" फिर बैठक शुरू करते हैं . " पाटिल जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा .
" गूंगी का बापू किधर है? " ... "और उस गुँगे का बाप ??" उन दोनो को खोजते हुए पाटिल जी की नज़र कोने में सिमट कर बैठे हुए लोगों में गयी " रे आप लोगन वहाँ काहे बैठे रहे ? इक इस कोने में तो दूजा दूजे कोने मैं , बात का है भई ?" पाटिल साहब ने मजाकिया अंदाज़ में कहा .
लोगों में क़हक़हे लगने लगे
" अरे यहाँ आइए दोनों के दोनो " पाटिल साहब ने उन्हें सामने बुलाया .
पाटिल जी ने फिर से अपनी नज़रें बैठक में घुमाई और इस बार मास्टर जी और उनके बगल में बैठे गणेश को संबोधित कर बोले " अरे मास्टरजी आप तनिक आगे आइए , गनेस बाबू आप भी , पंडित जी थोडा आगे सरकिये " .
हार कर अब गणेश को वहाँ से उठना ही पड़ा उसने मधुरानी की तरफ कनखियों से देखा उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थी , गणेश आगे जा कर पाटिल जी के साथ बैठ गया.
"तो सरपंच जी पहले क्या किया जाए ?" पाटिल जी ने सरपंच जी की ओर मुड़ कर पूछा .
" जी अब तो दोनो के बापू तय कर चुके हैं , क्यों भाइयों?" सरपंच जी पांडूरंगराव और रघु की ओर देख कर बोले .
दोनो ने अपनी गर्दन सहमति में हिला दी.
" फिर ब्याह का मुहूरत तय करना चाहिए " सरपंच जी बोले
" पहले लेन देन का तो तय कर लो" बीच में एक बोल उठा .
"वो भी करेंगे पहले मुहूरत तो तय कर लो" सरपंच जी उसकी बात काटते बोले.
पाटिल जी पंडित की ओर मुखातिब हो कर बोले " अरे पंडित जी ज़रा देख कर बताओ शुभ मुहूरत कौन सा है? "
पंडित जी पंचांग के पन्ने पलटने लगे फिर कुछ देख कर बोले "तुलसी विवाह के बाद शुभ मुहूरत २६ तारीख को आता है"
"कौन से रोज ?" सरपंच जी पूछे .
"बृहस्पतिवार" पंडित जी जे जवाब दिया .
"यानी के साप्ताहिक बाजार वाले रोज" एक गाँव वाला बोला
"पंडित जी , दूसरा मुहूरत देखो कोई " सरपंच जी बोले.
गाँव में बृहस्पतिवार के दिन बाजार का था , लोगों की खरीददारी के लिए यह दिन तय था . यदि इस दिन ब्याह होता तो कई लोग बाग शामिल न हो पाते .
पंडित जी थोड़ी देर और पांचांग के पन्ने उल्टे पुल्टे किए और बोले "अगला मुहूरत उसी महीने की २९ तारीख को आता है .. शनिवार के रोज"
"ठीक है , ब्याह २९ को करना तय कर लो , क्यों भाइयों " सरपंच जी पांडु और रघु की ओर देखते बोले.
गूंगों के बापुओं ने चुपचाप गर्दन हिला दी.
"२९ तारीख को बात हो गयी पक्की" पाटिल जी ने फ़ैसला सुनते हुए कहा .
" अब लेनदेन की बातें हो जाएँ " एक बंदा उतावला हो कर बोला . शायद उसे गूंगे के बाप ने पहले ही साध रखा था .
पाटिल जी ने पांडुरंग राव को पूछा " क्यों भैया का चाहते हो? "
पांडुरंग राव ने बदहवासी से पाटिल जी को देखा .
तभी गणेश ने देखा पाटिल जी सबकी नज़रें बचा कर गाँव के डॉक्टर साहब को आँख मार कर इशारा किया .
