उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण)
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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण)
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Thursday, June 26, 2008

Neurology CH 49 Horror Suspense Thriller Novel - Ad-Bhut

ऍंथोनी कॉम्प्यूटरपर बैठा था और एक काली बिल्ली जिसके गलेमें काला बेल्ट पहना था वह उसके इर्दगिर्द खेल रही थी. जिस टेबलपर कॉम्प्यूटर रखा था उस टेबलपर वायरके टूकडे, बिल्लीके गलेमे पहननेके बेल्टस, और कुछ इलेक्ट्रनिक्सके छोटे छोटे उपकरण इधर उधर फैले हूए थे. ऍंथोनीका जिस दिवारकी तरफ मुंह था उस दिवारपर न्यूरॉलॉजी और ब्रेनकी तरह तरहकी तस्वीरे लटकाई हूई थी.

ऍंथोनीने बिजलीकी चपलतासे कीबोर्डके और माऊसके कुछ बटन्स दबाए तो उसके कॉम्प्यूटर स्क्रिनपर एक सॉफ्टवेअर ओपन हो गया. उस सॉफ्टवेअरकेभी अलग अलग मेनु, अलग अलग बटन्स और टेक्स्ट बॉक्सेस स्क्रिनपर दिखने लगे. उस सॉफ्टवेअरके अलग अलग बटन्समेसे एक बटनपर ऍंथोनीने माऊससे क्लीक किया. उस बटनपर 'अटॅक' ऐसा लिखा हूवा था. अचानक उसके इर्दगिर्द एक टेडीबिअरके साथ खेल रहे उस बिल्लीने उग्र स्वरुप इख्तीयार लिया और वह उस टेडी बिअरपर टूट पडी. इतनी क्रुरतासे वह बिल्ली उस टेडी बिअरपर टूट पडी की कुछ क्षणमेंही उसने उस टेडी बिअरके अपने दातसे फाडकर और तोडकर छोटे छोटे टूकडे कर दिए. बिल्ली जब उस टेडी बिअरपर हमला कर रही थी तब ऍंथोनी बडे अभीमानसे उस बिल्लीकी तरफ देख रहा था. आखिर जब उस बिल्लीने उस टेडी बिअरको पुरी तरहसे फाड दिया और तोड दिया, एक विजयी मुस्कुराहट ऍंथोनीके चेहरेपर फैल गई.

इतनेमें अचानक ऍंथोनीको सामने दरवाजेके पास किसी चिजकी आहट हो गई. ऍंथोनी सबकुछ वही वैसाही छोडकर सामने दरवाजेके पास गया. दरवाजा खोला तो उसने दरवाजेमें सामने न्यूजपेपर पडा पाया. उसने उसे उठाया, न्यूज पेपरके पन्ने पलटते हूए वह घरमें वापस आया और पन्ने पलटते हूएही दरवाजा बंद कर लिया. अचानक न्यूज पेपरके एक खबरने उसका ध्यान आकर्षीत किया. वह खबर वह गंभीरतासे पढते हूए अपने कॉम्प्यूटरके पास आया. वह कुर्सीपर बैठ गया और वह खबर ध्यान लगाकर पढने लगा.

वह जो खबर पढ रहा था उसका हेडींग था ' नॅन्सीके भाईने 'उन' चारोंपर केस कर दी '.

और उस खबरके निचेही क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल और स्टिव्हनके फोटो थे. उसने वह पेपर सामने टेबलपर कॉम्प्यूटरके पास रख दिया और वह सोचमें डूब गया. नॅन्सीको उन चारोंने बलात्कार कर मारनेके बाद जब वह उनके पास पैसे मांगनेके लिए गया तबका संवाद उसे याद आने लगा ....


'' कही तुम लोगोंने उस लडकीका खुन तो नही किया ?'' ऍंथोनी किसी तरहसे हिम्मत जुटाकर बोला.

'' तुम नही ... हम ... हम सब लोगोंने '' क्रिस्तोफरने उसके वाक्यको सुधारा.

'' एक मिनट ... एक मिनट... तुम लोगोने अगर उस लडकीको मारा होगा... तो यहां कहा मेरा संबंध आता है '' ऍंथोनीने अपना बचाव करते हूए कहा.

'' देखो .. अगर पुलिसने हमें पकड लिया... तो वह हमें पुछेंगे... की लडकीका अता पता तुम्हे किसने दिया...?..'' रोनॉल्डने कहा.

