Expecting the world to treat you fairly because you are a good person is a little like expecting a bull not to attack you because you are a vegetarian
-- Dennis Wholey quotes
अब उसने वह पत्थर अपने सरके उपरतक उठाया था. और बेदर्दीसे वह पत्थर गुंगीके सरपर मारनेही वाला था उतनेमें ...
" रुको " एक रौबदार आवाज गुंजा .
सारे लोग स्तब्ध होकर पिछे मुडकर देखने लगे. गुंगीके बापने वह पत्थर चुपचाप एक तरफ फ़ेंक दिया. गणेशनेभी पिछे मुडकर देखा. पिछे गांवका सरपंच खडा था. गणेशने पहले कई बार सरपंचका सात्वीक रुप देखा था. लेकिन आज पहली बार इस तरहके प्रसंगसे खंबीरतासे निबटते हूए गणेशका सरपंचके इस अलग रुपसे परिचय हुवा था.
" रघूजी ... यह तुम्हारी लडकी है ... इसका मतलब ये नही की तुम्हे कानुन हाथमें लेनेकी मुभा मिल जाए ' " सरपंच गुंगीके पास जाकर खडे होते हूए बोला. वहा खडे होकर उसने अपनी पैनी नजर एकबार चारो तरफ़ दौडाई . मानो वे आखोंकी जबांसे वहा उपस्थीत लोगोंसे संवाद साध रहे हो.
इतने लोग यहां पर होते हूए ऐसा जघन्य अपराध कैसे हो सकता है ?....
तुम सब लोगोंकी क्या मती मारी गई ?....
लडकीके बापका मै समझ सकता हूं ...
उसके सर पर गुस्सेका भूत सवार था... .
लेकिन तुम लोग ?...
मानो सरपंच हरएकसे सवाल कर रहा था. उसके शरीरको भेदकर निकलती नजरसे नजर मिलानेकी किसीकी हिम्मत नही बन रही थी. सारे लोगोंने अपनी नजरे निचे झुकाई थी.
" गुंगेका बाप कहां है ? " सरपंचने भिडसे सवाल पुछा.
भिडमें थोडी हलचल दिखाई दी. जहा गुंगेको कुछ जवान लडकोने पकडकर जकड रखा था, वहां पिछेसे एक देहाती सामने आया... डरते हूए ही.
" इधर आओ ... ऐसे सामने... " सरपंचने उसे एक तरफ़, सामने आनेका इशारा किया.
" और तुम... गुंगीका बाप ... रघु... इधर आओ ... ऐसे... उसके बगलमें खडे हो जाओ " सरपंचने गुंगीके बापको आदेश दिया.
वह गुंगेके बापके बगलमें जाके खडा हो गया. गुंगीका बाप हीन दीन अवस्थामें खडा था. उसने एकबार अपने बगलमें ख़डे गुंगेके बापकी तरफ़ देखा लेकिन उसने उसकी उपस्थितीका ऐहसास दिखानेकीभी जरुरत नही समझी. वह अक्कड और हेकडीके साथ बेफ़िक्रसा खडा था.
" ए ... गुंगेको छोड दो. ... " सरपंचने अगला आदेश दिया.
गुंगेको पकडे जवानोने उसे छोड दिया.
" उसको यहां खडा करो... उसके बापके बगलमें .... ' सरपंचने उन जवानोंमेसे एक जवानको फ़र्माया.
बह युवक गुंगोको पकडकर उसके बापके बगलमें ले गया.
" तूम तुम्हारी बेटीको इधर लाकर खडा करो ' सरपंचने लडकीके पिताको आदेश दिया.
लडकीका बाप धीरे धीरे लडकीके पास गया. गुंगी अभीभी जमिनपर पडी अपना मुंह छुपाकर रो रही थी. उसका बाप उसके पास जाकर खडा हो गया. वह कुछ क्षण हिचकिचाया. उसे समझ नही आ रहा था की मै अब उसे किस हकसे उठाऊ. उसने झुककर उसके कंधेको पकडकर उठाया. वह दर्दसे कराहती हुई उठ गई. उसकी और उसके बापकी एक क्षण के लिए नजरे मिल गई और वह अपने पितासे लिपटकर रोने लग गई. उसके बापकेभी आखोंमे आंसू आगए और अनजानेमें उसका धीरज भरा हाथ उसे सहलाने लगा. वह दृश्य देखकर गणेशका दिलभी भर आया था.
" उसे इधर ऐसे लेकर आओ ... " सरपंचने उसे टोकते हूए फ़िरसे आदेश दिया.
रघूने गुंगीको अपनेसे अलग किया और उसके कंधेको पकडकर सामने लेकर गया. वह उसके पहले जगहपर खडा होगया और बगलमें उसने अपने बेटीको खडा किया. गुंगी गर्दन झुकाकर खडी हो गई. इतनी बडी भिडसे आंखे मिलानेकी शायद उसकी हिम्मत नही बन रही थी.
