उपन्यास - अद्-भूत
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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Friday, January 18, 2008

Ch-18: कमांड2की चाल ... (शून्य-उपन्यास)


कमांड2ने जाना की यही सही वक्त है...

... की कमांड1से बहुत सारे राज पता किये जा सकते है...

वह एक एक घुटसे उसे साथ देता हूवा उसको नशा चढने का इंतजार करने लगा. थोडीही देरमें कमांड1 टून्न हो गया. यही मौका देखकर कमांड2ने अपने सवालोंका तांता लगा दिया...

"कमांड1, मुझे एक बता ..."

कमांड2ने पुछनेसे पहले जानबुझकर रुककर कमांड1के चढे हूए नशेका अंदाजा लिया.

कमांड2को रुका हूवा देखकर कमांड1 नशेमें बोला, " बोल क्या बतानेका है .... एक क्यू... दो पुछ... तिन पुछ... तुझे जितना चाहिए उतना पुछ... '"

उसका यह नशेमे धुत हूवा हाल देखकर कमांड2को हंसी आ रही थी लेकिन उसने बडे प्रयासके साथ अपनी हंसी दबाई.

"' नही मतलब... वह वक्त तुम्हारे तकदीरसे अच्छा था और अगर तुम 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे कोईभी बचा नही सकता था ' - ऐसा बॉसने क्यों कहा? मुझे तो कुछभी समझमें नही आ रहा है.." कमांड2ने कमांड1 को पुछा.

कमांड1को अब अच्छी खासी चढ गई थी. .

" वह तुम्हे नही समझेगा ... वह एक लंबी स्टोरी है " कमांड1ने कहा.

कमांड2 सोचने लगा.

अब इससे कैसे उगलवाया जाए...

उसने काम्प्यूटरपर बैठकर बॉसने पहले एक बार भेजा हूवा मेसेज खोला.

" और यह देख पहले एक बार बॉसने भेजे मेसेजमेंभी 11 तारख के रातको 3 से 4 का वक्त तुम्हारे लिए अच्छा है और 4 से 7 का वक्त बहुत ही खतरनाक है ऐसा लिखा था. उसका जोतिष्यपर जरा जादाही विश्वास दिखता है. " कमांड2 कमांड1को और उकसाने का प्रयत्न करने लगा.

" जोतिष्यपर विश्वास नही ... पूरी निष्ठा है. अबतक उसने कहे समयमें कभीभी दगा नही हूवा है " कमांड1ने कहा.

" वह केवल एक इत्तिफाक हो सकता है..." कमांड2 उसे और छेडनेके उद्देशसे बोला.

" इत्तिफाक नही. बॉसके पास ऐसी एक चिज है की जिसकी मदतसे वह कौनसी बात किस वक्त लाभदायक हो सकती है यह पहलेसे जान सकता है. "

कमांड1के मुंहसे अब बहुत सारी अंदर की बाते बाहर आनेको जैसे बेकरार थी.

" मुझे नही विश्वास होता' कमांड2 ने असहमती दर्शाकर अपना आखरी हथीयार इस्तेमाल किया.

" तुम्हाराही क्या किसीकाभी विश्वास नही होगा ''

" इसी एक बातसे तुम कह रहे हो की औरभी कुछ प्रमाण है?" कमांड2ने बिचमें टोककर पुछा.

" यह एकही बात नही ..... औरभी बहुत सारी बाते है... बॉसके पासका पैसा देखो ... बॉसके पास इतना पैसा कहांसे आगया? यह पुरी संस्था चलाना कोई मजाक नही... और यह सब वह अपने अकेले के बलबुतेपर चलाता है " कमांड2ने कहा.

" कैसे क्या?"

" उसके पासके तंत्रके सहाय्यता से कौनसे वक्त कौनसा शेअर फायदेमे रहेगा यह उसे पहलेसेही पता रहता है... और ऐसा कहते है की अबतक वह कभीभी नुकसानमें नही रहा " कमांड1 अब अच्छा खासा खुलकर बोल रहा था.

" तंत्र? ऐसा कौनसा तंत्र है उसके पास?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.

" बताता हूं" कमांड1 अपना व्हिस्कीका ग्लास फिरसे भरते हूए बोला.

" और बॉसने यह तंत्र कहासे हासिल किया ?" कमांड2 बेसब्रीसे सवालपर सवाल पुछे जा रहा था.

कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुनने के लिए बेताब हो गया था.

" बोलता हूं बाबा , सब बताता हूं " बोलते हूए कमांड1 खडा हो गया.

अपने दाएं हाथकी छोटी उंगली बताते हूए कमांड1ने कहा,

" एक मिनट रुको मै जरा इधरसे आता हूं''

कमांड1 झमता हूवा बेडरूमकी तरफ जाने लगा.

