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उपन्यास - शून्य (संपूर्ण) The suspense, thriller [Email this] English Version->[Zero]
उपन्यास - ब्लैकहोल (संपूर्ण) The Mystery, horror, suspense Email this English Version->[Black Hole]
उपन्यास - ई लव्ह (संपूर्ण) The suspense, thriller Email this English Version->[eLove]
उपन्यास -मधुराणी (Current Novel)
Story of a femine power
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Hindi books library - Elove : ch-43 चलो

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Hindi books library - Elove : ch-43 चलो

Imagination thoughts -

The power of imagination makes us infinite.

--- John Muir


सुबह सुबह ऑफीसमें आए बराबर अंजली अपने काममें व्यस्त हो गई. तभी शरवरी कॅबिनमें आ गई.

'' प्रतियोगीता कब कलसे शुरु होनेवाली है ना? '' अंजलीने शरवरीसे पुछा.

'' हां'' शरवरीने एक फाईल ढुंढते हूए जवाब दिया.

'' कितने लोगोंके अप्लीकेशन्स आए है ?'' अंजलीने पुछा.

'' लगभग तिन हजार'' शरवरीने उत्तर दिया.

'' ओ माय गॉड ... इतने लोगोंमें उस ब्लॅकमेलरको ढुंढना यानी ... पहाड खोदकर चुहा निकालने जैसा होगा... और वहभी अगर वह इस प्रतियोगीतामें शामील हुवा तो?... नही?'' अंजलीने पुछा.

'' हां कठिण तो है ही '' शरवरी एक फाईल लेकर शरवरीके सामने आकर बैठते हूए बोली.

तभी अंजलीका फोन बजा. अंजलीने फोन उठाकर अपने कानको लगाया,

'' अंजली... मै इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहा हूं ..'' उधरसे आवाज आया.

'' मॉर्निंग अंकल....''

'' मॉर्निंग ... तुम्हे पता तो होगाही की प्रतियोगिताके लिए 3123 अप्लीकेशन्स आए है ... उसमें हमने जो लेफ्ट हॅन्डेड और राईट हॅन्डेड जानकारी मंगवाई थी ... उसके अनुसार जो लेफ्ट हॅन्डेड लोगोंके है वे 32 अप्लीकेशन्स अलग किए हूए है.... उसमेसें एक लडकेका हॅन्डरायटींग हुबहु मॅच हो रहा है ... उसका नाम है अतूल विश्वास... '' उधरसे इन्स्पेक्टरने जानकारी दी.

'' गुड व्हेरी गुड... '' अंजली एकदम खुश होते हूए बोली, '' थॅंक्यू अंकल... मै आपके उपकार किस तरह उतार सकुंगी... मुझे तो कुछ समझमें नही आ रहा है ...'' अंजली खुशीके मारे बोली.

'' इतने जल्दी इतना खुश होकर नही चलेगा ... अभी तो सिर्फ शुरुवात है ... उसे कानुकके शिकंजेमें पकडनेके लिए हमे और काफी मेहनत करनी पडेगी ..'' इन्स्पेक्टरने कहा.

'' क्यों? ... अभी तुरंत हम उसे नही पकड पाएंगे ?'' अंजलीने निराश होकर पुछा.

'' नही अभी नही ... आगे तो सुनो ... हमने अभी उसका फोन टॅप करना शुरु किया है .. ताकी उसके और कोई साथीदार होंगे तो उसे हम पकड पाएंगे ... और सारे सबुत इकठ्ठा होतेही उसे अरेस्ट करेंगे .. '' इन्स्पेक्टर कंवलजितने कहा.

अंजलीका तो मानो खुन खौल रहा था. उस ब्लॅकमेलरको कब एक बार पकडकर उसे सजा दी जाए ऐसा उसे हो रहा था. उसे फिलहाल वह कुछभी नही कर सकती इस बातका दुख हो रहा था.

लेकिन नही...

मै कुछ तो करही सकती हूं ...

यह खबर अगर विवेकको दी जाए तो.....

यह खबर सुनतेही वह कितना खुश हो जाएगा ...

उसने फोनका क्रेडल उठाया और वह एक नंबर डायल करने लगी.


पोलिस स्टेशनमें इन्स्पेक्टर कंवलजितके सामने एक पुलिस बैठा हुवा था.

'' सर हमने अतुल बिश्वासके सारे फोन कॉल्स टॅप किए है ... उनमेंसे यह एक महत्वपुर्ण लगा ..'' वह पुलिस सामने रखा टेपरेकॉर्डर शुरु करते हूए बोला.

टेपरेकॉर्डर शुरु हो गया और उसमेंसे वह टेप किया हुवा फोन कॉल सुनाई देने लगा.-

'' अलेक्स... मुझे वहां आनेके लिए 7-8 दिन लगेंगे ... पैसे संभालकर रखना ... मै वहां पहूचनेके बाद हम उसे बाट लेंगे .. '' अतुलने कहा.

'' ठिक है .. '' अलेक्सने कहा.

'' और हां ... अपने कॉम्प्यूटरको पुरी तरहसे फॉरमॅट करना... उसमें कुछभी बाकी रहना नही चाहिए ... ''

'' ठिक है ... तूम इधरकी बिलकुल चिंता मत करो... मै सब संभाल लूंगा ..''

'' ओके देन ... बाय''

'' बाय .. ''

इन्स्पेक्टर कंवलजितने वह संवाद रिवाईंड कर फिरसे बार बार सुना. और फिर वे एक इरादेके साथ खडे होते हूए उस पुलिससे बोले,

''चलो ''

इन्सपेक्टरने भलेही सिर्फ एकही शब्द कहा था, फिरभी वह इशारा उस पुलिसको काफी था. इन्स्पेक्टर आगे आगे और वह पुलिस उनके पिछे पिछे चलने लगे.


क्रमश:..


Imagination thoughts -

The power of imagination makes us infinite.

--- John Muir


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Hindi books - ELove : ch-42 क्लूज

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Happy thoughts -

Happy are those who dream dreams and are ready to pay the price to make them come true.

---- Leon J. Suenes


सुबह सुबह अंजली, विवेक, शरवरी और इन्स्पेक्टर कंवलजीत कॉन्फरंन्स रुममें इकठ्ठा हूए थे.

'' मै इस बातसे संतुष्ट हूं की आखिर ब्लॅकमेलरने विवेकको कोईभी हानी ना पहूंचाते हूए छोड दिया.'' अंजली काफी समयसे चल रहे चर्चाके बाद एक गहरी सांस लेते हूए बोली.

'' एक मिनीट'' विवेकने हस्तक्षेप किया.

सब लोग एकदम गंभीर होकर उसकी तरफ देखने लगे.

'' मुझे लगता है .... ब्लकमेलरकी वजहसे हमे, मुझे, आपको, अंजलीको - सबकोही काफी तकलिफ उठानी पडी.... '' विवेकने कहा.

'' विवेक... पैसा चला गया इस बातका मुझे दुख नही है ... तुझे कुछ हानी नही हुई यह मेरे लिए सबसे महत्वपुर्ण है '' अंजलीने बिचमेही उसे काटते हूए कहा.

इन्स्पेक्टर कंवलजीतभी उसकी हां मे हां मिलाएंगे इस आशासे अंजलीने उनकी तरफ देखा. लेकिन वे कुछ नही बोले.

'' अंजली बात सिर्फ पैसोकी नही है ... कमसे कम मुझे लगता है की उसे यूही छोड देना कुछ उचित नही होगा. .. वैसे अबभी देरी नही हूई है... अब अगर हमने उसे पकडनेकी कोशिश की तो कैसा रहेगा?...'' विवेकने सवाल खडा किया और वह इन्सपेक्टरकी प्रतिक्रिया परखनेके लिए उनकी तरफ देखने लगा. इन्स्पेक्टरने सोचते हूए कमरेकी छतकी तरफ देखा और वे कुछ बोलनेही वाले थे तभी शरवरी बिचमेंही बोली.

