.... डिटेक्टीव्ह सॅम डिटेक्टीव बेकरके सामने बैठकर सब सुन रहा था. वह कबकी कहानी पुरी कर चूका था. लेकिन वह दर्दभरी कहानी सुनकर कमरेमें सारे लोग इतने द्रवित और अभिभूत हो गए थे की बहुत देर तक कोई कुछ नही बोला. कमरेमें एक अनैसर्गीक सन्नाटा छाया था.
एक प्रेम कहानीका ऐसा भयानक दर्दनाक अंत होगा? ....
किसीने नही सोचा था.
नॅन्सी और जॉनकी प्रेमकहानी कॅबिनमें उपस्थीत सभी लोगोंके दिलको छु गई थी.
थोडी देर बाद डिटेक्टीव सॅमने अपनी भावनाओंको काबुमें करते हूए पुछा,
'' क्या जॉनने पुलिस स्टेशनमें रिपोर्ट दर्ज की थी ?"'
'' नही ''
'' फिर ... यह सब तुम्हे कैसे पता ?''
'' क्योंकी नॅन्सीका भाई ... जॉर्ज कोलीन्सने रिपोर्ट दर्ज की थी. ''
'' लेकिन उसनेभी रिपोर्ट कैसे दर्ज की ? ... मेरा मतलब है उसे वह सबकुछ पता कैसे चला? ... क्या जॉन उसे मिला था ? '' सॅमने एकके बाद एक सवालोकी छडी लगा दी.
''नही ... जॉन उसे उस घटनाके बाद कभी नही मिला.. .'' बेकरने कहा.
'' फिर उसे खुनी कौन है यह कैसे पता चला ?'' सॅमको अब उसे सता रहे सारे सवालोंके जवाब मिलनेकी जल्दी हो रही थी.
'' कुछ महिने पहले जॉनने नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें खत लिखकर सब जानकारी लिखी थी... उसमें उसने उन चार लोगोंके नाम पते भी लिखे थे. ...''
'' फिर रिपोर्टका नतिजा क्या निकला ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.
''... इस केसपर हमनेही तहकिकात की थी... लेकिन ना नॅन्सीकी डेड बॉडी मिली थी ... ना जॉन मिला जो की इस घटना का अकेला और बहुत अहम चश्मदीद गवाह था... इसलिए केस बिना कुछ नतिजेके वैसीही लटकी रही ... और अभीभी वैसीही लटकी पडी है... ''
'' अच्छा ... जॉनका कुछ अता पता ?'' सॅमने पुछा.
'' उसके बारेमें किसीकोभी कुछ पता नही चला... उस घटनाके बाद वह कभी उसके अपने घरभी नही आया ... वह जिंदा है या मरा ... इसकाभी कुछ पता नही चला... सिर्फ उसके जॉनको आए खतसे ऐसा लगता है की वह जिंदा होना चाहिए... लेकिन अगर वह जिंदा है तो छिप क्यो रहा है? ... यही एक बात समझमें नही आती.....''
'' उसका कारण सिधा है ... '' इतनी देरसे ध्यान देकर सुन रहे सॅमके साथीने कहा.
'' हां ....उसका एकही कारण हो सकता है की ... हालहीमें जो दो कत्ल हूए उसमें जॉनकाही हाथ हो सकता है.. और इसलिएही मैने तुम्हे यहां बुलाकर यह सब जानकारी तुम्हे देना मुनासीब समझा ...'' बेकरने कहा.
'' बराबर है तुम्हारा... इस खुनमें जॉनका हाथ हो सकता है ऐसा मान लेनेकी काफी गुंजाईश है... लेकिन मुझे एक बात समझमें नही आती है की ... जब वह कमरा या मकान अंदरसे और सब तरफसे बंद होता है तब वह खुनी अंदर पहूंचता कैसे है ? ... वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है यह एक ना सुलझनेवाली पहेली बन चूकी है ''
'' अच्छा जब नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें पता चला तो उसकी प्रतिक्रीया क्या थी ? ... और अब केसके नतिजेमें देरी हो रही है इसके बारेंमे उसकी प्रतिक्रिया कैसी है ?''
