(Next post will be publishe on or before 18 Dec 07)बी23 की तरफ जाते हूए जॉनको खुदका ही आश्चर्य लगने लगा था.
यह कैसी बेचैनी?...
ऐसा तो पहले कभी नही हूवा था...
अबतक न जाने कितनी केसेस उसके हाथके निचेसे गई थी... लेकिन एक स्त्री के बारेमें ऐसी बेचैनी...
और कुछ अनहोनी तो नही हूई होगी? ऐसी चिंता और इतनी चिंता उसे पहले कभी नही हूई थी...
उसने बी23 का दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खुलाही था. दरवाजा धकेलकर वह अंदर जाने लगा. अंदर बेडपर अँजेनी लेटी हूई थी. वह सोचमें डूबी खिडकीसे बाहर जैसे शुन्य भावसे देख रही थी. जॉन की आहट आतेही उसने दरवाजे की तरफ देखा. जॉनको देखतेही वह मुस्कुरा दी. लेकिन उसके चेहरेसे दुख का साया अभीभी हटा नही दिख रहा था. शायद अभीभी वह गहरे सदमेसे उभरी नही थी. वह उसके पास जाकर खडा हूवा. उसने उसे बगलमे रखे स्टूलपर बैठने का इशारा किया. स्टूलपर बैठनेके बाद फुलोंका गुलदस्ता उसके बाजूमे रखते हूवे जॉनने पुछा - '' कैसी हो?''
वह फिरसे उसकी तरफ देखकर मुस्कुराई. ऐसे लग रहा था जैसे मुस्कुरानेके लिए उसे बडा कष्ट हो रहा हो.
'' मुसिबतोंका पहाड जिसपर गिर पडता है वही उसकी मार समझ सकता है... आप किस पिडादायक मनस्थीतीसे गुजर रही होगी मै समझ सकता हू...'' जॉन बोल रहा था.
अँजेनीके आँखोसे आसु बहने लगे. जॉन बोलते बोलते रुक गया. उसने उसे धिरज देता हूवा अपना हाथ उसके कंधेपर रख दिया. अब तो उसने जो आँसूओंका बांध रोकने की कोशीश की थी वह टूट गया और वह जॉनसे लिपटकर फुट फुटकर रोने लगी. जॉन उसे सहलाते हूए ढाढस बंधाने का प्रयास कर रहा था. उसे कैसे समझाया जाए कुछ समझ नही आ रहा था.
अब वह थोडी नॉर्मल हो गई थी. जॉनने अब जान लिया की अँजेनीको खुनके बारेमें पुछनेका यही सही वक्त है.
'' किसने खुन किया होगा? ... आपको कोई संदेह? ... या अंदाजा? '" जॉनने धीरेसे पुछा.
अँजेनीने इन्कारमें अपना सर हिलाया और फिर खिडकीके बाहर देखते हूए फिरसे सोचमें डूब गई.
जॉनने उसकी जेबसे एक फोटो निकाला.
'' यह देखो... यहाँ दिवारपर ... खुनसे गोल निकाला गया है ... यह क्या हो सकता है? ...कुछ अंदाजा? ... या फिर किसने निकाला होगा... इसके बारे मे कुछ बता सकती हो?" जॉनने पुछा.
अँजेनीने फोटो गौरसे देखा. दिवारपर लिखे हूए गोल के निचे बेडपर पडे हूए उसके पतीके मृत शरीरको देखकर फिरसे उसका गला भर आया... जॉनने फोटो फिरसे जेबमें रखा.
'" नही मतलब इस गोलका कुछ अर्थ समझमें आता है क्या? ... वह एबीसीडीका 'ओ' भी हो सकता है ... या फिर शून्यभी हो सकता है ..." जॉनने कहा.
'' मै समझ सकता हूँ की यह आपके पती के खुन के बारे में पुछने का उचीत वक्त नही ... लेकिन जानकारी जितनी जादा और जितने जल्दी मिल सकती है उतने जल्दी हम खुनीको पकड सकते है...'' जॉन ने कहा.
