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Hindi literature - Novel - ELove : CH-13 वर्सोवा बीच

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Valuable thoughts -

Difference between pain and suffering, Pain is unavoidable but to suffer or not to suffer from it is up to you.

--- Sri Sri Sri Ravi Shankar


अंजली वर्सोवा बीचपर आकर विवेककी राह देखने लगी. उसने फिरसे एकबार अपनी घडीकी तरफ देखा. विवेकके आनेको अभी वक्त था. इसलिए उसने समुंदरके किनारे खडे होकर दुरतक अपनी नजरे दौडाई. नजर दौडाते हूए उसके विचार जा चक्र भूतकालमें चला गया. उसके दिलमें अब उसकी बचपनकी यादे आने लगी...


वर्सोवा बीच यह अंजलीका मुंबईमें स्थित पसंदीदा स्थान था. बचपनमें वह उसके मां बापके साथ यहां अक्सर आया करती थी. उसे उसके मां बाप की आज बहुत याद आ रही थी. भलेही आज वह समुंदर का किनारा इतना साफ सुधरा नही था लेकिन उसके बचपनमें वह बहुत साफ सुधरा रहा करता था. सामने समुंदरके लहरोंका आवाज उसके दिलमें एक अजीबसी कसक पैदा कर रहा था.

उसने अपने कलाईपर बंधे घडीकी तरफ फिरसे देखा. विवेकको उसने शामके पांचका वक्त दिया था.

पांच तो कबके बज चूके थे ... फिर वह अबतक कैसे नही पहूंचा ?...

उसके जहनमें एक सवाल उठा ...

कही ट्रॅफिकमें तो नही फंस गया? ...

मुंबईकी ट्रॅफिक में कब कोई और कहां फंस जाएं कुछ कहा नही जा सकता....

उसने लंबी आह भरते हुए फिरसे चारों ओर अपनी नजरे दौडाई.

सामने किनारेपर एक लडका समुंदरके किनारे रेतके साथ खेल रहा था. वह देखकर उसके विचार फिरसे भूतकालमें चले गए और फिर एक बार उसकी बचपनकी यादोंमे डूब गए.

वह तब लगभग 12-13 सालकी होगी जब वह अपने मां और पिताके साथ इसी बीचपर आई थी. वह लडका जहां खेल रहा था, लगभग वही कही रेतका किला बना रहे थे. तभी उसके पिताने कहा था,

'' देखो अंजली उधर तो देखो...''

समुंदर के किनारे एक लडका कुछ चिज समुंदरके अंदर दुरतक फेंकनेका जीतोड प्रयास कर रहा था. वह लेकिन समुंदरकी लहरे उस चिजको फिरसे किनारेपर वापस लाती थी. वह लडका बार बार उस चिजको समुंदरमें बहुत दुरतक फेकनेकेका प्रयास करता था और बार बार वह लहरें उस चिजको किनारेपर लाकर छोडती थी.

फिर उसके पिताजीने अंजलीसे कहा -

'' देखो अंजली वह लडका देखो ... वह चिज वह समुंदरमें फेकनेकी कोशीश कर रहा है और वह वस्तू बार बार किनारेपर वापस आ रही है... अपने जिवनमेंभी दु:ख और सुखका ऐसेही होता है... आदमी जैसे जैसे अपने जिवनमें आए दुखको दुर करनेका प्रयास करता है... उस वक्त के लिए लगता है की दुख चला गया है और वह फिरसे वापस कभी नही आएगा... लेकिन दुखका उस चिज जैसाही रहता है ... जितना तुम उसे दुर धकेलनेकी कोशीश करो वह फिरसे उतनेही जोरसे वापस आता है... अब देखो वह लडका थोडी देर बाद अपने खेलनेमें व्यस्त हो जाएगा... और वह उस चिजको पुरी तरहसे भूल जाएगा... फिर जब उसे उस चिजकी याद आएगी... वह चिज किनारेपर ढूंढकरभी नही मिलेगी... वैसेही आदमीने अगर दुखको जादा महत्व ना देते हूए ... सुख और दूखका एकही अंदाजसे सामना किया तो उसे दुखसे तकलिफ नही होगी... ...देअर विल बी पेन बट टू सफर ऑर नॉट टू सफर वील बी अप टू यू!''

उसे याद आ रहा था की उसके पिता कैसे उसे छोटी छोटी बातोंसे बहुत कुछ सिखकी बाते कह जाते थे.

जब अंजली अपनी पुरानी यादोंसे बाहर आ गई, उसके सामने विवेक खडा था. उंचा, गठीला शरीर, चेहरेपर हमेशा मुस्कान और उसकी हर एक हरकतसे दिखता उसका उत्साह. उसने देखे उसके फोटोसे वह बहुत अलग और मोहक लग रहा था. वे एकदुसरेसे पहली बारही मिल रहे थे इसलिए दोनोंके चेहरे खुशीसे दमक उठे थे. दोनों एकदुसरे की तरफ सिर्फ एकटक देखने लगे.


क्रमश:...


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--- Sri Sri Sri Ravi Shankar


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Hindi Books Library - Novel - E Love : CH 12 हॉटेल ओबेराय

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Proverb from Romania and Russia

The person who has no opinion will seldom be wrong.