'' लेकिन हमे ना उसका नाम पता है ... ना उसका पता... वह क्या करता है यहभी हमे पता नही है ... फिर अगर हमने उसे पकडनेकीभी ठान ली तो उसे पकडेंगे कैसे ? ...'' शरवरीने अपनी आशंका जाहिर की.

अंजलीने शरवरीकी तरफ देखकर मानो उसके बातको मुक संमती दर्शाई.

'' इतके दिन हम उसे पकडनेकी कोशीश कर रहे थे.... वे सब कोशिशें एकदम खाली गई ऐसा कहना कुछ उचित नही होगा ... क्योंकी अबभी अपनेपास कुछ क्लूज है ... एक तो उस ब्लॅकमेलरका हॅंन्ड रायटींग जो हमें सायबर कॅफेके लॉगबुकसे मिला.... दुसरा उसके फिंगर प्रिन्टस जो हमें सायबर कॅफेसेही मिले और तिसरा ... यह फोटोग्राफस देखो ... '' इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहे थे.

अबभी ब्लॅकमेलरको पकडनेकी विवेककी तिव्र इच्छा देखकर मानो इन्स्पेक्टरके शरीरमें फुर्ती दौड रही थी. वे अपने जेबसे दो फोटोग्राफ्स निकालकर वहा इकठ्ठा हूए लोगोंको दिखाकर आगे बोले,

'' यह फोटोग्राफ्स उस सायबर कॅफेमें मिले कॉम्प्यूटरके है, जहां फोटोग्राफ लेनेके थोडीही देर पहले ब्लकमेलर बैठा हुवा था .. इस फोटोग्राफ्सकी तरफ थोडा गौरसे देखो ... देखो कुछ खयालमें आता है क्या ?'' इन्सपेक्टरने वे फोटो सबको देखनेके लिए आगे खिसकाए.

सब लोगोंने वह फोटोग्राफ्स एक एक करके देखे. लेकिन किसीकोभी उन फोटोग्राफ्समें कुछ अलग महसूस नही हुवा. तभी विवेक वे फोटोग्राफ्स देखते हूए मंद मंद मुस्कराया.

'' क्या हुवा ?'' अंजलीने पुछा.

'' जरा देखोतो... गौरसे देखो ... इस फोटोग्राफ्समें कॉम्प्यूटरका माऊस कॉम्प्यूटरके बाए तरफ की बजाय दाई तरफ रखा हुवा दिख रहा है ...'' विवेकने कहा.

'' यस यू आर ऍब्सुलेटली राईट'' इन्स्पेक्टरने उत्साहभरे स्वरमें कहा.

अब अंजलीभी मंद मंद मुस्कुराने लगी.

'' लेकिन इसका क्या मतलब है ?'' शरवरी अबभी संभ्रममें थी.

''... इसका एकही मतलब निकलता है की वह ब्लकमेलर लेफ्ट हॅन्डेड है ... '' इन्स्पेक्टरने कहा.

'' यस दॅट्स राईट '' अब कहा शरवरीभी मुस्कुराने लगी थी.

तभी कॉन्फरंस रुममें रखे हूए फोनची घंटी बजी. फोन अंजलीके बगलमेंही रखा हूवा था. उसने फोन उठाया,

'' हॅलो''

'' गुड मॉर्निंग अंजली ... '' उधरसे नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयां बोल रहे थे.

'' गुड मॉर्निंग भाटीयाजी...'' अंजलीने उतनीही सरगर्मीसे उनका स्वागत किया, '' बोलीए क्या कहते हो ?''

'' हमारे यहा हमने एक नेटवर्किंग सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट रखी थी ... कॉन्टेस्टचा टॉपीक है इथीकल हॅकींग... उस कॉन्टेस्टमें प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन आपके हाथसेही हो ऐसी हमारी इच्छा है ... '' उधरसे भाटीयाजी मानो अपना हक जताते हूए बोले.

'' आपने बुलाया और हम नही आए ऐसा कभी होगा क्या भाटीयाजी ... मै जरुर आऊंगी ... प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन कब है ?... '' अंजलीने पुछा.

'' पुरा प्रोग्रॅम अभी फायनल होनेका है ... वैसे वह प्रोग्रॅम टेंटीटीव्हली समव्हेअर अराऊंड धीस मंथ होगा ... पुरा प्रोग्रॅम फायनल होतेही आपको वैसे डीटेलमें बताया जाएगा ... '' उधरसे भाटीयाजी बोले.

'' नो प्रॉब्लेम''

'' थॅंक्स''

'' मेन्शन नॉट''

'' ओके बाय... सीयू''

'' बाय''

अंजलीने फोन क्रॅडल वापस रखा और उसने वहा बैठे सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई. उसके चेहरेपर फिरसे मुस्कुराहट दिखने लगी थी.

'' मेरे दिमागमें एक आयडीया आया है ... अभी नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयाजींका फोन था ... इथीकल हॅकींगपर वे एक सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट ले रहे है ... मुझे यकिन है की अगर इस कॉन्टेस्ट का प्रचार बडे पैमानेपर अगर किया गया और उस कॉन्टेस्ट जितनेवालोंको अगर बडे बडे प्राईजेस रखे गए ... तो वह ब्लॅकमेलर इस प्रतियोगीतामें जरुर हिस्सा लेगा ...'' अंजलीने कहा.

'' लेकिन तुम यह सब इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो ?'' विवेकने आशंका जताई.

'' पुरे यकिनके साथतो नही... फिरभी ... क्रिमीनल सायकॉलॉजीके अनुसार... वह ब्लॅकमेलर अभी अपना आत्वविश्वास और गर्वमें पुरी तरह चुर है ... उसतक अगर यह कॉन्टेस्टकी बात पहूचाई गई तो वह उसमें जरुर हिस्सा लेगा ... '' इन्स्पेक्टरने अपना अंदाजा लगाया.


क्रमश:..


Happy thoughts -

Happy are those who dream dreams and are ready to pay the price to make them come true.

---- Leon J. Suenes


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Hindi literature sahitya - ELove : Ch-41 वही गलती दुबारा ?

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Hindi literature sahitya - ELove : Ch-41 वही गलती दुबारा ?


Inspirational Quotes -

We do less than we ought,

unless we do all we can.

---Thomas Carlyle


अंजली और विवेक जबसे आए थे तबसे अंजलीके बेडरुममें, एक दुसरेकों बाहोंमे भरकर, लेटे हूए थे. ना उन्हे खानेकी सुध ती ना पिनेकी.

'' जब उसकी पहली मेल आई, तब तुम्हे क्या लगा?'' विवेकने पुछा.

'' सच कहूं ... मुझे तो मानो मेरे पैर के निचेसे जमिन और सर के उपरसे आसमान खिसक गया ऐसा लगा था... मैने तो दिलसे तुम्हे स्विकारा था और ऐसी स्थितीमें ऐसाभी कुछ हो सकता है, मैने सपनेभी नही सोचा था....'' अंजलीने कहा.

'' इसका मतलब तुम्हे सब सच लगा था '' विवेकने मजाकिया अंदाजमें पुछा.

'' अरे.. मतलब ?... भलेही दिल नही मानता था पर परिस्थितीयां उसीके ओर इशारा कर रही थी. '' अंजलीने अपना बचाव करते हूए कहा.

'' और तुम्हे क्या लगा था ?'' अंजलीने पुछा.

