उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book.
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Wednesday, May 14, 2008

Hindi Literature Novel - अद-भूत : Ch-21: फिर जॉन कहा गया?

.... डिटेक्टीव्ह सॅम डिटेक्टीव बेकरके सामने बैठकर सब सुन रहा था. वह कबकी कहानी पुरी कर चूका था. लेकिन वह दर्दभरी कहानी सुनकर कमरेमें सारे लोग इतने द्रवित और अभिभूत हो गए थे की बहुत देर तक कोई कुछ नही बोला. कमरेमें एक अनैसर्गीक सन्नाटा छाया था.

एक प्रेम कहानीका ऐसा भयानक दर्दनाक अंत होगा? ....

किसीने नही सोचा था.

नॅन्सी और जॉनकी प्रेमकहानी कॅबिनमें उपस्थीत सभी लोगोंके दिलको छु गई थी.

थोडी देर बाद डिटेक्टीव सॅमने अपनी भावनाओंको काबुमें करते हूए पुछा,

'' क्या जॉनने पुलिस स्टेशनमें रिपोर्ट दर्ज की थी ?"'

'' नही ''

'' फिर ... यह सब तुम्हे कैसे पता ?''

'' क्योंकी नॅन्सीका भाई ... जॉर्ज कोलीन्सने रिपोर्ट दर्ज की थी. ''

'' लेकिन उसनेभी रिपोर्ट कैसे दर्ज की ? ... मेरा मतलब है उसे वह सबकुछ पता कैसे चला? ... क्या जॉन उसे मिला था ? '' सॅमने एकके बाद एक सवालोकी छडी लगा दी.

''नही ... जॉन उसे उस घटनाके बाद कभी नही मिला.. .'' बेकरने कहा.

'' फिर उसे खुनी कौन है यह कैसे पता चला ?'' सॅमको अब उसे सता रहे सारे सवालोंके जवाब मिलनेकी जल्दी हो रही थी.

'' कुछ महिने पहले जॉनने नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें खत लिखकर सब जानकारी लिखी थी... उसमें उसने उन चार लोगोंके नाम पते भी लिखे थे. ...''

'' फिर रिपोर्टका नतिजा क्या निकला ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.

''... इस केसपर हमनेही तहकिकात की थी... लेकिन ना नॅन्सीकी डेड बॉडी मिली थी ... ना जॉन मिला जो की इस घटना का अकेला और बहुत अहम चश्मदीद गवाह था... इसलिए केस बिना कुछ नतिजेके वैसीही लटकी रही ... और अभीभी वैसीही लटकी पडी है... ''

'' अच्छा ... जॉनका कुछ अता पता ?'' सॅमने पुछा.

'' उसके बारेमें किसीकोभी कुछ पता नही चला... उस घटनाके बाद वह कभी उसके अपने घरभी नही आया ... वह जिंदा है या मरा ... इसकाभी कुछ पता नही चला... सिर्फ उसके जॉनको आए खतसे ऐसा लगता है की वह जिंदा होना चाहिए... लेकिन अगर वह जिंदा है तो छिप क्यो रहा है? ... यही एक बात समझमें नही आती.....''

'' उसका कारण सिधा है ... '' इतनी देरसे ध्यान देकर सुन रहे सॅमके साथीने कहा.

'' हां ....उसका एकही कारण हो सकता है की ... हालहीमें जो दो कत्ल हूए उसमें जॉनकाही हाथ हो सकता है.. और इसलिएही मैने तुम्हे यहां बुलाकर यह सब जानकारी तुम्हे देना मुनासीब समझा ...'' बेकरने कहा.

'' बराबर है तुम्हारा... इस खुनमें जॉनका हाथ हो सकता है ऐसा मान लेनेकी काफी गुंजाईश है... लेकिन मुझे एक बात समझमें नही आती है की ... जब वह कमरा या मकान अंदरसे और सब तरफसे बंद होता है तब वह खुनी अंदर पहूंचता कैसे है ? ... वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है यह एक ना सुलझनेवाली पहेली बन चूकी है ''

'' अच्छा जब नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें पता चला तो उसकी प्रतिक्रीया क्या थी ? ... और अब केसके नतिजेमें देरी हो रही है इसके बारेंमे उसकी प्रतिक्रिया कैसी है ?''

