Hindi stories - ELove : ch - 49 हथीयार
Sucess thoughts -
They can because they think they can.
--Virgil
अतूल अब विवेकके एकदम सामने खडा होकर उसकी आखोंमें आखे डालकर देखते हूए बोला,
'' तुम्हे पासवर्डही चाहिए ना ?''
'' हां ... और बहभी डाटा डिलीट होनेके पहले '' विवेक फिरसे चिढकर ताना मारते हूए बोला.
'' अरे हां ... वह डाटा डिलीट होनेके बाद पासवर्डकी क्या जरुरत ?'' अतूल अपने आपसेही जोरसे हंस दिया.
और एकदम अपनी हंसी रोककर बोला, '' लेकिन पहले तुम्हारे पासका हथीयार मेरे हवाले कर दो ''
विवेकने उसकी तरफ चौंककर देखते हूए पुछा, '' हथीयार ?... मेरे पास कोई हथीयार नही .. तुमनेही तो निकलते वक्त मेरी तलाशी ली थी. ''
'' मि. विवेक ... मुझे क्या इतना बेवकुफ समझते हो ?... '' अतूल मोबाईल लगाते हूए बोला. विवेक कुछ नही बोला.
अतूलका मोबाईल लगा था और उधरसे इन्स्पेक्टर मोबाईलपर थे. '' अतूल पासवर्ड क्या है ?'' उन्होने फोन लगतेही पुछा.
'' इन्स्पेक्टर थोडा धीरज रखो ... पहले इधरका एक काम निपट लूं और फिर तुम्हे पासवर्ड बताता हूं '' अतूल फोनपर बोला और उसने चलता हुवा मोबाईलही गाडीके बोनेटपर रख दिया.
'' मैने सुना है की आजकल तुम्हारी पी एच डी चल रही है '' अतूलने विवेकसे पुछा.
फिरभी विवेक कुछ नही बोला.
'' मुझे एक बात नही समझमें आती, इतनी अमीर लडकीको फांसनेके बाद तुम्हे पिएचडीकी क्या जरुरत है ?'' अतूलने आगे पुछा.
विवेक कुछभी बोलनेके लिए तैयार नही था, सच कहे तो वह बोलनेके मन:स्थितीमें नही था.
'' तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?'' अतूलने एकदम गंभिर होते हूए पुछा.
विवेक उसके इस असम्बध्द सवालको कुछ जवाब देना नही चाहता था.
'' तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?'' अतूलने अब कडे स्वरमें पुछा.
विवेकने पहले उसकी आखोंमे देखा. वह इस सवालके बारेमें सिरीयस दिख रहा था.
'' अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स'' विवेकने कंधे उचकाकर जवाब दिया.
'' अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स ... हूं ... तुम्हारे जुते बताओ.. निचेसे '' अतूलने मांग की.
विवेकको उसके सवालका उद्देश अब पता चल चुका था. उसे अबभी उसके पास कोई हथीयार होनेकी आशंका थी. विवेकने अपना दाया जुता वैसेही पैरमें रखते हूए उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहां कुछ होनेके निशान तो नही दिख रहे थे.
'' अब बाया बताओ '' अतूलने फिरसे आदेश दिया.
विवेकने थोडी हिचकिचाहट जताई तो वह चिल्लाया, '' कम ऑन क्वीक''.
विवेकने बाया जुताभी उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहांभी कुछ नही था. लेकिन अब अतूल सोचमें पड गया. उसे विवेकके पास कुछ हथीयार होनेका पुरा विश्वास था.
'' रुको ... हात उपर करो ...'' अतूल उसके पास जाते हूए बोला.
विवेकने दोनो हाथ उपर किए. और अतूल उसके जेबसे एक एक सामान निकालकर बोनेटपर रखने लगा. पहले पॅन्टके जेबसे और फिर शर्टके जेबसे सब सामान निकालकर अतूलने गाडीके बोनेटपर रख दिया.
उस सामानमें कुछ लोहेके छोटे छोटे टूकडे थे. अतूल उन टूकडोंकी तरफ गौरसे देखते हूए बोला, '' यह क्या है ?''
'' कुछ नही .. मेरे रिसर्चका सामान '' विवेकने कहा.
'' अच्छा!'' अतूल अविश्वासके साथ बोला. .
अतूल अब वे सारे टूकडे एक एक करते हूए उलट पुलटकर निहारने लगा. उन सारे टूकडोंमे उसे एक टूकडा थोडा अलग लगा. वह उसने उठाया और वह उसे और गौरसे निहारकर देखने लगा. उस टूकडेके एक तरफ लाल बटन जैसा कुछ तो था. उसकी तरफ विवेकका ध्यान आकर्षीत करते हूए अतूल बोला,
'' यह क्या है ऐसा ?''
विवेक कुछ नही बोला. अतूलने वह टूकडा उलट पुलटकर देखते हूए वह लाल बटन दबाया. और क्या आश्चर्य गाडीके बोनेटपर रखे सब टूकडोंमे अब हरकत दिखने लगी थी. और वे किसी चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपकने लगे. जब सारे टूकडे चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपक गए. उसमेंसे एक बंदूककी तरह वस्तू तैयार हो गई.
'' अच्छा तो यह ऐसा है ?...'' अतूल आश्चर्यसे बोला, "' मेरा अंदेशा कभी गलत नही होता ... मुझे पता था की तुम्हारे पास कोईना कोई हथीयारतो होनाही चाहिए ''
अतूलने वह बंदूक उठाकर उलट पुलटकर देखी.
'' स्मार्ट व्हेरी स्मार्ट... विवेक यू आर जिनियस ... बट ओन्ली इंटॆलेक्चूअली ... नॉट प्रोफेशन्ली'' अतूल अजीब तरहके मुस्कुराहटके साथ बोला.
क्रमश:...
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They can because they think they can.
--Virgil
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The Romantic, suspense online Hindi Novel based on my book 'Cyber Love' |
Wednesday, June 17, 2009
Hindi stories - ELove : ch - 49 हथीयार
Posted by (Author)
Sunil Doiphode
at
4:34 PM
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