उपन्यास - अद्-भूत
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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Friday, May 9, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)

अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.

''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.

'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.

'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.

'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.

जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.

'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.

एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.

'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.

'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.

दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.

क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.

'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.

चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.

नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?

अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.

वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.

'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.

उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.

जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....

उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....

'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.

स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.

जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.


क्रमश:...

Tuesday, April 29, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-11 : बदतमिज

क्लास चल रहा था. क्लासमें जॉन और उसके दो दोस्त पास-पास बैठे थे. जॉनका खयाल बिलकुल क्लासमें नही था. वह बेचैन लग रहा था और अस्वस्थतासे क्लास खतम होने की राह देख रहा था. उसने एकबार पुरे क्लासपर अपनी नजर घुमाई, खासकर नॅन्सीकी तरफ देखा. लेकिन उसका कहा उसकी तरफ ध्यान था? वह तो अपनी नोट्स लेनेमे व्यस्त थी. कल रातका वाक्या याद कर जॉनको फिरसे अपराधी जैसा लगने लगा.

उस बेचारीको क्या लगा होगा ? ...

इतने सारे लोगोंके सामने और मेरीके सामने मैने ...

नही मैने ऐसा नही करना चाहिए था...

लेकिन जोभी हूवा वह गलतीसे हूवा...

मुझे क्या मालूम था की वह चोर ना होकर नॅन्सी थी...

नही मुझे उसकी माफी मांगना चाहिए...

लेकिन कल तो मैने उसकी माफी मांगनेका प्रयास किया था ..

तो उसने धडामसे गुस्सेसे दरवाजा बंद किया था...

नही मुझे वह जबतक माफ नही करती तबतक माफी मांगतेही रहना चाहिए...

उसके दिमागमें विचारोंका तुफान उमड पडा था. इतनेमें पिरियड बेल बजी. शायद ब्रेक हो गया था.

चलो यह अच्छा मौका है ...

उसे माफी मांगनेका ...

वह उठकर उसके पास जानेही वाला था इतनेमें वह लडकियोंकी भिडमें कही गुम होगई थी.

ब्रेककी वजहसे कॉलेजके गलियारेमें स्टूडंट्स की भिड जमा हो गई थी. छोटे छोटे समूह बनाकर गप्पे मारते हूए स्टूडंट्स सब तरफ फैल गए थे. और उस भिडसे रास्ता निकालते हूए जॉन और उसके दो दोस्त उस भिडमें नॅन्सीको ढूंढ रहे थे.

कहा गई?...

अभी तो लडकियोंकी भिडमें क्लाससे बाहर जाते हूए दिखी थी... .

वे तिनो इधर उधर देखते हूए उसे ढूंढनेकी कोशीश करने लगे. आखिर एक जगह कोनेमें उन्हे अपने दोस्तोंके साथ बाते करती हूइ नॅन्सी दिख गई.

''चलो मेरे साथ... '' जॉनने अपने दोस्तो से कहा.

'' हम किसलिए ... हम यही रुकते है ... तुम ही जावो.. '' उसके दोस्तोमेंसे एक बोला.

'' अबे... साथ तो चलो '' जॉन उनको लगभग पकडकर नॅन्सीके पास ले गया.

जब जॉन और उसके दोस्त उसके पास गए तब उसका खयाल इन लोगोंकी तरफ नही था. वह अपनी गप्पे मारनेमें मशगुल थी. नॅन्सीने गप्पे मारते हूए एक नजर उनपर डाली और उनकी तरफ ध्यान ना देते हूए अपनी बातोंमेही व्यस्त रही. जॉनने उसके और पास जाकर उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षीत करनेका प्रयास किया. लेकिन बार बार वह उनकी तरफ ध्यान ना देते हूए उन्हे टालनेका प्रयास कर रही थी. उधर उनसे काफी दूर ऍन्थोनी गलियारेसे जारहा था वह जॉनकी तरफ देखकर मुस्कुराया और उसने अपना अंगूठा दिखाकर उसे बेस्ट लक विश किया.