'' वह आदमी पागलोंजैसा हो चूका है ... इस पुलिस स्टेशनमें उसकी हमेशा चक्कर रहती है... और केसका आगे क्या हूवा यह वह हमेशा पुछता रहता है ... वह यह सब फोन करकेभी पुछ सकता है ... लेकिन नही वह खुद यहां आकर पुछता है ... मुझे तो उसपर बहुत तरस आता है ... लेकिन अपने हाथमें जितना है उतनाही हम कर सकते है... '' बेकरने कहा.
'' इसका मतलब हालहीमें जो दो खुन हूए उसका कातिल नॅन्सीका भाई जॉर्जभी हो सकता है .. '' सॅम ने कहा.
'' आपने उसे देखना चाहिए... उसकी तरफ देखकर तो ऐसा नही लगता... '' बेकरने कहा.
'' लेकिन यह एक संभावना है जिसे हम झुटला नही सकते ...'' सॅमने प्रतिवाद किया.
डिटेक्टीव बेकरने थोडी देर सोचा और फिर हांमे अपना सर हिलाया.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Wednesday, May 14, 2008
Hindi Literature Novel - अद-भूत : Ch-21: फिर जॉन कहा गया?
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Friday, May 9, 2008
Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)
अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.
''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.
'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.
'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.
'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.
जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.
'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.
एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.
'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.
'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.
दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.
क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.
'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.
चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.
नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?
अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.
वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.
'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.
उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.
जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....
उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....
'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.
स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.
जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.
क्रमश:...
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Wednesday, April 30, 2008
Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-12 : पिछा
शामका समय था. अपनी शॉपींगसे लदी हूई बॅग संभालती हूई नॅन्सी फुटपाथसे जा रही थी. वैसे अब खरीदनेका कुछ खास नही बचा था. सिर्फ एक-दो चिजे खरीदनेकी बची थी.
वह चिजे खरीद ली की फिर घरही वापस जाना है...
वह बची हूई एक-दो चिजे लेकर जब वापस जानेके लिए निकली तब लगभग अंधेरा होनेको आया था और रास्तेपरभी बहुत कम लोग बचे थे. चलते चलते नॅन्सीके अचानक खयालमें आया की बहुत देरसे कोई उसका पिछा कर रहा है. उसकी पिछे मुडकर देखनेकी हिम्मत नही बन रही थी. वह वैसेही चलती रही. फिरभी उसका पिछा जारी है इसका उसे एहसास हूवा. अब वह घबरा गई. पिछे मुडकर ना देखते हूए वह वैसेही जोरसे आगे चलने लगी.
इतनेमे उसे पिछेसे आवाज आया , '' नॅन्सी ''
वह एक पल रुकी और फिर चलने लगी.
पिछेसे फिरसे आवाज आया, '' नॅन्सी ...''.
आवाजके लहजेसे नही लग रहा था की पिछा करने वाले का कोई गलत इरादा हो. नॅन्सीने चलते चलतेही पिछे मुडकर देखा. पिछे जॉनको देखतेही वह रुक गई. उसके चेहरेपर परेशानीके भाव भाव दिखने लगे.
यह इधरभी ..
अबतो सर पटकनेकी नौबत आई है...
वह एक बडा फुलोंका गुलदस्ता लेकर उसके पास आ रहा था. वह देखकर तो उसे एक क्षण लगाभी की सचमुछ अपना सर पटक ले. वह जॉन उसके नजदिक आनेतक रुक गई.
'' क्यो तुम मेरा लगातार पिछा कर रहे हो ?'' नॅन्सी नाराजगी जताते हूए गुस्सेसे बोली.
'' मुझपर एक एहसान करदो और भगवानके लिए मेरा पिछा करना छोड दो '' वह गुस्सेसे हाथ जोडते हूए, उसका पिछा छूडा लेनेके अविर्भावमें बोली.
गुस्सेसे वह पलट गई और फिरसे आगे पैर पटकती हूई चलने लगी. जॉनभी बिचमें थोडा फासला रखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगा.