विवेक सायबर कॅफेमें अपने कॉम्प्यूटरपर बैठा था. फटाफट हाथकी सफाई किए जैसे उसने गुगल मेल खोलतेही उसे अंजलीकी मेल आई हूई दिखाई दी. उसका चेहरा खुशीसे दमकने लगा. उसने एक पलभी ना गवांते हूए झटसे डबल क्लीक करते हूए वह मेल खोली और उसे पढने लगा -

'' विवेक ... 25 को सुबह बारा बजे मै एक मिटींगके सिलसिलेमें मुंबई आ रही हूं ... 12.30 बजे तक हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी... और फिर फ्रेश वगैरे होकर 1.00 बजे मिटींग अटेंड करुंगी.... मिटींग 3 से 4 बजेतक खत्म हो जाएगी ... तुम मुझे बराबर 5.00 बजे वर्सोवा बिचपर मिलना ... बाय फॉर नॉऊ... टेक केअर''

विवेकने मेल पढी और खुशीके मारे खडा होकर '' यस्स...'' करके चिल्लाया.

सायबर कॅफेमें बैठे बाकी लोग क्या होगया करके उसकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. जब उसने होशमें आकर बाकी लोगोंको अपनी तरफ आश्चर्यसे ताकते पाया वह शर्माकर निचे बैठ गया.

वह फिरसे अपने रिसर्चके सिलसिलेमें गुगल सर्च ईंजीनपर जानकारी ढुंढने लगा. लेकिन उसका ध्यान किसी चिजमें नही लग रहा था. कब एक बार वह दिन आता है , कब अंजली मुंबइको आती है और कब उसे वह वर्सोवा बिचपर मिलता है ऐसा उसे हो गया था.

' वर्सोवा बिच' दिमागमें आगया लेकिन उस बिचकी तस्वीर उसके जहनमें नही आ रही थी. वर्सोवा बिचका नाम उसने सुना था लेकिन वह कभी वहां नही गया था. वैसे वह मुंबईमें रहकर पिएचडी कर तो रहा था लेकिन वह जादातर कभी घुमता नही था. मुंबईमें वह वैसे पहले पहले काफी घुमा था. लेकिन वर्सोवा बिचपर कभी नही गया था. अब यहां सायबर कॅफेमें बैठे बैठे क्या करेंगे यह सोचकर उसने गुगल सर्च ओपन किया और उसपर 'वर्सोवा बिच' सर्च स्ट्रींग दिया. इंटरनेटपर काफी जानकारी फोटोज और जानेके रास्ते मॅप्स अवतरीत हूए . उसने वह जानकारी पढकर जानेका रास्ता तय किया. अब और क्या करना चाहिए ? उसका दिमाग सुन्न हो गया था. चलो उसने भेजी हूई पुरानी मेल्स पढते है और उसने भेजे हूए फोटोज देखते है ऐसा सोचकर वह एक एक कर उसकी पुरानी मेल्स खोलने लगा. मेल्सकी तारीखसे उसके खयालमें आ गया की उनका यह 'सिलसिला' वैसे जादा पुराना नही था. आज लगभग 1 महिना हो गया था जब वह पहली बार उसे चॅटींगपर मिल गई थी. लेकिन उसे उनकी पहचान कैसे कितनी पुरानी लग रही थी. उन्होने एकदुसरेको भेजे मेल्स और फोटोजसे वैसे उन्हे एक दुसरेको जाननेका मौका मिला था और एक दुसरेके जहनमें उन्होने एकदुसरेकी एक तस्वीर बना रखी थी. वैसे उन्होने एकदुसरेके स्वभावकाभी एक अंदाजा लगाकर अपने अपने मनमें बसाया था.

' वह अपने कल्पनानूसारही होगी की नही ?' उसके दिमागमें एक प्रश्न उपस्थित हुवा.

या मिलनेके बाद मैने सोचे इसके विपरीत कोई अनजान... कोई कभी ना सोची होगी ऐसी एक व्यक्ती अपने सामने खडी हो जाएगी...

' चलो आमने सामने मिलनेके बाद कमसे कम यह सब शंकाए मिट जाएगी ' उसने उसका फोटो अल्बम देखते हूए सोचा.

अचानक उसे उसके पिछे कोई खडा है ऐसा अहसास हो गया. उसने पलटकर देखा तो जॉनी एक नटखट मुस्कुराहट धारण करते हूए उसकी तरफ देख रहा था.

'' साले बस बात यहीतक पहूंची है तो यह हाल है ... तुझे आजुबाजुकाभी कुछ दिखता नही... शादी होनेके बाद पता नही क्या होगा?'' जॉनीने उसे छेडते हूए कहा.

'' अरे... तुम कब आए ?'' विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छुपाते हूए बोला.

'' कमसे कम पुरा आधा घंटा हो गया होगा... ऐसा लगता है शादी होनेके बाद तु हमें जरुर भुल जाएगा '' जॉनी फिरसे उसे छेडते हूए बोला.

'' अरे नही यार... ऐसा कैसे होगा ?... कमसे कम तुम्हे मै कैसे भूल पाऊंगा ?'' विवेक उसके सामने आए हूए तोंदमें मुक्का मारनेका अविर्भाव करते हूए बोला.


क्रमश:...


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Hindi Library - Novel - E Love : CH-11 : मिटींग

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A cynic is a man who knows the price of everything, and the value of nothing.