'' नही तुम ठिक कहती हो ... मेराभी हाल कुछ कुछ तुम जैसाही था ... भलेही दिल ना माने परिस्थितीयां किसी ओर इशारा कर रही थी. '' विवेकने उसे सहलाते हूए कहा.

'' ऐसा वक्त फिरसे अपने जिंदगीमें कभी ना आए '' अंजलीने कहा.

'' सचमुछ... पहले तो मुझे अपने प्यारको किसीकी नजर लगी हो ऐसाही लग रहा था. '' विवेक उसके माथेको चुमते हूए बोला.

उसने उसके माथेको चुम लिया और वह उसके होंठोके पास अपने होंठ ले जाकर बडे बडे सांस लेते हूए वही रुक गया. और फिर आवेशके साथ एकदुसरेके होठोंको अपने मुंहमें लेकर वे एक बडे चुंबनमें मशगुल हो गए.

अचानक अंजलीको उनका पहले हॉटेलमें हुवा वह प्रणय याद आ गया और उसीके साथ कोई उनके फोटो खिंच रहा है ऐसा आभास हो गया.

वह झटसे अपने होंठ उसके होठोंसे हटाते हूए वह पिछे हट गई.

'' क्या हुवा ?'' विवेकने पुछा.

'' हम वही गलती दुबारा तो दोहरा नही रहे है '' अंजलीने मानो खुदसेही पुछा.

'' मतलब ?'' विवेकने पुछा.

'' यह सब और वहभी शादीसे पहले... तूम मेरे बारेंमे क्या सोच रहे होगे '' अंजलीने अपने जहनमें उठा दुसरा सवालभी पुछा.

'' डोन्ट बी सिली'' वह फिरसे पहल करते हूए बोला.

लेकिन उसके हाथपैर मानो ठंडे पड चुके थे. वह कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रही थी.

'' तुम्हे अगर इसमें गलत लगता है और... तुम्हारा दिल अब नही मान रहा है तो ठिक है ... '' वह उससे अलग होते हूए वहांसे उठते हूए बोला.

'' वैसा नही हनी ... डोन्ट मिसअंडरस्टॅंड मी'' वह उसे फिरसे अपने पास खिंचते हूए बोली.

उसने फिरसे उठनेका प्रयास किया लेकिन अब वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी. विवेकको कुछ समझ नही रहा था की. वह शिथील होकर सिर्फ उसके पास बैठा रहा. लेकिन अब मानो अंजलीके शरीरमें किसी चिजका संचार हुवा था. वह कॉटपर उसे एक तरफ गिराकर उसके उपर चढ गई और उसके शरीरपर सब तरफ चुंबनोकी मानो बरसात करने लगी. और फिर उनके बिच कुछ पलके लिए क्यों ना हो तैयार हुवा फासला मिट गया और वे एकदुसरेमें कब समा गए उन्हे कुछ पताही नही चला.


अंजली सुबह सुबह निंदसे जब जाग गई तब वह अपने पास पडे विवेकके मासूम चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. उसने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. बाहर अभीभी अंधेरा था. वह फिरसे विवेकके चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. अचानक उसके खयालमें आगयाकी उसका मासूम चेहरा धीरे धीरे उग्र होता जा रहा है.

शायद वह कोई बुरा सपना देख रहा हो....

उसने उसके चेहरेपर हाथ फेरनेकी कोशीश की. लेकिन उसके हाथका स्पर्ष होतेही वह चौंककर उठ गया और गुस्सेसे बोला, ' मै तुम्हे छोडूंगा नही ... मै तुम्हे छोडूंगा नही ''

कुछ पलके लिए तो अंजलीभी घबराकर असमंजसमें पड गई.

'' क्या हुवा ?'' अंजलीने पुछा.

लेकिन कुछ पलमेंही उसका गुस्सा ठंडा पडा दिखाई दिया. और वह इधर उधर देखते हूए फिरसे सोनेके लिए लेटते हूए बोला,

'' कुछ नही ''

और फिरसे सो गया.


क्रमश:..


Inspirational Quotes -

We do less than we ought,

unless we do all we can.

---Thomas Carlyle


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Hindi books - Elove - ch-40 गुड न्यूज

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Inspirational thoughts -

No great man ever complains of want of opportunities.

--Ralph Waldo Emerson

अंजली अपने कॅबिनमें अपने काममें व्यस्त थी. तभी फोनकी घंटी बजी.

'' हॅलो '' अंजलीने फोन उठाया.

'' अंजली देअर इज गुड न्यूज फॉर यू..."" उधरसे इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहे थे.

'' यस अंकल''

'' ब्लॅकमेलरने विवेकको छोड दिया है ...'' इन्स्पेक्टरने अंजलीको खुशखबरी सुनाई.

'' ओ.. थॅंक गॉड ... आय कान्ट एक्सप्लेन ... आय ऍम सो हॅपी...''

अंजलीको विवेकके छुटनेकी खबर जबसे मिली थी तबसे उसे कुछभी सुझ नही रहा था. उसे कब मिलती हूं ऐसा उसे हो रहा था. वह ऑफीसका सारा काम वैसाही छोडकर सिधे एअरपोर्टकी तरफ निकल पडी.

... उसे पहले बताना कैसा रहेगा ?

नही ... उसे सरप्राईज देते है ...

और उसे डायरेक्ट बतानेका कोई रास्ताभी तो नही ...

इमेल थी. लेकिन आजकल अंजलीको इमेल, चॅटींग इन सारी चिजोंसे सक्त नफरत और मनमें डरसा बैठ गया था.

एअरपोर्ट आया वैसे उतरकर उसने ड्रायव्हरको गाडी वापस ले जानेके लिए कहकर वह लगभग दौडते हूए तिकिट काऊंटरके पास गई.

'' मुंबईके लिए ... अब कोई फ्लाईट है ?'' उसने पुछा.

'' वन फ्लाईट इज देअर .. जस्ट रेडी टू टेक ऑफ...'' काऊंटरपर बैठे लडकिने बताया.

'' वन टीकट प्लीज'' अंजली अपना क्रेडीट कार्ड आगे करते हूए बोली.

उसने काऊंटरसे टिकट खरीदा और लगभग दौडते हूए ही वह फ्लाईटकी तरफ दौड पडी. तभी उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसके ऑफिसका नंबर था. उसने आगे कुछ ना सोचते हूए ही फोन बंद किया और दौडते हूएही फ्लाईटमें जाकर बैठ गई. सिटवर बैठतेही फिरसे उसका मोबाईल बजने लगा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. वही ऑफीसका नंबर

ऑफीसचा नंबर... क्या काम होगा ?... शरवरी एक कामभी ठिकसे नही संभाल सकती ..

उसने फोन बंद किया. लेकिन वह फिरसे बजने लगा.

शरवरी कभी ऐसा बार बार फोन नही करती ...

कुछ तो जरुरी काम होगा ...

उसने फोन उठाया और उधर फ्लाईटका लास्ट कॉल हो गया.

'' क्या है शरवरी?... '' वह लगभग चिढकरही बोली.

लेकिन यह क्या? उधरसे आनेवाला आवाज आदमीका था - हां विवेकका आवाज था.

'' विवेक तूम... '' वह एकदमसे सिटसे उठकर खडी होते हूए बोली, '' ऑफीसमें तुम कैसे .. कब.. और वहां क्या कर रहे हो ...?'' उसे क्या बोला जाए कुछ समझ नही आ रहा था.

वह बोलते हूए जल्दी जल्दी प्लेनके दरवाजेकी तरफ जा रही थी.

'' तुम्हे मिलनेके लिए आया था '' उधरसे विवेकका आवाज आया.

वह जब प्लेनके दरवाजेके पास पहूंची तब प्लेनका दरवाजा बंद किया जा रहा था.

'' रुको मुझे उतरना है ... ''

'' क्यों क्या हुवा ?'' अटेंडंट्ने पुछा.

