" मेरे हिंदूस्थानी भाईयों और बहनो..."
बिचमें एक लांबा पॉज था.
बोर्डरूमके सब लोगोंने एक दुसरेकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.
ऑडीओका आवाज फिरसे बोर्डरूममें घुमने लगा. .
" किसी ना किसी तरह कोई हमपर आजतक राज करते आया है. हमे जैसे गुलामी की आदत सी हो गई है. इससे पहले 150 साल तक हमपर ब्रिटीश लोगोंने राज किया ... और बुरी तरह... किसी जानवरो की तरह हमसे बर्ताव किया. यह लोगोंका हमपर राज करने का सिलसिला अभीभी जारी है. अभीभी हमपर कोई राज कर रहा है. यह सुनकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा. लेकिन यह सच है और यह आश्चर्य की नही शर्म की बात है. हमारे गुजरे हूए कल पर थोडी नजर डाली जाएँ तो यह जो आजका प्रगत विज्ञान है. इसकी नींव हमने रची हुई है. लेकिन उसे कोई मानने को तैयार नही. वह विज्ञान इन प्रगत देशोंने या तो हमसे चुराया है या अपने ताकद की जोर पर जबरदस्ती हमसे हथीया लिया है. उदाहरण के तौरपर है शून्य. शून्य का शोध हमने लगाया है. लेकिन यह कोई मानने के लिए तैयार नही. पायथॅगोरस थेरम उसका शोध हमारे पूर्वज वैज्ञानिक आर्यभट्टने लगाया. लेकिन आज वह किसी और के नाम से प्रचलित है ज्या (sine) का शोधभी आर्यभटने लगाया है. ये होगए गणिती क्षेत्र के शोध और संशोधन. स्वास्थविज्ञानमें विविध जडीबूटीयाँ, उनके औषधीय उपयोग. इन सबको अनदेखा करते हूए अमेरिकाका हल्दीका पेटेंट अपने झोलीमें डालनेका प्रयास किसीको नागवार गुजरा नही क्योंकी वह एक शक्तीशाली देश है. अपने शक्तीके जोर पर वे कुछ भी करने की क्षमता रखते है. अपने शक्ती के जोर पर वे किसी झूठ को सच का सुनहरी मुलामा देकर मिडीया का सहारा लेकर सारे विश्वपर थोपते है. ऎैसे बहुत सारे शोध है जो हमने लगाये हूए है लेकिन वह आज कोई दुसरे लोगोंने चुराकर अपने नाम पर कर लिए है या फिर वे अपने ताकत के जोरो पर उसको वे अपना संशोधन या शोध बताते है. इससे एक बात साबीत होती है की हम दिमागी तौर पर ना कभी कीसी देशसे कम थे ना है. हाँ आज भी नही है. आज इस वक्त अमेरिका, युरोप मे हमारा ब्रेन ड्रेन हो चूका है. यह बात यह साबीत करती है की आज भी दिमागी तौर पर हम किसीसे कम नही है. हमारे पास दिमाग होते हूए भी यह सब क्यो हो रहा है? उसके लिये हमारी सोई हूई राष्ट्रीयता और इन प्रगत देशोंकी हमारे प्रति नीतीयाँ और उनका हमारे अंदरूनी मामलेमें हस्तक्षेप है.
उन लोगोंका हमारे प्रती ध्यान खिंचकर उन्हे झिंजोरने के लिए और अपने हिंदू लोगोंका सोया हूवा धर्माभीमान , अभिमान और राष्ट्रीयता जगाने के लिए हमने यह 'झीरो मिस्ट्री' हत्या श्रृंखला अभियान चलाया है. क्योंकी सोये को जगाया जा सकता है लेकीन सोनेका ढोंग करने वाले को जगाने के लिए किसी बडे धमाको की जरूरत होती है. हाँ इस वक्त हमें बडे धमाके की जरूरत है. क्योंकी हमेशा हमारे अहिंसा और शांतीप्रीय भाव को लोगोंने गलत तरीके से लिया है और उसकी वजहसे वे हमे कमजोर समझते है. यह तो सिर्फ पहला कदम है. हमें अपना खोया हूवा वैभव पाने के लिए और बहुत कुछ करना बाकी है. मुझे आशाही नही बल्की विश्वास है की आप सब हिंदू लोग इस अभियान मे हमारा तहे दिलसे साथ देंगे. हिंदूज आर मच मोर कॅपॅबल बी रेडी फॉर रूलींग द र्वल्ड ...
