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Thursday, April 3, 2008

Ch-66A : झीरो मिस्ट्री (शून्य-उपन्यास) Hindi

दुसरे दिन अलग अलग हेडींगसे कातिल मिलनेकी खबरे न्यूजपेपरमें आगई.

'झीरो मिस्ट्री' सॉल्व्ड अॅट लास्ट'

'झीरो मिस्ट्री' यह दुष्मनोंकी एक अलग चाल.'

'झीरो मिस्ट्री' यह दुष्मनोंने ललकारा हूवा एक युध्द. सिर्फ ढंग जुदा'

'झीरो मिस्ट्री' के तहत पुलिसका अंदरुनी बेबनाव जाहिर '

'झीरो मिस्ट्री' यह घटना या फेनॉमेनॉ'

'झीरो मिस्ट्री' की गुत्थी सुलझानेमें आखिर डिसमिस पुलिस अफसरही कामयाब'

'झीरो मिस्ट्री' का जनक डॉ. कयूम खान'

'विनय जोशी और डॉ. कयूम खान इनका आपसी संबंध क्या?'

टीव्ही चॅनल्सपरभी आज दिनभर 'झीरो मिस्ट्री'के अलावा दुसरी कोई खबरें नही थी. एक तरफ 'झीरो मिस्ट्री'की गुत्थी सुलझानेसे लोगोंमें संतोष था तो दुसरी तरफ उस केस का गांभीर्य और आगे होनेवाले परिणाम लोगोंके चेहरेपर अलग अलग रुपसे झलक रहे थे. इस सब झुट सच के चक्करमें अलग अलग अफवाहें फैल रही थी. ऐसे वक्तमें लोगोंको एक ठोस मार्गदर्शन और 'झीरो मिस्ट्री' का सच जैसे के तैसा उनके सामने रखनेकी जरुरत थी. .

शहरमे दंगे फसाद अब कम होते नजर आ रहे थे. लेकिन बिच बिचमें अंदर जल रही आग घात प्रतिघातके स्वरुपमें बाहर आ रही थी. ऐसे वक्तमें एक स्पेशल प्रेस कॉन्फरंस लेकर लोगोंको 'झीरो मिस्ट्री' और उसके पिछे रहे उन लोगोंके असली उद्देशके बारेमें बताना बहुत जरुरी था. 'झीरो मिस्ट्री' की गुथ्थी सुलझाकर सच बाहर लाने का पुरा श्रेय जॉनको जाता था, इसमें कोई दोराय नही थी. पुलिस डिपार्टमेंटनेभी उसे जिस जोरशोरसे डिसमिस किया था उसी जोरशोरसे सरपर बिठाकर विजयमाला उसके गलेमें पहनाई गई थी. प्रेस कॉन्फरंसमे शहरकेही नही तो सारे देशके टीव्ही चॅनल्स और न्यूजपेपरके रिपोर्टरोंने भिड की थी. प्रेस कॉन्फरंन्समें जॉनका प्रवेश होतेही सबतरफ एक जल्लोष दिखने लगा. जॉनके चेहरेपर कॅमेरेके फ्लॅश गिरानेकी मानो होड लग गई हो. इतने भिडमेंभी सामने चमक रहे फ्लशकी तरह एक विचार जॉन के जहनमें आया.

अँजेनीको खोनेके बाद उसने खुदको इस केसमे पुरी तरह डूबो लिया था और केस सुलझाई थी ...

लेकिन अब बादमें क्या ?...

यह केस ठंडी पडनेके बाद यह जो भिड उसके इर्द गिर्द दिख रही थी वह छटने वाली थी... .

और फिर वह बिलकुल अकेला होनेवाला था... .

और अकेला होनेके बाद फिरसे वह निराशा... फिरसे वह अँजेनीको खोनेका दर्द...

सोच में डूबा जॉन जहां मायक्रोफोन्स किसी गुलदस्तेकी तरह एक जगह इकठ्ठा रखे हूए थे वहा पहूंच गया. वह केस सुलझानेका सम्मान और अँजनीको खोनेका दर्द एकसाथ लेकर वह आज सब रिपोर्टरोंका सामना कर रहा था. आज पहली बार पूर आत्मविश्वासके साथ वह रिपोर्टरोंके सामने खडा था.

क्रमश:...

Thursday, March 13, 2008

Ch-55: दिवारपर लिखा आखरी मेसेज (शून्य-उपन्यास)

सायरन बजाती हूए पुलिसकी गाडी एका अपार्टमेंटके सामने रास्तेके किनारे आकर रुकी. गाडीसे जल्दी जल्दी जॉन और सॅम उतर गए. अभीतक प्रेस वहां नही पहूंची थी. उतनाही जॉनको अच्छा लगा. उतरने के बाद लगभग दौडतेही वे लिफ्टतक पहूंचे. दोनो लिफ्ट एंंगेज देखकर जॉनने लिफ्टका बटन दो-तीन बार दबाकर गुस्सेसे लिफ्टके दरवाजे को लात मारी. इस बारभी खून दसवे मालेपरही हूवा था. एक पलके लिए जॉनने सिढीयोंसे उपर जानेका सोचा. लेकिन दसवे मालेपर सिढीयोंसे जानेसे थोडी देर रुकना कभीभी समझदारी थी. बार बार अपने बाए हाथपर दाहिने हाथकी मुठ्ठी जोरसे मारते हूए जॉन लिफ्टकी राह देखने लगा. सॅमभी बेचैन होकर चहलकदमी करने लगा. कभी वह एक लिफ्टके सामने खडा रहता तो कभी दुसरे लिफ्टके सामने खडा होकर यूही उसका बटन दबाता. इतनेमे बाए तरफकी पहली लिफ्ट खुली. दोनोभी जल्दी जल्दी अंदर घुस गए. अंदर जातेही सॅमने 10 नंबरका बटन दबाया. लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और लिफ्टके डिस्प्लेपर 1... 2... 3... 4... ऐसे एक के बाद एक नंबर दिखने लगे.

