उपन्यास - अद्-भूत
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.
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Wednesday, March 12, 2008

Ch-54: हिलव्ह्यू अपार्टमेंट (शून्य-उपन्यास)

जॉन और सॅम कार्पोरेशन आफिससे बाहर आ रहे थे. बाहर आते वक्त लोगोंकी भिड, इधरसे उधर फाइल्स ले जानेवाले ऑफिस बॉइज उनके बिचमें आ रहे थे. उस भिडसे रास्ता निकालते हूए वे ऑफिसके बाहर मैदानमें आगए. मैदानमें आनेके बाद कहा उन्हे अच्छा लगा.

" सर , अब क्या करेंगे ?" सॅमने जॉनके साथ चलते चलते कहा.

वैसे देखा जाए तो अब केसका पुरा चार्ज ऑफीशियली सॅमके हाथमें था. फिरभी वह उसके डिसमीस हूए बॉस जॉनका बडप्पन नही भूला था.

" मुझे लगता है बॉसने अपनेसाथ जो दो लोग दिए है उनको हम पहले इन दो जगह पर निगरानी करनेके लिए तैनात कर देंगे. ."

" हां ... मुझे लगता है यू आर राईट '' सॅम अपने जेबसे मोबाईल निकालते हूए बोला.

सॅमने एक नंबर डायल किया.

" हॅलो ... अँथानी ... देखो ... हमें पाचवे खुनके तीन पॉसीबल अॅड्रेसेस मिले है ... उसमेंका एक अॅड्रेस मै तुम्हे बताता हूं ... वहां तुम्हे जल्दसे जल्द निगरानीके लिए जाना है... हां अॅड्रेस लिख लो..."

सॅमने एक निवासीका नाम और अॅड्रेस अँथनीको बताया.

वह आगे बोला , "... और फौरन उधर जावो ... उसके जानको खतरा है..."

सॅमने फोन कट कर दिया. फिर उसने और एक नंबर डायल किया. उसके साथ दिए दुसरे पुलिसकोभी दुसरे एक अॅड्रेसपर फौरन तैनात होनेके लिए कहा.

" अब इस तिसरे अॅड्रेसका क्या करेंगे?...बॉसने तो अपने साथ सिर्फ दो लोग ही दिये थे..." जॉनने सॅमसे पुछा.

" एक काम करेंगे ... बॉसको फोन करके अपना अबतकका प्रोग्रेस बताएंगे और और एक जण को मांग लेंगे .. ताकी उसको हम इस तिसरे पत्ते पर तैनात कर सकेंगे"

" बॉस और एक आदमी हमें देगा ? ... मुझे तो संदेह है " जॉनने अपना संदेह व्यक्त किया.

" देखते तो है ..."

सॅम बॉसका फोन डायल करने लगा. इतनेमें उसकाही फोन बजा. जॉनने उसके मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. फोन बॉसकाही था. सॅमने तुरंत फोन अटेंड किया.

"एक अॅड्रेस बोलता हू ... लिख लो..." उधरसे बॉसने कहा.

" यस सर ....प्लीज '' पहले बॉस क्या बोलता है यह सुन लेंगे और फिर अपना प्रोग्रेस उसको बताएंगे ऐसा सॅमने सोचा.

सॅमने जॉनके जेबसे पेन और एक कागज अॅड्रेस लिखनेके लिए लिया.

" याहोता क्राफ्ट, बी-1011 हिलव्ह्यू अपार्टमेंटस, केटी लेन-3" उधरसे बॉसने एक अॅड्रेस बताया.

यह तो उनके पास था वह तिसरा अॅड्रेस था...

लेकिन बॉसको कैसे पता चला वह अॅड्रेस?...

हमने तो बताया नही था ....

" ...वहा फौरन पहूंचो ... पाचवा खूनभी हो चूका है " बॉसने आगे कहा.

उधरसे फोन कट होगया. बॉसको वह अॅड्रेस कैसे पता चला यह पहेली अब सॅमके लिए पहेली नही रही थी.

" हमें देर हो गई है " हताश होकर सॅमने जॉनसे कहा.

" क्या हूवा ?" जॉनने आश्चर्यसे पुछा.

" पाचवा कत्लभी हो गया है ... याहोता क्राफ्टका"

क्रमश:...