'' नॅन्सी ... आय ऍम सॉरी'' जॉनको इतने लडको लडकियोंकी भिडमें शर्मभी आ रही थी. फिरभी ढांढस बांधते हूए उसने कहा.

नॅन्सीने एक कॅजूअल नजर उसपर डाली.

जॉनकी गडबडी हूइ दशा देखकर उसके दोस्तोने अब सिच्यूएशन अपने हाथमे ली.

'' ऍक्च्यूअली हम एक चोरको पकडनेकी कोशीश कर रहे थे. '' एक दोस्तने कहा.

'' हां ना ... वह रोज होस्टेलमें चोरी कर रहा था. '' दुसरे दोस्त ने कहा.

जॉन अब अपनी गडबडीभरी दशासे काफी उभर गया था. उसने फिरसे हिम्मत कर अपनी रट जारी रखी, , '' नॅन्सी ... आय ऍम सॉरी ... आय रियली डीडन्ट मीन इट... मै तो उस चोरको पकडनेकी ... .''

जॉन हाथोके अलग अलग इशारोंसे अपने भाव व्यक्त करनेकी कोशीश कर रहा था. वह क्या बोल रहा था और क्या इशारे कर रहा था उसका उसकोही समझ नही आ रहा था. आखिर वह एक हाव-भावके पोजीशनमें रुका. जब वह रुका तब उसके खयालमें आया की, भलेही स्पर्ष ना कर रहे हो, लेकिन उसके दोनो हाथ फिरसे नॅन्सीके उरोजोंके आसपास थे. वह नॅन्सीकेभी खयालमें आया. उसने झटसे अपने हाथ पिछे खिंच लिए. उसने गुस्सेसे भरा एक कटाक्ष उसके उपर डाला और फिरसे एक जोरका चांटा उसके गालपर जडकर चिढकर बोली, '' बद्तमीज''

इसके पहलेकी जॉन फिरसे संभलकर कुछ बोले वह गुस्सेसे पैर पटकाती हूई वहांसे चली गई थी. जब वह होशमें आया वह दूर जा चूकी थी और जॉन अपना गाल सहलाते हूए वहां खडा था.


क्रमश:...

Monday, April 28, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-10 : आय ऍम सॉरी

रातको होस्टेलके गलियारेमें घना अंधेरा था. गलियारेके लाईट्स या तो किसीने चोरी किये होंगे या लडकोने तोड दिए होंगे. एक काला साया धीरे धीरे उस गलियारेमे चल रहा था. और वहासे थोडीही दुरीपर जॉन, ऍन्थोनी और उसके दो दोस्त एक खंबेके पिछे छुपकर बैठे थे. उन्होने पक्का फैसला किया था की आज किसीभी हालमें इस चोरको पकडकर होस्टेलकी लगभग रोज होनेवाली चोरीयां रोकनी है. काफी समयसे वे वहां छिपकर चोरकी राह देख रहे थे. आखिर वह साया उन्हे दिखतेही उनके चेहरेपर खुशी की लहर दौड गई.

चलो इतने देरसे रुके... आखिर मेहनत रंग लाई...

खुशीके मारे उनमें खुसुर फुसुर होने लगी.

'' ए चूप रहो... यही अच्छा मौका है ... सालेको रंगे हाथ पकडनेका '' जॉनने सबको चूप रहनेकी हिदायत दी.

वे वहांसे छिपते हूए सामने जाकर एक दुसरे खंबेके पिछे छूप गए.

उन्होने चोरको पकडनेकी पुरी प्लॅनींग और तैयारी कर रखी थी. चारोंने आपसमें काम बांट लिया था. उन चारोंमें एक लडका अपने कंधेपर एक काला ब्लॅंकेट संभाल रहा था.