जॉन फिरसे पिछा कर रहा है यह पता चलतेही वह गुस्सेसे रुक गई.
जॉनने अपनी हिम्मत बटोरकर वह फुलोंका गुलदस्ता उसके सामने पकडा और कहा, '' आय ऍम सॉरी...''
नॅन्सी गुस्सेसे तिलमिलाई. उसे क्या बोले कुछ सुझ नही रहा था. जॉनकोभी आगे क्या बोले कुछ समझ नही रहा था.
'' आय स्वीअर, आय मीन इट'' वह अपने गलेको हाथ लगाकर बोला.
नॅन्सी गुस्सेमेतो थी ही, उसने झटकेसे अपने चेहरेपर आ रही बालोंकी लटे एक तरफ हटाई. जॉनको लगा की वह फिरसे एक जोरदार तमाचा अपने गालपर जडने वाली है. डरके मारे अपनी आंखे बंद कर उसने झटसे अपना चेहरा पिछे हटाया.
उसकेभी यह खयालमें आया और वह अपनी हंसी रोक नही सकी. उसका वह डरा हूवा सहमा हूवा बच्चोके जैसा मासूम चेहरा देखकर वह खिलखिलाकर हंस पडी. उसका गुस्सा कबका रफ्फु चक्कर हो गया था. जॉनने आंखे खोलकर देखा. तबतक वह फिरसे रास्तेपर आगे चल पडी थी. थोडी देर चलनेके बाद एक मोडपर मुडनेसे पहले नॅन्सी रुक गई, उसने पिछे मुडकर जॉनकी तरफ देखा. एक नटखट मुस्कुराहटसे उसका चेहरा खिल गया था. गडबडाए हूए हालमें, संभ्रममे खडा जॉनभी उसकी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुराया. वह फिरसे आगे चलते हूए उस मोडपर मुडकर उसके नजरोंसे ओझल हो गई. भले ही वह उसके नजरोंसे ओझल हूई थी, फिरभी जॉन खडा होकर उधर मंत्रमुग्ध होकर देख रहा था. उसे रह रहकर उसकी वह नटखट मुस्कुराहट याद आ रही थी.
वह सचमुछ मुस्कुराई थी या मुझे वैसा आभास हूवा ....
नही नही आभास कैसे होगा ...
यह सच है की वहं मुस्कुराई थी ...
वह मुस्कुराई इसका मतलब उसने मुझे माफ किया ऐसा समझना चाहिए क्या? ...
हां वैसा समझनेमें कोई दिक्कत नही...
लेकिन उसका वह मुस्कुराना कोई मामूली मुस्कुराना नही था...
उसके उस मुस्कुराहटमें औरभी कुछ गुढ अर्थ छिपा हूवा था...
क्या था वह अर्थ?...
जॉन वह अर्थ समझनेकी कोशीश करने लगा. और जैसे जैसे वह अर्थ उसके समझमें आ रहा था उसकेभी चेहरेपर वही, वैसीही मुस्कुराहट फैलने लगी.
क्रमश:...
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Monday, April 28, 2008
Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-10 : आय ऍम सॉरी
रातको होस्टेलके गलियारेमें घना अंधेरा था. गलियारेके लाईट्स या तो किसीने चोरी किये होंगे या लडकोने तोड दिए होंगे. एक काला साया धीरे धीरे उस गलियारेमे चल रहा था. और वहासे थोडीही दुरीपर जॉन, ऍन्थोनी और उसके दो दोस्त एक खंबेके पिछे छुपकर बैठे थे. उन्होने पक्का फैसला किया था की आज किसीभी हालमें इस चोरको पकडकर होस्टेलकी लगभग रोज होनेवाली चोरीयां रोकनी है. काफी समयसे वे वहां छिपकर चोरकी राह देख रहे थे. आखिर वह साया उन्हे दिखतेही उनके चेहरेपर खुशी की लहर दौड गई.
चलो इतने देरसे रुके... आखिर मेहनत रंग लाई...
खुशीके मारे उनमें खुसुर फुसुर होने लगी.
'' ए चूप रहो... यही अच्छा मौका है ... सालेको रंगे हाथ पकडनेका '' जॉनने सबको चूप रहनेकी हिदायत दी.