अँजेनी अब अपने इरादे पक्के कर संभलकर सिधे बैठ गई '' पुछो आपको जो पुछना है .."'
जॉननेभी जान लिया की पुरी जानकारी निकालनेका यही उचीत समय है.
"' सानी क्या करता था? ... मतलब बाय प्रोफेशन'' जॉनने पहला सवाल पुछा.
'' वह इंपोर्ट एक्सपोर्टका बिझीनेस करता था ... मेनली गारमेंटस् ... इंडीयन कॉन्टीनेंटमें उसका बिझीनेस फैला हूवा था '' अँजेनी बोल रही थी.
'' कोई प्रोफेशनल रायव्हल?" जॉनने पुछा.
'' नही... उसका डोमेन एकदम अलग होनेसे उसे कोई प्रोफेशनल रायव्हल्स होनेका सवालही पैदा नही होता. '" अँजेनी बोल रही थी.
"' अच्छा आप क्या करती है ?" जॉनने अगला सवाल पुछा.
'' मै एक फॅशन डिझायनर हूँ" अँजेनीने कहा.
बहुत देरतक उनके सवाल जवाब चलते रहे. आखीर स्टूलसे उठते हूए जॉनने कहा '' ठीक है ... अबके लिए इतनी जानकारी काफी है... अब आप थकी भी होगी... मतलब दिमागसे... आराम करो ... फिरसे कुछ लगा तो हम आपसे पुछेंगेही ...''
जॉन जाने लगा.
अँजेनी उसे दरवाजे तक छोडनेके लिए उठने लगी तो जॉन ने कहा '' आप पडे रहिए .. आपको आराम की सख्त जरुरत है'"
फिरभी वह उसे दरवाजेतक छोडनेके लिए उठ गई. जॉन दरवाजे तक पहूचता नही की उसे पिछेसे उसकी आवाज आई -
" थँक यू ..."
जॉन एकदमसे रुक गया और उसने मुडकर पुछा '' किसलिए?''
'' मेरी जान बचानेके लिए ... डॉक्टरने मुझे सब बताया है... अगर आप समयपर मुझे कृत्रिम सांसे नही देते तो शायद मै अब जिवीत नही होती ...'' अँजेनी उसकी तरफ कृतज्ञता भरी निगाहोंसे देखते हूए बोली.
'' उसमें क्या है... मैने मेरा कर्तव्य किया बस '" जॉनने कहा.
'' वह आपका बडप्पन है'' अँजेनी दरवाजेतक पहूचते हूए बोली.
जॉन अब वहा से निकल गया था. लंबे लंबे कदम डालते हूवे जल्दी जल्दी वह चलने लगा. शायद अपनी भावनाएँ छिपाने के लिए. थोडे ही समयमे वह कॉरीडोर के सिरेतक जा पहूंचा. दाई तरफ मुडनेसे पहले उसने एक बार पिछे मुडकर देखा. वह अभीभी उसके तरफही देख रही थी.
जॉन पॅसेजमेंसे लिफ्टकी तरफ जा रहा था. अँजेनीको छोडकर जाते हूए उसे अपना दिल भारी भारी लग रहा था. अचानक जॉनका ध्यान लिफ्टकी तरफ गया. लिफ्ट अभीभी वहासे दूरही थी. लिफ्टके उस तरफवाले हिस्सेसे एक युवक आया. उसने काला टी शर्ट पहना हूवा था और उस टी शर्टपर 'झीरो' निकाला हुवा था, जैसा उसने पहलेभी सानीके खुनके दिन देखा था. जॉन एकदम हरकतमें आया और लिफ्टकी तरफ दौडने लगा.