---Oscar Wilde


दिनबदीन अंजली और विवेकका चॅटींग, मेल करना बढताही जा रहा था. मेलकी लंबाई चौडाई बढ रही थी. एकदुसरेको फोटो भेजना, जोक्स भेजना, पझल्स भेजना ... मेल भेजनेके न जाने कितने बहाने उनके पास थे. धीरे धीरे अंजली को अहसास होने लगा था की वह उससे प्यार करने लगी है. लेकिन प्यार का इजहार उसने विवेक के पास या विवेक ने अंजलीके पास कभी नही किया था. उनके हर मेलके साथ... मेल मे लिखे हर वाक्य के साथ... उनके हर फोटो के साथ... उनके व्यक्तीत्व का एक एक पहेलू उन्हे पता चल रहा था. और उतनी ही वह उसमें डूबती जा रही थी. अंजलीने भी अपने आपको कभी रोका नही. या यू कहीए खुद को रोकने से खुदको उसके प्यारमें पुरी तरह डूबनेमें ही उसे आनंद मिल रहा हो. लेकिन प्यारके इजहार के बारे में वह बहूत फूंक फूंककर अपने कदम आगे बढा रही थी. उसके पास बहाना था की उसने अब तक उसे आमने सामने देखा नही था. वैसे उसके प्रेम का अहसास उसे नही था ऐसे नही. लेकिन विवेक भी प्यारके इजहारके बारेमें शायद उतनाही खबरदारी बरत रहा था. शायद उसने भी उसे अबतक आमने सामने न देखनेके कारण. वह मिलनेके बाद मुकर तो नही जाएगा? इसके बारेमें वह एकदम बेफिक्र थी. क्यो की विश्वामित्रको भी ललचाए ऐसा उसका सौंदर्य था.

अंजली अपने कॉम्प्यूटरपर चाटींग कर रही थी और उसके टेबलके सामने कुर्सीपर शरवरी बैठी हूई थी. कॉम्प्यूटरपर आई एक मेल पढते हूए अंजली बोली,

'' शरवरी देख तो विवेकने मेलपर क्या भेजा है? ''

शरवरी कुर्सीसे उठकर अंजलीके पिछे जाकर खडी होगई और मॉनिटरकी तरफ ध्यान देकर देखने लगी. इन दिनो वैसे विवेक और अंजलीका कुछ ना कुछ आदान प्रदान चलता ही रहता था. और शरवरीको भी उनका प्रेमभरा आदान प्रदान देखने में या पढनेमें बडा मजा आता था. उसने मॉनीटरपर देखा की एक छोटा चायनीज बच्चा बडे मजेदार तरीकेसे डांस कर रहा था. डांस करते हूए वह बच्चा एकदमसे शूशू करने लगा तो दोनोही बडी जोरसे हंसने लगी.

'' पता नही वह कहां कहांसे यह सब ढूंढता है .'' अंजलीने कहा.

'' सही है... मै तो इंटरनेटपर कितना सर्फ करती हूं लेकिन यह ऍनीनेशन अबतक मेरे देखनेमें कैसे नही आया. '' शरवरीने कहा.

तभी एक बुजुर्ग आदमी दरवाजेपर नॉक कर अंदर आया. वह आदमी आतेही अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान उस आदमीपर केंद्रीत किया. शरवरी वहांसे बाहर चली गई. वह बुजुर्ग आदमी टेबलके सामने कुर्सीपर बैठतेही अंजलीने कहा,

'' बोलो आंनंदजी..''

'' मॅडम ... इंटेल कंपनीने अपने सारे कोलॅबरेटर्स के साथ एक मिटींग रखी है. अभी थोडीही देर पहले उनका फॅक्स आया है.... उन्होने मिटींगका दिन और व्हेन्यू हमें भेजा है ... और साथही मिटींगका अजेंडाभी भेजा है. ...'' आनंदजीने जानकारी दी.

'' कहां रखी है मिटींग ?'' अंजलीने पुछा.

'' मुंबई ... 25 तारखको ... यानीकी .. इस सोमवारको '' आनंदजीने कॅलेडरकी तरफ देखते हूए कहा.

अंजलीभी कॅलेंडरकी तरफ देखते हूए कुछ सोचते हूए बोली,

'' ठिक है कन्फर्मेशन फॅक्स भेज दो ... और मोनाको मेरे सारे फ्लाईट और होटल बुकींग डिटेल्स दे दो''

'' ठिक है मॅडम'' आनंदजी उठकर खडे होते हूए बोले.

जैसे आनंदजी वहांसे चले गए वैसे अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान कॉम्प्यूटरपर केंद्रीत कर दिया. उसके चेहरेपर खुशी समाए नही समा रही थी. झटसे उसने मेल प्रोग्रॅम खोला और जल्दी जल्दी वह मेल टाईप करने लगी -

'' विवेक ... ऐसा लगता है की जल्दीही अपने नसिबमें मिलना लिखा है ...पुछो कैसे? लेकिन मै अभी नही बताऊंगी. क्योंकी कुछ तो क्लायमॅक्स रहना चाहिए ना ? अगले मेलमे सारे डिटेल्स भेजूंगी ... बाय फॉर नाऊ... टेक केअर .. ---अंजली...''

अंजलीने फटाफट कॉम्प्यूटरके दो चार बटन्स दबाकर आखिर ऐंन्टर दबाया. कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मेसेज आ गया - 'मेल सेन्ट'


क्रमश:..


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Hindi Books - Novel - CH-10 E love स्माईल प्लीज

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विवेक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ पढ रहा था. तभी उसका दोस्त धीरेसे, कोई आवाज ना हो इसका ध्यान रखते हूए, उसके पिछे आकर खडा हो गया. काफी समय तक जॉनी विवेकका क्या चल रहा है यह समझनेकी कोशीश करते रहा.

'' क्या गुरु... कहां तक पहूंच गई है तुम्हारी प्रेम कहानी ? '' जॉनीने एकदमसे उसके कंधे झंझोरते हूए सवाल पुछा.