... जय हिंद! "
मेसेज हिंदीमें था. बोर्डरूमें किसीकोभी हिंन्दी नही आती थी. लेकिन बोर्डरुममें बैठे एक भारतीय मुलके एक अधिकारीके वजहसे बाकी लोगोंको समझनेमं दिक्कत नही हूई. मेसेज सुनते वक्त बिचबिचमें वह अपने साथीयोंको इंग्लीशमें ट्रान्सलेट कर बता रहा था.
बोर्डरूममें एक अजीब सन्नाटा फैला हूवा था.
" माय गॉड" बॉसके मुंहसे निकल गया.
" इट इज अ टेररीझम?" सॅमने पुछा.
" नो. नॉट सिप्ली टेररीझम इट्स हिंदू टेररीझम... अर्लीयर वुई वेअर व्हीक्टीम ऑफ मुस्लीम टेररीझम. नाऊ इटस् हिंदू टेररीझम आल्सो इन द लिस्ट" बॉसने कहा.
" सर मुझे लगता है हमें किसीभी हालमें अगला कत्ल होनेसे बचाना चाहिए. " जॉनने कहा.
" मि. जॉन अब यह मामला सिर्फ एक सिरीयल मर्डर केस नही रहा है.... नाऊ इट हॅज बिकम अ फेनॉमेनॉन" बॉसने कहा.
" लेकिन अगर हम यह अगला कत्ल होनेसे अगर रोक सके ... और कातिलको पकड सके ... तो इसपर जरुर कुछ नियंत्रण आयेगा " जॉनने अपनी राय व्यक्त की.
" अब क्या क्या टाल सकते है हम... अब पहलेसेही सारी अमरिकामें भारतीय अमेरिकन और अमेरिकन लोगोंमें दंगे भडक चूके है. और कातिल एक ना होकर एक टेररीस्ट संघटना है. हिंदू टेररिस्ट संघटना "
' लेकिन यह दंगे इतने जल्दी एकदमसे कैसे शुरु हूए? '' सॅमने आश्चर्य व्यक्त करते हूए कहा. .
" 9/11 के दरम्यान लोगोंका गुस्सा एक सीमातक यानी की उनकी थ्रेशोल्ड लेव्हलतक पहूंच गया था. ... और अब यह और एक टेररीझम सुनकर उनका गुस्सा आऊट र्बस्ट होगया है.." बॉसने मानो लोगोंके आचरण का विश्लेशण किया. वैसे मॉब बिहेवीयर और मॉब टेन्डंसीके बारेमे बॉसका अच्छा खासा अध्ययन था. फिरसे पियून अंदर आया.
" साहब, मेयरका फोन" पीयूनने बॉसके कानकेपास झूककर अदबसे कहा.
बॉस उठ खडा हूवा.
" चला उठो .. अब हमें यह दंगा फसाद काबूमें लाना पडेगा."
बॉस बाहर जाने लगा. जॉन छोडकर सब लोग उठकर बॉसके पिछे पिछे जाने लगे. जॉन नाउम्मीद होकर सब जानेवालोंको देखता रहा.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Thursday, March 6, 2008
Ch-50B: ऑडीओ (शून्य-उपन्यास)
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Sunil Doiphode
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Wednesday, March 5, 2008
Ch-50A: ऑडीओ (शून्य-उपन्यास)
जॉन, सॅम और बाकी पुलिसके अधिकारी पांचवे कत्लके वक्त कातिलको कैसा पकडना है इस बारेमे चर्चा करने लगे. जॉनने पहले सबको बोलनेका चान्स दिया और उनका कहना ध्यान देकर सुना. और सबके चर्चाका एक मध्य निकालकर कातिलको पकडनेका एक तरीका तय किया. चर्चामें उसने सबको एक सरीका अवसर और मौका दिया था. यह चर्चाका तरीका सबके लिये नया ही था. क्योंकी बॉसका तरीका अलगही रहता था. उसका डिक्टेटरशीपमें जादा विश्वास था. यह डेमोक्रॅटीक तरीका सबको पसंद आया था. इसमें सबका इन्वॉल्वमेंट होनेसे सबको प्रोत्साहन मिलता था. लेकिन उनको चिंता थी की अगर अब बॉस वहा आगया तो सब गडबड कर देगा. और वैसाही हूवा. उनकी चर्चा आधेमेंही होगी तब अचानक वहां तेजीसे बॉस आया. उसके चेहरेपर पसिना आया हूवा था. उसकी वह दशा देखकर सब लोग शांत होगए. जरुर कुछ अघटीत घटा था. उसके पिछे पिछे एक पियून एक लॅपटॉप लेकर आया.