वे वहांसे छिपते हूए सामने जाकर एक दुसरे खंबेके पिछे छूप गए.
उन्होने चोरको पकडनेकी पुरी प्लॅनींग और तैयारी कर रखी थी. चारोंने आपसमें काम बांट लिया था. उन चारोंमें एक लडका अपने कंधेपर एक काला ब्लॅंकेट संभाल रहा था.
'' देखो... वह रुक गया ... सालेकी घोंगड रपेटही करेंगे'' जॉन धीरेसे बोला.
वह साया गलियारेमे चलते हूए एक रुमके सामने रुक गया.
'' अरे किसकी रुम है वह ?'' किसीने पुछा.
'' मेरीकी ..'' ऍन्थोनीने धीमे स्वरमे जवाब दिया.
वह काला साया मेरीके दरवाजेके सामने रुका और मेरीके दरवाजेके कीहोलमें अपने पासकी चाबी डालकर घुमाने लगा.
'' देखो उसके पास चाबीभी है '' कोई फुसफुसाया.
'' मास्टर की होगी '' किसीने कहा.
'' या डूप्लीकेट बनाकर ली होगी सालेने ''
'' अब तो वह बिलकुल मुकर नही पाएगा ... हम उसे अब रेड हॅंन्डेड पकड सकते है. '' जॉनने कहा.
जॉन और ऍन्थोनीने पिछे मुडकर उनके दो साथीयोंको इशारा किया.
'' चलो ... यह एकदम सही वक्त है '' ऍन्थोनीने कहा.
वह साया अब ताला खोलनेकी कोशीश करने लगा.
सब लोगोंने एकदम उस काले सायेपर हल्ला बोल दिया. ऍन्थोनीने उस सायेके शरीरपर उसके दोस्तके कंधेपर जो था वह ब्लॅंकेट डालकर लपेट दिया और जॉनने उस सायेको ब्लॅकेटके साथ कसकर पकड लिया.
'' पहले साले को मारो... '' कोई चिल्लाया.
सबलोग मिलकर अब उस चोरकी धुलाई करने लगे.
'' कैसा हाथ आया रे साले ... ''
'' ए साले ... दिखा अब कहां छुपाकर रखा है तुने होस्टेलका सारा चोरी किया हूवा माल''
ब्लॅंकेटके अंदरसे 'आं ऊं' ऐसा दबा हूवा स्वर आने लगा.
अचानक सामनेका दरवाजा खुला और मेरी गडबडाई हूई दरवाजेसे बाहर आगई. शायद उसे उसके रुमके सामने चल रहे धांदलीकी आहट हुई होगी. कमरेमें जल रहे लाईटकी रोशनी अब उस ब्लॅंकेटमें लिपटे चोरके शरीर पर पड गई.
'' क्या चल रहा है यहां '' मेरी घाबराये हूए हालमें हिम्मत बटोरती हूई बोली.
'' हमने चोरको पकडा है '' ऍन्थोनीने कहा.
'' ये तुम्हारा कमरा डूप्लीकेट चाबीसे खोल रहा था. '' जॉनने कहा.
उस चोरको ब्लॅंकेटके साथ पकडे हूए हालमें जॉनको उस चोरके शरीरपर कुछ अजीबसा लगा. धांदलीमें उसने क्या है यह टटोलनेके लिए ब्लॅंकेटके अंदरसे अपने हाथ डाले. जॉनने हाथ अंदर डालनेसे उसकी उस सायेपरकी पकड ढीली हो गई और वह साया ब्लॅंकेटसे बाहर आगया.
'' ओ माय गॉड नॅन्सी! '' मेरी चिल्लाई.
नॅन्सी कोलीन उनकेही क्लासमेंकी एक सुंदर स्टूडंट थी. वह ब्लॅकेटसे बाहर आई और अभीभी असंमजसके स्थितीमें जॉन उसके दोनो उरोज अपने हाथमें कसकर पकडा हूवा था. उसने खुदको छुडा लिया और एक जोर का तमाचा जॉनके कानके निचे जड दिया.