''... तो हमने भलेही ना बतानेकी ठान ली फिरभी हमें बतानाही पडेगा... '' पॉलने अधूरा वाक्य पुरा किया.

'' ... की हमें हमारे जिगरी दोस्त ऍंथोनीने मदत की '' पॉल शराबके नशेमें बडबडाया.

'' देखो .. तुम लोग बिना वजह मुझे इसमें लपेट रहे हो.. '' ऍंथोनी अब अपना बचाव करने लगा था.

"' लेकिन दोस्तो ... एक बडी अजिब चिज होनेवाली है '' क्रिस्तोफरने मंद मंद मुस्कुराते हूए कहा.

'' कौनसी ?'' रोनॉल्डने पुछा.

'' की पुलिसने हमें अगर पकडा और बादमें हमें फांसी होगई ..'' क्रिस्तोफरने बिचमें रुककर अपने दोस्तोंकी तरफ देखा. वे एकदम सिरीयस हो गए थे.

'' अबे ... सालो... मेरा मतलब है अगर हमें फांसी होगई ...'' क्रिस्तोफरने स्टिव्हनकी पिठ हलकेसे थपथपाते हूए कहा.

पॉल शराबका ग्लास सरपर रखकर अजीब तरहसे नाचते हूए बोला, '' हां ... हां अगर हमें फांसी होगई तो...''

ऍंन्थोनीको छोडकर सारे लोग उसके साथ हंसने लगे.

फिरसे कमरेका वातावरण पहले जैसा होगया.

''हां तो अगर हमें फांसी होगई ... तो हमें उसके बारेंमे कुछ खांस बुरा नही लगेगा... क्योंकी आखिर हमने मिठाई खाई है ... लेकिन इस बेचारे ऍंथोनीको मिठाई हलकीसी चखनेकोभी नही मिली ... उसे मुफ्तमेंही फांसीपर लटकना होगा. '' क्रिस्तोफरने कहा.

कमरेंमे सब लोग, सिर्फ एक ऍंन्थोनीको छोड, जोर जोरसे हंसने लगे.


..... ऍंथोनी अपने दिमागमें चल रहे सोचके चक्रसे बाहर आगया.

अब अगर यह केस ऐसीही चलती रही तो कभीना कभी क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल और स्टिव्हन अपनेको इसमें घसीटने वाले है...

फिर हमभी इस केसमें फंस जायेंगे...

नही ऐसा कतई नही होना चाहिए... .

मुझे कुछ तो रास्ता निकालनाही पडेगा ...

सोचते हूए ऍंथोनी अपने इर्दगिर्द खेल रहे उस बिल्लीकी तरफ देख रहा था. अचानक एक विचार उसके दिमागमें कौंध गया और उसके चेहरेपर एक गुढ मुस्कुराहट दिखने लगी.

अगर मैने इन चारोंको रास्ते से हटाया तो कैसा रहेगा?...

ना रहेगा बास न बजेगी बांसुरी...


क्रमश:...

Thursday, April 17, 2008

Ch-3 : पोस्टमार्टम रिपोर्ट ( hindi Novels - अद्-भूत ) Hindi Sahitya

डिटेक्टीव्ह सॅम अपने पुलिस स्टेशनमें अपने ऑफीसमें बैठा था. उतनेमें एक ऑफीसर वहा आ गया. उसने पोस्टमार्टमके कागजात सॅमके हाथमें थमा दीये. जब सॅम वह कागजात उलट पुलटकर देख रहा था वह ऑफिसर उसके बगलमें बैठकर सॅमको इन्वेस्टीगेशनके बारेमें और पोस्टमार्टमके बारेमें जानकारी देने लगा.

" मौत गला कटनेसे हूई है, और गला जब काटा गया तब स्टीव्हन शायद निंदमें होगा ऐसा इसमें लिखा है लेकिन कातिलने कौनसा हथीयार इस्तेमाल किया गया होगा इसका कोई पता नही चल रहा है. " वह ऑफिसर जानकारी देने लगा. .

" ऍ़मॅझींग ?" डिटेक्टीव सॅम मानो खुदसेही बोला.

'' और वहा मीले बालोंका क्या ?''

'' सर हमने उसकी जांच की ... लेकिन वे बाल आदमीके नही है ''

'' क्या आदमीके नही ? ...''