डाक्टर साहब भी कुछ कहने के उठ खड़े हुए " एक मिनट , ज़रा ठहरिए " सबकी निगाहें डाक्टर साहब की और घूम गयीं वह काफ़ी शर्मीले थे और ऐसी बैठकों में खास बोलना पसंद नहीं करते थे , लेकिन लोग यह जानने को बेकरार हो उठे थे की डाक्टर साहब क्या कहते हैं.
" देखिए ..... ऐसा है , गूंगे और गूंगी की शादी में एक दिक्कत है " डाक्टर साहब गला साफ कर बोले.
"दिक्कत? कैसन दिक्कत? " दो चार लोग हैरत से बोले.
डाक्टर साहब और गंभीर हो गये लड़की के बाप की यह देख कर हालत पाली हो गयी.
"ज़रा खुल कर बताइए डाक्टर जी " सरपंच जी ने बेताबी से कहा.
दो तीन मिनट यहीं गुजर गये .
"अरे डाक्टर जी कुछ बोलो तो सही " पाटिल जी बेसब्री से बोले "मुँह में दही जमा है क्या?"
" हैं जी ??? म..म..मैं सोच रहा था य.. यहाँ बोलना ठीक रहेगा?" डाक्टर अपना पसीना पोछते हुए बोला .
" अरे ओ डाक्टर , सीधे सीधे बताता काहे नहीं है का दिक्कत है ?" गूंगी का मामा कड़क कर बोला
उसे गूंगी के बाप ने समझा बुझा कर चुप कराया . डाक्टर इधर बेबसी से पाटिल जी की ओर देख रहा था , उसके पसीने छूट रहे थे "अरे बताओ डाक्टर जी घबराईए मत , मैं हूँ न ?" पाटिल ने कहा.
हिम्मत जुटा कर बोला " जी ऐसा है की गूंगा और गूंगी की शादी होती है तो उनके बच्चे भी गूंगे पैदा होंगे , म म मेरा मतलब इस बात की गुंजाइश ज़्यादा है "
बैठक में सबको साँप सूंघ गया .
"उससे कौनो फरक नाही पड़े है" एक आदमी बोला
"कैसे नाही पड़े है ? एक आदमी पांडुरंग राव के बगल से उठते बोला शायद वह उनका रिश्तेदार था " इहा इक गूंगे लड़के को पालते पालते ससुरा खून पानी बन गया , अब ब्याह हुआ तो दो गूंगा जोड़ा , और बच्चे भी गुंगे पैदा हुए तो गूंगों की फौज , इन सबको क्या आप संभालेंगे ?"
"उनको हम संभालेंगे , आप उसकी चिंता नाही करो" गूंगी का मामा उठ कर बोला.
"अरे हमार वंश का होगा ? हमरा पोता भी गूंगा ??? ना.. ना... ई हांका मंजूर नाही" दूसरा रिश्तेदार बोला.
"अरे भाई दोनो पार्टी के लोग थोड़ा सब्र करो बैठ जाओ" सरपंच बीच बचाव करते हुए बोले.
"अरे ओ सरपंच !! तू संभालेगा उन गूंगों को ? " लड़के का मामा बोला .
"अरे भाई उसका भी कोई रास्ता निकाल लेंगे , मैं अकेला क्या कर सकता हूँ , पूरे गाँव वालों की मदद चाहिए " सरपंच जी उसको समझाते हुए बोले.
"मतलब ए ही होगा की वो गूंगे गाँव की सड़कों पर हाथ फैला कर भीख माँगे हैं और आप गाँव वाले उनको भीख देंगे "
लड़के का मामा कड़क कर बोला फिर पांडुरंग जी का हाथ पकड़ कर बोला " चलिए जी , यह ब्याह अब न होवे है . अपने
बेटे को और भी अच्छे रिश्ते आवे रहे हैं और ई गूंगी से ब्याह रचा कर उसकी जिंदगी खराब नहीं करनी "
" अरे थोड़ा ठंडे दिमाग़ से सोचो भाई , यूँ गुस्सा ना करो अपने बेटे का तो ख्याल करो " गणेश ने बीच बचाव किया .