'' आय ऍम नॉट फीलींग वेल'' उसके पास अब पुरी बात समझानेका वक्त नही था.

वह दरवाजा बंद करते हूए रुक गया. और वह तेजीसे चलते हूए प्लेनसे उतर गई.

वह अटेंडंट उसकी तरफ आश्चर्यसे देख रहा था.

"इसकी तबीयत ठिक नही ... फिर वह इतने जल्दी जल्दी और जोशके साथ कैसे उतर रही है ?' उसके मनमें आया होगा.

उसकी टॅक्सी लगभग अब उसके घरके पास पहूंच गई थी. टॅक्सी जैसेही उसके घरतक आकर पहूंची उसके दिलकी धडकने तेज हो रही थी. प्लेनसे बाहर निकलतेही वह सिधे एअरपोर्टके बाहर आ गई थी और टॅक्सी लेकर उसने टॅक्सीवालेको सिथे उसके घर ले जानेके लिए कहा था. और प्लेनमें जब विवेकका फोन आया था तभी उसने उसे अपने घर आनेके लिए कहा था. उसे ऑफीसमें सिन नही चाहिए था. तबतक टॅक्सी उसके घरके आहातेमें आकर रुकी. उसे पोर्चमेही विवेक उसकी बडी अधिरतासे राह देखता हूवा दिखाई दिया. उसकी टॅक्सी आतेही वह पोर्चसे उतरकर उसके टॅक्सीके पास आ गया. उसेभी अब रहा नही जा रहा था. टॅक्सीका दरवाजा खोलकर सिधे वह उसके बाहोंमे घुस गई. न जाने कितने दिनोंसे वे एक दुसरेकों मिल रहे थे. अंजली के आंखोमें आंसू आ गए और वे फिर रुकनेका नाम नही ले रहे थे.

'' अरे अरे... यह क्या ?'' विवेक उसे थपथपाते हूए बोला.

'' देखो तो मै पुरा की पुरा सहीसलामत तुम्हारे पास पहूंच गया हूं '' वह मजाकिया अंदाजमे, मौहोल थोडा ढीला करनेके लिए बोला.

लेकिन वह उसे इतनी मजबुतीसे चिपक गई थी की वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी.

क्रमश:

Inspirational thoughts -

No great man ever complains of want of opportunities.

--Ralph Waldo Emerson

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Hindi literature : Elove ch-39 नो बडी वील मुव्ह

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Hindi literature : Elove ch-39 नो बडी वील मुव्ह

Inspirational Quotes-

Every artist was first an amateur.

---Ralph Waldo Emerson


अंजली अपने कुर्सीपर बैठकर कुछ ऑफीशियल कागजाद उलट पुलटकर देख रही थी और उसके बगलमेंही शरवरी कॉम्प्यूटरपर बैठकर कुछ ऑफीशियल काम कर रही थी. तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

'' उसकाही मेसेज है '' शरवरीने बताया.

अंजली उठकर कॉम्प्यूटरके पास गई. उसके आतेही कॉम्प्यूटरके सामनेसे उठकर उसने अंजलीको जगह दे दी.

'' जा जल्दी जा ' अंजलीने कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए शरवरीसे कहा.

शरवरी तुरंत वहांसे निकलकर कॅबिनके बाहर चली गई. अंजलीके कॅबिनसे बाहर आकर शरवरी सीधे बगलके रुममें चली गई. वहां इन्स्पेक्टर कंवलजित और वे दोनो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरी जल्दी जल्दी उनके पास गई. उसकी आहट होतेही तिनो पलटकर उसकी तरफ मुडकर देखने लगे.

'' जैसे आपने बोला था वैसाही हो गया ... ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है ... '' शरवरी जल्दी जल्दी आनेसे सांस फुले स्थितीमें बोली.

वे दोनों कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस कुछ ना बोलते हूए अपने काममें लग गए.

'' सुरज... कम ऑन... इस बार किसीभी हालमें साला छुटना नही चाहिए.... ''

'' सर ऍज बिफोर दिस टाईम ऑल्सो हि इज कॉलींग फ्रॉम मुंबई... और उसका आय पी ऍड्रेस देखिए ...'' एक्सपर्टने सॉफ्टवेअरके कुछ रिपोर्ट्स देखते हूए कहा.

वह बोलनेके पहलेही इन्सपेक्टरने मुंबईको इन्स्पेक्टर राजको फोन लगाया,

'' हां राज ... फिरसे हमने ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है ... अबभी वह चटींगही कर रहा है ... तुम उसकी एक्सॅक्ट लोकेशनका पता करो ... ऍन्ड सी दॅट दिस टाईम द बास्टर्ड शुड नॉट एस्केप... और हां उसका आय पी ऍड्रेस लिख लो ...''


अतूल सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर चॅटींगमें उलझा हुवा था.

'' मिस अंजली... हाय कैसी हो ?'' उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

काफी समय हो गया था फिरभी उसका जवाब नही आया था. लेकिन उसका नामतो चॅटींगमें दिख रहा था.

कॉम्प्यूटर खुला छोडकर कही गई तो नही साली...

या फिर अपना अचानक मेसेज आनेसे गडबडा गई होगी ...

उसने सोचा. अबभी उसका मेसेज आया नही था. गुस्सेसे उसका चेहरा लाल होने लगा था. तभी उधरसे मेसेज आ गया , '' ठिक हूं ''

तब कहा अतूलने चैनकी सांस ली. वह अब अगला मेसेज, जो उसके लिए बहुत महत्वपुर्ण था, टाईप करने लगा,

'' तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है ... लेकिन क्या करे? ... पैसा यह साली चिजही ऐसी है ... कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है ... मुझे इस बार 20 लाख रुपएकी सख्त जरुरत है ...''

अतूलने टाईप कर मेसेज भेजभी दिया.

'' अभी तो तुम्हे 50 लाख रुपए दिए थे मैने ... अब मेरे पास पैसे नही है ...'' उधरसे अंजलीका दोटूक जवाब आया.

'' बस यह आखरी बार ... क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं '' विवेकने कुछ सोचकर टाईप किया और 'सेंड' बटनपर क्लिक किया.

'' तुम परदेस जावो ... या और कही जावो ... मुझे उससे कुछ लेना देना नही है ... देखो ... मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो है नही ... '' अंजलीका मेसेज आया.

अतुलको फिरसे गुस्सा आ रहा था, लेकिन अपने गुस्सेपर काबू करते हूए उसने टाईप किया.

'' ठिक है ... तुम्हे अब मुझे कमसे कम 10 लाख रुपए तो भी देने पडेंगे ... पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा ...''

उसने 'सेंड' बटनपर क्लिक कर मेसेज भेज दिया, और चॅटींग सेशनसे लॉग आऊटभी कर दिया. वह अंजलीसे जादा बहस नही करना चाहता था.


अब अतुल मेलबॉक्स खोल रहा था, तभी उसका ध्यान यूंही खिडकीके बाहर गया और वह भौंचक्का होकर उधर देखने लगा. बाहर एक पुलिस इन्स्पेक्टर और, और एक दो पुलिस तेजीसे सायबर कॅफेके तरफही आ रहे थे. अब अतूलके हरकतोंमे तेजी आ गई. उसने झटसे अपना कॉम्प्यूटर ऑफ किया और काऊंटरपर पैसे देकर वह सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया. वह बाहर निकल गया उसके बाद कुछ पलही गुजर गए होंगे जब जल्दी जल्दी पुलिस इन्स्पेक्टर और उसके साथी सायबर कॅफेमें घुस गए. सायबर कॅफेमें प्रवेश करतेही इन्सपेक्टरने ऐलान किया,

'' नो बडी वील गो आऊट ऑफ दी कॅफे... ऑल ऑफ यू स्टे व्हेअर यू आर... नो बडी वील मुव्ह ''


अंजलीके कॅबिनके बगलके रुममें दो कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस, अंजली और शरवरी बडी आस लगाए मोबाईलपर बोल रहे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ देख रहे थे.