उसने आवाज दिया, "ए... हॅलो "
लेकिन उसका आवाज पहूचनेसे पहलेही वह युवक लिफ्टमें घुस गया था. जॉन औरभी जोरसे दौडने लगा. लिफ्ट बंद होगई थी... लेकिन अभीभी निचे या उपर नही गई थी. जॉन दौडते हूए लिफ्टके पास गया. उसने लिफ्टका बटन दबाया. लेकिन व्यर्थ. लिफ्ट निचे जाने लगी थी. जॉनको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. वह युवक उस दिन देखे युवकके हूलिए जैसा नही था. लेकिन पता नही क्यों जॉनको लग रहा था की जरुर सानीके खुनका रहस्य उस 'झीरो' में छिपा हूवा है. जॉन बगलकी सिढीयोंसे तेजीसे निचे उतरने लगा. बिच बिचेमें उसका लिफ्टकी तरफभी ध्यान था. लेकिन मानो लिफ्ट बिचमें कही भी रुकनेके लिए तैयार नही थी. शायद वह एकदम ग्राऊंड फ्लोअरकोही रुकनेवाली थी. जब जॉनने देखा की लिफ्ट उससे दो माले आगे निकल गई तो वह और जोरसे सिढीयाँ उतरने लगा.
आखिर सासें फुली हूई हालतमे वह ग्राऊंड फ्लोअरको पहूँच गया. उसने लिफ्टकी तरफ देखा. लिफ्टमेंके लोग कबके बाहर आ चूके थे और लिफ्टका डिस्प्ले लिफ्ट उपरकी दिशामें जा रही है ऐसा दर्शा रहा था. जॉन दौडते हूए हॉस्पीटलके बाहर लपका. उसने सब तरफ अपनी पैनी नजरें दौडाई. पार्कीगमेभी जाकर देखा. हॉस्पीटलके बाहर रोडपर जाकर देखा. लेकिन वह काले रंगके टी शर्टवाला युवक कही भी दिखाई नही दे रहा था.
(to be contd..)
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Thursday, December 13, 2007
Ch-5 : दिल विल... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
3:28 PM
0
comments
Labels: hindi, hindi bhasha, hindi blog, hindi greeting, hindi katha, hindi language, hindi news, hindi newspaper, hindi novel, hindi poem, hindi song, hindi songs, hindi upanyas
Monday, December 10, 2007
Ch-4 : वह कहाँ गई? (शून्य-उपन्यास)
हॉस्पिटल के सामने एक सफेद कार आकर खडी हूई, उसमेंसे जॉन उतर गया. आज वह उसके हमेशाके पुलीस युनीफार्ममें नही था. और उसका मुडभी हमेशा का नही लग रहा था. उसके हाथमें सफेद फुलोंका एक गुलदस्ता था. सिधे लिफ्टके पास जाकर उसने लिफ्ट का बटन दबाया. लिफ्टमें प्रवेश कर उसने फ्लोअर नं. 12 का बटन दबाया. लिफ्ट बंद होकर उपरकी तरफ दौडने लगी. लिफ्टके रफ्तारके साथ उसके दिमाग में चल रहे विचारोंनेभी रफ्तार पकड ली....
दिवारपर खुनसे गोल क्यों निकाला गया होगा?....
फोरेन्सीक जांचमें खुन सानीकाही पाया गया था.....
जरुर जिसने भी वह गोल निकाला वह कुछ कहने का प्रयास कर रहा होगा...
खुन किसने किया इसका अंदाजा शायद अँजेनीको होगा...
लिफ्ट रुक गई और लिफ्टकी बेल बजी. बेलने जॉनके विचारोंके श्रुंखलाको तोडा. सामने इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्लेमें 12 यह नंबर आया था. लिफ्टका दरवाजा खुला और जॉन लिफ्टसे बाहर निकल गया. अपने लंबे- लंबे कदम से चलते हूए जॉन सिधा 'बी' वार्डमें घुस गया.
