जॉनकी कार तेज गतिसे रास्तेपर दौड रही थी. कार जैसे जैसे शहरके बाहर जा रही थी वैसे वैसे रास्तेपर यातायात कम होती नजर आ रही थी. जॉनको अकेलापण कुछ जादाही महसूस होने लगा. जॉन रास्तेके किनारे देखने लगा. रास्तेके किनारेभी अब मकानोकी भिड कम होती नजर आ रही थी. थोडा आगे जाकर जॉनकी कार रास्तेके बायी तरफ मुडकर एक कच्चे रास्तेपर दौडने लगी. गाडी चलाते वक्त रास्तेपर मानो धुलके बादल उठ रहे थे. उस वजहसे और रास्ताभी कच्चा होनेसे जॉनके गाडीकी गती कम हो गई थी. आखीर जॉनकी गाडी एक बडे खाली फेन्सके पास रुक गई. गाडी रास्तेके किनारे पार्क कर जॉन गाडीसे उतर गया. गाडीके पिछले सिटपर रखा एक बडा फुलोंका हार उसने अपने हाथोंमें लिया. उसने सामने देखा. फेन्सके दरवाजेपर एक बडा सिमेटरीका पुराना हूवा बोर्ड लगा हूवा था. जॉन वह फुलोंका बडा गोल हार (रीथ) लेकर सिमेटरीमें दाखील हूवा. अंदर जानेके बाद उसका दिल और ही भारी भारी हो गया था. उसके चलनेकी गती धीमी हो गई थी. वह वैसेही भारी मनसे अंदर जाकर एक समाधीके सामने खडा हो गया. उसने समाधीपर खुदे अक्षरोंपर एक नजर घुमाई. वह अँजेनीकी समाधी थी. थोडी देर वैसेही स्तब्ध खडे रहकर उसने झुककर वह गोल हार उसके समाधीपर रखा और घूटने टेककर वह शांतीसे आंखे मुंदकर उसको आत्मशांती मिलनेके लिए प्रार्थना करने लगा. उसे उसकी वह गंभीर, अल्लड, भोली, लोभस, अदाए याद आने लगी. उसका दिल भर आने लगा था.
उसने अँजेनीके साथ पूरी जिंदगी व्यतित करनेका निश्चय किया था. लेकिन नियतीके सामने उसके निश्चयको क्या किमत थी?..
शून्य...
उसखी आंखे भर आयी और उससे आंसू बहने लगे. एक वडासा आंसू बहते हूए उसके गालपरसे होकर अँजेनीके समाधीपर रखे गोल हारके एकदम बिचोबिच जाकर गिरा. थोडी देर बाद उसने किनारेंको आंसू लगी हूई अपनी पलके खोली. उसकी नजर सामने रखे गोल हारकी तरफ गई.
' सचमुछ कितना अनोखा है आदमीका जिवन..' वह सोचने लगा. '... शून्यसे आना और आखिर शून्यमेंही विलीन हो जाना'
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Monday, April 7, 2008
Ch-67A : शुन्यसे शुन्यकी ओर (शून्य-उपन्यास) Hindi
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Sunil Doiphode
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Wednesday, April 2, 2008
Ch-65 : पेपर रोल (शून्य-उपन्यास) Hindi
विनय पुरी तैयारीके साथ रात एक बजेके बाद डॉ. कयूम खानके बंगलेके पास आया. बंगला बाकीके मकानोंसे अलग थलग बंसा हूवा था. इसलिए बंगलेमे पिछेसे प्रवेश करना शायद मुमकीन था. विनयने अंदाजा लगाया. एक बार फिर इधर उधर देखते हूए वह बंगलेके पिछवाडेकी तरफ जाने लगा.
विनयकी नजर पहुचेगी नही ऐसी एक जगह काली कार पार्क की हूई थी. अंदर जॉन और सॅम दुर्बिणसे विनयके हर हरकतको बारकाईसे देख रहे थे. .
" मुझे लगता है अब उसे जाकर पकडनेमें कुछ हर्ज नही होना चाहिए... नहीतो देर हो जाएगी." सॅम ने कहा.
" नही अभी नही ... मुझे पुरा यकिन है की वह अंदर खुनी श्रृंखला आगे बढानेके लिए नही जा रहा है. ' जॉनने कहा.
