Always bear in mind that your own resolution to succeed is more important than any other.
-- Abraham Lincon
गणेश बाजारमें दोनो तरफ लगे दुकानोंकी तरफ देखते हूए चल रहा था. सरपे मई महिनेकी धूप होते हूए लोग हरीभरी सब्जी, पके हुए आम, प्याज. लहसून लेकर बाजारमें दुकानें लगाकर बैठे थे. कोई तरकारीका दुकान लगाकर बैठे थे तो कोई सिर्फ धानके, जैसे गेहूं, ज्वार, चावल, ऐसे अलग अलग धानके दूकान लगाकर बैठे थे. आज जादा ना घुमते हूए गणेश सिधा बंडू हॉटेलवालेके टेंट के पास गया. बंडू गरमागरम भजिया, आलूवडे, दालवडे, मिर्च की भजिया, शेव, चिवडा, बुंदी , जलेबी ऐसे काफ़ी खानेकी चिजे उसके पास मिलती थी.
तलनेकी जायकेदार खुशबु, और गरम गरम तेल का मनको मोहनेवाला तडकेका आवाज, और सामने थालीमें रखे हूए कुछ पिले तो कुछ लाल ऐसी खानेकी चिजे. दुकानके सामनेसे गुजरा और उसके मुंहमे पाणी ना आया हो ऐसा बहुतही कम होता होगा. आलूवडेको वे लोग 'आलूबोंडा' कहते. बंडूके हॉटेलमें बना आलूबोंडा गणेशको खुब भाता था.
" आवो जी सायेब... मेरे यहांके जैसा आलूबोंडा आपको कही नही मिलेगा... वो क्या है ना की मेरा आलूबोंडा बनानेका तरीकाही बहुत अलग है.... ' कहते हूए उसने आलूका बना हुवा गोला बेसनमें डूबोकर भट्टीपर रखे कडईके उबलते हूए गरम तेलमें छोडा. फिर दुसरा, तिसरा ... ऐसे आलूबडेसे कडई भरनेके बाद अपना बेसनसे भरा हुवा हाथ बगलमें रखे पाणीके बर्तनमें डूबोकर धोया. फिर गिले हाथसे पाणी की छीटे कडईमें आलूवडे तल रहे उबलते तेलमें छीडकी. 'तड् तड्' ऐसा आवाज हो गया. यह सब देखनेमेभी गणेशको बहुत मजा आता था. .
" बैठोजी ... साब... बैठोतो ..."
गणेश दुकान के टेंटका कपडा उड ना जाए इसलिए रखे पत्थरपर बैठ गया. आलूवडे तलनेका इंतजार करते हूए वह उन तेलमें उबलते वडोंकी तरफ देखने लगा.
बंडू हॉटेलवालेके साथ दुकानमे उसकी बिवी उसे काममें हाथ बटाती थी. जब वह तलनेका काम करता था तब उसकी बिवी ग्राहक संभालती थी. और जब वह तलनेका काम करती तब बंडू ग्राहक संभालनेका काम करता . गणेशको किसीने कहा था की बंडू हॉटेलवालेने दो शादीया की थी. एक बिवी घर और उसके बच्चे संभालती थी तो दुसरी उसके साथ उसको हाथ बटानेके लीए उसके और उनके हॉटेलके साथ नगर डगर घुमती थी. ... कभी किसी मेलेमें, तो कभी दुसरे गांवके बाजारमें वे जाकर अपना दुकान लगाते थे. पंधरा दिन एक बिवी को लेकर घुमा की वह उसे घर और बच्चे संभालनेके लिए घर छोडता था और अगले पंधरा दिन दुसरे बिवीको लेकर घुमता था. अपने धंदेके अनुसार उसने अपना जिवन मानो ढाल लिया था. वैसे वह दुनियादारीके मामलेमे काफी होशीयार था. उसकी होशीयारी उसके दो शादिया करनेमें देखतेही बनती थी. दुसरी शादी करनेसे एक्स्ट्रा बिवी तो बिवी उपरसे बिना पगारकी नौकर भी उसे मिली थी.
अबतक बडे पुरे तलकर बन चुके थे. बंडू वे तले हूए वडे बाहर निकालकर एक थालीमें डालने लगा.
" दुसरे हॉटेलवाले ... ऐ ऐसे वडे आपको खानेको परोसेंगे ... लेकिन यह तो आधाही काम हो गया... ."
वह बचे हूए वडे कडईसे थालीमें डालते हूए बोला.
" अब आगेका काम देखो... इस हरएक वडे के कानके निचे ऐसे एक एक बजानेकी ... इस झारेसे .. ऐसे ... "
वह अपने हातमे थामा हुवा झारा हरएक वडेपर हल्केसे मारते हूए बोला.
जैसे जैसे वह उस झारेसे उन वडेको मारता था वैसे वैसे वे वडे टूटकर खुलते थे.
" और फिर इस खुले हूए वडोंको फिरसे तेलमें डालो... ऐसे ..."
फिरसे वे खुले हूए वडे तेलमें छोडते हूए वह बोला.
" अजी यही तो है आलूबोंडे बनानेकी असली ढंग... यह हम .... हमारे पितासे... हमारा पिता ... उनके पितासे ... और उनका पिता ... उनके पितासे... ऐसे न जाने कितने ... पिढीयोंसे हम सिखते आ रहे है... ."
यह बंडूकी बकबक हर बार वडे खानेको आनेके बाद गणेशकोही नही तो वडे खानेको आए सारे ग्राहकोंको सुननी पडती. लेकिन सारे लोग ये इतने अच्छे जायकेदार वडे खानेके लालचमें सुन लेते थे. वह फिरसे तेलमें छोडे हूए वडे झारेसे हिला रहा था. बिच बिचमें यूंही बगलमें रखे पाणीके पतेलेमें हात डूबोकर पाणीकी कुछ छिंटे उस उबल रहे तेलके कडईमें छिडकता था. उससे वह 'तड् .. तड्' ऐसा आवाज बार बार आता था. और वह वैसा 'तड् .. तड्' आवाज करकी मानो उसे आदतही हो गई थी. शायद बाहर इतने तपते धुपमें... तपते भट्टीके सामने उतनेही उत्साहके साथ .. हमेशा काम करते रहनेका रहस्य शायद उस 'तड्.. तड्' होनेवाले आवाजमेंही छिपा हो ऐसा गणेशको हमेशा लगता था.
क्रमश:..
Always bear in mind that your own resolution to succeed is more important than any other.
-- Abraham Lincon








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