लिफ्टसे बाहर आकर जॉन फ्लॅट क्रमांक 3 की तरफ जाने लगा. फ्लॅटके खुले दरवाजेके सामने देखनेवालोंकी भीड जमा हूई थी. कुछ रिपोर्टरभी वहां इधर उधर घुम रहे थे. वहा बाहर दरवाजेके पास खडे पुलीस सुस्ताए हूए लग रहे थे. जॉनको देखतेही वे सुस्ताए हूए पुलिस सतर्क होकर हरकतमे आए. वे कुछ कारण ना होते हूए वहा खडे लोगोंको और रिपोर्टरोंको डांटते हूए वहासे भगाने लगे. जॉनको देखतेही वे रिपोर्टर जॉनके सामने आकर उसका रास्ता रोककर खडे हूए. वहा खडे और जॉनके पिछे आए पुलिसने उन्हे लगभग पकडकर बाजू हटाया. जॉन सिधा अंदर चला गया.
अंदर हॉलमें इन्व्हेस्टीगेशनके लोग अपने काम मे व्यस्त थे. जॉन उन्हे डिस्टर्ब नही होगा इसकी सावधानी बरतते हूए बेडरुमकी तरफ चला गया. बेडरूममें सॅम था. जॉनको देखतेही वह जॉनके सामने आया.
" साला कुछभी पत्ता नही चल रहा है " सॅम जॉनको कुछतो बोलना है ऐसे बोला.
' अपनेही डिपार्टमें अगर छेद हो तो कैसे पता चलेगा' जॉनने चिढकर तिरछे अंदाजमें कहा.
जॉनका मूड देखकर सॅमने चूप रहनाही बेहतर समझा. .
बेडरूममे फर्शपर खुनसे लथपथ नियोल वॅग्नरका शव पडा हूवा था. नियोल लगभग पच्चीसके आसपास, एक आकर्षक व्यक्तीत्व का युवक था. वह फ्लॅटमें शायद अकेलाही रह रहा होगा. मतलब फ्लॅटमेंके उसके सामानसे और अबतक उसके बारेमें पुछनेके लिये उसका कोई नही आया था, इसपरसे कमसे कम ऐसाही लग रहा था. नियोलके पेटपरसे बहकर फर्शपर उसका खुन जम गया था. उस तरफसे पिठके निचेसे बहकर एक खुन की धार बाहर आई थी. नियोलके शरीरपर बंदुककी गोलीयोंकी निशानियां तो थी ही साथमे चाकुकी वार की हूई निशानीयां थी. नियोलका मुहं आधा खुला और सर एक तरफ ढूलका हूवा था. जान जानेके पहले वह बहूत तडपा होगा ऐसा लग रहा था. और उसके शरीरपर उसके ऑफिसके या फिर बाहर जानेके लिए पहने रेग्यूलर कपडे थे.
इस परसे लग रहा था की खुनी शायद उसके पिछे पिछेही घरमें घुस गया होगा...
मतलब यह भी एक संभावना!...
कमरेमेंका, नियोलके शरीरपरका, उसके जेबमें जो था वह सब सामान जैसेके वैसा सही सलामत था.
सब मतलब जो किमती था वह...
बाकी कुछ सामान खुनी ले गया था या नही कुछ पता नही चल रहा था. जॉनको अबतकके अनुभवसे पता था की कुछ कातील सभी किमती सामान नही ले जाते. कुछ सामान वे पुलिसको गुमराह करनेके लिए वही छोड जाते है. और उपरसे नियोल अकेला होनेसे कातील क्या ले गया और क्या छोड गया यह समझनेके लिए कोई रास्ता नही था.
नियोलपरसे हटकर जॉनका ध्यान सामने खुनसे भरे दिवारकी तरफ गया.
फिर वही ...
खुनसे निकाला हूवा बडासा शुन्य... शुन्यही था वह...
और उस शुन्यमे कातील छीपा हूवा था...
लेकिन शून्यका मतलब होता है कुछ भी नही...
फिर उसमें कातील कैसा छिपा होगा ?...
शून्यके बिचोबिच खुनसे लिखा था -
" शून्याकी खोज किसने की ?"
फिर इस सवालमे जरुर कातील छिपा होगा ...
जॉन सोचने लगा.
जॉनको अब यह सब गुथ्थी सुलझानेकी सख्त जरुरत महसुस होने लगी थी.
उसने बोलातो सही था की 'शामको प्रेस कॉन्फरंसमे सब बताऊंगा' करके.
लेकिन कमसे कम अभीतो उसकेपास बोलनेके लिए कुछ नही था. मतलब कमसे कम शामतक खुनीका पता लगना जरुरी था.
क्रमश:...
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उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
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Friday, February 22, 2008
Ch-42: शुन्यकी खोज किसने की ? (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:56 AM
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