" फिर किसलिए जा रहा होगा ?" सॅमने पुछा.
"वहीतो हमे पता करना है " जॉनने कहा.
विनय जब बंगलेके पिछेकी तरफ जाने लगा तब अंदर बैठे हूए जॉन और सॅम एकदम अलर्ट हो गए. विनय नजरोंसे ओझल होतेही वे कारसे बाहर निकल आये.
विनय बंगलेके हॉलमें खडा था. हॉलमें अंधेरा था. सामने एक कमरा खुला दिख रहा था और उस कमरेसे धुंधली रोशनी बाहर आ रही थी. बंदूक तानकर धीरे धीरे विनय उस कमरेके दरवाजेके दिशामें चलने लगा. उसको सामने एक कुर्सीपर बैठा हूवा एक आदमीका साया दिखाई दिया. उस सायेका मुंह उस तरफ था. वह साया अंधेरेमें बैठा होनेसे वह कौन है यह पहचानना मुमकीन नही था. वह साया पैर फैलाकर कुर्सीपर आरामसे बैठा हूवा था. विनय उस सायेकी दिशामें चलने लगा. उतनेमें अचानक -
" हॅन्ड्स अप... थ्रो द गन" एक कडा आवाज हॉलमें गुंजा.
जॉन और सॅम विनयके पिछे बंदूक ताने हूए खडे थे. उन्हे वह कुर्सीपर बैठा हूवा साया भी दिख रहा था. इस अचानक हूए अप्रत्याशीत घटनासे विनय घबरा गया और गडबडा गया. उसने अपनी बंदूक जमीनपर फेंक दी और अपने दोनो हाथ उपर हवामें उठाए. सामने धुंधले रोशनीमें बैठे आदमीने अपनी पहियेवाली कुर्सी आवाजकी तरफ घुमाई. विनय अब संभलकर धीरे धीरे मुडने लगा था. सामने धुंधले रोशनीमें बैठा सायाभी उठकर खडा होनेका प्रयास करने लगा.
" डोन्ट मूव्ह" जॉनका कडा स्वर गुंजा.
विनय किसी बूत की तरह अपने जगह बिना हिले खडा हो गया. वह कुर्सीपर बैठा सायाभी अपने जगहपर बैठा रहा.
लेकिन यह क्या ?...
उस सायेके हाथमें शायद बंदूक थी.....
उसके हाथमें बंदूक दिखतेही सॅमने अपने बंदूकसे उस सायेपर गोलीयां की बरसात शुरु कर दी.
" नो...." जॉनने सॅमके हाथसे बंदूक दुसरे तरफ करनेकी कोशीश की.
उनके सामने 'धप' 'धप' ऐसे दो आवाज आये. एक वह साया गिरनेका और दुसरा विनय निचे गिरनेका. सॅमकी बंदूक बाजु हटानेके चक्करमें विनयके मस्तकमें एक गोली घुस गई थी.
" व्हॉट हॅपन्ड टू यू" जॉनने चिढकर सॅमसे कहा.
" अगर मैने बंदूक नही चलायी होती तो उसने चलाई होती " सॅमने कहा.
सॅम उस काले सायेके निचे पडे शरीरकी तरफ दौडा. और जॉन विनयके निचे पडे शरीरकी तरफ दौडा. सॅमने स्टडी रूमका बडा बल्ब जलाया. निचे एक वयस्कर सफेद दाढी रखा हूवा और पुरी मुंछ मुंडाया हूवा एक शख्स पडा हूवा था. वही डॉ. कयूम था. डॉ. कयूमका शरीर एक राखके ढेरपर गिरकर राख इधर उधर बिखर गई थी. वह राख शायद कुछ कागजाद या कोई पुस्तक जलानेसे बनी हूई थी. डॉ. कयूमके हाथमें एक कागजका रोल था. उस रोलकोही अंधेरेमे बंदूक समझकर सॅमने बंदूक चलाई थी.
" उसके हाथमें कागजका रोल देखकर अपने आपपर चिढकर सॅमके मुंहसे निकल गया, " शिट ... व्हाट अ फूल आय अॅम ... यह तो सिर्फ रोल किया हूवा पेपर है.."