Tuesday, February 26, 2008

Ch-45: आय ऍम सॉरी (शून्य-उपन्यास)

बॉस पत्रकाररोंकी भीडसे जो छूटा तो सिधा 'खाट..खाट' जुतोंका आवाज करते हूए अपने कॅबीनकी तरफ निकल पडा. जॉनभी पत्रकारोको टालते हूए भीडसे बाहर आ गया और बॉसके पिछे पिछे चल पडा.
बॉस ऐसा भी धोखा दे सकता है...
पिछले बारभी सब बॉसनेही रिपोर्टरोंके सामने बताया. उसमें जॉनका कुछ भी हाथ नही था... वैसे देखा जाए तो बॉसनेही लगभग जबरदस्ती उसे छुटीपर भेजा था...
जॉनको बॉसका बहुत गुस्सा आ रहा था.
हर बार डिक्टेटरशीप करनेकी और कुछ गलत हूवा तो किसीकोतो भी फसानेका...
जॉन बॉसका काम करने का तरीका अब समझने लगा था.
जॉनकोही क्या किसीकोभी यह हजम ना होनेवाली बात थी. जॉन तेजीसे बॉसके पिछे पिछे जाने लगा. उसे बॉससे सफाई लेनी थी.
बॉस उसके कॅबिनके पास आकर पहूंचा. जॉन बॉसके पिछेही था. बॉसको जॉनकी आहट आई होगी या फिर जॉन उसके पिछे पिछे आएगा इसका अंदाजा हूवा होगा. कॅबिनके अंदर जानेके पहले अचानक ब्रेक लगेजैसा बॉस एकदम रुका. उसके पिछे जॉनभी रुका. बॉस पिछे पलटकर धीरे धीरे जॉनके पास आने लगा. जॉनके एकदम सामने आकर वह रुका. अब वह जॉनके सामने खंबीरतासे खडा होकर उसकी आंखोमे आंखे डालकर देखने लगा. जॉन अभीभी गुस्सेमे था. वह भी गुस्सेसे बॉसके आंखोसे आंखे मिलाकर देखने लगा.
" ऐसे क्या गुस्सेसे देख रहे हो? मुझे क्या खावोगे?" बॉस जॉनपर चिल्लाया.
बॉस अपनी हमशाकी ट्रीक आजमा रहा था. लेकिन इस बार जॉन बिलकुल विचलीत नही हूवा.
फिर एकदमसे बकरी बनकर बॉसने जॉनके कंधेपर अपना सांत्वनाभरा हाथ रख कर कहा,
" आय अॅम सॉरी जॉन. वक्त ही कुछ ऐसा था की मै कुछ नही कर सका "
इस बार जॉन गडबडायाभी नही. वह अभीभी बॉसकी आंखोसे आंखे मिलाकर गुस्सेसे एकटक देख रहा था. बॉसको अहसास हूवा की उसकी ट्रीक काम नही आई थी.
" आय अॅम रिअली सॉरी " बासॅने जॉनका कंधा थपथपाकर अपना हाथ पिछे लिया.
बॉस एकदमसे मुडकर फिरसे 'खाट खाट' ऐसा जुतोंका आवाज करते हूए कॅबिनमें घुस गया. बॉसने एक तिरमें दो निशाने साधे थे. पुलिस डिपार्टमेंटको लोगोंकी नजरोंसे निचा होनेसे बचाया था और जॉनको बरबाद कर डिपार्टमेंटमें अपना खौफ और महत्व और मजबुतीसे बढाया था.
क्रमश:...

Friday, February 15, 2008

Ch-36: प्रपोज (शून्य-उपन्यास)

अभीभी अँजेनी खानेके टेबलपर बैठी थी. टेबलपर जलाई मोमबत्तीयां आखीर बुझ गई थी. टेबलपर सिर्फ बचा था इधर उधर फैला हूवा मोम. उसके दिलका हालभी कुछ उस मोम जैसाही था. जल जलकर जमे जैसा. टेबलपर खाना वैसाका वैसा रखा हूवा था. राह देख देखकर थकनेके बाद वह कुर्सीसे उठ गई. उतनेमे घडीका गजर बजा. बारा बार. कोई मानो उसके दिलपर घांव कर रहा हो ऐसा उसे लग रहा था. रातके बारा बज चूके थे. .