विवेक तो एकदम चौंक गया और हडबडाहटमें मॉनीटरपर दिख रही विंडोज मिनीमाईझ करने लगा.

जोरसे ठहाका लगाते हूए जॉनीने कहा , '' छुपाकर कोई फायदा नही ... मै सबकुछ पढ चूका हूं ''.

विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छिपानेका प्रयास करते हूए फिरसे मॉनिटरपर सारी विंडोज मॅक्सीमाईज करते हूए बोला, '' देख तो .. उसने मेलके साथ क्या अटॅचमेंट भेजी है ''

'' मतलब आग बराबर दोनो तरफ लगी हूई है .... वैसे उस चिडीयाका कुछ नाम तो होगा... जिसने हमारे विवेक का दिल उडाया है'' जॉनीने पुछा.

'' अंजली'' विवेकका चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था.

'' देख देख कितना शर्मा रहा है '' जॉनी उसे छेडते हूए बोला.

'' देखूतो ... क्या भेजा है उसने ?...'' जॉनीने उसे आगे पुछा.

जॉनी बगलमें रखे स्टूलपर बैठकर पढने लगा तो विवेक उसे अंजलीने अटॅच कर भेजे उस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमके बारेमें जानकारी देने लगा -

'' यह एक जॅपनीज सॉफ्टवेअर इंजीनिअरने लिखा हुवा सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम है ... इस प्रोग्रॅमके लिए रिफ्लेक्शन टेक्नॉलॉजीजका इस्तेमाल किया गया है. जब हम कॉम्प्यूटरके मॉनिटरके सामने बैठे होते है तब जो रोशनी अपने चेहरेपर पडती है वह अलग अलग रंगोमें विभाजीत होकर मॉनिटरपर परावर्तीत होती है. इस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमद्वारा परावर्तीत हूए रोशनीकी तिव्रता एकत्रीत कर उसे इस टेक्नॉलॉजीद्वारा फोटोग्राफमें परिवर्तीत किया जा सकता है. मतलब अगर आप इस प्रोग्रॅमको रन करोगे तो मॉनिटरपर पडे परिवर्तनके तिव्रताको एकत्रित कर यह प्रोग्रॅम आपका फोटो बना सकता है. लेकिन फोटो निकालते वक्त इतना ध्यान रखना पडता है की आप मॉनिटरके एकदम सामने, समांतर और समानांतर बैठे हूए है. मॉनीटर और आपके चेहरेमें अगर कोई तिरछा कोण होगा तो फोटो ठिकसे नही आएगा.''

'' मतलब यह सॉफ्टवेअर फोटो निकालता है ?'' जॉनीने पुछा.

'' हां ... यह देखो अभी अभी थोडी देर पहले मैने मेरा फोटो निकाला हूवा है '' विवेकने कॉम्प्यूटरपर उसका अपना फोटो खोलकर दिखाया.

'' अरे वा... एकदम बढीया ... अगर ऐसा है तो हमे कॅमेरा खरीदनेकी जरुरतही नही पडेगी. '' जॉनीने खुशीके मारे कहा.

'' वही तो ..''

'' रुको ... मुझे जरा देखने दो ... मै मेरा फोटो निकालता हूं ..'' जॉनी मॉनीटरके सामनेसे विवेकको उठाते हूए खुद उस स्टूलपर बैठते हूए बोला.

जॉनीने स्टूलपर बैठकर माऊस कर्सर मॉनीटरपर इधर उधर घुमाते हूए पुछा, '' हां अब क्या करना है. ?''

'' कुछ नही ... सिर्फ वह स्नॅपका बटन दबावो ... लेकिन रुको .. पहले सिधे ठिकसे बैठो...'' विवेकने कहा.

जॉनी सिधा बैठकर माऊसका कर्सर 'स्नॅप' बटनके पास ले जाकर बटन दबाने लगा.

'' स्माईल प्लीज '' विवेकने उसे टोका.

जॉनीने अपने चेहरेपर जितनी हो सकती है उतनी हंसी लानेकी कोशीश की.

'' रेडी ... नाऊ प्रेस द बटन'' विवेक

जॉनीने 'स्नॅप' बटनपर माऊस क्लीक किया. मॉनीटरवर एक-दो पलके लिए निला 'प्रोसेसींग' बार आगे बढता हूवा दिखाई दिया और फिर मॉनीटरपर फोटो दिखाई देने लगा. जैसेही मॉनीटरवर फोटो आगया विवेक जोर जोरसे हंसने लगा और जॉनीका चेहरा तो देखने लायक हो गया था. मॉनीटरपर एक हंसते हूए बंदरका फोटो आ गया था.


क्रमश:...


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Hindi Novels - Novel - E Love : CH- 9 हटके

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People generally does the same things, but their approaches doing those things seperates them out from the rest.

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अंजलीने कॉम्प्यूटरपर आया हुवा विवेकका चॅटींग मेसेज खोला तो सही, लेकिन खोलते वक्त उसका दिल जोर जोरसे धडक रहा था. उसे अपने इस बेचैन स्थितीपर खुदही आश्चर्य हो रहा था. उसने झटसे उसने भेजा हुवा मेसेज पढा -

'' हाय गुड मॉर्निंग ... हाऊ आर यू?'' उसके मेसेज विंडोमें लिखा था.

वह कही उसमें फसती तो नही जा रही है - इस बातकी उसने तस्सल्ली करते हूए बडी सावधानीसे जवाब टाईप किया -

'' फाईन...''

