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Hindi Books - Novel - ELove CH-21 विवेक कहा गया होगा ?

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Hindi Books - Novel - ELove CH-21 विवेक कहा गया होगा ?

Modern thoughts ---

The illiterate of the 21st century will not be those who cannot read and write, but those who cannot learn, unlearn, and relearn.

--- Alvin Toffler


जॉनी अपनेही धुनमें मस्त मजेमें सिटी बजाते हूए रास्तेपर चल रहा था. तभी उसे पिछेसे किसीने आवाज दिया.

'' जॉनी...''

जॉनीने वही रुककर सिटी बजाना रोक दिया. आवाज पहचानका नही लग रहा था इसलिए उसने पिछे मुडकर देखा. एक आदमी जल्दी जल्दी उसीके ओर आ रहा था. जॉनी असमंजससा उस आदमीकी तरफ देखने लगा क्योंकी वह उस आदमीको पहचानता नही था.

फिर उसे अपना नाम कैसे पता चला ?..

जॉनी उलझनमें वहा खडा था. तबतक वह आदमी आकर उसके पास पहूंच गया.

'' मै विवेकका दोस्त हूं ... मै उसे कलसे ढूंढ रहा हूं ... मुझे कॅफेपर काम करनेवाले लडकेने बताया की शायद तुम्हे उसका पता मालूम हो '' वह आदमी बोला.

शायद उस आदमीने जॉनीके मनकी उलझन पढ ली थी.

'' नही वैसे वह मुझेतो बताकर नही गया. ... लेकिन कल मै उसके होस्टेलपर गया था... वहां उसका एक दोस्त बता रहा था की वह 10-15 दिनके लिए किसी रिस्तेदारके यहां गया है ...'' जॉनीने बताया.

'' कौनसे रिस्तेदारके यहां ?'' उस आदमीने पुछा.

'' नही उतना तो मुझे मालूम नही ... उसे मैने वैसा पुछाभी था लेकिन वह उसेभी पता नही था ... उसे सिर्फ उसकी मेल मिली थी '' जॉनीने जानकारी दी.


अंजली अपने कुर्सीपर बैठी हूई थी और उसके सामने रखे टेबलपर एक बंद ब्रिफकेस रखी हूई थी. उसके सामने शरवरी बैठी हूई थी. उनमें एक अजीबसा सन्नाटा छाया हूवा था. अचानक अंजली उठ खडी हो गई और अपना हाथ धीरेसे उस ब्रिफकेसपर फेरते हूए बोली, '' सब पहेलूसे अगर सोचा जाए तो एकही बात उभरकर सामने आती है ..''

अंजली बोलते हूए रुक गई. लेकीन शरवरीको सुननेकी बेसब्री थी.

'' कौनसी ?'' शरवरीने पुछा.

'' ... की हमें उस ब्लॅकमेलरको 50 लाख देनेके अलावा फिलहाल अपने पास कोई चारा नही है ... और हम रिस्क भी तो नही ले सकते ''

'' हां तुम ठिक कहती हो '' शरवरी शुन्यमें देखते हूए, शायद पुरी घटनापर गौर करते हूए बोली.

अंजलीने वह ब्रिफकेस खोली. ब्रिफकेसमें हजार हजारके बंडल्स ठिकसे एक के उपर एक करके रखे हूए थे. उसने उन नोटोंपर एक नजर दौडाई, फिर ब्रिफकेस बंद कर उठाई और लंबे लंबे कदम भरते हूए वह वहांसे जाने लगी. तभी उसे पिछेसे शरवरीने आवाज दिया -

'' अंजली...''

अंजली ब्रेक लगे जैसे रुक गई और शरवरीके तरफ मुडकर देखने लगी.

'' अपना खयाल रखना '' शरवरीने अपनी चिंता जताते हूए कहा.

अंजली दो कदम फिरसे अंदर आ गई, शरवरीके पास गई, शरवरीके कंधेपर उसने हाथ रखा औड़ मुडकर फिरसे लंबे लंबे कदम भरते हूए वहांसे चली गई.


क्रमश:...


Modern thoughts ---

The illiterate of the 21st century will not be those who cannot read and write, but those who cannot learn, unlearn, and relearn.

--- Alvin Toffler


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Hindi Novels - Novel - ELove CH-20 चारा

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Important thoughts -

Making the simple complicated is commonplace; making the complicated simple, awesomely simple, that's creativity.

--- Charles Mingus


अंजली अपने ऑफीसमें कुर्सीपर बैठकर कुछ सोच रही थी. उसका चेहरा मायूस दिख रहा था. शायद उसने उसके जिवनमें इतना बडा भूचाल आएगा ऐसा कभी सोचा नही होगा. उसने अपना कॉम्प्यूतर शुरु कर रखा तो था, लेकिन उसे ना चाटींग करनेकी इच्छा हो रही थी ना किसी दोस्तको मेल भेजनेकी. उसने अपनी सारी ऑफीशियल मेल्स चेक की और फिरसे वह सोचने लगी. तभी कॉम्प्यूटरपर बझर बजा. उसने अपनी चेअर घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कीया -

' हाय ... मिस अंजली'

विवेकका चॅटींगपर मेसेज था.