... to be contd...

Tuesday, December 18, 2007

Ch-6 : ब्लैंक मेल (शून्य-उपन्यास)


(Happy Chrismas! Next post will be published on or before 26 Dec 07)
चांदके धुंधले रोशनीमे टेरेसपर कमांड1 और कमांड2 बैठे हूए थे. उनके सामने लॅपटॉप रखा हूवा था. बिच बिचमें वे मजेसे व्हिस्कीके घूंट ले रहे थे. कमांड1 कॉम्प्यूटरको तेजीसे कमांड दे रहा था. एक पलमें न जाने कितने की बोर्डके बटन वह दबा रहा था.

'" यह तुम क्या कर रहे हो?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.

'' अरे यह पोलीस ऑफीसर जॉन अपने केसपर काम कर रहा है '' कमांड1 ने अपना की बोर्डके बटन दबाना जारी रखते हूए कहा.

"' तो फिर?'' कमांड2 ने पुछा.

'' उसके दिमागमें क्या पक रहा है यह हमें जानना नही चाहिए?'' कमांड1 ने कहा.

'" उसके दिमागमें क्या चल रहा है यह हमें कैसे पता चलेगा?'' कमांड2ने आश्चर्यसे पुछा.

'' इधर देख वह अब इंटरनेटपर ऑनलाईन है .. अब यह मेल मै उसको भेज रहा हूँ .... यह मेल उसका पासवर्ड ब्रेक करेगी'' कमांड1 बडे आत्मविश्वाससे कह रहा था.

'' पासवर्ड? लेकिन कैसे ?" कमांड2ने आश्चर्यसे पुछा.

'' बताता हू... बताता हू'' कमांड1 ने मेलका 'सेंड' बटन दबाया और आगे कहा,

'' देखो, यह मेल जब वह खोलेगा तब उसके कॉम्प्यूटरपर 'सेशन एक्सपायर्ड' ऐसा मेसेज आयेगा. फिर वह फिरसे जब अपना पासवर्ड एंटर करेगा तब वह अपने प्रोग्रॅम मे एंटर किया हूवा होगा. इस तरह यह अपना प्रोग्रॅम उसका पासवर्ड अपने पास बडी सुरक्षा के साथ पहूँचाएगा''

कमांड1के चेहरेपर एक अजीब मुस्कुराहट की छटा दिखाई देने लगी.

'' क्या दिमाग पाया बॉस...'' कमांड2 कॉम्प्यूटरकी तरफ देखते हूए अपना व्हिस्कीका ग्लास बगल में रखते हूए बोला.

'" धीरे धीरे तू भी यह सब सिख जाएगा'' कमांड1ने उसके पिठपर थपथपाते हूए कहा.

'' तेरे जैसा गुरू मिलनेके बाद मुझे चिंता करने की क्या जरुरत है ?" कमांड1 चढाते हूए कमांड2ने कहा.

कमांड1को जादा से जादा चढाने के चक्करमें कमांड2का बगलमें रखे व्हिस्कीके ग्लासको धक्का लगा और वह ग्लास निचे फर्शपर गिर गया. उसके टूकडे टूकडे होगए. कमांड2 ग्लासके टूकडे उठाने लगा.

कमांड1ने कॉम्प्यूटरपर काम करते हूए कांचके टूकडे उठा रहे कमांड2की तरफ देखा और फिरसे अपने काममें जूट गया.

" इऽऽ" कमांड2 चिल्लाया.

" क्या हूवा ?" कमांड1ने पुछा.

'' उंगली कट गया "" कमांड2की कांच के टूकडे उठाते हूए उंगली कट गई थी. कमांड2 अपना दर्द छिपाने का प्रयास करने लगा.

" बी ब्रेव्ह ... डोन्ट अॅक्ट लाइक अ किड " कमांड1 ने कहा और मॉनिटरकी तरफ देखते हूए फिरसे अपने काममें जूट गया.

कमांड2ने वैसेही खुनसे सने हाथसे कांचके बाकी टूकडे उठाए, वहाँ एक पॉलीथीन बॅग पडी हूई थी उसमें डाले और उस पॉलीथीनकी बॅगको गांठ मारकर वह बॅग मकान के पिछले हिस्सेमें झाडीमें फेंक दी.

उतनेमें कमांड1को एक मेल आई हूई दिखाई दी.

'' उसने अपनी मेल खोली है शायद... इसको तो अपना पासवर्ड ब्रेक करवाके लेनेकी बडी जल्दी दिख रही है '" बोलते हूए कमांड1ने मेल खोली. मेल ब्लँक थी. मेलमें पासवर्ड नही आया था. अचानक कमांड1ने विद्युत गतीसे कॉम्प्यूटर बंद किया.