'' देखो... वह रुक गया ... सालेकी घोंगड रपेटही करेंगे'' जॉन धीरेसे बोला.

वह साया गलियारेमे चलते हूए एक रुमके सामने रुक गया.

'' अरे किसकी रुम है वह ?'' किसीने पुछा.

'' मेरीकी ..'' ऍन्थोनीने धीमे स्वरमे जवाब दिया.

वह काला साया मेरीके दरवाजेके सामने रुका और मेरीके दरवाजेके कीहोलमें अपने पासकी चाबी डालकर घुमाने लगा.

'' देखो उसके पास चाबीभी है '' कोई फुसफुसाया.

'' मास्टर की होगी '' किसीने कहा.

'' या डूप्लीकेट बनाकर ली होगी सालेने ''

'' अब तो वह बिलकुल मुकर नही पाएगा ... हम उसे अब रेड हॅंन्डेड पकड सकते है. '' जॉनने कहा.

जॉन और ऍन्थोनीने पिछे मुडकर उनके दो साथीयोंको इशारा किया.

'' चलो ... यह एकदम सही वक्त है '' ऍन्थोनीने कहा.

वह साया अब ताला खोलनेकी कोशीश करने लगा.

सब लोगोंने एकदम उस काले सायेपर हल्ला बोल दिया. ऍन्थोनीने उस सायेके शरीरपर उसके दोस्तके कंधेपर जो था वह ब्लॅंकेट डालकर लपेट दिया और जॉनने उस सायेको ब्लॅकेटके साथ कसकर पकड लिया.

'' पहले साले को मारो... '' कोई चिल्लाया.

सबलोग मिलकर अब उस चोरकी धुलाई करने लगे.

'' कैसा हाथ आया रे साले ... ''

'' ए साले ... दिखा अब कहां छुपाकर रखा है तुने होस्टेलका सारा चोरी किया हूवा माल''

ब्लॅंकेटके अंदरसे 'आं ऊं' ऐसा दबा हूवा स्वर आने लगा.

अचानक सामनेका दरवाजा खुला और मेरी गडबडाई हूई दरवाजेसे बाहर आगई. शायद उसे उसके रुमके सामने चल रहे धांदलीकी आहट हुई होगी. कमरेमें जल रहे लाईटकी रोशनी अब उस ब्लॅंकेटमें लिपटे चोरके शरीर पर पड गई.

'' क्या चल रहा है यहां '' मेरी घाबराये हूए हालमें हिम्मत बटोरती हूई बोली.

'' हमने चोरको पकडा है '' ऍन्थोनीने कहा.

'' ये तुम्हारा कमरा डूप्लीकेट चाबीसे खोल रहा था. '' जॉनने कहा.

उस चोरको ब्लॅंकेटके साथ पकडे हूए हालमें जॉनको उस चोरके शरीरपर कुछ अजीबसा लगा. धांदलीमें उसने क्या है यह टटोलनेके लिए ब्लॅंकेटके अंदरसे अपने हाथ डाले. जॉनने हाथ अंदर डालनेसे उसकी उस सायेपरकी पकड ढीली हो गई और वह साया ब्लॅंकेटसे बाहर आगया.

'' ओ माय गॉड नॅन्सी! '' मेरी चिल्लाई.

नॅन्सी कोलीन उनकेही क्लासमेंकी एक सुंदर स्टूडंट थी. वह ब्लॅकेटसे बाहर आई और अभीभी असंमजसके स्थितीमें जॉन उसके दोनो उरोज अपने हाथमें कसकर पकडा हूवा था. उसने खुदको छुडा लिया और एक जोर का तमाचा जॉनके कानके निचे जड दिया.

जॉनको क्या बोले कुछ समझमें नही रहा था वह बोला, '' आय ऍम सॉरी .. आय ऍम रियली सॉरी ''

'' वुई आर सॉरी ...'' ऍन्थोनीनेभी कहा.

