जॉनकी कार जैसी तेज गतिसे दौड रही थी उसी गतीसे उसके खयालात भी दौड रहे थे. उसके पास दाए तरफ अँजेनी बैठी हूई थी. जॉन गाडी ड्राईव्ह कर रहा था. वह भलेही जॉनके पास बैठी थी, लेकिन उसे अकेलापन महसूस हो रहा था. क्योंकी भलेही जॉन कारमें उसके पास बैठा हूवा था लेकिन उसके खयाल उसे कही औरही ले गए थे. धीरे धीरे गाडीने शहरका हिस्सा पिछे छोड दिया. अब रास्तेके किनारे सिर्फ कुछही घर खिडकीसे दिख रहे थे. धीरे धीरे वह भी दिखना बंद होगए. कुछ देर बाद गाडी चारो तरफसे हरे हरे पेढ, हरे भरे खेत, हरे टीलोंसे भरे स्वर्गतुल्य प्रदेशसे गुजरने लगी. रास्तेके दोनो तरफ आखोंको ठंडक पहूचानेवाली हरीयाली फैली हूई थी. अँजेनीने जॉनके तरफ देखा. वह अभीभी अपने सोचमें डूबा हूवा था.
" तूम भलेही मेरे पास बैठे हो लेकिन तूम अभीभी उस खुनके केसमें उलझे हूए लगते हो. " अँजेनी उसके तरफ देखकर बोली.
अँजेनीके बोलनेसे वह खयालोंसे बाहर आगया.
" हां.... मतलब..ऩही... वैसा नही.., " वह गडबडाकर बोला.
" मै समझ सकती हू की तुम्हारे बॉसने तुम्हारे बारेमें जो किया वह कुछ ठिक नही किया. लेकिन कभी कभी ऐसी चिजोंपर अपना कोई बस नही चलता. देखोना मेरे बारेमें इस नियतीने कहां ठिक किया.. " सानी की याद आकर वह बोली.
उसे क्या बोले कुछ समझमें नही आ रहा था. गाडी चलाते वक्त उसने सिर्फ उसकी तरफ एक प्रेम भरा कटाक्ष डाला.
इतनेमें वातावरणमें पाणी के बहनेकी आवाज गुंजने लगी.
" यहा कहीं वॉटर फॉल बह रहा है शायद... " वह बात बदलनेके उद्देशसे बोला.
" वो देखो उधर ... कितना सुंदर! " दु:खके सायेसे बाहर आते हूए अँजेनी उत्साहपुर्वक बोली.
उसके चेहरेपर किसी मासूम बच्चे जैसे भाव झलक रहे थे.
स्वच्छ शुभ्र पाणी मधूर आवाज करते हूए बह रहा था.
" वाव, कितना सुंदर!" उसने दर्शाए दृष्यकी तरफ देखकर जॉनके मुंहसे निकल गया. .
" कितनी समानता है आदमीके जिवनमें और इस पाणीमें " वह फिरसे दुखकी सायेमें प्रवेश करते हूए बोली.
" कैसे क्या ?" जॉनने पुछा.
अनजानेमें जॉनके चेहरेपर अपराधी भाव आगए. अगर मै सोचमें डूबा नही होता तो उसे उसकी दर्दभरी यादें नही आती. अब उसके बिते दिनोंकी यादोंसे बाहर निकालनेके लिए वह उससे जादासे जादा बोलनेकी कोशीश करने लगा.
" देखो ना. यह पाणी एकबार उपरसे गिरा की उसकी जीवनयात्रा शुरु हो जाती है और फिर उस यात्रा का कोई अंत नही होता. वह पाणी आखीर समुंदरतक पहूंचनेतक उसे रुकनेकी कोई गुंजाईश नही होती. " अँजेनी भावूकतासे बोली.
" वह उधर देखो..., हिरन कैसे कुद कुदकर दौड रहे है. " जॉन अचानक एक तरफ निर्देश करते हूए बोला.
जॉनकी तरफसे खिडकीसे स्प्रींग बग्जका एक बडासा समुह गाडीकी आहटसे कुदकर दौडता हूवा दिखाई दिया.
" हाऊ स्वीट! कितना सुंदर!" अँजेनीके मुंहसे निकल गया.
उसकी आंखे खुशीसे चमक रही थी.
तबतक गाडी आगे निकल गई और वह समुह पिछे रह गया. अँजेनी पिछे मुड मुडकर गाडी के पिछेके ग्लाससे वह समुह जबतक दिख रहा था तबतक देख रही थी.
" अपना कॉटेजभी आगे कही इसी झरनेके किनारे होगा " जॉनने कहा.
" क्या वहां भी यह झरना है ! " वह खुशीसे बोली.
" हां वह तो ऐसाही कुछ बोल रहा था. " जॉनने कहा.
क्रमश:...
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Friday, February 8, 2008
Ch-32: व्हॅकेशन (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:24 AM
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Labels: amir, bolywod, bolywood, boolywood, chand, chand tare, dard, daud, hindi bollywood, hindi books, hindi cinema, jamin, jeevan, jivan, khidki, samundar, samunder, tare, tare jamin par
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