सॅमने निचे घुटनेपर बैठकर उस निचे गिरे आदमीकी नब्ज टटोली. उसकी नब्ज पुरी तरहसे बंद हो चूकी थी. " हि इज डेड" सॅमके मुंहसे निकल गया.
जॉनने निचे पडे हूए विनयके शरीरकी तरफ देखा. वह अबभी दर्दसे कराह रहा था. उसने निचे झुककर उसे कहां गोली लगी यह देखा और वह उसके बचनेकी कितनी संभावना है यह देखने लगा.
" इसे किसीभी हालातमें हमें बचाना पडेगा" जॉनने कहा.
उसने वैसेही वहा घुटनेपर बैठकर जेबसे मोबाईल निकाला और एक नंबर डायल करने लगा.
उधर सॅमने निचे गिरे डॉ. कयूम खानके शवके हाथसे कागजका रोल खिंच लिया. वह कागजका रोल उसने खोलकर देखा. उस कागजपर अलग अलग तारख और समय लिखा हूवा था. कही 'लाभदायक समय' तो कही 'अति लाभदायक समय' ऐसा लिखा हूवा था. कही कही 'धोकादायक समय' ऐसाभी लिखा हूवा था. उसमें डॉ. कयूमकी लगभग सब कुंडलीही लिखी हूई थी. पढते पढते सॅमका ध्यान कागजके एकदम आखिरमें गया. .
" माय गॉड !" सॅमके मुंहसे निकल गया.
" जॉन " सॅम आवाज देते हूए जॉनके पास गया.
जॉनने अभी अभी हॉस्पिटलको फोन लगाकर तुरंत यहा आनेके लिए कहा था.
"जॉन यह तो देखो " सॅमने वह कागज जॉनके सामने पकडा.
जॉनने उस कागजको हाथमें लेकर एक नजर दौडाई और वह कागज निचे फेंकते हूए कहा -
" अरे आजकल ज्योतिष्य यह एक फॅशनही हो गया है."
सॅमने वह कागज उठाया और उस कागजके आखिरमें लिखा हूवा जॉनको दिखाकर कहा-
" यह इधर देखो... यहां ... तारीख 17 रातके बारा से आगे 3 दिन 'धोकादायक समय' और यह देखो यहां रातके 12 से 2 तक 'अति धोकादायक समय' "
जॉनने वह कागद अपने हाथमें लेकर ठिकसे देखा. उसने घडीमें देखा 1 बजकर 5 मिनट हो चूके थे. और आज तारीख बराबर 17 थी. जॉन स्तब्ध होकर उस कागजकी तरफ देखने लगा. उसके चेहरेपर एक गूढतापुर्ण आश्चर्य फैल गया था. जॉन जहा खडा था वही निचे जमिनपर विनय कराह रहा था. उसने सॅमने जॉनको पढाकर सुनाया सुना था. उसे बॉसके पास रहे ज्ञानकी पुरी तरह तसल्ली हूई थी. आखिर एक दीर्घ सांस लेते हूए विनयकी गर्दन एक तरफ ढूलक गई. लेकिन उसकी वह ज्ञान हथीयानेकी इच्छा पुरी नही हो सकी थी...
क्रमश:...
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Monday, March 31, 2008
Ch-63 : रेकॉर्ड डिटेल्स (शून्य-उपन्यास) Hindi
सॅम और जॉन एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. कॉम्प्यूटरपर एक सॉफ्टवेअर रन हो रहा था. उस साफ्टवेअरके सहाय्यतासे वे उनको मिले उंगलीयोंके निशान कॉम्पूटरपर गुनाहगारोंके डाटाबेसमें ढुंढ रहे थे. डाटाबेसमें गुनाहगारोंके लाखो करोडो उंगलियोंके निशान स्टोअर करके रखे होंगे. उस हर उंगलियोंके निशान के साथ उनके पासके उंगलियोंके निशान जोडकर देखना वैसे बडा कठीन काम था. लेकिन आजकल काम्प्यूटरकी वजहसे वह बहुत आसान हो गया था. कॉम्प्यूटर एक सेकंडमें कमसे कम हजारो उंगलियोंके निशान जोडकर देखता होगा. और वहभी बहुत बारीकीसे, एक भी छोटीसे छोटी महत्वपुर्ण जानकारी ना छोडते हूए. मतलब सब निशानोंको जोडकर देखनेके लिए कुछ ही मिनीटोंका अवधी लगने वाला था. वे दोनो बेसब्रीसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगे. मॉनिटरपर कितने लोगोंके उंगलियोंके निशान जोडकर देखे यह बतानेवाला एक काऊंटर तेजीसे आगे बढ रहा था. वह काऊंटर शून्यसे शुरु होकर अबतक सात लाखके उपर पहूंच गया था. आखिर अचानक वह काऊंटर 757092 पर रुका .