और अपने मनकी अधिरता वह भांप ना पाए इसलिए मनही मन सौ तक गिना और फिर काफी समय हो गया है इसकी तसल्ली करते हूए 'सेंड' बटनपर क्लीक किया.

'' कल मै बाहर गया था '' उधरसे तूरंत विवेकका मेसेज आ गया.

' तूम कल चॅटींगपर क्यो नही मिले ?' इस अंजलीके दिमागमें घुम रहे सवालका जवाब देकर उसने मानो उसके दिलका हाल जान लिया था ऐसा उसे लगा.

वह अपने मनको पढ तो नह सकता है? ...

अंजलीके मन मे आया.

'' अच्छा अच्छा '' उसने भी खबरदारी के तौरपर अपनी रुखी रुखी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

'' और कुछ पुछोगी नही ?'' उसने पुछा.

वह उसका मेसेज आनेके बाद जवाब देनेमें जानबुझकर देरी लगा रही थी, लेकिन उसके मेसेजेस तुरंत, मानो मेसेज मिलनेके पहलेही टाईप किए हो ऐसे जल्दी जल्दी आ रहे थे.

'' तूमही पुछो '' उसने रिप्लाय भेजा.

उसे लडकी देखनेके लिए लडका आनेके बाद, एक अलग कमरेमें जाकर जैसे बाते करते है, ऐसा लग रहा था.

'' अरे हां उस दिन मैने तुम्हे ब्लॅंक मेल इसलिए भेजी थी की मुझे तुम्हारी कुछभी जानकारी नही... फिर क्या लिखता ?... लेकिन मेल भेजे बिनाभी रहा नही जा रहा था ... इसलिए भेज दी ब्लॅंक मेल..''

फिर उसनेही पहल करते हूए पुछा, '' अच्छा तुम क्या करती हो? ... मेरा मतलब पढाई या जॉब?''

'' मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है ... और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं '' उसने मेसेज भेजा.

उसे पता था की चॅटींगमें पहलेही खुदकी सच जानकारी देना खतरनाक हो सकता है. फिरभी वह खुदको रोक नही सकी, मानो जानकारी टाइप कर रही उंगलीयोंपर उसका कोई कन्ट्रोल नही रहा था.

"" अरे बापरे!.. '' उधरसे विवेककी प्रतिक्रिया आ गई.

'' तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा ?... नही ... मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. ... '' उसने उसे बडी खबरदारीके साथ सवाल पुछा.

उसने भेजा , '' 23 साल''

'' अरे यह तो मुझे पताही था... मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था.... सच कहूं ? तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो ... तो मेरे सामने एक 45-50 सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी... '' वह अब खुलकर बाते कर रहा था.

वह उसके खुले और मजाकिया अंदाजपर मनही मन मुस्कुरा रही थी. उसने उसके बारेमेंभी इंटरनेटपर सर्च कर जानकारी इकट्ठा की यह जानकर उसके खयालमें आगया था की वह भी उसके बारेमें उतनाही सिरीयस है.

'' तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई ?...'' उसने सवाल किया.

'' मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें ... मेरी असली उम्र डाली हूई है ...'' उसका उधरसे मेसेज आया.

उसके इस जवाबसे उसे अहसास हूवा की वाकई वह बाकी लोगोसे कुछ हटके है.


क्रमश:...


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Cat closes her eyes while drinking milk, because she thinks no body would be able to watch her by closing her own eyes.

-- Anonymous


अंजलीने आज सुबह आए बराबर कुर्सीपर बैठकर कॉम्प्यूटर शुरु किया. कॉम्प्यूटर बुट होनेके बाद उसने चॅटींग विंडो ओपन किया और किसीका कोई ऑफलाईन मेसेज है क्या देखने लगी. किसीका भी ऑफलाईन मेसेज नही था. उसके चेहरेपर मायूसी छा गई लेकिन वह छिपाते हूए वह सामने टेबलपर रखे रिपोर्टस उलट पुलटकर देखने लगी. उसके टेबलके सामने शरवरी बैठी थी. वह बडी गौरसे अंजलीकी एक एक हरकत देख रही थी और मुस्कुरा रही थी. रिपोर्ट देखते हूए अंजलीके यह बात ध्यानमें आगई तो झटसे उसने शरवरीकी तरफ एक कटाक्ष डाला.

'' क्या हूवा ... क्यो मुस्कुरा रही हो ?'' अंजलीने उसे पुछा.

शरवरीभी बडी चतूराईसे अपने चेहरेके भाव छिपाकर गंभीर मुद्रा धारण करती हूई बोली,

'' कहां... मै कहा मुस्कुरा रही हूं ?... ''

तभी अंजलीके कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने झटसे मुडकर अपने कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ देखा और फिरसे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त हो गई.

'' दो दिनसे मै देख रही हूं की जबभी चाटींगका बझर बजता है तुम सारे कामधाम छोडकर मॉनीटरकी तरफ देखती हो ... क्या किसीके मेसेजकी या मेलकी राह देख रही हो ? '' शरवरीने पुछा.

'' नहीतो ?'' अंजलीने कहा और फिरसे अपने टेबलपर रखे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त होगई, या कमसे कम वैसे जतानेकी कोशीश करने लगी. कॉम्प्यूटरका बझर फिरसे बजा. अंजलीने फिरसे छटसे मॉनीटरकी तरफ देखा और इस बार वह अपनी पहिएवाली कुर्सी झटकेसे घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कर बैठ गई.

'' यह जरुर विवेकका मेसेज है '' शरवरी फिरसे उसे छेडते हूए बोली.