" आपसे मतलब ? कौन हो जी आप? " लड़के के मामा ने गणेश पर भड़क कर कहा .
" हमारे गाँव के बड़े साहब हैं" एक आदमी ने बताया.
" देखो साहब जी अपने काम से काम रखो हमारे मामले में टाँग न अड़ाओ , वरना अच्छा नहीं होगा " मामा कड़क कर बोला.
गणेश मन मार कर रह गया . "चलो जी आप चिंता न करो , हमारे लड़के का ब्याह मैं कराऊंगा वह भी किसी अच्छा छोकरी से , गूंगी बाहरी से नहीं " मामा पांडुरंग जी का हाथ पकड़ कर बोला.
" अरे और आप के छोकरे ने हमारी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी , उसका का होगा ? " लड़की के मामा ने मोर्चा संभाल लिया.
" हमको उससे कौनो मतलब नाही , तुमसे लड़की संभाली नही जात है , हमारी का ग़लती? तुम्हारी लड़की है ही कुलच्छनी , हमार लड़के पर डोरे डाल कर उसको अपने जाल में फाँस लिया , कलमुंही जाए भाड़ में " लड़के के मामा दरवाज़े से तेज आवाज़ में बोला.
" हरामज़ादे मैं तेरी ज़बान खींच लूँगा " लड़की की तरफ से एक गाँव वाला उठ खड़ा हुआ .
" माधरज़ाद साला ससुर का नाती" लड़की का मामा गुस्से से चीखा " अरे ओ सुदामा , पकड़ इस कुत्ते को , आज इस हरामी की माँ बहन एक करता हूँ " कहते हुए वह लड़के वालों की तरफ लपका .
चारों ओर अफ़रा तफ़री मच गयी लड़की वाले और लड़के वाले आपस में उँची आवाज़ में चिल्ला चोट करने लगे कुछ हाथापाई पर उतारू हो गए , चारो और लात घूँसे चल रहे थे , खूब गाली गलौज हो रही थी.
तभी एक तेज रौबदार आवाज़ गूँजी " खामोश!!!! " " सुअर के बच्चों !!!" "हरामज़ादो , यह क्या रंडी बाजार बना रखा है" "निकल जाओ इस घर से , बाहर जा कर जो करना है करो" पाटिल साहब गुस्से में ज़ोर ज़ोर से बोल रहे थे
पूरी बैठक में खामोशी छा गयी " रामू!!!!!" " कहाँ मर गया ससुरा? " "जी मालिक?" हवेली का एक कारींदा दौड़ा दौड़ा आया , पाटिल जी ने झगड़ने वालों की ओर इशारा कर कहा "उठा कर बाहर फेंक दो इन मधर ज़ाद को"
रामू और उसके साथियों ने तुरंत हुक्म की तामील की वह उन लोगों को धक्के दे कर बाहर निकालने लगे .
गणेश , मधुरानी और अन्य लोग बड़ी हैरत से यह ड्रामा देखे जा रहे थे . बैठक में सबको जैसे साँप सूंघ गया था , केवल बाहर जाने वालों की चप्पल चटखने की आवाज़ आ रही थी .
" माफी चाहता हूँ " "आप सब आराम से बैठिए " पाटिल जी ने कहा "आज कल तो भलाई का जमाना ही नही रहा"
सरपंच जी बाहर जाने लगे
"अरे सरपंच जी तनिक ठहरिए , थोड़ा जलपान करिए फिर बैठक बर्खास्त करते हैं " पाटिल जी बोले
" आप सब लोग भी बैठिए और चाय वाय पी कर जाइए वरना आप लोग कल चर्चा करेंगे कि पाटिल जी ने चाय तक को नहीं पूछा "
अब तक दोनो पार्टी के लोग नीचे पहुँच चुके थे और नीचे से झगड़ने की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें उपर तक आ रहीं थी.
