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Hindi Online Novel - Madhurani CH-23 गेसींग

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चार पाच दिनसे गणेश मधुराणी की दुकान की तरफ फटकाभी नही - वैसी उसकी हिम्मत ही ना बनी. एक दो बार खिडकीसे बाहर झांककर देखते वक्त मधुराणीसे नजर मिली थी ... बस उतनीही. तब भी उसे वह बडी बडी आंखोसे उसकी तरफ़ देख रही मिली थी. कभी उसे उन आखोमें
' वह मुझसे ऐसा क्यो बर्ताव करता है? ' ऐसा ऐतराज और गुस्सा दिखता तो कभी जुदाई का गम दिखाई देता. कभी ' मेरी कुछ गल्ती हो तो मुझे माफ़ करदो' ऐसी बिनती दिखती थी.
उसे इस बातका अचरज था की मधुराणी आंखोकी भाषा से इतना सबकुछ कैसे बोल पाती है.... या फिर यह सारे उसनेही अपनी सुविधा की हिसाबसे लगाए मतलब... थे ?

बाहर कुछ गडबड सुनाई दे रही थी इसलिए गणेशने खिडकीसे झांककर देखा.
" ए पांड्या ... जल्दी आई गवा  ...  उधर एक गेसींग मिल गया है रे " खिडकीके बाहर किसी लडकेने मानो ऐलान कर दिया और वह नदीकी तरफ़ दौड पडा.
उसके पिछे और दो चार लडके दौड पडे. और चबुतरे पर बैठे बुजुर्ग लोग असमंजससे इधर उधर देखने लगे. गणेशका ध्यान मधुराणीकी तरफ़ गया. वह गल्लेपर बैठकर एक लडकेसे गुफ़्तगु कर रही थी. वह लडका नदीकी तरफ़ हाथसे इशारे कर उसे कुछ बोल रहा था. अब वह लडका भी नदीकी तरफ़ दौड पडा. तभी गणेशकी मधुराणीसे नजर मिली. उसने उसे एक मिठीसी स्माईल दी. गणेशके चेहरेपरभी स्माईल झलकने लगी . लेकिन फ़िर अचानक उसे मधुराणीका वह बाजारमें दिखा चंडीका अवतार याद आ गया. झटसे वह खिडकीसे बाजु हट गया.

शामको आसमानमे सुरज डुबनेसे फ़ैली लाली दिख रही थी. नदी के इस तरफ़, गावके बगलमें एक गन्ने का खेत था. वहां एक जगह गणेशको लोगोंकी भिड दिखाई दी तो गणेश भिडकी तरफ़ निकल पडा. अभीभी काफ़ी ग्रामस्थ उस भिडकी तरफ़ दौड रहे थे. गणेशभी अब जल्दी जल्दी चलने लगा.

अबतो अंधेरा होनेको आया था. इसलिए कुछ लोग लालटेन लेकरभी आ रहे थे. गणेश जब भिडके पास पहुंच गया तब सारे लोग एकदम शांत होगए. कुछ लोग गणेशकी तरफ़ एकटक देखने लगे. तो कुछ लोग भिड्के बिचोबिच देखने लगे. भिडके बिचोबिच वह गुंगा और गुंगी गर्दन झुकाकर खडे थे. तभी गणेशने देखा की एक आदमी आवेशसे उस भिडमें घुस गया और उस गुंगीको पिटने लगा.

" रांड ... हमरेही घर जनमनी थी तोहार  ... "

बह उस गुंगीको बेदम मारने लगा. गुंगी जोरजोरसे चिल्लाने लगी. वह चिल्ला रही थी की रो रही थी, समझना मुश्कील था, और भीड का भी उससे कुछ लेना देना नही दिख रहा था. उसपर वह गुंगा गुस्सेसे आग बबुला होकर उस आदमी की तरफ़ लपक पडा. तभी भिडमेंसे दो चार ताकदवर लोगोंने उसे पकड कर रोक लिया.

" ... गावमें मुंह दिखायने लायक नाही रखा  तुने... अबही तुमको बहुत बेदम मारुंगा ... और मारते मारते मरही जाए  तो बहुतही  अच्छा होईगा... तुमरा काला मुंह  देखनेसे तो जेलमें जानाही अच्छा होइगा. "

गणेशको अब माजरा क्या है ... थोडा थोडा समझमें आने लगा था. गुंगेने और गुंगीने यहां खेतमें कुछ तो प्रेमप्रताप किया होगा. और उसे मारनेवाला उसका बाप होगा.
गुंगीका बाप - एक तरफ उसका मुंह चल रहा था तो दुसरी तरफ़ उसके हाथ और लात. अब गुंगी निचे जमीनपर गीर गई थी और उसका बाप उसे हाथ और लात दोनोंसे मार रहा था. पहले पहले गणेशको उसका बाप जो कर रहा था वह सही लग रहा था. हर एक हाथ लात की मारसे उसके दिलको एक सुकुनसा महसुस हो रहा था.

