उपन्यास - अद्-भूत
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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Tuesday, December 18, 2007

Ch-6 : ब्लैंक मेल (शून्य-उपन्यास)


(Happy Chrismas! Next post will be published on or before 26 Dec 07)
चांदके धुंधले रोशनीमे टेरेसपर कमांड1 और कमांड2 बैठे हूए थे. उनके सामने लॅपटॉप रखा हूवा था. बिच बिचमें वे मजेसे व्हिस्कीके घूंट ले रहे थे. कमांड1 कॉम्प्यूटरको तेजीसे कमांड दे रहा था. एक पलमें न जाने कितने की बोर्डके बटन वह दबा रहा था.

'" यह तुम क्या कर रहे हो?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.

'' अरे यह पोलीस ऑफीसर जॉन अपने केसपर काम कर रहा है '' कमांड1 ने अपना की बोर्डके बटन दबाना जारी रखते हूए कहा.

"' तो फिर?'' कमांड2 ने पुछा.

'' उसके दिमागमें क्या पक रहा है यह हमें जानना नही चाहिए?'' कमांड1 ने कहा.

'" उसके दिमागमें क्या चल रहा है यह हमें कैसे पता चलेगा?'' कमांड2ने आश्चर्यसे पुछा.

'' इधर देख वह अब इंटरनेटपर ऑनलाईन है .. अब यह मेल मै उसको भेज रहा हूँ .... यह मेल उसका पासवर्ड ब्रेक करेगी'' कमांड1 बडे आत्मविश्वाससे कह रहा था.

'' पासवर्ड? लेकिन कैसे ?" कमांड2ने आश्चर्यसे पुछा.

'' बताता हू... बताता हू'' कमांड1 ने मेलका 'सेंड' बटन दबाया और आगे कहा,

'' देखो, यह मेल जब वह खोलेगा तब उसके कॉम्प्यूटरपर 'सेशन एक्सपायर्ड' ऐसा मेसेज आयेगा. फिर वह फिरसे जब अपना पासवर्ड एंटर करेगा तब वह अपने प्रोग्रॅम मे एंटर किया हूवा होगा. इस तरह यह अपना प्रोग्रॅम उसका पासवर्ड अपने पास बडी सुरक्षा के साथ पहूँचाएगा''

कमांड1के चेहरेपर एक अजीब मुस्कुराहट की छटा दिखाई देने लगी.

'' क्या दिमाग पाया बॉस...'' कमांड2 कॉम्प्यूटरकी तरफ देखते हूए अपना व्हिस्कीका ग्लास बगल में रखते हूए बोला.

'" धीरे धीरे तू भी यह सब सिख जाएगा'' कमांड1ने उसके पिठपर थपथपाते हूए कहा.

'' तेरे जैसा गुरू मिलनेके बाद मुझे चिंता करने की क्या जरुरत है ?" कमांड1 चढाते हूए कमांड2ने कहा.

कमांड1को जादा से जादा चढाने के चक्करमें कमांड2का बगलमें रखे व्हिस्कीके ग्लासको धक्का लगा और वह ग्लास निचे फर्शपर गिर गया. उसके टूकडे टूकडे होगए. कमांड2 ग्लासके टूकडे उठाने लगा.

कमांड1ने कॉम्प्यूटरपर काम करते हूए कांचके टूकडे उठा रहे कमांड2की तरफ देखा और फिरसे अपने काममें जूट गया.

" इऽऽ" कमांड2 चिल्लाया.

" क्या हूवा ?" कमांड1ने पुछा.

'' उंगली कट गया "" कमांड2की कांच के टूकडे उठाते हूए उंगली कट गई थी. कमांड2 अपना दर्द छिपाने का प्रयास करने लगा.

" बी ब्रेव्ह ... डोन्ट अॅक्ट लाइक अ किड " कमांड1 ने कहा और मॉनिटरकी तरफ देखते हूए फिरसे अपने काममें जूट गया.

कमांड2ने वैसेही खुनसे सने हाथसे कांचके बाकी टूकडे उठाए, वहाँ एक पॉलीथीन बॅग पडी हूई थी उसमें डाले और उस पॉलीथीनकी बॅगको गांठ मारकर वह बॅग मकान के पिछले हिस्सेमें झाडीमें फेंक दी.

उतनेमें कमांड1को एक मेल आई हूई दिखाई दी.

'' उसने अपनी मेल खोली है शायद... इसको तो अपना पासवर्ड ब्रेक करवाके लेनेकी बडी जल्दी दिख रही है '" बोलते हूए कमांड1ने मेल खोली. मेल ब्लँक थी. मेलमें पासवर्ड नही आया था. अचानक कमांड1ने विद्युत गतीसे कॉम्प्यूटर बंद किया.

'' क्या हूवा?" कमांड2 ने पुछा.

