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Hindi Novels - ELove : Ch-52 फिरसे मेसेज? (समाप्त)

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Hindi Novels - ELove : Ch-52 फिरसे मेसेज? (समाप्त)


The secret of Success -

The thing always happens that you really believe in; and the belief in a thing makes it happen.

--- Frank Loyd Wright


वह आवाज सुनकर अंजलीही नही तो वहां उपस्थित सारे लोगोंको मानो कुछ आभास होगया है ऐसा लगा. अंजलीका रोना रुक गया था. सारे लोग स्तब्धतासे खडे होकर दरवाजेकी तरफ देख रहे थे.

'' अंजली '' फिरसे आवाज आ गया.

इसबार काफी नजदिकसे आए जैसा. लगभग दरवाजेकी बाहरसे ही. अब अंजली उठकर खडी हो गई और दरवाजेकी तरफ जाने लगी. कमरेमें उपस्थित बाकी लोगभी दरवाजेकी तरफ जाने लगे. अंजली दरवाजे तक पहूंच गई होगी जब कमरेका दरवाजा खुला और दरवाजेमें विवेक खडा था. उसके सारे कपडे और सारा शरीर खुनसे सना हुवा था. दोनों आवेशके साथ एक दुसरेकी तरफ दौडे और उन्होने एक दुसरेको बाहोंमें लिया.


अतूलने इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बतानेके बाद शुरु मोबाईल गाडीके बोनेटपर रखा. और वह उस विवेककी तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

'' रुको ... तुम बहुत बडी गलती कर रहे हो ...'' विवेक किसी तरहसे बोला.

'' भूल ... इसके बाद तुम्हारी वजहसे ... सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे ... मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है ... उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी ... पुछो कौनसी ? ... कम से कम एक खुन मेरे नामपर होनेकी... और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं '' अतूलने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और अतूलके हाथमें पकडे बंदूकका किसी बॉंम्बकी तरह विस्फोट हो गया.

अतुलके शरीरके टूकडे टूकडे होकर चारो ओर उड गए थे. विवेक अपना बचाव करते हूए पिछेकी तरफ लपक पडा था. फिरभी खुनकी छिंटे अतूलके शरीरपर उड गई थी और उसका पुरा शरीर और कपडे खुनसे सन गए थे. पासमें खडे कारके शिशेभी अतूलके खुनसे सन गए थे.

थोडी देर बाद विवेक उठ खडा हुवा. उसने निचे गिरे हुए अतूलके शवपर अपनी नजर डाली.

फिरभी मैने उसे बतानेकी कोशीश की की वह बंदूक ना होकर बॉम्ब है ...

लेकिन वह मानाही नही ... उसमें मेरा क्या दोष...

विवेक मानो अपने आपको समझानेकी कोशीश कर रहा था.

आखिर क्या है ... की पराई नार ... और पराये हथीयारसे आदमीको बचना चाहिए...

विवेकके जहनमें आकर गया.


अंजली अपने ऑफीसमें अपने काममें व्यस्त थी. उसने हमेशाकी तरह आए बराबर कॉम्प्यूटर ऑन करके रखा था. तभी कॉम्प्यूटरपर चाटींगका बझर बजा. उसने मॉनिटरपर देखा. एक मेसेज था -

'' मिस अंजली ... 50 लाख रुपयोंका मेरे लिए इंतजाम करना वर्ना नतिजा तो तुम जानतीही हो ...'' अंजलीने वह मेसेज पढा और उसके रोंगटे खडे हो गए.

तभी विवेक और शरवरी उसके कॅबिनमें आ गए.

'' अंजली चलो आज हम पिक्चरको चलते है ...मॉर्निंग शो''

'' विवेक ... इधरतो देखो ... ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है'' अंजली उसका ध्यान मॉनिटरकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोली.

विवेक कॉम्प्यूटरके पास जाकर देखने लगा. लेकिन शरवरी अपनी हंसी नही दबा सकी. वह जोरजोरसे हसने लगी.

'' ए क्या हुवा ?'' अंजली.

'' अरे वह मेसेज अभी अभी विवेकने बगलके कॅबिनसे भेजा है '' शरवरी हंसते हूए बोली.

'' लेकिन वह तो अभी अभी यहां आया है '' अंजली.

'' अरे नही ... बगलके कॅबिनसे वह मेसेज भेजकर तुरंत हम इधर आ गए.

'' यू नॉटी बॉय'' अंजली विवेकपर पेपरवेट उठाते हूए बोली.

और फिर पेपरवेट टेबलपर वापस रखते हूए वह उठ गई और उसके पास जाकर उसके छातीपर प्यारसे मारने लगी. विवेकने हल्केसे उसे अपने आगोशमें खिंच लिया.


समाप्त

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The secret of Success -

The thing always happens that you really believe in; and the belief in a thing makes it happen.

--- Frank Loyd Wright


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Hindi Books collection - ELove Ch-51 अस्पताल

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Encouraging thoughts -

When the best things are not possible, the best may be made of those that are.

- Richard Hooker


मोबाईलसे बंदूककी आवाज सुननेके बाद अंजली चक्कर आकर निचे गिर गई. कंपनीके हॉलका खुशीका माहौल एकदमसे श्मशानवत सन्नाटेमें बदल गया. इन्स्पेक्टरने तुरंत एक दो लोगोंकी सहायता लेकर अंजलीको उठाया. किसीने झटसे फोन कर ऍम्बूलन्स बुलाई.


अंजली बेडपर पडी हुई थी. उसके पास डॉक्टर खडे थे और उसका बीपी चेक कर रहे थे. इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी, शरवरी और, और दो चार लोग उसके आसपास खडे थे.

'' डॉक्टर कैसी है उसकी तबियत ?'' शरवरीने पुछा.

'' इनके उपर अचानक बहुत बडा आघात हुवा है जो की वे सह नही पाई ... ऐसे वक्त थोडा वक्त बितने देना बहुत जरुरी होता है ... फिलहाल मैने इनको निंदका इन्जेक्शन दिया है ... तबतक आप लोग बाहर बैठीएगा ... लेकिन उन्हे होश आए बराबर उनके पास कोई होना बहुत जरुरी है ... इनके करीबी कौन है ?'' डॉक्टरने पुछा.

'' मै '' शरवरीने जवाब दिया.

'' आप कौन ... इनकी बहन ?''

'' नही मै इनकी दोस्त हूं '' शरवरीने कहा.

'' दुसरा कोई नही है? ... जैसे मां बाप भाई बहन.''

शरवरीने उलझनमें इधर उधर देखा तो इन्स्पेक्टरने कहा, '' डॉक्टर उनका नजदिकी ऐसा कोई नही है ''

'' अच्छा ठिक है ... ऐसा करो आप इनके पास रुको '' डॉक्टरने शरवरीसे कहा.