'' वह आदमी पागलोंजैसा हो चूका है ... इस पुलिस स्टेशनमें उसकी हमेशा चक्कर रहती है... और केसका आगे क्या हूवा यह वह हमेशा पुछता रहता है ... वह यह सब फोन करकेभी पुछ सकता है ... लेकिन नही वह खुद यहां आकर पुछता है ... मुझे तो उसपर बहुत तरस आता है ... लेकिन अपने हाथमें जितना है उतनाही हम कर सकते है... '' बेकरने कहा.

'' इसका मतलब हालहीमें जो दो खुन हूए उसका कातिल नॅन्सीका भाई जॉर्जभी हो सकता है .. '' सॅम ने कहा.

'' आपने उसे देखना चाहिए... उसकी तरफ देखकर तो ऐसा नही लगता... '' बेकरने कहा.

'' लेकिन यह एक संभावना है जिसे हम झुटला नही सकते ...'' सॅमने प्रतिवाद किया.

डिटेक्टीव बेकरने थोडी देर सोचा और फिर हांमे अपना सर हिलाया.


क्रमश:...

Friday, May 9, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)

अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.

''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.

'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.

'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.

'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.

जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.

'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.

एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.

'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.

'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.

दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.

क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.

'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.

चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.

नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?

अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.

वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.

'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.

उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.

जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....

उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....

'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.

स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.

जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.


क्रमश:...

Monday, May 5, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-14 : चिजे अपने आप नही बदलती... हमे उन्हे बदलना पडता है

क्लासमें एक लेडी टीचर पढा रही थी. क्लासमें कॉलेजके छात्र ध्यान देकर उन्हे सुन रहे थे. उन्ही छात्रोमें जॉन और नॅन्सी बैठे हूए थे.

'' सो द मॉरल ऑफ द स्टोरी इज... कुछभी फैसला न लेते हूए बिचमेंही लटकनेसे अच्छा है कुछतो एक फैसला लेना ...'' टीचरने अबतक पढाए पाठका निष्कर्ष संक्षेपमें बताया.

नॅन्सीने छूपकर एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. दोनोंकी आखें मिल गई. दोनोंभी एक दुसरेकी तरफ देख मुस्कुराए. नॅन्सीने एक नोटबुकका पन्ना जॉनको दिखाया. उस नोटबुकके पन्नेपर बडे अक्षरोंमे लिखा था 'लायब्ररी'. जॉनने हां मे अपना सर हिलाया. उतनेमें पिरीयड बेल बजी. पहले टिचर और बादमें छात्र धीरे धीरे क्लाससे बाहर जाने लगे.

जॉन हमेशा की तरह जब लायब्ररीमें गया तब ब्रेक टाईम होनेसे वहां कोईभी छात्र नही थे. उसने नॅन्सीको ढूंढनेके लिए इधर उधर नजर दौडाई. नॅन्सी एक कोनेमे बैठकर किताब पढ रही थी. या कमसेकम वैसा दिखावा करनेकी चेष्टा कर रही थी. नॅन्सीने आहट होतेही किताबसे सर उपर उठाकर उधर देखा.

दोनोंकी नजरे मिलतेही वह वहांसे उठकर किताबोंके रॅकके पिछे जाने लगी. जॉनभी उसके पिछे पिछे जाने लगा. एकदुसरेसे कुछभी ना बोलते हूए या कुछभी इशारा ना करते हूए सबकुछ हो रहा था. उनका यह शायद रोजका दिनक्रम होगा. नॅन्सी कुछ ना बोलते हूए भलेही रॅकके पिछे जा रही थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तुफान उमड पडा था.

जो भी हो आज कुछ तो आखरी फैसला लेनाही है...

ऐसे कितने दिन तक ना इधर ना उधर इस हालमें रहेंगे...