मॉनिटरपर एक मेसेज झलकने लगा " मॅच फाऊंन्ड".
दोनोंके चेहरे खुशीसे खिल उठे. उन्होने एकदुसरेकी तरफ देखकर एक विजयी मुस्कुराहट बिखेरी और फिर मॉनिटरपर वह किसका रेकॉर्ड है यह देखने लगे.
॥।रेकॉर्ड डिटेल्स ॥।
नाम - विनय जोशी
उम्र - 30 साल
गुनाह - फोर्जरी
निशाणी - बायें हाथको छे उंगलिया.
नॅशनॅलिटी - अमेरिकन
दोनोभी गुनाहगारकी पुरी जानकारी पढने लगे. उसमें गुनाहगारके तीन फोटोभी थे. एक दाई तरफसे लिया हूवा , दुसरा बायी तरफसे लिया हूवा और तिसरा सामनेसे लिया हूवा.
" यह सब जानकारी हमे शहरके सब पुलिस थानोंपर जल्द से जल्द भेजना चाहिए." सॅमने कहा.
" हां सही है ... लेकिन मुझे एक डर है " जॉनने कहा.
सॅमने उसकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.
" की इसबारभी अगर यह जानकारी कातिलतक पहूंच गई तो ? " जॉनने अपनी चिंता जाहिर की.
" इसबार नही पहूंचेगी. उस डॅनको उसके कियेकी सजा मिल चूकी है." सॅमने कहा.
फिर उन्होने उस गुनाहगारकी फोटोके साथ सारी जानकारी शहरके सब पुलिस थानोंपर भेज दी. और वैसा कोई शख्स नजर आतेही ही उसपर वॉच रखकर तुरंत सॅमको सुचीत करनेके लिए बताया गया. क्योंकी वह सिर्फ एक धागा हो सकता है. वहतो उनके हाथका सिर्फ एक मोहरा हो सकता था. असली गुनाहगार कोई और ही हो सकता है. पुरी केसकी तहतक जाकर असली गुनाहगारतक पहूंचना सबसे महत्वपुर्ण था.
क्रमश:...
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Wednesday, March 19, 2008
Ch-59A : आर्यभट्ट (शून्य-उपन्यास) Hindi
कमांड2 निश्चिंत होकर कुर्सीपर रिलॅक्स होकर बैठा था. उसके सामने टीव्ही शुरु था. लेकिन उसका टीव्हीके तरफ ध्यान कहा था.? वह तो अपनेही धुनमें था. अबतक बॉसने बताए हूए सब काम उसने इमाने इतबारे पुरे किए थे. और उसकी वजहसे बॉसभी उसपर खुश लग रहा था. सबसे महत्वपुर्ण बात यह थी की कमांड1के कत्लका शक बॉसको उसपर नही आया था. वह बिचबिचमें टिव्हीके चॅनल्स बदलकर खबरें देख रहा था. आगजनी, दंगा फसाद, लाठीमार, यह सब खबरें देखते हूए उसे बडा मजा आ रहा था. उसके चेहरेपर एक शैतानी मुस्कुराहट फैली हूई थी. वह अपनी मस्ती दिमागसे झटककर कुर्सीपर सिधा होकर बैठ गया..
मुझे ऐसे सुस्ताकर नही चलेगा...
मुझे अब आगेकी कार्यवाहीके पिछे लगना चाहिए...
