People are just as happy as they make up their minds to be - ANONYMOUS
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पुलिसकी गाडी ट्रफिकमें रास्ता निकालते हूए सायरन बजाते हूए तेजीसे दौड रही थी. और उस गाडीके पिछे और चारपाच गाडीयोंका जथ्था जा रहा था. सायरनके आवाजकी वजहसे ट्रफिक अपनेआप हटकर उन गाडीयोंको रास्ता दे रही थी. उस आवाजके वजहसे और इतनाबडा पुलिसकी गाडीयोंका जथ्था देखकर आसपासके वातावरणमें एक अलगही उत्सुकता और डर फैल गया था. ट्रफिकसे रास्ता निकालते हूए और रास्तेसे तेडे मेडे मोड लेते हूए आखीर वो गाडीयां जॉर्जके घरके आसपास आकर रुक गई. गाडीयोंसे पुलिसकी एक बडी टीम तेजीसे लेकिन एक अनुशाशनके साथ बाहर निकल गई.
'' चलो जल्दी... पुरे एरीयाको घेर लो... क्वीक... कातिल किसीभी हालमें अपने हाथसे निकलना नही चाहिए... ...'' सॅमने अपने टीमको आदेश दिया.
पुलिसका वह समुह एक एक करते हूए बराबर अनुशाशनमे पुरी एरीयामें फैल गया. और उन्होने पुरे एरीयाको चारो तरफसे घेर लिया. इतने बडे पुलिसके समुहके जुतोंके आवाजसे पुरे एरियामें वातावरण तनावपूर्ण हूवा था. आडोस पडोसके लोग कोई खिडकीसे तो कोई पडदेके पिछेसे झांककर बाहर क्या चल रहा है यह कौतुहलयुक्त डरसे देख रहे थे.
दो तिन पुलिसको लेकर सॅम एक घरके पास गया. जिस आदमीने पहले जॉर्जकी कहानी बयान की थी वह संभ्रमकी स्थितीमें वही खडा था.
'' जरा बताईये तो कौन कौनसे घरसे जॉर्जके घरकी सारी हरकते दिखती है और सुनाई देती है...'' सॅमने उस आदमीसे पुछा.
उस आदमीने सॅमको दो-तीन मकानकी तरफ उंगलीसे इशारा करते हूए कहा,
'' वे दो ... और मेरा एक तिसरा..''
'' हमें यह एरीया पुरी तरहसे सील करना पडेगा'' सॅम अपने टीमको उन मकानकी तरफ ले जाते हूए बोला.
सॅमने उन तिन घरोंके अलावा और दो-चार मकान अपने कार्यक्षेत्रमें लिए. एकके बाद एक ऐसे वह हर घरकी तरफ अपने दो-तिन लोगोंको ले जाता और घर अगर बंद हो तो उसे नॉक करता था. कुछ लोग जब दरवाजा खोलकर बाहर आते थे तो उनके चेहरेपर आश्चर्य और डरके भाव दिखाई देते थे. बिच-बिचमें सॅम अपने साथीदारोंको वायरलेसपर दक्ष रहनेके लिए कहता था. ऐसे एक एक घरकी तलाशी लेते हूए वे आखीर एक मकानके पास पहूंच गए. दरवाजा नॉक किया. काफी देरतक रुकनेके बाद अंदरसे कोई प्रतिक्रिया दिख नही रही थी. सॅमके साथमें जो थे वे सब लोग अलर्ट हो गए. अपनी अपनी गन लेकर तैयार हो गए. फिरसे उसने दरवाजा नॉक किया, इसबार जरा जोरसे. फिरभी अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही आई.
लेकिन अब सॅमका सब्र जवाब दे गया,
'' दरवाजा तोडो '' उसने आदेश दिया.
जेफ जो ऐसे कारनामोंमे तरबेज था, हमेशा दरवाजा तोडनेमें आगे रहता था, उसने और और दो चार लोगोंने मिलकर धक्के दे-देकर दरवाजा तोड दिया. दरवाजे टूटनेके बाद खबरदारीके तौरपर पहले सब लोग पिछे हट गए आव्र फिर धीरे धीरे सतर्कताके साथ अंदर जाने लगे.
लगभग सारा घर ढूंढ लिया. लेकिन घरमे कोई होनेके कोई आसार नही दिख रहे थे. किचन, हॉल खाली पडे थे. आखिर उन्होने बेडरुमकी तरफ उनका रुख किया. बेडरुमका दरवाजा पुरी तरह खुला पडा था. उन्होने अंदर झांककर देखा. अंदर कोई नही था, सिर्फ एक टेबल एक कोनेमें पडा हूवा था.