जॉनने एकबार अपने हाथमें पकडे फुलोंके गुलदस्तेकी तरफ देखा और उसने 'बी2' रूमका दरवाजा धीरेसे खटखटाया. थोडी देर तक राह देखी, लेकिन अंदर कोईभी आहट नही थी. उसने दरवाजा फिरसे खटखटाया - इस बार जोरसे. लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नही थी. यह देखकर उसने अपनी उलझन भरी नजर इधर उधर दौडाई. उसे अब चिंता होने लगी थी. वह दरवाजा जोर जोरसे ठोकने लगा.
क्या हूवा होगा?...
यही तो थी अँजेनी ...
आज उसे डिस्चार्ज तो नही करने वाले थे...
फिर .. वह कहाँ गई?
कुछ अनहोनी तो नही हूई होगी?...
उसका दिल धडकने लगा. उसने फिरसे आजूबाजू देखा. वार्डके एक सिरेको एक काऊंटर था. काऊंटरपर जानकारी मील सकती है... ऐसा सोचकर वह तेजीसे काऊंटरकी तरफ जाने लगा.
"एक्सक्यूज मी" उसने काऊंटरपर नर्सका ध्यान अपनी तरफ आकर्षीत करनेका प्रयास किया.
नर्सके लिए यह रोजका ही होगा, क्योंकी जॉनकी तरफ ध्यान न देते हूए वह अपने काममें व्यस्त रही.
'' 'बी2' को एक पेशंट थी... अँजेनी कार्टर ... कहा गई वह? ... उसे डिस्चार्ज तो नही दिया गया? ... लेकिन उसका डिस्चार्ज तो आज नही था ... फिर वह कहाँ गई? ... वहाँ तो कोई नही...'' जॉन सवालों पे सवाल पुछे जा रहा था.
'' एक मिनट ... एक मिनट ... कौनसी रूम कहां आपने?'" नर्सने उसे रोकते हुए कहा.
"बी2" जॉनने एक गहरी सास लेकर कहां.
नर्सने एक फाईल निकाली. फाईल खोलकर 'बी2' ... बी2' ऐसा बोलते हूए उसने फाईलके इंडेक्सके उपर अपनी लचीली उंगली फेरी. फिर इंडेक्समें लिखा हूवा पेज नंबर निकालने के लिए उसने फाईलके कुछ पन्ने अपने एक खास अंदाजमें पलटे.
"'बी2' ... मिसेस अँजेनी कार्टर..." नर्स तसल्ली करने के लिए बोली.
" हां ...अँजेनी कार्टर" जॉनने कंन्फर्म किया.
जॉन उत्सुकतासे उसकी तरफ देखने लगा. लेकिन वह एकदम शांत थी. जैसे वह जॉनके सब्रका इंतहान ले रही हो. जॉनको उसका गुस्सा भी आ रहा था.
'' सॉरी ... मिस्टर ..?" नर्सने जॉनका नाम जानने के लिए उपर देखा.
जॉन का दिल और जोर जोरसे धडकने लगा.
"जॉन" जॉनने खुदको संभालते हूए अपना नाम बताया.
" सॉरी ... मिस्टर जॉन ... सॉरी फॉर इनकन्व्हीनियंस ... उसे दुसरी रूममें ... बी23 में शीफ्ट किया गया है...." नर्स बोल रही थी.
जॉनके जान मे जान आई थी.
"ऍक्यूअली ... बी2 बहुत कंजेस्टेड हो रहा था ... इसलिए उनकेही कहने पर...." नर्स अपनी सफाई दे रही थी.
लेकिन जॉनको कहा उसका सुनने की फुरसत थी? नर्स अपना बोलना पुरा करनेके पहलेही जॉन वहांसे तेजीसे निकल गया ... बी23 की तरफ.
...contd..
Posted by
Sunil Doiphode
at
4:39 PM
0
comments
Labels: hindi, hindi bhasha, hindi blog, hindi books, hindi font, hindi katha, hindi language, hindi literature, hindi novel, hindi sahitya, hindi software, hindi story, hindi subscribe, rastrabhasha