" एक गडबड हो गई है " आतेही बॉसने कहा.
सब लोग स्तब्ध होकर बॉस क्या कहता है यह सुनने लगे.
" यह कातिल कोई अकेला आदमी ना होकर कोई संघटना होगी ... कोई बडी संघटना .. शायद टेररिस्ट संघटना"
" टेररिस्ट संघटना?" सबके मुंहसे आश्चर्योद्गार निकले.
क्योंकी वहां बैठे सबके लिए यह नई जानकारी थी. किसीनेभी इस केसको उस तरहसे नही सोचा था.
" प्रेसका फोन था.. सब तरफ गडबडी मची हूई है... उन लोगोंने इंटरनेटपर एक ऑडीओ रिलीज किया है. " बॉसने एक सांसमे बताया.
फिर बॉसने डॅनको लॅपटॉप शुरू करनेका आदेश दिया. डॅन लॅपटॉप शुरू करने लगा और बॉस आगे बोलने लगा,
" मैने अभीतक ऑडीओ सुना नही है. मुझे लगता है वह हमें सुनना चाहिए" बॉस लॅपटॉपके सामने बैठते हूए बोला.
तबतक डॅनने लॅपटॉप शुरु कर गुगल सर्च इंजीन ओपन किया. डॅनको बॉसके बोलनेसे पता चला था की पहले वह ऑडीओ फाईल इंटरनेटपर ढूंढनी पडेगी.
डॅनने सर्च स्ट्रींग टाईप करनेके पहले 'क्या सर्च स्ट्रींग दूं ' इस आविर्भावसे बॉसकी तरफ देखा.
वैसे बॉसका और डॅनका टयूनिंग अच्छा था. किसके मनमें क्या चल रहा है यह उनको एकदूसरेके साथ हमेशा रहनेसे पहलेही पता चलता था.
" झीरो मिस्ट्री" बॉसने कहा.
डॅन ने ' झीरो मिस्ट्री' सर्च स्ट्रींग देकर सर्च बटन क्लीक किया. एक पलमें सौसे उपर निले कलरकी लिंक्स कॉम्पूटरके ब्राउजरपर दिखने लगी.
सब लोग अपना जितना हो सकता है उतना सर अंदर घुसाकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगे.
" वह चौथी लिंक " बॉसने कहा.
सॅमने वह चौथी लिंक क्लीक की. एक साईट ओपन हो गई. उसपर एक ऑडीओ फाईलकी लिंक थी. प्ले और डाऊनलोड ऐसे दो ऑप्शन्स थे.
"प्ले इट डायरेक्टली" बॉस ने आदेश दिया.
सॅमने प्ले बटनपर क्लीक किया. पहले ऑडीओपर जैसे किसी चक्रवातके पहले सन्नाटा होता है वैसा सन्नाटा था. फिर एक धीरगंभीर आवाज घुमाने लगा. सब लोग एकदम चूप होकर सुनने लगे -
क्रमश:..
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Wednesday, December 26, 2007
Ch-7 : दिल है कि ... (शून्य-उपन्यास)
(Next post ch-8 will be published on or before 30 Dec 07)
जॉन कारमें जा रहा था. हॉस्पिटलसे डॉक्टरने उसे फोन कर बताया था की अँजेनीको डिस्चार्ज दिया गया है. डॉक्टरके अनुसार मेडीकली वह पुरी तरहसे संवर गई थी. सिर्फ मेंटली और इमोशनली संवरनेमें उसे थोडा वक्त लग सकता था. सानीके पोस्टमार्टमके रिपोर्टभी आए थे. जॉनको उस सिलसिलेमें अँजेनीसे थोडी बातचीत करनी थी. बातचीत वह फोनपरभी कर सकता था. लेकिन दिलको कितनाभी समझाने की कोशीश करने पर भी दिल है की मानता नही था. उसे मिलनेकी उसकी इच्छा जितना रोकने की कोशीश करो उतनी तिव्र हो चली थी. उसने उसे मुंहसे कृत्रिम सांसे दी तब उसे उसका कुछ विषेश नही लगा था. लेकिन अब उसे उसके होठोंका वह मुलायम स्पर्श रह रहकर याद आ रहा था. उसने कर्र ऽऽ.. गाडीका. ब्रेक लगाया. गाडीको मोड लिया और निकल गया - अँजेनीके घरकी तरफ.