'' फिर शायद किसी भूतके होंगे... .'' वहां आकर उनके बातचीतमें घुसते हूए एक ऑफिसरने मजाकमें कहा.

भलेही उसने वह बात मजाकमें कही हो लेकिन वे एकदुसरेके मुंहको ताकते हूए दोतीन पल कुछभी नही बोले . कमरेमे एक अजीब अनैसर्गीक सन्नाटा छाया हूवा था.

'' मतलब वह कातिलके कोट के या जर्कीनके हो सकते है...'' सॅमके बगलमें बैठा ऑफिसर बात को संभालते हूए बोला.

'' और उसके मोटीव्हके बारेमें कुछ जानकारी ?''

'' घरकी सारी चिजे तो अपने जगह पर थी... कुछ भी किमती सामान चोरी नही गया है ... और घरमें कहीभी स्टीव्हनके हाथके और उंगलीयोंके निशानके अलावा और किसीकेभी हाथके या उंगलीयोंके निशान नही मिले... '' ऑफिसरने जानकारी दी.

'' अगर कातील भूत हो तो उसे किसी मोटीव्हकी क्या जरुरत?'' फिरसे वहां खडे अफसरने मजाकमें कहा.

फिर दो तीन पल सन्नाटेमें गए.

'' देखो ऑफिसर ... यहा सिरीयस मॅटर चल रहा है... आप कृपा करके ऐसी फालतू बाते मत करो...'' सॅमने उस अफसरको ताकीद दी.

'' मैने स्टीव्हनकी फाईल देखी है ... उसका पहलेका रेकॉर्ड कुछ उतना अच्छा नही... उसके खिलाफ पहलेसेही बहुत सारे गुनाहोके लिए मुकदमें दर्ज है... कुछ गुनाह साबीतभी हूए है और कुछपर अबभी केसेस जारी है... इससे ऐसा लगता है की हम जो केस हॅन्डल कर रहे है वह कोई आपसी दुष्मनी या रंजीशकी हो सकती है....'' सॅम फिरसे असली बात पर आकर बोला.

'' कातिलने अगर किसी गुनाहगारकोही मारा हो तो... '' बगलमें खडे उस ऑफिसरने फिरसे मजाक करनेके लिए अपना मुंह खोला तो सॅमने उसके तरफ एक गुस्सेसे भरा कटाक्ष डाला.

'' नही मतलब अगर वैसा है तो... अच्छाही है ना... एक तरहसे वह अपनाही काम कर रहा है... शायद जो काम हमभी नही कर पाते वह काम वह कर रहा है '' वह मजाक करनेवाला ऑफिसर अपने शब्द तोलमोलकर बोला.

'' देखो ऑफिसर ... हमारा काम लोगोंकी सेवा करना और उनकी हिफाजत करना है...''

'' गुनाहगारोंकीभी ?'' उस ऑफिसरने व्यंगात्मक ढंगसे कडवे शब्दोमें पुछा.

इसपर सॅम कुछ नही बोला. या फिर उसपर बोलनेके लिए उसके पास कुछ लब्ज नही थे. .

क्रमश:...

Wednesday, April 16, 2008

Ch-2 : सबूत ( hindi upanyas - अद्-भूत ) Hindi

सुबह सुबह रास्तेपर लोगोंकी अपने अपने कामपर जानेकी जल्दी चल रही थी. इसलिए रास्तेपर काफी चहलपहल थी. ऐसेमें अचानक एक पुलिसकी गाडी उस भिडसे दौडने लगी. आसपासका माहौल पुलिसके गाडीके सायरनकी वजहसे गंभीर हो गया. रास्तेपर चलरहे लोक तुरंत उस गाडीको रस्ता दे रहे थे. जो पैदल चल रहे थे वे उत्सुकतासे और अपने डरे हूए चेहरेसे उस जाती हूई गाडीकी तरफ मुड मुडकर देख रहे थे. वह गाडी निकल जानेके बाद थोडी देर माहौल तंग रहा और फिर फिरसे पहले जैसा नॉर्मल होगया.


