ठंडसे एकदूसरेका बचाव करनेके लिए एक दूसरेको कसकर लिपटकर जॉन और अँजेनी टेरेसपरही सोए थे. सुबह पंछीयोंकी चहचहाटसे अँजेनी जाग गई. उसने अपनी आनंदभरी और गहरी निंद से हूए भारी आंखे खोलनेकी कोशीश की. उसे आंखे खोलनेका मन नही हो रहा था. उसे वैसेही जॉनकी बाहोंमे मानो पुरी जिंदगी रहनेका मन कर रहा हो. वैसेही लेटे हूए अवस्था मे उसने हलके अपनी आखे थोडीसी खोलकर देखा. पुरबकी ओर सुबहकी लाली छाई हूई थी. सुबह हो गई .. अब उठना ही चाहिए... उसने अपने कपडे पहनते हूए जॉनको धीरेसे हिलाया.
" जॉन ऊठो, देखो सुबह हो गई.."
"उं..." जॉनने सुस्तीमें अंगडाई ली और उसे फिरसे अपनी बाहोंमे खिंच लिया.
उसने खुदको छुडाते हूए अपने कपडे पहने और फिर उसे जगानेके लिए हिलाया. वह उठ गया. किलकीली आखोंसे इधर उधर देखा और फिर उसकी गोदमें सर रखकर सो गया. उसकी बालोंमे अपनी नाजूक उंगलीया फेरते हूए वह मुस्कुराने लगी. इतनेमें उन्हे अहसास हूवा की शायद निचे बेडरुममें रखा हूवा जॉनका मोबाईल बज रहा है.
" जॉन देखोतो, तुम्हारा मोबाईल बज रहा है.."
यहां आनेके बाद पहली बार जॉनका मोबाईल बजा था. वह एकदमसे उठ खडा हूवा. कपडे पहनते हूए जल्दी जल्दी निचे जाने लगा. वह भी उसके साथ हो ली.
हां जॉनकाही मोबाईल बज रहा था...
मोबाईल उठाकर जॉनने डिस्प्लेकी तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सका फोन था.
इतनी सुबह अॅलेक्सका फोन ?...
जरुर कोई महत्वपुर्ण बात होगी...
झटसे जॉनने बटन दबाकर मोबाईल कानको लगाया.
" हं बोलो अॅलेक्स " जॉनने कहा.
" जॉन एक बहुत महत्वपुर्ण खबर है... " उधरसे आवाज आया.
अचानक मोबाईलके सिग्नलमे कुछतो डिस्टर्बन्स आने लगा. कुछ सुनाई नही दे रहा था.
" हॅलो हॅलो " जॉन ट्राय करने लगा.
" हॅलो" उधरसे प्रतिसाद आया.
" हं, बोलो ... क्या खबर है ?" जॉनने पुछा.
" खुनीके ठिकानेका पता चल चूका है... तूम जल्दीसे जल्दी ... " उधरसे बात पुरी होनेसे पहलेही कुछ न समजनेवाले टूटे हूए बोल जैसे आवाज आने लगे. और फिरतो वह भी आना बंद हूवा.
" हॅलो हॅलो" जॉनने बोलनेका प्रयास किया.
उसने उसके मोबाईलके डिस्प्लेके तरफ देखा. उसके मोबाईलका सिग्नल गया था.
शायद शहरसे दूर होनेके कारण इस इलाकेमे सिग्नल बराबर नही आ रहा होगा... .
" क्या हूवा ? किसका फोन है ?" अँजेनीने पुछा.
वह फोन लेकर बाल्कनीमें गया. लेकिन सिग्नल आनेका नाम नही ले रहा था.
" अँजी जल्दी तैयार हो जावो.. हमें अब यहांसे जल्दसे जल्द निकलना होगा.." बोलते हूए जॉन बाल्कनीसे सिढीयोंकी तरफ लपका.
सिढीयोंसे दौडते हूए वह टेरेसपर गया. कुछ ना समझते हूए अँजेनीभी उसके पिछे पिछे टेरसपर गई. टेरेसपरभी उसके मोबाईलका सिग्नल नही आ रहा था.
"अॅलेक्सका फोन था ... खुनीके बारेमें कुछतो महत्वपुर्ण जानकारी मिली है उसको शायद ... लेकिन बिचमेंही सिग्नल चला गया... " मोबाईलका डिस्प्ले अँजेनीको दिखाते हूए जॉनने कहा.
क्रमश:...
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Monday, February 18, 2008
Ch-38: डीटेक्टीव्ह का फोन (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:26 AM
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