जॉनकी कार अँजेनीके अपार्टमेंटके निचे आकर रुकी. उसने गाडी पार्किंगकी तरफ मोड ली. पार्किंगमे कुछ समय वह वैसाही गाडीमें बैठा रहा. आखीर अपने मन से चल रहे कश्मकशसे उभरकर वह गाडीसे उतर गया. लंबे लंबे कदमसे वह लिफ्टकी तरफ गया. लिफ्ट खुलीही थी, उसमें वह घुस गया. लिफ्ट बंद होकर उपरकी तरफ दौडने लगी.
लिफ्ट रुक गई. लिफ्टमें डिस्प्लेपर 10 आंकडा आया था. लिफ्टका दरवाजा खुला और जॉन बाहर निकल गया. अँजेनीका फ्लॅटका दरवाजा अंदर से बंद था. वह दरवाजेके पास गया. फिर वहा थोडी देर अपने दरवाजा खटखटाऊ की नही यह सोचकर चहलकदमी करने लगा. वह डोअर दबानेही वाला था की अचानक सामनेका दरवाजा खुला. दरवाजेमें अँजेनी खडी थी. जॉन का चेहरा ऐसा हुवा मानो उसे चोरी करते हूए पकडा गया हो.
'' क्या हूवा? '' अँजेनी हसते हूए बोली.
इतना खिलखिलाकर हसते हूए जॉन उसे पहली बार देख रहा था.
"' किधर? कहा? ... कुछ नही... मुझे तुम्हारे यहा इस केसके सिलसिलेमें आना था... नही मतलब आया हूँ '' जॉन अपने चेहरेके भाव जितने हो सकते है उतने छिपाते हूए बोला.
'' आवो ना फिर... अंदर आवो... '' अँजेनी फिरसे हसते हूए बोली.
अँजेनीने उसे घरके अंदर लेकर दरवाजा बंद किया.
जॉन और अँजेनी ड्रॉईंगरूममें बैठे हूए थे.
" पोस्टमार्टमके रिपोर्टके अनुसार ... सानीको पिस्तौल की गोली सिनेमें बाई तरफ एकदम हार्टके बिचोबिच लगी... इसलिये वह गोल जो दिवारपर निकाला था वह उसने निकालनेका कोई सवालही पैदा नही होता'' जॉनने अपना तर्क प्रस्तूत किया.
'' मतलब वह आकार जरुर खुनीनेही निकाला होगा'' अँजेनीने कहा.
थोडा सोचकर वह आगे बोली , '' लेकिन गोल निकालकर उसे क्या जताना होगा? ""
'' वही तो... सबसे बडा सवाल अब हमारे सामने है"" जॉनने कहा.
'' अगर इस तरह से और कोई खुन इससे पहले हूवा है क्या यह अगर देखा तो?'' अँजेनीने अपना विचार व्यक्त किया.
'' वह हम सब पहलेही देख चूके है... पिछले रेकॉर्डमें इस तरह का एकभी खुन मौजूद नही है"" जॉनने कहा.
इतनेमे जॉनका मोबाईल बजा. उसने बटन दबाकर वह कानको लगाया, "यस ...सॅम"
जॉनने उधरसे सॅमको सुना और वह एकदम उठकर खडा होगया, " क्या?"
अँजेनी क्या हूवा यह समझनेकी कोशीश करती हूई आश्चर्यसे उसके तरफ देखने लगी.
'' मुझे जाना पडेगा '' जॉनने कहा और दरवाजेकी तरफ जानेको निकला.
जॉनने मोबाईल बंद कर अपने जेबमें रखा.
जाते जाते अँजेनीको उसने सिर्फ इतनाही कहा , "मै तुझे बादमे मिलता हूँ ... मुझे अब जल्दसे जल्द वहाँ पहूँचना पडेगा.
अँजेनी कुछ बोले इसके पहले जॉन जा चूका था.
(to be contd...)
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Sunil Doiphode
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