वैसेभी शरवरीका वहांसे हिलनेके लिए मन नही कर रहा था. बाकी सब लोग कमरेसे बाहर चले गए और शरवरी वही उसके सिरहाने बैठी रही. वह भलेही उसकी बॉस रही हो लेकिन उसने उसे कभी बॉसकी तरह ट्रीट नही किया था. और असलमें अंजलीने उसे एक दोस्तके हैसियतसेही वह पीए का जॉब जॉइन करनेके लिए कहा था. शरवरी उसके सिरहाने बैठकर उसे होश आनेका इंतजार करने लगी.


अंजलीको इंजक्शन देकर लगभग दोन-तिन घंटे हो गए होंगे. उसके रुमके बाहर अबभी इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी और बाकी काफी लोग उसे होश आनेकी राह देख रहे थे. होशमें आनेके बाद उसकी दिमागी हालत कैसी रहती है इसपर काफी चिजे निर्भर करती थी. असलमें उसे मां बाप ऐसे एकदम करीबी कोई ना होनेसे उसने विवेकपर अपनी पुरी जिंदगी निछावर की थी. और उसका उसे ऐसे बिचमें छोडकर चला जाना उसके लिए बहुत बडा आघात था. तभी एक नर्स जल्दी जल्दी बाहर आ गई.

'' इन्स्पेक्टर उन्हे होश आ गया है '' नर्सने कहा और वह फिरसे अंदर चली गई.

सारे लोग अंदर जानेके लिए हरकतमें आ गए.

अंदर अंजली शरवरीके कंधेपर सर रखकर जोर जोरसे रो रही थी. और शरवरी उसके पिठपर थपथपाकर और सरपर हाथ फेरते हूए उसे जितना हो सके उतना धीरज बंधानेकी कोशीश कर रही थी. दरअसल पहले वह बुरी खबर सुननेके बाद उसे अपनी भावनाए व्यक्त करनेके लिए मौका नही मिला था क्योंकी वह अपनी भावनाओंको व्यक्त करनेके पहलेही बेहोश हो गई थी. कमरेंमे वह हृदयविदारक दृष्य देखकर इन्स्पेक्टर उसे धीरज बंधानेके लिए आगे बढने लगे, तब बगलमें खडे डॉक्टरने उन्हे इशारेसेही मना कर दिया. डॉक्टरकाभी सही था क्योंकी उसका सारा दर्द बाहर आना बहुत जरुरी था. सब लोग, भलेही उन्हे बहुत दुख हो रहा था फिरभी चुप्पी साधकर वह दृष्य देखते रहे.

तभी कमरेके बाहर, काफी दुरसे, शायद अस्पतालके प्रमुख द्वारसे आवाज आया, '' अंजली...''


क्रमश:...


Encouraging thoughts -

When the best things are not possible, the best may be made of those that are.

- Richard Hooker


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Hindi Novels - ELove : Ch -50 पासवर्ड

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Sucess secret -

Keep steadily before you the fact that all true success depends at last upon yourself.

-- Theodore T. Hunger


अतूल अबभी वह छोटे छोटे लोहेके टूकडोंसे बनी बंदूक हाथमें लेकर उलट पुलटकर देखते हूए विवेक के इर्द गिर्द चल रहा था. उसने विवेककी तरफ अर्थपुर्ण ढंगसे मुस्कुराते हूए एक कटाक्ष टाकला. उसका हंसना ' अब कैसे आया उट पहाड के निचे' इस तरह का था. विवेक चुपचाप अपने जगह खडा था. उसके इर्द गिर्द चलते चलते उसने अपने कलाईपर बंधे घडीमें देखा ,

'' अबभी एक मिनट बाकी है ''

अतूल अब बोनेटके पास गया और उसने वहा रखा हुवा शुरु मोबाईल उठाकर अपने कानको लगाया. उधरसे अबभी, '' हॅलो... अतूल... हॅलो... पासवर्ड क्या है ... जल्दी बोलो ... टाईम खत्म होनेको आया है ...'' ऐसा सुनाई दे रहा था.

'' इन्स्पेक्टर ... इतनीभी जल्दी क्या है ... बताता हूं ना पासवर्ड '' अतूलने कहा और उसने अपने हाथमें पकडी बंदूक विवेकपर तानी.


इधर अंजली, इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे मोबाईलपर चल रहा संभाषण कान लगाकर सुन रहे थे, और साथही सामने मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. कमसे कम मोबाईलपर आ रहे अतूलके बोलनेके आवाजसे तो लग रहा था की विवेक मुष्कीलमें फंसा हुवा है. और सामने मॉनीटरपर -' All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password' और मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रहा टाईम बॉम्ब जैसी घडी बता रही थी - 0 hrs... 2mins... 10secs. और उपरसे अतूल अबभी पासवर्ड बतानेके लिए तैयार नही था. हर एकको अलग अलग चिंता सता रही थी. अंजलीको विवेककी. भाटीयाजींको कंपनीकी और इन्स्पेक्टरको विवेक और कंपनीकी. आखिर मॉनिटरपर चल रही घडी बता रही थी - 0 hrs... 0mins... 50secs.

'' टाईम खत्म होनेको आया है ... जल्दी पासवर्ड बताओ'' इन्स्पेक्टर लगभग चिल्लाए.

'' बताता हूम इन्स्पेक्टर... धिरज रखो ''

hrs... 0mins... 40secs.

'' अब क्या डाटा डिलीट होनेके बाद बताओगे ? '' इन्स्पेक्टर चिढकर बोला.

भाटीयाजींने उनके पिठपर हाथ रखकर उन्हे शांत रहनेका इशारा किया. नही तो अतूल अगर चिढ गया तो वह पासवर्ड बतानेके लिए इन्कार कर सकता है.

hrs... 0mins... 30secs.

'' प्लीज ... जल्द से जल्द बता दो '' इन्स्पेक्टर मानो अब गिडगिडाने लगे थे.

'' उसे पहले विवेकको छोड देनेके लिए बोलीए '' अंजली अपने आपको ना रोक पाकर चिल्लाई.

'' और तुम्हे पहले विवेकको छोडना पडेगा '' इन्स्पेक्टर.

hrs... 0mins... 20secs.

'' पहले उसे छोडना है या पासवर्ड बताना है ? '' अतूलभी मौकेका फायदा लेते हूए बोला.

'' पहले विवेकको छोड दो '' अंजलीने कहा.

उधरसे अतूलके ठहाकेकी आवाज आ गई.

hrs... 0mins... 10secs.

'' नही इन्स्पेक्टर पहले मै पासवर्ड बतानेवाला हूं ...क्यो ठिक है ना ?''

'' बोलो जल्दी ...'' इन्स्पेक्टर

'' हं यह लो - इलव्ह... ऑल स्मॉल... नो स्पेस इन बिट्विन..''

hrs... 0mins... 3 secs.

सामने कॉम्प्यूटरपर बैठे एक कर्मचारीने तुरंत पासवर्ड टाईप किया.

hrs... 0mins... 1 secs.

और एंटर दबाया.