'' किस विवेकका ?'' अंजलीभी कुछ समझी नही ऐसा जताते हूए बोली.

'' किस विवेकका? ... वही जो उस दिन चॅटींगपर मिला था '' शरवरीभी उसे छोडनेके मुडमें नही थी.

'' यह तुम इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो ?'' अंजलीने कॉम्प्यूटरपर काम करते हूए पुछा.

'' मॅडम आपके चेहरेकी लाली सब कुछ बता रही है '' शरवरी मुस्कुराते हूए बोली.

पहले तो अंजलीके चेहरेपर चोरी पकडने जैसे झेंपभरे भाव आ गए. लेकिन झटसे अपने आपको संभालते हूए वह शरवरीपर गुस्सा होते हूए बोली.

'' तूम जरा मेरा पिछा छोडोगी... कबसे मै देख रही हो मेरे पिछेही पडी हो... उधर बाहर देखो ऑफिसके कितने काम पेंडीग पडे हूए है.... वह जरा देखके आओ.. जाओ ..'' अंजलीने कहा.

अंजलीका इशारा समझकर शरवरी वहांसे उठ गई और मुस्कुराते हूए वहांसे चली गई.

शरवरी जानेके बाद अंजलीने झटसे कॉम्प्यूटर पर अभी अभी आया हूवा विवेकका मेसेज खोला.


क्रमश:...


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Sometimes a silence says much more than the words.

-- Anonymous


शरवरी अंजलीके कॅबिनमें कॉम्प्यूटरपर बैठी हूई थी. अंजली उसकी सुबहकी मिटींग निपटाकर उसके कॅबिनमें वापस आ गई. उसने घडी की तरफ देखा. लगभग दोपहरके बारा बज गए थे. कुर्सी पिछे खिंचकर वह अपने कुर्सीपर बैठ गई और कुर्सीपर पिछेकी ओर झुलते हूए अपनी थकावट दूर करनेका प्रयास करने लगी. शरवरीने एक बार अंजलीकी तरफ देखा और वह फिरसे अपने कॉप्म्यूटरके काममें व्यस्त हो गई.

''किसीकी कोई खास मेल ?'' अंजलीने शरवरीकी तरफ ना देखते हूए ही पुछा.

'' नही .. कोई खास नही... लेकिन एक उस 'टॉमबॉय' की मेल थी. '' शरवरीने कहा.

'' टॉमबॉय ... कुछ लोग बहुतही चिपकू होते है ... नही?'' अंजलीने कहा.

'' सही है ...'' शरवरीको अंजलीका इशारा समझ गया था.

क्योंकी अंजलीने पहले एकबार उसे उस टॉमबॉयके बारेमें बताया था.

'' और हां ... एक और किसी विवेककी मेल थी '' शरवरीने आगे कहा.

'' विवेक?... हां वही होगा जो कल चॅटींगपर मिला था.... मै बोलती हूं ना उसने क्या लिखा होगा.... तुम्हारी उम्र क्या है ?... तुम्हारा ऍड्रेस क्या है ?... मेरी उम्र फलां फलां है ... मेरा ऍड्रेस फलां फलां ... और मै फलां फलां काम करता हू... और धीरे धीरे वह अपने असली जातपर आएगा... इन आदमीयोंकी जातही ऐसी होती है ... लंपट ..बदमाश आणि चिपकू...''

'' तूम बोल रही हो वैसा उसने कुछभी लिखा नही है ...'' शरवरी बिचमेंही उसे टोकते हूए बोली.

'' नही?... तो फिर किसी कंपनीके प्रॉडक्टकी सिफारीश की होगी उसने... मतलब वह प्राडक्ट खरीद हम लेंगे और वह उसका फौकटमें कमिशन खाएगा'' अंजलीने कहा.

'' नही वैसाभी उसने कुछ लिखा नही है .'' शरवरीने कहा.

'' फिर ?... फिर उसने क्या लिखा है ?'' अंजलीने उत्सुकतावश गर्दन घुमाकर शरवरीके तरफ देखते हूए पुछा.

'' उसने मेलमें कुछभी लिखा नही है .. उसने ब्लॅंक मेल भेजी है और निचे सिर्फ उसका नाम 'विवेक' ऐसा लिखा हुवा है '' शरवरीने कहा.

अंजली एकदम उठकर सिधी बैठ गई.

'' देखूं तो ..'' अंजली शरवरीकी तरफ मुडकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखते हूए बोली.

शरवरीने अंजलीके मेलबॉक्ससे विवेककी मेल क्लीक कर खोली. सचमुछ वह मेल ब्लॅंक थी.

'' अंजली तूम कुछभी कहो ... लडकेमें 'स्टाईल' है ... ऍटलिस्ट इतना पक्का है की वह बाकी लडकोसे जरा हटके है ...'' शरवरी अंजलीके दिलको टटोलनेकी कोशीश करते हूए बोली.

'' तूम जरा चूप बैठोगी ... और क्या लडका ... लडका लगा रखा है ... तुम्हे वह कौन ? कहाका? .. उसकी उम्र क्या है ?... कुछ पता भी है ?... वह कोई रंगीन मिजाजवाला, कोई खुसट बुढाभी हो सकता है ... तुम्हे पता हैही आजकल लोग इंटरनेटपर कैसे पर्सनलायझेशन करते है ...''

'' ... हां तुम सही कहती हो ... लेकिन चिंता मत करो ... ये लो मै अभी उसकी सायबर तहकिकात करती हूं'' शरवरी फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डकी कुछ बटन्स दबाती हुई बोली.

