रातका घना अंधेरा और उपरसे चूभती हूई कडाकेकी ठंड. ऐसे वातावरण मे बहुत सारे प्रेमी युगल रस्तेसे दिख रहे थे. रस्तेके उस तरफ एक आलीशान हॉटेल था. यह जगह शहरके दुसरे भागसे उंचा होनेके कारण यहांसे शहरकी रोशनाई किसी बिखरे हूए चांदनीकी तरह दिख रही थी. और तालाबके किनारे लगे हूए लाईट्स किसी राणीके गलेमें पहने हूए हिरेके हारकी तरह सुंदर लग रहे थे. और तालाबमें पडे उन लाईट्स की परछाईयां उस नेकलेसको और ही सुंदर बना रही थी. इस माहौलमे एक विषम जोडा था - कमांड1 और कमांड2 का. उधर कोनेमें सबसे हटकर उनकी कुछ गहन चर्चा चल रही थी. तभी हॉटेलके सामने एक बडीसी आलीशान गाडी आकर रुकी. गाडीसे जॉन और अँजेनी उतरे. उनको देखतेही कमांड1 और कमांड2 की चर्चा बंद हूई. वे दोनो चोरी छिपे जॉन और अँजेनीके तरफ देखने लगे.
अँजेनी और जॉन हॉटेलके खुले हॉलमें एक कोनेमे बैठे थे.
'' क्या लेंगी?... ड्रिंक्स?'' जॉनने पुछा.
'' नही... तुम्हे लेना है तो तुम लो... '' अँजेनीने कहा.
'' नही फिर मै भी नही लुंगा. ... अच्छा खानेके लिए क्या प्रीफर करेंगी "" जॉन ने पुछा.
'' कुछभी... तुम जो ठिक समझो." अँजेनीने कहा.
" चायनीज?" जॉन ने पुछा.
अँजेनीने हां मे गर्दन हिलाई.
"" पहले सूप मंगाएंगे ... कार्न सूप ?" जॉनने फिरसे उसे पुछा.
उसने फिरसे गर्दन हिलाकर हां कहा. जॉनने उसके हाथमेंका मोबाईल सामने टेबलपर रख दिया और उसकी नजरें आर्डर देनेके लिए वेटरको ढुंढने लगी.
"" ऐसा लगता है की... तुम यहां हमेशा आते हो... '' अँजेनी कुछतो बोलना है ऐसे बोली.
'' हां वैसे हमेशाही आता हूं... लेकिन एक सुंदरीके साथ पहली बार आया हूं '' वह शरारती लहजेमें बोला.
अँजेनी मंद मंद मुस्कुराई. इतनेमें वेटर वहां आया. जॉनने सूपकी आर्डर दी.
"" अब कैसी है तुम्हारी तबीयत ... इतनेमें डॉक्टरके पास गई थी क्या?" जॉनने उसको पुछा.
'" वैसे तो ठिक है.... कल ही गई थी डॉक्टरके यहां ...लेकिन वेभी क्या उपचार करेंगे... मुझे तो कुछ भी समझमें नही आ रहा है.,.. की इस हादसेसे कैसे बाहर निकला जाए"" अँजेनीने कहां.
उसके चेहरेपर फिरसे दुखकी छटा छा गई.
'' वक्त ... वक्त सब जख्म भर देता है .... लेकिने बोलनेवाले कितनाभी बोले... जिसपर बितता है वही दुखकी मार समझता है... '' जॉनने उसके हाथपर अपना तसल्लीभरा हाथ रख दिया.
"वक्त .... हा वक्तही.... लेकिन कितना '' अँजेनी आह भरकर बोली.
'' अच्छा तुमने कामपर जाना अभी शुरु किया है की नही?" जॉनने पुछा.
'' नही ... मेरा अब किसीभी बातमें मन नही लगता... फिर वहां जाकर क्या करु?" वह बोली.
'' मेरी मानो... कलसे कामपर जाना शुरु करदो.... काममे व्यस्त रहना तुम्हारे लिए बहुत जरुरी है... काममें व्यस्त रहनेसे धीरे धीरे आदमी दुख भूल जाता है... '" जॉनने सलाह दी.
'' देखती हू... तुम कहते हो वैसाभी करके देखती हूं'" उसने कहा.
जॉनने उसके हाथपर रखा हूवा हात हलकेही अपने हाथमें लेते हूए वह बोली,
'' इस बुरे वक्तमें सचमुछ तुमने मुझे बहुत सहारा दिया... '' वह उसका हाथ और कसकर पकडते हूए बोली.
इतनेमें जॉनको खिडकीके बाहर रस्तेपर एक गाडी जाते हूए दिखी. उस गाडीके पिछेके कांचपर खुनसे शुन्य निकाली हूई तस्वीर थी. जॉन एकदमसे खडा हूवा.