वह बराबर आठ बजे यहांसे गया था... .

मतलब चार घंटे हो चूके थे. ...

वह शायद कॉटेजके आसपासही पहूंचा होगा...

वह खिडकीके पास जाकर बाहर झांककर देखने लगी. कॉटेजकी तरफ आनेवाला रास्ता एकदम सुनसान था. ना किसीकी आहट ना किसी वाहन के लाईट्स. वह काफी समयतक रास्ते पर आखे लगाए रास्ता ताकती रही. अचानक उसे दो दिए रास्तेसे सामने आते हूए दिखाई दिए. वे उसकी तरफही आ रहे थे. उसका चेहरा खुशीसे खील गया.

वही होगा ...

जरुर जॉन ही होगा ...

वह दूर रास्तेपर आगे सरकते गाडीके लाईटस की तरफ देखने लगी. जैसे जैसे गाडीके दिए नजदीक आने लगे उसका दिल खुशीसे नाचने लगा.

जॉनके बारेमै मैने संदेह नही करना चाहिए था ...

उसे अपराधी लगने लगा था. गाडी अब सामने चौराहे तक आ पहूची थी.

गाडी एक टर्न लेगी और फिर अपने कॉटेजके तरफ आयेगी. ...

लेकिन यह क्या ?...

गाडी चौराहेपर कॉटेजकी तरफ ना मुडते हूए सिधे सामने निकल गई....

फिरसे निराशा उसके चेहरेपर दिखने लगी. अपने मनकी विषण्ण भावना दूर करनेके लिए वह कमरेमे चहलकदमी करने लगी. बिच बिचमें वह खिडकीसे बाहर झांकती थी. सामने रस्ता फिरसे पहले जैसा खाली खाली दिखने लगा था. चहलकदमी करते हूए उसने फिरसे दिवार पर टंगे घडीकी तरफ देखा. साडे बारा बज चूके थे. जॉनका अभीतक कोई अता पता नही था. उसे अब अकेलपन का डर लगने लगा था. उसने फिरसे एकबार खिडकीसे बाहर झांका. उसकी आशा फिरसे अंकुरीत होने लगी. फिरसे गाडीके दो दिए उसे रास्तेपर सरकते हूए दिखाई दिए.

अभी जरुर वही होगा ...

वह फिरसे खिडकीके पास खडी होकर लाईट्सकी तरफ लगातार देखने लगी.

यह गाडी जॉनकी हो सकती है .. और नही भी हो सकती...

लेकिन दिल ऐसा होता है की आदमी को आशा लगाए देता है... ...

अचानक चौराहेपर आनेके बाद गाडीके दिए गायब हो गए.

क्या हूवा ?..

गाडी वहा रुकी तो नही ?...

या फिर गाडी आ रही है ऐसा सिर्फ आभास..?...

वह खिडकीसे हटकर फिरसे कमरेमे चहलकदमी करने लगी. अचानक उसे निचे गाडी के हॉर्नका आवाज आया. वह खिडकीकी तरफ दौडी और उसने बाहर झांककर देखा. जॉन गाडीसे उतर रहा था. उसके जानमे जान आगई. वह दरवाजेके तरफ दौडते हूए चली गई. दरवाजा खोलकर जॉनकी तरफ वह लगभग दौडते हूएही लपकी. सामनेसे जॉनभी दौडते हूए आ रहा था. वह दौडतेही जॉनकी बाहोंमे समा गई.

" कितना वक्त लगाया ? ..." वह जॉनके सिनेपर हलके हलके मुक्के मारते हूए बोली.

" कितनी घबरा गई थी मै .....मुझे तो लगा की तुम मुझे यही छोड जावोगे..." उसकी आंखोमें देखते हूए वह बोली.

" नासमझ हो... ऐसा कभी हो सकता है क्या ?" वह उसके कंधेपर हाथ डालकर उसे कॉटेजमे लाते हूए बोला.

दोनोभी एकदुसरेके कमर मे हाथ डाले सिढीयां चढने लगे.

" अबतो बोलोगे ... कहां गए थे?" उसने पुछा.

" बताता हूं ... बताता हू... थोडा सब्रतो करोगी" वह बोला.

