रेल्वे प्लॅटफॉर्मपर जैसे लोगोंका सैलाब उमड पडा था. भिडमें लोग अपना अपना सामान लेकर बडी मुश्कीलसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जा रहे थे. शायद अभी अभी कोई ट्रेन आई हो. वही प्लॅटफार्मपर एक कोनेमें स्टीव्हन, पॉल, रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर ऍन्डरसन पत्ते खेल रहे थे. उन चारोंमे क्रिस्तोफर, उसके हावभावसे और उसका जो तिनोंपर एक प्रभाव दिख रहा था उससे, उनका लिडर लग रहा था. क्रिस्तोफर लगभग पच्चीस के आसपास, कसे हूवे और मजबूत शरीर का मालिक, एक लंबाचौडा यूवक था.
" देखो अपनी गाडी आनेमें अभी बहूत वक्त है... कमसे कम और तीन गेम हो सकते है...'' क्रिस्तोफरने पत्ते बांटते हूए कहा.
" पॉल तुम इस कागजपर पॉइंट्स लिखो " रोनॉल्डने एक हाथसे पत्ते पकडते हूए और दुसरे हाथसे जेबसे एक कागजका टूकडा निकालकर पॉलके हाथमें देते हूए कहा.
" और, लालटेन जादा हुशारी नही चलेगी' पॉलने स्टीव्हनको ताकीद दी. वे स्टीव्हनको उसके चश्मेकी वजहसे लालटेनही कहते थे. क्रिस्तोफरका ध्यान पत्त्ते खेलते वक्त यूंही प्लॅटफॉर्मपर उमड पडी भिडकी तरफ गया.
भिडमें नॅन्सी और जॉन एकदुसरेका हाथ पकडकर किसी परदेसी अजनबीकी तरह चल रहे थे.
उसने नॅन्सीकी तरफ सिर्फ देखा और खुले मुंह देखताही रह गया.
" बाप, क्या माल है " उसके खुले मुंहसे अनायासही निकल गया. पॉल, रोनॉल्ड और स्टीव्हनभी अपना गेम छोडकर उधर देखने लगे. उनकाभी देखते हूए खुला मुह बंद होनेको तैयार नही था.
" कबूतरी कबूतरके साथ भाग आई है शायद" क्रिस्तोफरके अनुभवी नजरने भांप लिया.
' उस कबुतरके बजाय मै उसके साथ रहना चाहिए था' पॉल ने कहा.
क्रिस्तोफरने सबके पाससे पत्ते छिनकर लेते हूए कहा, ' देखो, अब यह गेम बंद करदो... हम अब एक दुसराही गेम खेलते है "
सबके चेहरे खुशीसे दमकने लगे. वे क्रिस्तोफरके बोलनेका छिपा अर्थ जानते थे. वैसे वे वह गेम कोई पहली बार नही खेल रहे थे. सब उत्साहसे भरे एकदम उठकर खडे होगए.
" अरे, देखो जरा खयाल रहे... साले कही घुस जाएंगे तो बादमें मिलेंगे नही " रोनॉल्डने उठते हूए कहा.
फिर वे उनके खयालमें ना आए इतना फासला रखते हूए उनके पिछे पिछे जाने लगे.
" ऐ , लालटेन तुम जरा आगे जावो... साले पहलेही तुझे चश्मेसे जरा कमही दिखता है ." क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आगे धकेलते हूए कहा. स्टीव्हन नॅन्सी और जॉनके खयालमें नही आये ऐसा सामने दौडते हूए गया.