उसे अहसास हो गया की उसके दिलकी धडकने तेज होने लगी है. लेकिन इसबार धडकने बढनेकी वजह कुछ अलग थी. अंजली सिर्फ उस मेसेजकी तरफ देखती रही. उसे अब क्या किया जाए कुछ सुझ नही रहा था. तभी शरवरी अंदर आ गई. अंजलीने शरवरीको विवेकका मेसेज आया है ऐसा कुछ इशारा किया. शरवरी झटसे बाहर चली गई, मानो पहले उन्होने कुछ तय किया हो. अंजली अबभी उस मेसेजकी तरफ देख रही थी.

' अंजली कम ऑन एकनॉलेज यूवर प्रेझेन्स' विवेकका फिरसे मेसेज आ गया.

' यस' अंजलीने टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक किया.

अंजलीने कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए उसके हाथोमें और उंगलियोंमे पहली बार कंपन महसूस किया.

' मै अब मेलमें सारी जानकारी भेज रहा हूं ' विवेकका मेसेज आ गया.

' लेकिन 50 लाख रुपए देनेके बादभी फिरसे तुम ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी. ?' अंजलीने मेसेज भेजकर उसे बार बार सता रहा सवाल उठाया.

विवेकने उधरसे एक हंसता हूवा छोटासा चेहरा भेजा.

इस बार अंजलीको उस चेहरेके हसनेमें मासूमियतसे जादा कपट दिख रहा था.

' देखो ... यह दुनिया भरोसेपर चलती है ... तुम्हे मुझपर भरोसा करना पडेगा ... और तुम्हारे पास मुझपर भरोसा करनेके अलावा और क्या चारा है ?' उधरसे विवेकका ताना मारता हुवा मेसेज आ गया.

और वहभी सचही तो था ... उसके पास उसपर भरोसा करनेके अलावा कोई दुसरा चारा नही था....

अंजली अब उसने भेजे मेसेजको क्या जवाब दिया जाए इसके बारेमें सोचने लगी. तभी अगला मेसेज आ गया -

' ओके देन बाय... दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन... टेक केअर... तुम्हारा ... और सिर्फ तुम्हारा विवेक...'

अंजली उस मेसेजकी तरफ काफी देरतक देखती रही. बादमें उसे क्या सुझा क्या मालूम, उसने फटाफट कीबोर्डपर कुछ बटन्स दबाए और कुछ माऊस क्लीक्स किए. उसके सामने उसका खुला हुवा मेलबॉक्स अवतरीत हुवा. उसके अपेक्षानुसार और विवेकने जैसा कहा था, उसकी मेल उसके मेलबॉक्समें पहूंच चूकी थी. उसने पलभरकी भी देरी ना करते हूए वह मेल खोली.

मेलमें 50 लाख रुपए कहां, कैसे, और कब पहुचाने है यह सब विस्तारपुर्वक बताया था. साथमें पुलिसके चक्करमें ना पडनेकी हिदायतरुप धमकीभी दी थी. अंजलीने अपनी कलाईपर बंधी घडीकी तरफ देखा. अबभी मेलमें बताए स्थानपर पैसे पहुंचानेमें 4 घंटेका अवधी बाकी था. उसने एक दिर्घ श्वास लेकर धीरेसे छोड दी. वह वैसे कर शायद अपने मनका बोझ हलका करनेकी कोशीश करती होगी. वैसे चार घंटे उसके लिए काफी समय था. और पैसोंका बंदोबस्त भी उसने पहलेसे ही कर रखा था - यहांतक की पैसे सुटकेसमें पॅकभी कर रखे थे. मेलकी तरफ देखते देखते उसके अचानक ध्यानमें आ गया की मेलके साथ कोई अटॅचमेंटभी आई हूई है. उसने वह अटॅचमेंट खोलकर देखी. वह एक JPG फॉरमॅटमें भेजा हुवा एक फोटो था. उसने क्लीक कर वह फोटो खोला.

वह उनके हॉटेलके रुममें दोनो जब एक दिर्घ चुंबन लेते हूए आलिंगनबध्द थे तबका फोटो था.


क्रमश:


Important thoughts -

Making the simple complicated is commonplace; making the complicated simple, awesomely simple, that's creativity.

--- Charles Mingus


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Hindi Books - Novel - ELove CH - 19 सॉलीटेअर

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Encouraging thoughts -

Doing nothing is sure loosing, Doing something increases the probability of winning by fifty percent.