टीचरने जो पढाए पाठका संक्षेपमें निष्कर्ष बताया था.. वह सही था...

हमें कुछ तो ठोस निर्णय लेनाही होगा...

आर या पार ...

बस अब बहुत हो गया ...

उसके पिछे पिछे जॉन रॅकके पिछे कुछ ना बोलते हूए जा रहा था. लेकिन उसके दिमागमेंभी विचारोंका सैलाब उमड पडा था.

हमेशा नॅन्सी पिरियड होनेके बाद लायब्रीमें मिलनेके लिए इशारा करती थी. ...

लेकिन आज उसने पिरियड शुरु था तबही इशारा किया..

उसके घरमें कुछ अघटीत तो नही घटा...

उसके चेहरेसे वह किसी दूविधामें लग रही थी ...

अपने घरके दबावमें आकर वह मुझे छोड तो नही देगी...

अलग अगल प्रकारके विचार उसके दिमागमें घुम रहे थे.

रॅकके पिछे कोनेमें किसीके नजरमें नही आये ऐसे जगहपर नॅन्सी पहूंच गई और पिछेसे दिवारको अपना एक पैर लगाकर वह जॉनकी राह देखने लगी.

जॉन उसके पास जाकर पहूंचा और उसके चेहरेके भाव पढनेकी कोशीश करते हूए उसके सामने खडा हो गया.

'' तो फिर तय हूवा ... आज रात ग्यारह बजे तैयार रहो ..'' नॅन्सीने कहा.

चलो मतलब अबभी नॅन्सी अपने घरके लोगोंके दबावमें नही आयी थी...

जॉनको सुकूनसा महसुस हूवा.

लेकिन उसने सुझाया हूवा यह दुसरा रास्ता कहां तक सही है? ...

यह एकदम चरम भूमीकातो नही हो रही है ? ...

'' नॅन्सी तुम्हे नही लगता की हम जरा जल्दीही कर रहे है... हम कुछ दिन रुकेंगे... और देखते है कुछ बदलता है क्या ... '' जॉनने कहा.

'' जॉन चिजे अपने आप नही बदलती... हमें उन्हे बदलना पडता है... '' नॅन्सीने दृढतासे कहा.

उनकी बहूत देर तक चर्चा चलती रही. जॉनको अभीभी उसकी भूमीका सही नही लग रही थी. लेकिने एक तरहसे उसका सहीभी था. कभी कभी ताबडतोड निर्णय लेनाही अच्छा होता है. जॉन सोच रहा था.

लेकिन इस फैसलेके लिए मै अबभी पूरी तरहसे तैयार नही हूं...

मुझे मेरे घरके लोगोंके बारेंमेंभी सोचना चाहिए...

लेकिन नही हम कितने दिन तक इस तरह बिचमें लटके रहेंगे...

हमें कुछतो ठोस कदम उठाना जरुरी है...

जॉन अपना एक फैसलेपर पहूंचकर दृढतासे उसपर कायम रहनेका प्रयास कर रहा था.

उधर रॅकके पिछे उन दोनोंकी चर्चा चल रही थी और इधर दो रॅक छोडकर एक साया छूपकर उन दोनोंकी सब बातें सुन रहा था.


क्रमश:...

Monday, April 28, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-10 : आय ऍम सॉरी

रातको होस्टेलके गलियारेमें घना अंधेरा था. गलियारेके लाईट्स या तो किसीने चोरी किये होंगे या लडकोने तोड दिए होंगे. एक काला साया धीरे धीरे उस गलियारेमे चल रहा था. और वहासे थोडीही दुरीपर जॉन, ऍन्थोनी और उसके दो दोस्त एक खंबेके पिछे छुपकर बैठे थे. उन्होने पक्का फैसला किया था की आज किसीभी हालमें इस चोरको पकडकर होस्टेलकी लगभग रोज होनेवाली चोरीयां रोकनी है. काफी समयसे वे वहां छिपकर चोरकी राह देख रहे थे. आखिर वह साया उन्हे दिखतेही उनके चेहरेपर खुशी की लहर दौड गई.