मॉनिटरवर चल रहा काऊंटर रुक गया और मेसेज आ गया, '' password correct... recovery started''

सब लोगोंने अपने इर्द गिर्द देखा. सभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर वही मेसेज आया था - '' password correct... recovery started''

हॉलमें उपस्थित सब लोग, सिर्फ एक अंजलीको छोडकर इतने खुश हो गए की वे तालियां बजाने लगे. मानो कोई यान आसमानमें किसी ग्रह पर सही सलामत उतरनेमें कामयाब हुवा हो. लेकिन अचानक इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे हूए शुरु मोबाईलसे आए बंदूकके आवाजने, सब लोगोंकी तालियां एकदम बंद हो गई और हॉलमें श्मशानवत सन्नाटा छा गया. अंजली तो इतनी देरसे उस पर पड रहा तनाव सह नही पाकर और बंदूकका आवाज सुनकर विवेकका क्या हो गया होगा इसके कल्पनामात्रसे बेहोश होकर निचे गिर गई.


एक तरफ अतूल मोबाईलपर बोल रहा था और दुसरे हाथमें उसने विवेकपर बंदूक तानी हूई थी. आखिर उसने लगभग 5 सेकंद बचे होगे तब इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बताया था - '' हं यह लो पासवर्ड - इलव्ह... ऑल स्मॉल... नो स्पेस इन बिट्विन..''

अतूलने अब शुरु मोबाईल फिरसे गाडीके बोनेटपर रख दिया. और वह उस विवेककी तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

'' रुको ... तुम बहुत बडी भूल कर रहे हो ...'' विवेक किसी तरह बोला.

'' भूल ... इसके बाद तुम्हारी वजहसे ... सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे ... मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है ... उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी ... पुछो कौनसी ? ... कम से कम एक खुन... और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं '' अतूलने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और बगलमें खडे गाडीके खिडकीके कांचपर खुनकी बडी बडी छिंटे उड गई थी.


क्रमश:...


Sucess secret -

Keep steadily before you the fact that all true success depends at last upon yourself.

-- Theodore T. Hunger


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Hindi stories - ELove : ch - 49 हथीयार

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Sucess thoughts -

They can because they think they can.

--Virgil


अतूल अब विवेकके एकदम सामने खडा होकर उसकी आखोंमें आखे डालकर देखते हूए बोला,

'' तुम्हे पासवर्डही चाहिए ना ?''

'' हां ... और बहभी डाटा डिलीट होनेके पहले '' विवेक फिरसे चिढकर ताना मारते हूए बोला.

'' अरे हां ... वह डाटा डिलीट होनेके बाद पासवर्डकी क्या जरुरत ?'' अतूल अपने आपसेही जोरसे हंस दिया.

और एकदम अपनी हंसी रोककर बोला, '' लेकिन पहले तुम्हारे पासका हथीयार मेरे हवाले कर दो ''

विवेकने उसकी तरफ चौंककर देखते हूए पुछा, '' हथीयार ?... मेरे पास कोई हथीयार नही .. तुमनेही तो निकलते वक्त मेरी तलाशी ली थी. ''

'' मि. विवेक ... मुझे क्या इतना बेवकुफ समझते हो ?... '' अतूल मोबाईल लगाते हूए बोला. विवेक कुछ नही बोला.

अतूलका मोबाईल लगा था और उधरसे इन्स्पेक्टर मोबाईलपर थे. '' अतूल पासवर्ड क्या है ?'' उन्होने फोन लगतेही पुछा.

'' इन्स्पेक्टर थोडा धीरज रखो ... पहले इधरका एक काम निपट लूं और फिर तुम्हे पासवर्ड बताता हूं '' अतूल फोनपर बोला और उसने चलता हुवा मोबाईलही गाडीके बोनेटपर रख दिया.

'' मैने सुना है की आजकल तुम्हारी पी एच डी चल रही है '' अतूलने विवेकसे पुछा.

फिरभी विवेक कुछ नही बोला.

'' मुझे एक बात नही समझमें आती, इतनी अमीर लडकीको फांसनेके बाद तुम्हे पिएचडीकी क्या जरुरत है ?'' अतूलने आगे पुछा.

विवेक कुछभी बोलनेके लिए तैयार नही था, सच कहे तो वह बोलनेके मन:स्थितीमें नही था.

'' तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?'' अतूलने एकदम गंभिर होते हूए पुछा.

विवेक उसके इस असम्बध्द सवालको कुछ जवाब देना नही चाहता था.

'' तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?'' अतूलने अब कडे स्वरमें पुछा.

विवेकने पहले उसकी आखोंमे देखा. वह इस सवालके बारेमें सिरीयस दिख रहा था.

'' अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स'' विवेकने कंधे उचकाकर जवाब दिया.

'' अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स ... हूं ... तुम्हारे जुते बताओ.. निचेसे '' अतूलने मांग की.

विवेकको उसके सवालका उद्देश अब पता चल चुका था. उसे अबभी उसके पास कोई हथीयार होनेकी आशंका थी. विवेकने अपना दाया जुता वैसेही पैरमें रखते हूए उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहां कुछ होनेके निशान तो नही दिख रहे थे.

'' अब बाया बताओ '' अतूलने फिरसे आदेश दिया.

विवेकने थोडी हिचकिचाहट जताई तो वह चिल्लाया, '' कम ऑन क्वीक''.

विवेकने बाया जुताभी उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहांभी कुछ नही था. लेकिन अब अतूल सोचमें पड गया. उसे विवेकके पास कुछ हथीयार होनेका पुरा विश्वास था.

'' रुको ... हात उपर करो ...'' अतूल उसके पास जाते हूए बोला.

विवेकने दोनो हाथ उपर किए. और अतूल उसके जेबसे एक एक सामान निकालकर बोनेटपर रखने लगा. पहले पॅन्टके जेबसे और फिर शर्टके जेबसे सब सामान निकालकर अतूलने गाडीके बोनेटपर रख दिया.

उस सामानमें कुछ लोहेके छोटे छोटे टूकडे थे. अतूल उन टूकडोंकी तरफ गौरसे देखते हूए बोला, '' यह क्या है ?''

'' कुछ नही .. मेरे रिसर्चका सामान '' विवेकने कहा.

'' अच्छा!'' अतूल अविश्वासके साथ बोला. .

अतूल अब वे सारे टूकडे एक एक करते हूए उलट पुलटकर निहारने लगा. उन सारे टूकडोंमे उसे एक टूकडा थोडा अलग लगा. वह उसने उठाया और वह उसे और गौरसे निहारकर देखने लगा. उस टूकडेके एक तरफ लाल बटन जैसा कुछ तो था. उसकी तरफ विवेकका ध्यान आकर्षीत करते हूए अतूल बोला,

'' यह क्या है ऐसा ?''

विवेक कुछ नही बोला. अतूलने वह टूकडा उलट पुलटकर देखते हूए वह लाल बटन दबाया. और क्या आश्चर्य गाडीके बोनेटपर रखे सब टूकडोंमे अब हरकत दिखने लगी थी. और वे किसी चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपकने लगे. जब सारे टूकडे चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपक गए. उसमेंसे एक बंदूककी तरह वस्तू तैयार हो गई.

'' अच्छा तो यह ऐसा है ?...'' अतूल आश्चर्यसे बोला, "' मेरा अंदेशा कभी गलत नही होता ... मुझे पता था की तुम्हारे पास कोईना कोई हथीयारतो होनाही चाहिए ''

अतूलने वह बंदूक उठाकर उलट पुलटकर देखी.