-- Anonymous


सायबर कॅफेमें लोग अपने अपने क्यूबीकल्समें अपने अपने इंटरनेट सर्फींगमें बिझी थे. कुछ कॉम्प्यूटर्स वही खुले हॉलमें रखे थे, वहांभी कोई कॉम्प्यूटर खाली नही था. की बोर्डके बटन्स दबानेका एक अजिब आवाज एक लय और तालमें सारे कॅफेमें घुम रहा था. सब लोग, कोई चॅटींग, कोई सर्फींग, कोई गेम्स खेलनेमें तो कोई मेल्स भेजनेमें मग्न था. तभी एक आदमी दरवाजेसे अंदर आ गया. वह अंदर आकर जिस तरहसे इधर उधर देख रहा था, कमसे कम उससे वह यहां पर पहली बार आया हो ऐसा लग रहा था. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ मेंबर उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरपर ताशका गेम 'सॉलीटेअर' खेल रहा था. उस आदमीकी आहट होतेही उसने झटसे, बडी स्फुर्तीके साथ अपने मॉनिटरपर चल रहा वह गेम मिनीमाईझ किया और आया हुवा आदमी अपना बॉस या उसके घरका कोई आदमी नही है यह ध्यानमें आतेही वह फिरसे वह गेम मॅक्सीमाईज करके खेलने लगा. वह अंदर आया हुवा आदमी कुछ पलके लिए रिसेप्शन काऊंटरके पास मंडराया और रुककर स्टाफको पुछने लगा -

'' विवेक आया क्या ?''

उस स्टाफने भावना विरहित चेहरेसे उसकी तरफ देखकर पुछा -

'' कौन विवेक?''

'' विवेक सरकार ... वह मेरा दोस्त है ..... और उसनेही मुझे यहां बुलाया है ..'' उस आदमीने कहा.

'' अच्छा वह विवेक... नही आज तो वह दिखा नही .. वैसे तो वह रोज आता है ... लेकिन कलसे मैने उसे देखा नही है ... '' काऊंटरपर बैठे स्टाफने जवाब दिया और वह सामने रखे हूए कॉम्प्यूटरपर फिरसे 'सॉलीटेअर' खेलनेमें व्यस्त हो गया.

अंजली कॉन्फरंन्स रुममें दिवारपर लगे छोटे पडदेपर प्रोजेक्टरकी सहाय्यतासे शरवरीको कुछ समझा रही थी. और शरवरी वह जो बोल रही है वह ध्यान देकर सुन रही थी.

'' शरवरी जैसा तुमने कहा था वैसेही मैने विवेकको समझाकर देखनेके लिए एक मेल भेजी है ... लेकिन उसे सिर्फ मेलही ना भेजते हूए मैने एक बडा दांव भी फेंका है ... '' अंजली बोल रही थी.

'' दांव? ... कैसा ?...'' शरवरीने कुछ ना समझते हूए आश्चर्यसे पुछा.

'' उसे भेजे हूए मेलके साथ मैने एक सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम अटॅच कर भेजा है'' अंजलीने कहा.

'' कैसा प्रोग्रॅम?'' शरवरीको अभीभी कुछ समझ नही रहा था.

'' उस प्रोग्रॅमको 'स्निफर' कहते है ... जैसेही विवेक उसे भेजी हूई मेल खोलेगा .. वह स्निफर प्रोग्रॅम रन होगा ...'' अंजली बोल रही थी.

'' लेकिन वह प्रोग्रॅम रन होनेसे क्या होगा ?'' शरवरीने पुछा.

'' उस प्रोग्रॅमका काम है ... विवेकके मेलका पासवर्ड मालूम करना ... और वह पासवर्ड मालूम होतेही वह प्रोग्रॅम हमे वह पासवर्ड मेलद्वारा भेजेगा ... '' अंजली बोल रही थी.

'' अरे वा... '' शरवरी उत्साहभरे स्वरमें बोली लेकिन अगलेही पल कुछ सोचते हूए उसने पुछा, '' लेकिन उसका पासवर्ड मालूम कर हमें क्या मिलेगा ?''

'' जिस तरहसे विवेक मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है ... उसी तरह हो सकता है की वह और बहुत लोगोंको ब्लॅकमेल कर रहा होगा ...या फिर उसके मेलबॉक्समें हमे उसकी कुछ कमजोरी... या जो हमारे कामका साबीत हो ऐसा कुछतो हमें पता चलेगा ... वैसे फिलहाल हम अंधेरेमें निशाना साध रहे है.... लेकिन मुझे यकिन है ... हमें कुछ ना कुछतो जरुर मिलेगा '' अंजली बता रही थी.

'' हां ... हो सकता है '' शरवरीने कहा.

और फिर कुछ सोचकर उसने कहा, '' मुझे क्या लगता है ... हमें अपना दुश्मन कौन है यह पता है ... वह कहां रहता है यहभी पता है ... फिर वह अपनेपर वार करनेके पहलेही अगर हम उसपर वार करते है तो ?''