इन्स्पेक्टरने मोबाईल अपने कानसे हटाया और मायूसीसे अंजलीकी तरफ देखते हूए कहा,

'' द बास्टर्ड इस मॅनेज्ड टू एस्केप अगेन...''

अंजली और शरवरी ने एकदुसरेकी तरफ देखा, उनके खिले हूए चेहरे मायूस हो गए थे.


क्रमश:..



Inspirational Quotes-

Every artist was first an amateur.

---Ralph Waldo Emerson


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Hindi books collection - ELove ch-38 काली बॅग

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Hindi books collection - ELove ch-38 काली बॅग

Inspirational thoughts -

If you would create something,

you must be something.

--- Johann Wolfgang von Goethe


जंगलमें सब तरफ सुखे पत्ते फैले हूए थे. उन सुखे पत्तोकों रौंदते हूए एक काले शिशे चढाई हूई कार धीरे धीरे उस जंगलसे गुजरने लगी. वह कार जब जंगलसे गुजर रही थी तब उन सुखे पत्तोंके रौंदनेसे एक अजिबसी आवाज उस जंगलके शांतीमे बाधा डाल रही थी. आखिर एक पेढके पास वह कार रुक गई. उस कारके ड्रायव्हर सिटवाला शिशा धीरे धीरे निचे खिसकने लगा और अब वहां ड्रायव्हीग सिटपर बैठी हुई काला चष्मा लगाई हूई अंजली दिखने लगी. उसने एक पेढपर लगाई लाल निशानी देखी और उसने बगलके सिटपर रखी एक ब्रिफकेस उठाकर खिडकीसे उस निशान लगाए पेढकी तरफ फेंक दी. ब्रिफकेसका 'धप्प' ऐसा आवाज आ गया. उसने फिरसे अपनी पैनी नजर चारो तरफ घुमाई और अपनी कार स्टार्ट कर वह वहांसे चली गई.

जंगलसे बाहर निकलकर अंजलीकी कार अब प्रमुख रस्तेपर आ गई थी. तभी अंजलीका मोबाईल बजा.

अंजलीने डिस्प्ले ना देखते हूएही वह अटेंड किया, '' हॅलो...''

'' हॅलो... मै इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहा हूं ...'' उधरसे आवाज आया.

'' यस अंकल..''

'' पैसे कब और कहां भेजने है इसके बारेमें ब्लॅकमेलरकी मेल तुम्हे आईही होगी '' इन्स्पेक्टर कंवलजीतने पुछा.

'' हां आई थी .. सच कहूं तो मै अब वहां पैसे पहूंचाकर वापसही आ रही हूं '' अंजलीने कहा.

'' व्हॉट... '' इन्स्पेक्टरके स्वरमें आश्चर्य स्पष्ट झलक रहा था.

''आय जस्ट कांन्ट बिलीव्ह धीस... तुमने मुझे बताया नही ... हम जरुर कुछ कर सकते थे. '' इन्स्पेक्टरने आगे कहा.

'' नही अंकल अब यहां मुझे पुलिसका शामिल होना नही चाहिए था . ... एक बार तो पुलिस पुरी तरहसे नाकामयाब रही है ... यहां मै चान्स लेना नही चाहती थी ... और मुझे चिंता सिर्फ विवेककी है ... पैसे जानेका अफसोस मुझे नही ... बस ब्लकमेलरको पैसे मिलनेके बाद वह विवेकको छोड देगा ... और पुरा मसलाही खत्म हो जाएगा '' अंजलीने कहा.

'' मै प्रार्थाना करता हूं की तूम जैसा सोचती हो... सब वैसाही हो ... लेकिन मुझे चिंता होती है तो बस इस बातकी की अगर वैसा नही हुवा तो ?'' इन्स्पेक्टरने कहा.

'' मतलब ?'' अंजलीने पुछा.

'' मतलब ... तुमने पैसे देकरभी उसने अगर विवेकको नही छोडा तो ?'' इन्स्पेक्टरने अपना डर जाहिर किया.

अंजली एकदम सोचमें पड गई.


अतूल और अलेक्स उस काले ब्रिफकेसके सामने बैठे थे. उनके चेहरेपर खुशी झलक रही थी. आखिर अतूलने अपने आपको ना रोक पाकर वह बॅग खोली. दोनो आंखे फाडकर उन पैसोंकी तरफ देख रहे थे. अतूलने उस बॅगसे एक पैसोंका बंडल उठाया, अपने नाकके पास लिया और वह उस बंडलसे अपनी उंगली फेरते हूए उस नोटोंकी खुशबु लेने लगा.

'' देख तो कितनी अच्छी खुशबु आ रही है ... '' अतूलने कहा.

अलेक्सनेभी एक बंडल उठाकर उसकी खुशबु लेते हुए वह बोला,

'' और देखोतो अपने मेहनतके कमाईके पैसेकी खुशबु कुछ औरही आती है ... नही?''

दोनोंने हंसते हूए एक दुसरेकी जोरसे ताली ली.

'' इतने सारे पैसे वहभी एकसाथ... मै तो पहली बार देख रहा हूं '' अलेक्सने कहा.

दोनों उस बैगमें हाथ डालकर सारे बंडल्स उलट पुलटकर देखने लगे.

'' नोटोंके बंडल्स देखते हूए अलेक्स बिचमेही रुककर बोला, '' अब उस पंटरका क्या करना है ... उसे छोड देना है ? ''

'' छोड देना है ? ... कहीं तुम पागल तो नही हूए ? ... अरे अब तो शुरवात हूई है ... मुर्गीने अंडे देनेकी अबतो शुरवात हुई है '' अतूल बिभत्स हास्य धारण करते हूए बोला.


क्रमश: ..


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If you would create something,

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--- Johann Wolfgang von Goethe


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Hindi books Library - Elove ch-37 रेड

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Inspirational thoughts -

If you can imagine it, you can achieve it; if you can dream it, you can become it.

William Arthur Ward

पुलिसकी एक गाडी आकर एक सायबर कॅफेके सामने रुकी. गाडीसे एक इन्स्पेक्टर चार पाच हवालदारोंको साथमें लेकर सायबर कॅफेकी तरफ चलने लगा. वे हवालदार उसके अगले आदेशकी राह देखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगे. इन्स्पेक्टर सायबर कॅफेमें घूस गया और उसके पिछे वे चार हवालदारभी कॅफेमें घुस गए. पहले वे रिसेप्शन काऊंटरपर रुके. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ एकदम इतने पुलिसको देखकर हडबडाकर उठ खडा हूवा.

'' यस सर... '' उस स्टाफके मुंहसे मुश्कीलसे निकला.

इन्स्पेक्टरने उससे कुछ ना बोलते हूए उसके सामने रखा लॉग रजिस्टर उठाया और उसमें वह कुछ खोजनेकी कोशीश करने लगा.

'' क्या हुवा साब?'' वह स्टाफ फिरसे हिम्मत करके बोला.

इन्स्पेक्टरने गुस्सेसे सिर्फ उसकी तरफ देखा, वैसे वह सहम गया और चुप होगया. इन्स्पेक्टर लॉगबुकमें एक एक एन्ट्री ठिकसे देखने लगा. एक जगह इन्स्पेक्टरकी रजीस्टरपर दौडती उंगली रुक गई और आंखोकी पुतलीयांभी स्थिर हो गई. उस एन्ट्रीमें नाम के रकानेमें 'विवेक सरकार' ऐसा लिखा हुवा था. इन्स्पेक्टर मन ही मन मुस्कुराया. उसे शायद ब्लॅकमेलरने सब सावधानी बरतनेके बावजुद वह अब पकडा जाने वाला है इस बातकी हंसी आ रही होगी. इन्स्पेक्टर उस एन्ट्रीके सामने दी सारी जानकारी पढते हूए बोला,

'' सतरा नंबर किधर है ?''