चलो इतने देरसे रुके... आखिर मेहनत रंग लाई...

खुशीके मारे उनमें खुसुर फुसुर होने लगी.

'' ए चूप रहो... यही अच्छा मौका है ... सालेको रंगे हाथ पकडनेका '' जॉनने सबको चूप रहनेकी हिदायत दी.

वे वहांसे छिपते हूए सामने जाकर एक दुसरे खंबेके पिछे छूप गए.

उन्होने चोरको पकडनेकी पुरी प्लॅनींग और तैयारी कर रखी थी. चारोंने आपसमें काम बांट लिया था. उन चारोंमें एक लडका अपने कंधेपर एक काला ब्लॅंकेट संभाल रहा था.

'' देखो... वह रुक गया ... सालेकी घोंगड रपेटही करेंगे'' जॉन धीरेसे बोला.

वह साया गलियारेमे चलते हूए एक रुमके सामने रुक गया.

'' अरे किसकी रुम है वह ?'' किसीने पुछा.

'' मेरीकी ..'' ऍन्थोनीने धीमे स्वरमे जवाब दिया.

वह काला साया मेरीके दरवाजेके सामने रुका और मेरीके दरवाजेके कीहोलमें अपने पासकी चाबी डालकर घुमाने लगा.

'' देखो उसके पास चाबीभी है '' कोई फुसफुसाया.

'' मास्टर की होगी '' किसीने कहा.

'' या डूप्लीकेट बनाकर ली होगी सालेने ''

'' अब तो वह बिलकुल मुकर नही पाएगा ... हम उसे अब रेड हॅंन्डेड पकड सकते है. '' जॉनने कहा.

जॉन और ऍन्थोनीने पिछे मुडकर उनके दो साथीयोंको इशारा किया.

'' चलो ... यह एकदम सही वक्त है '' ऍन्थोनीने कहा.

वह साया अब ताला खोलनेकी कोशीश करने लगा.

सब लोगोंने एकदम उस काले सायेपर हल्ला बोल दिया. ऍन्थोनीने उस सायेके शरीरपर उसके दोस्तके कंधेपर जो था वह ब्लॅंकेट डालकर लपेट दिया और जॉनने उस सायेको ब्लॅकेटके साथ कसकर पकड लिया.

'' पहले साले को मारो... '' कोई चिल्लाया.

सबलोग मिलकर अब उस चोरकी धुलाई करने लगे.

'' कैसा हाथ आया रे साले ... ''

'' ए साले ... दिखा अब कहां छुपाकर रखा है तुने होस्टेलका सारा चोरी किया हूवा माल''

ब्लॅंकेटके अंदरसे 'आं ऊं' ऐसा दबा हूवा स्वर आने लगा.

अचानक सामनेका दरवाजा खुला और मेरी गडबडाई हूई दरवाजेसे बाहर आगई. शायद उसे उसके रुमके सामने चल रहे धांदलीकी आहट हुई होगी. कमरेमें जल रहे लाईटकी रोशनी अब उस ब्लॅंकेटमें लिपटे चोरके शरीर पर पड गई.

'' क्या चल रहा है यहां '' मेरी घाबराये हूए हालमें हिम्मत बटोरती हूई बोली.

'' हमने चोरको पकडा है '' ऍन्थोनीने कहा.

'' ये तुम्हारा कमरा डूप्लीकेट चाबीसे खोल रहा था. '' जॉनने कहा.

उस चोरको ब्लॅंकेटके साथ पकडे हूए हालमें जॉनको उस चोरके शरीरपर कुछ अजीबसा लगा. धांदलीमें उसने क्या है यह टटोलनेके लिए ब्लॅंकेटके अंदरसे अपने हाथ डाले. जॉनने हाथ अंदर डालनेसे उसकी उस सायेपरकी पकड ढीली हो गई और वह साया ब्लॅंकेटसे बाहर आगया.

'' ओ माय गॉड नॅन्सी! '' मेरी चिल्लाई.