'' स्मार्ट व्हेरी स्मार्ट... विवेक यू आर जिनियस ... बट ओन्ली इंटॆलेक्चूअली ... नॉट प्रोफेशन्ली'' अतूल अजीब तरहके मुस्कुराहटके साथ बोला.


क्रमश:...


Sucess thoughts -

They can because they think they can.

--Virgil


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Hindi Literature Sahitya - ELove : ch-48 करोडो रुपयोंका नुकसान

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Success Quotations -

Along with success comes a reputation for wisdom.

--- Euripides


कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टर भाटीयाजी, इन्स्पेक्टर कंवलजित और अंजली अभीभी अस्वस्थाके साथ कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. मॉनिटरपर अबभी वही मेसेज ब्लींक हो रहा था. - ' All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password' लेकिन मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी घडी दर्शा रही थी - 0 hrs... 20mins... 20secs.

घडीमें दिख रहे शुन्य घंटेने सब लोगोंमे एक अस्वस्थता, एक डर फैलाया था.

'' अब तो सिर्फ 20 मिनटही बाकी है ... अबभी उसका फोन कैसे नही आया? '' अंजलीने कहा.

वह भलेही उपरसे नही दिखा पा रही थी, उसे कंपनीके भले बुरेसे विवेककी जादा चिंता थी, और वह लाजमीभी था. इन्स्पेक्टर कंवलजितने अंजलीके कंधेपर अपना धीरजभरा हाथ रखते हूए कहा, '' धीरज रखो ... फोन इतनेमेंही आएगा ''

'' लेकिन अगर उसका फोन नही आया तो हमारे कंपनीका क्या होगा ?'' भाटीयाजीने चिंताभरे स्वरमें कहा. यह उन्होने पुछा हुवा सवाल, सवालसे जादा चिंता दर्शा रहा था, इसलिए इस सवालको जवाब देनेके झमेलेंमे कोई नही पडा. और देंगे तो क्या जवाब देंगे ? तभी कंपनीके चार पाच कर्मचारी वहां जल्दी जल्दी आगए.

'' क्या लिया क्या बॅक अप?'' भाटीयाजींने उन्हे अधीरतासे पुछा.

'' नही सर ... उसने प्रोग्रॅमही इस तरहसे लिखा है की नेटवर्ककी सब आवाजाही बंद करके रखी है '' उनमेंसे एक कर्मचारी बोला.

'' साला यह कॉम्प्यूटर जितना काम आसान बनाता है कभी कभी उतनाही मुश्कील बना देता है '' भाटीयाजी चिढकर बोले.

भाटीयांजी चिढनेकी वजहभी वैसी ही थी. उस नेटवर्कमें सॉफ्टवेअरके रुपमें उस कंपनीके क्लायंट्सके करोडो रुपए फंसे हूए थे. और वह सारा डाटा अगर डीलीट हुवा तो करोडो रुपयोंका नुकसान होना था. वह कंपनी वे सॉफ्टवेअर फिरसे डेव्हलप कर नही सकती थी ऐसी बात नही थी. लेकिन वह सॉफ्टवेअर डेव्हलप करनेके लिए लगनेवाला वक्त और कंपनीने लाखो कर्मचारीयोंकी मेहनतपर पाणी फेरनेवाला था. और डिलेव्हरी वक्तपर ना देनेसे कंपनीका नाम खराब होकर उनके कुछ ऑर्डर्स कॅन्सलभी हो सकते थे, वह अलग. इन्स्पेक्टर कंवलजितकी भाटीयाजींको धीरज बंधानेकी इच्छा हुई लेकिन हिंम्मत नही बनी. क्योंकी अब उन्हे खुदकोभी अतूलका फोन आएगा की नही इस बारेमें आशंका हो रही थी.

'' कॅन समबडी ट्राय ऑन द मोबाईल'' एक कर्मचारीने सुझाया.

'' मै कबसे ट्राय कर रही हूं ... लेकिन 'स्विच्ड ऑफ'काही मेसेज आ रहा है '' अंजलीने कहा.

क्योंकी वह विवेकने हालहीमें खरीदा हुवा मोबाईल था और उसका नंबर अंजलीके पास था.


अतूल गाडी चला रहा था और उसके बगलमेंही विवेक बैठा हुवा था. इतने देरसे दोनोंभी चुपचाप थे. अतूल तेडे मेडे रस्तेपर इधर उधर गाडी मोडते हूए गाडी चला रहा था और विवेक रास्तेपर वह कहां गाडी ले जा रहा है और उसकी कहां भागनेकी मनिषा है यह समझनेकी कोशीश कर रहा था. वैसे बिच बिचमें अतूल विवेकको रास्ता पुछ रहा था, लेकिन जितना अतूल था उतनाही अनभिज्ञ विवेकभी था. और जब उसके यह खयालमें आगया उसके चेहरेपर एक हंसी दिखने लगी थी और उसने उसे रास्ता पुछनाभी बंद किया. विवेकको रास्ता मालूम ना होना यह बात अतूलके लिहाजसे फायदेमंदही थी. तभी अतूलने प्रमुख रास्तेसे अपनी गाडी एक निर्जन प्रदेशके लिए मोड दी.

'' इधर किधर जा रहे है हम ... वहांसे मोबाईलका सिग्नल नही मिलेगा शायद '' विवेकने कहा.

अतूल उसकी तरफ देखकर अजिब तरहसे सिर्फ मुस्कुरा दिया. रास्ते से काफी मोड लेनेके बाद अचानक अतूलने जोरसे ब्रेक दबाते हूए अपनी गाडी रोक दी और वह गाडीसे उतर गया. विवेकभी गाडीसे उतरकर सिधा डीकीकी तरफ चला गया. डीकी खोलकर पहले उसने मोबाईल बाहर निकालकर स्वीच ऑन करके देखा. मोबाईलपर आनेवाले सिग्नल्स देखकर वह राहतकी सांस लेते हूए बोला, '' सिग्नल्स तो आ रहे है ''

अतूल चलते हूए गाडीके दुसरे तरफसे विवेकके पास गया.

'' हं अब उन्हे पासवर्ड बता दे '' विवेक मोबाईल उसके पास देते हूए बोला.

'' अरे बताते है भाई ... इतनी जल्दी किस बातकी '' अतूल कंधे उचकाकर बेपरवाही से बोला.

'' नही ,... अब सिर्फ दस मिनिटही बचे हूए है ''

विवेक अतूलपर बहुत भडक गया था. लेकिन वह अपने आपपर नियंत्रण करते हूए जादासे जादा शांत रहनेकी कोशीश कर रहा था, क्योंकी शांतीसेही काम होने वाला था.

'' दस मिनट ... कॉम्प्यूटरके लिए बहुत है ... तुम्हारे जानकारीके लिए बताता हूं ... कॉम्प्यूटरमें वक्त नॅनोसेकंडमें गिना जाता है '' अतूलने कहा.