'' आवो मेरे साथ... मै तुम्हे उधर ले जाता हूं '' वह स्टाफ इन्स्पेक्टरको एक तरफ ले जाते हुए बोला. वह सायबर कॅफेका स्टाफ आगे आगे और इन्स्पेक्टर अपने साथीयोंके साथ उसके पिछे पिछे चल रहे थे.

चलते हूए एक जगह रुककर उस स्टाफने एक बंद कॅबिनका दरवाजा धकेलकर खोला. सब पुलिस अब गुनाहगारको पकडनेके तैयारीमें थे. लेकिन कॅबिन खोलतेही जब उन्होने कॅबिनके अंदर देखा, उनके चेहरे खुलेकी खुलेही रह गए. क्योंकी कॅबिन खाली थी. कॅबिनमें कॉम्प्यूटर शुरु था लेकिन कॅबिनमें कोई नही था. इन्स्पेक्टरने चारो हवालदारोंको कॅफेमें चारो तरफ उस गुनाहगारको ढुंढनेके लिए भेजा.

इन्स्पेक्टर और चारो हवालदारोंने काफी समय तक सारा कॅफे और कॅफेके आसपासका इलाका छान मारा . लेकिन कुछभी हाथ नही लगा. गुनाहगार अब उनके कब्जेमें आनेवाला नही है इसकी तसल्ली होतेही इन्स्पेक्टरने मोबाईल लगाया,

'' सर आय थींक वुई वेअर लेट बाय फ्यू सेकंड्स ... हि हॅज एस्केप्ड... आय ऍम सॉरी... हम उसे पकड नही पाए ''


इन्स्पेक्टर कंवलजीत मोबाईलपर बोल रहे थे और उनके आसपास अंजली, शरवरी और वे दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बडी आशासे क्या हुवा यह सुननेका प्रयास कर रहे थे.

'' शिट ... एस्केप्ड... '' इन्स्पेक्टर झुंझलाए.

और कुछ पल कुछतो सोचनेजैसा करनेके बाद वह मोबाईलपर बोले,

'' अब एक काम करो ... वहांसे उसके फिंगर प्रिट्स लो ... जिस कॉम्प्यूटरपर वह बैठा था उसके फोटोग्राफ्स लो ... ऍन्ड सी द हिस्ट्री लॉग ऑफ द कॉम्प्यूटर''

'' यस सर '' उधरसे जवाब आया.

इन्सपेक्टरने मोबाईल डिस्कनेक्ट किया और निराशासे अंजलीकी तरफ देखते हूए उसे किस तरह कहां जाए यह सोचने लगे.

'' द ब्लडी बास्टर्ड हॅज एस्केप्ड...'' उन्होने कहा.

लेकिन उनके बातचित और हावभावसे कमरेमें उपस्थित सारे लोग यह बात पहलेही समझ चुके थे.

क्रमश:...

Inspirational thoughts -

If you can imagine it, you can achieve it; if you can dream it, you can become it.

---William Arthur Ward

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Hindi stories - Elove : ch-36 दुनिया भरोसेपर चलती है

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Hindi stories - Elove : ch-36 दुनिया भरोसेपर चलती है

Inspirational thoughts -

Do we not all agree to call rapid thought and noble impulse by the name of inspiration?

--- George Eliot


अतूल सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठा था. उसने चॅटींग सेशन खोला और अंजलीभी चाटींग रुममें है यह देखकर उससे चॅटींग शुरु की -

'' हाय मिस. अंजली''


उधर अतूलने भेजा हुवा मेसेस अंजलीके मॉनिटरपर अवतरीत हुवा. और तभी शरवरी अंजलीके कॅबिनमें आ गई. शरवरीको देखतेही अंजलीने उसे 'उसकाही मेसेज है' ऐसा इशारा किया. इशारा मिलतेही शरवरी तुरंत कॅबिनके बाहर गई. बाहर जाकर शरवरी अंजलीके ऑफीसके बगलमें स्थित एक रुममें चली गई. उस रुममें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और, और दो लोग एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरीने कमरेमें प्रवेश करतेही कहा -

'' सर उसका मेसेज आया है ''

वे तिनों एकदम सतर्क होकर, सिधे बैठकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखने लगे.

'' कम ऑन सुरज ट्रेस द ब्लडी बास्टर्ड '' उन दोनोंको उत्साहीत करनेके उद्देशसे इन्सपेक्टरने कहा.

'' सर ही इज ट्रेस्ड ... द कॉल इज अगेन फ्रॉम मुंबई ... ऍन्ड सी द आय पी ऍड्रेस...''

इन्स्पेक्टरने मॉनिटरकी तरफ देखा और तुरंत मोबाईल लगाया,

'' हॅलो राज... हमने उस ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है ... उसे अभीभी अंजलीने चॅटींगपर बिझी रखा है ... तूम वहां मुंबईमें उसके सही सही ठिकानेका पता लगाओ ... ऍन्ड सी दॅट द फेलो शुड नॉट एस्केप... हां यह लो ब्लॅकमेलरका आय पी ऍड्रेस ....''


अबभी अंजलीको ब्लॅकमेलरका मेसेज ' हाय मिस अंजली ' उसके चॅटींग विंडोमें दिख रहा था. वह अब मनही मन उसे जादासे जादा वक्त तक चॅटींगपर कैसे बिझी रखा जाए ताकी पुलिस उसे ट्रेस कर पकड सकें, इसके बारेमें सोच रही थी. तभी अगला मेसेज आया,

' अंजली प्लीज ऍकनॉलेज युवर प्रेसेन्स '

अब अंजलीके पास कुछतो मेसेजे भेजनेके अलावा कोई चारा नही था, नही तो वह डिस्कनेक्ट होनेका डर था.

' हॅलो.. ' उसने मेसेज टाईप कर भेजा.


इधर इन्स्पेक्टरने फिरसे मुंबईको फोन लगाया.

'' राज ... कुछ पता चला?''

'' यस सर ... द एरीया वुई हॅड जस्ट फाईन्ड आऊट... इट्स ठाणे... बट द एक्सॅक्ट स्पॉट वुई आर ट्राईंग टू लोकेट...'' उधरसे राज बोल रहा था.

'' कमॉन डू समथींग ऍन्ड फाईन्ड आऊट क्वीकली'' इन्स्पेक्टरने कहा.


उधर अंजलीको ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आया -

' मै मेलमें सारी डिटेल्स भेज रहा हूं ... '

अंजलीको लगा की उसे सारी डिटेल्स चॅटींगपरही भेजनेके लिए कहा जाए ... लेकिन नही उसे आशंका होगी ...

लेकिन वह अब डिस्कनेक्ट कर सकता है ... उससे संभाषण जारी रखना आवश्यक था....

अचानक उसे कुछ सुझा और उसने मेसेज टाईप किया,

' लेकिन 50 लाख रुपए देनेके बादभी तुम मुझे ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी ?'


उधर इन्सपेक्टरको चैन नही पड रहा था. उन्होने फिरसे मुंबई राजको फोन लगाया,

'' राज .. कुछ पता चला ?''

'' सर वुई हॅव फाऊंड आऊट द एक्सॅक्ट लोकेशन ऍन्ड दी एक्सॅट स्पॉट...'' उधरसे राजने कहा.