क्रमशः
Original Novel by Sunil Doiphode
Hindi Version by Chinmay Deshpande
" गूंगी का बापू किधर है? " ... "और उस गुँगे का बाप ??" उन दोनो को खोजते हुए पाटिल जी की नज़र कोने में सिमट कर बैठे हुए लोगों में गयी " रे आप लोगन वहाँ काहे बैठे रहे ? इक इस कोने में तो दूजा दूजे कोने मैं , बात का है भई ?" पाटिल साहब ने मजाकिया अंदाज़ में कहा .
लोगों में क़हक़हे लगने लगे
" अरे यहाँ आइए दोनों के दोनो " पाटिल साहब ने उन्हें सामने बुलाया .
पाटिल जी ने फिर से अपनी नज़रें बैठक में घुमाई और इस बार मास्टर जी और उनके बगल में बैठे गणेश को संबोधित कर बोले " अरे मास्टरजी आप तनिक आगे आइए , गनेस बाबू आप भी , पंडित जी थोडा आगे सरकिये " .
हार कर अब गणेश को वहाँ से उठना ही पड़ा उसने मधुरानी की तरफ कनखियों से देखा उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थी , गणेश आगे जा कर पाटिल जी के साथ बैठ गया.
"तो सरपंच जी पहले क्या किया जाए ?" पाटिल जी ने सरपंच जी की ओर मुड़ कर पूछा .
" जी अब तो दोनो के बापू तय कर चुके हैं , क्यों भाइयों?" सरपंच जी पांडूरंगराव और रघु की ओर देख कर बोले .
दोनो ने अपनी गर्दन सहमति में हिला दी.
" फिर ब्याह का मुहूरत तय करना चाहिए " सरपंच जी बोले
" पहले लेन देन का तो तय कर लो" बीच में एक बोल उठा .
"वो भी करेंगे पहले मुहूरत तो तय कर लो" सरपंच जी उसकी बात काटते बोले.
पाटिल जी पंडित की ओर मुखातिब हो कर बोले " अरे पंडित जी ज़रा देख कर बताओ शुभ मुहूरत कौन सा है? "
पंडित जी पंचांग के पन्ने पलटने लगे फिर कुछ देख कर बोले "तुलसी विवाह के बाद शुभ मुहूरत २६ तारीख को आता है"
"कौन से रोज ?" सरपंच जी पूछे .
"बृहस्पतिवार" पंडित जी जे जवाब दिया .
"यानी के साप्ताहिक बाजार वाले रोज" एक गाँव वाला बोला
"पंडित जी , दूसरा मुहूरत देखो कोई " सरपंच जी बोले.
गाँव में बृहस्पतिवार के दिन बाजार का था , लोगों की खरीददारी के लिए यह दिन तय था . यदि इस दिन ब्याह होता तो कई लोग बाग शामिल न हो पाते .
पंडित जी थोड़ी देर और पांचांग के पन्ने उल्टे पुल्टे किए और बोले "अगला मुहूरत उसी महीने की २९ तारीख को आता है .. शनिवार के रोज"
"ठीक है , ब्याह २९ को करना तय कर लो , क्यों भाइयों " सरपंच जी पांडु और रघु की ओर देखते बोले.
गूंगों के बापुओं ने चुपचाप गर्दन हिला दी.
"२९ तारीख को बात हो गयी पक्की" पाटिल जी ने फ़ैसला सुनते हुए कहा .
" अब लेनदेन की बातें हो जाएँ " एक बंदा उतावला हो कर बोला . शायद उसे गूंगे के बाप ने पहले ही साध रखा था .
पाटिल जी ने पांडुरंग राव को पूछा " क्यों भैया का चाहते हो? "
पांडुरंग राव ने बदहवासी से पाटिल जी को देखा .
तभी गणेश ने देखा पाटिल जी सबकी नज़रें बचा कर गाँव के डॉक्टर साहब को आँख मार कर इशारा किया .