थोडीही देरमें कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मानो एक रिपोर्ट आ गया.

'' यहां तो उसका नाम सिर्फ विवेक ऐसा लिखा हुवा है ... सरनेम लिखा नही है ... मुंबईका रहनेवाला है और पिएच डी कर रहा है ... उम्र है ...'' शरवरीने मानो किसी बातका क्लायमॅक्स खोलना हो ऐसा एक पॉज लिया.

अंजलीकीभी अब जिज्ञासा जागृत हुई थी और वह शरवरी उसकी उम्र क्या बताती है इसकी राह देखने लगी.

'' पिएचडी? ... मतलब जरुर कोई बुढ्ढा खुसट होना चाहिए ... मैने कहा था ना?''

'' और उसकी उम्र है 25 साल ...'' शरवरीने मानो क्लायमॅक्स खोला था.

'' तो नूर ए जन्नत मिस अंजली अब क्या किया जाए? शरवरी उसे छेडते हूए बोली.

अंजलीभी प्रयत्नपुर्वक आपना चेहरा भावनाविरहीत रखते हूए बोली, '' तो फिर? ... हमें उसका क्या करना है ?''

'' देने वाले अपना पैगाम देकर चले गए

करने वाले तो अपना इशारा कर चले गए

उधर बडा बुरा हाल है दिलके गलियारोंका

अब उन्हे इंतजार है बस आपके इशारोंका ''

'' वा वा क्या बात है ...'' शरवरी अपनेही शेरकी तारीफ करते हूए बोली, '' अब क्या करना है इस मेलका? ''

'' करना क्या है ... डिलीट कर दो '' अंजलीने कंधे उचकाते हूए बेफिक्र अंदाजमें कहा ... मतलब कमसे कम वैसे जताते हूए कहा.

'' डिलीट... नही इतना बडा सितम मत करो उसपर... एक काम करते है ... कोरे खत का जवाब कोरे खतसेही देते है ...''

शरवरीने फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डके कुछ बटन्स दबाए और उस ब्लॅंक मेलको ब्लॅंक रिप्लाय भेज दिया.


क्रमश:...


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Hindi books - Novel Elove : CH-6 : उस मेलका क्या हूवा ?

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With efforts we can get oil out of sand.

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सुबह सुबह रास्तेपर बॅग हाथमें लेकर विवेककी कही जानेकी गडबड चल रही थी.

पिछेसे दौडते हूए आकर उसके दोस्त जॉनीने उसे जोरसे आवाज दिया, '' ए सुन गुरु... इतनी सुबह सुबह कहां जा रहा है''

विवेकने मुडकर देखा और उसे अनदेखा करते हूए फिरसे पहले जैसे जल्दी जल्दी सामने चलने लगा.

'' किसी लडकी के साथ भाग तो नही जा रहे हो ?...'' जॉनीने वह रुक नही रहा है और उसकी गडबड देखते हूए पुछा.

जॉनी अबभी उसके पिछेसे दौडते हूए उसके पास पहूंचनेकी कोशीश कर रहा था.

'' क्या सरदर्द है ... जरा दो दिन बाहर जा रहा हूं ... उसका भी इतना ढींढोरा... '' विवेक बडबड करते हूए सामने चल रहा था.

'' दो दिन बाहर जा रहा हूं ... उतनाही तूमसे छूटकारा मिलेगा'' विवेकने चलते हूए जोरसे जॉनीको ताना मारते हूए कहा.

'' थोडी देर रुको तो सही ... तुमसे एक अर्जंट बात पुछनी थी. ...'' जॉनीने कहा.

विवेक रुक गया और जॉनी दौडते हूए आकर उसके पास पहूंच गया.

'' बोलो ... क्या पुछना है ? ... जल्दी पुछो ... नही तो उधर मेरी बस छूट जाएगी '' विवेक बुरासा मुंह बनाकर बोला.

'' क्या हूवा फिर कल ?'' जॉनीने पुछा.

'' किस बातका ?'' विवेकने प्रतिप्रश्न किया.

'' वही उस मेलका? ... कल मेल भेजी की नही ? '' जॉनीने उसे छेडते हूए उसके गलेमें हाथ डालकर पुछा.

'' अजीब बेवकुफ हो तूम ... किस वक्त किस बातका महत्व है इसका कोई तुम्हे सरोकार नही होता... उधर मेरी बस लेट हो रही है और तुम्हे उस मेलकी पडी है ...'' विवेक झल्लाते हूए उसका हाथ अपने कंधेसे झटकते हूए बोला.

विवेक अब फिरसे तेजीसे आगे बढने लगा.

'' क्या बात करते हो यार तूम ?... बससे कभीभी मेल महत्वपुर्ण होगी ... अब मुझे बता.. हावडा मेल, राजधानी मेल.... ये सारी मेल बडी की वह तुम्हारी टपरी बस?'' जॉनी अबभी उसके पिछे पिछे जाते हूए उसे छेडते हूए बोला.

विवेक समझ चूका था की अब जॉनीसे बात करनेमें कोई मतलब नही था. वह अपने बडे बडे कदम बढाते हूए आगे चलने लगा. और जॉनीभी बकबक करते हूए और उसे छेडते हूए उसके साथ साथ चलने लगा.


क्रमश:...


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Hindi sahitya - Novel : Elove CH -5 मिटींग

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Whatever hard the rock be, it is going to break one day, if you are going to hit it consistently.

