके बाद शामको मै एक प्रेस कॉन्फरंस लेने वाला हूं ... उसमें मै सब विस्तारसे बोलूंगा" जॉन हिंम्मत कर बोला और पलटर तेजीसे चलते हूए अपार्टमेंटमें घुस गया.
पत्रकार कमसे कम उस वक्तके लिए शांत हूए थे. जॉनको खुदकाही आश्चर्य लग रहा था.
उसके मुंहसे वह सब कैसे निकल गया इसका उसेही पता नही था.
वह प्रेस कॉन्फरंसके बारेमे बोला तो था लेकिन प्रेस कॉन्फरंसमें वह क्या बोलने वाला था?...
चलो कमसे कम अबकी तो बला टली. शामका शामको देखेंगे...
ऐसा सोचकर वह लिफ्टमें घुस गया. लिफ्ट बंद हूई. उसने लिफ्टमे बटनोंके लाईनमेसे ढूंढकर 10 नंबरका बटन दबाया.
क्रमश:...
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Wednesday, January 30, 2008
Ch-27: तफ्तीश (शून्य-उपन्यास)
... जल्दी जल्दी जॉन लिफ्टसे बाहर निकल गया. अचानक वक्त पर आए फोनसे वह औरभी चिढसा गया था.
लेकिन क्या कर सकते थे ड्यूटीही वैसी थी...
किस पल कहा जाना पडेगा कुछ बोल नही सकते थे....
बेचारे अँजेनीको क्या लगा होगा ?..
वह सोचमें डूबा सिधा उटीन हॉपरके फ्लॅटमें घुस गया. वह आनेके पहलेही सॅम उसके टीमको लेकर वहां हाजीर हूवा था. वह सिधा फ्लॅटके बेडरूममें गया. उसके पिछे पिछे सॅमभी बेडरूममें गया. सामने बेडपर डरके मारे खुला हूवा मुंह और बडी बडी आंखे ऐसे स्थीतीमें खुनसे सना उटीनाका मृतदेह पडा हूवा था. और सामने दिवारपर उटीनाके खुनसे एक बडासा शुन्य निकाला हूवा था.
उस शुन्यके बिचोबिच लिखा था " अगर शून्य ना होता तो ? ".
जॉन वह संदेश बार बार पढने लगा. .
खुनीको क्या कहना है ?... उस संदेश मे क्या कुछ छिपा अर्थ था...?...
वह सोचने लगा.
" खुनका समाचार किसने दिया ?" जॉनने सॅमको पुछा.
" सर फोनपर कोई अज्ञात इसम था. उसने अपना नाम नही बताया. हमनें कॉलभी ट्रेस करके देखा वह इसी एरीयामें एक पब्लीक बूथका था. " सॅमने जानकारी दी.
सॅम अपने काममे हमेशा प्रॉम्प्ट था.
" खून होकर जादा वक्त नही बित गया होगा " जॉनने अपना तर्क लगाया.
" हां सर , हम आए तब खुन बहही रहा था... इसलिए हमने आसपास सब तरफ खुनीको तलाशा.' सॅम बोल रहा था.
" कुछ मिला ? " जॉनने आगे पुछा.
" इन दोनोंकोतो कुछ नही मिला " सॅम कमरेमें उपस्थीत अपने दो साथीयोंकी तरफ निर्देश करके बोला.
" और तिन लोग देखनेके लिए गए है... अभीतक वापस नही आए " सॅमने आगे बताया.
जॉनने वहा उपस्थित सबको ताकीद दी,
" देखो, यह एकके बाद एक तिसरा खुन है... अभीतक हाथमें कुछ नही मिल रहा है... अगर ऐसाही चलता रहा तो कैसे होगा... कुछ भी करो ... इस बार हमें खुनी मिलनाही चाहिए...."
तभी सांस फुली हूई अवस्थामें उनके दो साथी फ्लॅटमे दाखील हूए.
सब लोग उनकी तरफ उम्मीदसे देखने लगे.
" सर, बिल्डींगके पिछवाडे निचे जमीनपर एक डेड बॉडी पडी हूई है... " उनमेंसे एकने बडी बडी सासें लेते हूए कहा.