जॉनको क्या बोले कुछ समझमें नही रहा था वह बोला, '' आय ऍम सॉरी .. आय ऍम रियली सॉरी ''
'' वुई आर सॉरी ...'' ऍन्थोनीनेभी कहा.
'' लेकिन इतने रात गए तुम यहां क्या कर रही हो?'' मेरी नॅन्सीके पास जाते हूए बोली.
'' इडीयट ... आय वॉज ट्राईंग टू सरप्राईज यू... तूम्हे जनमदिनकी शुभकामनाएं देने आई थी मै..'' नॅन्सी उसपर चिढते हूए बोली.
'' ओह ... थॅंक यू ... आय मीन सॉरी ... आय मीन आर यू ओके?'' मेरीको क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था.
मेरी नॅन्सीको रुममें ले गई. और जॉन फिरसे माफी मांगनेके लिए रुममे जानेलगा तो दरवाजा उसके मुंहपर धडामसे बंद होगया.
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Friday, April 18, 2008
Ch-4 : पॉल रॉबर्टस ( hindi sahitya - अद्-भूत ) Hindi
पॉल रॉबर्टस, काला रंग, उम्र पच्चीसके आसपास , लंबाई पौने छे फुट, घुंगराले बाल, अपने बेडरुममें सोया था. उसकी बेडरुम मतलब एक कबाडखाना था जिसमें इधर उधर फैला हूवा सामान, न्यूज पेपर्स, मॅगेझीन्स, व्हिस्कीकी खाली बोतले वह भी इधर उधर फैली हूई. मॅगेझीनके कव्हरपर जादातर लडकियोंकी नग्न तस्वीरें दिख रही थी. और बेडरुमकी सारी दिवारे उसके चहती हिरोइन्स की नग्न, अर्धनग्न तस्वीरोसे भरी हूई थी. स्टीव्हनके और पॉलके बेडरुममे काफी समानता थी. फर्क सिर्फ इतनाही था की पॉलके बेडरुमको दो खिडकियां थी और वह भी अंदरसे बंद. और बंद रुम एसी थी इसलिए नही तो शायद सावधानीके तौर थी. वह अपने जाडे, मुलायम, रेशमी गद्दीपर वैसाही जाडा, मुलायम, रेशमी तकीया सिनेसे लिपटाकर बारबार करवट बदल रहा था. शायद वह डिस्टर्ब्ड होगा. काफी समयतक उसने सोनेका प्रयास किया लेकिन उसे निंद नही आ रही थी. आखिर करवट बदल बदलकरभी निंद नही आ रही थी इसलिए वह बेडके निचे उतर गया. पैरमें स्लिपर चढाई.
क्या किया जाए ? ...
ऐसा सोचकर पॉल किचनकी तरफ चला गया. किचनमें जाकर किचनचा लाईट जलाया. फ्रीजसे पाणीकी बोतल निकाली. बडे बडे घुंट लेकर उसने एकही झटकेमें पुरी बोतल खाली कर दी. फिर वह बोतल वैसीही हाथमें लेकर वह किचनसे सिधा हॉलमें आया. हॉलमें पुरा अंधेरा छाया हूवा था. पॉल अंधारेमेही एक कुर्सीपर बैठ गया.
चलो थोडी देर टिव्ही देखते है ...
ऐसा सोचकर उसने बगलमें रखा हूवा रिमोट लेकर टिव्ही शुरु किया. जैसेही उसने टीव्ही शुरु किया डरके मारे उसके चेहरेका रंग उड गया, सारे बदनमें पसिने छुटने लगे, और उसके हाथपैर कांपने लगे. उसके सामने अभी अभी शुरु हूए टिव्हीके स्क्रिनपर एक खुनकी लकीर बहते हूए उपरसे निचेतक आयी थी. गडबडाकर वहं एकदम खडाही हूवा, और वैसेही घबराये हूये हालतमें उसने कमरका बल्ब जलाया.
कमरेंमे तो कोई नही है....
उसने टीव्हीकी तरफ देखा. टिव्हीके उपर एक मांस का टूटा हूवा टूकडा था और उसमेंसे अभीभी खुन बह रहा था.