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सुबहके लगभग दस बजे होंगे. अंजली जल्दी जल्दी अपने कॅबिनमें घुस गई. जब वह कॅबिनमें आगई थी तब शरवरीकी कॅबिनकी चिजे ठिक लगाना चल रहा था. अंजलीके अनुपस्थितीमें उसके कॅबिनकी पुरी जिम्मेदारी शरवरीकीही रहती थी.

अंजलीके कॅबिनमें प्रवेश करतेही शरवरीने अदबसे खडे रहते हूए उसे विश किया, '' गुडमॉर्निंग...''

'मॅडम' उसकें मुंहमें आते आते रह गया. अंजली उसे कितनीभी दोस्तकी तरह लगती हो या उससे दोस्तकी तरह व्यवहार करती हो फिरभी शरवरीको कमसे कम उसके कॅबिनमें उससे दोस्तकी तरह बरताव करना बडा कठिण जाता था, और वह भी कभी कभी बाकी लोगोंके सामने.

अंजलीने अंदर आकर उसके पाससे गुजरते हूए उसके पिठपर थपथपाते हूए कहा, '' हाय''

उसके पिछे पिछे उसका ड्रायव्हर उसकी सुटकेस लेकर अंदर आ गया. जैसेही अंजली अपने कुर्सीपर बैठ गई, ड्रायव्हरने सुटकेस उसके बगलमे रख दी और वर कॅबिनसे निकल गया.

शरवरी अंजलीके आमने सामने कुर्सीपर बैठ गई और उसने उसकी अपॉईंटमेंट्सकी डायरी खोलकर उसके सामने खिसकाई. अंजलीने अपने कॉम्पूटरका स्विच ऑन किया और वह डायरीमें लिखी अपॉईंटमेट्स पढने लगी.

'' सुबह आए बराबर मिटींग...'' अंजली बुरासा मुंह बनाकर बोली, '' अच्छा इस दोपहरके सेमीनारको मै नही जा पाऊंगी .. क्यों न शर्माजीं को भेज दे?...''

'' ठिक है '' शरवरी उस अपॉईंटके सामने स्टार मार्क करते हूए बोली.

'' क्या करें इन लोगोंको मुंहपर कुछ बोलभी नही सकते ... और समयके अभावमें सेमीनार को जा भी नही सकते.... सचमुछ किसी कंपनीके हेडका काम कोई मामुली नही होता.''

अंजली अपनी सूटकेस खोलकर उनमेंसे कुछ पेपर्स बाहर निकालने लगी. पेपर निकालते हूए एक पेपरकी तरफ देखकर, वह पेपर बगलमें निकालकर रखते हूए बोली, '' अब यह देखो ... इस कंपनीके टेंडरका काम अब तक पुरा नही हुवा ... यह पेपर जरा उस कुलकर्णीकी तरफ भेज देना ...''

'' कुलकर्णी आज छुट्टीपर है '' शरवरीने कहा.

'' लेकिन मेरे जानकारीके अनुसार उनकी छुट्टी तो कलतक ही थी. ...'' अंजली चिढकर बोली.

'' हां ...लेकिन अभी थोडी देर पहले उनका फोन आया था. ... वे कामपर नही आ सकते यह बोलनेके लिए '' शरवरीने कहा.

'' क्यों नही आ सकते ?'' शरवरीने गुस्सेसे पुछा.

'' मैने पुछा तो उन्होने कुछ ना कहते हूएही फोन रख दिया.

'' यह कुलकर्णी मतलब एक बेहद गैरजिम्मेदाराना आदमी ...'' अंजली चिढकर बोली.

और फिर जो अंजलीकी बडबड शुरु होगई वह रुकनेका नाम नही लेही थी. शरवरीको खुब पता था की जब अंजली ऐसी बडबड करने लगे तो क्या करना चाहिए. कुछ नही, चूपचाप बैठकर सिर्फ उसकी बडबड सुन लेना. बिचमें एकभी लब्ज नही बोलना. अंजलीने ही उसे एक बार बताया था की जब अपना बॉस ऐसा बडबड करने लगे, तो उसकी वह बडबड मतलब एक तरह का स्ट्रेस बाहर निकालने का तरीका होता है. जब उसकी ऐसी बडबड चल रही होती है तब जो सेक्रेटरी उसे और कुछ बोलकर या और कुछ पुछकर उसकी और स्ट्रेस बढाती है उसे मोस्ट अनसक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए. और जो सेक्रेटरी चूपचाप अपने बॉसकी बकबक सुनती है और अपने बॉसको फिर से नॉर्मल होनेकी राह देखती है उसे मोस्ट सक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए.

अंजलीकी बकबक अब बंद होकर वह काफी शांत हो गई थी. वह हाथमें कुछ पेपर्स और फाईल्स लेकर मिटींगको जानेके लिए अपने कुर्सीसे उठ खडी हो गई. शरवरीभी उठ खडी होगई.

बगलमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखते हूए वह शरवरीसे बोली, '' तूम जरा मेरी मेल्स चेक कर लेना ... मै मिटींगको हो आती हूं ...'' और अंजली अपने कॅबिनसे बाहर जाने लगी.

'' पर्सनल मेल्सभी ?'' शरवरीने उसे छेडते हूए मुस्कुराकर मजाकमें कहा.

'' यू नो... देअर इज नथींग पर्सनल... और जोभी है ... तुम्हे सब पता है ही ...'' अंजलीभी उसकी तरफ देखकर, मुस्कुराते हूए बोली और पलटकर जल्दी जल्दी मिटींगको जानेके लिए निकल पडी.


क्रमश:


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Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.