वह कुर्सीसे उठ खडा हो गया. उसने वही दोचार चक्कर लगाए और फिर कुछ ठोस निर्णय लेकर वह कमरेमें कोनेमें रखे आलमारीके पास चला गया. आलमारी खोलकर उसने आलमारीका सबसे निचेवाला ड्रॉवर खोला. ड्रॉवर का बक्सा पुरी तरह बाहर निकालकर अपने पैरके पास निचे रख दिया. ड्रॉवर निकालनेके बाद जो खाली जगह बनी थी वहांसे उसने और एक छूपा कप्पा खोला. उस कप्पेसे कुछ ढूंढकर उसने वह चिज अपने पॅन्टके दाए जेब मे रख दी. फिर उसने वह छुपा कप्पा ठिक तरहसे बंद किया, पैरके पास रखा ड्रॉवर उठाकर उसने उसके पहले जगह पर ठिक तरहसे रख दिया और आलमारी बंद कर वह कॉम्प्यूटरके पास जाकर खडा हो गया. कॉम्प्यूटर शुरु किया और कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखते हूए कमरेमे फिरसे चहलकदमी करने लगा.
अगली कार्यवाही करनेके पहले मुझे अब ठिक तरहसे तैयारी कर लेनी चाहिए...
अपना लक्ष अभीभी अधूरा है...
जिस लक्षके लिए मैने कमांड1का कत्ल करनेकी रिस्क ली, वह अभीभी पहूचसे बहुत दूर है...
उसने अपने दाए पॅन्टके जेबसे अभी अभी आलमारीसे रखा हूवा पेन ड्राइव्ह निकाला. पेनड्राईव्हकी तरफ देखते हूए वह सोचने लगा.
मुझे अब एकबार बॉसके बारेमे जो मटेरीयल कमांड1के कॉम्प्यूटरपर मिला था उसको एकबार ठिक तरहसे फिरसे पढ लेना चाहिए..
अचानक कमांड2 चहलकदमी करते हूए रुक गया. उसने कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखा. कॉम्प्यूटर बूट हो गया था. कॉम्प्यूटरके पास जाकर प्रथम उसने पेन ड्राईव्ह कॉम्प्यूटरको लगाया. कुर्सी खिंचकर कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए वह किसी जादूगरकी तरह कॉम्प्यूटरको कीबोर्ड और माऊसके द्वारा अलग अलग कमांड देने लगा. उसने पहले एक बार कमांड1के मेलबॉक्ससे जो महत्वपुर्ण फाईल अपने पेन ड्राईव्हके उपर कॉपी कर रखी थी, खोली. वह एक रिसर्च पेपर था. पेपरका टायटल था.
"आर्यभट्ट्का साहित्य".
उसका अंदाजा था की इस पेपरमें दिए जानकारीके आधारपर उसे भविष्यमें ऐसी कुछ बाते मिलने वाली थी की जिसकी वजहसे उसका फायदा ही फायदा होने वाला था. कमांड1के होठोंपर एक मुस्कुराहट तैरने लगी. शायद उसे भविष्यमें जो फायदा होने वाला था उसके कल्पना मात्रसे वह गदगद हो गया था. वह पेपरमें दिए महत्वपुर्ण मुद्दे पढने लगा...
क्रमश:...
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Monday, March 17, 2008
Ch-57: जैसे को तैसा (शून्य-उपन्यास) Hindi
रातका समय था. डॅनने अपने घरका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोला और बाहर झांककर देखा. चारो तरफ अंधेरा था. वह धीरेसे घरसे बाहर निकल गया. बाहर आनेके बाद उसने चारो तरफ अपनी नजरे घुमाकर उसे कोई देखतो नही रहा इसकी तसल्ली की. कोई देख नही रहा है इस बातकी तसल्ली होतेही वह कंपाऊंडके बाहर आ गया. फिरसे रस्तेपर उसने चारो ओर अपनी नजरे दौडाई. रास्ता एकदम खाली खाली था. अब वह दाई तरफ मुडकर चलने लगा - अंधेरेमे तेजीसे कदम बढाते हूए. उसके चलनेके गतीके साथही उसके सोचनेभी गती पकड ली. पिछले बार कातिलने हमें भरपूर बक्षिसी देकर खुश कर दिया था. इस बारभी जॉन, सॅम और बॉसको अगला खुन किसका होगा इसकी जानकारी मिलने की बात उसने कातिल को फौरन बताई थी. कातिल उसपर बहूत खुश हो गया था. फिदाही हूवा था.