'" साला हम जितना सोच रहे थे उतना येडा नही है.... उसको शायद संदेह हूवा है'" कमांड1 ने कहा.

" मेल ब्लँक है ... इसका मतलब उसका पासवर्डभी ब्लँक होगा'" कमाड2ने अपना अनुमान लगाया.

"मि. कमांड2 ... इमेल पासवर्ड कभीभी ब्लँक नही होता'" कमांड1 अपने खास अंदाजमें कहा.

"" फिर ...तूमने इतनी तेजीसे कॉम्प्यूटर क्यों बंद किया?" कमांड2 ने उत्सुकतावश पुछा.

"'अरे, उसे अगर सहीमें संदेह हूवा होगा तो वह हमें ट्रेस करनेकी कोशीश जरुर करेगा'" कमांड2ने कहा.

"अच्छा अच्छा" कमांड2 उसे जैसे समझ गया ऐसा जताते हूए बोला.

कमांड1 व्हिस्कीका ग्लास लेकर अपने जगहसे उठ गया.

'' हमें यहाँ ऐसे खुलेमें नही बैठना चाहिए '' कमांड2ने अपनी चिंता जाहिर की.

"' ऐसा क्यों?'' कमांड1 ने व्हिस्कीका ग्लास हाथमें लेकर टहलते हूए कहा.

'' नही मैने सुना है की अमेरिकन सॅटेलाईटके कॅमेरे धरतीपर 10 बाय 10 इंच तक स्पष्ट रुपसे देख सकते है ... उसमें हम लोगभी दिख सकते है...'' कमांड2ने स्पष्ट किया.

कमांड1 टहलते हूए एकदम ठहाका लगाकर हसने लगा.

'' क्या हूवा '" कमांड2 उसके हसनेकी वजह समझ नही पा रहा था.

'" अरे, यह अमेरिकन लोग प्रोपॅगँन्डा करनेमें बहुत एक्सपर्ट है .. अगर वे 10 बाय 10 इंच तक स्पष्टतासे देख सकते है तो फिर वे उस ओसामा बीन लादेनको, जो की कितने दिनसे उनके नाकमें दम कर रहा है, उसे क्यों पकड नही पा रहे है? ... हां यह बात सही है की कुछ चिजोंमे अमेरिकन टेक्नॉलॉजीका कोई जवाब नही... लेकिन एक सच के साथ 10 झुठ जोडनेकी अमेरिकाकी पुरानी स्टाईल है... एक सच के साथ 10 झुठ जोडनेको क्या कहते है पता है? '"

" क्या कहते है?" कमांड2ने उत्सुकतासे पुछा.

" शुगरकोटींग ... तुझे पता है? ... दुसरे र्वल्ड वार के वक्त हिटलरकी फौज मरते दमतक क्यों लढी?"' कमांड1 ने पुछा.

कमांड2 कमांड1की तरफ असमंजस सा देखने लगा.

हिटलरने प्रोपॅगॅन्डा किया था की उनके फौजमें जल्दीही व्ही2 मिसाईल आनेवाला है... और अगर वह मिसाईल उनके फौजमें आता तो वे पुरी दुनियापर राज कर सकते थे'" कमांड1 ने कहा.

'' फिर क्या हूवा आगया क्या वह मिसाईल उनके फौजमें ?" कमांड2 ने पुछा.

'' जब व्ही2 नामकी कोई चिज होगी तो आएगी ना? ..." कमांड1 ने कहा.

अब कमांड1 कॉम्प्यूटर फिरसे शुरु करने लगा.

'' अब फिरसे क्यो शुरु कर रहे हो?... वह फिरसे हमें ट्रेस करेगा ना'" कमांड2 ने अपनी चिंता व्यक्त की.

'' नही ... अब शुरु करनेके बाद अपनेको अलग आय. पी. अॅड्रेस मिलेगा ... जिसकी वजहसे वह हमें ट्रेस नही कर पाएगा '" कमांड1 कॉम्प्यूटर शुरु होनेकी राह देखते हूए बोला.

कॉम्प्यूटर शुरू हूवा और मॉनिटरके दाएँ कॉर्नरमें मेल आनेका मेसेजभी आया.

"'बॉसकी मेल है '" मेल खोलते हूए कमांड1ने कहा.

उसने मेल खोली और पढने लगा.

"कमांड2..." कमांड1 ने आवाज दिया.

"' हां"

'' हमें अगले मिशनके बारेंमे आदेश मिल चूके है'' कमांड1 मेल पढते हूए बोला.

कमांड2 कमांड1 के कंधेपर झूककर मेलमें क्या लिखा है यह पढने की कोशीश करने लगा.

(to be contd...)

Thursday, December 13, 2007

Ch-5 : दिल विल... (शून्य-उपन्यास)


(Next post will be publishe on or before 18 Dec 07)बी23 की तरफ जाते हूए जॉनको खुदका ही आश्चर्य लगने लगा था.