चलते, लडखडाते हूए वह टेलीफोनके पास गया और अपने कपकपाते हाथसे उसने एक फोन नंबर डायल किया.
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Thursday, April 17, 2008
Ch-3 : पोस्टमार्टम रिपोर्ट ( hindi Novels - अद्-भूत ) Hindi Sahitya
डिटेक्टीव्ह सॅम अपने पुलिस स्टेशनमें अपने ऑफीसमें बैठा था. उतनेमें एक ऑफीसर वहा आ गया. उसने पोस्टमार्टमके कागजात सॅमके हाथमें थमा दीये. जब सॅम वह कागजात उलट पुलटकर देख रहा था वह ऑफिसर उसके बगलमें बैठकर सॅमको इन्वेस्टीगेशनके बारेमें और पोस्टमार्टमके बारेमें जानकारी देने लगा.
" मौत गला कटनेसे हूई है, और गला जब काटा गया तब स्टीव्हन शायद निंदमें होगा ऐसा इसमें लिखा है लेकिन कातिलने कौनसा हथीयार इस्तेमाल किया गया होगा इसका कोई पता नही चल रहा है. " वह ऑफिसर जानकारी देने लगा. .
" ऍ़मॅझींग ?" डिटेक्टीव सॅम मानो खुदसेही बोला.
'' और वहा मीले बालोंका क्या ?''
'' सर हमने उसकी जांच की ... लेकिन वे बाल आदमीके नही है ''
'' क्या आदमीके नही ? ...''
'' फिर शायद किसी भूतके होंगे... .'' वहां आकर उनके बातचीतमें घुसते हूए एक ऑफिसरने मजाकमें कहा.
भलेही उसने वह बात मजाकमें कही हो लेकिन वे एकदुसरेके मुंहको ताकते हूए दोतीन पल कुछभी नही बोले . कमरेमे एक अजीब अनैसर्गीक सन्नाटा छाया हूवा था.
'' मतलब वह कातिलके कोट के या जर्कीनके हो सकते है...'' सॅमके बगलमें बैठा ऑफिसर बात को संभालते हूए बोला.
'' और उसके मोटीव्हके बारेमें कुछ जानकारी ?''
'' घरकी सारी चिजे तो अपने जगह पर थी... कुछ भी किमती सामान चोरी नही गया है ... और घरमें कहीभी स्टीव्हनके हाथके और उंगलीयोंके निशानके अलावा और किसीकेभी हाथके या उंगलीयोंके निशान नही मिले... '' ऑफिसरने जानकारी दी.
'' अगर कातील भूत हो तो उसे किसी मोटीव्हकी क्या जरुरत?'' फिरसे वहां खडे अफसरने मजाकमें कहा.
फिर दो तीन पल सन्नाटेमें गए.
'' देखो ऑफिसर ... यहा सिरीयस मॅटर चल रहा है... आप कृपा करके ऐसी फालतू बाते मत करो...'' सॅमने उस अफसरको ताकीद दी.
'' मैने स्टीव्हनकी फाईल देखी है ... उसका पहलेका रेकॉर्ड कुछ उतना अच्छा नही... उसके खिलाफ पहलेसेही बहुत सारे गुनाहोके लिए मुकदमें दर्ज है... कुछ गुनाह साबीतभी हूए है और कुछपर अबभी केसेस जारी है... इससे ऐसा लगता है की हम जो केस हॅन्डल कर रहे है वह कोई आपसी दुष्मनी या रंजीशकी हो सकती है....'' सॅम फिरसे असली बात पर आकर बोला.
'' कातिलने अगर किसी गुनाहगारकोही मारा हो तो... '' बगलमें खडे उस ऑफिसरने फिरसे मजाक करनेके लिए अपना मुंह खोला तो सॅमने उसके तरफ एक गुस्सेसे भरा कटाक्ष डाला.
'' नही मतलब अगर वैसा है तो... अच्छाही है ना... एक तरहसे वह अपनाही काम कर रहा है... शायद जो काम हमभी नही कर पाते वह काम वह कर रहा है '' वह मजाक करनेवाला ऑफिसर अपने शब्द तोलमोलकर बोला.