'' क्या हूवा?" कमांड2 ने पुछा.

'" साला हम जितना सोच रहे थे उतना येडा नही है.... उसको शायद संदेह हूवा है'" कमांड1 ने कहा.

" मेल ब्लँक है ... इसका मतलब उसका पासवर्डभी ब्लँक होगा'" कमाड2ने अपना अनुमान लगाया.

"मि. कमांड2 ... इमेल पासवर्ड कभीभी ब्लँक नही होता'" कमांड1 अपने खास अंदाजमें कहा.

"" फिर ...तूमने इतनी तेजीसे कॉम्प्यूटर क्यों बंद किया?" कमांड2 ने उत्सुकतावश पुछा.

"'अरे, उसे अगर सहीमें संदेह हूवा होगा तो वह हमें ट्रेस करनेकी कोशीश जरुर करेगा'" कमांड2ने कहा.

"अच्छा अच्छा" कमांड2 उसे जैसे समझ गया ऐसा जताते हूए बोला.

कमांड1 व्हिस्कीका ग्लास लेकर अपने जगहसे उठ गया.

'' हमें यहाँ ऐसे खुलेमें नही बैठना चाहिए '' कमांड2ने अपनी चिंता जाहिर की.

"' ऐसा क्यों?'' कमांड1 ने व्हिस्कीका ग्लास हाथमें लेकर टहलते हूए कहा.

'' नही मैने सुना है की अमेरिकन सॅटेलाईटके कॅमेरे धरतीपर 10 बाय 10 इंच तक स्पष्ट रुपसे देख सकते है ... उसमें हम लोगभी दिख सकते है...'' कमांड2ने स्पष्ट किया.

कमांड1 टहलते हूए एकदम ठहाका लगाकर हसने लगा.

'' क्या हूवा '" कमांड2 उसके हसनेकी वजह समझ नही पा रहा था.

'" अरे, यह अमेरिकन लोग प्रोपॅगँन्डा करनेमें बहुत एक्सपर्ट है .. अगर वे 10 बाय 10 इंच तक स्पष्टतासे देख सकते है तो फिर वे उस ओसामा बीन लादेनको, जो की कितने दिनसे उनके नाकमें दम कर रहा है, उसे क्यों पकड नही पा रहे है? ... हां यह बात सही है की कुछ चिजोंमे अमेरिकन टेक्नॉलॉजीका कोई जवाब नही... लेकिन एक सच के साथ 10 झुठ जोडनेकी अमेरिकाकी पुरानी स्टाईल है... एक सच के साथ 10 झुठ जोडनेको क्या कहते है पता है? '"

" क्या कहते है?" कमांड2ने उत्सुकतासे पुछा.

" शुगरकोटींग ... तुझे पता है? ... दुसरे र्वल्ड वार के वक्त हिटलरकी फौज मरते दमतक क्यों लढी?"' कमांड1 ने पुछा.

कमांड2 कमांड1की तरफ असमंजस सा देखने लगा.

हिटलरने प्रोपॅगॅन्डा किया था की उनके फौजमें जल्दीही व्ही2 मिसाईल आनेवाला है... और अगर वह मिसाईल उनके फौजमें आता तो वे पुरी दुनियापर राज कर सकते थे'" कमांड1 ने कहा.

'' फिर क्या हूवा आगया क्या वह मिसाईल उनके फौजमें ?" कमांड2 ने पुछा.

'' जब व्ही2 नामकी कोई चिज होगी तो आएगी ना? ..." कमांड1 ने कहा.

अब कमांड1 कॉम्प्यूटर फिरसे शुरु करने लगा.

'' अब फिरसे क्यो शुरु कर रहे हो?... वह फिरसे हमें ट्रेस करेगा ना'" कमांड2 ने अपनी चिंता व्यक्त की.

'' नही ... अब शुरु करनेके बाद अपनेको अलग आय. पी. अॅड्रेस मिलेगा ... जिसकी वजहसे वह हमें ट्रेस नही कर पाएगा '" कमांड1 कॉम्प्यूटर शुरु होनेकी राह देखते हूए बोला.

कॉम्प्यूटर शुरू हूवा और मॉनिटरके दाएँ कॉर्नरमें मेल आनेका मेसेजभी आया.

"'बॉसकी मेल है '" मेल खोलते हूए कमांड1ने कहा.

उसने मेल खोली और पढने लगा.

"कमांड2..." कमांड1 ने आवाज दिया.

"' हां"

'' हमें अगले मिशनके बारेंमे आदेश मिल चूके है'' कमांड1 मेल पढते हूए बोला.

कमांड2 कमांड1 के कंधेपर झूककर मेलमें क्या लिखा है यह पढने की कोशीश करने लगा.

(to be contd...)

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