अब दोनो कॉटेजमे आगए. अँजेनीने अंदर आतेही सामनेका दरवाजा बंद किया. और वह क्या बोलता है इसका बेसब्रीसे इंतजार करते हूए उसके आगे पिछे करने लगी. वह सिधा अंदर डायनींग टेबलके पास गया. वह भी उसके पिछे पिछे वहा गई. उसने फिरसे खानेके टेबलपर मोमबतीयां जलाई. घरके सारे लाईट्स बंद किये. अँजेनी कुछ ना समझते हूए सिर्फ उसके पिछे पिछे जा रही थी. उसने उसके कंधे को पकडकर उसे उसके सामने कुर्सीपर बिठाया.

" बैठो, बैठो .. मै तुम्हे बताता हू की मै कहा गया था..." वह उसे बोला.

वहभी उसके सामने बैठ गया. थोडी देर दोनो शांत बैठे रहे. फिर जॉनने उसकी आंखोमें देखते हूए उसके मुलायम हाथ अपने हाथोंमे लिए. मोमबत्तीयोंके रोशनीमें उसका चेहरा और ही निखर आया था. जॉनका आने के बाद यह क्या चल रहा है यह ना समझते हूए वह असमंजससी उसके तरफ देख रही थी.

" अँजेनी तूम मुझसे शादी करोगी ?" उसने उसके आंखोमे आखे डालकर देखते हूए उसे प्रपोज किया.

अँजेनीको तो एकदम भर आए जैसा हुवा.

लेकिन खुदकी भावनाए संभालते हूए वह बोली, " इज धीस सम काईंंड ऑफ जोक?"

" नही नही ... मै सिरीयसली बोल रहा हूं " वह बोला.

" देखो जॉन पहलेही तूम इतनी देर नही थे तो मुझे अकेलापन महसूस हो रहा था... कम से कम ऐसे वक्त ऐसा फालतू मजाक मत करो." वह बोली.

" नही अँजी ... मै मजाक नही कर रहा हूं " वह उसे विश्वास दिलानेका प्रयास करने लगा.

जॉनने उसे पहली बार प्यारसे 'अँजी' कहा था. वह उसकी आखोंमे देखकर उसकी भावनाए टटोलनेकी कोशीश करने लगी.

" तुम्हे सच नही लग रहा है ना ..."

उसने अपने कोटके जेबसे एक छोटा लाल बॉक्स निकालते हूए कहा ,

" यह देखो मैने तुम्हारे लिए क्या लाया है ..."

" क्या है ?" उसने प्रश्नार्थक मुद्रामें पुछा.

उसने बॉक्स खोलकर उसके सामने पकडते हूए कहा,

" एंंगेजमेंट रिंग ... ऑफ कोर्स इफ यू अॅग्री.."

उसने फिरसे एकबार उसे पुछा , " विल यू मॅरी मी प्लीज"

अँजेनीके आंखोमें आंसू तैरने लगे.

" इसके लिए गये थे तूम सिटीमें ?" उसका गला भर आया था.

उसने उसकी आंखोमें देखते हूए 'हां' मे अपनी गर्दन हिलाई.

वह कुर्सीसे उठकर खडी हो गई. वह भी अपने कुर्सीसे खडा हूवा. वह आवेगके साथ उसके बाहोंमे समा गई. .

" यस आय विल" उसके भरे हूए गले से शब्द निकले.

जॉनके चेहरेपर खुशी और समाधान फैल गया. वह अतीव आनंदसे उसे उठाते हूए उसे चूमने लगा. उसने फिर धीरेसे उसे निचे उतारते हूए बॉक्स से अंगूठी निकालकर धीरेसे उसकी तिसरी उंगलीमें सरका दी.

क्रमश:...

Wednesday, February 13, 2008

Ch-34B: फिशींग (शून्य-उपन्यास)


थोडी देर दोनो शांत थे.

फिर जॉन ने कहा " अब मै एक पहेली पुछता हूं."

अँजेनीने आंखोहीसे 'हां' कहा.

" नंबर शून्य नंबर एट को क्या बोला होगा?" जॉन ने पुछा.

शून्य ... शून्यका जिक्र होतेही अँजेनीके चेहरेपर एक उदासी छा गयी. उसके चेहरेपरसे वह अल्लड हंसी गायब हो चूकी थी. जॉनके खयालमें आया की उसने शून्यका जिक्र नही करना चाहिए था.