'' लेकिन इतने रात गए तुम यहां क्या कर रही हो?'' मेरी नॅन्सीके पास जाते हूए बोली.

'' इडीयट ... आय वॉज ट्राईंग टू सरप्राईज यू... तूम्हे जनमदिनकी शुभकामनाएं देने आई थी मै..'' नॅन्सी उसपर चिढते हूए बोली.

'' ओह ... थॅंक यू ... आय मीन सॉरी ... आय मीन आर यू ओके?'' मेरीको क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था.

मेरी नॅन्सीको रुममें ले गई. और जॉन फिरसे माफी मांगनेके लिए रुममे जानेलगा तो दरवाजा उसके मुंहपर धडामसे बंद होगया.


क्रमश:...

Wednesday, April 23, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-7 : रोनाल्ड पार्कर

रोनाल्ड पार्कर, उम्र पच्चीस के आसपास, स्टायलीस्ट, रुबाबदार, अपने बेडरुमें सोया था. वह रह रहकर बेचैनीसे अपनी करवट बदल रहा था. इससे ऐसा लग रहा था की आज उसका दिमाग कुछ जगहपर नही था. थोडी देर करवट बदलकर सोनेकी कोशीश करनेके बादभी उसे निंद नही आ रही थी यह देखकर वह बेडसे उठकर बाहर आ गया, इधर उधर एक नजर दौडाई, और फिरसे बेडपर जाकर बैठ गया. उसने बेडके बगलमें रखा एक मॅगझीन उठाया और उसे खोलकर पढते हूए फिरसे बेडपर लेट गया. वह उस मॅगझीनके पन्ने, जिसपर लडकियोंकी नग्न तस्वीरे छपी थी, पलटने लगा.

सेक्स इज द बेस्ट वे टू डायव्हर्ट यूवर माईंन्ड ...

उसने सोचा. अचानक दुसरे कमरेसे 'धप्प' ऐसा कुछ आवाज उसे सुनाई दिया. वह चौंककर उठ बैठा , मॅगॅझीन बगलमें रख दिया और वैसीही डरे सहमे हालमें वह बेडसे निचे उतर गया.

यह कैसी आवाज .....

पहले तो कभी नही आई थी ऐसी आवाज... .

लेकिन आवाज आनेके बाद मै इतना क्यो चौक गया...

या हो सकता है आज अपनी मनकी स्थीती पहलेसेही अच्छी ना होनेसे ऐसा हूवा होगा...

धीरे धीरे इधर उधर देखते हूए वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेकी कुंडी खोली और धीरेसे थोडासा दरवाजा खोलकर अंदर झांककर देखा.

सब घरमें ढुंढनेके बाद रोनाल्डने हॉलमें प्रवेश किया. हॉलमें घना अंधेरा था. हॉलमेंका लाईट जलाकर उसने डरते हूएही चारो तरफ एक नजर दौडाई.

लेकिन कुछभीतो नही...

सबकुछ वहीका वही रखा हूवा ...

उसने फिरसे लाईट बंद किया और किचनकी तरफ निकल पडा.

किचनमेंभी अंधेरा था. वहांका लाईट जलाकर उसने चारोतरफ एक नजर दौडाई. अब उसका डर काफी कम हो चूका था. .

कहा कुछ तो नही ...

इतना डरनेकी कुछ जरुरत नही थी... .

वह पलटनेके लिए मुडनेही वाला था की किचनमें सिंकमें रखे किसी चिजने उसका ध्यान आकर्षीत किया. उसकी आंखे आश्चर्य और डर की वजहसे बडी हूई थी. एक पलमें इतने ठंडमेंभी उसे पसिना आया था. हाथपैर कांपनए लगे थे. उसके सामने सिंकमें खुनसे सना एक मांसका टूकडा रखा हूवा था. एक पलकाभी समय ना गंवाते हूए वह वहा से भाग खडा हूवा. क्या किया जाए उसे कुछ सुझ नही रहा था. गडबडाये और घबराये हूए हालमें वह सिधा बेडरुममे भाग गया और उसने अंदरसे कुंडी बंद कर ली थी.