जैसेही सॅम और उसके साथ एक दो पुलिस बेडरुममें गए वे आश्चर्यके सांथ आंखे फाडकर देखतेही रह गए. उनका मुंह खुला की खुला ही रह गया. बेडरुममें एक कोनेमें रखे उस टेबलपर मांसके टूकडे और खुन फैला हूवा था. सब लोग एक दुसरेकी तरफ आश्चर्य और डरसे देखने लगे. सबके दिमागमें एक साथ न जाने कितने सवाल उमड पडे थे. लेकिन किसीकी एकदूसरेकोभी पुछनेकी हिम्मत नही बन पा रही थी. सॅमने बेडरुमके खिडकीकी तरफ देखा. खिडकी पुरी तरह खुली थी.
'' यहा कौन रहता है? ... मालूम करो '' सॅमने आदेश दिया.
उनमेंसे एक पुलिस बाहर गया. और थोडी देर बाद जानकारी इकठ्ठा कर वापस आगया.
'' सर मैने इस मकान मालिकसे अभी अभी संपर्क किया था. ... वह थोडीही देरमें यहा पहूंचेगा... लेकिन लोगोंके जानकारीके हिसाबसे यहां कोई इवेन फोस्टर नामक आदमी किराएसे रहता है ... '' वह पुलिस बोला.
'' वह आए बराबर उसे पहले मुझसे मिलनेके लिए कह दो... फोरेन्सीकके लोगोंको बुलावो... और इस अपार्टमेंटमें जबतक सारे सबुत इकठ्ठा किए नही जाते तबतक और कोईभी ना आ पाए इसका खयाल रखो.....'' सॅमने निर्देश दिये.
थोडी देरमें बाहर जमा हूई लोगोंकी भिडमें मकानमालिक आगया और 'मकान मालिक आया... मकानमालिक आया' ऐसी खुसुर फुसुर शुरु हो गई.
'' कौन है मकानमालिक ?'' सॅमने उस भीडकी तरफ जाते हूए पुछा.
एक अधेड उम्र आदमी सामने आकर डरते हूए दबे हूए स्वरमें बोला, '' मै हूं''
'' तो आपके पास इस आपके किराएदारका अतापता वैगेरा सारी जानकारी होगीही?...'' सॅमने उससे पुछा.
'' हां है ... '' मकानमाकिक एक कागजका टूकडा सॅमको थमाते हूए बोला.
सॅमने वह कागजका टूकडा लिया. उसपर इवेन फोस्टरका ऍड्रेस, फोन जैसी सारी जानकारी मकानमालिकने लिखकर दी थी.
'' लेकिन यह सब देखते हूए यह जानकारी जाली और झुठी होगी ऐसा लगता है... '' मकानमालिक डरते हूए बोला.
'' मतलब? ... आपने उसकी सारी जानकारी जांचकर नही देखी थी? '' सॅमने पुछा.
'' नही .. मतलब... वह मै करनेही वाला था'' मकानमालिक फिरसे डरते हूए बोला.
क्रमश:
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उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण) The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है. |
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण) The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book. You can also Email this Hindi Novel to your friends! |
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Wednesday, May 28, 2008
Hindi Novels - अद-भूत / Aghast CH-30 किराएदार / Tenant
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:21 AM
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Thursday, May 22, 2008
Hindi - Ad-bhut (upanyas) : Ch-26 जेलमें / In the prison
Imagination is important than knowledge --- ALBERT EINSTEIN
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जॉर्जके मकानके खिडकीसे अंदरका सबकुछ दिख रहा था. आजभी वह फायरप्लेसके सामने बैठा हूवा था. उसने अपने हाथसे वह गुड्डा बगलमें जमीनपर रख दिया और झुककर आगके सामने फर्शपर अपना मस्तक रगडने लगा. यह सब करते हूए उसका कुछ बुदबुदाना जारीही था. थोडी देरसे वह खडा होगया और अजीब ढंगसे जोरसे किसी पागल की तरह चिखा. इतना अचानक और जोरसे चिखा की बाहर खिडकीसे झांक रहे डिटेक्टीव सॅम, सॅमका पार्टनर और उनको साथमें जो लेकर आया था वह आदमी, सबलोग चौंककर सहमसे गए. उस चिखके बाद वातावरणमें एक अजीब भयानक सन्नाटा छा गया.
'' मिस्टर रोनॉल्ड पार्कर अब तुम्हारी बारी है .. '' जॉर्ज वह निचे रखा हूवा गुड्डा अपने हाथमें लेते हूए बोला.