डाक्टर साहब भी कुछ कहने के उठ खड़े हुए " एक मिनट , ज़रा ठहरिए " सबकी निगाहें डाक्टर साहब की और घूम गयीं वह काफ़ी शर्मीले थे और ऐसी बैठकों में खास बोलना पसंद नहीं करते थे , लेकिन लोग यह जानने को बेकरार हो उठे थे की डाक्टर साहब क्या कहते हैं.
" देखिए ..... ऐसा है , गूंगे और गूंगी की शादी में एक दिक्कत है " डाक्टर साहब गला साफ कर बोले.
"दिक्कत? कैसन दिक्कत? " दो चार लोग हैरत से बोले.
डाक्टर साहब और गंभीर हो गये लड़की के बाप की यह देख कर हालत पाली हो गयी.
"ज़रा खुल कर बताइए डाक्टर जी " सरपंच जी ने बेताबी से कहा.
दो तीन मिनट यहीं गुजर गये .
"अरे डाक्टर जी कुछ बोलो तो सही " पाटिल जी बेसब्री से बोले "मुँह में दही जमा है क्या?"
" हैं जी ??? म..म..मैं सोच रहा था य.. यहाँ बोलना ठीक रहेगा?" डाक्टर अपना पसीना पोछते हुए बोला .
" अरे ओ डाक्टर , सीधे सीधे बताता काहे नहीं है का दिक्कत है ?" गूंगी का मामा कड़क कर बोला
उसे गूंगी के बाप ने समझा बुझा कर चुप कराया . डाक्टर इधर बेबसी से पाटिल जी की ओर देख रहा था , उसके पसीने छूट रहे थे "अरे बताओ डाक्टर जी घबराईए मत , मैं हूँ न ?" पाटिल ने कहा.
हिम्मत जुटा कर बोला " जी ऐसा है की गूंगा और गूंगी की शादी होती है तो उनके बच्चे भी गूंगे पैदा होंगे , म म मेरा मतलब इस बात की गुंजाइश ज़्यादा है "
बैठक में सबको साँप सूंघ गया .
"उससे कौनो फरक नाही पड़े है" एक आदमी बोला
"कैसे नाही पड़े है ? एक आदमी पांडुरंग राव के बगल से उठते बोला शायद वह उनका रिश्तेदार था " इहा इक गूंगे लड़के को पालते पालते ससुरा खून पानी बन गया , अब ब्याह हुआ तो दो गूंगा जोड़ा , और बच्चे भी गुंगे पैदा हुए तो गूंगों की फौज , इन सबको क्या आप संभालेंगे ?"
"उनको हम संभालेंगे , आप उसकी चिंता नाही करो" गूंगी का मामा उठ कर बोला.
"अरे हमार वंश का होगा ? हमरा पोता भी गूंगा ??? ना.. ना... ई हांका मंजूर नाही" दूसरा रिश्तेदार बोला.
"अरे भाई दोनो पार्टी के लोग थोड़ा सब्र करो बैठ जाओ" सरपंच बीच बचाव करते हुए बोले.
"अरे ओ सरपंच !! तू संभालेगा उन गूंगों को ? " लड़के का मामा बोला .
"अरे भाई उसका भी कोई रास्ता निकाल लेंगे , मैं अकेला क्या कर सकता हूँ , पूरे गाँव वालों की मदद चाहिए " सरपंच जी उसको समझाते हुए बोले.
"मतलब ए ही होगा की वो गूंगे गाँव की सड़कों पर हाथ फैला कर भीख माँगे हैं और आप गाँव वाले उनको भीख देंगे "
लड़के का मामा कड़क कर बोला फिर पांडुरंग जी का हाथ पकड़ कर बोला " चलिए जी , यह ब्याह अब न होवे है . अपने
बेटे को और भी अच्छे रिश्ते आवे रहे हैं और ई गूंगी से ब्याह रचा कर उसकी जिंदगी खराब नहीं करनी "
" अरे थोड़ा ठंडे दिमाग़ से सोचो भाई , यूँ गुस्सा ना करो अपने बेटे का तो ख्याल करो " गणेश ने बीच बचाव किया .