क्रमश:...

Thursday, April 17, 2008

Ch-3 : पोस्टमार्टम रिपोर्ट ( hindi Novels - अद्-भूत ) Hindi Sahitya

डिटेक्टीव्ह सॅम अपने पुलिस स्टेशनमें अपने ऑफीसमें बैठा था. उतनेमें एक ऑफीसर वहा आ गया. उसने पोस्टमार्टमके कागजात सॅमके हाथमें थमा दीये. जब सॅम वह कागजात उलट पुलटकर देख रहा था वह ऑफिसर उसके बगलमें बैठकर सॅमको इन्वेस्टीगेशनके बारेमें और पोस्टमार्टमके बारेमें जानकारी देने लगा.

" मौत गला कटनेसे हूई है, और गला जब काटा गया तब स्टीव्हन शायद निंदमें होगा ऐसा इसमें लिखा है लेकिन कातिलने कौनसा हथीयार इस्तेमाल किया गया होगा इसका कोई पता नही चल रहा है. " वह ऑफिसर जानकारी देने लगा. .

" ऍ़मॅझींग ?" डिटेक्टीव सॅम मानो खुदसेही बोला.

'' और वहा मीले बालोंका क्या ?''

'' सर हमने उसकी जांच की ... लेकिन वे बाल आदमीके नही है ''

'' क्या आदमीके नही ? ...''

'' फिर शायद किसी भूतके होंगे... .'' वहां आकर उनके बातचीतमें घुसते हूए एक ऑफिसरने मजाकमें कहा.

भलेही उसने वह बात मजाकमें कही हो लेकिन वे एकदुसरेके मुंहको ताकते हूए दोतीन पल कुछभी नही बोले . कमरेमे एक अजीब अनैसर्गीक सन्नाटा छाया हूवा था.

'' मतलब वह कातिलके कोट के या जर्कीनके हो सकते है...'' सॅमके बगलमें बैठा ऑफिसर बात को संभालते हूए बोला.

'' और उसके मोटीव्हके बारेमें कुछ जानकारी ?''

'' घरकी सारी चिजे तो अपने जगह पर थी... कुछ भी किमती सामान चोरी नही गया है ... और घरमें कहीभी स्टीव्हनके हाथके और उंगलीयोंके निशानके अलावा और किसीकेभी हाथके या उंगलीयोंके निशान नही मिले... '' ऑफिसरने जानकारी दी.

'' अगर कातील भूत हो तो उसे किसी मोटीव्हकी क्या जरुरत?'' फिरसे वहां खडे अफसरने मजाकमें कहा.

फिर दो तीन पल सन्नाटेमें गए.

'' देखो ऑफिसर ... यहा सिरीयस मॅटर चल रहा है... आप कृपा करके ऐसी फालतू बाते मत करो...'' सॅमने उस अफसरको ताकीद दी.

'' मैने स्टीव्हनकी फाईल देखी है ... उसका पहलेका रेकॉर्ड कुछ उतना अच्छा नही... उसके खिलाफ पहलेसेही बहुत सारे गुनाहोके लिए मुकदमें दर्ज है... कुछ गुनाह साबीतभी हूए है और कुछपर अबभी केसेस जारी है... इससे ऐसा लगता है की हम जो केस हॅन्डल कर रहे है वह कोई आपसी दुष्मनी या रंजीशकी हो सकती है....'' सॅम फिरसे असली बात पर आकर बोला.

'' कातिलने अगर किसी गुनाहगारकोही मारा हो तो... '' बगलमें खडे उस ऑफिसरने फिरसे मजाक करनेके लिए अपना मुंह खोला तो सॅमने उसके तरफ एक गुस्सेसे भरा कटाक्ष डाला.