" सर, शायद कोई उपरसे निचे गिर गया है... मुझे लगता है... वही खुनी होगा... " दुसरेने कहा.
" सॅम, तूम यही रुककर इन्व्हेस्टीगेशन कंटीन्यू करो... मै इनके साथ निचे जाकर आता हूं " जॉन उनके साथ फ्लॅटसे बाहर जाते हूए बोला.
... to be contd..
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Friday, January 25, 2008
Ch-24: मिस उटीन हॉपर (शून्य-उपन्यास)
बेडरूममे धुंधलीसी रोशनी थी. बेडपर कोई सोया हूवा दिखाई दे रहा था. एक काले सायेने धीरे धीरे बेडरूममे प्रवेश किया. आतेही बेडरुममे इधर उधर देखते हूए वह साया दरवाजेके पास दिवारपर कुछ ढूंढने लगा. शायद वह कमरेके बल्बका स्वीच ढूंढ रहा था. दिवारपर टटोलनेके बाद उस सायेको एक जगह कुछ इलेक्ट्रीकके स्वीच मिल गए. वह साया एक एक स्वीच दबाकर देखने लगा. आखीर एक बटन दबानेके बाद कमरेका बल्ब जल गया और कमरेमे रोशनी हो गई. वह रोशनी सायेके शरीरपर भी पड गई. एक खुशीकी मंद मंद मुस्कान उस सायेके चेहरेपर दिखने लगी - बल्ब का स्वीच मिलने की खुशी.
वैसे देखा जाए तो बल्ब का स्वीच मिलना यह घटना वह साया जिस कार्यके लिए आया था उसके मुकाबले एक साधारणसी घटना....
लेकिन आदमीका स्वभाव कितना अजीब होता है...
खुशी मनानेका एक भी मौका वह दौडना नही चाहता...
हां, उसकी खुशी की परिभाषा अलग अलग हो सकती है...
अच्छी कृतीमेंही उसे आनंद मिलता है... .
लेकिन फिर उसकी अच्छे बुरे की परिभाषा अपनी अपनी... .
दुसरेके नजरीयेसे गलत कामभी उसके लिए अच्छा हो सकता है..
वह बेडरुममे आया साया दुसरा तिसरा कोई ना होकर कमांड1 था. बेडरुममें रोशनी होतेही बेडपर सोई हूई औरत जग गई और भौचक्कीसी इधर उधर देखने लगी. शायद वह उतनी गहरी निंदमे नही होगी. सामने हाथमें पिस्तौल लिए खडे कमांड1को देखतेही व घबरा गई. डर के मारे उसके हाथपैर कांपने लगे. वह अब जोरसे चिखनेही वाली थी की कमां1ने उसके पिस्तौलका ट्रीगर दबाया. पिस्तौलको शायद सायलेंन्सर लगाया होगा क्योंकी 'धप्प' ऐसा आवाज आया और सामनेकी औरत बेडपर अचेतन होकर गिर गई. उसका चिखनेके लिए खुला मुंह खुला की खुला ही रह गया.
अब कमांड1का चेहरा खुशीसे खिल गया.
" मिस उटीन हॉपर ... आय अॅम सॉरी. मरना यह तुम्हारे तकदिरमें विधातानेही लिखा था... मै कौन तुम्हे मारने वाला ... मै तो सिर्फ उसके हाथ की एक कठपुतली... " कमांड1 खुदसेही बोल रहा था.
झटसे कमांड1ने अपने कोटके दाए जेबसे एक नुकीला छुरा निकाला और खचाखच उसके निश्चल पडे शरीरपर खंजर के वार किए. जब वह खंजर पुरी तरहसे उटीनाके गर्म खुनसे सन गया तभी वह रुका. फिर वह आगे जाकर दिवारपर उस खुनसे लिखने लगा. दिवारपर एक बडा शून्य निकालकर वह आगे लिखनेहीवाला था की दूर कही उसे पुलिसके गाडीका सायरन सुनाई देने लगा. कमांड1ने खिडकीसे बाहर झांका. आवाज अभीभी दूर था. उसने जल्दी जल्दी वह खंजर फिरसे उटीनाके खुनमें डूबोया और दिवारपर वह आगेका लिखने लगा.
to be contd..