विवेकको उससे कॉम्प्यूटरके बारेमें जानकारी सुननेकी बिलकुल इच्छा नही थी. इस वक्त ऐसी बाते सुनकर विवेक अपने गुस्सेको काबू नही रख पा रहा था.

'' कॉम्प्यूटरके लिए दस मिनट बहुत होंगे... मेरे लिए नही '' विवेक चिढकर बोला.

'' हां वह भी सही है '' अतूल उसके पास जाते हूए बोला.


क्रमश:...


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Along with success comes a reputation for wisdom.

--- Euripides


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Hindi Books library - Elove : ch-47 गुड मुव्ह

Success Quotations ---

We are all motivated by a keen desire for praise, and the better a man is, the more he is inspired to glory.

--- Cicero


इतनी बडी कंपनीका अस्तित्व और भविष्य खतरेमें आया था, इसलिए इन्स्पेक्टरको अतूलका सबकुछ सुननेके अलावा कोई रास्ता नही था. और उससे कितना नुकसान हो सकता है यह भाटीयाजींके पसिनेसे लथपथ चेहरेपर साफ दिख रहा था. वैसे देखा जाए तो भाटीयाजी बहुत हिम्मतवाले या यू कहा जाए की मोटी चमडीवाले आदमी थे. और उनके चेहरेपर और पुरे बदनमें पसिना आए मतलब कंपनीका अस्तित्व बुरी तरफ दाव पर लगा था यह स्पष्ट था.

अतूलने बताए अनुसार विवेकभी उसके साथ उसे उस जगहसे दूर छोडनेके लिए तैयार हुवा था. इसलिए उसके साथ कौन जाएगा यह एक बडी गुथ्थी सुलझ गई थी. क्योंकी उसके साथ अकेला जाना खतरेसे खाली नही था, यहांतककी खुदकी जान जानेकाभी खतरा था और वह किसे अपनेसाथ कोई हथीयार ले जाने देगा इतना मुर्ख नही था. लेकिन विवेकको उसके साथ अकेले भेजनेके लिए अंजलीका दिल नही मान रहा था. वह वैसे कुछ बोली नही लेकिन उसके चेहरेसे सबकुछ झलक रहा था. एक तरफ भाटीयाजींकी कंपनी उसकी वजहसेही खतरेमें आ गई थी और उसनेही विवेकको भेजेनेके लिए इन्कार करना उसे ठिक नही लग रहा था. अतुलको जाल डालकर फांसनेके काममें भाटीयाजींका बहुमोल योगदान था. और उन्होने उस बातके खतरेका अहसास होते हूए भी उसे पुरा सहयोग दिया था. और अब उनकी कंपनी खतरेमें आनेके बाद मुंह मोड लेना उसे जच नही रहा था.

विवेकनें उसकी दुविधा जानते हूए उसे अपनी बाहोमें लेते हूए थपथपाकर कहा.

'' डोन्ट वरी हनी... आय वुल बी फाईन''

अंजली कुछभी बोली नही, लेकिन आखीर अपने दिलपर पत्थर रखकर वह उसे जाने देनेके लिए तैयार हो गई.

एक तरहसे इन्स्पेक्टर कंवलजितनेही उसे धिरज बंधाकर तैयार किया था.

भाटीयाजी, अंजली, विवेक और इन्स्पेक्टर कंवलजित स्टेजसे उतरकर वहांसे निकल जानेके बाद हॉलमें इकठ्ठा हूए लोगोंको शांतीसे बाहर निकालनेका काम ऍन्करने कुछ पुलिसकी मदत लेते हूए खुब निभाया था. अब कंपनीके कंपाऊंडके अंदर पुलिस, कंपनीके लोग, विवेक, अंजली और वह गुनाहगार के अतिरिक्त कोई नही था. कुछ लोगोंको इस पुरे मसलेकी खबर शायद लगी थी, क्योकी वे पुलिसकी डरकी वजहसे कंपाऊंडके बाहर जाकर इधर उधर छिपते हूए उधरही देख रहे थे. और वेभी लोग बहुत कम थे. इसलिए अब गुनाहगारको संभालनेमें या उसकी मांगे सुन लेनेमें इन्स्पेक्टर कंवलजितको जादा तकलिफ नही हो रही थी. अगर लोग अबभी कंपाऊंडके अंदर या हॉलमें होते तो शायद इस गुनाहगारको संभालनेसे उन लोगोंको संभालना जादा तकलिफदेह होता था.

आखिर अतूलको उसके कहे अनुसार कही बहुत दुर ले जाकर छोडनेके लिए पुलिस राजी हो गई. सब लोग कंपनीके बिल्डींगके बाहर खुले मैदानमे इकठ्ठा हुए थे. मैदानमें पुलिसकी और बाकी बहुतसारी गाडीयां खडी थी. अतूलने वहां खडी पाच छे गाडीयोंके पास जाकर गौरसे देखा और उनमेंसे एक गाडीके छतपर थपथपाते हूए पुछा,

'' यह गाडी किसकी है ?''.

वह कंपनीके एक ऑफिसरकी गाडी थी. वह ऑफिसर डरते हूएही सामने आते हूए बोला, '' मेरी है ''

'' चाबी दो '' अतूलने फरमान छोडा.

भाटीयाजींने उस ऑफीसरकी तरफ देखते हूए आंखोसेही उसे वैसा करनेके लिए कहा. उस ऑफीसरने चुपचाप अपने पॅन्टकी जेबसे चाबी निकालकर अतूलके हवाले कर दी.

'' हम इस गाडीसे जाएंगे '' अतूलने एलान किया.

विवेकने एक कडा कटाक्ष अतूलकी तरफ डालते हूए कहा, '' पहले तुम्हारा मोबाईल इधर दो ''

अतूलने कुछ क्षण सोचा और अपना मोबाईल निकालकर विवेकके पास देते हूए बोला, '' गुड मुव्ह''

विवेकने वह मोबाईल लेकर इन्स्पेक्टरके पास दिया.

'' अब तुम्हारा मोबाईल इधर लाओ '' अतूलने कहा.

विवेकने अपना मोबाईल निकालकर अतूलके पास दिया. अतूलने गाडीकी डीक्की खोली और वह मोबाईल डिक्कीमें डाल दिया. लेकिन उसे क्या लगा क्या मालूम, उसने वह मोबाईल फिरसे डीक्कीसे बाहर निकाला और उसे ऑफ कर फिरसे डिक्कीमें डालते हूए डिक्की बंद की.

'' गुड मुव्ह'' अब विवेककी बारी थी.

अतूल उसकी तरफ देखकर मक्कारकी तरह मुस्कुराते हूए बोला, '' हां अब सब ठिक है ''

'' हू विल ड्राईव्ह द व्हेईकल?'' विवेकने गाडीके पास जाते हूए पुछा.

'' ऑफ कोर्स मी'' अतूलने कहा और गाडीके ड्राईव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा.

लेकिन अचानक अतूल बिचमेंही रुकते हूए बोला , ''वेट'

विवेकभी रुक गया. अतूल मुस्कुराते हूए विवेकके पास गया और उसकी उपरसे निचेतक पुरी तलाशी लेने लगा. शायद वह उसके पास कोई हथीयार है क्या यह देख रहा था.