'' नही मतलब अगर वैसा है तो... अच्छाही है ना... एक तरहसे वह अपनाही काम कर रहा है... शायद जो काम हमभी नही कर पाते वह काम वह कर रहा है '' वह मजाक करनेवाला ऑफिसर अपने शब्द तोलमोलकर बोला.

'' देखो ऑफिसर ... हमारा काम लोगोंकी सेवा करना और उनकी हिफाजत करना है...''

'' गुनाहगारोंकीभी ?'' उस ऑफिसरने व्यंगात्मक ढंगसे कडवे शब्दोमें पुछा.

इसपर सॅम कुछ नही बोला. या फिर उसपर बोलनेके लिए उसके पास कुछ लब्ज नही थे. .

क्रमश:...

Wednesday, April 16, 2008

Ch-2 : सबूत ( hindi upanyas - अद्-भूत ) Hindi

सुबह सुबह रास्तेपर लोगोंकी अपने अपने कामपर जानेकी जल्दी चल रही थी. इसलिए रास्तेपर काफी चहलपहल थी. ऐसेमें अचानक एक पुलिसकी गाडी उस भिडसे दौडने लगी. आसपासका माहौल पुलिसके गाडीके सायरनकी वजहसे गंभीर हो गया. रास्तेपर चलरहे लोक तुरंत उस गाडीको रस्ता दे रहे थे. जो पैदल चल रहे थे वे उत्सुकतासे और अपने डरे हूए चेहरेसे उस जाती हूई गाडीकी तरफ मुड मुडकर देख रहे थे. वह गाडी निकल जानेके बाद थोडी देर माहौल तंग रहा और फिर फिरसे पहले जैसा नॉर्मल होगया.


एक पुलिसका फोरेन्सीक टीम मेंबर बेडरुमके खुले दरवाजेके पास कुछ इन्वेस्टीगेशन कर रहा था. वह उसके पास जो बडा जाडा लेन्स था उसमेंसे जमीनपर कुछ मिलता है क्या यह ढुंढ रहा था. उतनेमें एक अनुशासनमे चल रहे जुतोंका 'टाक टाक' ऐसा आवाज आगया. वह इन्व्हेस्टीगेशन करनेवाला पलटकर देखनेके पहलेही उसे कडे स्वरमें पुछा हूवा सवाल सुनाई दिया '' बॉडी किधर है ? ''

'' सर इधर अंदर ..'' वह टीम मेंबर अदबके साथ खडा होता हूवा बोला.

डिटेक्टीव सॅम व्हाईट, उम्र साधारण पैंतिस के आसपास, कडा अनुशासन, लंबा कद, कसा हूवा शरीर , उस टीममेंबरने दिखाए रास्तेसे अंदर गया.

डिटेक्टीव सॅम जब बेडरुममें घुस गया तब उसे स्टीवनका शव बेडपर पडा हूवा मिल गया. उसकी आखें बाहर आयी हूई और गर्दन एक तरफ ढूलक गई हूई थी. बेडपर सबतरफ खुन ही खुन फैला हूवा था. उसका गला काटा हूवा था. बेडकी स्थीतीसे ऐसा लग रहा था की मरनेके पहले स्टीव्हन काफी तडपा होगा. डिटेक्टीव सॅमने बेडरुममें चारो तरफ अपनी नजर दौडाई. फोरेन्सीक टीम बेडरुममेंभी तफ्तीश कर रही थी. उनमेंसे एक कोनेमें ब्रशसे कुछ साफ करने जैसा कुछ कर रहा था तो दुसरा कमरेंमे अपने कॅमेरेसे तस्वीरें लेनेमें व्यस्त था.

एक फोरेन्सीक टीम मेंबरने डीटेक्टीव सॅमको जानकारी दी -

" सर मरनेवालेका नाम स्टीव्हन स्मीथ'

' फिंगरप्रींटस वैगेरे कुछ मिला क्या?"

