उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
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Friday, February 8, 2008

Ch-32: व्हॅकेशन (शून्य-उपन्यास)

जॉनकी कार जैसी तेज गतिसे दौड रही थी उसी गतीसे उसके खयालात भी दौड रहे थे. उसके पास दाए तरफ अँजेनी बैठी हूई थी. जॉन गाडी ड्राईव्ह कर रहा था. वह भलेही जॉनके पास बैठी थी, लेकिन उसे अकेलापन महसूस हो रहा था. क्योंकी भलेही जॉन कारमें उसके पास बैठा हूवा था लेकिन उसके खयाल उसे कही औरही ले गए थे. धीरे धीरे गाडीने शहरका हिस्सा पिछे छोड दिया. अब रास्तेके किनारे सिर्फ कुछही घर खिडकीसे दिख रहे थे. धीरे धीरे वह भी दिखना बंद होगए. कुछ देर बाद गाडी चारो तरफसे हरे हरे पेढ, हरे भरे खेत, हरे टीलोंसे भरे स्वर्गतुल्य प्रदेशसे गुजरने लगी. रास्तेके दोनो तरफ आखोंको ठंडक पहूचानेवाली हरीयाली फैली हूई थी. अँजेनीने जॉनके तरफ देखा. वह अभीभी अपने सोचमें डूबा हूवा था.

" तूम भलेही मेरे पास बैठे हो लेकिन तूम अभीभी उस खुनके केसमें उलझे हूए लगते हो. " अँजेनी उसके तरफ देखकर बोली.

अँजेनीके बोलनेसे वह खयालोंसे बाहर आगया.

" हां.... मतलब..ऩही... वैसा नही.., " वह गडबडाकर बोला.

" मै समझ सकती हू की तुम्हारे बॉसने तुम्हारे बारेमें जो किया वह कुछ ठिक नही किया. लेकिन कभी कभी ऐसी चिजोंपर अपना कोई बस नही चलता. देखोना मेरे बारेमें इस नियतीने कहां ठिक किया.. " सानी की याद आकर वह बोली.

उसे क्या बोले कुछ समझमें नही आ रहा था. गाडी चलाते वक्त उसने सिर्फ उसकी तरफ एक प्रेम भरा कटाक्ष डाला.

इतनेमें वातावरणमें पाणी के बहनेकी आवाज गुंजने लगी.

" यहा कहीं वॉटर फॉल बह रहा है शायद... " वह बात बदलनेके उद्देशसे बोला.

" वो देखो उधर ... कितना सुंदर! " दु:खके सायेसे बाहर आते हूए अँजेनी उत्साहपुर्वक बोली.

उसके चेहरेपर किसी मासूम बच्चे जैसे भाव झलक रहे थे.

स्वच्छ शुभ्र पाणी मधूर आवाज करते हूए बह रहा था.

" वाव, कितना सुंदर!" उसने दर्शाए दृष्यकी तरफ देखकर जॉनके मुंहसे निकल गया. .

" कितनी समानता है आदमीके जिवनमें और इस पाणीमें " वह फिरसे दुखकी सायेमें प्रवेश करते हूए बोली.

" कैसे क्या ?" जॉनने पुछा.

अनजानेमें जॉनके चेहरेपर अपराधी भाव आगए. अगर मै सोचमें डूबा नही होता तो उसे उसकी दर्दभरी यादें नही आती. अब उसके बिते दिनोंकी यादोंसे बाहर निकालनेके लिए वह उससे जादासे जादा बोलनेकी कोशीश करने लगा.

" देखो ना. यह पाणी एकबार उपरसे गिरा की उसकी जीवनयात्रा शुरु हो जाती है और फिर उस यात्रा का कोई अंत नही होता. वह पाणी आखीर समुंदरतक पहूंचनेतक उसे रुकनेकी कोई गुंजाईश नही होती. " अँजेनी भावूकतासे बोली.

" वह उधर देखो..., हिरन कैसे कुद कुदकर दौड रहे है. " जॉन अचानक एक तरफ निर्देश करते हूए बोला.

जॉनकी तरफसे खिडकीसे स्प्रींग बग्जका एक बडासा समुह गाडीकी आहटसे कुदकर दौडता हूवा दिखाई दिया.

" हाऊ स्वीट! कितना सुंदर!" अँजेनीके मुंहसे निकल गया.

उसकी आंखे खुशीसे चमक रही थी.

तबतक गाडी आगे निकल गई और वह समुह पिछे रह गया. अँजेनी पिछे मुड मुडकर गाडी के पिछेके ग्लाससे वह समुह जबतक दिख रहा था तबतक देख रही थी.

" अपना कॉटेजभी आगे कही इसी झरनेके किनारे होगा " जॉनने कहा.

" क्या वहां भी यह झरना है ! " वह खुशीसे बोली.

" हां वह तो ऐसाही कुछ बोल रहा था. " जॉनने कहा.

क्रमश:...

Thursday, January 3, 2008

Ch-9B : पहली गलती ? ... (शून्य-उपन्यास)

लिखना होनेके बाद कमांड1 वहा बगलमेंही रखे हूए फोनके पास गया. ओवरकोटके दाएँ जेबसे उसने एक उपकरण निकाला, फोन नंबर डायल किया और उस उपकरणसे वह फोनके माऊथपीसमें बोलने लगा, '' ... और एक शख्स ...हयूयाना फिलीकींन्स ...शून्यमे समा गया है ..."