'' हां अब ठिक है '' अतूल ड्रायव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा वैसे विवेकने कहा,

'' वेट... दॅट अप्लाईज टू यू टू''

विवेकनेभी अतूलके पास जाकर उसकी पुरी तलाशी ली.

'' हां अब ठिक है '' विवेकने कहा और गाडीकी तरफ जाने लगा वैसे अतूल इन्स्पेक्टरकी तरफ देखते हूए बोला,

'' नही अभीभी सब ठिक नही है ... ''

इन्सपेक्टर कुछ ना बोलते हूए अतूलकी तरफ देखने लगा.

'' इन्स्पेक्टर अगर मुझे किसीभी क्षण खयालमें आगया की हमारा पिछा हो रहा है ... या हमारी जानकारी कही भेजी जा रही है ... तो ध्यानमें रखो ... मै पासवर्ड तो दुंगा ... लेकिन वह गलत पासवर्ड होगा ... जो दिए बराबर तुम्हारे कंपनीका सारा डाटा तुरंत नष्ट हो जाएगा ... समझे ?'' अतूलने कडे स्वरमें ताकिद दी.

'' डोन्ट वरी यू विल नॉटबी ... फालोड... प्रोव्हायडेड यू गिव्ह अस द करेक्ट पासवर्ड...'' इन्स्पेक्टरने कहा.

'' दट्स लाईक अ गुड बॉय'' अतूल गाडीके ड्रायव्हीग सिटपर बैठते हूए बोला.

अतूलने गाडी शुरु करके विवेककी तरफ कडी नजरसे देखा. विवेक उसकी बगलवाले सिटपर चुपचाप आकर बैठ गया और अंजलीकी तरफ देखते हूए उसने गाडीका दरवाजा खिंच लिया.

अतूलने गाडी रेस की और कंपनीके कंपाऊंडके बाहर ले जाकर तेजीसे रास्तेपर दौडाई.


क्रमश:...


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--- Cicero


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Proverb of the Day ---

"Tomorrow

is often the busiest day of the week."

--- Spanish Proverb


कंपनीके उस आदमीने कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टरके कानमें कुछ खुसफुसाकर प्रोग्रॅमका सारा मुडही बदल दिया था. डायससे निचे उतरकर कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाची सिधे अपने कॅबिनके तरफ जाने लगे. भाटीयाजींको वह फासला मानो बहोत दूर लग रहा था. डायसकी सिढीयां उतरकर और उनके ऑफीसकी सिढीयां चढते हूए पहलीबार उन्हे थकावट महसूस हो रही थी. उनके पिछे इन्स्पेक्टर कंवलजित और सबसे पिछे असमंजसमें चल रहे अंजली और विवेक थे. सबलोग जब भाटीयाजींके कॅबिनमें घुस गए, तब वहां पहलेसेही कुछ लोगोंने कॉम्प्यूटरके इर्दगिर्द भिड की थी. भाटीयाजीभी उस भिडमें शामिल हो गए और कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. अंजली और विवेकने जब उस भिडमें घुसकर उस मॉनिटरकी तरफ देखा. तब कहां उनको सारे मसलेका अवलोकन हुवा. उनके मनमें चल रही सारी शंकाए एक पलमें नष्ट होकर वह जगह अब चिंता और डरने ली थी. मॉनिटरपर एक ब्लींक हो रहा मेसेज दिख रहा था - All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password' और मॉनिटरपर उलटी गिनती दिखा रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी एक घडी दिख रही थी. - 5hrs... 10mins... 26secs

"" ओ माय गॉड... '' भाटीयाजींके आश्चर्यासे खुले रहे मुंहसे निकल गया.

उनका पुरा बदन पसिना पसिना हो गया था और चेहरेपरभी पसिनेकी बुंदे दिख रही थी. सब डाटा अगर डिलीट हूवा तो होनेवाले नुकसानके कल्पनाभरसेही वे घबरा गए थे.

'' सर यही नही तो कंपनीके सारे कांम्प्यूटरपर यह मेसेज आया है ... '' कंपनीका एक आदमी बोला. और फिर सब लोगोंको डॆव्हलपमेंट सेंटरकी तरफ ले जाते हूए बोला, '' सर जरा इधरभी देखिए ..''

उसके पिछे सारे लोग कुछ ना बोलते हूए जा रहे थे, मानो समशानमें जा रहे हो.

डेव्हलपमेंट सेंटर यानी एक बडा हॉल था और वहां छोटे छोटे क्यूबिकल्स बनाकर हर डेव्हलपरकी तरफ ध्यान दिया जा सके और सबको प्रायव्हसीभी मिले इसका खास ध्यान रखा गया था. वहां सब कॉम्प्यूटरके मॉनिटर्स शुरु थे और सब मॉनिटरपर एकही मेसेज था - All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password'

और यहांभी सब कॉम्प्यूटर्सपर उलटी गिनती चल रही थी.

5hrs... 3 mins... 2 secs

'' सचमुछ गुनाहगार जाते हूए अपनी आखरी चाल चल गया है '' विवेकने कहा.

'' इट्स अ टीपीकल एक्सांपल ऑफ ईटेररीझम'' अंजलीने कहा.

'' हमारे तो कंपनीका अस्तित्वही खतरेमें आया है '' भाटीयाजी अपने चेहरेसे पसिना पोंछते हूए बोले.

'' आप चिंता मत किजिए ... पासवर्ड गुनाहगारसे कैसे उगलना है यह हमारा काम है '' इन्स्पेक्टरने कहा.

तभी दो पुलिस हथकडी पहने हूए अतूलको वहां लेकर आ गए. इन्स्पेक्टरने पुरा मसला समझमें आतेही उसे वापस यहां लानेके लिए अपने साथीयोंको पहलेही वायरलेसपर बताया था. अतूल धीमे मस्ती भरी चालसे मंद मंद मुस्कुराते हूए इन्स्पेक्टरकी तरफ चलने लगा.

'' पासवर्ड क्या है ?...'' इन्स्पेक्टरने उसे कडे स्वरमें पुछा.

इन्स्पेक्टरने 'साम दाम दंड भेद' से पहले 'दंड' का इस्तेमाल करनेकी ठान ली थी ऐसा दिख रहा था.

'' जल्दी क्या है ... पहले मेरी हथकडीतो खोलो ... अभी और 5 घंटे बाकी है '' अतूल हसते हूए शांत स्वरमें बोला.

इन्स्पेक्टर गुस्सेसे उसे मारनेके लिए उसकी तरफ बढे वैसे अतूल चेहरेपर कुछभी डर ना दिखाते हूए वैसेही खडा रहते हूए, उनकी आखोंमें आखे डालकर बोला, ' अं हं... इस्न्पेक्टर यह गल्ती कभी ना करना ... ऐसी गलती करोगे तो मै पासवर्ड तो दुंगा लेकिन वह पासवर्ड देनेके बाद ... तुम्हारेपास जो 5 घंटे बाकि है वहभी नही रहेंगे..... पुरा डाटा वह पासवर्ड देनेके बाद तुरंत नष्ट हो जाएगा ...''