नॅन्सी कोलीन उनकेही क्लासमेंकी एक सुंदर स्टूडंट थी. वह ब्लॅकेटसे बाहर आई और अभीभी असंमजसके स्थितीमें जॉन उसके दोनो उरोज अपने हाथमें कसकर पकडा हूवा था. उसने खुदको छुडा लिया और एक जोर का तमाचा जॉनके कानके निचे जड दिया.

जॉनको क्या बोले कुछ समझमें नही रहा था वह बोला, '' आय ऍम सॉरी .. आय ऍम रियली सॉरी ''

'' वुई आर सॉरी ...'' ऍन्थोनीनेभी कहा.

'' लेकिन इतने रात गए तुम यहां क्या कर रही हो?'' मेरी नॅन्सीके पास जाते हूए बोली.

'' इडीयट ... आय वॉज ट्राईंग टू सरप्राईज यू... तूम्हे जनमदिनकी शुभकामनाएं देने आई थी मै..'' नॅन्सी उसपर चिढते हूए बोली.

'' ओह ... थॅंक यू ... आय मीन सॉरी ... आय मीन आर यू ओके?'' मेरीको क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था.

मेरी नॅन्सीको रुममें ले गई. और जॉन फिरसे माफी मांगनेके लिए रुममे जानेलगा तो दरवाजा उसके मुंहपर धडामसे बंद होगया.


क्रमश:...

Friday, March 7, 2008

Ch-51: आग भडक उठी (शून्य-उपन्यास)

बॉस और बाकी पुलिस टीव्हीके सामने खडे होकर सारी अमेरीकामे किसी आगकी तरह फैले दंगे फसाद की खबरे देख रहे थे. बिच बिचमें फोन बज रहा था. उसे एक पुलिस अटेन्डंट अटॆंड कर रहा था. बॉसने दुसरा न्यूज चॅनल लगाया. वहां भी वही. सब न्यूज चॅनल्सपर वही खबरे - दंगा, फसाद, लाठीचार्ज , टीयर गॅस, सब वही खबरें थी.

इतनेमें जॉन आवेशसे अंदर आया. उसकी तरफ सॅमने सहानुभूतीपूर्वक देखा. बॉसने देखकर ना देखे ऐसा किया और बाकी सब अपने अपने काममे व्यस्तता का अभिनय कर रहे थे. बॉसका ऐसा टालना उसे अच्छा नही लगा. वह लगभग चिल्लाकरही बोला,

" सर, पाचवा कत्ल अगर हम रोक नही पाए तो यही दंगे पर उतारू लोग खुन खराबा कर सकते है...फिर उनको रोकना बडा मुश्कीलही नही नामुमकीन हो जाएगा.... किसीभी हालमें हमें यह कत्ल रोकना जरुरी है. "

बॉसने एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. फिर कुछ सोचा और सॅमकी तरफ देखकर बोला,

" सॅम मुझे लगता है जॉन सही कह रहा है. तूम और और दो लोग उसके साथ जाओ और कुछ करने लायक हो तो देखो. "

फिर बॉस जॉनकी तरफ मुडा.

" आय अॅम सॉरी जॉन लेकिन मै अब इस हालमें इतनाही कर सकता हूं "

जॉनने बॉसके बोलनेमेंका व्यंग भाप लीया था... उसने उसके सादे कपडे की तरफ देखकर ताना मारा था.

जॉन कुछ बोले इससे पहले बॉसने संभलकर कहा,

'' क्योंकी कॅनॉट प्लेसको दंगाफसाद शुरु हो चूका है... मुझे वहाभी लोग लगेंगे और औरभी जगह फसाद हो सकते है... "

जॉन बॉॅसको कुछ बोले इससे पहले बॉसके लिए और एक फोन आया.

बॉस फोन अटेंड करनेके पहले जॉन और सॅमसे बोला,

"तुम जल्दी जाओ... वक्त मत बरबाद करो "

जॉन और सॅम जल्दी जल्दी बाहरकी ओर निकले.

क्रमश:...

