बॉस पत्रकाररोंकी भीडसे जो छूटा तो सिधा 'खाट..खाट' जुतोंका आवाज करते हूए अपने कॅबीनकी तरफ निकल पडा. जॉनभी पत्रकारोको टालते हूए भीडसे बाहर आ गया और बॉसके पिछे पिछे चल पडा.
बॉस ऐसा भी धोखा दे सकता है...
पिछले बारभी सब बॉसनेही रिपोर्टरोंके सामने बताया. उसमें जॉनका कुछ भी हाथ नही था... वैसे देखा जाए तो बॉसनेही लगभग जबरदस्ती उसे छुटीपर भेजा था...
जॉनको बॉसका बहुत गुस्सा आ रहा था.
हर बार डिक्टेटरशीप करनेकी और कुछ गलत हूवा तो किसीकोतो भी फसानेका...
जॉन बॉसका काम करने का तरीका अब समझने लगा था.
जॉनकोही क्या किसीकोभी यह हजम ना होनेवाली बात थी. जॉन तेजीसे बॉसके पिछे पिछे जाने लगा. उसे बॉससे सफाई लेनी थी.
बॉस उसके कॅबिनके पास आकर पहूंचा. जॉन बॉसके पिछेही था. बॉसको जॉनकी आहट आई होगी या फिर जॉन उसके पिछे पिछे आएगा इसका अंदाजा हूवा होगा. कॅबिनके अंदर जानेके पहले अचानक ब्रेक लगेजैसा बॉस एकदम रुका. उसके पिछे जॉनभी रुका. बॉस पिछे पलटकर धीरे धीरे जॉनके पास आने लगा. जॉनके एकदम सामने आकर वह रुका. अब वह जॉनके सामने खंबीरतासे खडा होकर उसकी आंखोमे आंखे डालकर देखने लगा. जॉन अभीभी गुस्सेमे था. वह भी गुस्सेसे बॉसके आंखोसे आंखे मिलाकर देखने लगा.
" ऐसे क्या गुस्सेसे देख रहे हो? मुझे क्या खावोगे?" बॉस जॉनपर चिल्लाया.
बॉस अपनी हमशाकी ट्रीक आजमा रहा था. लेकिन इस बार जॉन बिलकुल विचलीत नही हूवा.
फिर एकदमसे बकरी बनकर बॉसने जॉनके कंधेपर अपना सांत्वनाभरा हाथ रख कर कहा,
" आय अॅम सॉरी जॉन. वक्त ही कुछ ऐसा था की मै कुछ नही कर सका "
इस बार जॉन गडबडायाभी नही. वह अभीभी बॉसकी आंखोसे आंखे मिलाकर गुस्सेसे एकटक देख रहा था. बॉसको अहसास हूवा की उसकी ट्रीक काम नही आई थी.
" आय अॅम रिअली सॉरी " बासॅने जॉनका कंधा थपथपाकर अपना हाथ पिछे लिया.
बॉस एकदमसे मुडकर फिरसे 'खाट खाट' ऐसा जुतोंका आवाज करते हूए कॅबिनमें घुस गया. बॉसने एक तिरमें दो निशाने साधे थे. पुलिस डिपार्टमेंटको लोगोंकी नजरोंसे निचा होनेसे बचाया था और जॉनको बरबाद कर डिपार्टमेंटमें अपना खौफ और महत्व और मजबुतीसे बढाया था.
क्रमश:...
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Tuesday, February 26, 2008
Ch-45: आय ऍम सॉरी (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:18 AM
0
comments
Labels: इंडीया, भारत, भारतिय, साहित्य, हिंदी, हिंदुस्तान, हिंदोस्तान, हिंन्दी, हिन्दी
Saturday, December 29, 2007
Ch-8 : और एक ? ... (शून्य-उपन्यास)
जॉनकी गाडी एक भीड भाड वाले रस्ते से दौडने लगी. बादमें इधर उधर मुडते हूए वह गाडी एक पॉश बस्तीमें एक अपार्टमेंटके पास आकर रुकी. जॉन वहा पहूचनके पहले ही वहां पुलिस की टीम आकर पहूँची थी. इस बार पुलिस के अलावा वहां मिडीयाकी उपस्थीतीभी थी. भीडकी वजहसे रस्ता ब्लॉक होनेको आया था. जैसेही जॉनने गाडी पार्क की और वह गाडीसे बाहर आगया मिडीयावालोने उसे घेर लिया. भलेही वह एक प्राईव्हेट गाडीसे आया था और युनिफॉर्ममें नही था फिरभी पता नही मिडीयावालोंको वह इस केससे सबंधीत होनेकी भनक कैसे लगी थी?