एक पुलिसका फोरेन्सीक टीम मेंबर बेडरुमके खुले दरवाजेके पास कुछ इन्वेस्टीगेशन कर रहा था. वह उसके पास जो बडा जाडा लेन्स था उसमेंसे जमीनपर कुछ मिलता है क्या यह ढुंढ रहा था. उतनेमें एक अनुशासनमे चल रहे जुतोंका 'टाक टाक' ऐसा आवाज आगया. वह इन्व्हेस्टीगेशन करनेवाला पलटकर देखनेके पहलेही उसे कडे स्वरमें पुछा हूवा सवाल सुनाई दिया '' बॉडी किधर है ? ''

'' सर इधर अंदर ..'' वह टीम मेंबर अदबके साथ खडा होता हूवा बोला.

डिटेक्टीव सॅम व्हाईट, उम्र साधारण पैंतिस के आसपास, कडा अनुशासन, लंबा कद, कसा हूवा शरीर , उस टीममेंबरने दिखाए रास्तेसे अंदर गया.

डिटेक्टीव सॅम जब बेडरुममें घुस गया तब उसे स्टीवनका शव बेडपर पडा हूवा मिल गया. उसकी आखें बाहर आयी हूई और गर्दन एक तरफ ढूलक गई हूई थी. बेडपर सबतरफ खुन ही खुन फैला हूवा था. उसका गला काटा हूवा था. बेडकी स्थीतीसे ऐसा लग रहा था की मरनेके पहले स्टीव्हन काफी तडपा होगा. डिटेक्टीव सॅमने बेडरुममें चारो तरफ अपनी नजर दौडाई. फोरेन्सीक टीम बेडरुममेंभी तफ्तीश कर रही थी. उनमेंसे एक कोनेमें ब्रशसे कुछ साफ करने जैसा कुछ कर रहा था तो दुसरा कमरेंमे अपने कॅमेरेसे तस्वीरें लेनेमें व्यस्त था.

एक फोरेन्सीक टीम मेंबरने डीटेक्टीव सॅमको जानकारी दी -

" सर मरनेवालेका नाम स्टीव्हन स्मीथ'

' फिंगरप्रींटस वैगेरे कुछ मिला क्या?"

' नही कमसे कम अबतक तो कुछ नही मिला '

डिटेक्टीव सॅमने फोटोग्राफरकी तरफ देखते हूए कहा, '' कुछ छुटना नही चाहिए इसका खयाल रखो''

'' यस सर '' फोटोग्राफर अदबके साथ बोला.

अचानक सॅमका ध्यान एक अजीब अप्रत्याशीत बात की तरफ आकर्षीत हूवा .

वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेका लॅच और आसपासकी जगह टूटी हूई थी.

'' इसका मतलब खुनी शायद यह दरवाजा तोडकर अंदर आया है '' सॅमने कहा.

जेफ, लगभग पैतीसके आसपास, छोटा कद, मोटा, उसका टीम मेंबर आगे आया, '' नही सर, असलमें यह दरवाजा मैने तोडा... क्योंकी हम जब यहां पहूंचे तब दरवाजा अंदरसे बंद था. ''

'' तुमने तोडा ?'' सॅमने आश्चर्यसे कहा.

'' यस सर''

'' क्या फिरसे अपने पहलेके धंदे शुरु तो नही किये ?'' सॅमने मजाकमें लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना दिखाते हूए कहा.

'' हां सर ... मतलब नही सर''

सॅमने पलटकर एकबार फिरसे कमरेमें अपनी पैनी नजर दौडाई, खासकर खिडकीयोंकी तरफ देखा. बेडरुमको एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी. वह बंद रहना लाजमी था क्योंकी रुम एसी थी.

'' अगर दरवाजा अंदरसे बंद था ... और खिडकीभी अंदरसे बंद थी ... तो फिर कातिल कमरेमें कैसे आया... ''

सब लोग आश्चर्यसे एकदुसरेकी तरफ देखने लगे.

'' और सबसे महत्वपुर्ण बात की वह अंदर आनेके बाद बाहर कैसे गया?'' जेफने कहा.

डिटेक्टीव्हने उसकी तरफ सिर्फ घुरकर देखा.

अचानक सबका खयाल एक इन्वेस्टीगेटींग ऑफिसरने अपनी तरफ खिंचा. उसको बेडके आसपास कुछ बालोंके टूकडे मिले थे.

'' बाल? ... उनको ठिकसे सिल कर आगेके इन्व्हेस्टीगेशनके लिए लॅबमें भेजो ' सॅमने आदेश दिया.

क्रमश:...