दिनभर इधर उधर घुमनेमें वक्त कैसा निकल गया यह जॉन और नॅन्सीको पताही नही चला. कुछ देर बाद शामभी हो गई. जॉन और नॅन्सी एक दुसरेका हाथ पकडकर मस्त मजेमें फुटपाथपर चल रहे थे. सामने एक जगह रास्तेपर हार्ट शेपके हायड्रोजसे भरे लाल गुब्बारे बेचनेवाला फेरीवाला उन्हे दिखाई दिया. वे उसके पास गए. जॉनने गुब्बारोंका एक बडासा दस्ता खरीदकर नॅन्सीको दिया. पकडनेके लिए जो धागा था उसके हिसाबसे वह दस्ता बडा होनेसे धागा टूट गया और वह दस्ता उडकर आकाशकी ओर निकल पडा. जॉनने दौडकर जाकर, उंची उंची छलांगे लगाकर उसे पकडनेका प्रयासे किया लेकीन वह धागा उसके हाथ नही आया. वे लाल गुब्बारे मानो एकदुसरेको धक्के देते हूए उपर आकाशमें जा रहे थे. जॉनकी उस धागेको पकडनेकी जी तोड कोशीश देखकर नॅन्सी खिलखिलाकर हंस रही थी.
और उनके काफी पिछे क्रिस्तोफर , रोनॉल्ड, स्टीव्हन और पॉल किसीके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा कर रहे थे.
नॅन्सी और जॉन एक जगह आईसक्रीम खानेके लिए रुक गए. उन्होने एक कोन लिया और उसमेंही दोनो खाने लगे. आईसक्रीम खातेवक्त नॅन्सीका ध्यान जॉनके चेहरेकी तरफ गया और वह खिलखिलाकर हंस पडी.
'' क्या हूवा ?'' जॉनने पुछा.
'' आईनेमें तो देखो '' नॅन्सी वही पास एक गाडीको लगे आईनेकी तरफ इशारा कर बोली.
जॉनने आईनेमें देखा तो उसके नाक के सिरेको आईसस्क्रीम लगा था. अपना वह हुलिया देखकर उसेभी हंसी आ रही थी. उसने वह पोंछ लिया और एक प्रेमभरी नजरसे नॅन्सीकी तरफ देखा.
'' सचमुछ अपनी रुची कितनी मिलती जुलती है '' नॅन्सीने कहा.
'' फिर ... वह तो रहनेही वाली है... क्योंकी ...वुई आर द परफेक्ट मॅच"' जॉन गर्वसे बोल रहा था.
आईस्क्रीम खाते हूए अचानक नॅन्सीका खयाल दुर खडे क्रिस्तोफरकी तरफ गया. क्रिस्तोफरने झटसे अपनी नजर फेर ली. नॅन्सीको उसकी नजर अजीब लगी थी और उसकी गतिविघीयांभी.
'' जॉन मुझे लगता है अब हमें यहांसे निकलना चाहिए.'' नॅन्सीने कहा और वह वहांसे निकल पडी. जॉन उलझनमें सहमासा उसके पिछे पिछे जाने लगा.
वहांसे आगे काफी समयतक चलनेके बाद वे एक कपडेके दुकानमें घुस गए. अब काफी रात हो चुकी थी. नन्सीको शक था की कहीं वह पहले दिखा हुवा लडका उनका पिछा तो नही कर रहा है. इसलिए उसने दुकानमें जानेके बाद वहांसे एक संकरी दरारसे बाहर झांककर देखा. बाहर क्रिस्तोफर उसके और दो साथीके साथ चर्चा करते हूए इधर उधर देख रहा था. जॉन उन लोगोंको दिख सके ऐसे जगहपर खडा था.
'' जॉन पिछे मुडकर मत देखो... मुझे लगता है वह लडके अपना पिछा कर रहे है. '' नॅन्सी दबे स्वरमें बोली.
'' कौन ? .. किधर ? '' जॉनने गडबडाते हूए पुछा.
'' चलो जल्दी यहांसे हम निकल जाते है... वे हमतक पहूंचना नही चाहिए... '' नॅन्सीने उसे वहांसे बाहर निकाला.
वे दोनो लंबे लंबे कदम डालते हूए फुटपाथपर चलरहे लोगोंकी भिडसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जाने लगे.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण) The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है. |
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Thursday, May 8, 2008
Hindi literarture Novel - अद्-भूत : Ch-17 : गेम
Posted by
Sunil Doiphode
at
12:11 PM
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