Wednesday, March 5, 2008

Ch-50A: ऑडीओ (शून्य-उपन्यास)

जॉन, सॅम और बाकी पुलिसके अधिकारी पांचवे कत्लके वक्त कातिलको कैसा पकडना है इस बारेमे चर्चा करने लगे. जॉनने पहले सबको बोलनेका चान्स दिया और उनका कहना ध्यान देकर सुना. और सबके चर्चाका एक मध्य निकालकर कातिलको पकडनेका एक तरीका तय किया. चर्चामें उसने सबको एक सरीका अवसर और मौका दिया था. यह चर्चाका तरीका सबके लिये नया ही था. क्योंकी बॉसका तरीका अलगही रहता था. उसका डिक्टेटरशीपमें जादा विश्वास था. यह डेमोक्रॅटीक तरीका सबको पसंद आया था. इसमें सबका इन्वॉल्वमेंट होनेसे सबको प्रोत्साहन मिलता था. लेकिन उनको चिंता थी की अगर अब बॉस वहा आगया तो सब गडबड कर देगा. और वैसाही हूवा. उनकी चर्चा आधेमेंही होगी तब अचानक वहां तेजीसे बॉस आया. उसके चेहरेपर पसिना आया हूवा था. उसकी वह दशा देखकर सब लोग शांत होगए. जरुर कुछ अघटीत घटा था. उसके पिछे पिछे एक पियून एक लॅपटॉप लेकर आया.

" एक गडबड हो गई है " आतेही बॉसने कहा.

सब लोग स्तब्ध होकर बॉस क्या कहता है यह सुनने लगे.

" यह कातिल कोई अकेला आदमी ना होकर कोई संघटना होगी ... कोई बडी संघटना .. शायद टेररिस्ट संघटना"

" टेररिस्ट संघटना?" सबके मुंहसे आश्चर्योद्गार निकले.

क्योंकी वहां बैठे सबके लिए यह नई जानकारी थी. किसीनेभी इस केसको उस तरहसे नही सोचा था.

" प्रेसका फोन था.. सब तरफ गडबडी मची हूई है... उन लोगोंने इंटरनेटपर एक ऑडीओ रिलीज किया है. " बॉसने एक सांसमे बताया.

फिर बॉसने डॅनको लॅपटॉप शुरू करनेका आदेश दिया. डॅन लॅपटॉप शुरू करने लगा और बॉस आगे बोलने लगा,

" मैने अभीतक ऑडीओ सुना नही है. मुझे लगता है वह हमें सुनना चाहिए" बॉस लॅपटॉपके सामने बैठते हूए बोला.

तबतक डॅनने लॅपटॉप शुरु कर गुगल सर्च इंजीन ओपन किया. डॅनको बॉसके बोलनेसे पता चला था की पहले वह ऑडीओ फाईल इंटरनेटपर ढूंढनी पडेगी.

डॅनने सर्च स्ट्रींग टाईप करनेके पहले 'क्या सर्च स्ट्रींग दूं ' इस आविर्भावसे बॉसकी तरफ देखा.

वैसे बॉसका और डॅनका टयूनिंग अच्छा था. किसके मनमें क्या चल रहा है यह उनको एकदूसरेके साथ हमेशा रहनेसे पहलेही पता चलता था.

" झीरो मिस्ट्री" बॉसने कहा.

डॅन ने ' झीरो मिस्ट्री' सर्च स्ट्रींग देकर सर्च बटन क्लीक किया. एक पलमें सौसे उपर निले कलरकी लिंक्स कॉम्पूटरके ब्राउजरपर दिखने लगी.

सब लोग अपना जितना हो सकता है उतना सर अंदर घुसाकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगे.

" वह चौथी लिंक " बॉसने कहा.

सॅमने वह चौथी लिंक क्लीक की. एक साईट ओपन हो गई. उसपर एक ऑडीओ फाईलकी लिंक थी. प्ले और डाऊनलोड ऐसे दो ऑप्शन्स थे.

"प्ले इट डायरेक्टली" बॉस ने आदेश दिया.

