कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब हो गया था. वह उसकी राह देखते हूए कॉम्पूटरके पास बेसब्रीसे चहलकदमी करने लगा.
कितनी देर हूई कमांड1 बेडरूमकी तरफ गया ... अभीतक बाहर कैसे नही आया... इतना टाईम?...
वह उधर के उधरही तो नही कही बाहर चला गया ?...
कमांड2को अब चिंता होने लगी थी. कमांड2 उसे देखनेके लिए उठ गया और कमांड1 जिधर गया था उधर जाने लगा. बेडरूमके सामने आकर देखा तो बेडरुमका दरवाजा अंदर की ऒर खिंचा हूवा था. उसने धीरेसे दरवाजा धकेलकर देखा तो सामने बेडपर कमांड1 घोडे बेचकर सो रहा था. कमांड2को अपने मुंह तक आया निवाला छिन लिया गया हो ऐसा लगा. बडी मुश्कीलसे वह सब बकनेके लिए तैयार हूवा था. होशमें आनेपर वह कुछभी बताने वाला नही था. वह उसके पास गया और उसे हिलाकर उठानेकी कोशीश करने लगा. उसने उसे जोर जोरसे हिलाकर देखा. लेकिन वह निंदमेंही नही तो नशेमे चूर हो गया था. कमांड2ने थोडी देर प्रयास कर फिर उसे जगानेका विचार छोड दिया. फिर उसने सोचा की...
यह तो सो गया ... मुझे दूसरा कुछ किया जा सकता है क्या यह देखना चाहिए...
कमांड1 जो जानकारी देनेवाला था जरुर वह उसने कहीतो छिपाकर रखी होगी...
वह अगर मैने ढूंढनेका प्रयास किया तो?...
अबतक इस घरमें हमेशा उसके साथ कमांड1 रहता था. अब उसे पुरी तरह एकांत मिला था.
उसका अगर मैने फायदा उठाया तो?...
उसने निश्चय किया की इस घरका चप्पा चप्पा छान मारना चाहिए.
जरुर मुझे कुछ मिलेगा...
उसने बेडरूमसे शुरवात की. वह आवाज ना करते हूए बेडरूममें इधर उधर ढूंढने लगा. बेडरूममे कुछ खास नही मिल रहा था. इसलिए अब वह घरका बचा हूवा हिस्सा ढूंढने लगा. उधरभी उसे कुछ कामका नही मिला.
अचानक उसके खयालमें आया की...
'अरे कमांड1ने तो कॉम्प्यूटर शुरुही रखा हूवा है...'
वह तेजीसे काम्प्यूटरके पास गया. देखा तो काम्प्यूटर शुरुही नही कमांड1का मेलबॉक्सभी खुला था. कमांड2के चेहरेपर एक विजयी मुस्कुराहट चमकने लगी. वह झटसे काम्प्यूटरके सामने कुर्सीपर बैठ गया. और बिना वक्त गवाये कमांड1की मेल्स चेक करने लगा. बहुत सारी मेल्स थी. वह एक एक खोलकर उसपरसे तेजीसे अपनी पैनी नजर घुमाने लगा. कुछ खास कोई नही मिल रहा था. अचानक एक मेल खोलनेके बाद उसके चेहरेपर फिरसे मुस्कुराहट आ गई. उस मेलमे ऐसी कुछ जानकारी थी की जो आज कमांड1 उसे आज शायद बताने वाला था. उसने वह मेलपर उपर उपरसे एक नजर दौडाई. फिर अपने जेबसे युएसबी ड्राईव्ह निकालकर कॉम्प्यूटरको लगाया और वह मेल अटॅचमेंटके साथ अपने युएसबी ड्राईव्हमे कॉपी की. कॉपी होनेके बाद युएसबी ड्राईव्ह निकालकर उसने अपने जेबमें रखा. जिधर कमांड1 सोया था उस बेडरुमकी तरफ एकबार देखकर उसने तसल्ली की और फिर बिनधास्त वह मेल पढने लगा. कभी उसकी आंखोमे आश्चर्य दिखता तो कभी चेहरेपर मुस्कुराहट.
क्रमश:...
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Saturday, January 19, 2008
Ch-19: चाल फंसी? ... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
3:30 PM
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Labels: 100 days community, aaryabhatta, ancient books, ancient indian history, astrology, code language, hindi history, hindi sangraha, indian astrology, indian palmistry, palmistry, rahul, Vedas, vidya
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