लेकिन इतनेमें दरवाजेकी बेल बजी. जॉर्जने पलटकर दरवाजेकी तरफ देखा. गुड्डेको फिरसे निचे जमिनपर रख दिया और उठकर दरवाजा खोलनेके लिए सामने आ गया.
दरवाजा खोला. सामने डिटेक्टीव सॅम और उसका पार्टनर था. वह तिसरा आदमी शायद वहांसे पहलेही खिसक गया था.
'' मिस्टर जॉर्ज कोलीन्स हम आपको स्टीव्हन स्मीथ और पॉल रोबर्टसके कत्लका एक सस्पेक्टके तौरपर गिरफ्तार करने आये है... आपको चूप रहनेका पुरी तरह हक है ... और कुछ बोलनेके पहले आप अपने वकिलके साथ संपर्क कर सकते है ... और खयाल रहे की आप जोभी बोलोगे वह कोर्टमें आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा... '' डिटेक्टीव सॅमने दरवाजा खोलेबराबर ऐलान कर दिया.
जॉर्ज कोलीन्सका चेहरा एकदम भावशून्य था. वह बडे इम्तीनानके साथ उनके सामने आ गया.
उसे अरेस्ट करनेके पहले सॅमने कुछ सवालात पुछनेकी ठान ली.
'' यहा आपके साथ कौन-कौन रहता है?'' सॅमने पहला सवाल पुछा.
'' मै अकेलाही रहता हू '' उसने जवाब दिया.
'' लेकिन हमारे जानकारीके अनुसार आपके साथ आपके पिताजीभी रहते थे. ''
'' हां रहते थे ...लेकिन.... अब वे इस दुनियामें नही रहे ''
'' ओह ... सॉरी... यह कब हूवा? ... मतलब वे कब गुजर गए ?''
'' नॅन्सीके मौत की खबर सुननेके बाद कुछ दिनमेंही वे चल बसे ''
'' अच्छा आप स्टिव्हन और पॉलको पहचानते थे क्या ?''
'' हां उन हैवानोंको मै अच्छी तरहसे पहचानता हूं ''
स्टिव्हन और पॉलका नाम लेनेके बाद सॅमने एक बात गौर की की उनके उपरका गुस्सा और द्वेश उसके चेहरेपर साफ झलक रहा था. या फिर उसने वह छिपानेकी कोशीशभी नही की थी.
अब सॅमने सिधे असली मुद्देपर उससे बात करनेकी ठान ली.
'' आपने स्टिव्हन और पॉलका खुन किया क्या ?''
'' हां '' उसने ठंडे स्वरमें कहा.
सॅमको लगा था की वह आनाकानी करेगा. लेकिन उसने कुछभी आनाकानी ना करते हूए सिधे बात कबूल कर ली. .
'' कैसे किया आपने उनका कत्ल ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.
'' मेरे पासके काले जादूसे मैने उन्हे मार दिया '' उसने कहा.
जॉर्ज पागल की तरह दिखता तो थाही लेकिन उसके इस जवाबसे सॅमको अब विश्वास हो चला था.
'' आपके इस काले जादूसे आप किसीकोभी मारकर बता सकते हो?'' सॅमने व्यंगात्मक ढंगसे पूछा.
'' किसीकोभी मै क्यों मारुंगा?... जिसकी मुझसे दुष्मनी है उसकोही मै मारुंगा ''
'' अब आगे आप इस काले जादूसे किसको मारने वाले हो ?''
'' अब रोनॉल्डका नंबर है ''
'' अब अभी इसी वक्त आप उसे मारकर बता सकते हो ?'' सॅमने उसका काला जादू और वह दोनोंकाभी झूट साबीत करनेके उद्देशसे पुछा.
'' अब नही ... उसका वक्त जब आएगा तब उसे जरुर मारुंगा '' उसने कहा.
उसका यह जवाब सुनकर सॅमको अब फिलहाल उसे और सवाल पुछनेमें कोई दिलचस्पी नही रही थी. वे दोनो जॉर्जको हथकडी पहनानेके लिए सामने आ गए. इस बारभी उसने कोई प्रतिकार ना करते हूए पुरा सहयोग किया.
सॅमको लग रहा था की या तो यह आदमी पागल होगा या अति चालाक...
लेकिन वह जो कहता है वह अगर सच हो तो ?...
पल भरके लिए क्यों ना हो सॅमके दिमागमें यह विचार कौंध गया ..
नही ... ऐसे कैसे हो सकता है ?...