उधरसे कुछ आवाज आनेसे पहलेही उसने फोन रख दिया. शायद उसने पुलिस स्टेशनको फोन लगाया था. फोन रखनेके बाद अचानक कमांड1का खयाल उसके हाथ की तरफ गया.

" माय गॉड!" उसके मुंह से आश्चर्ययुक्त डरसे निकल गया.

" क्या हूवा ?" कमांड2 कमांड1के हाथकी तरफ देखकर बोला.

क्या गडबड हूई यह अब कमांड2केभी खयालमें आया था. कमांड1के दाए हाथका रबरसे बना हूवा हॅन्डग्लोव्ह फट गया था. खुनके पहले जब वह हॉलमे किसी चिजसे टकराया था तब शायद वह कहीं अटकर फट गया होगा.

"" मेरे हाथके और उंगलियोंके निशान अब सब तरफ लगे होगे... हमें अब यहांसे जानेसे पहले सब निशान मिटाना जरुरी है...'' कमांड1 अपने जेबसे रुमाल निकालते हूए बोला.

'' जादा नही होंगे ... हम पुलिस आनेसे पहले झटसे साफ कर सकते है '" कमांड2भी अपने जेबसे रुमाल निकालते हूए बोला.

दोनो रुमालसे कमरेंमे सब जगह, लाईटका स्वीच, बेडका किनारा , बगलमें रखा टेबल सब जल्दी जल्दी साफ करने लगे.

बेडरूममें कहीभी उसके हाथके निशान नही बचे होगे इसकी तसल्ली करके वे हॉलमे चले गए. वहा उन्होने टी पॉय, दरवाजेका हॅन्डल, निचेका फर्श , जहां जहां हाथ लगनेकी गुंजाईश थी वे सब कपडेसे साफ किया. अचानक उन्हे पुलिसकी गाडीका सायरन सुनाई देने लगा. दोनोने तेजीसे एकबार बेडरुममें जाकर इधर उधर नजर दौडाकर कुछ बचातो नही इसकी तसल्ली की. जैसे पुलिस की गाडीका आवाज नजदिक आने लगा वे दौडतेही सामने दरवाजेके पास गए. सावधानीसे, धीरेसे दरवाजा खोलकर वे बाहरकी गतिविधीयोंका अंदाजा लेते हूए वहासे रफु चक्कर हो गए.


.... अचानक कमांड1 अपनी विचारोंकी दुनियासे जागते हूए कुर्सीसे खडा हो गया.

'' क्या हूवा ?" कमांड2 ने पुछा.

" गफल्लत हो गई साली ... एक बहुत बडी गलती हो गई'' कमांड1ने कहा.

कमांड1का नशा पुरी तरह उतरा हूवा था.

'' गलती ... कैसी गलती? कमांड2 ने पुछा.

कमांड1के चेहरेके भाव देखकर कमांड2काभी नशा उतरने लगा था.

'' मेरी उंगलीयोंके निशान अभीभी वहां बाकी रह गए है '' कमांड1ने कहा.

'' हमनेतो सब जगहकी निशानिया मिटाई थी" कमांड2ने कहा.

" नही ... एक जगह साफ करनेका हम भूल गए" कमांड1ने कहा.

" कहां ?" कमांड2ने पुछा.

अबतक कमांड2भी उठकर खडा हूवा था.

"" तुझे याद होगा की ... जब मै हॉलमें किसी चीजसे टकराकर गिरनेवाला था ... तब वहां टी पॉयपर रखे एक कांचके पेपरवेटको मेरा धक्का लगा था ... और वह लुढकते हूए गिरने लगा था... ." कमांड1 बोल रहा था. .

कमांड2 कमांड1की तरफ चिंता भरी नजरोंसे देख रहा था.

" आवाज ना हो इसलिए मैने वह पेपरवेट उठाकर फिरसे उसकी पहली जगह पर रखा था...'" कमांड1ने कहा.

" माय गॉड ... उसपर तेरे उंगलीके निशान मिटाने तो रह ही गए "

कमांड1 गहन सोच मे डूब गया.

" अब क्या करना है ?" कमांड2 ने पुछा.

कमांड1 कुछ बोलनेके मनस्थीतीमें नही था. वह खिडकीके पास जाकर सोचमें डूबा खिडकीके बाहर देखने लगा. कमांड2को क्या करें और क्या बोले कुछ समझ नही रहा था. वह सिर्फ कमांड1की गतिविधीयाँ निहारने लगा. कमांड1 फिरसे खिडकीके पाससे वे दोनो जहां बैठे हूए थे वहां वापस आगया. उसने सामने रखा हूवा व्हिस्कीका ग्लास फिरसे भरा और एकही घूंटमे पुरा ग्लास खाली कर दिया. फिरसे कमांड1 खिडकीके पास गया और अपनी सोचमें डूब गया.

" कुछ ना कुछ तो होगा जो हम कर सकते है'' कमांड2 कमांड1को दिलासा देनेकी कोशीश कर रहा था.

कमांड1 कुछ समय के लिए स्तब्ध खडा रहा और अचानक कुछ सुझे जैसा चिल्लाया,

" यस्स ऽऽ"

" क्या कुछ रास्ता मिला ?" कमांड2 खुशीसे पुछा.

लेकिन कमांड1 कहां वह सब कहनेके मनस्थितीमें था? उसने कमांड2को इशारा किया,

" चल जल्दी ... चल मेरेसाथ चल"

कमांड1 दरवाजेसे बाहर गया और कमांड2 उसके पिछे पिछे असमंजसा चलने लगा.

...to be contd..

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About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.