लिफ्टका दरवाजा खुलतेही दोनो बाहर आकर सहमेसे इधर उधर देखने लगे. बिल्डींगकी रचना थोडी जटीलही थी. जॉनने लिफ्टमें घुसरहे एक आदमीको पुछा,

"फ्लॅट नं. 15 किधर है "

वह आदमी सिर्फ दायी तरफ हाथसे इशारा करते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और कुछ पुछे इसके पहलेही लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और वह आदमी लिफ्टमें गायब होगया था. दोनोंने और कोई पुछनेके लिए मिलता है क्या यह देखा. आसपासभी कोई दिख नही रहा था. उन्होने एक पल सोचा और वे दोनो दायी तरफ निकल पडे.

जॉनने फ्लॅटके दरवाजेपर देखा. 1015 नंबर लिखा हूवा था. दोनोने एक दुसरेकी तरफ देखकर स्वीकारातत्मक सर हिलाया. दोनोभी सतर्क हो गए. सॅमने अपनी बंदूक निकाली और सामने जाकर धीरेसे दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. सॅम और जॉन सावधानीसे अंदर घुस गए. अंदर हॉलमे सब तरफ सब सामान पडा हुवा था. और उस सामानके बिचमें फर्शपर खुनके तालाबमें एक शरीर पडा हूवा था.

" माय गॉड" सॅमके मुंहसे निकल गया.

" लेट मी चेक हिज बीट "

जॉनने निचे पडे हूए शरीर की नब्ज टटोली.

जॉनने सॅमकी तरफ देखा.

सॅमने जॉनको इशारेसेही पुछा.

" ही ईज डेड" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.

सॅमने निराशासे भरी एक लंबी सांस छोडी.

और वह पुरा फ्लॅट ढूंढने के लिये अंदर चला गया.

जॉनने हमेशाकी तरह सामने दिवारपर देखा. इसबारभी खुनसे शून्य निकालनेसे कातील नही भूला था. शून्यके बिचमें खुनसे लिखनेसेभी वह नही चूका था. दूरसे कातिलने क्या लिखा है यह पहचानमें नही आ रहा था इसलिए वह दिवारके पास जाकर देखने लगा.

" शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " दिवारपर लिखा था.

दिवारपर लिखे उस मेसेजकी तरफ देखकर जॉन सोचने लगा. उधर अंदर सॅमका कुछ ढूंढनेका आवाज आ रहा था.

सोचते सोचत अचानक जॉनके चेहरेपर डर का साया छा गया.

"सॅम..." जॉनने सॅमको अपने कपकापाते स्वरमें आवाज दिया.

सॅम झटसे अपना काम छोडकर दौडतेही बाहर आ गया.

" क्या हूवा ?" सॅम जॉनके डरे हूए चेहरेकी तरफ देखकर बोला.

अबतक जॉन खुले दरवाजेकी तरफ दौड पडा था और सॅम कुछ समझ पाए इसके पहलेही जॉन दरवाजेके बाहर सॅमके नजरोंसे ओझल हो गया था.

दरवाजेके बाहरसे जॉनका आवाज आया,

" चलो ... चलो हमें जल्दी करनी पडेगी..."

" कहा ?" सॅमने दरवाजेके बाहर जाते हूए पुछा.

बाहर कॉरीडोरमें जॉन लिफ्टकी तरफ दौड पडा था. सॅमको जॉन क्यों दौड रहा है कुछ समझ नही आ रहा था.

सिर्फ उसके हरकतोंसे कुछ तो गडबड है या होनेकी संभावनाका डर झलक रहा था.

कुछ ना समझते हूए सॅमभी उसके पिछे दौडने लगा.

लिफ्टके पास पहूंचकर जॉनने लिफ्टका बटन दबाया. इत्तफाकसे लिफ्ट वही थी. लिफ्टका दरवाजा खुला.

जॉनने सॅमकी तरफ देखकर कहा, " चलो जल्दी ... हमें तुरंत निकलना चाहिए"

जॉन सॅमके लिए ना रुकते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और जोरसे दौडते हूए लिफ्टका दरवाजा बंद होनेके पहले लिफ्टमे घुस गया.

अंदर जाते हूए सॅमने दुबारा पुछा, " लेकिन ... हम कहां जा रहे है?"

" बताता हूं ' जॉन अपनी तेज हूई सांसे ठीक करने की कोशीश करते हूए बोला.

सॅम लिफ्टमें घुसकर जॉनकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए उसके पास जाकर खडा होगया और धीरे धीरे लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया.

क्रमश:...

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About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.