" तूम यही रुको... मै अभी आता हूं... '' ऐसा बोलते हूए जॉन वहांसे दौडते हूएही हॉटेलके बाहर निकला. अँजेनी घबराकर क्या हूवा यह देखने लगी. वह खिडकीसे बाहर देखनेतक बाहर की गाडी उसके आंखोसे ओझल हूई थी. वह भी उठकर गडबडमें जॉनके पिछे पिछे जाने लगी. लेकिन तबतक जॉनने अपनी गाडी पार्किंगसे निकालकर रस्तेपर एक दिशामें जोरसे दौडाई थी. अँजेनी हॉटेलके सिढीयोंपर असमंजससी इधर उधर देखती हूई खडी रही.
क्रमश:...
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Saturday, January 12, 2008
Ch-13: शुन्यकी तस्वीर... ... (शून्य-उपन्यास)
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Sunil Doiphode
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Thursday, January 10, 2008
Ch-12A: फर्स्ट डेट ... (शून्य-उपन्यास)
जॉनका दिमाग सोचसोचकर घुमने लगा था. दो खून हो चूके थे और खुनी का कोई ना अता पता था ना सुराग. कही थोडा पुछताछके लिए जावो तो प्रेसवाले पता नही कहासे आकर घेर लेते थे. जॉन दिखा नही के वे सब उसपर टूट पडते थे. अच्छा .. कोई केसमे कुछ नई डेव्हलपमेंट हो तो ही बतायेंगे ना. कुछ डेव्हलपमेंट ना होते हूए प्रेसवालोंको फेस करना बडा मुश्कील हो गया था. बाहर प्रेसवाले और अंदर उनकाही कोई आदमी अंदर की सारी बाते बाहर डीस्क्लोज कर रहा था. अंदर किसपे विश्वास किया जाए और किसपे नही कुछ समझमें नही आ रहा था. अब अंदर कोई पुलिसवालाही गद्दारी कर रहा है ऐसी खबर बाहर तक पहूच गई थी.
'अगला कौन?'
'पुलिसवालेही बेईमान तो खुनीको कौन पकडेगा?'
'और कितने लोगोंकी जान देनी पडेगी?'
ऐसे अलग अलग हेडींग की अलग अलग खबरें छापकर प्रेसवालोने सारे शहरमे दहशत फैलाके रख दी थी.
अब लोग पुलिसवालोंके कर्तव्यके बारेमेंही सवाल खडा करने लगे थे. और यह इतनाही टेंशन क्या कम था की उपर के वरीष्ठोने दबाव बनाना शुरु किया था. सोच सोचकर जॉन का दिमाग थक चूका था. जॉनने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. शाम हो चूकी थी. अंधेरा होनेमे बस थोडाही वक्त बाकी था. अचानक जॉनको क्या सुझा क्या मालूम उसने उसके सामने रखा फोन उठाया, एक नंबर डायल किया -
"" क्या कर रही हो? ... '' वह फोनमें बोला.
'' कौन? ... जॉन! '' उधरसे अँजेनीका उत्साहसे भरा स्वर गुंजा.
'' कैसी हो?...'' उसने पुछा.
अपना आवाज अँजेनीने पहचाना उसकी खुशी जॉनके चेहरेपर झलक रही थी.
'' ठिक हू...'" उसका गहरा दुखी स्वर गुंजा.
उसे यह सवाल पुछना नही चाहिए था ऐसा जॉनको लगा. उसे अब क्या बोलना चाहिए की वह फिरसे आनंदीत हो. जॉन सोचने लगा.
" ... क्या कुछ जानकारी मिली ... खुनीके बारेमें ?" उधरसे अँजेनीने पुछा.
" इसी सवालसे पिछा छुडवानेके लिये तुम्हे फोन किया और तुम भी यही सवाल पुछो. .." जॉनने कहा.
" नही ....बहुत दिनोंके बाद तुम्हारा अचानक फोन आया ... इसलिए मैने सोचा कुछ केसमे नई डेव्हलपमेंट होगी..."" अँजेनी बोली..
"नही ... ऐसी कुछ खास डेव्हलपमेंट नही है... .. अच्छा ... मैने फोन इसलिए किया की... आज शामको तुम्हारा क्या प्रोग्रॅम है ? " जॉन असली मुद्देपर आते हूए बोला.
" कुछ खास नही" अँजेनी उधरसे बोली.
" फिर ऐसा करो ... तैयार हो जावो... मै आधे घंटेमें तुम्हे लेने आता हूं.... हम डीनरको जायेंगे... "" जॉन अपना हक जताते हूए बोला.
" लेकिन..."
" लेकिन वेकिन कुछ नही ... कुछ भी बहाना नही चलेगा... मै आधे घंटेमे पहूचता हू...'" जॉनने कहा.
और वह कुछ बोले इससे पहलेही फोन रखकर वह निकल भी गया.
... to be contd...
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Sunil Doiphode
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