गणेशने पहली बार उस गुंगीको इतने करीबसे देखा था. वह खुबसुरत थी. रंगभी गोरा था. शरीर भी सुडौल था. लेकिन इतने सौदर्यमें एक ही बाधा थी की वह गुंगी थी. अगर उसके गुंगेपन के बारेमें पता नही हो तो कोईभी पहली नजरमें उसे प्रेम कर बैठे ऐसा उसका रुप था.
" अब सब लोग... इधर मेरी बात सुनो ... " सरपंचने सबको आदेश दिया.
गुंगीका बाप सरपंचकी तरफ़ देखने लगा. गुंगेका बापभी ना चाहकरभी सरपंच की तरफ़ देखने लगा. गुंगी बेचारी अबभी अपनी गर्दन झुकाए खडी थी. और गुंगा कभी सरपंचकी तरफ़ तो कभी गुंगीकी तरफ़ देख रहा था. उसकी गुंगीकी तरफ़ देखनेवाली नजरमें उसको उसके बारेमें लगने वाली चिंता और संवेदना दिख रही थी. बेचारा शायद सचमुछ उससे प्यार करता था. वह गुंगा होकरभी उसकी हर हरकतसे उसका गुंगीके प्रती प्रेम व्यक्त हो रहा था. शायद वह बोल पाता तो बोलकरभी इस तरह व्यक्त नही कर पाता. फिरभी उसके मुक भावनाओंको शायद गुंगीसे जादा कोई नही समझ पाता.
" आप लोगोंको अपनी इज्जत प्यारी है ? ..." सरपंचाने लोगोंसे सवाल किया.
सिर्फ़ गुंगीके पिताने सरपंचकी तरफ़ आगतिकतासे देखा. गुंगेका बाप सरपंचसे नजरे चुरानेकी कोशीश कर रहा था.
" आप लोगोंको आपके गावकी इज्जत प्यारी है ? " सरपंचने इसबार गुंगेके पिताकी तरफ़ रुख करते हूए गंभिरतासे पुछा.
गुंगेके पिताने किसी तरह हिचकिचाते हूए सरपंचके नजरसे नजर मिलाई.
" तो फ़िर सुनो पंचायतका फैसला मै यही इसी वक्त कर देता हूं ..."
सारे लोग सरपंच आगे क्या कहता है यह सुननेके लिए बेताब थे.
" इन दोनो की जल्द से जल्द पहला मुहूर्त देखकर शादी कर डालो ..."
सारे लोगोंने आश्चर्यसे सरपंचकी तरफ़ देखा.
अरे यह हमारे दिमागमें क्यो नही आया ? .... शायद उनको ऐसा लगा होगा .
सारे लोगोंके नजरोंमे हामी दिखने लगी थी.
" क्या रघू तुम्हे कबूल है ?" सरपंचने गुंगीके पितासे पुछा.
" जी ... महाराज ... लडकेके बापने हमें सहारा दिया तो उनके बडे उपकार होंगे हमपर .." गुंगीका बाप गुंगेके बापकी तरफ़ बडी आशासे देखता हुवा बोला.
गुंगेके बापने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नही की. वह सिर्फ़ गहरी सोचमें डूबे जैस दिखने लगा खा.
" क्या पांडूरंग तुम्हे कबूल है ?" सरपंचने गुंगेके बापसे पुछा.
" जी सरकार ... जैसी आपकी मर्जी " गुंगेका बाप हडबडाकर बोला.
सारे भिडमें जमे लोगोंके चेहरेपर खुशी झलकने लगी थी. गणेश कौतुहलके साथ सरपंचकी तरफ़ देखने लगा.
इसे कहते है नेतृत्व ...
सचमुछ ... सरपंचजी ... आज मान गए आपको ...
सरपंचने एक चुटकीमें सबको पसंद आएगा ऐसा न्याय और फ़ैसला देकर इतनी बडी समस्या सुलझाई थी.
" अरे तो फ़िर एक दुसरेका मुंह क्या ताक रहे हो.... चलो शुरु होजाओ और कामपर लग जाओ ... हमें जल्द से जल्द शहनाई जो बजानी है " सरपंचभी खुशीशे बोल उठा और गांव की दिशामें तेजीसे चल पडा. सारे लोगभी अब खुशीसे सरपंचे पिछे पिछे चल पडे.
कुछ उत्साही जवान लडके खुशीके मारे आवेशके साथ घोषणाए देने लगे.
"सरपंच.."
"जिंदाबाद"
"सरपंच'
"जिंदाबाद"
क्रमश:...
Expecting the world to treat you fairly because you are a good person is a little like expecting a bull not to attack you because you are a vegetarian
-- Dennis Wholey quotes








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