'' वह संभावनाभी मैने जांचकर देखी है ... लेकिन अब वह उसके होस्टेलसे गायब है ... वुई डोन्ट नो हिज व्हेअर अबाऊट्स''

तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने और शरवरीने झटसे पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा. मॉनिटरकी तरफ देखतेही दोनोके चेहरे खिल गए. क्योंकी उनकी अपेक्षानुसार अंजलीने विवेकके मेलको अटॅच कर भेजे 'स्निफर' सॉफ्टवेअरकीही वह मेल थी. अब दोनोंको वह मेल खोलनेकी जल्दी हो गई थी. कब एक बार वह मेल खोलती हूं और कब एक बार उस मेल द्वारा आए विवेकके पासवर्डसे उसका मेल अकाऊंट खोलती हूं ऐसा अंजलीको हुवा था. उसने तुरंत डबलक्लीक कर वह मेल खोली.

'' यस्स!'' उसके मुंहसे विजयी उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम बराबर किया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और ...

'' यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड'' बोलते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप कर उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और कुछ की बोर्डकी बटन्स और दो चार माऊस क्लीक्स किए. और दोनो अब कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

'' ओ माय गॉड ... आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह'' अंजलीके खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके खुले मुंहकी तरफ असमंजससे देख रही थी.


क्रमश:


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Doing nothing is sure loosing, Doing something increases the probability of winning by fifty percent.

-- Anonymous



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Useful quotes -

Those who are too close to you are cabable of hurting you much.

--- Anonymous


शरवरीको आनंदजींका मेसेज मिलतेही वह तुरंत अंजलीके कॅबिनमें गई. देखती है तो अंजली हताश, निराश दोनो हाथोंके बिच टेबलपर अपना सर रखकर बैठी थी.

"" अंजली क्या हुवा ?'' अंजलीको उस अवस्थामें बैठी हुई पाकर शरवरीने चिंताभरे स्वरमें, उसके पास जाकर, उसके पिठपर हाथ सहलाते हूए पुछा.

उसने उसे इतना हताश और निराश, और वह भी ऑफीसमें कभी नही देखा था.

ऐसा अचानक क्या हुवा होगा?...

शरवरी सोचने लगी. अंजलीने धीरेसे अपना सर उठाया. उसके हर हरकतमें एक धीमापन और दर्द दुख का अहसास दिख रहा था. उसका चेहराभी उदास दिख रहा था.

हां उसके पिताजी जब अचानक हार्ट अटॅकसे गुजर गए थे तबभी वह ऐसीही दिख रही थी....

धीरेसे अपना चेहरा कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ घुमाते हूए अंजली बोली, "" शरवरी... सब कुछ खतम हो चुका है ''

कॉम्प्यूटरका मॉनीटर शुरुही था. शरवरीने झटसे नजदिक जाकर कॉम्प्यूटरपर क्या चल रहा है यह देखा. उसे मॉनीटरपर विवेककी अंजलीने खोली हूई मेल दिखाई दी. शरवरी वह मेल पढने लगी -

"" मिस अंजली... हाय... वुई हॅड अ नाईस टाईम ... आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे और तुम्हारे प्यारकी वर्षावसे भिगे हुए वह पल मैने मेरे दिलमें और मेरे कॅमेरेमें कैद करके रखे है... मै तुम्हारी माफी चाहता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें बंद किये है ... वह पल थे ही ऐसे की मै अपने मोहको रोक नही सका.... तुम्हे झूट तो नही लग रहा है न? .. देखो ... उन पलोंसे एक चुने हूए पलको मैने इस फोटोग्राफके स्वरुपमें तुम्हारे मेलके साथ अटॅच करके भेजा है.... ऐसे बहुतसे पल मैने मेरे कॅमेरेमे और मेरे हृदयमें कैद कर रखे है ... सोचता हूं की उन पलोंको .. इन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश कर दूं .. क्यो कैसी दिमागवाली आयडिया है ? है ना? ... लेकिन यह तुम्हे पसंद नही आएगी ... तुम्हारी अगर इच्छा नही हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे दिलमें दफन करके रख सकता हूं ... लेकिन उसके लिए तुम्हे उसकी एक मामुलीसी किमत अदा करनी पडेगी.... क्या करे हर बात की एक तय किमत होती है ... है की नही ?...कुछ नही बस 50 लाख रुपए... तुम्हारे लिए बहुतही मामुली रकम ... और हां ... पैसेका बंदोबस्त तुरंत होना चाहिए ... पैसे कब कैसे पहुंचाने है ... यह बादमें मेलके द्वारा बताऊंगा ...

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं .. लेकिन क्या करें कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है ... अगले मेलका इंतजार करना ... और हां ... तुम्हे बता दूं की मुझे पुलिसका बहुत डर लगता है ... और जब मै डरता हूं तब हडबडाहटमें कुछभी अटपटासा करने लगता हूं .... किसीका खुनभी ...