Tuesday, April 15, 2008

Ch-1 : चिख ( hindi novel - अद्-भूत ) Hindi

घना अंधेरा और उपरसे उसमें जोरोसे बरसती बारीश. सारा आसमंत झिंगुरोंकी 'किर्र' आवाजसे गुंज रहा था. एक बंगलेके बगलमें खडे एक विशालकाय वृक्षपर एक बारीशसे भिगा हूवा उल्लू बैठा हूवा था. उसकी इधर उधर दौडती नजर आखीर सामने बंगलेके एक खिडकीपर जाकर रुकी. वह बंगलेकी ऐकलौती ऐसी खिडकी थी की जिससे अंदरसे बाहर रोशनी आ रही थी. घरमें उस खिडकीसे दिख रहा वह जलता हुवा लाईट छोडकर सारे लाईट्स बंद थे. अचानक वहा उस खिडकीके पास आसरेके लिए बैठा कबुतरोंका एक झुंड वहांसे फडफडाता हूवा उड गया. शायद वहां उन कबुतरोंको कोई अदृष्य शक्तीका अस्तीत्व महसुस हूवा होगा. खिडकीके कांच सफेद रंगके होनेसे बाहरसे अंदरका कुछ नही दिख रहा था. सचमुछ वहा कोई अदृष्य शक्ती पहूंच गई थी ? और अगर पहूंची थी तो क्या उसे अंदर जाना था? लेकिन खिडकी तो अंदर से बंद थी.


बेडरुममें बेडपर कोई सोया हूवा था. उस बेडवर सोए सायेने अपनी करवट बदली और उसका चेहरा उस तरफ हो गया. इसलिए वह कौन था यह पहचानना मुश्कील था. बेडके बगलमें एक ऐनक रखी हूई थी. शायद जो भी कोई सोया हूवा था उसने सोनेसे पहले अपनी ऐनक निकालकर बगलमें रख दी थी. बेडरुममे सब तरफ दारुकी बोतलें, दारुके ग्लास, न्यूज पेपर्स, मासिक पत्रिकाएं इत्यादी सामान इधर उधर फैला हूवा था. बेडरुमका दरवाजा अंदरसे बंद था और उसे अंदरसे कुंडी लगाई हूई थी. बेडरुमको सिर्फ एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी - क्योंकी वह एक एसी रुम थी. जो साया बेडपर सोया था उसने फिरसे एकबार अपनी करवट बदली और अब उस सोए हुए साएका चेहरा दिखने लगा. स्टीव्हन स्मीथ, उम्र लगभग पच्चीस छब्बीस, पतला शरीर, चेहरेपर कहीं कहीं छोटे छोटे दाढीके बाल उगे हूए, आंखोके आसपास ऐनककी वजहसे बने काले गोल गोल धब्बे. वह कुछतो था जो धीरे धीर स्टीव्हनके पास जाने लगा. अचानक निंदमेंभी स्टीव्हनको आहट हूई और वह हडबडाकर जग गया. उसके सामने जो भी था वह उसपर हमला करनेके लिए तैयार होनेसे उसके चेहरेपर डर झलक रहा था, पुरा बदन पसिना पसिना हुवा था. वह अपना बचाव करनेके लिए उठने लगा. लेकिन वह कुछ करे इसके पहलेही उसने उसपर, अपने शिकारपर हमला बोल दिया था. पुरे आसमंतमें स्टीव्हनकी एक बडी, दर्दनाक, असहाय चिख गुंजी. और फिर सब तरफ फिरसे सन्नाटा छा गया ... एकदम पहले जैसा...


क्रमश:...

Saturday, February 16, 2008

Ch-37: चांदनी रात (शून्य-उपन्यास)

आधी रात बित चूकी थी. बाहर आकाशमें पूर्णीमा का चांद अपनी सफेद रोशनी सब तरफ फैला रहा था. बहते पाणी की मधूर आवाज और चांद का धूसर प्रकाश कॉटेजमें आ रहा था. दोनो बेडपर लेटे हूए थे और जॉनकी उंगलीयां अँजेनीके मुलायम जिस्मसे खेल रही थी. उसका हाथ जिस्मसे खेलते खेलते धीरे धीरे निचे सरकने लगा.

" अंगुठी लानेकी इतनी क्या जल्दी थी. ? " अँजेनीने एक मंद मुस्कान देते हूए उसके निचे खिसकते हूए हाथको अपने हाथमें पकडते हूए कहा.