सॅमने प्ले बटनपर क्लीक किया. पहले ऑडीओपर जैसे किसी चक्रवातके पहले सन्नाटा होता है वैसा सन्नाटा था. फिर एक धीरगंभीर आवाज घुमाने लगा. सब लोग एकदम चूप होकर सुनने लगे -

क्रमश:..

Tuesday, February 19, 2008

Ch-39: छुट्टीमें व्यवधान (शून्य-उपन्यास)

जॉन गाडी चला रहा था और उसके बगलमें अँजेनी बैठी हूई थी. दोनो सिधे सामने रस्तेपर देख रहे थे. एकदम शांत. काफी समयसे उन दोनोंके बिच रही अनैसर्गिक चुप्पी तोडते हूए जॉनने कहा ,

" मैने नही कहा था , यह खुनका किस्सा अभी तक खतम नही हूआ करके.."

अँजेनीने उसकी तरफ देखा.

" खुनी अभीभी खुला घुम रहा है" जॉनने आगे कहा.

" फिर जो मरा था वह कौन था? " अँजेनीने पुछा.

' बहुत सारी संभावनाए है' जॉन अँजेनीकी तरफ देखते हूए कहा.

अँजेनीने उसकी तरफ सिर्फ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" एक तो उसका खुनसे कोई वास्ता नही होगा... या फिर वह खुनीका साथी होगा.. या कीसी इस खुनसे संबंधीत संघटनाका एक क्षुद्र मेंबर होगा" जॉन ने कहा.

" लेकिन अॅलेक्सको ऐसी क्या महत्वपुर्ण जानकारी तुम्हे बतानी थी.? " अँजेनीने प्रश्न उपस्थित किया.

जॉनने कुछ तो खयालमें आये जैसा कहा ,

" देखोतो ... मेरे मोबाईलका सिग्नल आया क्या? "

" तुम्हारा मोबाईल?" प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीने पुछा.

जॉनने आंखोसे इशारा कर अँजेनीके उस तरफ सिटपर रखा उसका ओवरकोट दिखाया. अँजेनीने ओवरकोट उठाकर अपने हाथमें लिया. ओवरकोटकी जेबसे मोबाईल निकालकर उसने उसका डिस्प्ले देखा. मोबाईलका सिग्नल अब पुरी तरहसे आ चूका था.

" सिग्नल तो आया है... रुको मै उसे ट्राय करती हू"

अँजेनी अॅलेक्सका फोन ट्राय करने लगी. उसने अपने नाजूक उंगलीयोंसे कुछ बटन दबाकर मोबाईल अपने कानको लगाया. जॉन उत्कंठासे बिचबिचमें एखाद नजर उसपर डाल रहा था.

उसने कानको लगाया मोबाईल निकालकर रिडायल किया.

" क्या हूवा ?" जॉनने उत्कंठासे पुछा.

" मोबाईल स्वीच ऑफ किया हूवा है ऐसा मेसेज आ रहा है " उसने फिरसे मोबाईल कानको लगाते हूए कहा.

थोडी देर बाद उसने फिरसे रिडायल किया लेकिन वही मेसेज बार बार आ रहा था.

" उसने मोबाईल शायद बंद किया है " मोबाईल जॉनके पास देते हूए वह बोली.

जॉननेभी एक-दो बार प्रयास करके देखा. लेकिन व्यर्थ.

" मुझे लगता है उसने मोबाईल जानबुझकरही बंद कर रखा होगा. " जॉन मोबाईल अपने जेबमें रखते हूए बोला.

" जानबुझकर लेकिन क्यों? " अँजेनीने उत्सुकतावश पुछा.

" मोबाईलका संभाषण टॅप होनेकी शायद उसे आशंका होगी. " जॉनने संभावना बताई.

" ऐसा लगता है की अब उसे मिले बैगेर सच क्या है कुछ पता नही चलेगा. " अँजेनीने कहा.

जॉन कुछ ना बोलते हूए फिरसे सिधा सामने रस्तेपर देखते हूए ड्रायव्हींग करने लगा. अँजेनीभी सामने देखते हूए फिरसे अपने सोचमें डूब गई.

क्रमश:...