--- तुम्हारा ... सिर्फ तुम्हारा ... विवेक ''

मेल पढकर शरवरीको मानो उसके पैरके निचेसे जमिन खिसक गई हो ऐसा लग रहा था. वह एकदम सुन्न हो गई थी. ऐसाभी हो सकता है, इसपर उसका विश्वासही नही हो रहा था. उसने विवेकके बारेमें क्या सोचा था, और वह क्या निकला था.

'' ओ माय गॉड... ही इज अ बिग फ्रॉड... आय कांट बिलीव्ह इट...'' शरवरीके आश्चर्यसे खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरीने मेलके साथ अटॅच कर भेजे फोटोके लिंकपर क्लीक करके देखा. वह अंजलीका और विवेकका हॉटेलके सुईटमें एकदुसरेको बाहों में लिया हुवा नग्न फोटो था.

'' लेकिन उसने यह फोटो, कैसे लिया होगा ?'' शरवरीने अपनी उलझन जाहिर की.

"" मै मुंबईको कब जानेवाली थी ... कहा रुकने वाली थी ... इसकी उसे पहलेसेही पुरी जानकारी थी. '' अंजलीने कहा.

'' यह तो सिधा सिधा ब्लॅकमेलींग है.'' शरवरी गुस्सेसे आवेशमें आकर चिढकर बोली.

'' उसके मासूम चेहरेके पिछे इतना भयानक चेहराभी छिपा हूवा हो सकता है ... मुझे तो अबभी विश्वास नही होता. '' अंजलीने दुखसे कहा.

'' कमसे कम शादीके पहले हमें उसका यह भयानक रुप पता चला... नही तो न जाने क्या हो जाता ...'' शरवरीने कहा.

'' मुझे दुख पैसेका नही ... दुख है तो सिर्फ उसने दिए इतने बडे धोखे और विश्वासघात का है. '' अंजलीने कहा.

'' एक पलके लिए समझ लो की अगर हम उसे 50 लाख रुपए दे देते है... लेकिन पैसे लेनेके बादभी वह फिरसे हमें ब्लॅकमेल नही करेगा इसकी क्या ग्यारंटी? ... '' शरवरीने फिरसे अपने मनमें चल रहा सवाल जाहिर किया.

अंजली चेहरे पर डर लिए सिर्फ उसकी तरफ देखती रही. क्योंकी उसके पासभी इस सवालका कोई जवाब नही था.

"" मुझे लगता है तूम एक बार उसे मेल कर उसका मन परिवर्तीत करनेका प्रयास करो... और अगर फिरभी वह नही मानता है तो ... चिंता मत करो... हम जरुर इसमेंसेभी कुछ रास्ता निकालेंगे. '' शरवरी उसको ढांढस बढाते हूई बोली.


क्रमश:


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Famous thoughts -

Every word written is a victory against death.

---- Michel Butor


अंजली चिंताग्रस्त अवस्थामें अपनी कुर्सीपर बैठी थी. उसके टेबलके सामनेही शरवरी बैठी हूई थी. विवेकके साथ बिताया एक एक पल याद करते हूए पिछले तिन कैसे बित गए अंजलीको कुछ पता ही नही चला था. लेकिन आज उसे चिंता होने लगी थी.

"" आज तिन दिन हो गए ... ना वह चाटींगपर मिल रहा है ना उसकी कोई मेल आई है.'' अंजलीने शरवरीसे चिंताभरे स्वरमें कहा.

एक दिनमें न जाने कितनी बार चॅटींगपर चॅट करनेवाला और एक दिनमें न जाने कितनी मेल्स भेजनेवाला विवेक अब अचानक तिन दिनसे चूप क्यों होगया? सचमुछ वह एक चिंताकी ही बात थी.

"" उसका कोई कॉन्टॅक्ट नंबर तो होगाना ?'' शरवरीने पुछा.

"" हां है... लेकिन वह कॉलेजका नंबर है... लेकिन वहां फोन कर उसके बारेमें पुछना उचीत होगा क्या ?'' अंजलीने कहा.

"" हा वह भी है '' शरवरीने कहा.

"" मुझे चिंता है ... कही वह मेरे बारेमें कुछ गलत सलत सोचकर ना बैठे ... और अगर वैसा है तो पता नही वह मेरे बारेंमे क्या सोच रहा होगा ... '' अंजलीने मानो खुदसेही सवाल किया.

हॉटेलमें जो हुवा वह नही होना चाहिए था ...

उसकी वजहसे शायद वह अपने बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा....

लेकिन जोभी हुवा वह कैसे ... अचानक... दोनोंको कोई मौका दिए बिना हो गया....

मैने उसे हॉटेलमें बुलाना ही नही चाहिए था...

उसे अगर हॉटेलमें नही बुलाया होता तो यह घटना घटी ही नही होती...

अंजलीके दिमागमें पता नही कितने सवाल और उनके जवाब भिड कर रहे थे.

"" मुझे नही लगता की वह तुम्हारे बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा... वह दुसरेही किसी कारणवश तुम्हारे संपर्कमें नही होगा... जैसे किसी महत्वपुर्ण कामके सिलसिलेमें वह किसी बाहर गाव गया होगा....'' शरवरी अंजलीके दिलको समझाने बहलानेकी कोशीश करते हुए बोली.