कातिलने उसे एक जगह बताकर वहा वह सोच भी नही सकता उतना पैसा रखनेका वादा किया था. अब वह वहांही पैसे लेनेके लिए जा रहा था. पैसेका खयाल आतेही उसके दिलमें गुदगुदी होने लगी. पिछले बार मिले पैसेसे दस गुना पैसे उसको अपने आखोंके सामने दिखने लगे. खुशीसे वह झुम उठा. उसके चलनेकी गती धीमी होगई और चालमें एक मस्ती झलकने लगी थी.
होगया अब यह आखरी...
इसके बाद ऐसी बेईमानी नही करुंगा...
इतना पैसा मिलनेके बाद मुझे ऐसी बेइमानी करनेकी फिरसे नौबतही नही आयेगी...
पैसा मिलनेके बाद नौकरी एकदम नही छोडूंगा.. नहीतो किसीको शक हो सकता है...
नौकरीमें कुछ देरतक टाईमपास करेंगे और फिर सही वक्त आतेही नौकरी छोडकर कुछ बिझीनेस करेंगे....
नहीतो पहले बिझीनेस डालूंगा और वह अच्छा खासा चलनेके बाद नौकरी छोड दूंगा....
डॅन सोच रहा था. अचानक असे अहसास हूवा की जिस जगह कातिलने पैसे रखनेका कबुला था वह जगह नजदीक आ चूकी है. वह एक पल रुका. फिरसे एकबार चारो ओर देखकर जिस जगह पर पैसे रखे थे उधर निकल गया. उसके चेहरेपर एक मुस्कुराहट झलक रही थी. स्थान एकदम निर्जन था. चारो ओर अंधेरा छाया हूवा था. बिच बिचमें कुतोंका अजीब आवाज आ रहा था. वह जगह किसीकोभी डर लगेगा ऐसीही थी. लेकिन आज डॅनके डर पर उसका लालच पुरी तरहसे हावी हो चूका था.
सामने एक बडा पेढ था. यही वह पेढ था जिसके निचे कातिलने पैसे रखे थे...
अब मानो डॅनके शरीरमें खुशीकी लहरे दौड रही थी. अब कुछही और पल! कुछ पलमेंही अब मै एक बडे संपतीका मालिक बनने वाला हूं. वह अधीरतापुर्वक पेढके निचे चला गया. वहा एक बडा पत्थर रखा हूवा था. डॅनने एक पलकाभी विलंब ना लगाते हूए वह पत्थर वहासे हटाया. जैसेही उसने वह पत्थर वहा से हटाया एक बडा धमाका हुवा और उसके हाथके टूकडे टूकडे हो गए. उसके बदनमेंभी नुकीले पत्थरके टूकडे गए थे. और खुनसे लथपथ अवस्थामें उसकी जान चली गई. उसे अहसास हो गया था की उसने जैसे ठान लिया था वैसेही यह उसकी आखरी बेइमानी साबित हूई थी.
क्रमश:...
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Friday, March 14, 2008
Ch-56: आखरी शिकार (शून्य-उपन्यास)
जॉनने धडकते दिलसे फ्लॅटका दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. अंदरका नजारा देखकर जॉनको एक पलके लिए तो ऐसा लगा की उसका दिल धडकना बंद हो जाएगा देगा. उसके सामने हॉलमे उसकी प्रीया अँजेनी खुनसे लथपथ पडी हूई थी. और सामने दिवारपर एक बडा शुन्य निकाला हूवा था. जॉन उसके पास गया. उसको एहसास हूवा की उसके पैर क्षीण होने लगे है मानो पैरोंकी सारी शक्ती निकाल ली हो. इतनी की वह निराशासे निचेही बैठ गया. खुदको संभालकर उसने अँजेनीकी नब्ज टटोली और वह उसकी हथेलीमे अपना चेहरा छुपाकर अनियंत्रीत होकर रोने लगा.
अँजेनीके प्राण कबके जा चूके थे...
सॅमको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने सांत्वनाभरा एक हाथ जॉनके कंधेपर रखा. उसके हाथको जॉनके सिसकीयोंके धक्के किसी भूकंपके धक्के जैसे भयानक प्रतित हो रहे थे. सॅम जॉनके पास घूटने टेककर बैठ गया.
कातिल अपना आखरी शिकार करनेमेभी कामयाब रहा था.