" जानेवाले वक्तको तो मै रोक नही सकता लेकिन वह वक्त व्यर्थ ना जाए इसका खयाल मुझे रखनाही चाहिए." उसे बाहोंमे भरकर कसकर पकडते उसने कहा.

" अच्छा" उसने शरारतभरी हंसी बिखेरते हूए उसे दूर धकेला.

वह उसे फिरसे पकडनेके लिए लपका. वह उसके शिकंजेसे बचनेके लिए बेडसे निचे उतर गइ. जॉनभी अब उसे पकडनेके तडपने लगा. वह इधर दौडते हूए उसके पहूंचसे दूर दूर भाग रही थी. अब जॉनभी जिदपर अड गया. वहभी बेडसे निचे उतरते हूए उसके पिछे लपका. वह खिलखिलाती हूए सिढीयोंकी तरफ लपकी. वह भी उसका पिछा करने लगा.

सिढीयोंसे दौडते हूए आखीर अँजेनी टेरेसपर आकर पहूंची. जॉनभी उसके पिछे पिछे टेरेसपर पहूंचा. उपर टेरेसपर खुला आकाश, आसमानमें चमकती चांदनी और चांद की दूधसी सफेद रोशनी बहुत आकर्षक लग रही थी. और उपरसे चांदके रोशनीमें चमकता हूवा बहता पाणीभी दिख रहा था. वह उस चमकते बहते पाणीकी तरफ देखकर मानो खो सी गई.

" देखो देखो कितना सुंदर दिख रहा है वह चमकता पाणी " उसने कहा.

तबतक जॉनने पिछेसे आकर उसे अपनी बाहोंमे भर लिया था.

" लेकिन इस चांदकी रोशनीमें चमकते तुम्हारे चेहरेसे यकिनन सुंदर नही . " उसने कहा.

वह उसकी खुली लंबी, गोरी गोरी गर्दनके साथ अपने व्याकुल होठोंसे खेलने लगा.

उसका जिस्मभी अब तपने लगा था.

जॉनने उसे पलटाकर उसका चेहरा अपने चेहरेके सामने लाया और अपनी पकड और मजबुत करते हूए अपने गरम होंठ उसके होठोंपर रख दिए.

वहभी अब उसे आवेगके साथ प्रतिसाद देने लगी .

उसने उसके पिठको ढंके हूए उसके लंबे घने बालोको एक हाथसे बाजू हटाया और वह उसके टॉपकी पिठपर बंधी हूई लेस छोडने लगा.

अँजेनी उसके सिनेके बालोंसे खेलते हूए उसके शर्टके बटन निकालने लगी.

अब उन्हे एकदुसरेंके सांसमे भरी आर्द्रता और गर्मी महसूस हो रही थी.

" जॉन आय लव्ह यू व्हेरी मच" उसके मुंहसे अपनेआप निकल गया.

" आय टू" बोलते हूए उसने उसे टेरेसके खुले फ्लोवरपर अपने और उसके निकाले हूए कपडोका बिस्तर बनाकर धीरेसे फुलोजैसी नाजूकताके साथ उसपर लिटाया.

अब दोनोभी खुले टेरेसपर बिलकुल विवस्त्र होकर आवेगके साथ एकदूसरेसे लिपट गए थे.

चांदके सफेद रोशनीमें , बहते पाणीके मधूर संगीतमें, एकदुसरेकी उत्कट भावनावोंको प्रतिसाद देते हूए उस अंधेरी रातमें वे अपने मधूर मिलनमें प्यारसे धीरे धीर रंग भरने लगे.

क्रमश:..

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About Hindi

Hindi is the name given to an Indo-Aryan language, or a dialect continuum of languages, spoken in northern and central India (the "Hindi belt")Native speakers of Hindi dialects between them account for 41% of the Indian population (2001 Indian census). That is the reason because of which the entertainment industry in India mainly use Hindi. And the idustry which is also called as bollywood is the second largest industry producing movies in the world. As defined in the Constitution, Hindi is the official language of India and is one of the 22 scheduled languages specified in the Eighth Schedule to the Constitution. Official Hindi is often described as Modern Standard Hindi, which is used, along with English, for administration of the central government. Standard Hindi is a sanskritised register derived from the khari boli dialect. Urdu is a different, persianised, register of the same dialect. Taken together, these registers are historically also known as Hindustani.