यह कैसी बेचैनी?...

ऐसा तो पहले कभी नही हूवा था...

अबतक न जाने कितनी केसेस उसके हाथके निचेसे गई थी... लेकिन एक स्त्री के बारेमें ऐसी बेचैनी...

और कुछ अनहोनी तो नही हूई होगी? ऐसी चिंता और इतनी चिंता उसे पहले कभी नही हूई थी...

उसने बी23 का दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खुलाही था. दरवाजा धकेलकर वह अंदर जाने लगा. अंदर बेडपर अँजेनी लेटी हूई थी. वह सोचमें डूबी खिडकीसे बाहर जैसे शुन्य भावसे देख रही थी. जॉन की आहट आतेही उसने दरवाजे की तरफ देखा. जॉनको देखतेही वह मुस्कुरा दी. लेकिन उसके चेहरेसे दुख का साया अभीभी हटा नही दिख रहा था. शायद अभीभी वह गहरे सदमेसे उभरी नही थी. वह उसके पास जाकर खडा हूवा. उसने उसे बगलमे रखे स्टूलपर बैठने का इशारा किया. स्टूलपर बैठनेके बाद फुलोंका गुलदस्ता उसके बाजूमे रखते हूवे जॉनने पुछा - '' कैसी हो?''

वह फिरसे उसकी तरफ देखकर मुस्कुराई. ऐसे लग रहा था जैसे मुस्कुरानेके लिए उसे बडा कष्ट हो रहा हो.

'' मुसिबतोंका पहाड जिसपर गिर पडता है वही उसकी मार समझ सकता है... आप किस पिडादायक मनस्थीतीसे गुजर रही होगी मै समझ सकता हू...'' जॉन बोल रहा था.

अँजेनीके आँखोसे आसु बहने लगे. जॉन बोलते बोलते रुक गया. उसने उसे धिरज देता हूवा अपना हाथ उसके कंधेपर रख दिया. अब तो उसने जो आँसूओंका बांध रोकने की कोशीश की थी वह टूट गया और वह जॉनसे लिपटकर फुट फुटकर रोने लगी. जॉन उसे सहलाते हूए ढाढस बंधाने का प्रयास कर रहा था. उसे कैसे समझाया जाए कुछ समझ नही आ रहा था.


अब वह थोडी नॉर्मल हो गई थी. जॉनने अब जान लिया की अँजेनीको खुनके बारेमें पुछनेका यही सही वक्त है.

'' किसने खुन किया होगा? ... आपको कोई संदेह? ... या अंदाजा? '" जॉनने धीरेसे पुछा.

अँजेनीने इन्कारमें अपना सर हिलाया और फिर खिडकीके बाहर देखते हूए फिरसे सोचमें डूब गई.

जॉनने उसकी जेबसे एक फोटो निकाला.

'' यह देखो... यहाँ दिवारपर ... खुनसे गोल निकाला गया है ... यह क्या हो सकता है? ...कुछ अंदाजा? ... या फिर किसने निकाला होगा... इसके बारे मे कुछ बता सकती हो?" जॉनने पुछा.

अँजेनीने फोटो गौरसे देखा. दिवारपर लिखे हूए गोल के निचे बेडपर पडे हूए उसके पतीके मृत शरीरको देखकर फिरसे उसका गला भर आया... जॉनने फोटो फिरसे जेबमें रखा.

'" नही मतलब इस गोलका कुछ अर्थ समझमें आता है क्या? ... वह एबीसीडीका 'ओ' भी हो सकता है ... या फिर शून्यभी हो सकता है ..." जॉनने कहा.

'' मै समझ सकता हूँ की यह आपके पती के खुन के बारे में पुछने का उचीत वक्त नही ... लेकिन जानकारी जितनी जादा और जितने जल्दी मिल सकती है उतने जल्दी हम खुनीको पकड सकते है...'' जॉन ने कहा.

अँजेनी अब अपने इरादे पक्के कर संभलकर सिधे बैठ गई '' पुछो आपको जो पुछना है .."'

जॉननेभी जान लिया की पुरी जानकारी निकालनेका यही उचीत समय है.

"' सानी क्या करता था? ... मतलब बाय प्रोफेशन'' जॉनने पहला सवाल पुछा.

'' वह इंपोर्ट एक्सपोर्टका बिझीनेस करता था ... मेनली गारमेंटस् ... इंडीयन कॉन्टीनेंटमें उसका बिझीनेस फैला हूवा था '' अँजेनी बोल रही थी.

'' कोई प्रोफेशनल रायव्हल?" जॉनने पुछा.

'' नही... उसका डोमेन एकदम अलग होनेसे उसे कोई प्रोफेशनल रायव्हल्स होनेका सवालही पैदा नही होता. '" अँजेनी बोल रही थी.