' नही कमसे कम अबतक तो कुछ नही मिला '

डिटेक्टीव सॅमने फोटोग्राफरकी तरफ देखते हूए कहा, '' कुछ छुटना नही चाहिए इसका खयाल रखो''

'' यस सर '' फोटोग्राफर अदबके साथ बोला.

अचानक सॅमका ध्यान एक अजीब अप्रत्याशीत बात की तरफ आकर्षीत हूवा .

वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेका लॅच और आसपासकी जगह टूटी हूई थी.

'' इसका मतलब खुनी शायद यह दरवाजा तोडकर अंदर आया है '' सॅमने कहा.

जेफ, लगभग पैतीसके आसपास, छोटा कद, मोटा, उसका टीम मेंबर आगे आया, '' नही सर, असलमें यह दरवाजा मैने तोडा... क्योंकी हम जब यहां पहूंचे तब दरवाजा अंदरसे बंद था. ''

'' तुमने तोडा ?'' सॅमने आश्चर्यसे कहा.

'' यस सर''

'' क्या फिरसे अपने पहलेके धंदे शुरु तो नही किये ?'' सॅमने मजाकमें लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना दिखाते हूए कहा.

'' हां सर ... मतलब नही सर''

सॅमने पलटकर एकबार फिरसे कमरेमें अपनी पैनी नजर दौडाई, खासकर खिडकीयोंकी तरफ देखा. बेडरुमको एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी. वह बंद रहना लाजमी था क्योंकी रुम एसी थी.

'' अगर दरवाजा अंदरसे बंद था ... और खिडकीभी अंदरसे बंद थी ... तो फिर कातिल कमरेमें कैसे आया... ''

सब लोग आश्चर्यसे एकदुसरेकी तरफ देखने लगे.

'' और सबसे महत्वपुर्ण बात की वह अंदर आनेके बाद बाहर कैसे गया?'' जेफने कहा.

डिटेक्टीव्हने उसकी तरफ सिर्फ घुरकर देखा.

अचानक सबका खयाल एक इन्वेस्टीगेटींग ऑफिसरने अपनी तरफ खिंचा. उसको बेडके आसपास कुछ बालोंके टूकडे मिले थे.

'' बाल? ... उनको ठिकसे सिल कर आगेके इन्व्हेस्टीगेशनके लिए लॅबमें भेजो ' सॅमने आदेश दिया.

क्रमश:...

Tuesday, April 15, 2008

Ch-1 : चिख ( hindi novel - अद्-भूत ) Hindi

घना अंधेरा और उपरसे उसमें जोरोसे बरसती बारीश. सारा आसमंत झिंगुरोंकी 'किर्र' आवाजसे गुंज रहा था. एक बंगलेके बगलमें खडे एक विशालकाय वृक्षपर एक बारीशसे भिगा हूवा उल्लू बैठा हूवा था. उसकी इधर उधर दौडती नजर आखीर सामने बंगलेके एक खिडकीपर जाकर रुकी. वह बंगलेकी ऐकलौती ऐसी खिडकी थी की जिससे अंदरसे बाहर रोशनी आ रही थी. घरमें उस खिडकीसे दिख रहा वह जलता हुवा लाईट छोडकर सारे लाईट्स बंद थे. अचानक वहा उस खिडकीके पास आसरेके लिए बैठा कबुतरोंका एक झुंड वहांसे फडफडाता हूवा उड गया. शायद वहां उन कबुतरोंको कोई अदृष्य शक्तीका अस्तीत्व महसुस हूवा होगा. खिडकीके कांच सफेद रंगके होनेसे बाहरसे अंदरका कुछ नही दिख रहा था. सचमुछ वहा कोई अदृष्य शक्ती पहूंच गई थी ? और अगर पहूंची थी तो क्या उसे अंदर जाना था? लेकिन खिडकी तो अंदर से बंद थी.