"'मि. जॉन वुई वुड लाईक टू हिअर यूअर कमेंट ऑन द केस प्लीज '" कोई उसके सामने कॅमेरा और माईक्रोफोन लेकर आया.
"'प्लीज बाजू हटो .... मुझे अंदर जाने दो ... पहले मुझे इन्व्हेस्टीगेशन पूरा करने दो ... उसके बादही मै अपनी कमेंट दे पाऊंगा "' जॉन भीडमेंसे बाहर निकलने की कोशीश करते हूए बोला.
फिरभी वहांसे कोई हटनेके लिए तैयार नही था. बडी मुश्कीलसे उस भिडसे रस्ता निकालते हूए जॉन अपार्टमेंटकी तरफ जाने लगा. दुसरे कुछ पुलिस उसे जानेके लिए जगह बनानेके लिए उसकी मदत करने लगे.
जॉन लिफ्टसे अपार्टमेंटके दसवे मालेपर पहूँच गया. सामनेही एक फ्लॅटके सामने पुलिसकी भीड थी. जॉन फ्लॅटमें घुसतेही उसके सामने सॅम आया.
"सर, इधर '' सॅम जॉनको बेडरूमकी तरफ ले गया.
बेडरूममे खुनसे लथपथ एक स्त्री का शव पडा हूवा था और सामने दिवारपर फिरसे खुनसे एक बडासा गोल निकाला हुवा था. इस बार उस गोलके अंदर खुनसे 0+6=6 और 0x6=0 ऐसा लिखा हूवा था. जॉन सामने जाकर दिवारकी तरफ गौरसे देखने लगा.
'' कौन औरत है यह?"" जॉनने सॅमको पुछा.
" हुयाना फिलीकिन्स ... कोई टी व्ही आर्टीस्ट है '" सॅमने कहा.
'' यहाँ क्या अकेली रह रही थी?'' जॉनने पुछा.
'" हाँ सर, ... पडोसीयोंका तो यही कहना है ... उनके अनुसार बिच बिचमें कोई आता था उसे मिलने... लेकिन हरबार वह कोई अलग ही शख्स रहता था. '" सॅमने उसे मिले जानकारी का सारांश बयान किया.
'' खुनीने दिवारपर 0+6=6 और 0x6=0 ऐसा लिखा है ... इससे कमसे कम इतना तो पता चलता है की वह गोल यानी की शुन्यही है .. लेकिन 0+6=6 और 0x6=0 इसका क्या मतलब? ... कही वह हमे गुमराह करनेकी कोशीश तो नही कर रहा है?" जॉनने अपना तर्क प्रस्तुत किया.
'" अॅडीटीव्ह आयडेंटीटी प्रॉपर्टी और झीरो मल्टीप्लीकेशन प्रॉपर्टी ... गणितमें पढाया हूवा थोडा थोडा याद आ रहा है......'' सॅम ने कहा.
"' वह सब ठीक है ... लेकिन उस खुनीको क्या कहना है यह तो पता चले?'' जॉनने जैसे खुदसेही पुछ लिया.
दोनो सोचने लगे. उस सवाल का जवाब दोनोंके पास नही था.
'"बाकीके कमरे देखे क्या?'" जॉनने पुछा.
"' हां, तलाशी जारी है''" सॅम ने कहा.
फोटोग्राफर फोटो ले रहे थे. फिंगर प्रिन्ट एक्सपर्ट कुछ हाथके, उंगलीयोंके निशान मिलते है क्या यह ढूढ रहे थे.
'' मोटीव्ह के बारेमें कुछ ?'" जॉनने बेडरूमसे बाहर आते हूए सॅमसे पुछा.
'" नही सर ... लेकिन इतना जरुर है की पहला खुन जिसने किया था उसनेही यह खुनभी किया होगा.'' सॅम अपना अंदाजा बयान कर रहा था.
'" हां ... बराबर है ... यह कोई सिरियल किलरकाही मसला लग रहा है "" जॉनने सॅमका समर्थन करते हूए कहा.
...contd...