"' अच्छा आप क्या करती है ?" जॉनने अगला सवाल पुछा.

'' मै एक फॅशन डिझायनर हूँ" अँजेनीने कहा.

बहुत देरतक उनके सवाल जवाब चलते रहे. आखीर स्टूलसे उठते हूए जॉनने कहा '' ठीक है ... अबके लिए इतनी जानकारी काफी है... अब आप थकी भी होगी... मतलब दिमागसे... आराम करो ... फिरसे कुछ लगा तो हम आपसे पुछेंगेही ...''

जॉन जाने लगा.

अँजेनी उसे दरवाजे तक छोडनेके लिए उठने लगी तो जॉन ने कहा '' आप पडे रहिए .. आपको आराम की सख्त जरुरत है'"

फिरभी वह उसे दरवाजेतक छोडनेके लिए उठ गई. जॉन दरवाजे तक पहूचता नही की उसे पिछेसे उसकी आवाज आई -

" थँक यू ..."

जॉन एकदमसे रुक गया और उसने मुडकर पुछा '' किसलिए?''

'' मेरी जान बचानेके लिए ... डॉक्टरने मुझे सब बताया है... अगर आप समयपर मुझे कृत्रिम सांसे नही देते तो शायद मै अब जिवीत नही होती ...'' अँजेनी उसकी तरफ कृतज्ञता भरी निगाहोंसे देखते हूए बोली.

'' उसमें क्या है... मैने मेरा कर्तव्य किया बस '" जॉनने कहा.

'' वह आपका बडप्पन है'' अँजेनी दरवाजेतक पहूचते हूए बोली.

जॉन अब वहा से निकल गया था. लंबे लंबे कदम डालते हूवे जल्दी जल्दी वह चलने लगा. शायद अपनी भावनाएँ छिपाने के लिए. थोडे ही समयमे वह कॉरीडोर के सिरेतक जा पहूंचा. दाई तरफ मुडनेसे पहले उसने एक बार पिछे मुडकर देखा. वह अभीभी उसके तरफही देख रही थी.


जॉन पॅसेजमेंसे लिफ्टकी तरफ जा रहा था. अँजेनीको छोडकर जाते हूए उसे अपना दिल भारी भारी लग रहा था. अचानक जॉनका ध्यान लिफ्टकी तरफ गया. लिफ्ट अभीभी वहासे दूरही थी. लिफ्टके उस तरफवाले हिस्सेसे एक युवक आया. उसने काला टी शर्ट पहना हूवा था और उस टी शर्टपर 'झीरो' निकाला हुवा था, जैसा उसने पहलेभी सानीके खुनके दिन देखा था. जॉन एकदम हरकतमें आया और लिफ्टकी तरफ दौडने लगा.

उसने आवाज दिया, "ए... हॅलो "

लेकिन उसका आवाज पहूचनेसे पहलेही वह युवक लिफ्टमें घुस गया था. जॉन औरभी जोरसे दौडने लगा. लिफ्ट बंद होगई थी... लेकिन अभीभी निचे या उपर नही गई थी. जॉन दौडते हूए लिफ्टके पास गया. उसने लिफ्टका बटन दबाया. लेकिन व्यर्थ. लिफ्ट निचे जाने लगी थी. जॉनको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. वह युवक उस दिन देखे युवकके हूलिए जैसा नही था. लेकिन पता नही क्यों जॉनको लग रहा था की जरुर सानीके खुनका रहस्य उस 'झीरो' में छिपा हूवा है. जॉन बगलकी सिढीयोंसे तेजीसे निचे उतरने लगा. बिच बिचेमें उसका लिफ्टकी तरफभी ध्यान था. लेकिन मानो लिफ्ट बिचमें कही भी रुकनेके लिए तैयार नही थी. शायद वह एकदम ग्राऊंड फ्लोअरकोही रुकनेवाली थी. जब जॉनने देखा की लिफ्ट उससे दो माले आगे निकल गई तो वह और जोरसे सिढीयाँ उतरने लगा.


आखिर सासें फुली हूई हालतमे वह ग्राऊंड फ्लोअरको पहूँच गया. उसने लिफ्टकी तरफ देखा. लिफ्टमेंके लोग कबके बाहर आ चूके थे और लिफ्टका डिस्प्ले लिफ्ट उपरकी दिशामें जा रही है ऐसा दर्शा रहा था. जॉन दौडते हूए हॉस्पीटलके बाहर लपका. उसने सब तरफ अपनी पैनी नजरें दौडाई. पार्कीगमेभी जाकर देखा. हॉस्पीटलके बाहर रोडपर जाकर देखा. लेकिन वह काले रंगके टी शर्टवाला युवक कही भी दिखाई नही दे रहा था.
(to be contd..)

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