लेकिन अंदरसे वहभी उतनीही चिंतातूर थी. अंजलीने शरवरीको हॉटेलमें घटीत घटनाके बारेमें विस्तारसे बताया मालूम हो रहा था. वैसे वह उसे अपनी बहुत करीबी दोस्त मानती थी और उससे निजी बातेभी नही छुपाती थी.

"" उसे हॉटेलके अंदर बुलाया नही होता तो शायद यह नौबत नही आती '' अंजलीने कहा.

"" नही नही वैसा कुछ नही होगा... पहले तुम अपने आपको बिना मतलब कोसना बंद करदो... '' शरवरी उसे समझानेकी कोशीश करती हुई बोली.


मोनाने जल्दी जल्दी उसके सामनेसे गुजर रहे आनंदजींको रोका.

""आनंदजी आपने शरवरीको देखा क्या ?'' मोनाने पुछा.

"" हां .. वह उपर विकासके पास बैठी हूई है ... क्यो क्या हुवा ?'' आनंदजीने मोनाका चिंतासे ग्रस्त चेहरा देखकर पुछा.

"" कुछ नही... अंजली मॅमने उसे तुरंत बुलानेके लिए कहा है .. आप उधरही जा रहे हो ना ... तो उसे अंजली मॅमके पास तुरंत भेज देंगे प्लीज... कुछ महत्वपुर्ण काम लगता है '' मोना आनंदजींसे बोली.

"" ठिक है ... मै अभी भेज देता हूं ..'' आनंदजी सिढीयां चढते हूए बोले.


क्रमश:...


Famous thoughts -

Every word written is a victory against death.

---- Michel Butor


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Famous quotes

Man is constantly in search of something unknown, and when he feels, he got it, probably he is in love.

--- Unknown


हॉटेलका सुईट जैसे जैसे नजदिक आने लगा, वैसे एक अन्जानी भावनासे अंजलीके दिलकी धडकन तेज होने लगी थी. एक अनामिक डरने मानो उसे घेर लिया था. विवेक भलेही उसके पिछे पिछे चल रहा था लेकिन उसके सासोंकी गति विचलीत हो चुकी थी. अंजलीने सुईटका दरवाजा खोला और अंदर चली गई.

विवेक दरवाजेमेही इधर उधर करता हुवा खडा हो गया.

'' अरे आवोना अंदर आवो '' अंजली उनके बिच बनी, असहजता, एक तणाव दूर करनेका प्रयास करती हुई बोली.

'' बैठो '' अंजली उसे बैठनेका इशारा करती हुई बोली और वही कोनेमें रखा फोन उठानेके लिए उसके पासही बैठ गई.

अंजलीने विवेकके पास रखा हुवा फोन उठानेके लिए हाथ बढाया और बोली, '' क्या लोगे ठंडा या गरम''

फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा था. उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. अंजलीको भी वह स्पर्श आल्हाददायक और अच्छा लगा था. लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना बताते हूए उसने ऑर्डर देनेके लिए फोनका क्रेडल उठाया.

फोनका नंबर डायल करनेके लिए अब उसने अपना दुसरा हाथ बढाया. इसबार इस हाथकाभी हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. इस बार वह अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीने आगे बढाया हुवा हाथ हल्केही अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसे वह हाथ उसके हाथसे छुडाकर लेना नही हो रहा था. मानो वह हाथ सुन्न हो गया हो. विवेकने अब वह हाथ कसकर पकडकर उसे खिंचकर अपनी बाहोंमे भर लिया. सबकुछ कैसे तेजीसे घट रहा था और वह सब अंजलीकोभी अच्छा लग रहा था. उसका पुरा बदन गर्म हो गया था और होंठ कांपने लगे थे. विवेकनेभी अपने गर्म और बेकाबू हूए होंठ उसके कांपते होंठोपर रख दिए. अंजलीका एक मन प्रतिकार करनेके लिए कह रहा था. लेकिन दुसरा मन तो विद्रोही होकर सारी मर्यादाए तोडने निकला था. वह उसपर हावी होता जा रहा था और अंजलीकी मानो होशोहवास खोए जैसी स्थिती हो गई थी. विवेकने उसे झटसे अपने मजबुत बाहोंमे उठाकर बगलमें रखे बेडपर लिटाया. उसके उस उठानेमें उसे एक आधार देनेवाली मर्दानी और हक जतानेवाली भावना दिखी इसलिए वह इन्कारभी नही कर सकी. या यू कहिए उसके पास प्रतिकार करनेके लिए कुछ शक्तीही नही बची थी.

उसे उसका वह सवाल याद आगया, '' अंजली मुझसे शादी करोगी ?''