'' देखो ऑफिसर ... हमारा काम लोगोंकी सेवा करना और उनकी हिफाजत करना है...''
'' गुनाहगारोंकीभी ?'' उस ऑफिसरने व्यंगात्मक ढंगसे कडवे शब्दोमें पुछा.
इसपर सॅम कुछ नही बोला. या फिर उसपर बोलनेके लिए उसके पास कुछ लब्ज नही थे. .
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Wednesday, April 16, 2008
Ch-2 : सबूत ( hindi upanyas - अद्-भूत ) Hindi
सुबह सुबह रास्तेपर लोगोंकी अपने अपने कामपर जानेकी जल्दी चल रही थी. इसलिए रास्तेपर काफी चहलपहल थी. ऐसेमें अचानक एक पुलिसकी गाडी उस भिडसे दौडने लगी. आसपासका माहौल पुलिसके गाडीके सायरनकी वजहसे गंभीर हो गया. रास्तेपर चलरहे लोक तुरंत उस गाडीको रस्ता दे रहे थे. जो पैदल चल रहे थे वे उत्सुकतासे और अपने डरे हूए चेहरेसे उस जाती हूई गाडीकी तरफ मुड मुडकर देख रहे थे. वह गाडी निकल जानेके बाद थोडी देर माहौल तंग रहा और फिर फिरसे पहले जैसा नॉर्मल होगया.
एक पुलिसका फोरेन्सीक टीम मेंबर बेडरुमके खुले दरवाजेके पास कुछ इन्वेस्टीगेशन कर रहा था. वह उसके पास जो बडा जाडा लेन्स था उसमेंसे जमीनपर कुछ मिलता है क्या यह ढुंढ रहा था. उतनेमें एक अनुशासनमे चल रहे जुतोंका 'टाक टाक' ऐसा आवाज आगया. वह इन्व्हेस्टीगेशन करनेवाला पलटकर देखनेके पहलेही उसे कडे स्वरमें पुछा हूवा सवाल सुनाई दिया '' बॉडी किधर है ? ''
'' सर इधर अंदर ..'' वह टीम मेंबर अदबके साथ खडा होता हूवा बोला.
डिटेक्टीव सॅम व्हाईट, उम्र साधारण पैंतिस के आसपास, कडा अनुशासन, लंबा कद, कसा हूवा शरीर , उस टीममेंबरने दिखाए रास्तेसे अंदर गया.
डिटेक्टीव सॅम जब बेडरुममें घुस गया तब उसे स्टीवनका शव बेडपर पडा हूवा मिल गया. उसकी आखें बाहर आयी हूई और गर्दन एक तरफ ढूलक गई हूई थी. बेडपर सबतरफ खुन ही खुन फैला हूवा था. उसका गला काटा हूवा था. बेडकी स्थीतीसे ऐसा लग रहा था की मरनेके पहले स्टीव्हन काफी तडपा होगा. डिटेक्टीव सॅमने बेडरुममें चारो तरफ अपनी नजर दौडाई. फोरेन्सीक टीम बेडरुममेंभी तफ्तीश कर रही थी. उनमेंसे एक कोनेमें ब्रशसे कुछ साफ करने जैसा कुछ कर रहा था तो दुसरा कमरेंमे अपने कॅमेरेसे तस्वीरें लेनेमें व्यस्त था.
एक फोरेन्सीक टीम मेंबरने डीटेक्टीव सॅमको जानकारी दी -
" सर मरनेवालेका नाम स्टीव्हन स्मीथ'
' फिंगरप्रींटस वैगेरे कुछ मिला क्या?"
' नही कमसे कम अबतक तो कुछ नही मिला '
डिटेक्टीव सॅमने फोटोग्राफरकी तरफ देखते हूए कहा, '' कुछ छुटना नही चाहिए इसका खयाल रखो''
'' यस सर '' फोटोग्राफर अदबके साथ बोला.
अचानक सॅमका ध्यान एक अजीब अप्रत्याशीत बात की तरफ आकर्षीत हूवा .
वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेका लॅच और आसपासकी जगह टूटी हूई थी.