इन्स्पेक्टरने उसपर उठाया हुवा हाथ पिछे लिया. उन्हे अहसास हो गया था की उसके बोलनेमें तथ्य था.

'' खोलो मेरी हथकडी '' अतूलने फिरसे कहा.

इन्स्पेक्टरने उसे लेकर आए पुलिसको इशारा किया. उन्हे इशारा मिलतेही उन्होने चूपचाप उसकी हथकडी खोली. अतूलने अपनी खुली हूई कलाइयां एक के बाद एक दुसरे हाथमें लेकर घुमाई और वह अपने दोनो हाथ पिछे ले जाते हूए जम्हाई भरते हूए, उसे मिली हूई रिहाईका आनंद व्यक्त करते हूए बोला,

'' हां अब देखो... कैसे खुला खुला लग रहा है ''

'' पासवर्ड क्या है ?'' फिरसे इन्स्पेक्टरका कडा स्वर गुंजा.

'' इन्स्पेक्टर तुम्हे लगता है, की मै इतने आसानीसे और इतने जल्दी तुम्हे पासवर्ड बताऊंगा ?'' अतूल इन्स्पेक्टरकी आंखोसे आंखे मिलाते हूए बोला.

'' फिर तुम्हे और क्या चाहिए ?'' इन्स्पेक्टरने अपना स्वर अबभी कडा रखते हूए पुछा.

'' बस कुछ नही ... सिर्फ मेरे पुरे रिहाईका इंतजाम .. '' अतूलने कहा.

'' मतलब ?'' इतनी देर से चुप था विवेक पहली बार बोला.

'' अरे हां ... अच्छा हुवा तु बोला ... तुझे मेरे साथ आना पडेगा ... मुझे यहांसे दूर ... जहां ये लोग फिरसे पहूंच नही पाए ऐसी जगह मुझे पहुचानेकी जिम्मेदारी अब तुम्हारी ... और फिर वहांसे मै इन्हे मोबाईलसे वह पासवर्ड बताऊंगा ... '' अतूलने कहा.

'' हमें क्या मुरख समझ रखा है ?'' इन्स्पेक्टर फिरसे गुर्राया.

'' इन्स्पेक्टर यह वक्त अब कौन मुरख है या बननेवाला है यह तय करनेका नही है ... संक्षिप्तमें कहा जाए तो ... यू डोन्ट हॅव चॉईस... तुम्हे मेरे कहे अनुसार करनेके अलावा कोई चारा नही है '' अतूलने कहा.

इन्स्पेक्टरने एक बार विवेककी तरफ तो दुसरी बार अतूलकी तरफ देखा.

'' ठिक है '' विवेकने दृढतासे कहा.


क्रमश: ..


Proverb of the Day ---

"Tomorrow

is often the busiest day of the week."

--- Spanish Proverb


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Hindi Sahitya - Elove : ch-45 आखरी दांव

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Quote of the Day ---

"In a moment of decision,

the best thing you can do is the right thing to do.

The worst thing you can do is nothing.

--- Theodore Roosevelt


... पुरी कहानी सुनाकर इन्स्पेक्टरने एक लंबी सांस ली. स्टेजपर इन्स्पेक्टर कंवलजित, अंजली, नेट सेक्यूराके डायरेक्टर और ऍन्कर खडे थे. पुरी कहानी खत्म होगई थी, फिरभी लोग अभीभी शांत थे. हॉलमें मानो शमशानसी चुप्पी फैली हुई थी. तभी अंजलीको हॉलके पिछले हिस्सेमें विवेक खडा हुवा दिखाई दिया. अंजलीने हात हिलाकर उसे स्टेजपर बुलाया. विवेकभी लगभग दौडते हूएही स्टेजपर गया. अंजलीने उसका हाथ अपने हाथमें लेकर उसे अपने पास खडा किया. अबतक जो सब लोग शांत थे वे अब तालियां बजाने लगे. और तालियाभी इतनी की मानो उन्होने सारा हॉल सरपर लिया हो. तालियां रुकनेका नाम नही ले रही थी.

अबभी विवेकका हाथ अंजलीके हाथमें कसकर पकडा हुवा था. अंजलीने दुसरा हाथ दिखाकर लोगोंको शांत रहनेका इशारा किया और वह माईक हाथमें लेकर बोलने लगी -

'' हमारा प्रेम... यां यू कहिए ... हमारा इ - लव्ह ... लगा था कमसे कम इसमें तो बाधाएं नही आयेंगी .. लेकिन ऐसा लगता है की प्यार की राहमें हमेशा बाधाए आती है ...''

अंजलीने हॉलमें सब तरफ अपनी नजरे घुमाई और वह विवेकका हाथ और कसकर पकडते हूए आगे बोली, '' ... लेकिन कुछभी हो ... आखिर जित प्यारकीही होती है ''

लोगोंने तालिया बजाते हूए फिरसे पुरा हॉल मानो अपने सरपर उठा लिया.

अब विवेकने माईक अपने हाथमें लिया और लोगोंको शांत रहनेका इशारा करते हूए वह बोला,

"" हमारे दोनोके प्रेमकहानीसे आप लोग एक सिख जरुर ले सकते है की ... '' एक क्षण स्तब्ध रहकर वह आगे बोला, '' की बुरेका अंत आखिर बुरेमेंही होता है ...''

फिरसे लोगोंने तालियां बजाकर मानो उसके कहनेको अपनी सहमती दर्शाई. तभी एक कंपनीका आदमी स्टेजके पिछले हिस्सेसे स्टेजपर आ गया. उसकी चारो ओर घुमती हूई आंखे स्टेजपर किसीको ढूंढ रही थी. आखिर उसे कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाजी दिखतेही वह उनके पास गया और उनके कानमें कुछ बोलने लगा. वह जोभी बोल रहा था वह सुनकर भाटीयाजींके चेहरेपर अचानक हडबडाहट, आश्चर्य और डरके भाव दिखने लगे. उनके चेहरेपर वे भाव देखकर स्टेजपर उपस्थित बाकी लोगोंके चेहरेपरभी भाव बदल गए थे. स्टेजपर जो हल्का फुल्का खुशीका माहौल था वह एकदमसे तनावमें बदल गया था. उस कंपनीके आदमीने भाटीयाजीको सब बतानेके बाद भाटीयाजीने स्टेजपर इधर उधर देखा और वे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ बढने लगे.

अब भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके कानमें कुछ बोल रहे थे. इन्स्पेक्टरकीभी वही दशा हो गई थी. उनके चेहरेपरभी हडबडाहटभरे आश्चर्य और डरके भाव आगए थे. तबतक अंजली, विवेक और वह ऍन्करभी इन्स्पेक्टरके पास पहूंच गए.

'' क्या हुवा ?'' अंजलीने एकबार इन्स्पेक्टरकी तरफ तो दुसरी बार भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

'' जाते हूए वह अपना आखरी दांव खेल गया है '' इन्सपेक्टरने बताया.