और उसे अपना जवाबभी याद आगया, '' मैने ना थोडीही कहा है ''

उसे अब उसके बाहोमें एक सुरक्षा का अहसास हो रहा था. वहभी अब उसके हर भावनाको उतनीही उत्कटतासे प्रतिसाद दे रही थी.

'' विवेक आय लव्ह यू सो मच'' उसके मुंहसे शब्द बाहर आ गये.

'' आय टू'' विवेक मानो उसके गलेका चुंबन लेते हूए उसके कानमें कह रहा था.

धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक बदनसे खेलने लगा. और वहभी किसी लतीका की तरह उसको चिपककर अपने भविष्यके आयुष्यका सहारा ढुंढ रही थी.

' हां मैही तुम्हारे आगेके आयूष्य का सहारा ... साथीदार हुं ' इस हकसे अब वह उसके बदनसे एक एक कपडे हटाने लगा था.

' हां मैने भी अब तुम्हे सब कुछ अर्पन कर दिया है .. ' इस विश्वास के साथ समर्पन करके वहभी उसके शरीर से एक एक कपडे हटाने लगी.

अंजली अचानक हडबडाकर निंदसे जाग गई. उसने बेडपर बगलमें देखा तो वहा विवेक निर्वस्त्र अवस्थामें चादर बदनपर ओढे गहरी निंद सो रहा था. लेकिन निंदमेंभी उसका एक हाथ अंजलीके निर्वस्त्र बदनपर था. इतने दिनोंमे रातको अचानक बुरे सपनेसे जगनेके बाद उसे पहली बार उसके हाथका एक बडा सहारा महसूस हुवा था.


क्रमश:..


Famous quotes

Man is constantly in search of something unknown, and when he feels, he got it, probably he is in love.

--- Unknown




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Hindi books - Novels - ELove CH:15 सहचारी

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Encouraging thoughts -

I haven't failed, I've found 10,000 ways that don't work.

--- Thomas Edison (1847-1931)


अंजली गाडी ड्राईव्ह कर रही थी और गाडीमें आगे उसके बगलकीही सिटपर विवेक बैठा हुवा था. गाडीमें काफी समयतक दोनो अपने आपमें खोए हूए गुमसुमसे बैठे हूए थे.

सच कहा जाए तो विवेक उसने सोचे उससेभी जादा चुस्त , तेज तर्रार और देखनेमें उमदा है ... और उसका स्वभाव कितना सिधा और सरल है ...

पहलेही मुलाकातमें शादीके बारेमें सवाल कर उसने अपनी भावनाएं जाहिर की यह एक तरहसे अच्छा ही हुवा.. सच कहा जाए तो उसने वह सवाल पुछकर मुझेभी उसके बारेमें अपनी भावनाएं व्यक्त करनेका मौका दिया है...

उसे अब उसके बारेंमे एक अपनापन महसूस हो रहा था. उसने अब उसमें अपना भावी सहचारी ... एक दोस्त... जो हमेशा दुख और सुखमें उसका साथ देगा ... देखना शुरु किया था.

उसने सोचते हूए उसकी तरफ एक कटाक्ष डाला. उसनेभी उसकी तरफ देखकर एक मधूर मुस्कुराहट बिखेरी.

लेकिन अब वहभी अपनेही बारेमें सोच रहा होगा क्या?...

'' तूम पढाई वैगेरा कब करते हो... नही .. मतलब .. हमेशा तो चॅटींग और इंटरनेटपरही बिझी रहते हो '' अंजली कुछ तो बोलना है और विवेकको थोडा छेडनेके उद्देश्यसे बोली.

विवेक उसके छेडनेका मुड पहचानकर सिर्फ मुस्कुरा दिया.

'' हालहीमें तुम्हारे कंपनीका प्रोग्रेस क्या कहता है ? '' विवेकने पुछा.

'' अच्छा है ... क्यों?... हमारी कंपनी तो दिनबदीन प्रोग्रेस करती जा रही है '' अंजलीने कहा.

'' नही मैने सोचा ... हमेशा चॅटींग और इंटरनेटपर बिझी होनेसे उसका असर कंपनीके कामपर हुवा होगा. ... नही?'' विवेकभी उसे वैसाही नटखट जवाब देते हूए बोला.

वहभी उसके तरफ देखकर सिर्फ हंस दी. वह उसके इस बातोंमें उलझानेके खुबीसे वाकीफ थी और उसे उसका इस बारेमें हमेशा अभिमान रहा करता था.


अंजलीकी गाडी एक आलीशान हॉटेलके सामने - हॉटेल ओबेरायके सामने आकर रुकी. गाडी पार्कींगमें ले जाकर अंजलीने कहा, '' एक मिनीट मै मेरा मोबाईल हॉटेलमें भूल गई हूं ... वह झटसे लेकर आती हूं और फिर हम निकलेंगे... नही तो एक काम कर सकते है ... कुछ ठंडा या गरम हो जाए तो मजा आ जाएगा ... नही?... और फिर निकलेंगे '' अंजली गाडीके निचे उतरते हूए बोली.