" आय अॅम सॉरी..." वह उसकी पिठ थपथपाते हूए बोला.

वह कुछ ना बोलते हूए पाणीमें हूक हिलाने लगी.

" रियली आय अॅम सॉरी ... मेरे खयालमेंही नही आया" उसने फिरसे कहा.

" इट्स ऑलराईट ..." वह खुदकी भावनाए संवारते हूए बोली. " तूमही बोलो ... मै नही बता पा रही हूं."

" क्या ?" जॉनने पुछा.

" अरे शून्य नंबर एट को क्या बोला वह बतावो. " वह फिरसे उल्लड होने की चेष्टा करते हूए बोली.

जॉन कुछ नही बोला.

" बोलो ना " वह उसका चेहरा अपनी तरफ करते हूए बोली.

जॉन उसकी तरफ देखकर हंसते हूए बोला. " हार गई ...इतने जल्दी. "

" हां ... बोलो ना. " वह उत्सुकतापुर्वक बोली.

" शून्य नंबर एट को बोला ... नाईस बेल्ट" जॉन हंसते हूए बोला.

" अरे वा...नाईस "

वहभी उसके साथ हंसने लगी.

काफी समय दोनो चूप थे. दोनोभी अपने अपने हूक्स हिलाकर देखनेमें व्यस्त थे.

" तुम्हे मछली पकाने आती है ?" अँजेनीने जॉनके पास खिसकर कहा.

अपना भारी लगता हूवा हूक खिंचकर देखते हूए जॉनने कहा " नही"

" फिर हम मछलियां क्यो पकड रहे है ?" अँजेनीने पुछा.

" अरे ... क्यो मतलब खाने के लिए" जॉन उसकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए बोला.

" फिर इसका कोई फायदा नही " अँजेनीने कहा.

" मतलब ? "

" मतलब मुझेभी मछलीयां पकाना नही आता"

" क्या? " वह आश्चर्यसे बोला.

" हां, अगर तुम्हे वैसेही बिना पकाये हूए खानेकी हो तो कोई बात नही. " वह मजाकमें बोली.

" तुम्हेभी नही बनाने आती ? कोई बात नही हम पकाकर तो देख सकते है... ट्राय करनेमें क्या दिक्कत है..? " उसने सुझाया.

" और अगर नही पका पाये तो"

" तो जैसे बनती है वैसीही खा एंगे. कमसे कम बिना पकी खानेकीतो नौबत तो नही आयेंगी. " वह हंसते हूए बोला.

इतनेमें अँजेनीको अहसास हूवा की उसका हूक भारी लग रहा है. उसने हूक हिलाकर देखा. शायद उसके हूकमें मछली अटक गई थी. उसने अपना हूक लपेटना शुरु किया. एक भूरे शेडकी सफेद मछली छटपटाते हूए हूकके साथ उसके पास आने लगी. उसने धीरेसे उसे हूकसे निकालकर बगलमें पत्थरपर रखे टोकरीमें डाला और वह फिरसे हूक पाणीमे छोडने लगी. इतनेमें तितलीजैसा कुछतो उसके नाकको लगके पाणीमें गिरे जैसा उसे लगा. उसने नाकको हाथसे पोंछ लिया और फिर उसी हाथसे अपने चेहरेपर लहराती लटोंको संवारते हूए हूक पाणीमे छोडनेमें व्यस्त हूई.

जॉन अचानक उसकी तरफ देखकर जोर जोरसे हंसने लगा.

उसने जॉनके तरफ देखकर पुछा , " क्या हूवा ?"

" तुम्हारी मछली कहा है ? " उसने पुछा.

उसने पिछे रखे टोकरीमें देखा तो मछली वहां नही थी.

" कहा गई ? " वह इधर उधर देखने लगी.

" सचमुछ कहा गई ?" वह मुस्कुराते हूए बोली.

उसे मजा आ रहा था.

" गयी वहां पाणीमें छलांग लगाकर... और साथमें तुम्हारे नाकपर चपटी मारकर" वह फिरसे जोरसे हंसते हूए बोला.

" अच्छा तो वह मछली थी... " उसके खयालमें आया तो वह अपने नाकको हाथ लगाते हूए बोली और वह भी उसके साथ जोरसे हंसने लगी.

क्रमश:...

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