'' गुड व्हेरी गुड... नाऊ क्वीकली इन्स्ट्रक्ट द ठाणे पुलिस टू रेड द स्पॉट ... '' इन्स्पेक्टरने जोशके साथ कहा.

'' यस सर'' उधरसे प्रतिक्रीया आ गई ...


अंजली अब सोच रही थी की वह उसे चटींगपर बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही की नही, क्योंकी अबतक उसका कोई रिप्लाय नही आया था.

तभी उसका रिप्लाय आ गया,

' देखो ... यह दुनिया भरोसेपर चलती है ... तुम्हे मुझपर भरोसा करनाही पडेगा ... और तुम्हारे पास उसके अलावा दुसरा कोई चाराभी नही है '

उसके मायूस चेहरेपर खुशीकी एक लहर दौड गई, क्योंकी कमसे कम अबतक वह उसे बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही थी.

अब आगे उसे और उलझानेके लिए क्या मेसेज भेजा जाए, वह सोच रही थी और उसने कुछ टाईपभी किया. लेकिन तभी ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आ गया -

' ओके देन बाय... दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन... टेक केअर... तुम्हारा ... और सिर्फ तुम्हारा विवेक...'

वह और कुछ टाईप कर उसे भेजती उससे पहलेही वह चॅटींग रुमसे गायब होगया.

वह इतने जल्दी चॅटींग खत्म करेगा ऐसा उसे अंदेशा नही था. अंजली तुरंत अपने कुर्सीसे उठकर जल्दी जल्दी अपने कॅबिनसे बाहर निकल गई. बाहर आकर सिधे वह बगलके रुममे, जहां इन्स्पेक्टर और दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बैठे थे वहा चली गई. अंजली वहा पहूंचतेही वे अंजलीके डरसे सहमें चेहरेकी तरफ देखने लगे थे.

'' अंकल उसने अभी अभी चॅटींग शेशन क्लोज किया है ... लेकिन मुझे यकिन है की वह अबभी इंटरनेटपर कनेक्टेड होगा और मेल लिख रहा होगा ..'' अंजलीने कहा.

'' डोन्ट वरी... ठाणे पुलिस हॅव ऑलरेडी स्टार्टेड टू रेड द लोकेशन... '' इन्स्पेक्टरने कहा.

क्रमश:...

Inspirational thoughts -

Do we not all agree to call rapid thought and noble impulse by the name of inspiration?

--- George Eliot

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Hindi Story Episodes : ELove- ch-35 विवेकका क्या होगा ?

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Hindi Story Episodes : ELove- ch-35 विवेकका क्या होगा ?

Best proverbs -

To find what you seek in the road of life,

the best proverb of all is that which says:

"Leave no stone unturned."

--- Edward Bulwer Lytton


कॉन्फरंस रुममें अंजली, इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरी बैठे हूए थे. अंजली इन्स्पेक्टर और शरवरीसे इसी केसके सिलसिलेमें कुछ बाते कर रही थी. सब कुछ बयान होनेके बाद अंजलीने एक लंबी सांस ली और आगे कहा,

'' तो पुरी कहानी इस प्रकार है ...''

अंजलीने फिरसे एकबार सामने बैठे इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरीकी तरफ देखा.

'' कंवलजीत अंकल... अब मुझे डर ... वह ब्लॅकमेलर फोटो इंटरनेटपर डालेगा क्या? इस बात का नही है ... मुझे असली चिंता है विवेककी ... शायद विवेक उनके कब्जेमें है ... उसके जानको खतरातो नही ?'' अंजलीने अपना डर जाहिर किया.

'' उसकी जो मेल आई थी उसे हमारे एक्स्पर्टसने ट्रेस करनेकी कोशीश की थी ... एक्सॅक्ट लोकेशन और कॉम्प्यूटरका तो कुछ पता नही चला ... लेकिन इतना जरुर पता चला की मेल मुंबईसे कहीसे की गई होगी.''

'' इसका मतलब पैसे कहां देना है और कैसे देना है यह बतानेवाली मेलभी मुंबईसेही आएगी '' इतनी देरसे चुप्पी साधी हूई शरवरी पहली बार बोली.

'' शायद हां ... या शायद ना भी ... यह वह क्रिमीनल कितना पहूंचा है इसपर निर्भर करेगा ... लेकिन इसबार हम पहलेसेही तयार होनेसे, मेल कौनसे गांवसे, उस गांवके किस जगहसे और कौनसे कॉम्प्यूटरसे आई यह हमे पता चल सकेगा ... '' इन्सपेक्टरने कहा.

'' इसका मतलब हमारे पास उसके अगले मेलका इंतजार करनेके अलावा दुसरा कोई चारा नही है ... '' अंजली निराश होकर बोली.

'' हां ... लगता तो ऐसाही है .. '' इन्स्पेक्टरभी सोचते हूए सारी संभावनाए जांचते हूए बोला.


एक पुरानी कार एक सायबर कॅफेके पास आकर रुकी. गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर अलेक्स बैठा हूवा था और उसके बगलके सिटपर अतूल बैठा हूवा था. शायद किसीको शक ना हो इसलिए उन्होने वहां आनेके लिए और अगले सारे कामके लिए उस पुरानी कारको चूना था. गाडी रुकतेही गाडीसे अतूल निचे उतरा.

'' तूम अब पैसे लानेके लिए निकल जावो ... मै मेलपर उसे जगहकी सारी जानकारी देता हूं ... और सुनो ... जरा संभलकर ... तुम्हे काफी अंतर तय करना है '' अतूलने उतरते हूए अलेक्ससे कहा.

'' यू डोन्ट वरी... तूम एकदम बिनधास्त रहो '' अलेक्स गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर बैठे हूए बोला.

'' अच्छा पैसे मिलनेके बाद उस पंटरका क्या करना है '' अलेक्सने कुछ सोचते हूए पुछा. उसका इशारा विवेककी तरफ था.

'' उसका क्या करना है .. यह बादमें देखेंगे .... लेकिन वह अपनी महबुबाके लिए शहीद होगा इसकी जादा संभावना पकडकर हमे चलना होगा... क्योंकी रास्तेसे चलते हूए सामने आए गढ्ढोंको भरते हूए आगे जाना जरुरी होता है ... नही तो वापस आते हूए उसी गढ्ढोंमे फिसलकर गिरनेकी संभावना जादा होती है.'' अतूल उतरते हूए गुढतासे हसते हूए अलेक्सकी तरफ देखते हूए बोला.

अलेक्सभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया.

अतूल गाडीसे उतरा और सायबर कॅफेकी तरफ निकल पडा. अलेक्सने गाडी आगे बढाई और अगले चौराहेपर मुडकर वह तेजीसे आगे निकल गया.


क्रमश:...


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To find what you seek in the road of life,

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"Leave no stone unturned."

--- Edward Bulwer Lytton

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Hindi book library - Novel - ELove ch-34 तिसरा

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Inspirational thoughts -

Inspiration and genius are one and the same.

--- Victor Hugo

शामका वक्त था. अतूल एक कमरेमें कॉम्प्यूटरपर बैठा हुवा था. उस कमरेसे बगलकेही कमरेमें बंद किया हुवा विवेक दिख रहा था. लेकिन विवेकको उसके कमरेसे अतूलके कमरेमेंका कुछ नही दिख रहा था. अतूलको रातदिन कॉम्प्यूटरके सिवा कुछ सुझताही न था. अलेक्स अपना एक्सरसाईज वैगेरे निपटाकर पसिना पोंछते हूएही अतुलके पास जाकर बैठ गया.

'' क्यों लडकी क्या बोलती है? ... उसे पैसा प्यारा है या अपनी इज्जत? '' अलेक्सने पुछा.