'' इसका मतलब खुनी शायद यह दरवाजा तोडकर अंदर आया है '' सॅमने कहा.
जेफ, लगभग पैतीसके आसपास, छोटा कद, मोटा, उसका टीम मेंबर आगे आया, '' नही सर, असलमें यह दरवाजा मैने तोडा... क्योंकी हम जब यहां पहूंचे तब दरवाजा अंदरसे बंद था. ''
'' तुमने तोडा ?'' सॅमने आश्चर्यसे कहा.
'' यस सर''
'' क्या फिरसे अपने पहलेके धंदे शुरु तो नही किये ?'' सॅमने मजाकमें लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना दिखाते हूए कहा.
'' हां सर ... मतलब नही सर''
सॅमने पलटकर एकबार फिरसे कमरेमें अपनी पैनी नजर दौडाई, खासकर खिडकीयोंकी तरफ देखा. बेडरुमको एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी. वह बंद रहना लाजमी था क्योंकी रुम एसी थी.
'' अगर दरवाजा अंदरसे बंद था ... और खिडकीभी अंदरसे बंद थी ... तो फिर कातिल कमरेमें कैसे आया... ''
सब लोग आश्चर्यसे एकदुसरेकी तरफ देखने लगे.
'' और सबसे महत्वपुर्ण बात की वह अंदर आनेके बाद बाहर कैसे गया?'' जेफने कहा.
डिटेक्टीव्हने उसकी तरफ सिर्फ घुरकर देखा.
अचानक सबका खयाल एक इन्वेस्टीगेटींग ऑफिसरने अपनी तरफ खिंचा. उसको बेडके आसपास कुछ बालोंके टूकडे मिले थे.
'' बाल? ... उनको ठिकसे सिल कर आगेके इन्व्हेस्टीगेशनके लिए लॅबमें भेजो ' सॅमने आदेश दिया.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
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9:46 AM
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Tuesday, April 15, 2008
Ch-1 : चिख ( hindi novel - अद्-भूत ) Hindi
घना अंधेरा और उपरसे उसमें जोरोसे बरसती बारीश. सारा आसमंत झिंगुरोंकी 'किर्र' आवाजसे गुंज रहा था. एक बंगलेके बगलमें खडे एक विशालकाय वृक्षपर एक बारीशसे भिगा हूवा उल्लू बैठा हूवा था. उसकी इधर उधर दौडती नजर आखीर सामने बंगलेके एक खिडकीपर जाकर रुकी. वह बंगलेकी ऐकलौती ऐसी खिडकी थी की जिससे अंदरसे बाहर रोशनी आ रही थी. घरमें उस खिडकीसे दिख रहा वह जलता हुवा लाईट छोडकर सारे लाईट्स बंद थे. अचानक वहा उस खिडकीके पास आसरेके लिए बैठा कबुतरोंका एक झुंड वहांसे फडफडाता हूवा उड गया. शायद वहां उन कबुतरोंको कोई अदृष्य शक्तीका अस्तीत्व महसुस हूवा होगा. खिडकीके कांच सफेद रंगके होनेसे बाहरसे अंदरका कुछ नही दिख रहा था. सचमुछ वहा कोई अदृष्य शक्ती पहूंच गई थी ? और अगर पहूंची थी तो क्या उसे अंदर जाना था? लेकिन खिडकी तो अंदर से बंद थी.
बेडरुममें बेडपर कोई सोया हूवा था. उस बेडवर सोए सायेने अपनी करवट बदली और उसका चेहरा उस तरफ हो गया. इसलिए वह कौन था यह पहचानना मुश्कील था. बेडके बगलमें एक ऐनक रखी हूई थी. शायद जो भी कोई सोया हूवा था उसने सोनेसे पहले अपनी ऐनक निकालकर बगलमें रख दी थी. बेडरुममे सब तरफ दारुकी बोतलें, दारुके ग्लास, न्यूज पेपर्स, मासिक पत्रिकाएं इत्यादी सामान इधर उधर फैला हूवा था. बेडरुमका दरवाजा अंदरसे बंद थ