सॅमने अपने दिमागमें आया विचार झटक दिया.
डिटेक्टीव सॅमके पार्टनरने जॉर्जको जेलके एक कोठरीमें बंद किया और बाहरसे ताला लगाया. सॅम बाहरही खडा था. जैसेही सॅम और उसका पार्टनर वहांसे जानेके लिए मुडे, जॉर्ज आवेशमें आकर चिल्लाया -
'' तुम लोग मुरख हो... भलेही तुमने मुझे जेलके इस कोठरीमें बंद किया फिरभी मेरा जादू यहांसेभी काम करेगा...''
सॅम और उसका पार्टनर रुक गए और मुडकर जॉर्जकी तरफ देखने लगे.
सॅमको जॉर्जकी अब दया आ रही थी.
बेचारा ...
बहनका इस तरहसे दुर्दैवी अंत होनेसे उसका इस तरह झुंझलाना जायज है ...
सॅम सोचते हूए फिरसे अपने साथीके साथ आगे चलने लगा. थोडी दूरी तय करनेके बाद फिरसे मुडकर उसने जॉर्जकी तरफ देखा. वह अब निचे झुककर फर्शपर माथा रगड रहा था और साथमें कुछ मंत्र बुदबुदा रहा था.
'' इसके उपर ध्यान रखो और इसे किसीभी व्हिजीटरको मिलनेकी अनुमती मत दो. '' सॅमने निर्देश दिया.
'' यस सर'' सॅमका पार्टनर आज्ञाकारी ढंगसे बोला.
क्रमश:...
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Sunil Doiphode
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Tuesday, February 5, 2008
Ch-30A: प्रेस कॉंन्फरंन्स (शून्य-उपन्यास)
खुले मैदानमे एक उंची जगह एक टेबल रखा हूवा था. टेबलपर अलग अलग टीव्ही चॅनल्सके टॅग लगाए हूए मायक्रोफोन रखे हूए थे. टेबलके सामने खुली जगहमें कुछ कुर्सीयां रखी हूई थी. वहां प्रेसवालोंने भीड की हूई थी. कुछ प्रेसवाले कुर्सीपर बैठकर प्रेसकॉन्फरन्समें शहर पुलीस शाखाप्रमुख आनेकी राह देख रहे थे. कुछ पत्रकार छोटे छोटे समूह बनाकर कुछ चर्चा कर रहे थे. चर्चा वही. फिलहाल शहरमें चल रहे खुनी श्रुंखलाकी.
" बहुत दिनोंसे वही वही खबरें एक रुटीनसा होगया था. इस खुनकी वजहसे वह रुटीन दूर होगया ऐसा लगता है. " एकने कहा.
" मतलब, तुम्हे कही ऐसा तो नही कहना है की यह खुन हो रहे है यह अच्छा हो रहा है.." दुसरेने व्यंगपूर्वक कहा.
" अरे वैसा नही " पहला गडबडाकर बोला.
" अरे मतलब वैसाही है. लेकीन खुले ढंगसे कहभी नही सकते..." दुसरा हसकर बोला.
फिर दोनो एकसाथ हसने लगे.
" साला, क्या करेंगे अपना कामही कुछ ऐसा है... दुसरे लोगोंके जानपर हमें खबरें बनानी पडती है... " और एक तिसरा बोला.
" हां वही तो... अगर खबरें ना हो तो अपना पेट कैसे भरेगा... ?"
" अरे जब मै नया नया इस क्षेत्रमें आया... तब रोज सुबह भगवानसे प्रार्थना करता था ... हे भगवान, कमसे कम आजतो एक खबर मिलने दे..."
" मतलब... संक्षेपमें... भगवान आज तो भी कोई अॅक्सीडेंट , खून'
' ... या कुछतो चटपटा घटीत होने दे. "
पहिलेने तिसरेकी ताली लेते हूए अपना वाक्य पूरा किया.
दुसरी तरफ टी व्ही चॅनल्सवाले अपने कॅमेरे लेकर तैयार थे. उनमेंभी चर्चा शुरू थी.
" अरे रोज कितना बुरा घटीत होता है इस दुनियामें..." एकने कहा.
" यह अच्छा है की हमें वह सब अपने इस खुली आंखोसे देखना नही पडता..." दुसरेने कहा.
" खुली आंखोसे नही तो कैसे देखते है हम?" दुसरेने आश्चर्य व्यक्त करते हूए कहा.
" अरे मतलब यह कॅमेरा रहता है ना अपने आखोके सामने.."
दोनो खिलखिलाकर हसने लगे.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
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9:57 AM
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