अलेक्सको अपने पास आकर बैठा हुवा पाकर अतुल विवेकका मेलबॉक्स खोलते हूए बोला,

'' देखो तुम्हे एक मजेकी चिज दिखाता हूं ''

अतूलने विवेकके मेलबॉक्समेंसे एक मेल खोली.

'' देखोतो इस मेलमें अंजलीने क्या लिखा हुवा है.''

दोनो पढने लगे. मेल पढनेके बाद दोनो उनके कमरेको और विवेकके कमरेंको अलक करते कांचसे विवेककी तरफ देखने लगे.

''देखोतो इस मेलमें यह अंजली ...

विवेकको समझानेकी कोशीश कर रही है...

वह सोच रही होगी..

कबूतरकी एकदमसे कैसे मर सारी वफाए...

अब इसको क्या बताएं, कैसे समझाए

कि बेचारा इधर पिंजरेमे बंधा तडप रहा है ''

फिरसे विवेककी तरफ देखते हूए उन्होने एक दुसरेके हाथसे ताली बजाई और वे जोरसे हंसने लगे. दोनोंका हंसना थमनेके बाद अलेक्सने एक आशंका उपस्थित की,

'' यह विवेक अपने होस्टेलसे अचानक गायब होनेसे वहा कुछ हंगामा तो नही खडा होगा ?''

'' अरे हां ... अच्छा हुवा तुमने याद दिलाया ... उसके होस्टेलमें रह रहे उसके किसी दोस्तको मेल कर उसका बंदोबस्त करता हुं '' अतूलने कहा.

अतूल मेल टाईप करने लगा और टाईप करते हूए बोला, '' लेकिन अलेक्स याद रखो ... इसके आगेही असली खतरा है ... इसके आगे हमे सारी मेल्स अलग अलग सायबर कॅफेमें जाकर भेजनी पडेगी ... नही तो ट्रेस होनेका बडा खतरा है ... ''


.... कॉम्प्यूटरपर मेल आनेका बझर बजतेही अंजलीने अपना मेलबॉक्स खोला. उसे एक नई मेल आयी हूई दिखाई दी. वह मेल उसने भेजे स्निफर प्रोग्रॅमकीही थी. उसने झटसे वह मेल खोली और

'' यस्स!'' उसके मुंहसे जितभरे उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम सही सही निभाया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और ...

'' यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड'' कहते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप करते हूए उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और की बोर्डकी दो चार बटन्स और दोन चार माऊस क्लीक्स दबाए. और दोनोभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

'' ओ माय गॉड ... आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह'' अंजलीके खुले मुंहसे निकला.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके आश्चर्यसे खुले मुंहकी तरफ देख रही थी.

'' शरवरी यह देखो विवेकके मेलबॉक्समें ... देखो यह मेल ... जो है तो मेरे नामकी पर मैने भेजी नही है ... '' "" मतलब ?'' शरवरीने पुछा.

'' मतलब मै और विवेकके अलावा दुसरा कोई है जो यह मेल अकाऊंटस खोल रहा है ... और हो सकता है वही तिसरा आदमी जो मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है ... लेकिन वह तिसरा है कौन ?''


क्रमश:...


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Inspiration and genius are one and the same.

--- Victor Hugo


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Hindi literature : ELove - CH-33 सेन्ड शरवरी इन ... इमिडीयटली

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Hindi literature : ELove - CH-33 सेन्ड शरवरी इन ... इमिडीयटली

Precious thoughts -

Difficulties strengthen the mind, as well as labor does the body.

--- Seneca

सुबहका वक्त था. एक कमरेमें अतूल कॉम्प्यूरपर बैठा था और अलेक्स उसके बगलमें बैठा हुवा था, '' अब देखो ... हमारा मजदूरीका काम अब खत्म हुवा है '' अतूलने अलेक्ससे कहा और उसने कॉम्प्यूटरपर विवेकके मेलबॉक्सका ब्रेक किया हुवा पासवर्ड देकर विवेकका मेलबॉक्स खोला.

'' अब असली काम शुरु हो गया है ...'' अतूल कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए बोला.

अलेक्स चूपचाप गौरसे वह क्या कर रहा है यह देख रहा था.

अतूल अब विवेकके मेलबॉक्समें मेल टाईप करने लगा -

"" मिस अंजली... हाय... वुई हॅड अ नाईस टाईम ... आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे लथपथ और आपके प्यारसे भीगे हूए वह क्षण मैने अपने हृदय और कॅमेरेमें कैद कर रखे है ...''

अतूलने टाईप करते हूए एक बार अलेक्सकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए. फिर अतूल आगे टाईप करने लगा -

'' मै तुम्हारी क्षमा मांगता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें कैद किए ... वे पल थे ही ऐसे की मै अपने आपको रोक ना सका ... तुम्हे झूठ लगता है? ... तो देखो ... उन पलोंमेसे एक पलका फोटो मै इस मेलके साथ भेज रहा हूं ... ऐसे काफी पल मैने मेरे कॅमेरेमें और मेरे दिलमें कैद करके रखे है ... सोच रहा हूं की उन पलोंको .. उन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश करुं ... क्यों कैसी झकास आयडिया है ? नही? ... लेकिन वह तुम्हे पसंद नही आएगा ... नही तुम्हारी अगर वैसी इच्छा ना हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे हृदयमें दफन कर सकता हूं ... लेकिन उसके लिए तुम्हे एक मामुली किमत अदा करनी होगी ... क्या करें हर चिजकी एक तय किमत होती है ... नही?...''

फिरसे अतूल टाईप करते हूए रुका, वह अलेक्सकी तरफ मुडकर बोला,

'' अलेक्स बोलो तुम्हे कितनी किंमत चाहिए ?''

'' मांगो 20-25 लाख'' अलेक्सने कहा.

'' बस 25 लाखही ... ऐसा करते है 25 तुम्हारे और 25 मेरे ... 50 कैसा रहेगा '' अतूलने कहा.

'' 50 !'' अलेक्स आश्चर्यभरी आंखोसे अतूलकी तरफ देखते हूए बोला.

अतूल फिरसे बची हूई मेल टाईप करने लगा -

'' कुछ नही बस सिर्फ 50 लाख रुपए... तुम्हारे लिए एकदम मामुली रकम है ... और हां ... पैसोंका बंदोबस्त जल्दसे जल्द करो ... पैसे कहां और कैसे पहूंचाने है ... यह सब बादकी मेलमें बताऊंगा ...

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं ... लेकिन क्या करे कुछ पानेके लिए कुछ खोना पडता है ... अगले मेलकी प्रतिक्षा करना... और हां ... मुझे पुलिससे बहुत डर लगता है ... और जब मुझे डर लगता है तब मै कुछभी कर सकता हूं .... किसीका खुनभी ...

--- तुम्हारा ... सिर्फ तुम्हारा ... विवेक ''

अतूलने पुरी मेल टाईप की. फिर एक दो बार पढकर देखी ताकी कोई गलती ना छुटे. फिर कोई गलती नही है इसकी तसल्ली होते ही 'सेंड' बटनपर क्लीक कर अंजलीको भेजभी दी.

जब स्क्रिनपर 'मेल सेंट' मेसेज आया. दोनोंने एक दुसरेका हाथ टकराकर ताली बजाई.

उधर अंजलीने जब मेलबॉक्स खोलकर वह मेल पढी, उसे अपने पैरोंके निचेसे मानो जमिन खिसक गई हो ऐसा लगा. उसने झटसे अपने सामने रखे इंटरकॉमपर दो डीजीट दबाए ,

'' मोना... सेन्ड शरवरी इन ... इमिडीयटली''


क्रमश:...


Precious thoughts -

Difficulties strengthen the mind, as well as labor does the body.

--- Seneca


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About Hindi

Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.