उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
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Monday, March 17, 2008

Ch-57: जैसे को तैसा (शून्य-उपन्यास) Hindi

रातका समय था. डॅनने अपने घरका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोला और बाहर झांककर देखा. चारो तरफ अंधेरा था. वह धीरेसे घरसे बाहर निकल गया. बाहर आनेके बाद उसने चारो तरफ अपनी नजरे घुमाकर उसे कोई देखतो नही रहा इसकी तसल्ली की. कोई देख नही रहा है इस बातकी तसल्ली होतेही वह कंपाऊंडके बाहर आ गया. फिरसे रस्तेपर उसने चारो ओर अपनी नजरे दौडाई. रास्ता एकदम खाली खाली था. अब वह दाई तरफ मुडकर चलने लगा - अंधेरेमे तेजीसे कदम बढाते हूए. उसके चलनेके गतीके साथही उसके सोचनेभी गती पकड ली. पिछले बार कातिलने हमें भरपूर बक्षिसी देकर खुश कर दिया था. इस बारभी जॉन, सॅम और बॉसको अगला खुन किसका होगा इसकी जानकारी मिलने की बात उसने कातिल को फौरन बताई थी. कातिल उसपर बहूत खुश हो गया था. फिदाही हूवा था.

कातिलने उसे एक जगह बताकर वहा वह सोच भी नही सकता उतना पैसा रखनेका वादा किया था. अब वह वहांही पैसे लेनेके लिए जा रहा था. पैसेका खयाल आतेही उसके दिलमें गुदगुदी होने लगी. पिछले बार मिले पैसेसे दस गुना पैसे उसको अपने आखोंके सामने दिखने लगे. खुशीसे वह झुम उठा. उसके चलनेकी गती धीमी होगई और चालमें एक मस्ती झलकने लगी थी.

होगया अब यह आखरी...

इसके बाद ऐसी बेईमानी नही करुंगा...

इतना पैसा मिलनेके बाद मुझे ऐसी बेइमानी करनेकी फिरसे नौबतही नही आयेगी...

पैसा मिलनेके बाद नौकरी एकदम नही छोडूंगा.. नहीतो किसीको शक हो सकता है...

नौकरीमें कुछ देरतक टाईमपास करेंगे और फिर सही वक्त आतेही नौकरी छोडकर कुछ बिझीनेस करेंगे....

नहीतो पहले बिझीनेस डालूंगा और वह अच्छा खासा चलनेके बाद नौकरी छोड दूंगा....

डॅन सोच रहा था. अचानक असे अहसास हूवा की जिस जगह कातिलने पैसे रखनेका कबुला था वह जगह नजदीक आ चूकी है. वह एक पल रुका. फिरसे एकबार चारो ओर देखकर जिस जगह पर पैसे रखे थे उधर निकल गया. उसके चेहरेपर एक मुस्कुराहट झलक रही थी. स्थान एकदम निर्जन था. चारो ओर अंधेरा छाया हूवा था. बिच बिचमें कुतोंका अजीब आवाज आ रहा था. वह जगह किसीकोभी डर लगेगा ऐसीही थी. लेकिन आज डॅनके डर पर उसका लालच पुरी तरहसे हावी हो चूका था.

सामने एक बडा पेढ था. यही वह पेढ था जिसके निचे कातिलने पैसे रखे थे...

अब मानो डॅनके शरीरमें खुशीकी लहरे दौड रही थी. अब कुछही और पल! कुछ पलमेंही अब मै एक बडे संपतीका मालिक बनने वाला हूं. वह अधीरतापुर्वक पेढके निचे चला गया. वहा एक बडा पत्थर रखा हूवा था. डॅनने एक पलकाभी विलंब ना लगाते हूए वह पत्थर वहासे हटाया. जैसेही उसने वह पत्थर वहा से हटाया एक बडा धमाका हुवा और उसके हाथके टूकडे टूकडे हो गए. उसके बदनमेंभी नुकीले पत्थरके टूकडे गए थे. और खुनसे लथपथ अवस्थामें उसकी जान चली गई. उसे अहसास हो गया था की उसने जैसे ठान लिया था वैसेही यह उसकी आखरी बेइमानी साबित हूई थी.

क्रमश:...

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About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.