'' लेकिन क्या हुवा ?'' विवेकने पुछा.

'' थोडा खुलकर तो बताओ ?'' अंजलीने भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

'' खुलकर बोलनेके लिए अब वक्त नही है ... चलो मेरे साथ चलो '' भाटीयाजी अब जल्दी करते हूए बोले. और तेजीसे स्टेजके पिछले हिस्सेसे उतरकर उस कंपनीके आदमीके साथ अपने ऑफीसकी तरफ जाने लगे.

इन्स्पेक्टर, अंजली, और विवेकभी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी - किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.


क्रमश:...


Quote of the Day ---

"In a moment of decision,

the best thing you can do is the right thing to do.

The worst thing you can do is nothing.

--- Theodore Roosevelt


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Encourging thoughts -

First say to yourself what you would be;

and then do what you have to do.

---Epictetus


रातका समय था. एक अंधेरे कमरेमें अलेक्स कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. कमरेमें जोभी कुछ उजाला था वह उस मॉनिटरकाही था. उस मॉनिटरके रोशनीमें अलेक्सका भद्दा चेहरा और ही भयानक दिख रहा था. तभी दरवाजेपर दस्तक हूई. अलेक्स उठ खडा हूवा,

लगता है आगए साले बेवडे...

उसने सोचा. यह उसके रातमें इकठ्ठा होनेवाले दोस्तोंके आनेका वक्त था. वे इकठ्ठा होकर देर रात तक पिते थे और गप्पे मारते बैठते थे. और इतनेमें उसके पास पैसा आनेसे उसके यहां आनेवाले दोस्तोंकी गिनती बढती जा रही थी.

'' कोण है बे?'' मस्तीमें बोलते हूए उसने दरवाजा खोला.

और उसके चेहरेका रंग फिका पड गया. उसके चेहरेकी मस्ती पुरी तरहसे उड गई थी. उसके सामने दरवाजेमें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और और पांच छे पुलिस खडे थे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे. वह कुछ सोचे और कुछ हरकत करे इसके पहलेही पुलिसने उसे दबोचकर अरेस्ट किया.

'' मैने क्या किया ?'' अलेक्स अपने चेहरेपर मासुमियतके भाव लाकर बोला.

कोई कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रहा है यह देखकर वह फिरसे बोला,

'' मुझे क्यों अरेस्ट किया गया ... कुछ तो कहोगे ?''

फिरभी कोई कुछ नही बोला.

'' ऐसे आप कुछभी गलती ना होते हूए किसीको अरेस्ट नही कर सकते ... यह कानुनन अपराध है '' वह अपनी आवाज बढाकर बोला.

फिरभी कोई कुछ बोलनेके लिए तैयार नही था, यह देखते हूए वह चिढकर चिल्लाया,

'' मुझे क्यो अरेस्ट किया गया है ?''

'' पता चलेगा... जल्दीही पता चलेगा '' इन्सपेक्टरका एक साथी ताना मारते हूए धीमे स्वरमें बोला.

अब कंधा उचकाकर, चेहरेपर जितने हो सकते है उतने मासुमियतके भाव लाकर, वह उनकी हरकते निहारने लगा. एक बलवान पुलिस उसके हाथोमें हथकडीयां पहनाकर उसे घरके अंदर ले गया. बाकी सारे पुलिस घरमें सब तरफ फैलकर घरकी तलाशी लेने लगे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे, वे कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट थे. उन्होने तुरंत कॉम्प्यूटरपर कब्जा किया. कॉम्प्यूटर शुरुही था इसलिए अपराधीसे पासवर्ड हासिल करना या उस कॉम्प्यूटरका पासवर्ड ब्रेक करना, यह सब टल गया था. पुलिसकी टीम पुरे घरकी और आसपासकी तलाशी लेते हूए जब कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द इकठ्ठा हो गई, तब कॉम्प्यूटरपर बैठे एक्सपर्टमेंसे एकने इन्स्पेक्टर कंवलजितसे कहा,

'' सर इसमें तो कुछभी नही है ''

'' घरमेंभी कुछ नही मिल रहा है '' टीममेंसे एकने जोड दिया.

'' कुछ होगा तो मिलेगा ना ... मुझे लगता है आप लोग गलत घरमें घुस गए हो '' अलेक्सने बिचमेंही कहा.

'' ठिकसे देखो .. उसने अगर हार्डडिस्क फॉरमॅट की हो तो अपने रिकव्हरी टूल्स रन करो '' इन्सपेक्टरने कहा.

'' यस सर'' कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट बोला.


टिममेंसे कुछ पुलिस अबभी घरमें सामान उलट पुलटकर देख रहे थे. तभी एक पुलिस वहा इन्सपेक्टरके पास एक बॅग लेकर आया. उसने बॅग खोली तो अंदर कपडे थे. उसने कपडेभी बाहर निकालकर देखा, लेकिन अंदर कुछभी नही था.

'' देखो ... घरका कोना कोना छान मारो ...'' इन्स्पपेक्टर उन्हे मायूस हुवा देखकर उनका हौसला बढानेके उद्देशसे बोला.

'' यस सर'' उस पुलिसने कहा और फिरसे घरमें ढुंढने लगा.

तभी कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टका उत्साहीत स्वर गुंजा '' सर मिल गया ''

सारे लोग अपने अपने काम छोडकर कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द जमा हो गए. और वे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ बडी आस लेकर देखने लगे. उनमेंसे सिनियर कॉम्प्यूटर एक्सपर्टने कॉम्प्यूटरपर एक फाईल खोली. शायद उसने वह रिकव्हरी टूल्सका इस्तेमाल कर रिकव्हर की होगी. वह फाईल यानी ब्लॅकमेलरने पहले मेलमें अंजलीको भेजा हुवा अंजली और विवेकके प्रणयका फोटो था. इन्सपेक्टरने अब गुस्सेसे मासूम बननेकी कोशीश कर रहे अलेक्सकी तरफ देखा. अलेक्सके चेहरेसे मासूमियतभरे भाव कबके उड चुके थे. उसने अपनी गर्दन झुकाई थी. इन्स्पेक्टरने अपने साथीसे इशारा करतेही वह पुलिस अरेस्ट किए हुए अलेक्सको बाहर ले गया. अलेक्स चुपचाप कुछभी प्रतिकार ना करते हूए उस पुलिसके पिछे पिछे चलने लगा.

अलेक्सको उस पुलिसने वहांसे बाहर ले जातेही, इन्स्पेक्टर कंवलजितने अपना मोबाईल लगाया -

'' अंजली गुड न्यूज... ''


क्रमश:...


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---Epictetus


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2. मधूराणी (the story of femine power)
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4. अद-भूत (हॉरर, सस्पेंन्स थ्रीलर)
5. मृगजल (लव्ह ड्रामा, सायकॉलॉजीकल थ्रीलर)
6. फेराफेरी (कॉमेडी)
7. लव्ह लाईन (लव्ह, कॉमेडी, सस्पेन्स)
8. ब्लॅकहोल (हॉरर, मिस्ट्री, सस्पेन्स)

About Hindi

Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.