सचमुछ उसने उसके बापको गांवमें मुह दिखानेके लिए भी जगह नही छोडी थी....
मै अगर उसके बापके जगह होता तो उसकी जानही लेता ...
गुंगीतो गुंगी उपरसे काफ़ी कारनामेवाली दिखती है ...
दुसरा कोई नही मिला तो उसने बराबर एक गुंगाही ढुंढा ....
अब उसके बापको उसके शादीका काफ़ी मुश्कील होगा ... .
हां कोई बुढा, बेवडा करेगा उससे शादी और उपरसे काफ़ी दहेजभी लेगा...

कुछ क्षण गणेशको वह उस गुंगीका मानो बापही हो ऐसी अनुभूती होती रही.
लेकिन जल्दीही जो हो रहा था वह उसके मन को खटकने लगा. जो हो रहा है वह कोई ठिक नही हो रहा है ऐसा उसे लगने लगा. गणेश अब एक इन्सानियत के नाते सोचने लगा.

होगया होगा बेचारीको उस गुंगेसे प्यार...
उसकाभी शायद इसपर प्रेम होगा ...
अच्छे लोगोंनेही प्यार करने का क्या ठेका ले रखा है... ? ...
क्या ऐसा कही लिखकर रखा है ?...
वे भी हमारे तुम्हारे जैसे ही ना...
उनकीभी भावनाएं हमारे जैसीही ...
उनकीभी हमारे तुम्हारे जैसीही जरुरते ...
सिर्फ फ़र्क यह है की वे गुंगे है ...
और उनका गुंगा होना क्या उनका चुनाव था ...
बेचारोके किस्मत का एक हिस्सा था ...

अचानक गणेश जोशमें आने लगा. उसे गुंगीका बाप जो उसे मार रहा था और वह तडप रही थी - देखा नही जा रहा था. उस गुंगीकी चिखे... और गुस्सेसे भरा चिल्लाना उससे देखा नही जा रहा था.

"रुको... ये क्या कर रहे हो आप लोग ? ... क्या बेचारीको जानसे मारोगे ?..."

एक आवाज आया. गुंगीका बापभी थोडी देरके लीए स्थंभीत हो गया. सब लोग कुछ क्षणके लिए शांत हो गए. गणेशको अपने आपपरही भरोसा नही हो रहा था की वह आवाज उसका खुद का था. गुंगीका बाप अब गणेशको जादा तवज्जो ना देते हूए फिरसे गुंगी को पिटने लगा.

" भाईसाब ... ये क्या कर रहे हो ... मर जाएगी बेचारी "

" बेचारी ?" उसके बापने रुककर बुरासा मुंह बनाकर कहा.

उसका बाप उसे फिरसे पिटने लगा.
अब गणेशभी उन्हे रोकनेके लिए आगे बढ गया.

" बाबूजी ...  इस झमेलेमे मत पड़ियो  ... नाही ही तो बादमा बहुत  पछतावेंगे . .. "

" ईहा सरकार जिस कामके लिए भेज रहत  ... उही  चुपचाप करियो ...  इ गाव के झमेलेमें मत पडियो  "
"ई कोय तुमरी  तालूकेकी जगा  ना होवे  ... उहा चलता होयगा ई  सब... ईहा नाही चलेगा... "
" ऐसी घटना हमरे गांव मा  कभी ना होवे  है  ... ई  पहली बार होएगी ... "
" हम जब बच्चे रहत थे  तब एक बार पाटीलके लौंडी को चमारके लौंडे के साथ पकडा रहत . ... पाटीलव  उसके टूकडे टूकडे करके कुत्तेको डाला रहा उस वखत . .. " एक बुढा बता रहा था.
" फिरंगी  पुलीस आवत रही उस वखत ...  पुछताछ कराइ  वासते  ..."

गणेशने उस बुढेकी तरफ़ देखा. मानो वह अपनी मुक जबानमें उसे पुछ रहा था, ' तो फ़िर?... आगे क्या हुवा ? '
" पुलीस पुछ-पुछ कर थक गई रहत ... वोतो  पाटील को कोई लडकी रहत उही साबीत ना कर पावे ... खुनकी बात तो बहुत दूर "
गणेश अचंभीत होकर उस बुढेकी तरफ़ देखने लगा.
सचमुछ ऐसा हुवा होगा क्या ?....
" लेकीन चाचाजी वह बहुत पुरानी बात होगई... अब दुनिया काफ़ी आगे बढ चुकी है ..." गणेश उस बुढे को समझानेकी कोशीश करने लगा.
" भाईसाब ... दुनिया आगे बढ गई इसका ये मतलब नही की गन्नेके के खेतका सहारा लेकर एकदुसरेके उपर चढ जावो ..." एक तिरछी टोपीवाला आदमी बोला.
उस गंभीर वातावरणमेंभी हंसी की हल्की लहर दौड गई. हंसनेवाले खांसकर जवाने लडके थे.
वह सब सुनकर गुंगीका बाप और जादा चिढ गया और पागलसा हो गया. उसने गुस्सेके जोशमे नजदीक पडा हुवा एक बडासा पत्थर दोनो हाथोसे जोर लगाकर उपर उठाया. पत्थर काफ़ी भारी होने से उसे कष्ट हो रहा था. अब उसने वह पत्थर अपने सरके उपरतक उठाया था. और बेदर्दीसे वह पत्थर वह गुंगीके सरपर मारनेही वाला था उतनेमें ...

क्रमश...

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Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.