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Thursday, January 10, 2008
Ch-12A: फर्स्ट डेट ... (शून्य-उपन्यास)
जॉनका दिमाग सोचसोचकर घुमने लगा था. दो खून हो चूके थे और खुनी का कोई ना अता पता था ना सुराग. कही थोडा पुछताछके लिए जावो तो प्रेसवाले पता नही कहासे आकर घेर लेते थे. जॉन दिखा नही के वे सब उसपर टूट पडते थे. अच्छा .. कोई केसमे कुछ नई डेव्हलपमेंट हो तो ही बतायेंगे ना. कुछ डेव्हलपमेंट ना होते हूए प्रेसवालोंको फेस करना बडा मुश्कील हो गया था. बाहर प्रेसवाले और अंदर उनकाही कोई आदमी अंदर की सारी बाते बाहर डीस्क्लोज कर रहा था. अंदर किसपे विश्वास किया जाए और किसपे नही कुछ समझमें नही आ रहा था. अब अंदर कोई पुलिसवालाही गद्दारी कर रहा है ऐसी खबर बाहर तक पहूच गई थी.
'अगला कौन?'
'पुलिसवालेही बेईमान तो खुनीको कौन पकडेगा?'
'और कितने लोगोंकी जान देनी पडेगी?'
ऐसे अलग अलग हेडींग की अलग अलग खबरें छापकर प्रेसवालोने सारे शहरमे दहशत फैलाके रख दी थी.
अब लोग पुलिसवालोंके कर्तव्यके बारेमेंही सवाल खडा करने लगे थे. और यह इतनाही टेंशन क्या कम था की उपर के वरीष्ठोने दबाव बनाना शुरु किया था. सोच सोचकर जॉन का दिमाग थक चूका था. जॉनने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. शाम हो चूकी थी. अंधेरा होनेमे बस थोडाही वक्त बाकी था. अचानक जॉनको क्या सुझा क्या मालूम उसने उसके सामने रखा फोन उठाया, एक नंबर डायल किया -
"" क्या कर रही हो? ... '' वह फोनमें बोला.
'' कौन? ... जॉन! '' उधरसे अँजेनीका उत्साहसे भरा स्वर गुंजा.
'' कैसी हो?...'' उसने पुछा.
अपना आवाज अँजेनीने पहचाना उसकी खुशी जॉनके चेहरेपर झलक रही थी.
'' ठिक हू...'" उसका गहरा दुखी स्वर गुंजा.
उसे यह सवाल पुछना नही चाहिए था ऐसा जॉनको लगा. उसे अब क्या बोलना चाहिए की वह फिरसे आनंदीत हो. जॉन सोचने लगा.
" ... क्या कुछ जानकारी मिली ... खुनीके बारेमें ?" उधरसे अँजेनीने पुछा.
" इसी सवालसे पिछा छुडवानेके लिये तुम्हे फोन किया और तुम भी यही सवाल पुछो. .." जॉनने कहा.
" नही ....बहुत दिनोंके बाद तुम्हारा अचानक फोन आया ... इसलिए मैने सोचा कुछ केसमे नई डेव्हलपमेंट होगी..."" अँजेनी बोली..
"नही ... ऐसी कुछ खास डेव्हलपमेंट नही है... .. अच्छा ... मैने फोन इसलिए किया की... आज शामको तुम्हारा क्या प्रोग्रॅम है ? " जॉन असली मुद्देपर आते हूए बोला.
" कुछ खास नही" अँजेनी उधरसे बोली.
" फिर ऐसा करो ... तैयार हो जावो... मै आधे घंटेमें तुम्हे लेने आता हूं.... हम डीनरको जायेंगे... "" जॉन अपना हक जताते हूए बोला.
" लेकिन..."
" लेकिन वेकिन कुछ नही ... कुछ भी बहाना नही चलेगा... मै आधे घंटेमे पहूचता हू...'" जॉनने कहा.
और वह कुछ बोले इससे पहलेही फोन रखकर वह निकल भी गया.
... to be contd...
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