" आपसे मतलब ? कौन हो जी आप? " लड़के के मामा ने गणेश पर भड़क कर कहा .
" हमारे गाँव के बड़े साहब हैं" एक आदमी ने बताया.
" देखो साहब जी अपने काम से काम रखो हमारे मामले में टाँग न अड़ाओ , वरना अच्छा नहीं होगा " मामा कड़क कर बोला.
गणेश मन मार कर रह गया . "चलो जी आप चिंता न करो , हमारे लड़के का ब्याह मैं कराऊंगा वह भी किसी अच्छा छोकरी से , गूंगी बाहरी से नहीं " मामा पांडुरंग जी का हाथ पकड़ कर बोला.
" अरे और आप के छोकरे ने हमारी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी , उसका का होगा ? " लड़की के मामा ने मोर्चा संभाल लिया.
" हमको उससे कौनो मतलब नाही , तुमसे लड़की संभाली नही जात है , हमारी का ग़लती? तुम्हारी लड़की है ही कुलच्छनी , हमार लड़के पर डोरे डाल कर उसको अपने जाल में फाँस लिया , कलमुंही जाए भाड़ में " लड़के के मामा दरवाज़े से तेज आवाज़ में बोला.
" हरामज़ादे मैं तेरी ज़बान खींच लूँगा " लड़की की तरफ से एक गाँव वाला उठ खड़ा हुआ .
" माधरज़ाद साला ससुर का नाती" लड़की का मामा गुस्से से चीखा " अरे ओ सुदामा , पकड़ इस कुत्ते को , आज इस हरामी की माँ बहन एक करता हूँ " कहते हुए वह लड़के वालों की तरफ लपका .
चारों ओर अफ़रा तफ़री मच गयी लड़की वाले और लड़के वाले आपस में उँची आवाज़ में चिल्ला चोट करने लगे कुछ हाथापाई पर उतारू हो गए , चारो और लात घूँसे चल रहे थे , खूब गाली गलौज हो रही थी.
तभी एक तेज रौबदार आवाज़ गूँजी " खामोश!!!! " " सुअर के बच्चों !!!" "हरामज़ादो , यह क्या रंडी बाजार बना रखा है" "निकल जाओ इस घर से , बाहर जा कर जो करना है करो" पाटिल साहब गुस्से में ज़ोर ज़ोर से बोल रहे थे
पूरी बैठक में खामोशी छा गयी " रामू!!!!!" " कहाँ मर गया ससुरा? " "जी मालिक?" हवेली का एक कारींदा दौड़ा दौड़ा आया , पाटिल जी ने झगड़ने वालों की ओर इशारा कर कहा "उठा कर बाहर फेंक दो इन मधर ज़ाद को"
रामू और उसके साथियों ने तुरंत हुक्म की तामील की वह उन लोगों को धक्के दे कर बाहर निकालने लगे .
गणेश , मधुरानी और अन्य लोग बड़ी हैरत से यह ड्रामा देखे जा रहे थे . बैठक में सबको जैसे साँप सूंघ गया था , केवल बाहर जाने वालों की चप्पल चटखने की आवाज़ आ रही थी .
" माफी चाहता हूँ " "आप सब आराम से बैठिए " पाटिल जी ने कहा "आज कल तो भलाई का जमाना ही नही रहा"
सरपंच जी बाहर जाने लगे
"अरे सरपंच जी तनिक ठहरिए , थोड़ा जलपान करिए फिर बैठक बर्खास्त करते हैं " पाटिल जी बोले
" आप सब लोग भी बैठिए और चाय वाय पी कर जाइए वरना आप लोग कल चर्चा करेंगे कि पाटिल जी ने चाय तक को नहीं पूछा "
अब तक दोनो पार्टी के लोग नीचे पहुँच चुके थे और नीचे से झगड़ने की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें उपर तक आ रहीं थी.
क्रमशः
Hindi Version by Chinmay Deshpande








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