बेडरुममें बेडपर कोई सोया हूवा था. उस बेडवर सोए सायेने अपनी करवट बदली और उसका चेहरा उस तरफ हो गया. इसलिए वह कौन था यह पहचानना मुश्कील था. बेडके बगलमें एक ऐनक रखी हूई थी. शायद जो भी कोई सोया हूवा था उसने सोनेसे पहले अपनी ऐनक निकालकर बगलमें रख दी थी. बेडरुममे सब तरफ दारुकी बोतलें, दारुके ग्लास, न्यूज पेपर्स, मासिक पत्रिकाएं इत्यादी सामान इधर उधर फैला हूवा था. बेडरुमका दरवाजा अंदरसे बंद था और उसे अंदरसे कुंडी लगाई हूई थी. बेडरुमको सिर्फ एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी - क्योंकी वह एक एसी रुम थी. जो साया बेडपर सोया था उसने फिरसे एकबार अपनी करवट बदली और अब उस सोए हुए साएका चेहरा दिखने लगा. स्टीव्हन स्मीथ, उम्र लगभग पच्चीस छब्बीस, पतला शरीर, चेहरेपर कहीं कहीं छोटे छोटे दाढीके बाल उगे हूए, आंखोके आसपास ऐनककी वजहसे बने काले गोल गोल धब्बे. वह कुछतो था जो धीरे धीर स्टीव्हनके पास जाने लगा. अचानक निंदमेंभी स्टीव्हनको आहट हूई और वह हडबडाकर जग गया. उसके सामने जो भी था वह उसपर हमला करनेके लिए तैयार होनेसे उसके चेहरेपर डर झलक रहा था, पुरा बदन पसिना पसिना हुवा था. वह अपना बचाव करनेके लिए उठने लगा. लेकिन वह कुछ करे इसके पहलेही उसने उसपर, अपने शिकारपर हमला बोल दिया था. पुरे आसमंतमें स्टीव्हनकी एक बडी, दर्दनाक, असहाय चिख गुंजी. और फिर सब तरफ फिरसे सन्नाटा छा गया ... एकदम पहले जैसा...


क्रमश:...

Thursday, April 10, 2008

Hindi Novels - अगला उपन्यास अद-भूत (Horror, Suspense, thiller) अब इस ब्लॉगपर शुरू होगा.

यह उपन्यास मेरे अंग्रेजी स्क्रिनप्ले 'लॅच्ड' (Horror, Suspense, thiller) पर आधारीत है. यह स्किनप्ले फिल्म रायटर्स असोसिएशन, (FWA) यहां पंजीकृत किया गया है। यह उपन्यास मराठी मे पहलेही शुरू किया जा चुका है ।

Tuesday, April 1, 2008

Ch-64 : डॉ. कयूम खान (शून्य-उपन्यास) Hindi

कमांड2की यानीकी विनयकी बॉसको ढुंढनेके लिए इस एरियामें यह हमेशाकी चक्कर थी. वह लगभग रोजही इस एरियामें आकर बॉसको ढुंढनेके लिए घुमता रहता था. उसे खुदको बॉस ना पहचाने इसकी वही पुरी एतीयात बरतता था. न जाने कितनी बार, कमसे कम सौके उपर, वह इस एरीयामें बॉसको ढुंढनेके लिए आया होगा. लेकिन उसने कोशीश जारी रखी थी. निरंतर प्रयास करते रहना यह एक उसका गुण ही था. आज दिनभर घुम घुमकर वह थका हूवा था. शाम हो चुकी थी. शहरका मौहोल अब काफी ठंडा पडा हूवा था. हालहीमें उसे बॉसका इंटरनेटपर एक मेसेज आया था. अब यह खुनी श्रुंखला दुसरे एक शहरमेंभी शुरु करनी थी. बॉस नही चाहता था की मौहोल ठंडा पडे. वैसे दुसरे शहरमें खुनी श्रुंखला शुरु करनेके लिए और वक्त था. लेकिन विनयको दुसरे खुनी श्रुंखलामें बिलकुल रुची नही थी. उसकí