सॅम " शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " इस बातका मतलब समझ गया था.
और 'शून्य' का आखरी अंग्रेजी अक्षर 'ए' का महत्व भी उसे समझ गया था.
अँजेनी - अँजेनीका नामभी 'ए' इस अक्षरसेही शुरु होता था...
जॉनको अपने कर्तव्यका एहसास होगया.
कातिल इतनेमेंही कत्ल कर भाग गया होगा ...
यानीकी वह यही कही आसपासही होना चाहिए...
कुछतो करना चाहिए...
लेकिन जॉनके हाथपैर साथ नही दे रहे थे. उसमें उठनेकी शक्तीही नही बची थी.
" खुनी अभी जादा दूर नही गया होगा ' जॉनने किसी तरह सॅमसे कहा.
सॅम खुदको संभालकर झटसे उठ खडा हूवा और आगेकी कार्यवाहीके लिए तैयार हो गया.
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Saturday, March 1, 2008
Ch-49A: मिटींग (शून्य-उपन्यास)
बोर्ड रूममें बॉस, सॅम, डॅन और बाकी काफी पुलिस अधिकारी बैठे हूए थे. जॉन सबके सामने एक जगह बैठा था. सब लोग अब वह क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब थे. बॉसको वह क्या बताता है इसमें कोई खास दिलचस्पी नही दिख रही थी.
जॉनने शुरवात की.
" यह जो कातील है वह एक सिरीयल किलर है इसमे किसीकी दोराय नही होगी".
जॉनने सब लोगोंपर एक नजर दौडाई.
" मुझे लगता है अगर हम सिधे मुद्देपरही बात करोगे तो ठिक रहेगा' बॉसने उसे बिचमें टोका.
जॉनको बॉसका ऐसा बिचमें टोकना अच्छा नही लगा था. उसे उसका गुस्सा भी आया. लेकिन अपना गुस्सा चेहरेपर जाहिर ना करते हूए जॉनने सिर्फ एक नजर बॉसपर डाली.
" देखो , कातिलने पहला कत्ल जिसका किया उसका नाम था सानी , दुसरे का हुयाना, और तिसरे शख्सका उटीना और अब हालहीमें जो चौथा कत्ल हूवा उसका नाम था नियोल.
जॉनने फिरसे एकबार बॉसको टालते हूए सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई.
" और अब पाचवा कत्ल जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' इस अक्षरसे शुरु होनेवाला है.." जॉन कोई राज खोलनेके आविर्भावमें बोला.
बॉसची उत्सुकता बढ गई थी लेकीन उसने वैसा जाहिर नही होने दिया.
" यह तूम इतने ठोस तरहसे कैसे कह सकते हो ?" किसीने अपनी शंका उपस्थित की.
" बोलता हूं " जॉन एक दीर्घ श्वास लेते हूए बोला.
अब सब लोग एकाग्र होकर ध्यान देकर सुनने लगे.
" हर कत्लके वक्त कातीलने हमे 'क्लू' देनेकी कोशीश की थी. उस सब क्लू में एक कॉमन मुद्दा जो था वह था 'झीरो' और अब चौथे कत्लके वक्त उसने दिवारपर लिखा था -
'झीरोकी खोज किसने की?'
... और उसीमें अगले खुनका रहस्य छिपा हूवा है ... वैसे देखा जाए तो झीरोकी खोज किसने की यह एक विवादातीत मुद्दा है ..."
जॉन झीरोकी खोजके बारेमे बोर्डरूममें बैठे सब लोगोकों जानकारी देने लगा. सब लोग ध्यान देकर सुन रहे थे. लेकिन वह सुनते हूए डॅन बेचैन होगया था. वह बोर्डरूमसे बाहर जानेके मौकेका इंतजार करने लगा...
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Saturday, February 23, 2008
Ch-43: फिरसे प्रेस कॉन्फरन्स (शून्य-उपन्यास)
जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.
"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.
जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.
" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.
उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.
" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.
जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,
" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."
" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.
" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.
" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.
" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.
इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,
" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."
पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.
" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.
" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.
" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.
" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"
अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.
" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.
" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.
" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.
" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."
जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.
जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"
" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.
बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.
बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"
बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
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10:45 AM
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