अंजली उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और विवेकभी उतरकर उसके साथ हो लिया.


क्रमश:...


Encouraging thoughts -

I haven't failed, I've found 10,000 ways that don't work.

--- Thomas Edison (1847-1931)


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Hindi Novels - Novel- ELove : CH-14 प्रपोज

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Precious thoughts -

Doubt is not a pleasant condition, but certainty is absurd.

Voltaire [Franॉois Marie Arouet] (1694-1778)


अंजली और विवेक दोनो न जाने कितनी देर सिर्फ एक दुसरे की तरफ ताक रहे थे. भलेही वे एकदुसरे को एक महिने से जानते थे लेकिन वे एक दुसरे के सामने पहली बार आ रहे थे. वैसे वे एकदुसरे को सिर्फ जानते ही नही थे तो उन्होने एक दुसरेको अच्छी तरह से समझ लिया था. एकदुसरे के स्वभाव की खुबीया या खामीयां वे भली भांती जानते थे. फिरभी एक दुसरे के सामने आते ही उन्हे क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था. वे इतने चूप थे की मानो दो-दो तिन-तिन पेजेस की मेल करनेवाले वे हमही है क्या? ऐसी उन्हे आशंका आए. आखिर विवेकने ही पहल करते हूए शुरवात की,

'' ट्रॅफिकमें अटक गया था... इसलिए देर हो गई ...''

'' मै तो साडेचार बजेसेही तुम्हारी राह देख रही हूं ..'' अंजलीने कहा.

'' लेकिन तूमने तो पांच का वक्त दिया था. '' विवेकने कहा.

सिर्फ शुरु करनेकी ही देरी थी, अब वे आपस में अच्छे खासे घुल मिलकर बाते करने लगे, मानो इंटरनेट पर चॅटींग कर रहे हो. बाते करते करते वे धीरे धीरे बीचके रेतपर समुंदरके किनारे किनारे चलने लगे. चलते चलते कब उनके हाथ एकदुसरे में गुथ गए, उन्हे पताही नही चला. न जाने कितनी देर तक वे एक दुसरेके हाथ पकडकर बीचपर घुम रहे थे.

सुर्यास्त हो चुका था और अब अंधेराभी छाने लगा था. बिचमेंही अचानक रुककर, गंभीर होकर विवेकने कहा,

'' अंजली... एक बात पुछू ?''

उसने आखोंसेही मानो हा कह दिया.

'' मुझसे शादी करोगी ?'' उसने सिधे सिधे पुछा.

उसके इस अनपेक्षित सवालसे वह एक पल के लिए गडबडासी गई. अपने गडबडाए हालातसे संभलकर उसने कुछ ना बोलते हूए अपनी गर्दन निचे झूकाई.

विवेकका दिल अब जोरजोरसे धडकने लगा था.

मैने बडा ढांढस कर यह सवाल तो पुछा....

लेकिन वह 'हां' कहेगी या 'नही' ?...

वह उसके जवाबकी प्रतिक्षा करने लगा.

मैने यह सवाल पुछनेमें कुछ जल्दी तो नही कर दी ?...

उसने अगर 'नही' कहा तो ?...

उसके जहनमें अलग अलग आशंकाएं आने लगी.

थोडी देरसे वह बोली,

'' चलो हमें निकलना चाहिए ..''

उसने बोलने के लिए मुंह खोला तब उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा था.

लेकिन यह क्या ... वह उसके सवालके जवाबसे बच रही थी....

लेकिन वह एक पीएचडी का छात्र था. किसी भी सवाल के जवाब का पिछा करना उसके खुनमें ही भिना हूवा था.

'' .. तूमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया ..'' उसने उसे टोका.

'' चलो मै तुम्हे छोड आती हूं '' वह फिर से उसके सवाल के जवाब से बचते हूए बोली.

लेकिन वहभी कुछ कम नही था.

'' अभी तक तूमने मेरे सवालका जवाब नही दिया ''

वह शर्मके मारे चूर चूर हो रही थी. उसकी गर्दन झूकी हूई थी और उसका गोरा चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था. वह अपनी भावनाए छुपानेके लिए पैर के अंगुठेसे जमीन कुरेदने लगी.

'' मैने थोडी ना कहा है '' वह किसी तरह, अभीभी अपनी गर्दन निची रखते हूए बोली.

अपने मुंहसे वह शब्द बाहर पडे इसका उसे खुदको ही आश्चर्य लग रहा था. विवेक का अब तक मायूस हुवा चेहरा एकदम से खुशीके मारे खिल उठा. उसे इतनी खुशी हुई थी की वह उसे कैसे व्यक्त करे कुछ समझ नही पा रहा था. उसने अपने आपको ना रोक पाकर उसे अपने बाहोंमें कसकर भरकर उपर उठा लिया.


क्रमश:...


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Doubt is not a pleasant condition, but certainty is absurd.

Voltaire [Franॉois Marie Arouet] (1694-1778)


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About Hindi

Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.